वर्जिन लड़की रंडी बनी क्लासरूम में! 2 हरामी दोस्तों ने चूत-गांड एक साथ फाड़ी

Desi Chudai Kahani: मुझे मनाकर क्लासरूम में 2 हरामी बेस्ट फ्रेंड्स ने मेरी वर्जिन चूत और गांड एक साथ फाड़ी | Antarvasna Threesome Chudai!


कैसे हो दोस्तो आशा करती हूं आप सब वासना की आग में जल रहे होगे। मेरा नाम विनी ( प्यार से लेने वाला नाम ) है और मैं राजस्थान की रहने वाली हूँ। 


अभी मैं दिल्ली के एक फेमस बोर्डिंग स्कूल में 12वीं क्लास कर रही हूँ ओर मेरी उम्र 18 साल है और मैंने अब तक किसी लड़के को छुई तक नहीं हूँ। ये कहानी मेरी मेरे दो बेस्ट वाले फ्रेंड्स के साथ पहली चुदाई के बारे में है स्कूल में मेरे दो बेस्ट फ्रेंड्स हैं – हाशमी और समीर। 


ये दोनों मेरे क्लासमेट हैं, लेकिन हम तीनों की दोस्ती तो बचपन से ही है। हम साथ-साथ खेलते, पढ़ते और हर राज शेयर करते हैं। लेकिन ये जैसा के दुनिया कहती है लड़का जात है ही कुत्ति चीज़ वैसे ही ये दोनों भी है।


इन दोनों हरामियों की एक ही जिद रहती – इनको मेरी चूत मारने की इच्छा है। शुरू से ही ये दोनों मेरी बॉडी पर कमेंट मारते रहते हैं। मेरे 32 के बूब्स और 34 की गांड देखकर ये दोनों के लंड खड़े हो जाते हैं हालांकि इन दोनों के नहीं हर मर्द के। 


मैं भी जानती हूँ के ये दोनों के लंड साइज़ मस्त हैं – हाशमी का 6.5 इंच लंबा और मोटा है व समीर का तो 7 इंच का राक्षस है। मगर मैं अभी वर्जिन हूँ साली मेरी चूत बहुत कामिनी है और इनकी चुदाई वाली बातों से डरती भी है।


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हमारी दोस्ती की शुरुआत इंस्टाग्राम से शुरू हुई थी। स्कूल में एडमिशन के टाइम ये दोनों ने मुझे फॉलो करा और चैट शुरू कर दी। शुरू में तो बस हेलो-हाय और बाय होता था लेकिन धीरे-धीरे ये दोनों ने अपनी वाली बातें शुरू कर दीं। 


"विनी, तेरी गांड तो कमाल की है यार, एक बार छू तो लूँ?" हाशमी ऐसी गंदी बातें करता के मुझे गुस्सा आ जाता मगर उसका नेचर बहुत हेल्पिंग वाला है एक बार सिर्फ मुझे खासी हुई थी तो मेरे लिए दवाई लेने वो पैदल 5 किलोमीटर गया था।


मगर बात करे समीर की तो वो और बेशर्म वो मुझसे खुले तौर पर बोलता है– "देख, तेरी चूत को चाटने का मन कर रहा है, साली रसीली लगती है बहुत।" 


मैं गुस्सा हो जाती और ब्लॉक करने की धमकी देती, लेकिन ये दोनों माफी मांग लेते और फिर दोस्ती निभाने लगते मुझे अभी भी याद है समीर ने एक बार मुझे एक्सीडेंट से बचाने के लिए खुदको कर के आगे कर दिया था। 


ये दोनों की दोस्ती मेरी ज़िंदगी की जीत थी और मैं भी अकेली थी ना, तो इनकी बातों में मज़ा लेने लगती थी। हम तीनों वीडियो कॉल पर घंटों बातें करते। कभी स्कूल की गॉसिप, कभी मूवीज, लेकिन इनका टॉपिक हमेशा मेरी बॉडी पर आकर रुक जाता था।


ये Antarvasna Virgin Girl Sex Story आप Garam Kahani पर पढ़ रहे है।एक साल तो ऐसे ही बीत गया। ये दोनों रोजाना चैट पर मुझे चुदाई वाली फोटोज भेजते थे – वो भी पोर्न वीडियोज, जहां लड़की दो लड़कों से चुद रही होती थी।


