शादी में गुलाबो दीदी ने फड़वाई सील पैक चुत!
Gaon Ki Chudai : शादी वाली रात गुलाबो दीदी की चुत जीभ से की गीली! मोटा लंड घुसा तोड़ी सील! फेरे के समय लगातार चुदाई करके बुझाई सालों की प्यास और मनाई सुहागरात!
बहुत समय बाद विजय को अपनी नानी के घर जाने का अवसर मिला। परिवार में एक बड़ी शादी थी और उसी खुशी में दूर-दूर से सभी रिश्तेदार इकट्ठा हो रहे थे।
लगभग 8 वर्षों के बाद वह उस गाँव की मिट्टी, गलियों और बचपन की यादों को फिर से देखने जा रहा था।
बस से उतरते ही ठंडी हवा ने उसका स्वागत किया। रास्ते के दोनों ओर हरे-भरे खेत लहरा रहे थे और दूर मंदिर की घंटियों की आवाज़ सुनाई दे रही थी।
विजय के मन में बचपन की अनगिनत यादें एक साथ जाग उठीं। नानी के घर पहुँचते ही आँगन में चहल-पहल दिखाई दी।
हर तरफ रिश्तेदारों की हँसी, बच्चों की शरारतें और शादी की तैयारियों का उत्साह फैला हुआ था। नानी ने उसे गले लगाकर खूब दुलार किया।
विजय एक संस्कारी लड़का था उसका कद 5 फट 6 इंच , रंग गोरा , जिस्म गठीला ओर स्वभाव नर्म था। वो अपने गांव से शहर पढ़ने गया था लेकिन जैसा हर गाँव की कहानी होती है वहां से दूर जाने वाले को लौटने में कभी कभी साल लग जाते है।
दिन भर वह सबके साथ व्यस्त रहा, लेकिन उसके मन में बार-बार एक पुरानी परिचित याद आ रही थी।
उसे पड़ोस में रहने वाली गुलाबो दीदी याद थीं, जिनके साथ वह बचपन में खूब बातें किया करता था। वह सोच रहा था कि पता नहीं अब वे कैसी होंगी।
शाम के समय अचानक सामने से एक मुस्कुराती हुई युवती आती दिखाई दी। विजय ने ध्यान से देखा तो पहचान गया कि वही गुलाबो दीदी थीं।
उन्होंने उसे देखते ही मुस्कुराकर कहा, "अरे विजय, इतने साल बाद याद आई हमारी?"
विजय ने तुरंत आगे बढ़कर उनको गले लगा लिया उनका और दोनों हँस पड़े। वर्षों का अंतर जैसे एक पल में मिट गया था। दीदी लेकिन अब पहले की तरह नहीं रही थी दोनों की उमर में बस कुछ महीनों का फर्क था।
दीदी के गले लगते ही विजय को एहसास हुआ के दीदी का जिस्म अब बदल गया है उसके सीने में दीदी की मोती चूची दब गई जिसका एहसास दीदी के मुंह से निकलती अआह! से हुआ।
अचानक विजय को अपनी गलती समझ आई और वो पीछे हट गया मगर दीदी ने कुछ नहीं बोला और मुस्कुरा दी फिर वो विजय को नाश्ते के लिए ले गई। पुराने दिनों की बातें शुरू हुईं तो समय का पता ही नहीं चला।
गुलाबो दीदी पहले की तरह ही सरल और स्नेही स्वभाव की थीं। उनके चेहरे पर अपनापन साफ दिखाई देता था ।
बातचीत में वही पुरानी आत्मीयता झलक रही थी। विजय को लगा जैसे बचपन फिर लौट आया हो।
गुलाबो दीदी की शादी नहीं हुई थी उसके चेहरे में कशिश थी लेकिन रंग सांवला होने के कारण कोई सही रिश्ता नहीं मिल रहा था।
गांव के संस्कार और शर्म की वजह से गुलाबो दीदी रात के अकेलेपन को खामोशी से सह रही थी।
