ट्रेन में सगी भाभी की चुदाई करके उन्हे प्रेग्नेंट किया!

Incest Family Sex Story : पढ़िए कैसे मैने मौका पाकर भाभी की Antarvasna को ट्रेन में, चूची से गांड़ तक गरम करके, तड़पा कर उनकी Chudai की और उन्हे प्रेग्नेंट किया!


मेरा नाम राजीव है और मेरी उम्र 27 साल है। मेरी भाभी का नाम सुनेना है उनकी उम्र तकरीबन 29 साल की होगी। मेरे भाई की अग्निवीर योजना के तहत फौज में भर्ती हुई थी।


 तो उसी के नतीजे में वो चार साल से आर्मी में बॉर्डर पर डटे हुए हैं। इस दौरान घर पर शायद ही 6 महीने आए होंगे।


लेकिन भैया से दूर होने के कारण मेरी भाभी का बदन तो आग उगलता है, पहले मैं आपको भाभी के बारे में परिचय दे दूं।


उनका गोरा रंग है, लंबे काले घने बाल है जो कमर तक लहराते हैं, उनके 36D के भरे-भरे चूचे जो साड़ी के ब्लाउज को फाड़ने को बेताब रहते हैं। 


उनकी पतली कमर जो छूने को मेरी जीभ लालच से टपकती और उन्हें चखने को तरसती है, और 38 की गोल-मटोल गांड जो हर कदम पर लहराकर मेरे लंड को खड़ा कर देती है। 


जब भी वो साड़ी पहनतीं तो उनके ब्लाउस से चूचों की गहराई मुझे साफ दिखती है, जब जब उनका पल्लू सरक जाता तो चूचों की गहरी, गीली घाटी झांकने लगती। 


मैं सालों से चुपके-चुपके उनको देखता था, मैं हमेशा उनको याद करके रातों को लंड हिलाता था, लेकिन कभी हिम्मत न हुई के भाभी के करीब जाऊं। 


मगर वो हिचक उस ट्रेन के सफर में पिघल गई, जब हवस की आग ने हमारे रिश्ते को नया मोड़ दे दिया। एक बार हुआ कुछ ऐसा के एक बार हमें ट्रेन का सफर साथ करना पड़ा तब ट्रेन में भयंकर भीड़ थी। 


जनरल डिब्बे जैसी हालत स्लीपर में हो रही थी हम दरवाजे के पास चिपके हुए एक दूसरे से सटे खड़े थे। भाभी के इतने करीब होने के कारण मेरा खुद पर से काबू खोने लगा, उनकी महक मुझे बहकाने लगी।


मेरा सीना भाभी की नरम व गर्म पीठ से सटा था, और नीचे मेरा 7.5 इंच का मोटा, नसों वाला लंड उनकी गांड की गहरी दरार में फंस गया था। 


भाभी ने मुझे एक नज़र देखा मगर कुछ न बोली, मैं जनता था भाभी प्यासी है। मैने सोचा आज मौका अच्छा है तो मैने हल्के हल्के उनको सहलाना शुरू करा।


 जब मैने देखा भाभी की तरफ से कोई विरोध नहीं हो रहा है तो मैने दबाओ बढ़ाना शुरू करा।हर झटके में लंड उनकी गांड़ पर रगड़ खा रहा था – उसकी हालत ऐसी थी के जैसे कोई ज्वालामुखी फटने को तैयार।


दस मिनट में ही मेरा लंड लोहे जैसा तन गया और टोपे से रस टपकने लगा। उसे भाभी ने महसूस करा ।


वो भी हल्के-हल्के अपनी गांड़ को पीछे धकेलने लगीं वो कुछ ही पलो में गर्म होकर अपनी गांड को मेरे लंड पर रगड़ने लगीं जैसे कोई भूखी रंडी जोश भड़काने के लिए करती है।


 मैंने शांती से हाथ उनकी कमर पर रखा, फिर धीरे से नीचे सरका दिया। मैने साड़ी के ऊपर से ही दोनों गोले दबाए – उफ्फ्फ, कितने मुलायम, कितने गर्म थे! 


