सर्दी को दादी मां की चूत की गर्मी से भगाया!

Family Sex Story : कैसे मेरी दादी माँ ने सर्दी में मेरे लंड को चूसकर मुझे नहलाया जिसके बाद मैने उनको जब गैर मर्द से चुदवाते देखा तो हमारे बीच क्या क्या हुआ!


मेरा नाम अनंत है। मैं उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूँ। मेरी आयु 19 साल है। हमारे घर में मेरे पापा-मम्मी, दादा-दादी रहते हैं। मेरी दादी का नाम निरमला है और उनकी उम्र 50 साल है। मैं अपने घर का एक लोता चिराग हूं इसलिए वे मुझे अपना बेटा या पोता नहीं बल्कि पूरी दुनिया मानती हैं।


मेरे दादा एक सरकारी आदमी है और शहर में ड्यूटी करते है फिलहाल ये उनके रिटायरमेंट वाले आखरी कुछ महीने है इसलिए थोड़ा ज़्यादा मेहनत करते हैं।


चूंकि दादा इधर बहुत कम आते हैं तो मैं दादी के साथ उनके कमरे में ही सोता हूँ। खासकर मुद्दे की बात की तो दिसंबर की कड़क सर्दी में, जब ठंड इतनी पड़ती है कि हड्डियां कांपने लगती हैं, तो हम दोनों एक ही बिस्तर पर रजाई तानकर लिपटे रहते। दादी की गर्माहट ही मेरी रातों की सच्ची साथी बन जाती है।


मैं जब कॉलेज में आ चुका था, तो मेरी जवानी उफान मारने लगी उसपर साले हरामी दोस्तो ने चुदाई के सुहाने सपने दिखा दिया और तभी से मुझे दादी बहुत आकर्षक लगने लगी थीं। उनका फिगर हमेशा से बहुत सेक्सी है।


जब वे अपनी गांड मटका कर चलती हैं तो सबके लंड खड़े हो जाते है वे सच में इस उमर में भी इतनी सेक्सी हैं इसका मुझे कॉलेज जाकर एहसास हुआ।


उनके गहरे गले वाले ब्लाउज में से आधे से ज्यादा दिखते गोरे रंग के मम्मे और लाल सुर्ख होंठ तो इतने मादक हैं कि किसी को भी पागल कर दें। उनके पीछे से ठुमकते हुए चूतड़ तो बहुत ही ज्यादा कामुक और भड़काऊ हैं।


जब वे अपनी गांड मटका कर चलती हैं तो ऐसा लगता है मानो दो बड़े बड़े तरबूज हिल रहे हों। मेरी दादी का 38-34-40 का फिगर है जो बड़ा कामुक कर देने वाला है। उम्र तो 50 की है, लेकिन सारी उम्र उनके जिस्म में कहीं गुम हो गई लगती है – बस वासना की आग बाकी है जो दादी के स्वभाव में दिख जाती है।


यह बात है उस वक्त की है जब मेरा 19वां बर्थडे आने वाला था। दिसंबर की कड़क सर्दी चरम पर थी। ठंड इतनी थी कि रात को बर्फ खिड़की पर जमी रहती। मैं बर्थडे के लिए घर पर ही था, लेकिन मन में दादी के लिए कुछ और ही चल रहा था।


मैं उस समय रात रात भर जागता था, सर्दी की ठंड में दादी के साथ बिस्तर पर लिपटकर सोता और उनके जिस्म को महसूस करता था। दादी भी शायद जागती थीं, पर वे कभी-कभी सो जाती थीं तो मैं उनको देखता रहता था।


उस वक्त दादी एक गर्म नाइटी पहन कर सोती थीं तो उनकी नाइटी उनकी टांगों पर ऊपर को सरक जाती थी, जिससे कभी कभी उनकी दूधिया जांघें मुझे वासना से गर्म कर देती थीं। और मुझे उस वक्त ऐसा लगता था की यहीं दादी के पैर उठा कर उन्हें चोद दूँ।