इधर घर शादी की तैयारियाँ तेज़ी से चल रही थीं। कोई सजावट कर रहा था, कोई मेहमानों के लिए बिस्तर लगा रहा था और कोई रसोई में व्यस्त था। पूरे घर में उत्साह का माहौल था।
रात होने तक इतने मेहमान आ चुके थे कि नानी के घर में सोने की बिल्कुल जगह नहीं बची।
हर कमरा लोगों से भरा हुआ था और आँगन तक में बिस्तर बिछ चुके थे। सभी सोचने लगे कि विजय कहाँ रुकेगा।
तभी गुलाबो दीदी ने मुस्कुराकर कहा, "अगर सबको ठीक लगे तो विजय आज हमारे घर रुक जाए।" नानी ने भी सहमति दे दी क्योंकि उनका घर थोड़ी ही दूरी पर था। विजय भी सहजता से उनके साथ चल पड़ा।
जब से विजय घर आया था तब से मेरी नज़रे उसपर टिकी हुई थी और गुलाबो दीदी के आने के बाद से विजय का उत्साह अलग ही जोश मार रहा था ।
गुलाबो दीदी के मन में भी शायद कुछ चल रहा था वो बार बार विजय से अपने जिस्म को मिलती मुझे दिख रही थी। ये Nonveg HotSexStory आप Garamkahani पर पढ़ रहे हैं।
आप सोच रहे होंगे की मैं कौन हूं। विजय की नानी के घर में मेरी ही शादी हो रही थी मैं उनके घर में काम करती हूं लेकिन विजय की नानी ने मुझे अपनी बेटी की तरह पाला है।
मुझे विजय बचपन से ही पसंद था मगर मेरी उससे शादी हो नहीं सकती थी। मेरा नाम है सुहानी।
चलिए अब कहानी पर आती हूं गुलाबो दीदी का घर छोटा लेकिन बहुत साफ-सुथरा था। आँगन में तुलसी का चौरा था और बरामदे में मिट्टी की हल्की खुशबू फैली हुई थी। वहाँ का शांत वातावरण विजय को बहुत अच्छा लगा।
अभी जो मैं आपको कहानी सुना रही हूं ये सब मुझे गुलाबो दीदी ने ही बताई थी। उन्होंने मुझसे और मैने उनसे कभी कुछ नहीं छुपाया था।
विजय के जाने के बाद एक वही मेरा सहारा थी जिससे मैं दिल की बात कर सकती थी।
रात का भोजन करने के बाद दोनों ने कुछ देर तक गाँव की पुरानी यादों पर बातें कीं। दीदी ने पूछा “विजय शहर में कोई लड़की पसंद आई या नहीं।"
विजय ने बहुत आम सा जवाब दिया “नहीं दीदी! ऐसी कोई लड़की मिली ही नहीं जिसके करीब आने का मन करे।"
दीदी बोली “कैसी लड़की चाहिए जी तुमको मुझे बताओ मैं ढूंढ के देती हूं।" विजय ने कहा “अपनी ही तरह कोई ढूंढकर दे दो।"
दीदी ने अफसोस के साथ कहा “मेरी जैसी क्यों चाहिए। मुझे कोई पसंद करता तो अब तक शादी कर चुकी होती।"
इतना बोलकर दीदी उदास हो गई फिर विजय उनके करीब आया और उनके कंधे में हाथ डालकर उनसे कहने लगा “अरे दीदी! देखने को वालो की नज़रे खराब है।
जो लोग रंग देखकर लड़की पसंद करते है उनके रिश्ते लंबे नहीं चलते।"
दीदी उसकी बात से थोड़ा शांत हुई साथ में रखी चाय दोनों ने पीकर खत्म की फिर गुलाबो दीदी ने उसके लिए अलग बिस्तर लगा दिया। कुछ ही देर में पूरे घर में सन्नाटा छा गया।
