सहेली को अपने भाई से चुदवाकर खुद भी चुद गई!

Antarvasna Family Sex : जाने कैसे मेरी दीदी ने अपनी स्नेहा दोस्त की चुदाई मुझसे कराई और अपनी Vasna में आकर चुदाई में शामिल होकर Threesome Sex Story बनाई।


मेरा नाम ज्योति है। मैं अपने पति अजय के साथ ऋषिकेश में रहती हूं। हमारी शादी को डेढ़ साल हो चुके हैं। अजय एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करते हैं और ज्यादातर समय ऑफिस में ही बिताते हैं।


हम दोनों शहर में अकेले ही रहते हैं, लेकिन हमारा वैवाहिक जीवन वैसा नहीं है जैसा मैंने सपनों में सोचा था। खासकर चरमसुख के टॉपिक में। 


अजय मुझसे बहुत प्यार करते हैं, लेकिन सेक्स के मामले में वे मुझे कभी पूरा संतुष्ट नहीं कर पाते। उनका लंड बहुत छोटा है, सिर्फ 4 इंच का! हर बार चुदाई के दौरान मुझे लगता है कि कुछ अधूरा सा रह गया। 


मैं उनके साथ रोमांस तो करती हूं, लेकिन असली मजा, वो गहराई वाली संतुष्टि, मुझे कभी नहीं मिली। मेरे बूब्स का साइज 34 है, मैं खुद को काफी हॉट और आकर्षक मानती हूं।


मेरे लंबे काले बाल, गोरी त्वचा, पतली कमर और भरी हुई गांड है लेकिन अजय का छोटा औजार मेरी भूख को कभी शांत नहीं कर पाता। फिर भी, प्यार के कारण मैं चुपचाप इस अधूरे पन को सह लेती थी।


मेरी एक बहुत अच्छी सहेली है, स्नेहा। हम कॉलेज के दिनों से दोस्त हैं। स्नेहा भी मेरे घर से थोड़ा दूर में ही रहती है, उसके पति की पोस्टिंग यहां है। 


स्नेहा दिखने में भी बहुत सेक्सी है – उसके बूब्स 36 के हैं, कमर पतली और गांड इतनी मोटी कि कोई भी देखकर पागल हो जाए। हम दोनों एक-दूसरे के राज खोलती हैं, खासकर सेक्स लाइफ के बारे में। 


एक दिन शाम को स्नेहा मेरे घर आई। हम चाय पीते हुए बातें कर रही थीं। अचानक स्नेहा ने बताया, "ज्योति, तू तो जानती ही है ना, मेरा पति कितना बोरिंग है। चुदाई में बस दो मिनट में फिनिश! खस्ता हो जाता है।


मुझे तो असली मर्द चाहिए जो मुझे रात भर चोदे।" मैं हंस पड़ी और बोली, "देख, मेरी तो और बुरी हालत है। अजय का तो लंड ही छोटा है, जैसे लकड़ी का कोई खिलौना हो!" 


हम दोनों अपनी हालत पर हंसते-हंसते लोटपोट हो गईं। तभी मेरे दिमाग में एक आईडिया आया।


मेरा छोटा भाई प्रवीण है, जो दिल्ली में पढ़ाई कर रहा है। प्रवीण 24 साल का है, बॉडीबिल्डर जैसा फिट बॉडी वाला मर्द है उसका लंबा कद और चेहरा किसी मॉडल सा है।


मैं जानती थी कि प्रवीण का लंड बहुत बड़ा है, बचपन में नहाते वक्त चुपके से देखा था, कम से कम 8 इंच का तो होगा! और वो सिंगल है, मगर हमेशा लड़कियों की बातें करता रहता है।


मैंने स्नेहा से कहा, "सुन, तुझे असली मजा चाहिए तो मैं तुझे अपने भाई से मिलवाती हूं। प्रवीण है मेरा भाई, दिल्ली में है, वो आएगा तो तुझे चोदकर तुझे असली आमान की सेर दिखा देगा!" 


स्नेहा शरमा गई, लेकिन उसकी चुदाई की आंखों में चमक आ गई।


"सच में ज्योति? तेरा भाई? लेकिन तू कैसी दोस्त है यार!"


