बीवी के कहने पर अपनी सासू मां की चूत मारी!

Family Antarvasna Sex Story : क्यों मेरी बीवी ने मुझे अपनी मां की चुदाई के लिए मनाया और मैने सुहागरात में Sasu Maa की चूत फाड़ चुदाई कर के लंड की मलाई खिलाई!


दोस्तो, मैं केशव हूं और मैं एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूं और मुंबई में अपनी पत्नी मिनाक्षी के साथ रहता हूं। हमारी शादी को दो साल हो चुके हैं और हम दोनों एक-दूसरे से बेहद प्यार करते हैं।


मिनाक्षी मेरी जिंदगी का वो हिस्सा है जो मुझे हर सुबह उठने की वजह देती है। वो एक स्कूल में टीचर है, स्कूल में बच्चों को पढ़ाती है, और घर में भी उतनी ही केयरिंग है।


लेकिन ये कहानी मेरी जिंदगी की एक ऐसी घटना की है जो कभी शायद किसी ने सोची भी नहीं थी, ये कुछ महीने पहले की बात है,


जब मिनाक्षी ने मुझे अपनी मां शेफाली के बारे में कुछ ऐसा बताया जो मेरे दिमाग को हिला गया। शेफाली आंटी, यानी मिनाक्षी की मां और मेरी सासू मां, एक विधवा औरत हैं।


 उनके पति की मौत को पांच साल हो चुके हैं। वो 42 साल की हैं, लेकिन दिखने में बिल्कुल 35 की लगती हैं। उनका फिगर इतना कमाल का है के कोई भी मर्द उन्हें देखकर ललचा जाए।


उनके लंबे काले बाल, गोरी रंगत, कसी हुई कमर और वो भरे-भरे स्तन जो साड़ी में से भी झांकते रहते हैं सब मिलकर उन्हें तपस्या भंग करने वाली मेनका का रूप देते है। 


वो पुणे में अकेली रहती हैं, कभी-कभी हमारे पास भी आ जाती हैं। मिनाक्षी उनसे बहुत प्यार करती है, और मैं भी उन्हें मां जैसा सम्मान देता हूं।


लेकिन कभी सोचा नहीं था कि उनकी जिंदगी में कुछ ऐसा छिपा होगा जो उनकी जवानी को प्यासा बना रहा होगा। ये सब कुछ तब शुरू हुआ जब मिनाक्षी की मां हमारे घर आईं।


वो कुछ दिनों के लिए रुकने आई थीं। पहले दो दिन तो सब नॉर्मल चला। हम तीनों साथ खाना खाते, घूमने जाते, हंसते-मजाक करते जैसे एक सुखद परिवार होता है।  ये Family XXX Desi Sex Story आप Garamkahani.com पर पढ़ रहे है।


लेकिन तीसरे दिन रात को मिनाक्षी ने मुझे बेडरूम में बुलाया। हम दोनों बेड पर लेटे थे, लाइट्स डिम थीं। मिनाक्षी ने मेरी छाती पर हाथ रखा और धीरे से बोली, "केशव, मुझे कुछ बात करनी है। बहुत जरूरी है।"


मैंने उसके बालों में उंगलियां फिराईं और कहा, "क्या बात है जान? बोल ना।" वो थोड़ा शर्मा गई, लेकिन फिर खुलकर बोली, "ये मां की बात है। वो अकेली हैं ना, पापा के जाने के बाद से। 


मैंने नोटिस किया है कि वो रातों को सो नहीं पातीं। कभी-कभी रोती हुईं उनकी आवाज़ मुझे सुनाई देती हैं। आज उन्होंने खुद मुझसे कहा कि उनकी जवानी प्यासी हैं! उनकी चूत प्यासी है!


उनकी चूत में वो आग चुदाई की आग है जो बुझ ही नहीं रही है। वो कह रही थीं की बिना किसी पुरुष के स्पर्श के वो खुद को अधूरी महसूस करती हैं। 


सहेलियां तो अपने-अपने हसबैंड्स के साथ खुश हैं, लेकिन वो... वो तो बस चुदाई के बिना तड़फ रही हैं।" मैं उसकी बाते सुनकर चौंक गया मीनाक्षी मेरा लंड सहलाने लगी।


"क्या? शेफाली आंटी ने तुमसे ये कहा? लेकिन वो तो इतनी खुश लगती हैं।" मैने हैरानी से बोला। मिनाक्षी ने हां में सिर हिलाया।


"हां केशव, वो मजबूत हैं सिर्फ बाहर से, लेकिन अंदर से वो टूट रही हैं। उन्होंने बताया कि रातों को उन्हें नींद नहीं आती, उनका मन लंड की कल्पनाओं में उलझा रहता है। 


पढ़ाई-लिखाई जैसी कोई चीज नहीं, लेकिन घर का काम करते हुए भी ध्यान भटक जाता है। वो अपनी प्यासी जवानी को शांत करना चाहती हैं, लेकिन किसी अजनबी से कैसे करे?


