दीदी के साथ सोके उसकी कुंवारी चूत चोदी

Bhai Bahan Ki Chudai : मुझे अपनी बड़ी बहन की कुंवारी चूत चोदने और उन्हें अपना लंड चुसाने का मौका मिला। और मैने इस मौके का पूरा फायदा कैसे उठाया। आईये जानते है इस बहन की चुत चुदाई की कहानी में।


मेरा नाम सोहेल है।  मेरे परिवार में चार लोग हैं। मेरे अलावा, मेरी माँ, पिता और एक बड़ी बहन। दीदी मुझसे दो साल बड़ी हैं।  उसका नाम फतिमा है।


मेरी बहन का चेहरा बहुत मासूम है। वे देखने में बहुत सुंदर, बहुत गोरी और थोड़े गोल-मटोल हैं। उनकी हाइट छोटी है, लेकिन वो देखने में बेहद आकर्षक हैं। उसे देखकर किसी की भी नियत खराब हो सकती है।


दीदी B.Sc अंतिम वर्ष की छात्रा हैं। 


यह कहानी बड़ी बहन की चुत चुदाई के बारे में है।


दीदी मुझसे बहुत प्यार करती है। हम दोनों में बहुत प्यार है।  हम दोनों एक ही कमरे में अलग-अलग बिस्तर पर सोते हैं और वहीं अपनी पढ़ाई भी करते हैं।


एक दिन मै ऐसे ही दीदी के साथ सो गया।  उसी समय किसी कारण से मेरी नींद खुल गई।


मैंने देखा कि दीदी एक पैर मेरे शरीर पर उठा कर लेटी हुई थी और मुझे कसकर पकड़ कर सो रही थी। मुझे ये थोड़ा अजीब लगा लेकिन मैंने दीदी को ऐसे ही सोने दिया।


इस तरह सोने में मुझे भी अच्छा लग रहा था कि कोई लड़की मुझे अपनी बांहों में सुला रही है।


वो रात तो ऐसे ही गुजर गई, लेकिन अंदर बहुत हलचल थी और उस दिन शायद पहली बार मुझे अपनी बहन के बदन की गर्मी महसूस हुई।


उसके बाद जब भी मैं अपनी बहन के साथ सोता था तो देखता था कि मेरी बहन मेरे साथ ऐसे ही सोती थी। मुझे भी बहुत मजा आ रहा था और ऐसे में मेरा लंड खड़ा होने लगा।


शुरुआत में तो नहीं, लेकिन बाद में मैं कुछ ही देर में चड्डी में आ जाता था। इतना सब होने के बाद भी मैंने दीदी के साथ कुछ नहीं किया।


कुछ दिनों तक ये सब ऐसे ही चलता रहा।


मैं भी इस बारे में दीदी से कुछ नहीं कहता, ना ही दीदी ने कुछ कहा।


फिर एक दिन मैं दीदी के साथ सो रहा था।


इस बार मैंने जानबूझ कर अपना पैर दीदी के ऊपर उठाया और एक हाथ दीदी के मम्मों पर रख दिया। जब उसकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो मैंने उसका एक दूध भी दबा दिया।


दीदी अभी भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रही थी। इससे मेरा मनोबल और भी बढ़ गया।


कुछ देर बाद मैंने अपना एक हाथ बहन की पैंटी में डाल दिया और उसकी चूत को सहलाने लगा।


  यह कहानी आप गरम कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है  


दीदी आराम से सो रही थी और कोई प्रतिक्रिया भी नहीं कर रही थी।


कुछ देर बाद मैंने देखा कि दीदी थोड़ा हिल रही है, तो वो पूरी ताकत से उसी पोजीशन में लेटी रही।


फिर दीदी ने अपनी टांगें थोड़ी और फैला दीं, इससे मुझे उनकी चूत को सहलाने में आसानी हो गई।


मेरा हाथ अभी भी दीदी की पैंटी के अंदर ही था इसलिए मैं उनकी फैली हुई टांगों के बीच उनकी चिकनी चूत को और आसानी से सहलाने लगा।


कुछ देर बाद दीदी की चूत गीली हो गई और दीदी की चूत से पानी सा झड़ गया। पानी झड़ते समय दीदी का शरीर थोड़ा अकड़ गया था, जिसे मैं अच्छे से महसूस कर रहा था।


इससे मेरे मन में Antarvasna का एहसास हुआ और मैं भी मुठ मार कर सो गया।


ये सब कई दिनों तक ऐसे ही चलता रहा।  मैं रोज़ मुठ मार कर सो जाता था।


अब भी हम दोनों इससे आगे नहीं बढ़ रहे थे। ना तो मुझे दीदी की तरफ से कोई सिग्नल मिल रहा था और ना ही मैं ज्यादा कुछ कर पा रहा था।