आधी रात के आसपास विजय की आँख अचानक खुल गई। बाहर से ठंडी हवा आ रही थी और चाँदनी कमरे में हल्की रोशनी फैला रही थी। चारों ओर गहरा सन्नाटा था।
उसकी नज़र गुलाबो दीदी की ओर चली गई। चाँदनी में उनका साँवला लेकिन आकर्षक चेहरा बहुत शांत और कामुक दिखाई दे रहा था। दीदी के सीने में आती जाती हुई सांसे उनकी प्यासी जवानी की कहानी सुना रही थी।
विजय कुछ देर उनके पास ही बैठ गया और दीदी के गदराय जिस्म को देखने लगा उसने धीरे से अपने हाथ को दीदी के चूचे पर रख दिया।
विजय की सांसे भारी होने लगी वो दीदी की सांसे महसूस कर रहा था। विजय लगातार दीदी की चूची देखे जा रहा था वो धीरे धीरे उनको दबाने लगा।
गुलाबो दीदी की सांसे भी तेज़ होने लगी विजय कभी एक चूची दबाता कभी दूसरी चूची को सहलाता।
उसने खुदको थोड़ा और करीब करा फिर एक हाथ से चूची दबाने लगा और दीदी के पजामा के अंदर से जांघे सहलाने लगा।
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वो धीरे से जांघे सहला रहा था दीदी को भी हल्का हल्का जोश आ रहा था उन्होंने मुझे बताया था के वो उस समय जग चुकी थी लेकिन विजय का छूना उनको अच्छा लग रहा था।
विजय से उनकी जांघों पर ऊपर आना शुरू करा दीदी की सांसे अब अटकने लगी वो बहुत आराम से ऊपर आ रहा था और आखिरकार उसने चूत को छू लिया।
आअआअह! दीदी की एक आह निकली जिससे घबराकर वो रुक गया लेकिन न दीदी ने आँखें खोली और नहीं विजय ने हाथ हटाया कुछ पल रुकने के बाद विजय से चूत को पजामे के ऊपर से ही सहलाना शुरू कर दिया।
दीदी अपनी सांसे काबू में रखते हुए मज़े ले रही थी विजय उनकी चूची और चूत के साथ खेल कर मज़े ले रहा था। उसने फिर पजामे के नाडे को खोल दिया और अपनी एक उंगली उनकी चूत के छेद पर लगा दी।
उंगली खाकर वो चूत को सहलाने लगा दीदी को कभी किसी लड़के ने नहीं छुआ था उनकी चूत बहुत टाइट थी जिसमें उंगली भी नहीं जा सकती थी।
विजय ने धीरे से अपनी उंगली उनकी चूत में सरका दी दीदी ने दर्द की वजह से तकिये को सख्ती से पकड़ लिया और खुद को रोकने लगी।
विजय उनकी चूत में अपनी उंगली घुमा रहा था वो धीरे धीरे उंगली को अंदर बाहर कर रहा था दीदी के पैर थोड़े से मचलना शुरू हो गए थे लेकिन अभी भी उन्होंने आंखे बंद रखी हुई थी।
विजय को लग रहा था दीदी गहरी नींद में है उसने दीदी के पजामे को खींचा और उतारकर एक तरफ डाल दिया। दीदी समझ गई आज उनकी सालों की प्यास शांत हो जाएगी।
विजय बिस्तर के ऊपर आया और दीदी की टांगे खोली दीदी ने भी किसी तरह का विरोध नहीं करा विजय ने दीदी चूत को फिर से सहलाना शुरू करा । दीदी की चूत गीली होने लगी थी उनका थोड़ा थोड़ा पानी आने लगा था।
दीदी के मुंह से हल्की हल्की अआआह! हम्ममम! आह की आवाज़ आने लगी थी जिससे विजय समझ गया के दीदी अब जागी हुई थी।
