बिगड़े लड़के ने मुझे पटाकर लूटे चूत के मज़े।

XXX Antarvasna Sex story : आखिर लड़कियां बिगड़े लड़कों से क्यों पट जाती है? जैसे मैं एक लड़के की बातों मैं बहक कर उसे Chut दे बैठी! जाने इस Hindi Sex Story में!


हेलो जी सबको दिवाली की शुभकामनाएं मेरा नाम अंजू है ये मेरी कहानी है इस कहानी के द्वारा आप जान पाएंगे की आखिर लड़कियां बिगड़े लड़कों से क्यों पट जाती है।


मैं दिखने में ठीक ठाक हूं मेरे जिस्म का आकर 28,26,30 है। घर वालों की नज़रों में मैं सीधी सादी लड़की हूं लेकिन जैसे एक आम 20 साल की लड़की के अरमान होते है वहीं मेरे भी थे।


ये कहानी उस समय की है जब मेरे घराने में शादी का माहौल था। एक दिन जब मैं चाची के घर में बैठी थी और सब लड़कियां मेंहदी लगवा रही थीं।


 तभी चाचा जी के बड़े बेटे किसी से कुछ बातें करते हुए एक लड़के को अंदर लाए।


वो एक खूबसूरत लड़का था मगर वो लड़का थोड़ा थका-थका सा लग रहा था, लेकिन चेहरा एकदम साफ-सुथरा, आंखों में उसके शरारत भरी हुई थी।


मैंने उसे चुपके से देखा, तो सोचा यार“ये कौन है?” चाची ने बताया कि पड़ोस के जो अंकल है वो उनका भतीजा है, यहां होस्टल से आया है शादी के लिए।


मैंने मेंहदी लगाते हुए ही उसकी तरफ झांकना शुरू कर दिया।


वो भाई से कुछ फुसफुसा रहा था, और मैंने बस इतना ही सुना कि ये तो माल है यार'... अरे हट, ये क्या बोल रहा है? भाई उसे टोकते हुए बोले।


लेकिन मेरे मन में हंसी आ गई। भाई ने उसे डांटा, तो वो चुप हो गया। लेकिन उसकी नजरें मुझ पर टिक गईं, और मैंने भी आंखें झुका लीं।


साली, मेरे दिल में कुछ खलबली सी मच गई। शादी का माहौल है, लेकिन ये लड़का कुछ अलग लग रहा था – न शर्मीला, न घमंडी, बस एकदम फ्री सा।


अगले दिन मेहनत का न्यौता था, तो मैंने सोचा आज तो सारा दिन बिजी रहूंगी। सुबह से ही काम में लग गई – सबको खाना परोसना, बर्तन संभालना।


वो लड़का कहीं दिखा ही नहीं। मैंने भी मन में कहा, “चलो रहने दो, शायद भूल गया होगा। “ लेकिन अंदर ही अंदर उसकी वो शरारती मुस्कान याद आ रही थी।


दोपहर को मैं खाने के लिए गर्म पूड़ियां लेने गई, तो देखा वो वहां खड़ा है और मेरी गांड़ की तरफ देख रहा है।


भाई जी भी पास ही थे। मैंने शरमाते हुए नजरें हटा लीं, लेकिन मन में सोचा – अरे ये तो मुझे देख ही रहा है मैने भी उसे अपने जिस्म का नज़ारा दिया।


ये Village sex story आप Garam Kahani Com पर पढ़ रहे है। थोड़ी देर बाद वो चला गया, और मैं भी बस काम में लग गई। बारात के दिन हम सब लड़कियां तैयार हो गईं।


मैंने लहंगा पहना, चुनरी ओढ़ी, लेकिन पीछे से ब्रा का स्ट्रैप बाहर निकल आया। सोचा कोई नहीं, कौन देखेगा।


लेकिन तभी वो आ गया, पास आकर फुसफुसाया – 'अपने कपड़े ठीक कर लो, ब्रा से बूब चमक रहे है।'


मैं एकदम शरमा गई और साइड में जाकर खुद को ठीक करने लगी। फिर सोचा, उसने ये तो अच्छा किया, लेकिन मन में गुस्सा भी आया।


तभी मुझे अपनी कमर नंगी पर एक हाथ महसूस, मैं डर से सहम गई पलट कर देखा तो वही मेरे पीछे कमर पर हाथ लगाए खड़ा था।


उसमें मुझे थोड़ा धकेला और सीधा मेरे पीछा आकर खड़ा हो गया।


उस साइड दीवार की हल्की सी आड़ थी मगर कोई भी आसानी से हमे देख सकता था।


उसने तभी मेरे कंधे पर अपने होठों को रखकर चूमा और मेरे चूचों पर हाथ रखकर नरमी से दबाया।


