मदारचोद बेटे ने मम्मी को चोद कर जवान बनाया

मम्मी की भड़कते जिस्म को देख मेरा मन उत्तेजित हो उठता, रात को उनकी दमदार चुदाई के सपने देखने लगा हालांकि उससे दोगुना मजा उनकी असल चुदाई करके मैंने महसूस किया।


हैलो दोस्तो, मेरा नाम आयुष है और मैं स्लिम मिड हाईट 5’8″ का और वजन करीब 54-55 किलो है। मैं 25 साल का हूँ, इन दिनों मैं देहरादून में रहता हूँ।


आज मैं आपको मेरे और मेरे मम्मी के सेक्स की कहानी सुनाता हूँ। यह बात आज से करीब 5-6 साल पहले की है जब मेरी उम्र 20 साल की थी और मेरी मम्मी 32 की थीं।





मेरी जवानी शुरु हुई थी और उनकी जवानी के शोले भड़कते थे। मेरी मम्मी बहुत सेक्सी और सुन्दर है। शी हेज गोट ए ब्यूटीफुल बॉडी शेप 36-28-36! शी हेज गॉड मेड बूब्स एज वेल एज बटक्स!


उनका सुडौल गोरा बदन बहुत हसीन है। वैसे वो मेरी रियल मम्मी नहीं हैं वह मेरे डैड की सेक्रेटरी थी, बाद में पापा ने माता जी के कोंन्सेंट से उससे अनओफियसली शादी कर ली।


मैं पहले उनको अनन्या आंटी कहता था, पर अब मम्मी ही कहता हूँ।


मैं मम्मी को जब भी देखता तो मुझे उनका सेक्सी फिगर देखकर मन मे गुदगुदी होती थी।


मैंने उनको एक दो बार डैड के ऑफिस में आधा नंगा, जैसे जब वह स्कर्ट पहनती थी तो उनकी थाईज बड़ी जबरदस्त होती थी तब वह मेरे पापा की सेक्रेटरी थी।


एक दो बार मैंने मम्मी को डैड के ऑफिस के प्राइवेट रूम में जो चेंजिंग रूम कम रेस्ट रूम था। मैं छुप कर कपड़े चेंज करते भी देखा था, और मैं उनके चूचे और चड्डी के नीचे के एरिया को छोड़कर पूरा नंगा देख चुका था।


मम्मी की बॉडी एकदम संगमरमर की तरह चिकनी थी। उनकी जांघें ऐसी लगती थी जैसे दो केले का जोड़ा हो। उनके होंठ एकदम गुलाब की पंखुड़ियों की तरह थे और गाल एकदम कश्मीरी सेब जैसे पिंक।


मम्मी एकदम टाईट फिटिंग के कपड़े पहनती थी और मैं उनको बहुत नज़दीक से देखकर अपनी आँखों को सुकुन दिया करता था।


मतलब जब से मेरा लण्ड खड़ा होना शुरू हुआ वो बस अनन्या (मम्मी) को ही तलाशता और सोचता था। मैं उनकी बॉडी को देखकर अपने मन और आँखों की प्यास बुझाया करता था।


लेकिन पहले जब तक वह अनन्या आंटी थी मुझे उनसे नफरत थी और मैं सोचता था कि एक दिन इनको तसल्ली से चोदकर अपनी भड़ास निकालूँगा।


पर बाद में उनके लिए मेरे पापा के प्यार ने और उनके अच्छे व्यवहार ने मुझे चेंज कर दिया।


अब वो हमारे घर पर फर्स्ट फ्लोर में रहती थी। डैड और उनका बेडरूम फर्स्ट फ्लोर पर था और हुम लोग ग्राउंड फ्लोर पर रहते हैं।


डैड अनन्या(मम्मी) के साथ फर्स्ट फ्लोर पर ही सोते हैं बेड रूम के साथ ही एक और रूम है जो एज ए कॉमन रूम यूज़ होता है। धीरे धीरे मैं मम्मी के और करीब आने लगा।


वह शायद मेरा इरादा नहीं समझ पा रही थीं। वह मुझको वही बच्चा समझती थी पर अब मैं जवान हो गया था।


जैसे ही मैंने कॉलेज में एडमिशन लिया तो डैड ने ऑफिस का वर्क भी मुझको सिखाना शुरू कर दिया और मैं भी फ्री टाइम में रेगुलरली ऑफिस का काम देखने लगा।