विजय को जैसे ही असलियत समझ आई उसने बिल्कुल देर नहीं करी और अपना मुंह दीदी की चूत पर लगा दिया। दीदी के मुंह से सिस्सास्ज्ह की सिसकी निकल आई।
विजय अपनी जीभ को दीदी के चूत में अंदर तक डाल रहा था। दीदी की टांगे मचल रही थी लेकिन वो अभी भी आंखे नहीं खोल रही थी।
विजय ने अपने हाथों से दीदी की कमर को ऊपर करा और सच में चूत से निकलते पानी को चाटने लगा।
दीदी अपनी चूची अब खुद ही दबा रहा थी उनकी कमर विजय के चेहरे पर झटके मार रही थी। थोड़ी देर गुजरी विजय तेज़ी से चूत चाटने में लगा था के इतनी देर में अचानक एक गरम पानी की धार आई।
गुलाबो दीदी की चूत ने पानी छोड़ दिया था वो तेज़ी से काँपती अपने हाथों से विजय से चेहरे को अपनी चूत पर रगड़ने लगी। विजय भी मज़ा लेकर उनकी चूत से निकलते पानी को पी रहा था।
उसके बाद दीदी थोड़ा शांत हुई और उठकर बैठ गई विजय और दीदी एक दूसरे को देख रहे थे दोनों ही बिल्कुल खामोश थे दीदी का चेहरा शर्म से उठ नहीं पा रहा था।
विजय तब थोड़ा आगे बढ़ा और उसने उनके चेहरे को ऊपर उठाया वो बहुत धीरे से गुलाबो दीदी के होठों के करीब आ रहा था।
दीदी ने उसका कोई विरोध नहीं करा और विजय ने आगे बढ़कर अपने होठ दीदी के होठों से मिला दिए।
विजय दीदी के होठों को चूम रहा था लेकिन दीदी एक मूर्ति की तरह बस शांत बैठी हुई थी विजय अपने हाथ फिरसे उनकी चुचियो पर ले गया इसबार वो थोड़ी सख्ती से उनकी चूची मसलने लगा।
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दीदी को दर्द ज़्यादा महसूस हों लगा तो उन्होंने भी अपने हाथ चूची पर रखके विजय के हाथ दबाने लगी। दीदी ने अपने थोड़े से होठ खोले तभी विजय ने अपनी चूत के पानी से भीगी जीभ उनके मुंह में डाल दी।
दीदी भी विजय का साथ देने लगी दोनों एक दूसरे को चूम रहे थे दीदी भी उसकी जीभ को चूस रही थी कभी वो विजय से जीभ को चुसवां रही थी।
दीदी ने अपना हाथ आगे कर के विजय के लंड पर रख दिया विजय ने अपने हाथ को नीचे लेजाकर दीदी के हाथ में लंड पकड़वा दिया दीदी ने लंड को दबाना शुरू करा और जोश के साथ विजय को चूमने लगी।
दीदी नीचे से नंगी थी और विजय ने उनकी कुर्ती उतरके ब्रा निकल दी जिससे अब दीदी पूरी तरह नंगी होने लगी थी। विजय ने दीदी को पीछे करा और उठकर सामने खड़ा हो गया वो दीदी को देख रहा था।
गुलाबो दीदी नंगी बैठी हुई शर्मा रही थी विजय ने फिर अपने कपड़े उतारे दीदी उठकर आगे आई और घुटनों पर बैठकर विजय का लंड चूसने लगी विजय का लंड 7 इंच का था जो दीदी के लिए बहुत बड़ा था।
दीदी लंड चूसते हुए उसकी लंबाई और सख्ती का अंदाज़ा ले रही थी क्योंकि कुछ ही देर में वो इस नाग को अपनी चूत में लेने वाली थी। उसके बाद दीदी उठी और वापस बिस्तर पर बैठ गई।
दीदी की शर्म अब उतर गई थी उन्होंने विजय को अपने पास आन का इशारा करा और पीछे लेट गई अपनी टांग उसके सामने खोल दी।