ये Dadi Ki Chudai Ki Kahani आप Garamkahani पर पढ़ रहे हैं।


मगर मेरी गांड में इतना दम ही नहीं था की दादी के साथ ऐसा कर सकूँ। सर्दी की रातें हमें करीब ला रही थीं, लेकिन डर भी तो था – आखिर वो दादी हैं। वे मेरे लिए सुबह जल्दी उठकर खाना तैयार करतीं है। मैं अब कभी भी मौका देखकर दादी के जिस्म को सहलाने की कोशिश कर लिया करता था।


जब भी वे सुबह जल्दी उठकर अपने कमरे में बने अटैच बाथरूम में जाकर नहातीं, तो मैं दरवाजे की झिरी से झांक कर उनको चुपके से देखता और उनके नंगे जिस्म को देख कर अपने लौड़े को सहलाने लगता।


दादी का बदन सर्दी में और चमकदार लगता – गोरी त्वचा पर पानी की बूंदें जैसे मोती की बरसात लगती। फिर जैसे ही वे बाहर निकलतीं तो उनके निकलते ही मैं अन्दर चला जाता। उनकी पैंटी वहीं पड़ी होती थी।


 मैं उसे उठा कर सूँघता और अपने लौड़े पर लपेट कर लंड को हिलाता। सच कह रहा हूँ दोस्तो, कैसे ही बताऊं उनकी पैंटी से चिपकी उनकी चुत की मादक महक को सूंघ कर मैं मदमस्त हो जाता।


जो ही कमाल की खुशबू आती थी। उम्र की परवाह किए बिना, वो महक जवान औरतों से भी ज्यादा गहरी लगती थी। मुझे रहा न जाता तो मैं अपने लौड़े की मुठ मारता और सारा माल उनकी पैंटी पर ही गिरा देता।


यहीं मुझसे चूक हो जाती के मैं उनकी पैंटी में अपना वीर्य लगा छोड़ देता था। एक दिन दादी को शक हुआ, तो उन्होंने कहा- आज से मैं तुम्हें नहलाऊंगी! 


सर्दी में नहाना तो मुश्किल था, लेकिन दादी का ये कहना मेरे दिल में आग लगा गया। यह सुनकर मैं थोड़ा शर्मा गया। मैंने उनसे कहा- नहीं आप क्यों ऐसा करोगी … मुझे नंगा देख कर शर्मा न जाओगी? वे बोलीं- मैंने तुम्हें छुटपन में नंगा नहाते हुए देखा है! मुझे कैसी शर्म!


मैं चुप रह गया और नहाने चला गया। तभी दादी भी अन्दर आ गईं। बाथरूम में भाप भरी हुई थी, सर्दी से बचने के लिए गर्म पानी दादी ने पहले से तैयार कर दिया था।


उन्होंने मुझसे कहा- अपने कपड़े उतारो!


मैंने अपने कपड़े उतार दिए। मैं उस दिन जल्दी जल्दी में ये भूल गया कि मैंने अंडरवियर नहीं पहना है। उस वक्त हिचकिचाहट के चलते मेरा लौड़ा भी लटका हुआ था। मैंने कपड़े उतारे तो दादी ने मेरे लटके हुए लौड़े को देखते हुए कहा- नीचे बैठो! मैं नीचे बैठ गया।


अब तक मेरा लंड फनफनाने लगा था। मैं उसे अपनी टांगों में दबा कर छिपाने की कोशिश करने लगा था। दादी ने भी ऐसा दिखाया था मानो उन्होंने मेरे लौड़े को अभी तक देखा नहीं हो। कुछ देर बाद दादी बोलीं- खड़े हो जाओ, तुम्हारे पैरों में साबुन लगाना है!


मैं जैसे ही खड़ा हुआ, तो दादी साबुन लगाने के लिए नीचे झुकीं। उसी वक्त मेरा तना हुआ 8 इंच का लौड़ा उनके मुँह के सामने आ गया। वे बड़ी हैरानी से मेरे लौड़े को देख रही थीं। मैं भी सहम गया था। अब दादी घूरती हुई सिर्फ मेरे मूसल लौड़े को देख रही थीं।


मैंने कहा- दादी साबुन लगाओ न! तब उन्हें होश आया और वे साबुन लगाने लगीं। ये Desi Antarvasna Family Sex Kahani आप Garamkahani पर पढ़ रहे है। 


दादी बोलीं- तुम्हारे वहां साबुन लगाऊं?


