न्यू ईयर पर भाभियों साथ जबरदस्ती ग्रुप चुदाई का खेल 02

Antarvasna Hindi Sex Story : इस Group Sex Story के दूसरे भाग में जाने कैसे मोहन ने सभी भाभियों की Wild तरीके से चुत चुदाई करके उन्हे Pregnent कर डाला!


पिछली भाग : "न्यू ईयर पर भाभियों साथ जबरदस्ती ग्रुप चुदाई का खेल" में अपने पढ़ा की :


रेखा आंटी ने नेहा को देखकर दरवाजा बंद कर दिया। "हमने सब सुना तुमने नेहा के साथ मजा लिया ना?" शर्मा आंटी ने कहा। मोहन ये सुनकर घबरा गया। नेहा अभी ही सो रही थी, वो कमरे की घटना से अनजान थी। फिर अचानक दोनों आंटियां मोहन पर झपट पड़ीं। 


अब आगे :- 


शर्मा आंटी ने मोहन को बेड पर दबोच लिया, रेखा ने उसके पैर पकड़े। "बेटा, अब हमारी बारी," रेखा ने कहा। मोहन चिल्लाना चाहता था, लेकिन शर्मा आंटी ने उसके मुंह पर हाथ रख दिया और उसे धमकादी।


खुले तौर पर ये जबरदस्ती थी ये एक ऐसी जबरदस्ती थी जिसका सच होने का सपना लगभग दुनिया के हर मर्द ने कभी कभी देखा होता है। शर्मा आंटी ने अपनी साड़ी उतार दी, उनकी मोटी भारी चूचियां बाहर आ गईं शायद 38D साइज था। 


उन्होंने मोहन का लंड तुरंत पकड़ा, जो अबतक थोड़ा नरम हो गया था, लेकिन दो अप्सरा जैसी औरत को देखकर दबाव से फिर तन गया। "देखो ये तो रेडी है," शर्मा ने हंसकर कहा। रेखा ने अपना भी सूट उतारा उन्होंने मोहन के मुंह से अपनी नंगी गांड को छुआ, उनकी मोटी गांड मोहन के लंड को दिखी। 


दोनों ने पूरी तरह मोहन को नंगा कर दिया। शर्मा आंटी पहले चढ़ीं, और उसके ऊपर बैठकर लंड चूत में ले लिया। "आह्ह!” कहते हुए वो लंड पर बैठती चली गई “आआह! ओह हमममम! कितने साल बाद," वो सिसकी लेती हुई लंड को चूत में समाती चली गई। 


रेखा अपनी मोटी गांड़ लेकर मोहन के मुंह पर बैठ गई। 


वो अपनी चूत चटवाने लगी चूत के छेद को मोहन के होठों पर रगड़ती हुई वो सीएसएसएस! अआआह आआह! भरी सिसकारी ले रही थी मगर इससे मोहन का दम घुट रहा था, लेकिन वो विरोध न कर सका। ये Antarvasna Group Sex Stories आप Garam Kahani पर पढ़ रहे है।


आगे लंड पर बैठी आंटी आगाह! ओंह्ह्ह बेटा अआआह! मस्त लंड है यार अआआह! हमममम! कहते हुए लंड को अंदर बाहर ले रही थी साथ ही वो रेखा की चूंची भी पीती रही थी। दोनों औरते आगाह! ओह Yeah आगाह ! बहुत अच्छे मोहन अआआह! चोदो ओंह्ह्ह! ओह अआआह बुझादो हमारी प्यास आगाह। 


शर्मा आंटी ने अपनी चूत 10 मिनट चोदीं, वो चूत से लंड पर तेज-तेज धक्के मारतीं और रखा के चूंचे मसलती जाती दोनों की हम्मम! आगाह, आगाह! ओंह्ह्ह बेटा अआआह! मस्त लंड है यार अआआह! हमममम! से कमरा गर्म हो चुका था।


उनकी चूत ढीली थी, लेकिन अनुभव से वो मोहन को कंट्रोल कर रही थीं। फिर रेखा आंटी की बारी।


जबरदस्ती रेखा ने डॉगी स्टाइल में मोहन को घुमाया, फिर अपनी गांड ऊपर की। वो बोली "पीछे से चोद बेटा," लेकिन मोहन काफी थक चुका था आज उसकी लाइफ की पहली चुदाई थी मगर अब तक वो 3 बार झड़ गया था।


