बहन को चोदकर उसके सुहागरात का डर भगाया!

Family Sex Story: कैसे एक भाई ने अपनी बहन की शादी से पहले उसकी चूत की सील तोड़कर अपनी बहन की चुदाई का डर भगाया! पढे इस Desi Antarvasna Sex Story में!


मेरा नाम विनय है और मैं गोरखपुर से हूं। यहां पर मैं अपना वास्तविक नाम प्रयोग न करके काल्पनिक नाम लिख रहा हूं। मेरी उम्र 28 साल है और पेशे से मैं एक प्राइवेट जॉब करता हूं। 


मैं अपने पुश्तैनी घर पर ही रहता हूं, क्योंकि मां-पापा का देहांत हो चुका है। अब सिर्फ मैं और मेरी छोटी बहन प्रिया बचे हैं, जो 19 साल की है। 


प्रिया कॉलेज में फाइनल ईयर की स्टूडेंट है, वो दिखने में बहुत ही सुंदर है, मेरी बहन गोरी-चिट्टी है, वो एक लंबी कद-काठी वाली लड़की है।


उसके घने बाल हमेशा लहराते हुए रहते है, उसकी खूबसूरत आंखें बड़ी-बड़ी काली है और बेहद नशीली है, और फिगर तो ऐसा की कोई भी देखे तो लंड खड़ा हो जाए। 


उसके होंठ गुलाबी है और चूचियां मीडियम साइज की गोल-मोल है, मेरी बहन की कमर पतली और गांड ऐसी कि टाइट सलवार में घूमे तो नजर न हटे।


पहले मैं अपने जीवन में इस तरह की सोच नहीं रखता था। लेकिन टाइम पास करने के लिए मैंने Garam kahani पर कहानियां पढ़ना शुरू किया।


Garam Kahani की कहानियां पढ़ते हुए मेरा रुझान लड़कियों की चूत, चूचियों और गांड की तरफ कुछ ज्यादा ही बढ़ने लग गया था। 


मुझे भी इस बारे में पता नहीं लगा कि मेरे अंदर सेक्स की एक आग नीचे ही नीचे दबी हुई रहने लगी है। खासकर जब प्रिया की सगाई हो गई, तो सब बदल गया। 


प्रिया की सगाई एक अच्छे लड़के से हुई थी, जो डॉक्टर था। लेकिन सगाई के बाद प्रिया थोड़ा डरने लगी। उसे सुहागरात का खौफ सता रहा था। वो रात-रात भर सो नहीं पाती थी वो बस चुपचाप रोती रहती। 


मुझे उसकी फिक्र होने लगी थी तो मैंने पूछा तब वो बोली, "भैया, मुझे डर लगता है। सुहागरात में वो मुझे कैसे छुएगा, मुझे कुछ पता ही नहीं। 


दर्द होगा, खून निकलेगा, और अगर मैं चिल्ला पड़ी तो शर्म की बात हो जाएगी। किताबों में तो लिखा है, लेकिन असल में कैसा होता है, कोई नहीं बताता।"


उसकी बात सुनकर मेरे मन में एक अजीब सी उत्तेजना जागी। Garam Kahani.com की कहानियां तो मैंने भाई-बहन वाली भी पढ़ी थीं, जहां भाई अपनी बहन को चुदाई सिखाता है। 


प्रिया भी मेरी अपनी बहन ही तो थी, और हमेशा से ही उसकी वो बोली सूरत, वो डर, वो गोरी चूत का ख्याल आते ही मेरा लंड अकड़ने लगा था। मैंने सोचा, क्यों न मैं ही उसे सुहागरात मनाना सिखा दूं। 


क्यों न मैं ही उसे अनुभव दूं, ताकी सुहागरात पर वो डरे नहीं। तो बस, मैंने मन बना लिया। अगले दिन मैने छुट्टी ले ली घर में कोई न होने से घर में सिर्फ हम दोनों थे। 


शाम को प्रिया कमरे में बैठी सुहागरात और चुदाई की किताबें देख रही थी, लेकिन उसका चेहरा उदास था।


 मैं उसके पास गया, बहन के कंधे पर हाथ रखा और हमदर्दी में पूछा "प्रिया, क्या हुआ? फिर सुहागरात का डर तुमको सता रहा है?"


