चुदासी गर्ल फ्रेंड की चूत की प्यास मॉल के वॉशरूम में बुझाई!

Antarvasna Sex Story में पढ़े के मेरी GF इतनी चुदासी हो गई की अपनी Kamvasna के हाथों मजबूर होकर जो करा उससे तो मैं हैरान रह गया जानिए पूरा किस्सा के उस दिन मेट्रो में क्या हुआ।


दोस्तो, मेरा नाम साहिल (बदला हुआ) है। आपका स्वागत है मेरी इस हॉट और चुदासी सेक्स कहानी में। ये कहानी मेरी गर्लफ्रेंड कशिश की है, वैसे तो हमने खूब चुदाई करी है मगर ये उस समय की बात है जब हम काफी समय से मिल नहीं पाए और उसे लंड नहीं मिला।


फिर तो वो इतनी ज्यादा चुदासी हुई की उसकी चूत हर वक्त गीली रहती।पिछले 6 महीनों से वो चुदाई के लिए तड़प रही थी। हम दोनों रोज रात को व्हाट्सएप पर चुदाई वाली बातें करते थे, लेकिन मिल नहीं पा रहे थे। 


कशिश की चूत चुदाई के लिए इतनी बेताब थी कि वो हर समय उंगली करके खुद को शांत करने की कोशिश करती थी, वो मुझे चुदाई न करने की वजह बहुत डांटती और चूत में अगली करते हुए वीडियो कॉल पर रहने के कहती।


वो लंड की प्यासी थी वो मेरे चेहरे और लंड को देखकर अपनी चूत से रस निकालती लेकिन वो काफी नहीं था। आखिरकार, हम दिल्ली में मिले और एक मॉल के वॉशरूम में ऐसी चुदाई की कि याद करके आज भी मेरा लंड खड़ा हो जाता है।


मैंने वैसे इस तरह चुदाई के लिए मना करा था, लेकिन कशिश इतनी चुदासी थी की मेट्रो में भी अपनी गांड मेरे लंड से घिस रही थी और फिर जो उसने अपनी चुदासी कामना के हाथों मजबूर होकर करा उससे तो मैं हैरान रह गया चलो, मैं तुम्हें पूरी डिटेल से बताता हूं।


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ये कहानी कुछ समय पहले की है। मैं दिल्ली में जॉब करता हूं, और कशिश भी दिल्ली की ही रहने वाली अच्छी भली लड़की है, लेकिन हम दोनों अलग-अलग इलाकों में रहते हैं। हमारी पहली मुलाकात ऑनलाइन हुई थी। कशिश फिलहाल 22 साल की है, मैं 24 का हूं। 


वो इतनी हॉट है के उसके बूब्स इस उमर में भी 34C के हैं, गांड गोल-मटोल और चूत हमेशा क्लीन शेव्ड रहती है। उसके होंठ ऐसे की चूसने का मन करता है। हम दोनों ने डेटिंग शुरू की, लेकिन लॉकडाउन और जॉब की वजह से 6 महीने से मिल नहीं पाए थे। रोज रात को व्हाट्सएप पर चैट होती।


वो मुझे मैसेज करती, "साहिल, मेरी चूत इतनी गीली हो रही है की बार बार पैंटी बदलनी पड़ रही है। तेरा लंड कब घुसेगा इसमें?" मैं भी जवाब देता, "बेबी, मैं तेरी चूत को चाट-चाट कर सूखा दूंगा तू परेशान मत हो बस इस तड़प का मज़ा ले, फिर अपना मोटा लंड पेल दूंगा।" 


वो वॉयस नोट्स भेजती, सिसकारियां भरती हुई, "आह साहिल उन्ह्ह्ह! अआआह मेरे लंड राजा ओहद्ह आ जाना, उंगली डाल रही हूं मैं, लेकिन तेरा लंड चाहिए मुझे। मुझे चोद ना, मादरचोद! उन्ह्ह्ह।" हम वीडियो कॉल पर एक दूसरे को देखकर साथ साथ मुठ मारते।


