बाप बेटे ने मिलकर बड़े चूंचे वाली कामवाली को चोदा!

Antarvasna की बड़ी चूंचे वाली कामवाली की मजबूरी से चूत चुदाई का मज़ा! वाली कहानी के इस भाग में जानिए के अगले दिन कैसे ये चुदाई की कहानी आगे बढ़ी ।


मेरी पिछली कहानी बड़ी चूंचे वाली कामवाली की मजबूरी से चूत चुदाई का मज़ा! को प्यार देने के लिए धन्यवाद अब आगे बढ़ते है ,


अगले दिन सुबह की धूप खिड़की से झांक रही थी, मैं रविश बिस्तर पर लेटा हुआ प्रीति की रात भर की चुदाई को याद कर रहा था।


मेरा लंड सुबह-सुबह ही खड़ा हो गया था, लेकिन माँ और बहन रिश्तेदारों के यहाँ गई हुई थीं, तो घर में बस पापा, मैं और प्रीति ही थे।


इसलिए मुझे सुबह जल्दी उतना पड़ा। मेरे पापा सरकारी नौकरी में थे, वो सुबह-सुबह ही ऑफिस चले जाते थे, लेकिन आज छुट्टी थी उनकी। 


मैंने सोचा, प्रीति को आज फिर से चोदूँगा और खूब मज़ा लूंगा, लेकिन मुझे किचन से आअआआअह! साब जी, हमममम धीरे करिए! अआआह ! की आवाज़ें आ रही थीं।


मैं चुपके से कमरे से बाहर निकला और मैने किचन की तरफ झाँका। वहाँ प्रीति झुकी हुई बर्तन धो रही थी, उसकी नाइटी फिर से ऊपर सरक गई थी, उसकी मोटी सांवली गांड बाहर झलक रही थी। 


लेकिन चौंकाने वाली बात ये थी कि पापा उसके पीछे खड़े थे, उनका हाथ प्रीति की कमर पर था और धीरे-धीरे नीचे सरका रहे थे। 


मेरे पापा 50 के आसपास के थे, लेकिन वो हट्टे कट्टे सेहतमंद इंसान थे उनका गठीला बदन, और उनका लंड भी मेरे लंड जैसा ही मोटा-लंबा था। वो कामवाली प्रीति मुस्कुरा रही थी, जैसे कोई राज़ साझा कर रही हो।


“अरे प्रीति रानी, तू तो कमाल की माल है यार,” पापा ने फुसफुसाते हुए कहा, उनका हाथ प्रीति की गांड पर पहुँच गया। प्रीति ने पीछे मुड़कर पापा की तरफ देखा, उसकी काली आँखों में वासना चमक रही थी।


“बाबूजी, आप भी ना... रविश बाबू तो रात भर मुझे चोदते रहे है, अब आपकी बारी।” ये कहते हुए वो हँसी, लेकिन उसकी आवाज़ दबी हुई थी। 


फिर पापा ने उसे जोर से खींच लिया, प्रीति का बदन पापा के सीने से सट गया। पापा का हाथ नाइटी के अंदर घुस गया और प्रीति की चूचियों को पूरी ताकत से मसलने लगा। 


“हाय रे बाबूजी, आह...अआआह! धीरे, कोई देख लेगा, उफ्फफ!” प्रीति सिसकी मेरे लंड को ठनका रही थी, लेकिन उसकी गांड पापा के लंड पर रगड़ रही थी।


मैं बाहर छिपा हुआ ये नज़ारा देख रहा था, मेरा लंड कड़क हो गया था। मुझे समझ नहीं आया ये क्यों हो रहा था? कल तक प्रीति मेरी थी,


लेकिन लग रहा था वो पापा को भी ललचा रही थी। पापा ने प्रीति का पल्लू सरका दिया, उसकी नाइटी ऊपर चढ़ा दी, और प्रीति की मस्त काली चूचियाँ बाहर उछल कर आ गईं। 


पापा ने एक चूची मुँह में भर ली और मज़े से चूसने लगे। प्रीति की साँसें तेज़ हो गईं थी, “आह बाबूजी, आपका मुँह कितना गर्म है... ओह हमममम!, चूसो और जोर से अआआह!” 