भाभी ने अपना सिर पीछे किया उनकी अपनी नज़रों से मेरी नज़रों को पकड़ा फिर मेरी गर्दन पर सांसें फेंकीं और फुसफुसाईं, “राजीव..सीससस,उफ्फ!  ये Devar Bhabhi Ki Chudai Ki Kahani आप Garamkahani पर पढ़ रहे है।


ये पाप है, लेकिन तेरी ये गरम खड़ी हुई लाठी मेरी गांड को जला रही है,अब रुक मत, और दबा,हम्मम”


मैंने उनकी साड़ी का पल्लू साइड करा फिर उनके पेटीकोट के ऊपर से चूत की जगह पर उंगली फेरनी शुरू की। 


भाभी की सांसें तेज हो गई, उनकी चूत से मुझे गर्म रस महसूस हो रहा था। उन्होंने पीछे हाथ बढ़ाया और मेरी पैंट की चेन खींची और अपनी गर्म, नरम हथेली से लंड बाहर निकाला। 


मेरे तो बस उफ्फ्फ, जैसे आग लग गई! सुनेना भाभी ने लंड को अपनी मुट्ठी में कस लिया और उसे ऊपर-नीचे कर के सहलाने लगीं – पहले धीरे-धीरे, फिर तेज़ी से वो मेरे सांप से खेलने लगी।


 मैंने भी साड़ी थोड़ी और ऊपर चढ़ाई फिर उनकी पैंटी के अंदर उंगलियां घुसाईं। भाभी की चूत फिसलन भरी, गीली व चिपचिपी थी – मेरी दो उंगलियां आसानी से अंदर समा गईं। 


मेरी भाभी की वासना अधिक भड़कने लगी तो उन्होंने मेरे कंधे पर नाखून गाड़ दिए, उन्होंने अब हल्की-हल्की आहें भरीं, “आह्ह्ह,उफ्फफ राजीव..अआआह!


ओहद्ह राजीव अच्छा लग रहा है न्यायाह्ह अआआह! आह्ह्ह,उफ्फफ राजीव..अआआह!


तेरी उंगलियां मेरी चूत को चीर रही हैं, और तेज, हाय, रस निकल रहा है,” पूरा एक घंटा हमने ऐसे ही चुदाई की शुरुआत की।


हमने भीड़ में छिपे हुए एक दूसरे की वासना को मस्त भड़काया, लेकिन शायद हमारी हवस की आग सबको जला रही थी। 


आखिर में मैंने उनको कान में कहा, “भाभी, मैं झड़ने वाला हूं,” वो तुरंग पीछे घूमीं, उन्होंने बहुत चलाकी से पल्लू अपने मुंह पर रखा और नीचे झुककर मेरा लंड मुंह में ले लिया। 


भाभी ने मेरे लंड के छेद पर ज़बान फेरी वो मुझे तड़पा रही थी। मैं अपनी आहे काबू करने की कोशिश कर रहा था।


दो-तीन जोरदार चुसाई के धक्कों में मेरा गर्म माल उनके गले में उतर गया। भाभी ने मेरे सांप को चाट-चाटकर साफ करा, 


फिर वो खड़ी हुई और अपने होठों से मेरे रस को साफ करते हुए मुस्कुराईं – उन्होंने मेरी आंखों में देखा मुझे उनकी आंखों में चुदाई की भूख दिखाई दी। 


ट्रेन अपनी पूरी रफ्तार पर थी तब भी हमें घर पहुंचते पहुंचते ही रात के 11 बज चुके थे। मम्मी-पापा तब तक सो चुके। मैं अपने कमरे में गया तो भाभी का व्हाट्सएप पर मैसेज आया हुआ था–


“मेरे प्यारे देवर दरवाजा खुला, आ जा, आज तेरी भाभी तेरी गुलाम रंडी बनेगी, चूत फाड़ने का इंतजार है हो रहा है।" उस मैसेज के साथ भाभी ने चूंची को छुपाए ब्रा की तस्वीर भी भेज रखी थी जिसके नीचे लिखा था 


“आकर खोल दो ये बंदिशे”। मैं जल्दी से नहा कर सिर्फ बॉक्सर में उनके कमरे में घुसा। भाभी हमारी सुहागरात के लिए लाल बनारसी साड़ी में दुल्हन बनी बैठी थीं – उनका घूंघट, 


मांग में ताजा सिंदूर चमकता हुआ, हाथ में वाइन की बोतल और दो गिलास उनका ये मादक और कामुक रूप देखकर मेरा सांप तमतमा गया।


 मुझे देखते ही भाभी मुझसे लिपट गईं, उन्होंने अपने चूचों को पूरी ताकत से मेरी छाती से दबाया। भा


भी मेरे गाल को चूमकर बोली “राजीव, आज तू मुझे अपनी मालकिन बना ले यार, चार साल से तेरे इस मोटे लंड की भूखी हूं,