 वो कह रही थीं के एक अच्छा सा प्लान बनाकर अपनी सुहागरात जैसी रात मनाएंगी, अपनी चूत की सील फिर से खुलवाएंगी मगर.. नहीं, वो तो पहले से शादीशुदा हैं, लेकिन वो प्यास ऐसी है जैसे पहली बार हो।"


मैं चुप हो गया। मिनाक्षी मेरी आंखों में देख रही थी वो मेरा लंड दबाने लगी। "केशव, तुम मेरे पति हो, मां के दामाद हो। मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं, इसलिए ही ये कह रही हूं! ये Antarvasan Hindi Sex Kahani आप Garamkahani.com पर पढ़ रहे है।


क्या तुम मां को संभाल सकते हो? उनकी प्यासी चूत को तृप्त कर सकते हो? उन्हें चोदकर उनकी जवानी को शांत कर दो। मैं मानती हूं कि ये थोड़ा अजीब लगेगा, लेकिन मां के लिए, मेरे लिए... प्लीज मेरी बात मान लो।"


मेरा तो दिमाग घूम गया। शेफाली आंटी को चोदना? जब की वो मेरी सास हैं। लेकिन मिनाक्षी की आंखों में वो प्यार, वो विश्वास देखकर मेरा दिल पिघल गया। 


मैं अपनी बीवी से बेहद प्यार करता हूं। वो मेरी दुनिया है। अगर वो खुश रहेगी, तो मैं कुछ भी कर सकता हूं। "मिनाक्षी, तुम्हें यकीन है? मैं... मैं कैसे चोदू? वो तो मेरी सास हैं।"


वो मेरे होंठों पर उंगली रख दी। "हां जान, यकीन है तुम पर मुझे। मां ने कहा है कि वो तुम्हें पसंद करती हैं। तुम्हारा फिट बॉडी, तुम्हारा केयरिंग नेचर।


वो कह रही थीं के बिना लंड के वो खुद को अधूरी फील करती हैं। उन्हें फिर से जानना है की एक मर्द का स्पर्श कैसा लगता है, वो फीलिंग जो औरत होने की असलियत देती है।


तुम उनके अंदर समा जाओ मेरी जान, उनकी बॉडी को अपनी बॉडी से रगड़लो और कर दो उनकी चुदाई। दो जिस्म एक जान हो जाएं... मतलब तुम और मां। मैं बाहर रहूंगी, लेकिन खुश रहूंगी।"


उसकी ये बातें सुनकर मेरी आंखों में आंसू आ गए। मैंने उसे गले लगा लिया। "ठीक है जान, तुम्हारे लिए, मां के लिए... मैं मान जाता हूं। लेकिन ये हमारा राज रहेगा।" मैने उससे वादा लिया।


ये Hindi Sex Kahani आप Garamkahani पर पढ़ रहे है। अगले दिन मिनाक्षी ने प्लान बनाया। वो बोली, "मां को तीन दिन की छुट्टी है। वो पुणे वापस नहीं जाना चाहतीं।


हम तीनों ही एक साथ लोनावाला चले जाएंगे। वहां एक अच्छा सा रिसॉर्ट बुक कर लो। मैं बहाने से बाहर रहूंगी, शॉपिंग पर चली जाऊंगी। 


तुम मां के साथ... उनकी चुदाई कर के प्यास बुझाओ।"मैंने हामी भर दी। शेफाली आंटी को जब मिनाक्षी ने बताया, तो वो शर्मा गईं। 


लेकिन उनकी आंखों में वो चमक थी जो बता रही थी कि वो अपनी चूत फाड़े जाने के लिए तैयार हैं। "बेटा, केशव को मनाना पड़ा? वो तो मेरे दामाद हैं।"