दोनों मज़ाक मज़ाक में कहते "देख विनी, तू भी ऐसा मज़ा ले सकती है। हम तुझे क्वीन बना देंगे।" मैं हंस देती मुझे इनके इरादे अच्छे से पता थे जैसे हर लड़की को आपसे साथ के जान पहचान वाले मर्द के इरादे पता होते है।


लेकिन अंदर से मैं भी गर्म हो जाती थी। रात को सोते टाइम इनकी बातें याद आतीं तो मैं अपनी चूत में उंगली डालकर मुठ मार लेती थी। लेकिन असल में मिलने-चुदने को कभी हाँ ना कहूँ, वो तो नामुमकिन था।


मैं बहुत संभलकर कहती"नहीं यार, मैं तैयार नहीं।“मेरा स्कूल है, फैमिली है, सब बर्बाद हो जाएगा।" मैं मना करती। लेकिन इनकी जिद तो देखो – हाशमी रोजाना मुझे मैसेज करता, "साली, तेरी चूत का भोसड़ा बनाना है। 


एक बार दे दे, फिर तुझे हसीन नज़ारे दिखा देंगे।" समीर तो और साला बढ़कर बोलता – "विनी, तेरी सील तोड़ दूँगा, फिर तू हमारी रानी बनेगी। लेकिन मज़ा तुझे आएगा, आह आह करके चिल्लाएगी।" 


हम तीनों की बाते बिना गलियों के अधूरी लगती थी और शायद यही वजह है हम लोग बाकियों के तुलना में बहुत कम उदास होते थे। करीब डेढ़ साल की इस जिद के बाद, मैं वासना और चूत की आग के चलते टूट गई।


हम स्कूल हॉस्टल में चोरी छुपे एक दूसरे के रूम में घुसकर बहुत देर तक खेलते रहते थे एक दिन स्कूल होस्टल में रूम शेयर करते हुए, हम तीनों बेड पर लेटे थे तभी हाशमी ने मेरी टी-शर्ट में हाथ डाल दिया और बूब्स दबाने लगा। 


"बस कर हाशमी, समीर देख रहा है!" मैं गुस्से में चिल्लाई, लेकिन समीर ने भी फिर हाथ बढ़ा दिया। "देख, तेरा नीप्पल तो खड़ा हो गया। मज़ा आ रहा है ना विनी?"


मैंने दोनों को धक्का दिया, लेकिन इनकी आँखों में वो आग थी जिसे मैं भी भड़काना चाहती थी। 


रात भर ये दोनों ने मुझे मनाया। "विनी, हम तुझे बहुत प्यार करते हैं। बस एक बार ट्राय तो कर। अगर दर्द हो तो रुक जाएँगे।" हाशमी ने मुझे नाजुकता से किस करते हुए कहा।


समीर ने भी आगे बढ़कर मेरी गर्दन चाटी, "तेरी चूत हमारी है, दे दे साली।" वो बोला तो मैं रोने लगी, लेकिन इनकी जिद से मैंने हार मान ली। "ठीक है, लेकिन सिर्फ एक बार। और कहीं नहीं, स्कूल में ही। 


जब मौका मिले और मेरी मर्ज़ी होगी तभी तब तक तुम दोनों मुझे परेशान नहीं करोगे।" मेरे मुंह से ये बात सुनकर ये दोनों खुशी से उछल पड़े। "कल स्कूल के बाद, जब अनुजा मैम बाहर जाएँगी। क्लासरूम में करेंगे।" समीर ने प्लान बनाया। 


अनुजा मैम हमारी क्लास टीचर हैं, वो भी एकदम सख्त माल मेरे दिल में उनके लिए बहुत गंदे वाले जज़्बात है। हर बुधवार को वो मीटिंग के लिए बाहर जाती हैं। बोर्डिंग टाइम पर स्कूल खाली हो जाता है। तो सच में ये परफेक्ट चांस! था हमारी चुदाई के लिए।


फिर अगला दिन आया मेरे दोनों हरामी दोस्त रात भर मेरे चूंचे मसलकर अपना लंड मुझसे सहलवाते रहे थे ।


