बाप बेटे ने सुहागरात में बेदर्दी से चोदकर मां बना डाला!

XXX Family Sex Story में पढ़िए कैसे मेरी सुहागरात पर Antarvasna के कारण मेरे बेटे और पति ने लगातार मेरी चूत को चोदा और मुझे प्रेगनेंट कर के मां बना डाला! लेकिन इस बच्चे का बाप है कौन नहीं पता!


कैसे हो प्यारे फ्रेंड्स, मेरा नाम निधि है और मैं दिल्ली से हूँ। मैं 38 साल की एक सीधी साधी औरत हूँ मेरे कोई बड़े सपने नहीं है कोई बड़ा मकसद नहीं है। जिंदगी को मैं बस एक हसीन ख्वाब की तरह जीती हूं।


लेकिन मेरी फिगर मेरी उम्र का साथ नहीं देता वो अभी भी 36-30-38 की है, जो किसी भी मर्द को पागल कर सकती है। मेरे बड़े-बड़े बूब्स और उभरी हुई गांड की वजह से ऑफिस में सब मुझे घूरते रहते थे।


तकरीबन हर रोज़ ऐसा होता है की सुबह जब मैं लिफ्ट में चढ़ती हूं तो मेरे साथ ही ऑफिस की 2 3 लड़कियां और 5 6 आदमी भी अंदर घुस जाते है मैं उन सब के बीच में होती हूं और पूरे समय मेरे जिस्म पर 10 से 12 हाथ फेरे जाते है। 


कभी कोई हाथ मेरी गांड़ सहलाता है कभी कोई चूचे दबाता है मगर अब मेरी नज़रों मैं मेरी उम्र इतनी हो गई है के मैं बुरा नहीं मानती हूं आज मैं आपको अपनी सुहागरात की सच्ची कहानी सुनाने जा रही हूँ।


जो थोड़ी अलग है। ये कहानी मेरी जिंदगी की सबसे कामुक और गर्म रात की है, जब मैंने पहले अपने बेटे विशाल के साथ सुहागरात मनाई और फिर उसी रात विशाल के पिता और अपने पति अजय के साथ। 


हाँ, विशाल मेरा बेटा है, लेकिन वो अब 22 साल का जवान लड़का हो गया है, जो मेरी ही तरह ऑफिस में मेरे जूनियर के तौर पर काम करता है तो आइए बताती हूं ये सब कैसे हुआ, मैं आपको विस्तार से बताती हूँ।


सबसे पहले थोड़ा बैकग्राउंड आप लोगो के साथ साझा कर देती हूं। मेरी पहली शादी 18 साल की उम्र में हुई थी, लेकिन मेरे पहले पति की मौत हो गई जब विशाल तब सिर्फ 5 साल का था।


मैंने अकेले ही उसे पाला है लेकिन जिंदगी चलाने के लिए मैंने एक प्राइवेट कंपनी में सेक्रेटरी की जॉब जॉइन की। वहाँ मेरे बॉस अजय थे, जो 45 साल के थे और उनकी बीवी की भी मौत हो चुकी थी। 


अजय ने मुझे अपना पर्सनल सेक्रेटरी बनाया, और विशाल जब बड़ा हुआ तो मैंने उसे उसी ऑफिस में जूनियर असिस्टेंट की जॉब दिलवा दी। हम तीनों एक ही ऑफिस में काम करते थे – मैं अजय की सेक्रेटरी, विशाल मेरा जूनियर, और अजय हमारे बॉस।


एक दिन ऑफिस में मेरे साथ बहुत बुरा हुआ, अजय ने किसी प्रोजेक्ट की गलती की वजह से मुझे बहुत बुरी तरह से डांटा था।


वो चिल्लाते हुए बोले, "निधि, तुम्हारी वजह से क्लाइंट नाराज हो गया! क्या तुम्हें कुछ आता भी है?" ज़िंदगी में पहली बार किसी ने मुझ पर इस तरह चिल्लाया था की मैं रोने लगी।


क्योंकि वो डांट इतनी तेज थी कि सारा ऑफिस सुन रहा था, ऑफिस सभी मेरी इज़्ज़त करते थे और मुझे ही अच्छे उदाहरण के तौर पर अपने सामने रखते थे इस डांट से मेरी इमेज पर असर हुआ था मैं अपनी डेस्क पर सिर झुकाकर रो रही थी। 