लेकिन हमारी असली चुदाई की प्यास नहीं बुझाती। कशिश कहती रहती, "6 महीने हो गए, मैं तड़प रही हूं। मेरी चूत हर समय गीली रहती है तेरी वजह से, ऑफिस में भी सोचती हूं की काश तू यहां होता तो डेस्क पर ही चोद लेती।" मैं भी उसकी इन बातों से बहुत तड़पता था, लेकिन मिलना मुश्किल था।


एक दिन कशिश ने कहा, "साहिल, अब नहीं सहा जाता मुझसे। कल दिल्ली के किसी मॉल में मिलते हैं। मैं तेरे लंड को चूसूंगी, तू मेरी चूत फाड़ देना और अगर तूने मेरी बात नहीं मानी तो मैं किसी और से लंड ले लूंगी।"


 मैंने पहले तो मना करा "बेबी, मॉल में? रिस्की है, कोई देख लेगा।" लेकिन वो चुदासी नहीं मानी। बोली, "मैं 6 महीने से तड़प रही हूं, मेरी चूत बेताब है। अगर नहीं मिला तो मैं किसी और से चुदवा लूंगी।"


उसकी ये बात सुनकर मुझे जलन हुई, लेकिन उत्तेजना भी मची। मैं आखिर हार कर मान गया क्योंकि चूत की जरूरत तो मुझे भी थी। हमने प्लान बनाया की मेट्रो से मिलेंगे और फिर मॉल जाएंगे। अगले दिन मैं मेट्रो स्टेशन पर पहुंचा।


कुछ ही देर में कशिश आई, वो टाइट जींस और टॉप में आग मचा रही थी, उसके बूब्स उभरे हुए मेरे लंड को ललचा रहे थे। वो मुझे देखते ही गले लगी, उसके मम्मे मेरे सीने से दबे वो गले लगे हुए ही चूत लंड पर छुआ ने लगी जैसे चूत को लंड की खुशबू दिल रही हो। 


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वो फुसफुसाई, "साहिल, मेरी चूत अभी गीली है। रात भर तेरे बारे में सोचकर उंगली की है मैने और अब भी उसी पैंटी में हूं।" हम स्टेशन के अंदर घुसे फिर मेट्रो आई, हम मेट्रो के अंदर घुसे। अंदर बेहद भीड़ थी, लेकिन कशिश जानबूझकर मेरे सामने खड़ी हो गई।


वो अपनी गांड पीछे करके मेरे लंड से घिसने लगी। मैंने कहा, "कशिश, क्या कर रही हो? लोग हैं यहां।" वो मुस्कुराई, "मुझे परवाह नहीं, 6 महीने की तड़प है। तेरा लंड महसूस करना चाहती हूं आज बस।" उसकी गांड इतनी सॉफ्ट थी की मेरा लंड पैंट में तन गया।


 वो मेरे तनाव को समझकर और जोर से घिस रही थी, जैसे चुदाई ही कर रही हो। मैंने उसके कान में कहा, "रंडी, रुक जा, मॉल पहुंचकर चोदूंगा तुझे ठीक से।" वो बोली, "नहीं, अभी से शुरू कर यही चोद।


मेरी चूत गीली हो रही है।" मैने भी लंड का दबाव उसकी गांड़ पर लगाया उसने मेरा हाथ लेकर अपनी चूत पर रख दिया, वो सच में गीली हो रही थी मेट्रो में हमारे 20 मिनट ऐसे ही बीते, वो लगातार अपनी गांड़ लंड से घिसती रही। 


मेरा लंड इतना सख्त हो गया था के दर्द होने लगा। आखिरकार हम मॉल पहुंचे। वहा जाते ही कशिश ने कहा, "चल, वॉशरूम में चलते हैं। मैं अब और नहीं रुक सकती।" मैंने उसे प्यार से मना करा , "बेबी, यहां कैमरे हैं, पकड़े जाएंगे हम।" 


लेकिन वो इतनी चुदासी थी की मेरी बात नहीं सुनी और मुझे खींचने लगी। वो वासना भरी आवाज़ में बोली, "साहिल, मेरी चूत फट रही है। 6 महीने से तड़प रही हूं मैं, रोज व्हाट्सएप पर बातें करके गीली होती हूं। अब असली लंड चाहिए मुझे।" 


