गर्लफ्रेंड की माँ चोद दी अपने रूम में 02

इस कहानी का पहला पार्ट : गर्लफ्रेंड की माँ चोद दी अपने रूम में 01


मैंने आंटी को बिस्तर पर लिटाया और बिस्तर के किनारे अपने घुटनों पर आकर उनकी चूत के पास जाने लगा। 


जैसे ही मैंने अपना मुँह उनकी चूत पर लगाया वो बस एकदम से सुन्न हो गई। उन्हें ज़ोर से चादर को पकड़ लिया अपने होठों को डांटो के नीचे दबा लिया।





मैंने उनकी चूत को चाटना शुरू किया तो उनकी सिसकियों ने कमरे को भर दिया था। थोड़ी देर चटनी के बाद उनका शरीर टाइट होने लगा।


उनकी चादर पर पकड़ टाइट होने लगी। अपना सर इधर उधर कर रही थी।


उसके बाद ज़ोर ज़ोर से सांसे लेने लगी। बिस्तर पर चादर ढीली हो गई पर मैं नहीं रुका। मैं उनकी चूत को धीरे धीरे चाटने लगा।


वो सिस्किया लेते हुए बोले रही थी की।  “ सुरेंद्र, रुक जाओ।” पर नहीं रुका और नहीं कुछ बोला बस उनकी चूत को चटने लगा।


थोड़ी देर बाद चुत चाट-ते हुए मैंने अपनी 2 उंगली उनकी चुत में डाल दी। और अंदर उनकी चूत में रगड़ने लगा। उनको तो मानो क्या मिल गया हो।  


उनका बदन मेरा इतना अच्छा साथ दे रहा था कि मन नहीं कर रहा था मुँह हटाने का।


मैं बस उनकी चूत को अन्दर से उंगली से रगड़ रहा था। और बहार से जिब से और वो बस सिस्किया ले रही थी।


थोड़ी देर बाद उन्हें मेरा सर पकड़ कर ज़ोर से अपनी चूत में दबाने लगी। उनकी सांसें चढ़ने लगीं और थोड़ी देर बाद वो फिर से ऑर्गेज्म हुआ।


मेरे सर को पकड़कर पीछे हटाने लगी और बोली, "अब हट जाओ और नहीं सह पाउंगी मैं ये।" मैं हट गया आंटी की आंखें बंद थी ज़ोर ज़ोर से सांसे ले रही थी।


मुख्य सीधी आंटी के ऊपर जाकर लेट गया और उनको स्तन के ऊपर अपना चेहरा रख लिया।


थोड़ी देर बाद आंटी अपना हाथ मेरे लंड की तरफ ले गई और उसे ऊपर नीचे करने लगी। बोली,


"अब पता चला मुझे कि ये मेरी बेटी हर टाइम इतना मस्ती के मूड में क्यों रहती है। इतना अच्छा चूत अगर कोई चाटे वो तो मस्ती में ही रहेगी।" मेरे लंड की तरफ आकार उसके मुँह में लेकर चुनने लगी ज़ोर ज़ोर से।


वो इतना ज़ोर से चुन रही थी कि आवाज़ आ रही थी उनके मुँह से। वो एकदम लंड को बाहर निकालती है अपने मुँह से उसपर थूक कर पूरा गीला करके उसे फिर मुँह में लेती अंदर तक।


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मैं आंटी के बाल पकड़ कर आंटी का मुँह चोदने लगा ज़ोर ज़ोर से।


वो पूरा साथ दे रही थी।  आंटी मेरे बॉल्स को पकड़ कर सहला रही थी जिससे मुझे लग रहा था मैं जल्दी छूट जाऊंगा।


आंटी पूरा लंड मुँह में ले रही थी एक बारी में। फिर बाहर निकल कर फिर से एक बारी ईन पूरा लंड अपने मुँह में ले रही थी।


ये देख कर मैं निकलने वाला था। मैंने कहा, "आंटी मैं निकलने वाला हूं," तो अनहोनी जैसा इस बात पर ध्यान ही नहीं दिया। और लंड को चूसती रही और मैं एकदुम से निकल गया सारा का सारा।


उनके मुँह में ही सारा निकल गया। उसके बाद वो मुँह से लंड को निकल कर सारा का सारा निगल गई।


वो बोली कि, "मन तो करता है तुझे अपनी चूत में झड़वाउ। मेरी चूत भी तेरे इस माल का स्वाद लेना चाहती है। पर क्या करे मुँह में ही निकालना पड़ता है। इसे तो ज़रा भी बर्बाद ना होने दो।"


उसके बाद वो मेरे साइड में आकर लेट गई और बोली, "अब जल्दी से तैयार हो जाओ मेरी चुदाई करने के लिए।"


मैंने उनका हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया और बोला, "कर लो तैय्यार खुद।" और वो बहुत प्यार से धीरे धीरे मेरे लंड को सहलाने लगी।


