तलाकशुदा पड़ोसी रोज़ी के साथ सुहागरात की चुदाई की दांस्ता 02

PADOSI KI ANTARVASNA CHUDAI KI KAHANI : इस कहानी के पहले भाग "तलाकशुदा पड़ोसी रोज़ी के साथ सुहागरात की चुदाई की दांस्ता 01" में आपने हमारी मस्ती से लेकर शुहगरात मन्नाने के बारे में जाना। अब जाने आगे HONEYMOON में क्या होता है!


अब आगे की कहानी :


किनारे वाली टेबल पर एक दूध का ग्लास रखा था वो नॉर्मल से ज़्यादा बड़ा ग्लास था, अचानक पीछे से दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ आई मैं तुरंत पलटा तो मेरी नज़रों को खुदपर यकीन नहीं हुआ।


रोज़ी जी का चेहरा चमक रहा था उनकी आँखें लाल हो रही थी होठ मस्त लाली से रोशन थे, आँखें काले काजल में डूबी मुझे देख रही थी।


बाल खुले हुए इठला रहे थे उसका गोरा गोरा गला चांदी सा चमक रहा था, चूंची एकदम कसी हुई लाल ब्रा में दबी हुई आहे ले रही थी। पतला नंगा पेट और उसकी नाभि की गहराई मुझे डुबाने के इरादे में थी।


उनकी गांड़, लाल पैंटी को उतारकर फेकने के लिए पगला रही थी।


उनकी मस्त गोरी टांगे एकदम बटर चिकन वाले लैग पीस की तरह मेरे मुंह में पानी ला रही थी।


वो मेरे पास अपनी कैट वॉक वाली चाल चलते हुए एक बार घूमते हुए आई उन्होंने आगे से लेकर पीछे तक मुझे एक नज़र देखने को दिया।


वो दूध का ग्लास लेकर मेरे करीब आई, उन्होंने मुझे एक डिब्बा हिलाते हुए दिखाया वो सेक्स की पावर और समय बढ़ाने वाली गोलियां थी।


रोज़ी जी ने 2 गोलियां निकाली और उस ग्लास में डाल दी, फिर एक टांग उठाकर मेरी कमर पर लगाई, वो मुझसे चिपक गई और गाल को चूमा।


फिर मुझे उस ग्लास का दूध पिलाया मैने एक घूंट पी तो उन्होंने ग्लास लेकर अपने मुंह से लगा लिया, फिर उन्होंने एक घूंट पिया और वापस मुझे दिया इस तरह थोड़ा थोड़ा करके हम दोनों ने वो दूध खत्म करा।


वो गोली पूरी तरह नहीं घुली थी तो उन्होंने एक गोली निकालकर खाने की कोशिश की मगर मैने उनसे गोली लेली फिर उसे खुद अपनी ज़बान पर रखा और उनको खिलाई, ऐसे ही मैने उनके होठों से वो गोली खुद खाई।


मैं चुदाई की तरफ आगे बढ़ा मगर उन्होंने मुझे रोक दिया।


और बोली “अभी नहीं, दिन भर हम दोनों को खुद पर काबू करना है। रात फिर सारी हदें तोड़ेंगे, और हां तुम मूठ नहीं मारोगे आज।”


वो बोलते हुए अपना हाथ मेरे लन्ड पर लेकर गई और उसे दबा दिया।


भाई साहब वो दिन मैने कैसे गुज़ारा बस मैं ही जानता हूं, वो एक अलग ही कहानी है फिर किसी दिन सुनाऊंगा आज चुदाई वाली बात पूरी करता हूं।


रात के 8 बज रहे थे रोज़ी जी ने अपने हाथ से खाना बनाया था, दोपहर में हम साथ में 2 घंटा सोए थे वो मुझसे चिपक कर सोई उन्होंने धमकी दी थी के मैं चूत को छुता हूं तो वो मुझे आज चोदने नहीं देंगी।