फिर एक दिन मैं पढ़ते-पढ़ते दीदी के पास सो गया।


रात करीब दो बजे मेरी नींद खुली। दीदी मुझे पकड़ कर आराम से सो रही थी।


मैंने दीदी को साइड में लिटाया और उठ कर लाइट जला दी, एक बार उनकी तरफ देखा।


आज दीदी नाइटी पहन कर सोयीं। बाथरूम में पेशाब करने के बाद मैं वापस आकर दीदी के बगल में लेट गया।


कुछ देर बाद मैंने दीदी की नाइटी उठाई तो देखता ही रह गया।


दीदी ने आज पैंटी नहीं पहनी थी।


आज मैं पहली बार किसी लड़की की नंगी चूत देख रहा था।


दीदी की चूत पर एक भी बाल नहीं था और एकदम गुलाबी थी।


गुलाबी चूत देख कर मेरा मन उसे चूमने का हुआ। ।  लेकिन डर था कि अगर दीदी जाग गई तो मेरी कहानी लिखी जाएगी।


हालाँकि मैं जानता था कि दीदी को सब पता है, फिर भी उन्हें सोने का नाटक करके मजा आता है।


फिर भी मेरी गांड फट रही थी।  मैंने कुछ देर सोचा, फिर दीदी की टांगों के बीच आ गया। मैंने उसके पैर फैलाये और उसकी चूत पर एक किस किया।


चूमते समय मैंने ध्यान से देखा कि दीदी के पूरे शरीर में करंट सा दौड़ गया।


मैं रुक गया।


फिर कुछ पल बाद मैंने देखा कि दीदी आराम से अपनी चूत खोलकर सो रही थी।


अब मुझे दीदी की चूत अच्छे से दिखने लगी।


दीदी की टाइट चूत बहुत क्यूट थी और उसकी पुसी लिप्स बहुत मोटी थी।


  यह कहानी आप गरम कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है  


दीदी की बुर का छेद बहुत छोटा था; मतलब दीदी ने अब तक किसी से भी बुर चुदाई नहीं कराइ थी। दीदी अभी तक वर्जिन थी 


यह देख कर मैं बहुत खुश हुआ कि दीदी की चूत की सील मैं ही तोड़ूँगा। उसके बाद मैंने दीदी की चूत को दो तीन बार चूमा मगर दीदी ने अपनी आंखें नहीं खोलीं और न ही कुछ प्रतिक्रिया की।


मैंने अपनी जीभ से चूत चटाई शुरू कर दी… तब भी कुछ नहीं हुआ।


बस मैं समझ गया कि दीदी सोने का ड्रामा कर रही हैं और चूत का काम चौबीस किया जा सकता है। मैं अब बिंदास अपनी बहन की चूत को चूसने लगा था।


दीदी की चूत की बड़ी ही कामुक खुशबू थी जो मुझको मदहोश कर रही थी।


मैं भी मस्त होकर चूत चूसने में लगा था।


उसी दौरान एक बार तो दीदी के मुँह से आह भी निकल गई थी लेकिन मैंने देखा कि दीदी अपनी आंखों को जोर से बंद की हुई हैं।


इससे सब समझ में आ गया कि दीदी जाग रही हैं और अपनी चूत चुदाई का मजा ले रही हैं।


इससे सब समझ में आ गया कि दीदी जाग रही हैं और अपनी चूत चुदाई का मजा ले रही हैं।


फिर चूत चूसते चूसते देखा कि दीदी के शरीर में ऐंठन आने लगी है और दीदी जोर जोर से सांस लेने लगी हैं। मैं समझ गया दीदी की चुत का पानी झड़ने वाला हैं।


फिर 5 मिनट बाद दीदी की चुत का पानी झड़ गया और मेरे मुँह में उनके नमकीन माल का बाद ही मस्त स्वाद आया।


मुझे बहुत मज़ा आया।


मैंने दीदी की चूत की पूरा पानी चाट चाट कर पी लिया और बाद में भी दीदी की चूत को चूसता रहा।


कुछ देर बाद मैं अपना लंड दीदी के चूत पर रगड़ने लगा, दीदी की चूत के छेद में लंड सैट कर अन्दर डालने लगा।


अब दीदी ने करवट ले ली।


शायद दीदी अभी अपनी चूत में लंड नहीं लेना चाहती थीं; वे अभी सेक्स नहीं करना चाहती थीं … बस अपना चूत चुसवा कर मजे लेना चाहती हैं।


मैंने भी उनकी भावना को समझा और उनकी चूत देख कर अपना लंड हिलाया और माल निकाल कर दीदी के बाजू में ही सो गया।


दीदी ने मुझे अपनी बांहों में भर लिया।


हम दोनों भाई बहन सो गए।


अगली रात फिर से मैंने दीदी की चूत चूसी और उन्हें झाड़ कर चूत का रस चाट लिया।


ऐसे ही हम दोनों भाई बहन का चूत चुसवाने का खेल चलता रहा।


फिर एक दिन मैं दीदी के पास सोया हुआ था।


दीदी रात में नाइटी पहन कर सोने लगी थीं लेकिन आज दीदी ने पैंटी भी पहनी थी।


  यह कहानी आप गरम कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है  


मैँ दीदी के पिंक निप्पल दबाने लगा और उनके एक दूध को नाइटी के ऊपर से ही चूसने लगा।