तभी विशाल मेरे पास आया, जो मेरा जूनियर था लेकिन घर पर मेरा बेटा था।


उसने मुझे देखा और धीरे से कहा, "मैम, रो मत प्लीज़। सब ठीक हो जाएगा।" लेकिन मैं इतनी उदास थी कि मैंने उसे गले लगा लिया। वो मेरे बेटे जैसा था, लेकिन उस समय एक जवान मर्द और एक प्यासी औरत वाली हमारी बॉडीज टच हुईं थी। 


मेरे बूब्स उसकी छाती से दबे जा रहे थे, और उसकी गर्म सांसें मेरी गर्दन पर लगीं लगी मेरे अंदर की उस प्यास को उभार रही थी जिसे मैं शायद भूली हुई थी। मैंने महसूस करा कि विशाल का लंड खड़ा हो रहा है।


वो भी मेरे से आंख मिलाकर शर्मा गया, लेकिन हमारी बॉडी की गर्मी ने कुछ हमारे अंदर जगा दिया था।


उस रात घर जाकर विशाल ने मुझे फिर दिलासा दिया। हम सोफे पर बैठे थे, और वो बोला, "मम्मी, आप उदास मत हो ऐसे तो होता रहता है, सभी की किसी न किसी बात पर डांट पड़ती रहती है।


अजय सर गुस्से में थे कल तक वो भी भूल जाएंगे सब।" मैं फिर से रो पड़ी और उसके गले लग गई। 


इस बार घर ये हमारा था, कोई नहीं था जो हमें देखकर कुछ बोलता इसलिए अब मैं थोड़ा अपने बेटे की बाहों में रही मेरे बूब्स उसकी छाती पर दबे रहे, और मैंने महसूस करा की उसका हाथ मेरी कमर पर फिसल रहा है। 


मैं उसे रोकना चाहती थी मगर मैने उसे रोका नहीं, क्योंकि मुझे भी सालों से कोई अपना टच नहीं मिला था। धीरे-धीरे उसने मेरी गर्दन पर एक मर्द वाला किस कर दिया, और मेरे अंदर की औरत पिघल गई। 


मेरी एक सीससांस करते हुए शिकारी निकली जिससे हम अलग हुए लेकिन फिर भी बाहों में बंधे थे हमारी आंखे मिली मगर अब हम दोनों मैसे किसी ने नज़रे नहीं हटाई बल्की हम करीब आए और हम दोनों के होंठ मिले।


 वो किस इतनी गहरी थी की मेरी चूत के अंशों निकल गए और वो गीली हो गई। हमारे होठ बिना इजाजत एक दूसरे को चख रहे थे एक पल के लिए विशाल पीछे हुआ उसमें मेरी आंखों में देखा और मैने आंखें बंद कर के खोल दी।


जिसका मतलब होता है के औरत अपने आप को उस पल में एक मर्द को समर्पित कर चुकी है। फिर विशाल मेरे जिस्म को चूमते हुए नीचे जाने लगा विशाल ने मेरी साड़ी ऊपर करी, और मेरी पैंटी उतारकर अपनी उंगली मेरी चूत में डाल दी। 


"मम्मी, आप कितनी गर्म हो रही हो," वो बोला।


मैं सिसकार उठी, "आह विशाल...हम्मम! बेटा कुछ बोल मत ! बस करते रहो मत रुको।" उसने अपना 7 इंच का लंड बाहर निकाला, जो बहुत ही मोटा और सख्त था।


 मैंने उसे मुँह में लिया, फिर इस तरह चूसा जैसे सालों की भूख को उसका आहार मिल गया हो। फिर उसने मुझे सोफे पर लिटाया और अपने कपड़े उतार कर मेरी चूत पर लंड लगाकर मेरे ऊपर लेट गया , उसे चूत के छेद पर लंड रखकर एक प्यार भरा धक्का मारा।


उसका लंड मेरी चूत में घुसा, और मैं चिल्लाई, "आह...ओहद्ह! बेटा... चोदो मुझे!" उसने मेरी कमर में हाथ डाला और मुझे अपनी तरफ खींच लिया मैने भी अपनी टांगे खोली और उसकी कमर पर बांधी।


ये Family Antarvasna Sex Story आप Garam Kahani पर पढ़ रहे है। विशाल एक अच्छे मर्द की तरह मेरी चूत में धक्के लगा रहा था चूत गीली होने की वजह से लंड तेजी से अंदर से बाहर आ जा रहा था।