 तेरे भाई का तो आधा भी नहीं मेरी चूत को भरता, आज मेरी चूत को अपना कुआं बना दे, रात भर पानी निकाल मेरा,”


मैंने उन्हें गोद में उठाया और बेड पर पटक दिया। फिर मैने उनका घूंघट हटाया भाभी बहुत जोश में थी उन्होंने झटके से मेरे होंठों पर अपने होंठ चिपका दिए। 


मैं भी अपनी जीभ उनके मुंह के अंदर डालकर उनका मीठा रस चूसने लगा – मेरा लंड बिल्कुल ऐसा था जैसे कोई भूखा शेर। लेकिन भाभी ने मेरी जीभ काट ली, फिर उन्होंने अपना जीभ मेरे मुंह में घुसा दिया।


मैंने उनका साड़ी का पल्लू खींचा और ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोले ब्लाउस खुलते ही मेरी नज़रो ने देखा क्रीम ब्रा में दो भारी चूचे फड़फड़ा रहे थे। 


मैने जोश जोश में ब्रा फाड़ दी – उफ्फ्फ, दो सफेद, रसीले गोले तुरंत बाहर कूद पड़े। उनके गुलाबी निप्पल टाइट होकर, खड़े हो गए थे।  ये Antarvasna Family Incest Story आप Garam Kahani पर पढ़ रहे है।


मैंने उनकी गर्दन को चूमते हुए बायां चूचा मुंह में भरा, फिर उसे जोर-जोर से चूसने लगा – मैने उनका चूची पर दांतों से निप्पल काटा, जीभ से चाटा, हाथ से दबाया। 


भाभी चीखीं, “आह्ह्ह, राजीव, चूस, काट ले..अआआह मज़ा आ गया, ये चूचे तेरे लिए ही बने हैं, हाय, दूध निकल रहा है,जान हुह्ह्ह और जोर से,” 


एक के बाद दूसरे चूचे को भी मैंने चबाया – उनके चूचों को मैने इतना खाया के निशान पड़ गए, वो दोनो लाल हो गए।


भाभी का बदन अब चुदाई के लिए तड़प रहा था हवस की वजह से उनकी कमर ऊपर-नीचे हो रही थी।


भाभी ने मेरी बॉक्सर खींची, मेरा भी मोटा लंड कूदकर बाहर आया – उसकी नसें फूली हुईं थी, हल्का सा टोपे से रस टपकता पता चल रहा था। 


भाभी आंखे बड़ी करते हुए बोली “हाय राम, इतना मोटा, इतना लंबा, आज तो मेरी चूत का भोसड़ा भी फट जाएगा,”


ये कहते हुए उन्होंने मुझे मुट्ठी में कस लिया और सहलाने लगीं ।वो मेरे प्यारे नादान सांप को ऊपर-नीचे कर रही थी फिर उन्होंने टोपे को अंगूठे से रगड़ा।


 मैंने भी जल्दी से साड़ी-पेटीकोट सब खींच लिया। सुनेना भाभी की लाल पैंटी गीली हो चुकी थी, उनकी चूत का रस बाहर टपक रहा था।


 मैने उनकी पैंटी नीचे सरकाई उनकी जांघें एकदम चिकनी थी उनकी गुलाबी चूत के होंठ फूले हुए थे, क्लिट बाहर झांक रही थी। उनकी चूत से रस इतना आ रहा था के चादर भीग गई थी।


मैं नीचे झुका और जीभ से चूत चाटने लगा। भाभी इसके लिए शायद तैयार नहीं थी उन झटके से कमर उछल गई,


“आह्ह्ह, राजीव, तेरी जीभ तो जादू है,ओहद्ह चाट, ओहद्ह चूत के होंठ चाट, हाय आगाह मेरी जान, क्लिट काट ले,उफ्फफ आआह माँ मर गई हमममम।”


फिर मैंने अपनी जीभ अंदर-बाहर की, उनकी क्लिट को दांतों से पकड़ा, फिर होठों में दबा कर खूब चूसा। भाभी ने मेरे सिर को चूत में दबा दिया, उन्होंने टांगें चोड़ी कर के फैला दीं।


मुझे उनको पीने में मज़ा आ रहा था तभी पांच मिनट में उनका बदन अकड़ गया – मेरी प्यारी भाभी एक


“आह्ह्ह,अआआह मैं झड़ रही हूं, पी ले मेरा रस,ओहद्ह कहते हुए झड़ती चली गई उनकी चूत से गर्म, खारा पानी का फव्वारा छूटा। 