पापा का हाथ अब नीचे गया, उन्होंने प्रीति की चूत में उंगली डाल दी। प्रीति की गांड उत्तेजना से हिलने लगी, वो पापा के कुरते को पकड़कर सिसकारियाँ ले रही थी।


अचानक पापा ने प्रीति को घुमाया और किचन के टेबल पर झुका दिया। प्रीति की गांड उचक्के ऊपर हो गई, फिर पापा ने अपना पैंट नीचे सरका दिया। 


उनका मोटा भयानक लंड बाहर आया, कम से कम वो 7 इंच का तो होगा ही , उस सांप की नसें फूली हुईं थी। प्रीति ने पीछे मुड़कर देखा तो हैरानी से वो बोली,


“बाबूजी, आपका लंड तो रविश से भी ज़्यादा मस्त लग रहा है... आओ ना, चोदो अपनी रंडी को!” 


फिर पापा ने थूक लगाया उसकी चूत पर, और एक धक्के में अपना लंड अंदर घुसेड़ दिया। इस हमले से प्रीति चीखी, “आआह! ओऊहह्ह्ह ! बाबूजी, कितना मोटा है... आह ओह, फाड़ दिया चूत को मेरी!” 


पापा अपनी मर्दानगी पर गर्व से धक्के मारने लगे, पूरे किचन में ठप-ठप की आवाज़ गूँजने लगी। प्रीति की चूचियाँ हवा में झूल रही थीं, 


वो भी असली रण्ड की तरह टेबल पकड़कर गांड पीछे धकेल रही थी। “हाँ बाबूजी, चोदो जोर से आआह, उफ्फफ ! आह, हम्म... ओहद्ह! तेरी रंडी की चूत तेरे लिए ही बनी है आअआआअह!!” ये Antarvasna Hindi Sex Kahani आप Garamkahani पर पढ़ रहे है।


मैं ये नज़ारा सहन नहीं कर पाया। मेरा खून खौल रहा था, लेकिन लंड भी दर्द कर रहा था। मैं बेकाबू होकर अंदर घुस गया, “ये क्या कर रहे हो पापा?


प्रीति मेरी है!” पापा चौंके, उनका लंड प्रीति की चूत से बाहर निकल आया। प्रीति ने घूमकर मुझे देखा, उसकी आँखों में डर नहीं था, 


बल्कि उसकी नज़र शरारत दिखा रही थी।मेरे पापा शरम से लाल हो गए थे वो हिचकते हुए बोले, “रविश, तू... ये...” लेकिन प्रीति ने जल्दी से कुछ करा। 


वो मेरे पास आई, और अपना हाथ मेरे लंड पर रखा, और इशारे से बोली,“बाबू साब, गुस्सा मत हो... आओ ना हमारे साथ में मजा लो। 


तेरे पापा भी तो मर्द हैं, हम तीनों मिलकर देखना कमाल करेंगे!” उसने अपनी चूची मेरी तरफ उठाई, फिर निप्पल मेरी तरफ किया, जैसे वो अपने बच्चे को दूध पीने बुला रही हो।


मैं भी ठिठक गया। प्रीति की वासना भरी नजरें, उसका सांवला बदन देख मैं बहक गया उसकी चूचियाँ लटक रही थीं। पापा भी ये सब देख रहे थे, उनका लंड अभी भी खड़ा था। 


प्रीति ने इशारा किया, “बाबूजी, देखो रविश बाबू को भी बुलाओ...तीनों मिलकर थ्रीसम करेंगे, मैं दोनों के लंड संभाल लूँगी आप लोग संकोच न करे ।” 


पापा ने मुझे देखा, फिर वो मुस्कुराए। “चल बेटा, तेरी माँ-बहन तो गई हुई हैं, आज मजा लें ही लेते है। प्रीति जैसी रंडी मिलेगी नहीं, फिर कभी।”  ये Naukrani Ki Sex Story आप Garam Kahani पर पढ़ रहे हो।


पापा की बात के आगे मैं हार गया। प्रीति ने हमें किचन से लिविंग रूम में ले जाकर बिस्तर बिछा दिया। वो हमारे बीच में लेट गई, वो बिल्कुल नंगी हुई, 


उसकी चूचियाँ फैलीं हुई थी, चूत रस से गीली होकर चमक रही थी। “आओ बाबूजी, बेटा जी... एक साथ चोदो अपनी प्रीति को।” उसने हम दोनों के लंड पकड़ लिए।


पापा प्रीति के ऊपर चढ़ गए, उन्होंने उनका लंड सीधा चूत में घुसा दिया। प्रीति सिसकी लेते हुए चीखी, “आह बाबूजी, हाँ...ओहद्ह! अब रविश बाबू, तू मेरी गांड मार लो... दोनों छेद भर दो मेरे!” 