मेरे मुंह से कामुक आआह! आह ओंह्ह्ह, विशाल आगाह हिन्ह्मा हम्मम! चोदो आगाह आगाह बेटा ओहद्ह। की आहे निकल रही थी हमने उस रात पहली बार चुदाई की, और वो हमारा सीक्रेट रिश्ता बन गया। 


अब विशाल मुझे रोज ऑफिस में छुपकर छू लिया करता था लिफ्ट में वो भीड़ के बहाने मेरे पीछे आकर मेरी गांड़ पर लंड को घिसा करता और घर पर तो चोदता ही था रोज। कुछ दिनों बाद अजय ने भी मुझे उस दिन कि डांट के लिए मनाया।


वो बोले, "निधि, मुझे अफसोस है कि मैंने तुम्हें डांटा। तुम मेरी बेस्ट सेक्रेटरी हो।" 


मैं उसकी बातों से रो पड़ी, और वो मुझे गले लगाने लगे। उनकी भी बॉडी गर्म थी, और मैंने महसूस करा की उनका लंड मेरे जिस्म के करीब होकर खड़ा है। अजय ने मेरी आंखो में देखते हुए अचानक ही मुझे किस कर लिया, और बोले, "निधि, मैं तुमसे शादी करना चाहता हूँ।" 


मैं हैरान हो गई थी, लेकिन विशाल के साथ और उसके भविष्य की वजह से मैं तैयार हो गई। अजय की ये दूसरी शादी थी, और हमने कोर्ट मैरिज कर ली ऑफिस में जो चुटकुले बॉस और सेक्रेटरी के बारे में चलते थे उनमें से एक आज सच हो गया था। 


लेकिन विशाल को जब ये पता चला तो उसने भी मेरी खुशी समझते हुए हामी भरदी और वो भी अब खुश था मेरा बेटा काबिल था अगर अजय उसके पिता न बनते वो तब भी कुछ बड़ा ज़रूर कर लेता हालांकि उसकी एक खुशी ये भी थी के वो मुझे चोदता रह सकता था। 


शादी के बाद फिर मेरी सुहागरात की रात आई, और मैंने फैसला किया के पहले विशाल के साथ ही अपनी सुहागरात मनाऊँगी, क्योंकि वो मेरी अधूरी ज़िंदगी का पहला प्यार था, फिर अजय के साथ तो मुझे सारी उमर रहना ही है। अब आई सुहागरात की रात।


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अजय का घर सजा हुआ था, फूलों से बेड चुदाई के खेल के लिए रेडी था। अजय बाहर मीटिंग में थे, और वो रात 10 बजे आने वाले थे।


मैंने विशाल को अपने कमरे में बुलाया, जो अब मेरे ही साथ उसी घर में रहता था। मैं लाल साड़ी में सुहागन बनी तैयार बैठी थी, मैने अपनी सूनी मांग में फिर से सिंदूर लगाया था, मंगलसूत्र पहना था। 


फिर विशाल कमरे में आया, वो एक 22 साल का जवान लंड था, मस्कुलर बॉडी वाला मेरा बेटा आज चमक रहा था। वो बोला, "मम्मी, आज आप मेरी दुल्हन हो।" उसकी फ्लर्ट आवाज़ से मैं शर्मा गई, लेकिन मेरी चूत लंड के लिए गीली हो रही थी। 


विशाल ने आगे आकर मुझे बाहों में लिया, और मेरे होंठ को चूसने लगा। उसकी जीभ मेरे मुँह में घुसी जा रही थी, और मैंने उसकी जीभ भी आराम से चूसी। उसके हाथ मेरे बूब्स पर गए, जो ब्लाउज में कैद थे।


वो उन्हें जोर लगाकर दबाने लगा, "आह मम्मी, आपके बूब्स कितने बड़े हो गए हैं।" मैं सिसकारी लेते हुए बोली, "आह विशाल...ये तेरा की करम है! उफ्फफ दबाओ जोर से।"


विशाल ने मेरी लाल साड़ी उतारी, अब मैं सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी। उसने ब्लाउज के हुक खोले, और मेरी काली ब्रा बाहर आई। मेरे 36 साइज के बूब्स उछल रहे थे।


विशाल ने फिर मेरी ब्रा उतारी, और मेरे निप्पल्स चूसने लगा। वो एक बूब मुँह में लेता, फिर दूसरे को चूसता, फिर काटता। "उफ्फ... अआआह! ओह विशाल...हमममम मेरी जान आह... चूसो मेरे राजा आगाह!" 