खैर अगले दिन स्कूल खत्म हुआ, छुट्टी की बेल बजी और सब स्टूडेंट्स होस्टल चले गए। अनुजा मैम ने कहा, "मैं दो घंटे में आऊँगी, क्लास साफ कर देना तुम लोग।" 


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जैसे ही वो गेट से बाहर निकली, हाशमी ने मुझे मैसेज करा "क्लासरूम अब हमारा है।" मेरा दिल धक-धक कर रहा था। मुझे चूत में गीलापन महसूस हो रहा था, लेकिन डर भी लग रहा। मैंने सफेद स्कूल यूनिफॉर्म पहनी थी और ऊपर शर्ट और स्कर्ट थी।


मैं आज बिना ब्रा के ही आ गई थी, क्योंकि सुबह ही इन दोनों ने कहा था के समय कम होगा। जब क्लासरूम में बाथरूम से लौटकर पहुँची तो हाशमी और समीर पहले से थे। मेरे आते ही उन्होंने दरवाजा लॉक कर दिया। "आ गई मेरी जान?" 


दोनों लड़के भूखे शेरों की तरह की मुझ बकरी सी जान को देख रहे थे फिर हाशमी ने मुझे गले लगा लिया। उसका लंड मेरी जाँघ से लग रहा था। समीर ने पीछे से मेरी गांड पकड़ ली।


"साली, आज तेरी चूत का जश्न मनाएँगे।" उनके लंड की सख्ती महसूस कर के मैं घबरा गई।


 "यार, धीरे-धीरे करना देखो मेरा पहली बार है।" मैंने उनसे बिनती करी लेकिन ये दोनों कहाँ मानने वाले थे। हाशमी ने मेरी शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए। वो मेरे दिल पर हाथ फेरते हुए समीर से बोला "देख, 32 के ये बूब्स तो कमाल के हैं।"


मेरी शर्ट खुल गई, मेरे नंगे बूब्स बाहर उछल गए। समीर ने मेरा एक बूब पकड़ा और होठों में दबाकर चूसने लगा। "आह्ह... हाशमी, ये क्यों कर रहे हो अआआह?" मैं बेचैन होकर चिल्लाई, लेकिन सच कहूं तो मज़ा आ रहा था। 


हाशमी ने फिरदूसरे नीप्पल को काटा, "चूसने दे रानी, तेरा दूध तो मीठा है अभी।" मैं 'आह! हमममम! ओह हाशमी अआआ ! आह' करने लगी। मेरी स्कर्ट ऊपर चढ़ गई थी, समीर ने न जाने कब पैंटी में हाथ डाल दिया। 


वो बोला "वाह साली, चूत तो गीली हो गई तेरी अभी से ही। पानी छोड़ रही है ये।" उसने मेरी प्यारी चूत में उंगली डालने की कोशिश की, लेकिन मेरी चूत टाइट थी। "अरे, सील पैक है तू तो मज़ा आज फाड़ेंगे।" उसकी बातों से मुझे उत्तेजना होने लगी।


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ये दोनों ने मुझे उठाकर डेस्क पर बिठा दिया। फिर हाशमी ने मेरी पैंटी उतार दी। "देख समीर, गुलाबी चूत ये होती है। रसीली माल है हमारी दोस्त।" उनकी बातों से मैं शरम से लाल हो गई थी। "बस मत देखो यार इतना।"


मैं बोली नीचे से मेरी चूत भी इतराते हुए पानी छोड़ने लग गई लेकिन समीर ने झुककर चूत चाटना शुरू कर दिया। 


"आह्ह्ह... उफ्फ अआआह! ये ओंह्ह्ह... मत करो!" मैं बोली और सिर पकड़कर उसे हटाने लगी, लेकिन हाशमी ने मेरे हाथ जकड़ लिए। समीर की जीभ चूत पर घूम रही थी, वो क्लिट को चूस रहा था। "मस्त स्वाद है विनी। तेरी चूत का रस पी लूँ आज ज़रा।"


मैं भी अब बेहकगई तो पैर फैलाने लगी, मुझे अब मज़ा आ रहा था। 


'आह आह...उफ्फफ! समीर, बस अब मत रुकना ओहद्ह!... और चाट कुत्ते आगाह।' मेरी हालत देखते हुए हाशमी हंस पड़ा, "देख, रंडी बन गई तू तो। अब हमारा लंड भी लेगी।" समीर ने अपनी पैंट उतारी। उसका 7 इंच का लंड बाहर निकल आया। वो काला था, मोटा था, उसका सुपारा लाल लाल चमक रहा था।