थोड़ी देर में मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था। मैं उनके ऊपर आया कंडोम लगाया और उनकी चूत पर अपने लंड को रखा।


आंटी की आंखे बंद थी वो बस ज़ोर ज़ोर से सांसे ले रही थी। मैंने एकदुम से अपना लंड उनकी चूत में झटका दिया तो उनकी सांसें रुक गईं और आंखें खुल गईं वो मेरी तरफ देख रही थी।


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मैं भी उनको धीरे-धीरे चोदते हुए उनके करीब आया।


और उनके होठों को छूने लगा और उनके स्तनों को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा। मैं उनके स्तनों को ज़ोर ज़ोर से चुनने लगा।


इतना ज़ोर से चुन रहा था कि उनके स्तन लाल हो गए, मार्क्स पड़ गए द अनपार। उसके बाद में उनको ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा।


आंटी ने अपनी आँखे ज़ोर से बंद की हुई थी और बहुत दबी हुई सिसकियाँ निकल रही थी। चोदते हुए मैंने अपने अंगुठे को उनकी चूत पर रगड़ा। तो मानो उनको झटका लगा उनकी सिस्किया एकदुम से तेज़ हो गई।


मैं अपने अंगुठे से रगड़ता रहा और अपने लंड से उनकी चूत को चोदता रहा।


थोड़ी देर बाद मैंने आंटी के कान में कहा, "अब घोड़ी नहीं कुतिया बन मेरी तुझे कुतिया बनाकर छोड़ूंगा"।


एकदुम से डॉगी स्टाइल में आकर कहने के लिए, "अपनी रंडी बना ले मुझे और रंडी की तरह चोद।" मैं उन्हें ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा।


वो एकदम से बहुत ज़ोर ज़ोर से सिस्किया लेने लगी और एक बार को बिल्कुल रुक गई और ऑर्गेज्म हो गई। जहां पर उनकी सिसकियां रुकी मैंने अपने झटके और अंदर तक कर दिए।


पूरा लंड बाहर निकल कर एक बार में अंदर तक। मैं भी झड़ने वाला था और ज़ोर से उनको चोदने लगा।


मेरे ज़ोर ज़ोर से झटको की वजह से उनकी सिसकियाँ तेज़ हो रही थी। मैंने उनके दोनों हाथ पीछे खींच कर उन्हें ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा।


उनकी सिसकियों से लग रहा था कि वो दोबारा ऑर्गेज्म होने वाली है। मैंने झटके दिये जा रहा था कि मेरा भी झड़ गया।


मेरा झड़ने के बाद मेरे लंड से माल इतना ज़ोर से निकला। लंड को फूलना और सिकोड़ना उनको उनकी चूत में लग रहा था।


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मैं उनके ऊपर ही गिर गया लंड को उनकी चूत में डाले ही। और लेता रहा उनकी साने अभी भी चढ़ी हुई थी। मैं थोड़ी देर में उठकर बाथरूम गया।


कंडोम को फेक कर आया और आकार उनको पास दे दिया गया। वो अभी भी उल्टी लेती थी।  मैंने आकर उनको किस किया और बोला,”आंटी कैसा लगा सेक्स?”


वो बोली, "रंडी बन गई हूं मैं तेरी। अब तू मेरी बेटी को चोदेगा या न मुझे नहीं पता, पर मुझे जरूर चोदेगा।" और सीधा मेरे ऊपर आकर लेट गई।


उसके बाद हम होटल से निकले और आंटी को मैंने बीच में मेट्रो पर ड्रॉप कर दिया। जाते हुए आंटी ने होठों पर दोबारा किस किया और बोला, "जरूरी नहीं मेरे मन पर तुम आओ। तुम्हारा जब मन हो बता देना हम तब करेंगे।"


मैंने भी घर पहुंच कर आराम किया और उसके बाद अपनी गर्लफ्रेंड को कॉल किया। उसका जवाब आया।  


"आज मम्मी दोस्तों के साथ हो गई थी। तो वो काफी थक गई है। तो सारा काम मुझे ही करना पड़ रहा है। मम्मी कमरे में आराम कर रही है।"


इतने में पीछे से मुझे आंटी का मैसेज आया तस्वीर के साथ जो उनके स्तन थे वो सिर्फ चूसने के निशान थे। आंटी का मैसेज आया, "सेक्स कैसे करते हैं मैं तो भूल गई थी। दोबारा रिवाइज करने के लिए जल्दी मिलना।"


तो दोस्तों कैसे लगी मेरी ये कामुक अन्तर्वासना सेक्स कहानी? कॉमेंट करके जरूर बताना। और हाँ अगर मेरी इससे पहले वाली कहानी, जिसमें मैंने GF की माँ को चोदा था वो पढ़ना है तो मुझे कमेंट जरूर करना ताकि वो कहानी भी पोस्ट करू!


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