मैं उसके सिर को दबा रही थी। उसके दांत मेरे निप्पल पर लगते जा रहे थे जो, दर्द और मजा एक साथ दे रहे थे। फिर वो मेरे नीचे गया, उसने मेरी नाभि में जीभ डाली तो मैने कमर उचकाई, "आह...ओंह्ह्ह! मेरी जान अआआह बेटा।"


वो मेरी पेटीकोट उतारकर पैंटी पर किस करने लगा। मेरी चूत आज क्लीन शेव थी, वो खुशी से गीली हुई जा रही थी। विशाल ने आखिर पैंटी भी उतारी, और अपनी जीभ मेरी चूत पर फेरनी शुरू की। 


वो चूत के दाने को चूसता, फांकों को अलग करके जीभ अंदर डालता मेरा बेटा खिलाड़ी हो गया था। "आह... अआआह, ओह विशाल... ओंह्ह्ह चाटो... उफ्फ हमममम! मैं झड़ रही हूँ!"


सुहागन बनकर उस रात में मैं पहली बार झड़ी, मेरी चूत से पानी निकलता जा रहा था जो विशाल पूरी तरह चाट गया।अब विशाल नंगा हुआ। उसका 7 इंच का लंड खड़ा होकर चूत मारने के लिए तैयार था, वो मोटा तीन इंच मोटा सांप मेरे सामने था। 


मैंने उसे मुँह में लिया, आज मैने उसे चूसा जैसे कोई लॉलीपॉप हो। वो मेरे बाल पकड़कर मेरे मुंह को मुँह चोदने लगा। "मम्मी... चूसो... आह...उसकी आवाज़ मुझे जोश दिला रही थी" फिर हम 69 पोजीशन में आए।


मैं ऊपर रही उसका लंड चूस रही थी, वो नीचे से मेरी चूत चाट रहा था। 


उसकी जीभ मेरी गांड के छेद पर भी लगी, जिससे मैं पागल हो गई। पांच मिनट बाद विशाल बोला, "मम्मी, अब चोदूँ?" मैंने कहा, "हाँ बेटा, अपनी मम्मी की चूत फाड़ दो आज।"


विशाल ने मुझे लिटाया, और कमर के नीचे तकिया लगाया ताकी चूत ऊपर उभरे। 


उसने लंड चूत पर घिसा जिससे मैं मचल गई उसने फिर धक्का मारा और आधा लंड अंदर गया, मैं चिल्लाई, "आह अआआह... विशाल... धीरे!" लेकिन वो नहीं रुका, पूरा लंड उसने मेरी चूत की जड़ तक घुसेड़ दिया। उस रात मेरे बहुत दर्द हुआ, लेकिन मजा भी बहुत ज्यादा आया। 


अब विशाल धक्के मारने लगा, ठप-ठप की आवाज कमरे में उत्तेजना पैदा कर रही थी। मैं नीचे से कमर उचका रही थी, "आह... ओंह्ह्ह! चोदो... अआआह! जोर से अआआह... मेरे राजा चोद अआआह!"


उसके धक्के तेज होते गए, मेरे बूब्स उछल रहे थे। मैंने उसके चूतड़ पकड़े, और नाखून गड़ाए। फिर हमने पोजीशन बदली, और मैं ऊपर चढ़ी। विशाल मेरे नीचे आ गया, मैं उसके लंड पर बैठी, उछल रही थी।


मेरे बूब्स उसके सामने लहरा रहे थे वो उन्हें मजे से दबा रहा था। "आह मम्मी... क्या चूत है आपकी... ओंह्ह्ह मस्त टाइट है!" दस मिनट बाद हमने डॉगी स्टाइल भी करा। मैं घुटनों पर आई, विशाल मेरे पीछे से चुदाई करने लगा। 


उसका लंड जड़ तक घुसता जाता, व ठप-ठप की आवाज करता जाता। वो मेरी गांड मसलता, उंगली अंदर डालता। मैं "उफ्फ... विशाल... अआआह गांड में मत मार..." लेकिन मजा तो आ रहा था। मैं उस समय दो बार झड़ी, फिर विशाल का भी पानी आया। "मम्मी... आ रहा हूँ मैं!" 