मैंने भी अपना लंड बाहर निकाला, वही 8 इंच का मोटा सांप, जिसने रात प्रीति की अपना दीवाना बनाया था और फिर मैने प्रीति की गांड पर थूक लगाया। 


प्रीति ने थोड़ी गांड ऊपर की, “हाँ बेटा, घुसेड़ दे... तेरी प्रीति की गांड तेरे लिए खुली है!” मैंने उसे धीरे से दबाया, और एक ज़ोर का धक्के में आधा लंड अंदर चला गया। 


प्रीति चीखी, “ओह माय गॉड! आअआआ ! दोनों लंड बहुत मोटे है... आआह, फाड़ दोगे मुझे तुम दोनों!” लेकिन वो उत्तेजना से हिल रही थी उसकी जवानी जोश में थी। 


पापा नीचे से धक्के मार रहे थे, मैं ऊपर से गांड में लंड अंदर बाहर कर रहा था। हमारे लंड एक-दूसरे से रगड़ रहे थे, प्रीति के पतले जिस्म के बीच में हमें उसके अंदर की गर्मी लंड पर महसूस हो रही थी।


“आह प्रीति, तेरी चूत कितनी टाइट है!” पापा गरजे, उनके धक्के तेज़ हो गए। मैं भी जोर लगाने लगा, “हाँ रानी, तेरी गांड भी कमाल है... आज तो दिन भर चोदूँगा बुरी तरह!” 


प्रीति हमारे बीच में फँसी थी, वो बस चीख रही थी, “आआह! ओंह्ह्ह! बाबूजी...हमममम आआह! बेटा ओहद्ह!... हाँ, दोनों चोदो हमममम अआआह!...


ओह, हिम्मममम! हम्म... उफ्फ ओह आअआआअह! दोनों लंड मिलकर मार रहे हैं मुझे अआआह!” हमारी रफ्तार और बढ़ी, ठप-ठप, चप-चप की आवाज़ें कमरे को गरमा ने लगी । 


प्रीति की चूचियाँ गेंद जैसे उछल रही थीं, पापा ने एक चूची मुँह में भर ली और चूसने लगे। मैंने फिर दूसरी को मसला। प्रीति हांफते हुए सिसकार रही थी, 


“चूसो निप्पल... आह, दूध निकल रहा है मेरा.. ओह हमममम, पिलो दूध मेरा!” उसके निप्पल से हल्का दूध सा निकला, लेकिन हमें क्या पता था कि उसमें नींद की दवाई मिली हुई थी।


हम दोनों थ्रीसम में डूबे थे। पापा चूत में धक्का मारते थे, मैं गांड में लंड डालता निकलता रहा । प्रीति के दोनों छेद लंड से भरे हुए, वो बुरी तरह काँप रही थी।


“हाँ बाबूजी, अआआह और तेज़... उन्ह्ह्ह! बेटा आगाह तेरी गांड मारने का तरीका अमेजिंग है। अआआह... आआह, मैं झड़ने वाली हूँ!” 


पापा ने कहा, “प्रीति रानी, तेरी चूत ने मेरा लंड पकड़ लिया है.. उफ्फ!” मैं भी बोला, “ प्रीति तेरी गांड भी सिकुड़ रही है...मगर आज नहीं निकलेगा ये लंड मैं तो चोदूँगा तुझे भरपूर!” 


ये Desi Sex Story आप Garam Kahani पर पढ़ रहे है। करीब 15 मिनट चली ये चुदाई, हम तीनों पसीने से तर थे।


प्रीति पहले झड़ी वो झटके मारते हुए बढ़ बढ़ाई, “आआह! ओह गॉड अआआह ... हाँ, झड़ गई मैं अआआह संभालो मुझे हिम्मममम... हम्म!”