वो मुझे खींचकर मॉल के एक कोने वाले वॉशरूम में ले गई। वो लेडीज वॉशरूम था, लेकिन उसने कहा, "अंदर आ जा, कोई नहीं आएगा।" मैं डरते हुए अंदर गया। वो दरवाजा लॉक करके मुझे किस करने लगी।


उसके होंठ बेइंतहा गर्म थे, वो अपनी लड़ासती जीभ मेरे मुंह में डालकर मेरे होठ चूस रही थी उसने ग़ज़ब लिपस्टिक लगाई थी जैसे ही हमारे होठ कुछ पल मिलते दो दोनों चिपकने लग जाते फिर हल्के ज़ोर पर ही होठ अलग होते मुझे इसे किस पहली बार मिल रहे थे। 


मैंने भी अब डर छोड़ने को ही सही समझा फिर मज़े से उसके बूब्स दबाए, वो सिसकारी लेनी शुरू कर दी, "आह साहिल, ओहद्ह! दबा जोर से। मेरे निप्पल्स कड़े हो गए हैं आअआआअह, मेरी जान ओहद्ह कब से इंतज़ार था इस दिन का।" 


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मैंने उसका टॉप ऊपर करा फिर ब्रा हटाई और बूब्स चूसने लगा। कशिश की सांसें तेज होती जा रही थी, वो बड़बड़ाती बोली, "नीचे चाट ना राजा, उफ्फफ ! मेरी चूत गीली है है तेरे लिए आअआआअह! मेरा स्वाद तो चखले। 6 महीने से इंतजार कर रही है तेरी रानी।"


फिर मैं घुटनों पर बैठा और उसकी जींस उतारी। उसकी पैंटी गीली थी वो इस हद तक गीली हो गई थी के अब उसमें से रस टपकाने लगा था, उसकी मदहोश करने वाली चूत की खुशबू पूरे वॉशरूम में आ रही थी। मैंने पैंटी साइड की और जीभ से चाटा। 


कशिश चिल्लाई, "ओह फक, आअआआअह साहिल! चाट, ओंह्ह्ह! हाहाहाहाहा आआह! चूस मेरी चूत को। ओंह्ह्ह मेरे राजा रोज सोचती थी हमममम ! तू ऐसा करेगा अआआह।" उसकी चूत इतनी गीली थी की मेरी जीभ फिसल रही थी।


वो मेरे सिर को चूत ने दबा रही थी, "अआआह! सीससीस अआआह! और अंदर डाल जीभ, मैं झड़ने वाली हूं।" मैंने उसे और तेज़ी से चाटा, फिर उंगली डाली, वो और उसकी टांगे अब कांप रही थी। 


6 महीने की तड़प मेरी आंखों के सामने निकल रही थी। कपकपाते हुए वो झड़ गई, उसका सारा रस मेरे मुंह पर निकला था। वो बेशर्म होते हुए बोली, "अब तेरा लंड दे मुझे, साहिल। चोद मुझे।" मैंने भी जोश में पैंट उतारी, मेरा 7 इंच का लंड बाहर आया।


कशिश ने देखा और तुरंत प्यासी निगाहों के साथ मुंह में ले लिया। वो ऐसे चूस रही थी जैसे जन्मों की भूखी हो। "उम्म, कितना मोटा है। व्हाट्सएप पर देखा था, लेकिन असली मजा अब मिला।" 


वो मेरे मोटे लंड को कोशिश कर के गले तक ले रही थी, अपनी लपलपी लार टपका रही थी। मैंने कहा, " अआआह रानी, चूस जोर से।" वो बोली, "हां, मादरचोद, तेरी रंडी हूं मैं। 6 महीने से ये लंड चाहती थी आज अपनी चूत में लेकर घर जाऊंगी।"


फिर मैंने उसे दीवार से सटाया, और पैर फैलाए। कुछ देर मैने लंड को उसकी चूत पर रगड़ा, जिससे वो तड़प रही थी, "डाल ना, यार फाड़ दे मेरी चूत को साले डाल दे ना।" मगर उसे उसे थोड़ा सताना चाहता था फिर मैंने धक्का मारा, और आधा लंड अंदर चला गया। 