मैंने मुंह से छूटकर वो रस सारा पिया और चाट-चाटकर साफ किया।अब मेरी बारी थी मेरा लंड उनके मुंह के पास पहुंचा। भाभी ने तुरंत होठ दबाकर उसे लपक लिया – 


उन्होंने पहले टोपे को जीभ से चाटा भाभी उसपर खूब लार लगाई उन्होंने मेरा सांप पूरी तरह चिकना कर दिया। फिर धीरे धीरे आधा लंड मुंह में लिए भाभी बहुत अच्छे से फिर उसे पूरा गले तक ले गई।


वो एक पेशेवर रण्डी की तरह सुपारा चूसने लगीं वो खुद ही जोर-जोर से अपने मुंह से धक्के लगा रही थी उनके गले की आवाजें आने लगीं जो पूरे कमरे में गूंज रही थी। 


मैं लगातार उनकी गांड दबा रहा था, अपनी उंगली गांड के छेद पर फेर रहा था। मैने पूरा दस मिनट तक उनको लंड चुसवाया – भाभी की लार लंड पर चिपचिपी हो गई। 


फिर मैंने भाभी को लिटाया, उनकी टांगें अपने कंधों पर रखीं, उसके बाद लंड को चूत पर रगड़ा। उनके रस से लंड का चस्का लग गया।


भाभी तड़पकर मुझसे बोली “ अआआह राजीव, अब डाल भी दो, चूत फाड़ दे मेरी जान, तेरी भाभी मर रही है तेरे लंड के लिए,”जोश जोश में मैंने एक जोरदार धक्का मारा – और एक बार में पूरा मोटा लंड अंदर समा गया।


अचानक भाभी चीखीं, “आआआह्ह्ह, मादरचोद, फाड़ दिया,ओहद्ह आह हाअअ हाय, इतना मोटा, चूत चीर गई, ओहद्ह ।


भाभी के मुंह गाली भी सुरीली लग रही थी फिर वो बोली साले मार दिया तूने लेकिन अब रुक मत, चोद, जोर से चोद, आअआआअह ।


मैं थोड़ा रुक कर भाभी को धीरे-धीरे चोदने लगा – हर धक्के में चूत लंड को निचोड़ रही थी, उनकी गर्म और फिसलन भरी थी।  ये XXX Antarvasna Bhabhi ki Sex Stories आप Garam Kahani पर पढ़ रहे है।


मैने जब देखा के भाभी को अब मज़ा आ रहा है और उनके मुंह से अब आगाह! हममम! राजीव ओह! की आवाज़ आई ।


तो करीब पांच मिनट बाद मैने अपनी स्पीड बढ़ाई गप्प-गप्प, पप-पप-पप, की तेज आवाजें कमरे को गरमा ने लगी।उनकी चूत का रस बाहर छलक रहा था। भाभी उत्तेजना से चिल्ला रही थीं,


“चोद राजीव, आगाह और जोर से, ओह हाय, तेरा लंड गर्भाशय तक पहुंच रहा, फाड़ दे चूत मेरी, आज से तेरी भाभी तेरी रंडी है, चोद, आह्ह्ह,” 


फिर मैंने मिशनरी में भाभी को पेलना शुरू करा 15 मिनट पेला पाली करते करते – चूचों को चबाते हुए, निप्पल काटते हुए मैने भाभी को चरमसुख तक पहुंचाना शुरू करा।


फिर भाभी को घोड़ी बनाया और पीछे से भी लंड पेला – मैने उनकी गांड के गोले अलग किए, उनकी दरार में थूक लगाया।


पीछे से ही भाभी के बालों को पकड़कर खींचा, और पीछे से हु जोर-जोर से धक्के ठोक मारे। भाभी का घूंघट अभी भी सिर पर लहरा रहा था, वो नई नवेली दुल्हन की तरह चुद रही थीं।


“आह्ह्ह,साले पीछे से तो कभी तेरे भाई ने भी नहीं छोड़ा, गांड फाड़ मेरी ओहद्ह दिखा तेरी मर्दानगी, हाय, लंड इतना गहरा आह्ह्य, चोद,मार थप्पड़ मार,ओह


मैंने भाभी की गांड पर जोरदार थप्पड़ मारे जिससे वो लाल पड़ गई। पूरे कमरे में चिंत-चट, थप्पड़ की आवाजें और भाभी की चीखें गूंज रही थी। 