मोस्टली मैं एसोसिएट्स का काम देखता हूँ क्योंकि मैं समवेयर स्टूडेंट था।


कॉलेज में भी मुझे कोई भी लड़की मम्मी से ज्यादा सेक्सी नहीं लगती थी।


अब मझे जब मौका मिले मोन्स को टच करके, जैसे उनकी जाँघों पर हाथ फ़ेर के, उनके चूतड़ पर रब करके या कभी जानबुझकर उनके बूब्स छु लिया करता।


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मम्मी पता नहीं जानबूझकर या अनजाने में अनदेखा कर देती थी, या वह मेरा उद्देश्य नहीं समझ पाती थी।


कभी डैड रात को मुझे अपने बेड रूम में बुलाते थे और ऑफिस के बारे में मम्मी और मेरे साथ डिसकस करते। क्योंकि मम्मी अक्सर नाईट गाऊन में होती थी और मैं पूरी तसल्ली से उनके बदन का मुआयना करता था।


उनके बूब्स बिल्कुल पके हुए आम जैसे मुझे बड़ा ललचाते थे, कई बार मम्मी को भी मेरा इरादा पता चल जता था पर वो कुछ नहीं कहती थी।


अब तो मेरी बेचैनी बढ़ती जा रही थी और मैंने मम्मी की चुदाई का पक्का इरादा कर लिया और मौके की तलाश करने लगा।


एक दिन जब डैड ने मुझे फर्स्ट फ्लोर पर रात को 11 बजे बुलाया तो मैं ऊपर गया तो डैड ने बताया कि उनको रात 1 बजे की फ्लाइट से 1 सप्ताह के लिये अर्जेंट बाहर जाना है और वो मुझे और मम्मी (अनन्या) को जरूरी बातें ब्रीफ करने लगे।


मम्मी थोड़ा घबरा रही थीं तो डैड ने कहा- सैंडी डार्लिंग, यू डोंट वरी! तुम और आयुष सब सम्भाल लोगे, आयुष तुम्हारी मदद करेगा। कोई प्रॉब्लम हो तो, मुझे कॉल करना! वैसे यू विल मैनेज, देयर विल बी नो प्रॉब्लम!


मम्मी और पापा का फोरप्ले
उसके बाद डैड ने मुझसे कहा- सैंडी थोड़ी नर्वस है, तुम जरा बाहर जाओ मैं उसको समझाता हूँ।


मैं बाहर आ गया तो डैड ने अन्दर से दरवाजा बन्द कर दिया, लेकिन मुझको शक हुआ कि डैड मेरी अनुपस्थिति में अनन्या(मम्मी) को क्या समझाते हैं?


मैं की-होल से चुपके से देखने लगा। लोजिकली डोर पर कर्टेन नहीं चढ़ा था और लाईट भी जल रही थी। लेकिन मैंने जो देखा तो मैं स्तब्ध रह गया।


डैड मम्मी को बाहों में लेकर किश कर रहे थे और मम्मी क्राई कर रही थी। फिर डैड ने मम्मी के होंठ अपने होंठों पर लेकर डीप किश लिया तो मम्मी भी जवाब देने लगी। फिर डैड ने मम्मी का गाऊन पीछे से खोल दिया और पीठ पर रब करने लगे।


मम्मी और डैड अभी भी एक दुसरे को किश कर रहे थे और दोनों लम्बी सांसें ले रहे थे कि मैं सुन सकता था। फिर डैड ने मम्मी का गाऊन पीछे से उठाया और उनकी चड्डी भी नीचे करके मम्मी के चूतड़ पर रब करने लगे।


मम्मी के चूतड़ के दर्शन
मम्मी की पीठ दरवाजे के तरफ थी जिस कारण मुझे मम्मी की गांड और चूतड़ के दर्शन पहली बार करने का मौका मिला।


मम्मी के चूतड़ एकदम संगमरमर से मुलायम और चिकने नजर आ रहे थे। मम्मी क्राई भी कर रही थीं और मस्ती में लम्बी सांसें भी ले रही थीं।


फिर अचानक डैड ने मम्मी का गाऊन आगे से ऊपर किया और उनकी चूत पर उंगलियाँ फिराने लगे पर मैं कुछ देख नहीं पाया क्योंकि वो दूसरी साइड थीं।