 उसकी चूत-गांड सिकुड़ गईं और हमारे लंड दब गए।फिर पापा बोले, “बेटा, साथ में झड़ते हैं इसके अंदर... आज भर देंगे इसके दोनों छेद!”


मैंने भी जोश मैं हाँ कहा। हमने तेज़ी से चरमसुख के आखिरी धक्के मारे, पापा का लंड चूत में फूला जा रहा थे, मेरा गांड में पिस रहा था। 


“आह प्रीति... ले मेरा रस!” पापा गरजे, उनका पानी चूत में छूटा। मैं भी, “हाँ रानी, तेरी गांड भर... ले मेरे रस से!” मेरा गर्म रस गांड में भर गया।


 प्रीति चीखी, “ओह, दोनों का पानी! अआआह... भर गया मुझे... आआह!” हम तीनों थक चुके थे हम नंगे ही लेटे रहे, हाँफते हुए पता ही नहीं हमारे होश को कुछ तो हुआ। 


प्रीति ने कब अपनी चूचियाँ ऊपर की पता नहीं था बस उसकी मुझे आवाज़ आई, “बाबूजी, बेटा... चूसो न मेरे निप्पल , थकान उतरेगी।”


पापा ने एक निप्पल मुंह में लिया, वो उसकी चूंची आधी नींद में चूसने लगे। मैंने भी वासना और नींद के नशे में दूसरा निप्पल मुंह में लिया। 


उसके दूध का स्वाद मीठा था, बिल्कुल दूध जैसा। लेकिन अचानक आँखें ज़्यादा भारी हो गईं। “ये... क्या...” पापा बोले, लेकिन आखिर नींद आ ही गई। मैं भी सो गया, गहरी नींद में।


प्रीति मुस्कुराई होगी। उसके निप्पल पर उसने नींद की दवाई लगाई थी, जो किसी डॉक्टर से उसने चुराई थी। मेरी माँ-बहन रिश्तेदारों के यहाँ गईं थीं, हमारा घर खाली था। 


तो प्रीति उठी, नंगी ही वो कमरे से बाहर गई। वो लड़खड़ाती हुई पहले किचन में गई, और पानी पीया। फिर मास्टर बेडरूम में जाकर अलमारी खोली, उसने माँ के गहने निकाले – सोने की चूड़ियाँ, हार, और पैसा ।


उसने गहने सब बैग में ठूँसे। फिर ड्रॉयर से और पैसे लिए – पापा की सैलरी का पैसा, हजारों के नोट में था। उसने सब बैग में लिया। 


फिर लिविंग में आकर हमें देखा, हम नंगे सोए थे, लंड खुले लटक रहे थे। “शुक्रिया बाबूजी, बेटा जी...!


मजा आया आप लोगो के साथ बहुत, लेकिन अब अलविदा कहने का समय है।” वो हमारे ही बाथरूम जाकर नहाई फिर आकर।


उसने अपना वो तांबे का बक्सा उठाया और उसमें से खूबसूरत से कपड़े पहनकर तैयार हुई फिर दरवाज़ा खोला। और बाहर निकली। उसने टैक्सी रोकी और बैठकर निकल गई। 


दोपहर को मेरी माँ-बहन लौटीं, तो घर में हंगामा हो गया। पापा और मैं जागे, हमारा सिर दर्द कर रहा था ।“कहाँ है प्रीति?” माँ चीखी। हम चुप थे। फिर वो अलमारी खुली, जिसमें से सब गायब। 


हमारे घर पुलिस आई, लेकिन प्रीति गायब थी। सी सी टीवी कैमरा को खंगाला गया तो मेरी पापा और प्रीति की Kamwali Ke Sath Chudai Wali Kahani घर में सबको पता चल गई और हमारा घर टूट गया।


लेकिन वो रात की यादें... कभी जाएंगी नहीं मेरी वो सांवली रानी, जो बाप-बेटे से चुदकर उनकी जिंदगी चोदकर चली गई। इस कहानी के बारे में अपने विचार कमेंट में बताए और मेल करे hashmilion5@gmail.com पर।


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