मैंने हंसकर कहा, "अरे, तू मेरी बेस्ट फ्रेंड है। तुझे खुश देखना चाहती हूं मैं बस! एक बार ट्राय तो कर।" 


स्नेहा ने हामी भर ली। अगले हफ्ते प्रवीण को मैने बुलाया फैमिली विजिट पर। मैंने उसे स्नेहा के बारे में बताया। प्रवीण की आंखें चमक उठीं।


वो बोला "दीदी, तू तो कमाल है! स्नेहा दीदी जैसी हॉट लड़की को चोदने के लिए कह रही है? मैं तैयार हूं!" मैंने हंसकर उसे झिड़का, "बस, मजा लेना, लेकिन कोई प्रॉब्लम मत करवाना।"


मैने स्नेहा हो घर बुला लिया प्रवीण और स्नेहा की पहली मुलाकात मेरे घर पर ही हुई। प्रवीण आया तो स्नेहा को देखते ही रुक गया। स्नेहा ने लाल साड़ी पहनी थी, जिसमें उसके बूब्स बाहर झांक रहे थे। 


प्रवीण ने कहा, "हाय स्नेहा दीदी, दीदी ने बहुत बताया है आपके बारे में।" स्नेहा शरमाई, लेकिन प्रवीण की मर्दानगी वाली बॉडी देखकर उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई। 


हम तीनों चाय पीते हुए बातें करने लगे। प्रवीण स्नेहा को घूर रहा था, और स्नेहा भी चुपके-चुपके प्रवीण की जांघों पर नजर डाल रही थी। बातों-बातों में प्रवीण ने अपना नंबर स्नेहा को दे दिया। "कभी-कभी बात करना दीदी, दिल्ली की अपडेट दूंगा।" स्नेहा ने मुस्कुराकर ले भी लिया।


उस रात तो स्नेहा घर लौटी, लेकिन अगले दिन ही उनका फोन पर चैट शुरू हो गया। मैं स्नेहा से मिली तो उसने बताया, "ज्योति, प्रवीण तो बहुत स्मार्ट है। रात भर मैसेज करते रहे है हम।" 


और धीरे-धीरे मैसेज कॉल्स में बदल गए। एक शाम स्नेहा मेरे घर आई, और हम दोनों सोफे पर बैठे थे। अचानक स्नेहा का फोन बजा – फोन स्क्रीन पर नंबर प्रवीण का था। 


स्नेहा ने स्पीकर ऑन कर लिया, क्योंकि वो मेरे सामने खुली हुई थी। प्रवीण बोला, "स्नेहा दीदी, क्या कर रही हो? सोच रही हूं तुम्हें ही।" स्नेहा हंसकर बोली, "बस, ज्योति के पास हूं। तू बता, कैसा मूड है?"


प्रवीण की आवाज में शरारत थी, "मूड तो हॉट है दीदी। कल रात तुम्हारी वो फोटो देखी, जिसमें तुम बिकिनी में हो। उफ्फ, तुम्हारे बूब्स देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया!"


स्नेहा शरमाई, लेकिन बोली, "अच्छा जी? कितना बड़ा है तेरा लंड प्रवीण? दिखा ना फोटो!" मैं चुपचाप सुन रही थी, लेकिन मेरी चूत में हलचल सी होने लगी। 


प्रवीण हंसा वो गर्व से बोला, "8 इंच का है दीदी, गोरा और मोटा भी है खूब, तुम्हारी चूत फाड़ देगा आराम से!" स्नेहा की सांसें तेज हो गईं, "उफ्फ, मेरा पति का तो 5 इंच भी नहीं। तू कब आएगा मुझे चोदने प्रवीण?"


मैं उनकी बातों से अब पूरी तरह उत्तेजित हो चुकी थी। इनकी सेक्स टॉक सुनकर मेरी चूत गीली हो गई। अजय तो ऑफिस में थे, घर पर सिर्फ हम तीनों की आवाजें गूंज रही थीं – फोन पर प्रवीण की। ये Antarvasna Family Sex Stories आप Garam Kahani पर पढ़ रहे है।


स्नेहा ने फोन कंधे पर रखा और अपनी साड़ी ऊपर सरका ली, "प्रवीण, सुन, मैं अपनी चूत छू रही हूं। तू अपना लंड बाहर निकाल और हिलाने लग।" 