मैं कुछ समझा नहीं, तो मैंने पूछा- कहां? उन्होंने लौड़े की तरफ इशारा करते हुए कहा- यहां!


मुझे पता था कि वे मेरे मूसल ब्रांड लंड को देख कर मूड में आ गई हैं। दादी की आंखों में वो वासना की चमक थी जो सालों की सर्द रातों में दबी हुई थी। मैंने उनसे मज़ाक करते हुए कहा- आप तो बोलती थीं की शर्माती नहीं हो। अब ये कैसे हुआ ? आप लगाओ न साबुन मेरे उधर!


दादी ने कहा- नहीं मैं नहीं शर्माती, अभी लगाती हूँ। यह कह कर उन्होंने मेरे लौड़े को हाथ में ले लिया। उनके हाथ लगाने से मेरा लौड़ा और भी ज़्यादा कड़क हो गया। मैं धीमी आवाज में ‘आहें’ भर रहा था। 


वे लगातार मेरे लंड से खेलने लगी थीं। मुझे पता ही नहीं चल रहा था कि मुझे जो भी हो रहा है। दादी के हाथों की गर्मी सर्दी भरी सुबह में आग लगा रही थी। दादी ने उसी समय मेरे लंड को अपनी नाक के पास खींच कर लंबी सांस भरी मानो वे लंड की खुशबू सूंघना चाह रही हों।


उसी वक्त मैंने अपनी दादी के मम्मे पकड़ लिए और दबाने लगा। वे भी पूरी मस्ती में आ गई थीं। दादी के मम्मे भारी थे, लेकिन उनकी नरमी – उम्र की देन थी। दादी ने मेरी आंखो में देखा हमारी नज़रे मिली वो बिल्कुल मेनका लग रही थी जो किसी की भी साधना भंग कर सकती थी।


उन्होंने मेरी नज़रों को पकड़े हुए मेरे लंड के टोपे पर चूम लिया।


भाई मेरी सीसआईईएस निकल गई, उस ठंड में दादी के होठों की गर्मी ने मुझे तड़पा दिया। दादी अपने एक हाथ को चूत पर लेजाकर सहलाने लगी।


वो अपने होठों को गोल गोल बनाकर मेरा लंड सदप्प सदप्प कर के खा रही थी।


फिर दादी ने एक कातिलाना मुस्कान देते हुए अपनी ज़बान बाहर निकाली और मेरे लंड को चाटी फिर धीरे धीरे वो लंड को मुंह में लेती चली गई, मुझे अपने ऊपर यकीन नहीं हो रहा था मेरी दादी मेरी लंड को चूस रही थी।


उन्होंने मेरी गांड़ को पकड़ा और लंड को मुंह में दबाया मैं अपने हाथ उनके मोटे मम्मो पर लेजाकर मसल रहा था।दादी लंड को मुंह के अंदर बाहर कर रही थी मेरी तो बस आह, ओंह्ह्ह! आआह दादी! उन्ह्ह्ह! की आवाज़ निकल रही थी।


दादी जी मेरे लंड को चूसती साथ ही मेरे आंड भी सहलाती उन्होंने मेरे लंड को चूस कर चिकना बना दिया था फिर उन्होंने अपनी आँखें खोली और फिर से मुझसे नज़रे मिलाई वो मुझे देखते हुए लंड चूस रही थी। ये XXX Family Chudai Ki Kahani आप Garamkahani पर पढ़ रहे है।


दादी ने होठों में लंड ज़ोर से दबाया मगर उनकी इस हरकत से में निढाल हो गया सर्दी की सुबह में दादी ने मेरा गर्म लवा निकलवा दिया। मैं बस एक अआआह! के साथ पूरा दादी के मुंह में झड़ गया, मेरी हालत देखकर दादी हंसने लगी। कुछ देर के बाद किसी ने दरवाज़ा खटखटाया।