तो वो आंटी खुद उसके पीछे से सवार हो गईं। उनकी मोटी गांड के धक्कों से मोहन की कमर दर्द करने लगी। देखने से लग रहा था के दोनों आंटियां बारी-बारी मोहन की चुदाई कर रही थीं 20 मिनट चला ये चुदाई भरा नर्क। अब तक मोहन दो बार और झड़ गया था, लेकिन फिर भी वो दोनोंरुकीं नहीं। 


इतने में नेहा जागी तो उसने देखा तो वो भी मोहन की हालत पर हैरान हो गई लेकिन दवाई के असर में वो तरस नहीं कर सकी और खुद भी चुदाई में जॉइन हो गई। आखिर में तीनों ने मोहन को पूरी तरह निचोड़कर छोड़ दिया, अब वो बेहोश सा लेटा था।


आखिर तीनों औरतों की हवस शांत हुई तो मोहन को लगा, अब आराम मिलेगा। लेकिन बाद में पता चला के कमरे के बाहर प्रिया भाभी को अपनी बारी का इंतजार था। प्रिया भाभी 28 की खूबसूरत शादीशुदा औरत थी, लेकिन दवाई ने उसे भी चूत की राक्षसी बना दिया। 


फिर वो कमरे में घुस आई, उसकी आंखों में लंड के लिए आग थी। "मोहन, अब मेरी वारी," उसने अपनी कामुकता से भरी आवाज़ में कहा। मोहन ने आदमरी सी कोशिश करते हुए वहां से निकलना चाहा मगर प्रिया ने मोहन को सादी के पल्लू से बांध लिया।


उसने बेडशीट से हाथ पैर सख्ती से बांधे। मोहन पूरा विरोध कर रहा था मगर अभी उसमें कोई जान नहीं थी, "भाभी, प्लीज... बस करो।" वो गिड़गिड़ाया लेकिन प्रिया ने अपनी साड़ी उतारी, उसका 36-28-36 का सेक्सी फिगर था।


उसके चूचियां सख्त और गांड मस्त गोल थी। ये Aunty Ki Chudai Wali Kahani आप Garamkahani पर पढ़ रहे है।


ये असल में सामूहिक दुष्कर्म था। प्रिया ने भी मोहन के लंड पर सवार हो गई, लेकिन पहले उसने जबरदस्ती चूचियां चुसवाईं। "चूस साला नही तो मारूंगी भी और बलात्कार के जुर्म में तुझे पकड़वा भी दूंगी" उसने मोहन को धमकाया। 


मोहन को मजबूरी में उसने खूबसूरत निप्पल को चूसना पड़ा। ये सब वहीं औरते थी जिनसे मोहन रोज़ मोहल्ले में हाई हेलो करता था मोहल्ले का हर मर्द इन औरतों को चोदना चाहता था ।


लेकिन अपनी शर्म को छोड़ते हीं ये इतनी वहशी हो जाएंगी ये शायद किसी ने सपनों में भी नहीं सोचा होगा। फिर प्रिया ने चुदाई शुरू की – वो मोहन के लंड को ऊपर से, नीचे से करते हुए कूदने लगी, वो अआआह! हमममम! मोहन अआआह मेरी जान , चोद ना अआआह!


ज़ोर लगाकर हिन्ह्हः ऐसे ही आर्ह्ह्ह! अआआह हाय कितने दिन हो गए थे लंड लिए हुए आअअाब! चोद अपनी प्यारी भाभी को अआआह! भाभी ने हर अलग अलग पोजिशन लेकर मोहन के लंड को चोदा। 


वो लगातार चिल्ला रही थी, "और जोर से! अआआह साले ओंह्ह्ह! तू मेरा गुलाम है आज न्यायाह्ह! अआआह Fuck ओहद्ह।" मोहन का लंड अब इस जुल्म से सूज गया था, उसे बेहद दर्द हो रहा था। लेकिन प्रिया ने मोहन की कर्राहट को बिल्कुल अनसुना करके 30 मिनट तक उसका तक रेप करा था।


वो मोहन के लंड को चूत में लेते हुए तीन बार झड़ी। आखिर में मोहन ने भी अपनी बचीकुची जान को भाभी की चूत के अंदर झाड़ दिया, लेकिन वो खुद का कंडोम यूज कर रही थी तो उन्हें डर नहीं था। 


अब थकान और दर्द के मारे मोहन रो रहा था, लेकिन प्रिया बस संतुष्टि के साथ हंसकर उतर गई। "कल फिर आना," वो कहकर लंड पर मारती हुई कपड़े समेट रही थी। मोहन ने चारो औरतों से वादा करा के वो किसी से कुछ नहीं बोलेगा और अब उसे खोल दिया जाए।


