हॉस्पिटल में हुई डॉ साहिबा की थ्रीसम चुदाई!

Antarvasan Desi Sex Story : पढे कैसे एक डॉ साहिबा के Antarvasan को एक मरीज और वहाँ के स्टाफ ने जगा दिया, जिससे Dr को अपनी Kamvasna को संभालना मुश्किल हो गया और उसकी Threesome चुदाई हो गई!


आज का किस्सा मुझे रोज़ी जी ने तब सुनाया था जब मेरा मूड खराब था उस समय हम दोनों छत पर थे रात का 1:30 बजे का समय था, हमारा बिस्तर ज़मीन पर लगा था और मेरा लन्ड रोज़ी जी चूत में घुसा हुआ था।


वो मेरे सीने पर हाथ घूमा रही थी, मेरा हाथ उनकी नर्म गोल गांड़ को सहला रहा था। हम चुदाई नहीं कर रहे थे बस मेरा लन्ड वो अपनी चूत में लेकर महसूस करते हुए मेरे ऊपर लेटी हुई थी फिर उन्होंने कहानी सुनानी शुरू की।


तो सब अपने लन्ड पकड़ले और चूतो पर हाथ रखले, सुनते है कहानी रोज़ी जी की ज़ुबानी!


तो कहानी शुरू होती है :-


मैमून एक 32 साल की उमर वाली हसीन और जवान लड़की थी, दिल्ली यूनिवर्सिटी से उसने साइकोलॉजी की डिग्री पूरी करी थी जिसके बाद करीब 75 किलो मीटर दूर एक मेंटल हॉस्पिटल में उसने नौकरी शुरू कर दी थी।


नई नई डिग्री मिलने के बाद सैलरी ज़्यादा अच्छी नहीं मिलती लेकिन इस हॉस्पिटल ने उसे बहुत अच्छा ऑफर दिया था सो वो चल दी।


हॉस्पिटल में पहुंचने के बाद जब अपने डॉ. बॉस से उसने मुलाक़ात की तो उन्होंने उसका स्वागत करा, एक बार अच्छे से पूरा हॉस्पिटल घुमाया फिर उसे अपने कैबिन की चाबी दे दी।


वो हस्ती खेलती अपने कैबिन की तरफ आगे बढ़ी, उसकी चूचियां शानदार आकार की थी, 34 की चूची 30 की कमर और 32 की गांड़ उसके जिस्म को कामुकता का लैंडमार्क बना देती थी।


जब वो चलती तो चूचियां हिचकोले खाती उसके मटकते चूतड़ देखकर 2 3 बार तो डॉ.बॉस ने भी बहाने से हाथ मारा था।


मैमून ये सारी बातें जानती थी, घर से लेकर कॉलेज तक हज़ारों लड़कों ने उसपर लाइन मारी थी। उसकी गांड़ पर हमेशा उसकी चड्डी की लाइन बनी दिखती थी।


वो अपनी चूचियों को हिचकोले खिलाती अपने कैबिन तक पहुंची तो दरवाज़ा पहले ही थोड़ा खुला था, जैसे ही उसने दरवाज़ा पूरा खोला।


एक काले सांप जैसा बड़ा लन्ड उसके सामने लटक रहा था, उसे देखकर कुछ देर तो उसका मुंह खुला रह गया। मगर उसने देखा एक पागल मरीज़ उसके कैबिन में पेन होल्डर पकड़े मुट्ठी मार रहा था।


वो थोड़ा घबराई ओर चिल्लाकर लोगो को बुलाया। कुछ लड़कों ने आकर उस मरीज़ को बाहर निकाला जाते जाते वो मरीज़ जब मैमून के पास पहुंचा तो उसके कपड़ो पर ही अपना माल झाड़ दिया।


उसका लन्ड तकरीबन 8 इंच का होगा, एकदम खड़ा लन्ड किसी फौलाद जैसा लग रहा था उसकी पिचकारी मैमून के चूचों से लेकर चूत तक गई।


डॉ.बॉस ने आकर मैमून को संभाला उसे एक तरफ बैठा कर पानी दिया और उसको सहारा देने के बहाने गांड़ को भी सहलाने के अरमान पूरे कर लिए।


मैमून ये सब समझती थी मगर उसे अपनी कामयाबी के आगे कुछ नहीं दिखता था।


मैमून ने अपनी पढ़ाई के द्वारा इंसान की फितरत अच्छे से जान की थी। पागल हो या नहीं औरत हो या मर्द एक बार जब वासना का स्वाद चखले तो उससे दूर नहीं रह पाता। यह Lady Dr Ki Chudai ki Desi Sex Story आप गरम कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।