तो हमें होश आया और हम दोनों अलग हो गए। दादी ने आवाज देकर कहा- अभी आती हूँ। वे कुछ देर बाद बाहर चली गईं। उनके जाने के कुछ देर बाद मैं भी बाहर आ गया और कॉलेज के लिए चला गया। जब मैं वापस आया, तो घर में सिर्फ दादी थीं।


मैंने पूछा, तो उन्होंने बताया कि तेरे पापा-मम्मी बाहर गए हैं, वे लोग 7 दिन तक नहीं आएंगे। मैं भी कुछ सोचने लगा और सर हिलाता हुआ अपनी कोचिंग क्लास चला गया। मेरे मन को बहुत बुरा लग रहा था की मैंने दादी के साथ ऐसा करा।


मैं ट्यूशन पहुंचा, पर आज उधर ऑफ था तो मैं वापस घर आ गया। सर्दी की दोपहर में घर सूना लग रहा था। घर में से आवाज़ें आ रही थीं। मैंने जाकर देखा तो दादी किसी गैर मर्द के साथ चुद रही थीं। मैं छिप कर देखने लगा। उस आदमी का लौड़ा केवल 5 इंच का था।


दादी उसके लौड़े को अपने मुँह में ले रही थीं। वो आदमी शायद दादी का पुराना प्रेमी था, शादी से पहले का – दादा से पहले का राज। उस आदमी ने लंड चुसवाने के बाद दादी को चित लिटाया और उनकी चूत पर लौड़ा सैट करके एक धक्का दे मारा।


उसका लंड अन्दर घुसा तो दादी मीठे दर्द से चिल्ला उठीं। वह दादी का शादी से पहले का प्रेमी था। दादी को उसने आज 30 साल के बाद चोदा था। पर मैंने देखा कि उसके लौड़े में भी दम नहीं बचा था। उम्र ने उसे भी थका दिया था।


थोड़ी देर बाद वह दादी को चोदते चोदते ही थक गया, तो वह हांफने लगा।


दादी उस पर गुस्सा होने लगीं की साले मैने तुझे इसलिए बुलाया था? वह भी गाली देने लगा- साली रंडी एक तो तेरी चुत चोद रहा हूँ और बहन की लौड़ी नखरे चोद रही है।


उन दोनों में झगड़ा हो गया। दादी ने बातों ही बातों में उससे बोला- तुम्हारे लौड़े से ज़्यादा अनंत का लौड़ा बड़ा है। यह सुनकर उसने भी कह दिया तो फिर जाकर उसके लौड़े से ही चुदवा ले! वह अपने कपड़े पहन कर वहां से चला गया।


अब मुझे अपनी दादी को चोदने का बहुत मन हो रहा था, पर डर भी लग रहा था। सर्दी की वो शाम मेरे बर्थडे की पूर्व संध्या थी।


कुछ देर बाद मैं अन्दर आया और दादी से कहा- दादी आप मुझे फिर से नहला सकती हो क्या? दादी का मूड खराब था, तो वे ‘नहीं’ बोलीं।


मैं ‘ठीक है’ बोला और वहां से बाथरूम में चला गया। मुझे पता था कि दादी ज़रूर आएंगी और ऐसा ही हुआ। दादी ने कहा- दरवाज़ा खोल! मैंने ‘नहीं’ बोला, तो वे मुझे डाँटने लगीं।


अब इसके आगे जो हुआ उसे जानने के लिए थोड़ा इंतज़ार करे अगली कहानी में आपको वो बताऊंगा जो आप जानना चाहते हो। तब तक कमेंट में बताओ के यहां तक आपको कहानी कैसी लगी?


Share This Story :  


यह कहानी आपको कैसी लगी?

❤️ Love 0
😍 Wow 0
😂 Funny 0
😢 Sad 0
😡 Angry 0
👏 Clap 0

💬 Leave a Comment :-

📝 Comments :

No comments yet. Be the first to comment!