फिर डैड दूसरी तरफ़ पलटे तो मम्मी की चूत वाली साइड मेरे तरफ़ हो गई और अब मैं मम्मी की चूत थोड़ी बहुत देख सकता था।


पर डोर से कुछ नज़र साफ नहीं आ रहा था। मम्मी की चूत का मैं अन्दाज लगा सकता था क्योंकि डैड वहाँ पर उंगलियाँ फिरा रहे थे और मम्मी के खड़े होने के कारण चूत पूरी नजर नहीं आ रही थी।


वो बस एक छोटी लाइन से दिख रही थी जहाँ डैड उंगली फिरा रहे थे। उसके बाद डैड नीचे झुके और मम्मी की चूत पर अपने होंठ रख दिए।


यह मुझे साफ़ नहीं दिख रहा था पर मैं गेस कर सकता था कि मम्मी अब जोर जोर से सिसकारियाँ लेकर मजे ले रही थी और डैड भी मस्ती में थे।


लेकिन अचानक जाने क्या हुआ कि डैड रुक गए और उन्होंने मम्मी को छोड़ दिया और मम्मी को लिप्स पर किश करते हुए बोले- डार्लिंग आई ऍम सॉरी! आई कांट गो बियॉन्ड लेट आई कम बिकॉज़? आयुष इज आल्सो आउट, एंड आई ऍम गेटिंग लेट आई ऍम वैरी सॉरी!


मम्मी भी तब तक शांत हो चुकी थी पर वो असन्तुष्ट लग रही थी। वो सामान्य होते हुए बोली, इट्स ओके!
और उन्होंने अपना गाऊन ठीक किया।


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उसके बाद डैड ने मुझको आवाज़ लगाते हुए कहा- आयुष, आर यू देयर बेटा?


मैं चौकन्ना हो गया और अपने को नार्मल करने लगा क्योंकि मेरा लण्ड एकदम खंभे के माफिक खड़ा हो गया था और मेरी धड़कन भी नार्मल नहीं थी। लेकिन जब तक डैड डोर खोलते मैं नार्मल हो गया था।


फिर डैड ने दरवाजा खोला और बोले- ड्राईवर को बुलाओ और मेरे सामान गाड़ी में रखो। रात काफी हो गई है, यू डोंट नीड टू कम एयरपोर्ट आई विल मेनेज एंड प्लीज! सी द ऑफिस एंड फोर वन वीक टेक लीव फ्रॉम द कॉलेज एंड असिस्ट सैंडी।


मैं और मम्मी डैड को ड्रॉप करने जाना चाहते थे पर डैड ने स्ट्रिक्टली मना कर दिया। डैड को हमने गुड बाय कहा और डैड ने हुमको बेस्ट ऑफ़ लक कहते हुए किश किया।


जब डैड चले गए तो मम्मी ने मुझसे कहा- आयुष आज तुम ऊपर वाले कमरे में ही सो जाओ मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा है।
मैं तो ऐसे मौके की तलाश में ही था। मैं एकदम से थोड़ा झिझकने का नाटक करते हुए हाँ! कह दिया।


मम्मी और मैं फर्स्ट फ्लोर पर आ गए और मम्मी बेडरूम में चली गई उनहोने मुझे पुछा कि, आर यू कोम्फरटेबल ना?
मैंने कहा, यस!


वो बोली- एक्टचुअली आई ऍम नॉट फीलिंग वेल इसलिए तुमको परेशान किया!


मैंने कहा, इट्स ओके! मम्मी, फिर मम्मी अन्दर चली गई और मैं बाहर कॉमन रूम में लाइट ऑफ करके सो गया।


मम्मी थोड़ा घबरा रही थी, इसलिए उनहोने दरवाजा बन्द तो किया पर लॉक नहीं किया और नाईट लैंप ऑफ नहीं किया।


अब मेरे को तो नींद कहाँ आनी थी?, मैं तो मम्मी के साथ सपनो की दुनिया सजा रहा था और मेरी नज़र मम्मी की एक्टिविटीज पर थी।


करीब आधे घंटे बाद मम्मी मेरे कमरे में आई और जैसे ही उन्होंने लाइट ओन की तो देखा कि, मैं भी लेटा हुआ जग रहा हूँ।


मम्मी बोली- राजु लगता है, तुमको भी नींद नहीं आ रही है, 2:00 बज गए हैं!