मैं रिस्क नहीं ले सकता था चाहता तो ज़बरदस्ती कर लेता, एक दो बार ख्याल तो आया मगर दोपहर उनका सोता हुआ चेहरा देखा मैने, तो उनकी चेहरे में सुकून था तो मैं बस उन्हें देखता रहा।


पूरे दिन रोज़ी जी ने मुझे अपने पीछे घुमाया खाना बनाते समय कपड़े धोते समय हर काम में उन्होंने मेरी मदद ली और जानकर मुझसे अपने जिस्म को रगड़ती रही थी।


आखिर कार रात हुई हमने खाना खाया, फिर छत पर बिस्तर तैयार करा आसपास के घर में बस बड़े बुजुर्ग थे अगले 4 दिन हम जैसे चाहते वैसे घूम सकते थे।


रोज़ी जी खुद तो सिर्फ ब्रा पैंटी में थी मगर मुझे कपड़े उतारने से मना कर दिया था।


हम लगभग 9 बजे बिस्तर पर बैठे कुछ बाते की फिर उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और बेडरूम की तरफ ले गई।


मुझे समझ नहीं आया के जब बेडरूम में ही करना है तो छत पर मेहनत कियू कराई।


मैने ये बात उनसे पूछी भी तो उन्होंने प्यार से जवाब दिया “इतना गोर नहीं देना चाहिए हर चीज़ पर की वासना बुरा मान जाए”।


रोज़ी जी की आवाज़ मुझे हमेशा से कामुक लगती है, हम बेडरूम में आ गए उन्होंने अपनी कामुक आवाज़ में कहा “मैं तुम्हारी हूं मेरी प्यास मिटादो रवि बस तुम हो जिसने मुझे समझा है, आज नहीं रोकूंगी तुमको”।


मैं आगे बढ़ा मैने उनको पहले माथे पर चूमा फिर नाक पर चूमा फिर एक एक बार गालों को चूमा, उन्होंने आँखें बंद करली थी, वो अपने आपको मुझे समर्पित कर चुकी थी। 


मैं बस एक पल पीछे हुआ और ऊपर से नीचे तक उनहे देखा इस एहसास को मैं आप लोगो की कल्पना पर छोड़ता हूं के उस समय वो कैसी लग रही होंगी। ये Aunty की Antarvasna Hindi Sex Story आप Garamkahani.com पढ़ रहे हो।


मैने उनका चेहरा अपने हाथों में लिया और अपने होठों में उनके गहरे लाल होठ दबा लिए। मैं उनके होठ चूसते चूसते उनके ऊपर चढ़ता चला गया।


हम दोनों एक दूसरे के होठ बहुत प्यार से चूसे जा रहे थे, मैं होठ चूमते हुए नीचे आने लगा तो उन्होंने हममम! रवि आह! हम दोनों पर गोली का भरपूर असर हो चुका था आँखें वासना से सुर्ख थी।


मैने गर्दन को चूमते हुए उनकी लाल ब्रा उतारी, फिर एक चूंचे को पकड़ा और दबाना शुरू करा दूसरे के निप्पल को बच्चे की तरह मैं चूसे जा रहा था। फिर एक को छोड़ा तो दूसरे को पकड़ लिया।


दोनों चूचों को बारी बारी जोश के साथ में दबाता और पीता चला जाता, फिर मैने पैंटी को चूमा और दांतों में दबाकर उसे उतार दिया, मस्त लाल चूत एकदम साफ चमकदार दिखाई दे रही थी उसपर हल्की सी चूत के रस की परत थी।


मेरा पूरा मन था कि मैं रोज़ी जी को वैसे ही तड़पाऊं जैसे वो मुझे पिछले एक साल से तड़पाती आ रही है।


मगर मेरा लन्ड मुझे इसकी इजाज़त नहीं दे रहा था, मैने उनकी पैंटी उतारी और लन्ड को चूत पर रख दिया।


उनकी हवस भरी अआआह! निकली मैने उसे सुनकर एक ज़ोरका धक्का मारा, वो आआअआहआह! चिल्लाती हुई पूरा 7 इंच का लौड़ा सह गई, मेरे लन्ड की लंबाई 6.5 है मगर गोली का असर और इतने कंट्रोल के बाद वो थोड़ा बड़ा हो गया था।


मैं उनपर गिरा, और तेज़ी से धक्के मारने लगा वो आह! आगाह! उफ्फ! 