मैमून का बॉयफ़्रेंड उसे 2 साल पहले छोड़ चुका था उसके जाने बाद ही उसने अपनी ज़िंदगी इस रास्ते में गुज़ारने का सोचा।


जैसे तैसे मैमून ने पहला दिन गुज़ारा उसकी हफ्ते में 1 दिन पूरे 24 घंटे की ड्यूटी होती और अगले दिन छुट्टी मिलती है, तो रात अभी बाकी थी।


रात में डॉ.बॉस उसके लिए खाना लेके आए, एक छोटी सी वेलकम पार्टी रखी गई। खाने पर उसने अपने साथ के बाकी स्टाफ को देखा।


स्टाफ में गिनती की 4 औरते और 3 मर्द थे। चारों औरतों के जिस्म भयंकर गदराय हुए थे।


मैमून की नज़रों ने वहां मौजूद सभी मर्दों पर ध्यान दिया सब के सब मैमून के उभरते चूचों को आंखों से दबा रहे थे हैरानी की बात थी कि बाकी औरते भी मैमून को देखकर अपनी जीभ को होठों पर फिरा रही थी।


मैमून ने सोचा ये खाने की पार्टी मेरे लिए है या मैं ही इस पार्टी का खाना हूं ?


डॉ.बॉस खाने को देखकर बोले “चलो अब टूट पड़ो”।


मैमून ने अपनी प्लेट उठाई, एक औरत ने झटसे मैमून की गांड़ दबा दी, उस औरत ने लगभग न के बराबर अपनी ड्रेस पहनी थी उसके चूचे 40 के साइज़ के रहे होंगे जो इतने बाहर थे के बस निप्पल ही छुपे थे।


मैमून चौक गई “आओह” की आवाज़ निकालते हुए वो पीछे हटी।


डॉ.बॉस ने एकदम बात संभाली “अरे शशि, शैतानी नहीं! वो आज ही आई है तुमने आज ही परेशान करना शुरू कर दिया।”


खाना पूरा होने के बाद मैमून अपने कैबिन में कुछ देर आराम करने चले गए।


उसने सोचा पहले ही दिन गांड़ और चूची दोनों पर हाथ पड़ गए इस हॉस्पिटल में, पता नहीं आगे कुछ बचेगा के नहीं लेकिन जो भी हो इतनी सैलरी कही और नहीं मिलेगी।


वैसे भी हो सकता है बस मेरा डर हो और जो हुआ वो बस संयोग हो।


आज के संयोगों के चलते मैमून का दिल अब चुदाई का करने लगा था, धीरे धीरे हॉस्पिटल की लाइटें बंद होनी शुरू हो गई।


एक एक कर के सब सोने लगे। मैमून बैठी हुई अपनी नशीली चूत को सहला रही ही।


उसकी नज़रों के सामने बार बार काला मोटा लन्ड आता जारा था। उसने अपनी पेंट उतारी और बस चड्डी में बैठी रही।


आह! मम्ममहम्म! अआह! बेबी! आह!


ओह सईससस यूएफफफ! ओह।


मैमून चूत में उंगली करते हुए आवाज़ें निकालने लगी।


उसने अपनी ब्रा ऊपर कर ली उसके मोटे मोटे चूचे दबाने के लिए कोई नहीं था। यह Antarvasna Hindi Sex Stories आप गरम कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।


बेचारी ने खुद को ही मज़ा देना शुरू कर दिया। एक पल के लिए उसको डॉ.बॉस के पास जाने का ख्याल आया मगर पहले ही दिन उसे अपने लिए रण्डी वाला टैग नहीं चाहिए था।


मैमून अपने निप्पल रगड़ रही थी तभी बाहर से उसे कुछ आवाज़ें सुनाई दी। वो घबरा गई कही किसी ने देख तो नहीं लिया।


उसने दरवाज़े के बाहर जाकर देखा तो कोई नहीं था मगर दूसरे हिस्से में परछाई हिल रही थी। वो धीरे धीरे कदम बढ़ाते हुए आगे पहुंची। 


वहां शशि मैडम खड़ी थी, उसके बदन पर बस पेंटी थी ऊपर से पूरी तरह नंगी, मैमून ने लाइट जलाई तो शशि मैडम के मोटे काले निप्पल चमक गए, वो मैमून को देखकर अपने होठ चबाने लगी।


शशि मैडम के भारी भरकम चूंचे मैमून के दिल को ललचा रहे थे, मैमून को औरत और मर्द दोनों के साथ ही अपने जिस्म को रगड़ना पसंद था।


आह! आगाह! साले आह ! फाड़ दी मेरी तूने आज!