प्रवीण बोला, "हां दीदी, निकाल लिया। कितना सख्त हो गया है तुम्हारे नाम से!" स्नेहा की आंखें बंद हो गईं, वो अपनी पैंटी में हाथ डालकर मसल रही थी। मैं देख रही थी, मेरी सांसें तेज होती जा रही।थी। 


अचानक मेरा दिल धड़कने लगा – मुझे भी चुदाई का मन करने लगा। इतने दिनों से दबी हुई भूख जाग उठी।


मैंने सोचा, क्यों ना मैं भी शामिल हो जाऊं? स्नेहा मेरी दोस्त है, प्रवीण मेरा भाई है, दोनों को मैने मिलवाया दोनों ही मेरे अपने है।


मैंने स्नेहा का हाथ पकड़ा और बोली, "स्नेहा, मुझे भी मजा दे।" स्नेहा चौंकी, लेकिन मुस्कुराई। प्रवीण फोन पर बोला, "क्या हो रहा है वहां दीदी?" स्नेहा ने बताया, "ज्योति दीदी भी हैं यहां। वो..."


मैंने स्नेहा को सोफे पर लिटा दिया और उसकी साड़ी खींच ली। स्नेहा की पैंटी गीली थी। मैंने फोन प्रवीण के पास रखा और स्नेहा की टांगें फैला दीं। "प्रवीण, तू सुनता रह। मैं अपनी दोस्त की चूत चाट रही हूं।" 


प्रवीण उत्तेजित हो गया, "वाह दीदी! चाटो उसे, मैं यहां लंड हिला रहा हूं।" स्नेहा चिल्लाई, "आह ज्योति...क्या कर रही हो!"


मैंने स्नेहा की पैंटी उतार दी और अपनी जीभ उसकी चूत पर फेर दी। उसकी चूत का स्वाद नमकीन और मीठा था। 


स्नेहा की चूत साफ थी, उसके गुलाबी होंठ फूले हुए थे। मैंने जीभ अंदर डालकर चाटना शुरू किया – मैने अपनी ज़बान चूत में ऊपर-नीचे की, उसकी क्लिट पर जीभ घुमाते हुए दाने को चूसा। 


स्नेहा के मुँह से आवाजें निकलने लगीं, "आह... हमममम ऊंह... व्याह ज्योति...अआआह मेरी जान मत रुको... प्रवीण सुन रहा है ना देख मेरे साथ ज़ुल्म हो रहा है?" 


प्रवीण बोला, "हां दीदी, मैं झड़ने वाला हूं। स्नेहा दीदी, चिल्लाओ जोर से!" स्नेहा के बूब्स हिल रहे थे, मैंने एक हाथ से उसके निप्पल दबाए। वो मेरी जीभ पर सवार हो गई, उसकी कमर उछाल रही थी।


करीब 10 मिनट चाटने के बाद स्नेहा झड़ गई – उसका रस मेरे मुँह में बह आया। मैंने उसे पूरा चाट लिया सब। प्रवीण फोन पर बोला, "दीदी, मैं भी झड़ गया। लेकिन असली मजा तो मिलने पर ही आएगा। 


कल मैं आ जाऊंगा घर।" हम तीनों अपनी अधूरी चुदाई से हांफ रहे थे। स्नेहा ने मुझे गले लगा लिया, "ज्योति, तूने तो कमाल कर दिया। 


अब कल प्रवीण आएगा तो मेरा क्या करोगे तुम भाई बहन ..." मैं मुस्कुराई, "हां मेरी जान, थ्रीसम करेंगे। तुझे चोदवाऊंगी प्रवीण से, और मैं भी मजा लूंगी।"


अगले दिन प्रवीण ऋषिकेश पहुंच गया। वो मेरे घर आया, उसने सीधा स्नेहा को देखा तो तन बदन में आग लग गई। स्नेहा ने शॉर्ट ड्रेस पहनी थी, जिसमें उसकी गांड बाहर झांक रही थी।


 प्रवीण ने उसे गले लगाया, "दीदी, कल रात का बदला लूंगा आप से।" मैंने दरवाजा बंद किया और बोली, "चलो बेडरूम में। आज थ्रीसम का मजा लेते हैं।"


 हम तीनों बेडरूम में घुसे। प्रवीण ने स्नेहा को किस करना शुरू किया – उनका जोरदार किस, जीभ अंदर डालकर बहुत ही रोमांचित था। 