रवि आगाह! आआह जान ओह!


मैं अपनी पूरी ताकत से उनको चोद रहा था उनके मोटे चूंचे मैने दोनों हाथों में भींच रखे थे, वो अपनी टांगे मेरे पेट पर बांधी हुई थी।


उनके बाल तेज़ी से उछल रहे थे, फिर उन्होंने मुझे पलटा और मेरे ऊपर भूखी शेरनी जैसे बैठ गई मेरा लन्ड उनकी चूत में ही था, उन्होंने अपने बालों में हाथ घुमाए।


और बेइंतहा तेज़ी से गांड़ को उठाकर चुदना शुरू कर दिया, वो आआह! अआह!


ओह अआआह!


हमममम आगाह! रवि हाआआ!


कहते कहते रोने लगी, वो बहुत तेज़ आवाज़ के साथ रोटी जा रही थी और लन्ड पर कूदती चली जा रही थी।


उनकी आँखें आंसुओ में भीगी पढ़ी थी,


 अआआह! ओह अआआह!


यूँह्ह्ह अआआह रवि आगाह हाहाहाह। वो पूरे जोश में चुदवा रही थी और ज़ोर से रोती जा रही थी।


गोली का असर बहुत तगड़ा था, करीब 1 घंटा वो रोते रोते मुझसे चुदाती रही, वो एक तरह से मुझे ही चोद रही थी। हम दोनों की आगाह! ओह! आआह!


आआह! अआह!


ओह अआआह! ये Desi Hindi Chudai Ki Kahani आप Garamkahani.com पर पढ़ रहे है।


हमममम आगाह! रवि हाआआ!


हमममम! मैं उनसे पूछना चाहता था कि क्या बात है मगर पूछना ठीक नहीं लगा, क्योंकि मैने एक पल को मुंह खोला था तो उन्होंने उंगली रखकर मुझे चुप कर दिया।


फिर उसी उंगली को चूसते चूसते में नीचे से धक्के दे रहा था वो ऊपर से धक्के का जवाब दे रही थी।


एक घंटा ऐसे ही गुज़रा हम थककर चूर हो गए फिर करीब बीस मिनट मैने उनकी गांड़ चोदी उनकी गांड़ बहुत टाइट थी मगर गोली की कृपा थी के गांड़ फाड़ ही डाली मैने।


अआआह ओह! अअआआह !


साले आआह! चिल्लाती हुई वो झड़कर ढेर हो गई, मैने भी धापाधप उनकी गांड़ मारते हुए लन्ड का सारा रस गांड़ में ही निकाल दिया।


ज़िंदगी में पहली बार मेरा इतना रस निकला था कि उनकी गांड़ से बाहर निकलने लगा था।


एक सुकून भरी आअआआअह हम दोनों की साथ साथ निकली और हम एक दूसरे के ऊपर सो लिए।


बीच आधी रात को हमारे फोन में अलार्म बजा उन्होंने मुझे उठाया , तब उन्होंने मुझे बताया के वो रो कियू रही थी जिससे मेरा मूड खराब हो गया।


उसके बाद वो मुझे छत पर ले गई वहां उन्होंने मुझे एक कहानी सुनाई उस दौरान हमने फिर से चुदाई करी।


तो दोस्तो कैसी लगी आपको ये कहानी कॉमेंट करके ज़रूर बताना मुझे आपका इंतज़ार रहेगा। जो कहानी मुझे रोज़ी जी ने सुनाई आप उसे ज़रूर पढ़े (हॉस्पिटल में हुई डॉ साहिबा की थ्रीसम चुदाई!)


मैं मिलता हूं आपसे अगली कहानी में तब तक के लिए अलविदा।


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