 "देख विनी, ये तेरी चूत में घुसने वाला है अब।" वो बोला तो मैं डर गई। मैंने चुदाई के लिए मना करा "नहीं समीर, इतना बड़ा नहीं डाल... फट जाएगी मेरी चूत।" हाशमी ने भी अपनी पैंट उतारी।


"मेरा तो छोटा है मैं डालता हूं चल, पहले मैं डालूँगा।" लेकिन समीर ने कहा, "नहीं, मैं पहले डालूंगा।" दोनों ने झगड़ा शुरू कर दिया। उनके उतावलेपन से मैं हंस पड़ी। "अरे, एक-एक करके कर लो।" 


हाशमी ने कंडोम निकाला तो मैंने हैरानी से पूछा– स्कूल में कैसे लाए, उसने बस एक आंख मारी पता नहीं कैसे, लेकिन उसकी तैयारी पूरी थी। समीर ने कंडोम पहना और मुझे डेस्क पर लिटा दिया। उसने प्यार से मेरे पैर फैलाए। "तैयार हो जानेमन? चुदाई शुरू करे?" 


वो जेंटलमैन की तरह बोला फिर समीर ने लंड चूत पर रगड़ा। चूत पर गीलापन था जिससे लंड स्लिप हो रहा था। उसने हल्के से पकड़कर अंदर कर तो मैं "आह... गर्म है।" कहते हुए मैं सिहर उठी। 


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फिर एक और झटका लगा– पूरा सुपारा अंदर प्रवेश कर गया। "आआआह्ह्ह... दर्द हो रहा है साले ओंह्ह्ह! निकाल बाहर कुत्ते!" मैं चिल्लाई, उस दर्द से मेरे आँसू आ गए। लेकिन समीर रुका नहीं।


"बस एक सेकंड रुक, फिर आदत पड़ जाएगी।" वो बोला इधर हाशमी ने मेरे बूब्स चूसने शुरू कर दिए। 


धीरे धीरे लंड चूत में आने जाने लगा जिससे दर्द कम हुआ। समीर ने धीरे-धीरे अंदर-बाहर करा। "वाह साली, टाइट चूत है एक दम। मजा आ रहा है।" वो बोला अब मेरा भी दर्द मज़े में बदल गया था।"


आह...अआआह! समीर, और डाल...हुह्ह्हहा हाँ, ऐसे अआआह।"


अब मैं कमर मटका रही थी। मेरी आहे सुनकर समीर ने स्पीड बढ़ाई। 'तड़ाक तड़ाक' की आवाज़ चूत में से आने लगी। क्लासरूम में चुदाई का इको हो रहा था। "चोद रे साले अआआह! मेरी चूत फाड़ दे ओऊहह्ह्ह! अआआह और तेज़ अआआह और ज़ोर से" मैं गालियाँ देने लगी।


हाशमी हंस रहा था, "देख, कितनी जल्दी रंडी बन गई।" डेस्क के ऊपर आकर चुदाई करते करते वो दस मिनट में समीर झड़ गया। अच्छा तो वो कंडोम में ही झड़ा। 


"आह्ह... ले साली ओहद्ह, कैसा लगा।" जब उसका लंड बाहर निकला तो खून निकला पड़ा था – मेरी सील फट गई थी। हाशमी बहुत खुश था के "अब मेरी बारी।" उसने मुझे घुमाया और डॉगी स्टाइल में तैयार करा। 


उसने मेरी गांड ऊपर करी। "तेरी गांड भी मस्त लग रही है।" लंड चूत में घुसाना तो आसान था अब असली परीक्षा होगी। "आह... हाशमी, तेरा भी मोटा है , चोद मजा दे मुझे।" मैं खुलकर बोली फिर समीर ने आगे से मेरे बूब्स दबाए। मैं बीच में मस्त मौला होकर पड़ी थी। 


"हाँ यार, दोनों तरफ से करो।" हाशमी ने बेरहमी से मेरे अंदर लंड ठूस दिया मेरी आअआआअह! निकल है उसका लंड मोटा था वो पागलों की तरह मुझे चोदने लगा वो मेरी चूत को ज़ोर-ज़ोर से ठोक रहा था और कह रहा था "ले रंडी, तेरी चूत का भोसड़ा बना दूँगा आज।" 