लेकिन अब बारी थी गोली आंटी की थी। वो 50 साल की व्हीलचेयर पर बैठी बूढ़ी औरत रही लेकिन दवाई ने उसे भी अब जवान कर दिया था। गोली आंटी ने खुद को चेयर के साथ कमरे में घसीटा। 


उनका चेहरा बूढ़ा था, लेकिन जिस्म अभी भी मजबूत था – वो 42-38-44 के देसी फिगर वाली गांव की खाई खिलाई औरत थी, उनके चेहरे पर झुर्रियां थी और चूचियां लटकी हुई झूल रही थी। 


"बेटा, आंटी को भी थोड़ा सेवा का मौका दे दे," उन्होंने अपने सूखे लिपस्टिक वाले होठों को ज़बान से गिला करते हुए कहा। लेकिन मोहन अब थक चुका था, उसका लंड अब लटक रहा था। ऐसा होना ज़हीरि बात थी क्योंकि मोहन पहली चुदाई में ही 6 से 8 बार चुदाई कर चुका था।


लेकिन गोली आंटी ने बैग से एक सेक्स पावर की गोली निकाली ये वही दवाई जो रवि ने मिलाई थी। वो बोली "बेटा! ये खा, इससे तेरे लंड में ताकत आएगी," फिर उन्होंने जबरदस्ती अपने मुंह में लेकर वो गोली मोहन के मुंह में ठूंस दी।


आंटी के मुंह से नर्म हो गई थी तो मोहन के मुंह में जाते ही गोली घुल गई। मोहन का लंड फिर तन गया, लेकिन अब उसमें दर्द असहनीय हो रहा था। गोली आंटी व्हीलचेयर से उतरकर मोहन पर चढ़ गईं। 


ये XXX Gandi Hot Sex Story आप Garamkahani पर पढ़ रहे है। उनकी चूत बिल्कुल ढीली थी, वो सालों की लंड उपेक्षा से लंड के इंतज़ार में थी, लेकिन उनकी चूत दवाई से गीली हो रही थी।


तने हुए लंड को पकड़कर आंटी ने चूत में लिया "आह्ह, ओहद्ह! बेटा, कितना अच्छा लग रहा आगाह!" वो सिसकीं। मोहन चिल्लाया, लेकिन गोली आंटी ने उसके होठों पर होठ रखकर मुंह बंद कर दिया। 


वो तजुर्बे वाली औरत थी साथ ही गोली ने उनको खूंखार बना दिया था वो अपने एक हाथ से लंड को चूत पर पकड़े हुए धक्के मार रही थी, हम्मम! उम्ममम! उम्ममम! की दबी आवाजें मोहन और आंटी के मुंह से एक साथ निकल रही थी।


उन्होंने मोहन के पूरे चेहरे को ज़बान से चाट चाट के गीला कर दिया उन्होंने पूरे 40 मिनट चुदाई की वो उम्र की वजह से धीरे-धीरे चूड़ी, लेकिन उनकी चुदाई सबसे अधिक बेरहम थी।


 फिर वो मोहन के होठों को छोड़ कर थोड़ा उठी और घोड़े की तरह लोड़े की सवारी करने लगी मोहन में अब चीखने की हिम्मत नहीं बची थी उनकी लटकी चूचियां मोहन के चेहरे पर थपेड़े मार रही थीं।


अब मोहन का लंड फटने को था, उसने टोपे पर से पानी की जगह खून निकलने लगा था। आखिर में फिर गोली आंटी भी झड़ीं, फिर सारी औरते एक साथ मोहन को घेरकर बैठी सबने अपनी चूत उसके सामने कर दी।


वो सब चूत में उंगली चलाने लगी वो लोग मोहन के लंड पर मुट्ठी मार रही थी लेकिन अब लंड में खड़े होने की ताकत नहीं बची थी, मोहन की सांसे फूल रही थी फिर 5 मिनट में ही सारी चूतें एक साथ झड़ गई सबकी की चूत से बहुत तेज़ पानी और सुसु की धार निकली जिसमें मोहन पूरी तरह भीग गया था।


उसके लंड चूत का पानी लगते ही उसमें जान आ गई वो एक पल को सख्त हुआ तुरंत ही तेज़ी से झड़ गया और मोहन एक अआआह! के साथ बेहोश हो गया।