शशि मैडम के पीछे वहीं लड़का था जिसे मैमून ने सुबह उस पागल मरीज़ को भगाने के लिए बुलाया था।


आह! आआह! साले हरामी! आआह! पतला है तू लेकिन बहुत भारी पड़ता है मुझे।


वो लड़का पीछे से शशि मैडम की गांड़ मार रहा था सरपट उसके धक्कों की आवाज़ मैमून के कानों में गूंज रही थी वो बस दोनों के नंगे जिस्मों को रगड़ते देख अपनी आँखें सेंक रही ही।


शशि मैडम के मोटे मोटे चूंचे मैमून की हवस और बढ़ा रहे थे।


उनकी दर्द भरी अआआह! मैमून की चूत गीली कर रही थी।


शशि मैडम ने कहा “अआह! मैमून चाहो तो आ जाओ हमारे साथ अपनी आग शांत कर लो। अपनी नज़रे मैमून के चूचों पर गाड़ते हुए वो कामुक आवाज़ में बोली “मैमून जानी, बिना चुदाई के यहां काम करना बहुत मुश्किल है।” 


मैमून वहां से मुंह फेर के भाग ली जाते जाते उसे एक कमरे में डॉ.बॉस की आवाज़ आई उसने खिड़की से देखा तो वोह पार्टी में मौजूद एक दूसरी औरत की पैंटी मुंह में दबाए उसे चोद रहे थे। 


औरत की मम्ममहम्म हमममम आह आह! डॉ.जी आह आह धीरे आह! की आवाज़ें बाहर तक आ रही थी।


इतना सब कुछ देखने के बाद अब मैमून के लिए खुद पर काबू करना नामुमकिन था लेकिन यहां अभी कोई नहीं था जो उसकी भड़कती प्यास को शांत करे।


वो अपने कैबिन की तरफ वापस जाने लगी जाते जाते एक दरवाज़े पर उसने लिखा देखा "कृपया इस दरवाज़े को बंद रखे"। यह XXX Desi Sex Story आप गरम कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।


खिड़की से कमरे के अंदर देखा तो सुबह वाला मरीज़ लेटा मैमून को दिखा जिसकी पिचकारी से कपड़े रंगीन हुए थे।


मैमून ने सोचा इसी ने ही आग भड़काया है अब यही शांत करेगा। वो कमरे के अंदर चली गई, वो मरीज़ एक बिस्तर पर लेटा था उसके दोनों हाथ दोनों पैर कोनो पर बंधे पड़े थे।


मैमून ने उसे छूकर देखा तो वो बेहोश था, वो आगे बढ़ी टांगे सहलाते सहलाते अपना हाथ उसके लन्ड पर रख दिया। सुबह जो 8 इंच का नाग था वो अभी सोया पड़ा था।


मैमून ने अपने गले में फंसे थूक को निगला और अपनी आंखे बंद कर के मरीज़ की पेंट नीचे खींच दी।


हल्की रोशनी में उसका लन्ड सोए हुए काले नाग के फन जैसा दिखाई पड़ रहा था। मैमून ने अपना मुंह लन्ड के करीब करा, उसको थोड़ा सा सूंघ कर देखा तो लन्ड के पानी की बहुत तेज़ महक आ रही थी।


उस महक ने चुदाई की इच्छा को चरम पर पूछा दिया। मैमून ने लन्ड को चूमा फिर हाथ में लेकर हिलाने लगी।


मैमून ने अपनी पेंट उतारी एक एक कर के सारे कपड़े उतार कर नंगी उस मरीज़ के लन्ड पर चढ़ गई।  उसने मरीज़ की शर्ट खोली तो उसका नाम शर्ट पर लिखा देखा मरीज़ का नाम शानू था।


उसने शानू के सीने को चूमा निप्पल पर भरपूर ज़ोर लगाकर काटा, शानू हिला मगर दवाई का असर उसपर काफी ज़्यादा था तो फिर बेहोश हो गया।


मैमून ने अपनी चूत में उंगली करनी शुरू की साथ साथ उसका लन्ड सहलाने लगी, अपने हाथ में थूक लेकर लन्ड पर लगाने लगी तेज़ी से उसने लन्ड मसला जिससे वह जल्द ही खड़ा हो गया।


मैमून अपनी गीली चूत उसके लन्ड पर रगड़ने लगी, उसने चूत के पानी को लन्ड पर रगड़कर एकदम चिकना कर लिया।


मैमून ने चूत पर 8 इंच के नाग को लगाया, एक पल अपनी सांस रोक कर उसने लन्ड पर बैठना शुरू कर दिया।


आह हाहहाह आहयू! कर्रा ती हुई लन्ड को अंदर लेने लगी, आगाह आह आआह! आह!