विजय आगे चला उसने कमर ऊपर कर के अपने लंड को दीदी के छेद पर लगाया उसके बाद उनके ऊपर लेट कर आंखों में देखने लगा।
जैसे ही विजय ने एक धक्का मारा तो थोड़ा लंड चूत के अंदर गया दीदी की एक आह निकली और उन्होंने विजय को पकड़ लिया उसके बाद विजय ने उनके होठ को चूमा फिर एक तेज़ धक्का मारा।
इस धक्के से आधा लंड अंदर समा गया दीदी की आंख से आंसू आने लगे उन्होंने अपने नाखून विजय की पीठ पर गाड़ दिए और अपनी टांगे उसकी कमर से बांध ली।
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विजय से फिर से एक धक्का मारा और पूरा लंड अंदर चला गया दीदी की आअआअह! से चीख निकल गई। विजय ने जल्दी से उनके मुंह पर हाथ रखा और लंड को धकेलना शुरू करा।
ये दीदी की पहली चुदाई थी जो वो अपने बचपन के सबसे अच्छे दोस्त के साथ कर रही थी। दीदी की आंखों में खुशी के आंसू थे दीदी ने अपनी बहे उसके गले में डाली और होठों को चूसने लगी।
विजय अपनी पूरी तेज़ी से दीदी की चुदाई कर रहा था दीदी अआआह! ओह्ह्ह विजय और तेज़ आआआह।
बहुत अच्छे आआआह बुझा दो मेरी प्यास ओह्ह्ह्ह ह्म्म्म अआआह! चोदो और तेज़ अआआह विजय आआह की आवाज़ से विजय को जोश दिला रही थी। आधे घंटे चुदने के बाद दीदी का पानी आने वाला था और विजय भी झड़ने वाला था।
दीदी ने उसे कस कर पकड़ लिया और चूत को लंड पर धकेलने लगी विजय समझ गया दीदी झड़ने वाली है तो उसने उनको उठाकर गोद में ले लिया।
विजय गोद में दीदी को लेकर बैठा दीदी उसके लंड पर उछलने लगी दोनों अपनी पूरी तेज़ी में थे की 4 5 तेज़ धक्कों के साथ दोनों का पानी निकल गया।
दीदी का दो बार पानी निकला जिससे वो बेजान होकर उसी के ऊपर गिर गई।
दीदी और विजय सुबह तक नंगे ही एक दूसरे पर सोते रहे सुबह का जब आया तो उसने दीदी को पहले उठाया दीदी उठकर विजय को देखने लगी सूरज की रोशनी में उसका जिस्म चमक रहा था।
उसके चमकते जिस्म को देखकर दीदी मुस्कुराई और उन्होंने उसके लंड को चूम लिया और मुंह में लेकर चूसने लगी एक लड़के के लिए ज़िंदगी की सबसे हसीन गुड मॉर्निंग शायद वही हो।
विजय कसमसाते हुए उठा और दीदी को लंड पर सवार देखकर उसको जोश आ गया और सुबह सुबह उन्होंने एक राउंड चुदाई का फिर से कर लिया।
अगले दिन मेरी शादी हो गई दीदी ने बताया जब में फेरे ले रही थी तो वो विजय के साथ किसी कमरे में सुहागरात मना रही थी।
ये जो मैने आप लोगों को कहानी सुनाई ये मुझे गुलाबो दीदी ने अभी कुछ दिन पहले बताई है। जब मैने सुनी थी तो मेरी चूत ने तो पानी ही निकाल दिया था।
आप को ये Didi Ki Antarvasna Chudai Ki Kahani कैसी लगी मुझे ज़रूर कमेंट में बताना जरूर! और ऐसे ही Hindi Sex Kahani पढ़ने के लिए मेरी कहानी लाइक जरूर करें!
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