जब सुबह हुई तो मोहल्ला शांत था, लेकिन वो चुदाई का कमरा खून और पसीने से महका हुआ था। नेहा, वो तीनों आंटियां और भाभी, सब नॉर्मल हो गईं थी उनपर से दवाई का असर उतर चुका था। लेकिन मोहन, उसके लंड में सूजन अपने ऊफान पर आ गई थी।


5 अलग चूत का पानी लगने से उसे इंफेक्शन हो गया था, और पूरे शरीर में दांत , नाखून और काटने नोचने की चोटें दिख रही थी। सभी औरते उसकी हालत देखकर घबराई हुई थी फिर हिम्मत कर के शर्मा आंटी ने एम्बुलेंस बुलाई।


डॉक्टरों ने कहा, "ओवरयूज से टिश्यू डैमेज हो गया। दो महीने हॉस्पिटल में रहना पड़ेगा।" मोहन हॉस्पिटल में लेटा तड़पता रहता था, दर्द की दवाओं पर और बाकी खर्च को शर्मा आंटी संभालती थी वो पांचों औरते रोज़ मोहन की खेर खबर लेने आती थी।


गोली आंटी ज़्यादातर मोहन के पास हो रहती थी दिखने में लगता है की वो सब औरते अच्छी थी मगर उनका बार बार मोहन के पास आना बस एक डर की वजह से था कही मोहन किसी को सच न बता दे। 


मोहल्ले वालों को लगा, पार्टी में कोई एक्सीडेंट हो गया होगा। लेकिन रवि को उसकी हरकत के लिए पकड़ लिया गया था सभी औरते ने मिलकर रवि पर नींद की गोली और सेक्स की गोली देकर औरतों के साथ दुष्कर्म का इल्ज़ाम लगाया और जेल पहुंचा दिया।


ये Desi Bhabhi Sex Story आप Garam Kahani पर पढ़ रहे है। इस हादसे के कुछ महीने बाद जब मोहन वापस घर आया तो मोहल्ले वाले एक एक कर के उससे मिलने आए एक दिन वो सभी औरते भी उसके घर आई थी।


नेहा, शर्मा रेखा और गोली व भाभी जी ने मिलकर उसको धमकाया के अगर उसने किसी से कुछ खास तो वो बोल देंगी के रवि के साथ वो भी शामिल था और इसी लिए वो हॉस्पिटल पहुंचा।


मगर साथ ही उन्होंने मोहन को अपना गुलाम भी बना लिया था, कोई भी कभी भी मोहन को अपने पास बुला लेती थी उन्होंने उसकी नौकरी छुड़ा दी थी, वो रोज़ एक के घर जाता था।


वो वहां नौकर की तरह काम करता जिसके बदले उसे पैसे मिलजाते असल काम तो उनकी हवस को शांत करना था। नेहा की भी शादी शादी हो चुकी थी मगर कौन लड़की मर्द को गुलाम बनाना नहीं चाहती। 


क्यों की औरतों के पास लालच देने के लिए वो खज़ाना होता है जो कभी खत्म नहीं होता इसलिए मर्द भी अक्सर उनके जाल में फंस जाते है। कभी मोहन का क्रश नेहा पर था लेकिन अब मोहन की मर्दानगी कमजोर होने लगी थी वो सेहत से एकदम पतला हो गया था। 


अच्छा खाना पीना होने के बाद भी उसे सुकून नहीं मिल पा रहा था आज 30 दिसंबर 2025 की शर्मा आंटी के घर की न्यू ईयर पार्टी में सभी औरते ने नंगी चूत पर केक लगाकर मोहन को खुशखबरी दी की उन सभी के पेट में मोहन का बच्चा है।


सभी ने उसके पास नंगी बैठकर ज़ोर से बोला “दुनिया में आए हो तो कर जाओ ऐसा काम, की हर गली हर कूचे से आवाज़ आए अब्बा जान अब्बा जान।” और सब एक हवस भरी हसी हंसने लगी।


आप सोच रहे होंगे आखिर ये कहानी मुझे कैसे पता चली तो में बता दूं की ये कहानी मुझे मोहन ने बताई थी जब मैं हॉस्पिटल में उसको दवाईई देने जाता था तो वो मुझे बहुत बेचैन लग रहा था तो जब उसका हॉस्पिटल में आखिरी दिन था।


तब उसने मुझे पूरी बात बताई। इस कहानी में कुछ सच्चाई है और कुछ कल्पना तो ये बात में आप पर छोड़ता हूं के आपको कौनसी बात सच लगती है कौनसी काल्पनिक।


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