मैमून उसी लन्ड पर तेज़ी से कूदने लगी, थोड़ा थोड़ा कर के लन्ड अपने शबाब पर आ चुका था 8 इंच का खड़ा मोटा काला नाग उसकी चूत फाड़े देरा था। 


मैमून ने हिम्मत बनाकर पूरा लौड़ा अंदर लेकर झेला, वो उस नाग को अपनी चूत में दबाए उछले जा रही थी।


अआह! आअह्ह! मुअम्मा! आह।


मम्मम् उओओ! यूऊयुफ्फ! अआह हाहहहया आह!


खुद ही वो अपने निप्पल निचोड़ती, खुद ही अपनी चूचे मसलती।


ओह आह आआह!


अआह! आअह्ह! मुअम्मा! आह।


मैमून को मज़ा आने लगा वो खुलकर लन्ड लेने लगी , उसकी आह की आवाज़ बढ़ती जा रही थी।


मम्मम् उओओ! यूऊयुफ्फ!


अचानक पीछे से किसी ने उसके मोटे उछलते चूचों को पकड़ लिया। वो एक दम डर गई , जैसे ही उसने पीछे देखा तो एक एक बूढ़ा आदमी मरीज़ो वाले कपड़े पहना उसके चूंचे नोच रहा था। 


मैमून एकदम चीखी मगर उस बूढ़े ने उसे आगे धकेल कर शानू के ऊपर लिटा दिया। उस बूढ़े की शर्ट पर मीनू लिखा हुआ था पेंट नहीं थी वो नीचे से पूरा नंगा था उसका मोटा लौड़ा एक दम लोहे के सरिए जैसा खड़ा था।


वो बूढ़ा अपने भारी भरकम जिस्म को लेकर मैमून के ऊपर चढ़ गया, उसने जल्दी से अपना लन्ड मैमून की चूत में पीछे से ही घुसा दिया।


मैमून की चूत में पहले से 8 इंच का नाग था उसपर एक मोटा लौड़ा और अंदर घुस गया था।


उस बेचारी की चीख बहुत तेज़ी से निकली उसकी आंखों में आंसू आ गए।


अआआह! अहा आह्ह्य आअआआअह!


मैमून की चूत में दो दो मोटे लन्ड मिलकर चूत को फाड़ने में लगे थे।


वो बुड्ढा पूरी तेज़ी से धक्के लगा रहा था। मैमून के मुंह से बस आगाह आअआआअह मम्म्झज्जम आआह अहा!


कुछ देर में मैमून चुदाई की आग में पागल हो चुकी थी, उसको भयानक दर्द के साथ सुकून मिलने लगा।


मम्म्झज्जम मम्मम् उओओ! यूऊयुफ्फ! अआह हाहहहया आह!अआह! आअह्ह! मुअम्मा! आह।


ओह आह आआह!


अआह! आअह्ह! मुअम्मा! आह।


एक घंटे बाद बूढे आदमी का पानी झड़ा, वो नीचे गिर कर बेहोश हो गया। मैमून बेजान हो गई उसका माल अब तक 4 से 5 बार झड़ गया था। 


अधमरी हालत में मैमून ने अपने आपको समेटा , उसने चुदाई का ऐसा चरमसुख मिला जो वो कभी नहीं भूल सकती थी।


आज तक मैमून उसी हॉस्पिटल में काम कर रही है, आज वो सीनियर डॉक्टर है। 


अपनी कहानी पूरी करते करते रोज़ी जी और मेरी भी चुदाई शुरू हो गई थी। आज हमारा अपनी पहली चुदाई का इरादा पूरा हुआ था।


मेरे जो नए पाठक है उनसे कहना चाहूंगा आप लोगो को मेरी और रोज़ी जी की कहानी ज़रूर जाननी चाहिए। 


कहानी कैसी लगी मुझे नीचे कॉमेंट और रिएक्शन बटन के जरिए और साथ ही hashmilion5@gmail.com पर मेल कर के ज़रूर बताए।


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