गर्लफ्रेंड की माँ चोद दी अपने रूम में

मेरा नाम सुरेंद्र है, मेरी उम्र करीब 22 साल है, मैंने अपनी गर्लफ्रेंड और फिर उसकी माँ को पहले ही चोद लिया था। उसकी माँ ने आखिरी बार चुदाई के बाद मुझसे कहा था कि आगे अभी बहुत मेहनत करनी है! 


इसलिए इस कहानी में मैंने बताया है कि कैसे मैंने अपनी गर्लफ्रेंड की माँ को रूम पर लेजाकर चोदा।


मैं अपनी गर्लफ्रेंड की माँ को चोद कर घर आया था और अपनी गर्लफ्रेंड से बात कर रहा था। गर्लफ्रेंड मेरी तबीयत के बारे में पूछ रही थी। क्योंकि मैंने अपनी खराब सेहत का बहाना बनाया था जब मैं उसकी माँ को चोदने गया था।





थोड़ी देर बाद मुझे अनजान नंबर से मैसेज आता है व्हाट्सएप पर। मैं ओपन करके देखता हूं तो मेरी गर्लफ्रेंड की मां का मैसेज था।


उनकी गांड की तस्वीर के साथ जिस पर मेरे थप्पड़ के निशान थे और नीचे लिखा हुआ था, "जल्द ही मिलेंगे।"


मैं एकदम से बहुत एक्साइटेड हो गया। मैंने भी लिख दिया की, “तो बताओ कब?” अनहोन रिप्लाई की, "सबर रखो, बहुत जल्दी।" उसके बाद मैं सो गया।  


1 हफ्ते के बाद मैं मेरी गर्लफ्रेंड के साथ रूम पर गया और बहुत अच्छी चुदाई हुई। रात को हम मैसेज पर दिन की चुदाई की बात कर रहे थे।


तभी गर्लफ्रेंड की माँ का SMS आया की, "इस रविवार आपकी जगह।" मैं एकदुम से खुश हो गया और रिप्लाई किया की, "हां ज़रूर।"


संडे को मैं तैयार हो गया था और अपनी गर्लफ्रेंड को बोला, "आज फैमिली फंक्शन में जाना है तो शाम को आकर बात करता हूं।"


और बस गर्लफ्रेंड की माँ के कॉल का इंतजार कर रहा था। उनका कॉल आया और वो बोली, "मैं सुबह 11:00 बजे मेट्रो स्टेशन पर मिलूंगी।"


मैंने भी बोला, “ठीक है मैं आ जाऊंगा।” मैं मेट्रो में पहुंच गया कार से। मैंने देखा आंटी इतना टाइट फिट सूट पहन कर आई थी काले रंग का।


मेरा तो देखते ही खड़ा हो गया। आंटी कार में आकर बैठी।  उनकी नजर मेरे लंड पर पड़ी जो बिल्कुल खड़ा हुआ था साफ दिख रहा था।


आंटी ने पैंट के ऊपर से लंड को पकड़ा और बोली, "लगता है अच्छे से तैयार होकर आए हो और आज बहुत मेहनत करनी है तुम्हें," और मेरे होठों को किस करने लगी।


  यह कहानी आप गरम कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है  


रास्ते में जाते हुए मैंने देखा आंटी मेरे लंड की तरफ ही देख रही थी। और ऊपर स्तन को रगड़ रही थी।  मैं ये सब देख कर और उत्तेजित हो रहा था मेरा लंड और मजबूत हो रहा था।


मैंने अपना लंड जिप खोल कर बाहर निकाल दिया। आंटी को देखा तो उनके हाथ अपने स्तन पर ही रुक गए।


वो बस मेरे लंड को देख रही थी जो काफी गीला हो चुका था। आंटी अपनी जीभ से अपने होठों को चाट रही थी।


उसके बाद आंटी ने अपना हाथ आगे लाकर मेरे लंड के ऊपर अपनी उंगली घुमाई। जितना तरल निकला था वो सब अपने हाथ में लिया और अपने होठों पर लगा लिया और फिर अपनी जीभ से चाटने लगी।


ये देख कर मैं पागल हो गया। आंटी के बाल पकड़ कर उनका मुँह सीधा लंड के पास लाया और वो उसे चुनने लगी ज़ोर ज़ोर से।


वो पूरा लंड मुँह में लेने की कोशिश कर रही थी। मेरे ड्राइव करने की वजह से नहीं ले पा रही थी। यह कहानी आप गरम कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है


होटल के पास आकर मैंने उन्हें ऊपर करा तो उनके होठों के नीचे उनका थूक और मेरा प्री-कम मिक्स होकर लगा हुआ था।