फिर मैंने दीदी की गर्दन में किस किया और उनके होंठों को चूम लिया।


इसके बाद मैं दीदी की नाइटी उतारने लगा तो देखा कि दीदी खुद से अपना जिस्म उठा कर नाइटी उतारने में मेरी हेल्प कर रही हैं।


मैंने दीदी की नाइटी उतार दी।


मेरे सामने मेरी बहन ब्रा और पैंटी में थी।  उनकी ब्रा और पैंटी दोनों लाल रंग की थीं और दीदी बहुत सेक्सी लग रही थीं।


ऐसा लग रहा था मानो हुस्न की परी मेरे सामने लेटी हो।


मैंने दीदी की ब्रा भी उतार दी। उनके दोनों बूब एकदम तने हुए थे।


मैंने अपनी बहन के बूब्स को खूब चूसा और मसल कर लाल कर दिया।


दीदी आँखें बंद करके मजा ले रही थी, उसकी हल्की-हल्की आहें भी निकल रही थी।उसके बाद मैं अपनी बहन की पैंटी उतारने लगा। दीदी ने भी अपनी गांड उठा कर पैंटी उतारने में मदद की।


अब दीदी पूरी नंगी थी।


मैंने अपनी बहन के पूरे शरीर को चूमा और बाद में मैं बहन की चूत को चोदने लगा। दीदी ने अपने हाथ से अपना मुँह कस कर दबा लिया था ताकि कामुक सिसकारियाँ न निकलें।


फिर भी थोड़ा बाहर जा रहा था।


कुछ देर बाद दीदी ने अपनी चुत की मलाई मेरे मुँह में छोड़ दी और मैं दीदी की चुत का खट्टा रस पी गया। दीदी की चूत चूस चूस कर एकदम लाल हो गयी थी।


अब मैं अपना लंड दीदी की चूत के ऊपर रख कर हिलाने लगा और उनकी चूत के ऊपर ही मुठ मार कर नंगा ही सो गया।


फिर कुछ दिनों तक हम दोनों भाई-बहन का ये खेल ऐसे ही चलता रहा।  सुबह उठने के बाद हम दोनों भाई-बहन ऐसे रहते थे जैसे कुछ कर ही नहीं रहे हों। यानी पूरी तरह सामान्य रहते थे।


फिर एक दिन मैंने बहन की चूत चूसी और उसे बीच में ही छोड़ दिया। बहन परेशान हो गयी।


मैं उनके दूध चूसने लगा और उसके बाद उनके कान चूसते हुए बोला- दीदी, मुझे लंड अन्दर डालना है।


दीदी कुछ नहीं बोलीं।


  यह कहानी आप गरम कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है  


मैंने दांव खेला और कहा- अगर तुम्हें चूत चूसनी है तो लंड भी चूसना पड़ेगा! दीदी फिर भी कुछ नहीं बोली।


मैंने कहा- मैं लेटा हूं, तुम मेरा लंड चूसो।


ये कह कर मैं लेट गया।


कुछ मिनट बाद दीदी ने मेरे लंड को अपने हाथ से सहलाया।


मैंने अपने पैर फैला दिए।


वही हुआ दीदी ने लंड से मुँह हटाया और बोलीं- चूस तो रही हूँ।  तुम मुझे दबाओ नहीं!


मैंने भी कहा- अब जब लंड चूत को चूसना ही है तो क्यों न एक साथ चूसें?


दीदी कुछ नहीं बोलीं, बस मुस्कुरा दीं।


मैंने दीदी को अपनी बांहों में भर लिया और उन्हें चोदने लगा।


दीदी बोलीं- ये सब किसी को बताना नहीं! मैंने कहा- ये भी कोई बताने की बात है


वो हंस पड़ी और हम दोनों 69 Position में आकर एक दूसरे को चोदने लगे।


दोस्तो, अब हम दोनों भाई-बहन खुल कर चोदम पटी करने लगे।


दीदी अभी गांड चुदाई के मूड में नहीं है।  लेकिन उसने वादा किया है कि वो गांड का उद्घाटन मेरे लंड से ही करवाएगी।


जब मैं अपनी बहन की गांड की सील तोड़ूंगा, तब आपको वो सेक्स कहानी जरूर बताऊंगा।


आपको मेरी बड़ी बहन की चुत चुदाई की कहानी कैसी लगी, प्लीज़ कॉमेंट करके बताना। 

← Previous Story Next Story →

Share This Story :  

🎲 Feeling Lucky? Read a Random Story

यह कहानी आपको कैसी लगी?

❤️ Love 0
😍 Wow 0
😂 Funny 0
😢 Sad 0
😡 Angry 0
👏 Clap 0

💬 Leave a Comment :-

📝 Comments :

Mujhe bhi tumhari behan ko chodne ka hai

nice...

Aah Bhaiya meri bhi to Kunvari chut hai!! 💋