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मैं भी चिल्ला रही थी, "हाँ साले अआआह! फाड़ दे मेरी ओंह्ह्ह!.. आह उह्ह्ह दिखा कितन दम है तुझमें अआआह, अआआह, ओहद्ह हाशमी अआआह।" समीर ने मेरा मुँह खोला और उंगली डाल दी। "चूस, जैसे लंड चूसेगी हमारा।"


अब असली मज़ा शुरू हो गया था। हाशमी ने मुझे उठाया, समीर नीचे लेटा। मैं समीर के ऊपर चढ़ गई, चूत में उसका लंड फिर घुस गया था। हाशमी मेरे पीछे से आया – लेकिन “चूत में नहीं, गांड में ठोकूंगा” वो बोला तो मैं इनकार करने लगी “नहीं हाशमी, गांड मत मारना देख!" 


लेकिन आज मेरी नहीं चलनी थी वो लुब्रिकेंट लगाकर ट्राय करने लगा। "बस थोड़ा सा लेकर, ट्राय कर।" फिर उसने आखिरकार गांड़ में लन्ड डाल दिया आअआआअह! मैं बौखलाई और दर्द हुआ, लेकिन गीला होने से लंड आसानी से घुस गया आधा।


"आआह्ह... ओंह्ह्ह! मार डालोगे साले!" मैं भड़की उन्होंने दोनों तरफ से भरा हुआ था। समीर नीचे से ठोक रहा था, हाशमी पीछे से चोद रहा था। "दोनों छेद भरे हैं रंडी। थ्रीसम का मज़ा ले अब।"


मुझे नहीं पता ये किसने बोला लेकिन अब तक मैं पसीने में नहा चुकी थी मैं पागल हो गई थी। 'आह आह...अआआह! ओंह्ह्ह चोदो दोनों... फाड़ दो अआआह! चूत भी फाड़ो गांड भी फाड़ो अआआह!' 


मैं उन्हें गालियाँ बक रही थी, और अपनी चुदाई का मज़ा ले रही थी। क्लासरूम की डेस्क हिल रही थी, किताबें गिर रही थी। बाहर से कोई आवाज़ आई तो हम रुक गए, लेकिन सब खाली था। बीस मिनट की ये चुदाई मेरी जिंदगी की हसीन याद बन गई। 


मैं उस चुदाई में दो बार झड़ी – पहली बार समीर के लंड से, दूसरी हाशमी के लोड़े से। पानी काफी सारा छूटा चूत से मगर सारा पानी मेरे दोस्तो ने चाट कर साफ कर दिया "आह्ह... झड़ गई साली!" समीर बोला। हाशमी ने गांड से लंड निकाला और मुँह में झाड़ दिया।


"ले, चाट मेरा भी रस।" मैंने भी अच्छे से चाटा, उसका नमकीन स्वाद कभी मेरे होठों से नहीं गया। समीर ने भी कंडोम उतारकर थोड़ा माल मेरे मुँह पर मारा। हम तीनों पसीने से तर हो चुके थे। मैं चल नहीं पा रही, मेरी चूत-गांड दोनों दर्द कर रही थी। 


लेकिन सच कहती हूं चेहरे पर खुशी थी। "मज़ा आया यार?" हाशमी ने पूछा। "हाँ साले, लेकिन अगली बार पेनकिलर भी लाना।" हम तीनों दोस्त हंसे। उन दोनों ने मेरे कपड़े पहनाए, पूरी क्लास साफ की।


अनुजा मैम आने से पहले हम होस्टल भागे। रास्ते में समीर ने कहा, "अगली बार मैम के डेस्क पर चुदाई करेंगे।" हाशमी बोला, "या होस्टल में।" मैं कुछ नहीं बोली और बस शर्माते हुए मुस्कुराई। 


दोस्तो, ये मेरी सच्ची चुदाई कहानी है। अगर पसंद आई और आप लोगो ने इस कहानी पर 100 लाइक दिए तो अगली कहानियां बताऊँगी जब– लेकिन याद रखो, सेफ रहना है तो ताबीज़ और कंडोम यूज़ करो!

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