ऊपर आकर वो बोली, "रोक क्यों दिया ऐसा रोकना नहीं चाहिए।" मैंने कहा, "हम कमरे पर आ गये हैं अन्दर चलते हैं।" फिर उन्होंने बोला, "चलो जल्दी, मैं और इंतजार नहीं कर सकता।"


मैंने रूम पहले से बुक किया था। हम अंदर गए सीधे कमरे में आंटी ने जाते ही कमरे का ताला लगा दिया और मुझसे बोली, "चलो शुरू करते हैं, दिखाओ तुम कितना तैयार हो मेहनत करने के लिए।"


मैंने कहा, "रुको बैठ जाते हैं थोड़ी देर।"


उन्होंने कहाँ कि "कमरे में बैठ कर तुम मेरी बेटी से कर लिया करो, मुझसे नहीं।" और ये बोलते ही वो एकदम से मेरी तरफ आई और मेरे होठों पर ज़ोर ज़ोर से किस करने लगी।


मैं भी एकदम से उनको ज़ोर ज़ोर से किस करने लगा और उनके स्तनों को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा।


एक और कामुक स्टोरी : माँ की मालिश से बेटे की सेक्स सफ़र की शुरूआत

वो केवल शुद्ध शरीर पर अपने हाथ को फेरने लगी। किस करते हुए मैंने उनके पीछे करा और बिस्तर पर गिरा दिया।


उनकी चुन्नी हटा दी और कहा, “जब बात नहीं करनी तो चुन्नी का क्या काम इसे हटा देते हैं।” वो बोली, “ज़रुरत तो बाकी कपड़े कि भी नहीं, इन्हें क्यों नहीं उतारा?”


मैंने कहा, "अभी रुक जाइये अब आप इतना इंतज़ार करवा रहे हैं मुझे तो थोड़ा तो मैं भी करवा सकता हूँ।"


वो एकदम से अपने बूब्ज़ को दबाते हुए बोली, "ज्यादा इंतज़ार मत करवाओ। सुरेंद्र मैं बहुत गीली हो चुकी हूं कंट्रोल नहीं हो रहा है।" मैं बिस्तर पर उनके ऊपर आया और उन्हें गर्दन पर चूमने लगा।


जैसे ही मैंने अपनी जीब उनकी गर्दन पर लगाई उनकी सिस्की निकल गई। मैंने कहा, "क्या हुआ आंटी? इतनी में आवाज़ निकल गई? आज मैं बताता हूं सेक्स कैसे होता है।"


आंटी बोलीं, "तो बता ना! तेरे अंकल तो सेक्स के नाम पर सिर्फ चुदाई करते हैं और वो भी जल्दी खत्म हो जाते हैं। मैं तो भूल ही गई थी कि इन सब में कितना मजा है।" और आंटी की सिसकियाँ जारी रही मेरी हर चुम्बन के साथ।


मैंने आंटी का सूट ऊपर किया और उनकी नाभि के अंदर जाकर घुमाने लगा।


आंटी तो जैसे पागल हो गई।  अपने स्तनों को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगी और शरीर को उठाने लगी मानो बोले जा रही हो की “और अंदर डाल इस जिब को इस जिब से चोद दे मेरी नाभि को।”


मैंने आंटी को खड़ा करके आंटी का सूट उतार दिया। और सलवार को नाडा खोलते ही सलवार नीचे गिर गई।


मैंने आंटी की पैंटी को हाथ लगाया तो बहुत गीली हो चुकी थी। मेरे हाथ लगते ही आंटी ने मुझे कस के पकड़ लिया।


मुझसे लिपट गई और धीरे से मेरे कान में बोली, "तुम्हें अब भी लगता है कि मुझे और तड़पना चाहिए।" मैंने थोड़ी पैंटी के ऊपर रगड़ने के बाद पैंटी को उतारा।


 यह कहानी आप गरम कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है  


तो देखा आंटी शेव करके आई थी।  मैंने आंटी को बिस्तर पर लिटाया और बिस्तर के किनारे अपने घुटनों पर आकर उनकी चूत के पास जाने लगा।


जैसे ही मैंने अपना मुँह उनकी चूत पर लगाया वो बस एकदम से सुन्न हो गई। उन्हें ज़ोर से चादर को पकड़ लिया अपने होठों को डांटो के नीचे दबा लिया।


मैंने उनकी चूत को चाटना शुरू किया तो उनकी सिसकियों ने कमरे को भर दिया था। थोड़ी देर चटनी के बाद उनका शरीर टाइट होने लगा।


उनकी चादर पर पकड़ टाइट होने लगी। अपना सर इधर उधर कर रही थी और कुछ देर बाद उनकी चुत चोदने के बाद उन्हे ऑर्गेज्म आ गई। 


कहानी का अगला पार्ट : गर्लफ्रेंड की माँ चोद दी अपने रूम में 02


Share This Story :  

आपकी प्रतिक्रिया