वो मेरी तरफ मुड़ी, उसकी आंखों में आंसू थे, वैसे तो ये बाते दोस्त व सहेलियां सिखा देते है मगर हम भाई बहन मां बाप के बाप दुनिया से थोड़ा कट सा गए थे। 


वो उदास चेहरे से बोली "हां भैया, कल सगाई की पार्टी है, लेकिन मैं सोच-सोचकर परेशान हूं। वो मेरी चूत में अपना लंड डालेगा, और मैं तो कुंवारी चूत हूं मैं सच में दर्द से चीख उठूंगी। क्या करूं?"


उसके मुंह से 'चूत' और 'लंड' शब्द सुनकर मेरा लंड पैंट में तन कर खड़ा हो गया। मैंने उसके नर्म गाल सहलाए, "अरे मेरी जान, डरने की कोई बात नहीं,


तेरा भैया सब सिखा देगा। तू बस मेरा कहना मान। आज रात घर में कोई नहीं आएगा, हम अकेले हैं। मैं तुझे चुदाई का पूरा ज्ञान दूंगा, ताकी तेरी सुहागरात पर तू एंजॉय करे।"


प्रिया चौंकी, "भैया, आप? लेकिन... ये तो गलत है न?"


मैंने मुस्कुराते हुए कहा, "गलत क्या? ये तो प्यार है! भैया तेरी भलाई के लिए कर रहा है। तू सुहागन बनेगी, तो सब जानना तो बनता है। 


चल, आज से शुरू करते हैं, तेरी ट्रेनिंग।" वो थोड़ा शरमाई, लेकिन उसके चेहरे पर डर ज्यादा था, फिर भी उसने हामी भर दी। तब तक रात के 9 बजे थे। 


मैंने खुद ही डिनर बनाया और अपनी बहन को अपने हाथों से खिला दिया। फिर उसके कमरे में उसे गोद में उठा कर ले गया। वो सलवार-कमीज में थी, उसकी पिंक कलर की सलवार मेरा जोश बना थी।


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 उसकी कमीज जो उसके गोरे बदन पर चिपक रही थी। इसमें उसके चूचियों के उभार साफ दिख रहे थे। मैंने दरवाजा बंद करा, लाइट डिम की। मैने उसे पूछा "प्रिया बहन, पहले बता, तूने कभी अपनी चूत को छुआ है?"


वो बस लज्जा से सिर झुका ली, "हां भैया, कभी-कभी उंगली से सहलाती हूं। लेकिन ज्यादा कुछ नहीं।"


मेरा लंड झटके मारने लगा उसकी आवाज़ में एक कामुकता आ गई थी। मैंने कहा, "अच्छा, तो चल पहले मैं तुझे पुरुष के अंग दिखाता हूं।" मैंने अपनी शर्ट उतारी, फिर पैंट की चेन खोली। 


मेरा लंड बाहर आया, वो चूत के ख्याल में सुबह से तना हुआ था, मेरा लंड मोटा, 7 इंच का फौलाद था उसके टोपे पर चिकना रस चमक रहा था।


 प्रिया की आंखें उसे देखकर फैल गईं। "भैया... ये... इतना बड़ा लंड है।" वो एक टक लंड को घूर रही थी। मैंने हंसकर कहा, "हां रानी, ये ही लंड है। सुहागरात पर तेरा पति भी ऐसा ही खड़े फौलाद के साथ तेरा इंतजार करेगा। 


स्पर्म यहीं से निकलता है, चुदाई के बाद भी स्पर्म चूत में जाकर बच्चा बन जाता है, आ इसे छूकर देख।" वो थोड़ा हिचकिचाई, लेकिन फिर हाथ आगे बढ़ाया।


 उसके कोमल हाथों ने मेरा लंड पकड़ा। "ओह भैया, कितना गर्म है ये... और ये झटके क्यों मार रहा?"


अआआह! मैं सिसकारी लेते हुए बोला, "ये उत्तेजना है प्रिया। तू प्यार से सहला, ऊपर-नीचे कर इसे।"


प्रिया ने धीरे-धीरे मेरा लंड हिलाना शुरू करा। उसके नरम हाथों से मुझे मजा आ रहा था। मैंने उसके कंधे सहलाए, फिर हाथ नीचे ले जाकर उसके चूचियों को दबाया। 


मेरा हाथ लगते ही वो सिहर गई, "भैया... लुफ़्फ़ आह..." मैंने उसकी कमीज ऊपर की,फिर ब्रा के ऊपर से चूचियां मसलीं।