तुम भी शायद, अपने डैड के बारे में और कल ऑफिस के बारे में सोच रहा हो।


मैंने कहा- बात तो आप ठीक कर रही हैं, पर पता नहीं क्यों? मुझे ऐसी कोई चिंता नहीं है, पर नींद नहीं आ रही है! आप सो जाओ, मैं भी सो जाता हूँ थोड़ी देर में नींद आ जाएगी।


मम्मी बोली- ओके! राजु पर मैं थोड़ा कम्फ़र्टेबल नहीं फील कर रही हूँ।


तुम सो जाओ, मैं लाइट ऑफ कर देती हूँ।


तब मैं मम्मी से कहा कि, मम्मी अगर आप बुरा ना माने तो ऐसा करते हैं कि, अन्दर ही मैं भी आपके पास बैठता हूँ बातें करते हुए शायद नींद आ जाए!


वो बोली- गुड आईडिया! चलो, अन्दर आ जाओ, और मैं और मम्मी अन्दर बेड रूम में चले गए।


मैं अन्दर चेयर पर बैठ गया और मम्मी बेड पर बैठ गईं। फिर मम्मी बोली, राजु ठण्ड ज्यादा है! तुम भी बेड पर ही बैठ जाओ।


मैंने मना करने का बहाना बनाया पर मम्मी ने जब दुबारा बोला तो, मैं उनके सामने बेड पर बैठ गया और रजाई से आधा कभर कर लिया।


अब मैं मम्मी को तसल्ली से बात कर रहा था और रजाई के अन्दर मैं पायजामे का नादा थोड़ा ढीला कर लिया था। फिर मैंने मम्मी से कहा कि, ऑफिस की बात नहीं करेंगे कुछ गप शप करतें हैं।


मम्मी नंगी जिस्म दिखाने को हुई राजी
फिर मम्मी बोली, ओके! तो मैंने कहा, मम्मी तुम बुरा ना मानो तो तुमसे एक प्राइवेट बात कहनी थी!


मम्मी बोली- कम ओन डोंट कंफ्यूज खुल कर कहो।


मैंने कहा- मम्मी यू आर मोस्ट ब्यूटीफुल लेडी आई इवर मेट!


आई रियली मीन इट मैं गप शप नहीं कर रहा हूँ।


मैं आज से नहीं जब से तुमको देखा है, तुमको अपनी कल्पना, अपना प्यार और सब कुछ मानता हूँ!


यू आर रियली ग्रेट! मम्मी, एंड योर फिगर इज मारवलस एंड इवन मोस्ट गॉर्जियस गर्ल ऑफ 16 कांट बीट योर ब्यूटी एंड सेंसुअलिटी।


मैं ये सब एक ही साथ कह गया कुछ तो मैं कहा कुछ मैं कहता चला गया पता नहीं मुझे क्या हो गया था।


मम्मी मुझे देखती रही और हँसने लगीं! बोली, तुम पागल हो एक बुढ़िया के दीवाने हो गए हो।


मैंने कहा- नो मम्मी यू आर मारवलस! कोई भी जवान लड़की, तुम्हारा मुकबला नहीं कर सकती!


मम्मी प्लीज अगर तुम मेरी एक बात मान लो तो मैं तुमसे जिन्दगी में कुछ नहीं माँगूंगा।


मम्मी बोली- अरे बुद्धु कुछ बोलो भी, ये शायरों की तरह शायरी मत करो!


मैं तुम्हारी क्या हेल्प कर सकती हूँ?


मैंने कहा- मम्मी प्लीज! बुरा मत मानना पर मैं तुमको सबसे खूबसुरत मानता हूँ, इसलिए अपनी सबसे खूबसूरत लेडी की खूबसूरती को एक बार पूरी तरह देख लेना चाहता हूँ!


मम्मी प्लीज! मना मत करना, नहीं तो मैं सचमुच मर जाऊँगा और अगर जिंदा भी रहा तो मारा जैसा ही समझो।


मम्मी एकदम चुप हो गई और सोचने लगी फिर धीरे से बोली- राजु, तुम सचमुच दीवाने हो गए हो, वह भी अपनी मम्मी के!


कहानी का अगला पार्ट : मदारचोद बेटे ने मम्मी को चोद कर जवान बनाया 02


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