स्नेहा उसके लंड को पैंट के ऊपर से मसल रही थी। मैं पीछे से प्रवीण भाई की शर्ट उतार रही थी। उसकी मस्कुलर चेस्ट देखकर मेरी चूत फिर गीली हो गई। ये Dosto Me Chudai Wali Threesome Kahani आप Garamkahani पर पढ़ रहे है।


प्रवीण ने स्नेहा की ड्रेस उतारी – वो ब्रा और पैंटी में थी। उसके बूब्स बाहर कूद पड़े। प्रवीण ने उन्हें मसलना शुरू किया,


"उफ्फ स्नेहा दीदी, कितने बड़े हैं ये!" स्नेहा बोली, "चूस उन्हें प्रवीण... आह सब तेरे लिए है चूस ले इन्हें!"


मैंने प्रवीण की पैंट उतारी। वाह! उसका 8 इंच का लंड बाहर आया –वो मोटा, नसों वाला, सख्त फौलाद का बना था। मैंने उसे पकड़ा और हिलाने लगी। प्रवीण ने स्नेहा को बेड पर लिटाया और उसकी पैंटी उतार दी। स्नेहा की चूत कल से ही बहुत गीली थी।


प्रवीण ने अपना लंड स्नेहा की चूत पर रगड़ा, "दीदी, तैयार हो?" स्नेहा बोली, "हां...उफ्फफ डाल दे...बाबू फाड़ दे मेरी चूत!"


 प्रवीण ने धीरे से लंड अंदर डाला। स्नेहा चिल्लाई, "आह... बहुत बड़ा है... ऊंह हमममम!" अभी बस आधा लंड गया और स्नेहा दर्द से तड़पी हुई चीखी। लेकिन प्रवीण ने पूरा धक्का मार दिया।


अब उनमें चुदाई शुरू – हचक-हचक धक्के खाकर लंड चूत में अंदर से बाहर होने लगा। स्नेहा के बूब्स उछल रहे थे। 


वो चिल्ला रही थी, "आह... हमममम चोदो मुझे...आगाह Yes जोर से... ओह Fuck, अआआह मेरा पति कभी ऐसा नहीं करता!"


मैं दोनों को देख रही थी, लेकिन अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था। उनकी चुदाई चल रही थी, स्नेहा के पैर हवा में लहरा रहे थे।मैं बेड पर चढ़ गई और स्नेहा के चेहरे पर सवार हो गई।


"स्नेहा, मेरी चूत चाट!" मैं वासना भरी आवाज़ में बोली ।


स्नेहा ने मेरी स्कर्ट ऊपर की और चूत के अंदर जीभ फेर दी। लेकिन मुझे और इससे ज़्यादा चाहिए था। चुदाई के बीच में मैं नीचे सरकी और स्नेहा की चूत पर जीभ रख दी – जहां प्रवीण का लंड अंदर-बाहर हो रहा था। 


प्रवीण चौंका, "दीदी, क्या कर रही हो?" मैं बोली, "चाट रही हूं... तू मजा ले भाई!" मेरी जीभ प्रवीण के लंड और स्नेहा की चूत के बीच फंस गई थी। हर धक्के के साथ मैं उनके चुदाई के रस को चाट रही थी – उनका रस, वो लंड का स्वाद, मुझे वो सब मिला जो मैने कभी सोचा था। 


स्नेहा तो पागल हो गई, "आह ज्योति...ओंह्ह्ह प्रवीण... ऊंह हमममम उफ्फफ... दोनों तरफ से मुझे चरमसुख मिल रहा है... मैं मर जाऊंगी!" 


प्रवीण ने अपनी स्पीड बढ़ाई, "दीदी, तुम्हारी जीभ लग रही है मेरे लंड पर... उफ्फ मज़ा आ रहा है!"