"ये तेरी चूचियां हैं, इतनी रसीली कैसे है ये। सुहागरात पर पति इन्हें चूसेगा तो मज़ा आ जाएगा उसे।" 


मैंने प्रिय की ब्रा खोली, उसके दो गोरे-गोरे आम जैसे चूचे बाहर आ गए। उसके निप्पल गुलाबी थे, वो सख्त हो चुके थे। मैंने एक को मुंह में लिया,और जोर से चूसा।


 प्रिया वासना से चीखी, "आह्ह भैया... स्स्स... कितना मजा आ रहा, हमममम आह!" उसकी सांसें तेज हो गईं। मैं दूसरे निप्पल को चबाते हुए बोला, "देख, दर्द नहीं लग रहा न? चुदाई भी वैसी ही होगी।"


अब मैंने उसकी सलवार उतारी। पैंटी में उसकी चूत का उभार साफ दिख रहा था। मेरी बहन की गुलाबी पैंटी गीली हो चुकी थी। 


"प्रिया, तेरी चूत कितनी सुंदर है। बिल्कुल कुंवारी, एक दम टाइट है।" मैंने उसकी पैंटी नीचे की। उसकी चूत एकदम क्लीन साफ-सुथरी थी, उसके तो चूत के फांकें भी गुलाबी थे, बीच में छोटा सा टीला था। 


वो शरम के साथ तड़पी, "भैया, मत देखो न, मुझे बहुत शर्म आ रही है..." लेकिन मैंने अपनी जीभ निकाली, और चूत पर रगड़ी।


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इससे उसकी वासना बीतक गई "आह्ह... ओह भैया... क्या कर रहे हो, हमममम ओंह्ह्ह! अआआह हाहाहाह भैया गुदगुदी हो रही है?" मैंने जीभ पूरी अंदर डाली, फिर ज़ोर से चूसा। 


उसका रस मीठा व चिकना था, प्रिया उत्तेजना से अपनी कमर उछालने लगी, "स्स्स... भैया... बहुत बेचैनी हो रही...


 उंगली डालो न नीचे.." मैंने एक उंगली डाली, उसे अंदर-बाहर किया। वो कराहने लगी, "हां... ऐसे ही... मजा आ रहा!"


मैंने कहा, "अब असली चुदाई का टाइम है। लेट जा बेड पर।" प्रिया लेटी, उसने टांगें फैलाईं। मैंने अपना लंड उसके चूत पर रगड़ा। मैने टोपे से चूत की फांकें खोलीं। 


वो कांपती हुई बोली "भैया... डर लग रहा... धीरे करना, प्लीज़।" मैंने पहले थूक लगाया लंड पर, फिर चूत पे हल्का धक्का दिया।


 मेरा बस टोपा अंदर गया इतने में ही प्रिया चीखी, "आह्ह... दर्द... हटाओ, अआआह मर गई मैं!"लेकिन मैंने उसके होंठों पर होंठ रख दिए और बहुत मस्ती से चूसा। मैने अपने हाथों से अपनी बहन की मस्त चूचियां मसलीं। 


मैं फिर दो मिनट रुका, जब मैने देखा प्रिया थोड़ा शांत हो गई है तो फिर मैने धीरे धक्का लगाया। इस बार मेरा आधा लंड अंदर घुस गया, वो नाखून गाड़ने लगी मेरी पीठ पर।


 "उम्म्ह... भैया... फट रही चूत...अआआह हम्मम! मैंने पूरा दम भर के एक धक्का मारा। आखिर में पूरा लंड अंदर समा गया।


उसकी चूत से खून निकला थोड़ा। बेचारी प्रिया रोने लगी, "ओह...अआआह देखो खून आ रहा है... आआह बहुत दर्द हो रहा है आगाह!"