“हाय, राजीव, तेरी लाठी मेरी चूत को जला रही मेरी जान, और तेज, झड़वा दे,आज ठीक से मुझे” पूरे 12 मिनट बाद भाभी झड़ीं वो अपने चरमसुख को पहचा, उनकी चूत सिकुड़ गई थी।


मैने फिर भाभी को ऊपर चढ़ाया। वो उछल-उछलकर लंड लेने लगीं – उनके चूचे मेरे मुंह के सामने लटक रहे। मैं उन्हें चूसता, काटता रहा। 


भाभी सिसकारियां लेने लग“आह्ह्ह,अच्छा देवर जी तो अब ऊपर से, चल देती हूं तुझे तेरी गोद में ही चुदाई कर के Bhabhi Ki Chudai Ki Kahani वाली चुदाई का मज़ा,हाय, चूचे चूस न जान, चोद मुझे,” 


10 मिनट बाद वो फिर से झड़ीं। इस बार मैंने भी खुद को नहीं रोका – उनकी चूत में गर्म माल की पिचकारी छोड़ी, भाभी सच में एक मस्त माल थी उनकी चुदाई कर के मेरा माल आया इतना कि बाहर टपकने लगा।


थोड़ी देर बाद हमने वाइन के दो-दो पैग लगाए। उसका जब नशा चढ़ा तो भाभी ने फिर लंड मुंह में लिया –


इस बार अंदर और ज़्यादा गले तक, अब उनके आंसू आ गए। मैंने उन्हें दीवार से सटा कर खड़ा करा, एक टांग ऊपर उठाई और पीछे से अपना सांप पेल दिया। 


भाभी को अब मैने खड़े-खड़े 10 मिनट चोदा – चुदाई के ज़ोर से दीवार भी हिल रही थी। फिर हम 69 में लेटे – मैं चूत चाट रहा, भाभी लंड चूस रही। 


मैंने भाभी का गांड का छेद भी जीभ से चाटा, फिर उनके उंगली डाली – मेरी हरकत से भाभी सिहर उठीं, “आह्ह्ह, हाय, करले आज तू सब कर ले सब तेरा है आज से।”


इस पूरे कार्यक्रम में भाभी 6 से 7 बार झाड़ी उसके बाद हम नहा गए तो बाथरूम में शावर चालू हुए। मैने उनके गीले बदन पर साबुन लगाया –चेहरे से लेके चूचों पर, पेट से लेके चूत पर। 


दिए बाथरूम में भाभी को दीवार से टिका कर खड़े-खड़े फिर 15 मिनट तक पेला। पानी, साबुन और चूत का रस सब घुल मिलकर नीचे बह रहे थे।


“आह्ह्ह,मेरी जान ये तो सब से हटकर है ओंह्ह्ह हमारी गीली चुदाई, हाय, सम्भालना यार फिसल रहा है तेरा लंड,” 


हर राउंड में भाभी की चीखें और तेज होती जाती – “राजीव, और जोर से, हाय, मैं तेरी गुलाम, चोद, दिन दहाड़े पेल रात भर चोद, चूत भोसड़ा बना दे,” हमने खूब मेहनत से सुबह 5 बजे तक 8 राउंड मारे। 


उस रात भाभी की चूत सूजकर लाल चद्दर बिस्तर कमरा सब रस से भीगे थे। भाभी के पैर कांप रहे थे जिसे देखकर मुझे खुदपर गर्व महसूस हो रहा था।


मैंने बहुत प्यार से उन्हें गोद में उठाया, दिए बाहों में लेके एक लंबा किस किया और नींद के लिए बेड पर छोड़ा।


अब ये रोज का सिलसिला है। भाभी का जब जंगली मूड होता है तो जोश बढ़ाने के लिए कभी कभी गोली देती हैं, मैं फिर फिर उन्हें जानवरों की तरह चोदता हूं – कभी उनकी गांड मारता हूं, कभी मुंह में पानी छोड़ता हूं। 


अब तीन महीने पहले वो प्रेग्नेंट हुई थी । उनके पेट में मेरा बच्चा था अब डिलीवरी के बाद उनके ठीक होने का इंतजार है – उनका सख्त ऑर्डर है की मैं सेहत का ख्याल रखूं और फिर से चूत फाड़ू


तो दोस्तो, ये Antarvasna Hot Sex Story आपको कैसे लगी कमेंट करो, और आपका पानी निकला की नहीं ये भी कमेन्ट करके ज़रूरी बताए!


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Bhosda bada diya e toh