मैंने प्रवीण के अंडकोष चाटे, फिर स्नेहा के क्लिट को चूसा। कमरा आवाजों से गूंज रहा था – चपचप, आह-आह, धक्कों की थाप।करीब 15 मिनट बाद स्नेहा झड़ी – उसका पूरा शरीर कांप गया, उसका बहुत ज़्यादा रस बहा।


प्रवीण उसकी चूत से बाहर निकला और बोला, "अभी नहीं झरूंगा मैं। 


अब ज्योति दीदी की बारी।" मैं तो शरमाई, लेकिन उत्साहित भी हो गई। प्रवीण ने मुझे लिटाया। मेरा भाई मेरा घर का लंड मेरी चूत में डालने वाला था! लेकिन ये तो सिर्फ मजा आने की।शुरुआत का समय था। 


प्रवीण ने अपना सांप अंदर डाला – आह! दर्द और मजा एक साथ मुझे मिला। "भाई...अआआह धीरे कर.. बहुत बड़ा है तेरा!" ये Bhai Bahan Ki Desi Sex Story आप Garamkahani पर पढ़ रहे है।


लेकिन वो जोर से चोदने लगा। स्नेहा अब मेरे बूब्स चूस रही थी। "ज्योति, कैसा लग रहा है कामिनी? तेरा भाई का लंड?" मैं चिल्लाई, "आह... अनंत सुख जैसा... अआआह चोदो प्रवीण... फाड़ दो दीदी की चूत!" 


स्नेहा ने मेरी चूत चाटनी शुरू कर दी – प्रवीण के लंड के साथ। मुझे थ्रीसम का असली मजा मिल रहा था! हम तीनों पसीने से तर हो चुके थे, हम एक-दूसरे से चिपके पड़े थे। 


प्रवीण ने फिर पोजिशन बदली – अब स्नेहा घोड़ी बनी, मैं उसके नीचे लेटी। प्रवीण स्नेहा को पीछे से चोद रहा था गपागप वो चूत में लंड अंदर बाहर कर रहा था।मैं स्नेहा की चूत और प्रवीण के लंड को एक साथ चाट रही थी एक बार तो मेरी ज़बान लंड से मिलकर चूत के अंदर तक घुसी। 


स्नेहा के बाल प्रवीण ने पकड़े थे, वो चिल्ला रही थी, "हां... खींचो...अआआह सालो तुम दोनों ने लूट ली मेरी जवानी चोदो...ओंह्ह्ह ज्योति चाटो आह!"


फिर प्रवीण ने मुझे डॉगी स्टाइल में लिया। स्नेहा मेरे सामने लेटी, मैं उसकी चूत चाट रही थी, प्रवीण पीछे से धक्के मार रहा। मेरी दोस्त मेरी गांड थपथपा रही थी।


"दीदी, तेरी चूत कितनी टाइट है... पापा-मम्मी ने अच्छे से संभाली है!" 


प्रवीण हंस रहा था। मैं बोली, "आह... हमममम चोद भाई... तेरी दीदी तेरे लंड की गुलाम है जब बोलेगा तेरे नीचे आऊंगी!" स्नेहा ने मेरे बूब्स को मलना शुरू किया।


 हम तीनों की एक चुदाई चेन बन गए – चुदाई, चाटना, किसिंग ये 369 स्टाइल था। 


लेकिन उसने अपना प्री-कम मेरे बूब्स पर लगाया और स्नेहा को चूसने को कहा। स्नेहा चाट रही, मैं प्रवीण को किस कर रही हम तीनों को असीम सुख मिल रहा था।


रात भर हमने ऐसे ही चुदाई की – हम फिर सुबह, थककर लेटे-लेटे एक दूसरे को सहलाते रहे। 


मेरी चूत लाल हो गई थी, स्नेहा की गांड पर निशान पड़ गए थे। लेकिन मजा उफ्फफ? असीम चरम सुख! प्रवीण ने आखिर में अपना माल हमारे चेहरों पर गिराया – हम दोनों ने उसे चाट लिया।


सुबह को प्रवीण दिल्ली लौट गया, लेकिन वादा किया कि जल्द आएगा। स्नेहा और मैं अब और करीब हो गईं जब मन करता है एक दूसरे की चूत का स्वाद लेती है।


अजय को कुछ पता नहीं चला – मैंने बहाना बनाया कि दोस्तों के साथ पार्टी थी। लेकिन अब मेरी जिंदगी बदल गई। स्नेहा को प्रवीण से चुदवाकर मैं खुद भी तृप्त हो गई। 


थ्रीसम का वो नशा बन गया, वो दर्द-मजा का मिश्रण जिसने मेरी सुखी लाइफ तृप्त कर दी... उफ्फ! 


प्यारे पाठकों, ये Desi Sex वाली XXX Antarvasna Family Sex Story कैसी लगी? अगर मजा आया तो कॉमेंट करके बताना!


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