मिनाक्षी ने मुस्कुराकर कहा, "मां, केशव मेरा प्यार है, इसलिए वो सब कुछ करेंगे। आप चिंता मत कीजिए।" हम तीनों कार से लोनावाला निकल पड़े।


 रास्ते भर मिनाक्षी और शेफाली आंटी बातें करती रहीं। मैं ड्राइव करता रहा, लेकिन मन में घबराहट थी और खुशी भी क्यों के मेरी सासू मां थी तो कांटा माल ।


शेफाली आंटी साड़ी में बैठी थीं, उनका ब्लाउज थोड़ा टाइट था, रास्ते के झटको से उनके चूंचे ऊपर-नीचे हो रहे थे।


 मैंने नज़रे चुराकर देखा, लेकिन जल्दी नजर हटा ली।हम रिसॉर्ट पहुंचे तो कमरा बुक था। एक बड़ा सा स्वीट जिसमें बालकनी में व्यू भी था।


मिनाक्षी ने कहा, "मां, तुम थक गईं होगे। फ्रेश हो जाओ। मैं बाजार चली जाऊंगी, शाम तक आऊंगी। केशव तुम्हारा ख्याल रखेगा।"


शेफाली आंटी ने शर्मा कर सिर झुका लिया। मिनाक्षी चली गई। अब हम दोनों अकेले थे। मैंने आंटी से कहा, "चाय पिलाऊं?" वो मुस्कुराईं। "हां बेटा, लेकिन... केशव, ये सब... ठीक है ना?"


मैंने उनका हाथ पकड़ा। "आंटी, मिनाक्षी के लिए, आपके लिए... सब ठीक है। आपकी प्यासी जवानी को शांत करना मेरा फर्ज है मैं आपकी चूत का पूरा ख्याल रखूंगा।"


वो तो शर्मा गईं। हम बालकनी में जाकर बैठे। हवा ठंडी थी। मैंने धीरे से उनका कंधा छुआ जिससे वो कांप गईं। "केशव... कितने सालों बाद किसी मर्द का स्पर्श मिल रहा है।"


मैंने उन्हें गले लगाया। उनका शरीर बेहद गर्म था। हम दोनों चुपचाप बैठे रहे। फिर मैंने कहा, "आंटी, चलिए चलें। दिन भर घूमते हैं।"


हम रिसॉर्ट के गार्डन में घूमने लगे। उनके हाथ का स्पर्श मुझे अजीब सा मजा दे रहा था। वो भी मेरे हाथ को जोर से पकड़ रही थीं। 


हम एक-दूसरे से चिपककर चल रहे थे, जैसे कोई नया शादी का जोड़ा होता है। मेरा मन हो रहा था कि बस इन्हें बाहों में भर लूं और अभी चोद दूं। लेकिन यहां खुले में...चोदना सही नहीं था। ये Antarvasna Chudai ki Kahani कहानी आप Garamkahani.com पर पढ़ रहे है।


मैंने उनके चूचों को अपनी बांह से रगड़ा। शेफाली मां वो तो शर्मा गईं, लेकिन मेरे और पास आ गईं। उन्हें भी ये पसंद आ रहा था। वो मेरे कंधे पर हाथ रखकर चिपक रही थीं। हम दोनों गर्म हो चुके थे।


कुछ देर घूमने के बाद हमें भूख लगी। मैंने कहा, "आंटी, खाना खा लें?" वो बोलीं, "हां, कही शांत जगह में चलते है।"


मैंने चुटकी ली, " मैने खाने के लिए पूछा है... केला लेने के लिए नहीं।" वो शर्मा गईं और हंस पड़ीं। "केशव, तुम भी ना... ज्यादा सताओ मत।"


हम रिक्शे में होटल लौटे। रिक्शे में उन्होंने मेरा लंड छुआ। वो उनके स्पर्श से खड़ा हो गया। मैंने कहा, "साइज ठीक है ना?" वो शर्म से लाल हो गईं। "मुझे क्या पता... कितना साइज ठीक रहता है।"


मैं हंसा। "मैंने फिल्में देखी हैं, जानकारी है।" वो मेरी बांह में सिर छिपा लीं। "हां, मैंने भी देखी हैं। लेकिन आज मालूम हो जाएगा सब।" मैंने कहा,


"मतलब खूनी खेल खेलने को तैयार हो?" वो समझी नहीं। "खूनी खेल?" मैंने टॉपिक चेंज कर दिया। "मलाई खाना पसंद है आपको?" 


आगे की कहानी : 


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