कशिश चीखी, "आह, आखिरकार अआआह! कितना बड़ा है ओंह्ह्ह। लेकिन मत रुक अब, चोद साले अआआह! ओह चोद ओहद्ह चोद मुझे अआआह मैं गुलाम हूं तेरे लंड की मैने तेरा नाम अपनी चूत पर लिख दिया है।"


मैंने ज़ोर लगाकर पूरा लंड पेल दिया। वो चूत वाली इतनी गीली थी की आसानी से लंड अंदर घुस गया। मैं अब अंदर से बाहर धक्के मारने लगा, कभी तेज-तेज कभी धीरे धीरे। कशिश की आंखें बंद हो चुकी थी।


वो बस अब चरमसुख के आनंद में बोली, "हां साहिल आगाह, ऐसे ही ओंह्ह्ह आअआआ! हमममम अआआह।”मैने भी उसे बोला “रोज व्हाट्सएप पर कहती थी न, चोद मुझे कुत्ती की तरह अब बन मेरी गुलाम।" मैंने उसके खूब बूब्स दबाए, उसकी गांड पर थप्पड़ मारे। 


वो सिसकारियां ले रही थी, " ओंह्ह्ह ओह हाहाहाहाहा! ओह मां, आअआआअह! ओह साहिल अआआह मैं फिर झड़ रही हूं। आज तेरे लंड ने मेरी तड़प खत्म कर दी।" हम 10 मिनट ऐसे ही चुदाई करते रहे, फिर मैंने पोजिशन चेंज की। 


उसे घोड़ी बनाया, और गांड़ को घुमाकर पीछे से लंड पेल दिया। उसकी गांड बहुत हिल रही थी, मैंने उसकी उंगली गांड में डाली। वो हिचक कर बोली, "हां, गांड भी चोदनी है आज ही? आज नहीं गांड़ ले लेना अगली बार। लेकिन आज चूत भर दे मेरी।" 


मॉल के वॉशरूम में अआआह! हमममम! ओंह्ह्ह अआआह की आवाजें गूंज रही थीं, लेकिन कशिश को कोई परवाह नहीं थी वो बस चूत से लंड को लड़वाए जा रही थी। वो इतनी चुदासी थी की चिल्ला रही थी, "और जोर से, अआआह! आआह हरामी अआआह मादरचोद!


मेरी चूत तेरी है ओंह्ह्ह खुश कर मुझे अआआह नहीं तो मैं तेरी आआह, ओंह्ह्ह! गांड फाड़ दूंगी।" मगर मैं अब झड़ने वाला था, तो बोला, "कशिश, कहां गिराऊं?" वो बोली, "अंदर ही निकाल, मैं पिल ले लेती हूं। 6 महीने की प्यास बुझा मेरी।"


मैंने फिर घपाघप तेज धक्के मारे और सारा माल उसकी चूत में गिरा दिया। हम दोनों हांफ रहे थे। फिर मेरे होठों को चूमकर वो मुस्कुराई, "साहिल, थैंक यू मेरी जान। अब हर हफ्ते मिलेंगे ओके बाबू।" हम दो ओ जानते थे के ये मुमकिन नहीं था।


 मगर अभी में उसे कुछ भी बोलकर उदास नहीं करना चाहता था फिर हमने कपड़े पहने, और बाहर निकले। हमने ध्यान था के हमें कोई नहीं देखा। उस दिन के बाद हमारी चुदाई रेगुलर हो ही गई। लेकिन वो पहली बार की तड़प कभी नहीं भूलता।


दोस्तो, ये थी मेरी और कशिश की कहानी। वो इतनी चुदासी थी कि मेट्रो में ही मेरा लंड घिस रही थी, फिर वो माल का वॉशरूम उसकी फेवरेट जगह बन गई वहां के सिक्योरिटी वाले से हमने जुगाड बनाली थी हम कई बार उसमें चुदाई के लिए जाते थे। 


ये कहानी अगर आपको पसंद आई तो कमेंट जरूर करें और hashmilion5@gmail.com पर मेल कर के बताए के आपने कौन कौन से जगह पर चुदाई करी है।


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