उसने अपना गर्म वीर्य मेरी चूत में उड़ेल दिया। हम नंगे ही लेटे हुए सुस्ताए, लेकिन हमारे पास समय कम था। विशाल उठकर चला गया, और मैं जल्दी से फ्रेश होकर फिर से सुहागन चुदाई के लिए तैयार हुई। फिर कुछ देर बाद अब अजय आए, रात के 11 बजे थे। 


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वो बोले, "निधि, आज हमारी सुहागरात है मेरी जान।" मैं शर्मा गई, लेकिन चूत फिर गीली हो गई थी 2 बार तो मैं झड़ चुकी थी मगर औरत की चूत वो रास्ता है जहां चलने वाले लंड थक जाते है मगर रास्ता नहीं थकता।


अजय ने मुझे किस करना शुरू करा, उनका किस उनके प्यार जितना गहरा था। उसके हाथ मेरे बूब्स पर पहुंचकर, मेरी जवानी को दबाने लगा। "निधि, तुम कितनी सेक्सी हो।"वो बोले फिर मैंने उसकी शर्ट उतारी, और उसका चेस्ट किस किया। 


अजय का लंड 8 इंच का था, वो विशाल से भी मोटा था। मैंने अपने पति की पैंट उतारी, और उसका नाग मुंह में लिया , शादी के फेरो के बाद सुहागन का असली उपवास पति के लंड से ही टूटता है तो मैने लंड मुँह में लिया। 


मैने उसे चूसा खूब जोर-जोर से, वो कराहा रहे थे, "आह निधि... चूसो...ओंह्ह्ह" फिर अजय ने मुझे दुबारा नंगा किया। और मेरी ब्रा उतारी, फिर बहुत प्यार से मेरे बूब्स चूसे। उसके दांत निप्पल पर आकर मुझे काटने लगे।


"उफ्फ... अजय... आह...आराम से अजय आगाह" वो फिर नीचे गया, और उसने मेरी गीली चूत चाटी। उन्होंने जीभ से दाने पर, और फांकों में जोश भर दिया। मैं झड़ी अपनी सुहागरात पर अब तक 3 बार झड़ गई थी।


 मेरे मुंह से निकल "आह... चाटो...ओंह्ह्ह मेरी जान बुझा दो मेरी आग को, ओंह्ह्ह।" फिर अजय ने मुझे लिटाया, और लंड चूत पर सेट करा। उसने मुझे उठाकर धक्का मारा, और एक बार में पूरा लंड अंदर समा गया।


चुदाई का खेल फिर से अपने चरम को आया "आह... आआह अजय आआह ओह अजय...ओंह्ह्ह चोदो आगाह अजय आगाह, हम्मम चोदो मुझे अआआह मैं प्यासी हम!" वो लगातार धक्के मारने लगा, तेज और गहरे धक्के जो मुझे कभी नहीं मिले थे। 


वो मेरे बूब्स दबाता, चूसता और धमधम चूत बजाता। "निधि... क्या टाइट चूत है तेरी मजा आ रहा है..." मैं नीचे से उनका पूरा साथ दे रही थी, "जोर से... फाड़ दो अआआह ओह अजय हाआअ अआआह!" फिर हमने पोजीशन बदली, मैं ऊपर आई और उनको नीचे दबाया और लोड़े की सवारी करो। 


मैं उछल-उछलकर चुद रही थी। मैं इतनी ज़ोर से चूत लंड पर मारती के उसका लंड गहरा घुसता चला जाता। ठप-ठप की आवाज से कमरा गरमा रहा था, मैं चिल्ला रही थी "आह... अजय... मारो आआह चोदो ओंह्ह्ह अजय अआआह अजय अआआह!"


आखिर में उसने मुझे गोद में उठाकर चोदा। वो मुझे उछालता, लंड अंदर-बाहर पेलता और मैं हवा मैं झूलती रहती फिर मैं चौथी बार झड़ी, और उसका वीर्य चूत में निकल गया।


उस रात मैं दो बार सुहागरात मना चुकी थी। विशाल और अजय दोनों से मेरा रिश्ता खुशी खुशी रहा। अब हम तीनों खुश हैं मैंने हाल ही में एक लड़के को जन्म दिया है मगर उसका बाप विशाल है या अजय ये मैं भी नहीं जानती!


मेरी ये Desi XXX वाली Maa Bete Ki Chudai Kahani आपको कैसी लगी? जल्दी कमेंट करो और बताओ।


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Baap beta dono mil kar bhu ki ek hi raat me maa chod kr randi ko virya dan kre to pet to fulega hi n.