एक हल्की अआआह! मेरे मुंह से निकली कोई और लड़का होता तो अब तक उसके गाल पर अपने हाथ छाप चुकी होती मै।


लेकिन न जाने क्यों इस लड़के की हिम्मत ने मुझे खुद को उसके आगे सौंपने पर मजबूर कर दिया। उसने मेरे गले को चूमा फिर अपने हाथ मेरी ब्रा में अंदर ले जाने लगा।


मैं बस एक मूर्ति की तरह उसे अपने जिस्म को छूने दे रही थी। उसने मेरा कान काटा जिन में आसपास लोगो की आवाज़ें गूंज रही थी कोई भी किसी भी समय यहां आ सकता था।


मैंने हिम्मत कर के बोला "तुमको डर नहीं लगता "?


उसने एटीट्यूड में जवाब दिया "डर जाऊंगा तो तुमको इंप्रेस कैसे करूंगा "।


उसने मुझे पलटा और मेरे होठों को थोड़ा ऊपर करा, मेरी चूत में उसकी हिम्मत ने आग लगा दी थी।


वो अपने गुलाबी होठ मेरे होठों के करीब लाया। हमारे होठों बस एक दूसरे को चूमने ही वाले थे की वो पीछे हट गया।


मैने अपनी बंद आँखें खोली और उसके चेहरे की चमक को निहारने लगी।


उसने मेरी चूत पर हाथ रखकर बोला "अब तड़पो थोड़ा मेरे लिए, उसने मेरे दिल पर ब्रा के अंदर से काट लिया और वहां से चला गया। साला मेरी Antarvasna भड़का गया।


मैने जल्दी से अपने कपड़े ठीक करे फिर मैं उसके पास जाकर बैठ गई और बोली – 'आप बड़े गंदे किस्म के इंसान हो... कहीं भी नजर डाल देते हो।'


वो हंस पड़ा, फिर बोला – 'वो तो अच्छा हुआ कि मैंने बता दिया... वरना लोग हुस्न के नज़ारे लूट जाते।'


फिर मैंने नखरे दिखाए – 'ओहो... तो तुमको क्यों बुरा लग रहा है? लेने दो नज़ारा।'


वो बोला – 'ठीक है, फिर उसी कोने में चली जाओ, थोड़ा आगे से दिखा दो...' इतना कहकर वो उठकर चला गया। मैने सोचा , अरे यार, ये तो गुस्सा हो गया।


लेकिन मुझे उसकी हिम्मत अच्छी लगी – इतना सीधा बोल दिया। मैने मन में सोचा, “ये बंदा कुछ तो है।” तभी उसके दोस्त आ गए, वो उनके साथ चला गया। मैंने देखा वो बीयर पी रहा है, हंस-हंसकर बातें कर रहा लेकिन उसकी नज़रे मुझ पर ही थी।


शादी का माहौल है, लेकिन ये सब सूखे-सूखे मत मारो, ये सोचकर मैं भी अपनी सहेलियों के साथ मस्ती में लग गई। रात को खाने का समय आया।


मैंने एक टेबल पर जगह बना ली, सोचा शायद वो आए और हां, वो आया भी –मेरे पास जगह देखकर बेशर्म झट से बैठ गया।


मैंने बोला – 'आइए, बड़ा इंतजार करवाया आपने?' वो चौंका, फिर मुस्कुराया।


मैंने आंखें झुकाकर कहा – 'कहां चले गए थे आप?' मेरी मन में धड़कनें तेज हो गईं। 


वो बोला – 'तुम्हारी आंखें देखकर गुस्सा गायब हो गया... बहुत खूबसूरत हैं ये झील सी आंखें।' फिर उसकी शायरी शुरू हुई– 'कोई अगर है चाँद सा खूबसूरत... तो वो बस तुम्हीं हो।'


मैं थोड़ा झेप गई दिल में ख्याल आया अरे वाह, ये तो शायर निकला। मैं हंस पड़ी – 'वाह, बहुत पहुंचे हुए शायर लगते हो... आशिकाना मिज़ाज के हो रहे हो।'


वो बोला – 'मैं शायर तो नहीं, मगर तुझे देखकर शायरी आ गई।' फिर एक और – 'ये कौन सा था जाम, जो तूने आंखों से पिला दिया... बंदा सीधा था, तूने सिस्टम हिला दिया।'


उसकी बेतुकी बातों की वजह से। मैं हंस-हंसकर लोटपोट हो गई। उसे रोककर बोली – 'अब बहुत हो गया, खाना खा लीजिए।'