मैं कुछ देर ऐसे लेटा रहा उसके ऊपर, उसको शांत करने के लिए मैने प्यार से उसकी चूचियां चूसीं। "शशश... रानी, ये पहली बार का दर्द है। हाइमन टूट गया। अब मजा आएगा।" मैने उसे समझाया ।


पांच मिनट बाद, जब वो शांत हुई, तो मैंने धीरे-धीरे धक्के शुरू किए। उसकी चूत सच में बहुत टाइट थी, वो गर्म थी और अब रस से चिकनी हुई थी।


 "आह्ह... प्रिया... तेरी चूत तो मस्त है..." वो भी कराहने लगी, "भैया... अब दर्द कम हो रहा... हां... गहरा डालो...अआआह आ जाओ मेरे अंदर" उसके चेहरे पर सुकून देखके मैंने स्पीड बढ़ाई।


हमारा पूरा बेड हिलने लगा। उसके चूचे उछल रहे थे। मैं एक चूचा मुंह में दबाया, और दूसरा मसलता हुआ अपनी बहन चोदने लगा। 


प्रिया की टांगें मेरी कमर पर लिपटीं थी, "हां भैया... चोदो... अआआह ओह मजा आ रहा...अआआह और तेज... अआआह!"


 उसका पहली बार झड़ने का समय आया। उसकी चूत सिकुड़ गई, उस कमसिन चूत का पहला रस बहा। "आह्ह्ह...मज़ा आ गया... ओह भैया...हमममम थैंक यूं।"


मगर मेरा काम अभी नहीं हुआ था तो मैंने पोजिशन बदली। उसे डॉगी स्टाइल में घुमाया। उसकी कमर दबाकर गांड ऊपर करी, फिर 2 उंगली डालकर चूत खुली।


 एक थप्पड़ गांड़ पर मर के पीछे से लंड डाला और जोर-जोर से ठोके। हमारी धक्का पेल चुदाई फिर से शुरू हो गई "पचक-पचक" की आवाज पूरे कमरे में गूंजने लगी।


प्रिया अन्तर्वासना से चीख रही थी, "हां... भैया... मारो और मारो... चूत फाड़ दो मेरी अआआह! ओह! अआआह.." मैंने उसकी गांड पर खूब थप्पड़ मारे, पीछे से बाल खींचे। 


चुदाई करते करते दस मिनट बाद मेरा वीर्य फूटा। मेरा गर्म स्पर्म उसकी चूत में भरा। हम दोनों बेजान होकर गिर पड़े। हमारी सांसें तेज हो चुकी थी। 


मैने लंड बाहर निकाला,उसके खून और रस मिश्रित। प्रिया खून देखकर घबराई, "भैया, मैं प्रेग्नेंट तो नहीं हो जाऊंगी?" मैं हंसा, "नहीं रानी, ये सिर्फ अनुभव था। सुहागरात पर कंडोम यूज करना।"


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वो बाथरूम गई, और अच्छे से साफ होकर आई। फिर वो नंगा ही लेटी मेरे बगल में। "भैया, अब डर नहीं लगता। मजा आया बहुत। आपकी चुदाई से तो आनंद मिल गया मुझे।" 


मैंने उसे गले लगाया, "अब सुहागरात पर तू अपने पति को एंजॉय करेगी। जो मैंने सिखाया, वैसा करना।" अगले कुछ दिनों में मैंने उसे और सिखाया। ओरल सेक्स, 69 पोजिशन, गांड मारना। 


शादी से पहले हर रात मैं उसे चोदता। प्रिया की चूत ढीली हो गई थी, लेकिन वो बहुत रसीली थी। वो मेरे लंड को चूसती, "भैया, आपका लंड कितना स्वादिष्ट। उसने बहुत जल्द ही स्पर्म पीना सीख लिया था।"


फिर शादी का दिन आया। शादी के बाद जब वो घर आई तो उसने बताया , "भैया, सब वैसा ही किया जैसा आपने सिखाया था मगर पति का लंड छोटा था, लेकिन मैंने उसके ऊपर चढ़कर चुदाई की। कोई दर्द नहीं हुआ, सिर्फ मजा मिला। 


वो तो हैरान हो गया और बोला “ कि तू इतनी एक्सपर्ट कैसे है?" अब प्रिया शादीशुदा है, अपने पति से खुशी-खुशी चुदाई करती रहती है। कभी-कभी फोन पर कहती,


"भैया, आपकी देन है ये काबिलियत। लेकिन आपकी चुदाई का मजा अलग था।" मैं मुस्कुराता हूं, मैं उसे बोलता हूं।


“मैं जानता हूं कि मेरी बहन अब सेक्स क्वीन है।” जब वो घर आती है तो हम अपनी चुदाई की यादें ताज़ा करते है।


तो दोस्तों ये मेरी Bahan और bhai की chudai कहानी कैसी लगी? और क्या आप हमारे आगे हुए किस्सों को और जानना चाहते है? तो कॉमेंट करके मुझे जरूर बताए!


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