 वो बोला – 'खाना तो खाएंगे, लेकिन एक शर्त पर – आज रात खत्म होने से पहले आप हमें किस करोगी।' मैं शरमा गई और बोली– 'पागल हो गए हो... अभी दुल्हन के पास जाना है, सारी रात बिजी रहूंगी।'


वो उठने लगा, तो मैंने हाथ पकड़ लिया और निवाला तोड़कर कहा – 'अगर ये नहीं खाया, तो कभी किस नहीं करूंगी।' वो मेरी आंखों में देखा, मैं शर्मा गई। मन में सोचा, ये पल कितना प्यारा है... काश बस यहीं रुक जाए।


लेकिन आसपास लोग हैं अगर अकेले होते हम तो शायद होठों ने होठों से होठों का हाल पूछ लिया होता तब तो बस हमने खाना खाया और अलग हो गए।


मेहनत करते करते रात के दो बज गए थे, शादी की रस्में खत्म हो रही थीं। लेकिन मेरा मन तो उसी लड़के के पास था। मैने अपनी सहेली प्रिया को बुलाया।


 उससे मैं बोली – 'प्रिया, मुझे घर के पीछे ले चल, वो वहां होगा।' प्रिया हंस पड़ी, लेकिन मुझे वहां ले आई। वहां वो खड़ा था, मुझे देखते ही उसकी आंखें चमक गईं।


मैंने प्रिया से कहा – 'उधर देखो, कुछ काम है... जरा चली जाओ।' प्रिया चली गई, तो मैंने उसे अपने पास खींच लिया। वो स्तब्ध सा खड़ा था।


मैंने कहा – 'प्रिया को अपने बारे में पता चल गया है, वो ही मुझे लेकर आई है।' दिन भर भाग दौड़ से मेरे कपड़े थोड़े बिगड़ गए थे।


बूब्स बाहर निकल रहे थे मुझे उसकी नज़रे देखने लगी तभी उसका मूड बन गया। उसने मुझे कमर से पकड़ लिया, दीवार से सटा दिया। हमने आंखों में देखा, मैंने शर्म से आंखें बंद कर लीं।


उसने हल्के से मेरी आंखें चूमीं, फिर गाल चूमे। मैं शांत खड़ी रही, मन में रोमांच दौड़ रहा था। प्रिया को देखा, वो दूसरी तरफ मुंह कर रही थी।


फिर उसने गर्दन पकड़ी और होंठों पर होंठ रख दिए। अरे, वो अहसास... जैसे चॉकलेट लग गया होंठों पर। मैंने भी उसका पूरा साथ दिया उससे अपना बदन चिपका दिया। ये XXX Hindi Desi Sex Story आप garamkahani.com पर पढ़ रहे है।


उसके सीने पर मेरे बोबे दब गए। फिर हमने फ्रेंच किस करी... उसकी जीभ मेरे अंदर आई मैंने स्वागत करते हुए ज़बान चूसी।


मेरे दिमाग पर वासना का सुरूर सा चढ़ गया। मेरा हाथ नीचे लन्ड पर जाकर हरकत करने लगा। पांच मिनट में ही उसने मेरा हाथ पकड़कर पेंट के अंदर लन्ड पर रख दिया।


वो किस करता रहा, मैं सिसकी लेते हुए कहती– 'अहह आहह... धीरे करो न।' प्रिया पलटी, हमें देखने लगी, लेकिन हम तो मस्ती में डूबे थे।


उसके हाथ मेरे बोबे पर, मेरा उसके लन्ड पर। मैंने उसे नीचे तिरपाल पर लेटा दिया टाके कपड़े गंदे न हों। फिर उसका हाथ मेरी चूत पर आया उफ्फफ... लहंगे के अंदर गया, तो सीत्कार आआह निकल गई।


 उसने मुझे चुप रहने का इशारा किया, मैं शांत हो गई। फिर उसने ब्लाउज के बटन खोले और बोबे बाहर कर दिए। वो निप्पल चूसने लगा, चूंचे मसलने लगा।


मेरे निप्पल कठोर हो गए, निप्पल लन्ड जितने सख्त लग रहे थे । मैं हमममम! ओऊहह्ह्ह! कुछ करो आह की आहो में सिसक रही थी, फिर वो नीचे बढ़ा, पेट, नाभि चूमा, चूमते चूमते चूत तक गया मेरी अहम सीससई अम्मम निकली जब चूत में उसने जीभ अंदर करी।


मैं ओहोमम! आआह की कामुक सांसें भर रही थी। मेरा सब्र टूटा, मैंने उसकी पैंट खोली। खड़ा लन्ड बाहर उछला, वो प्यारा और गोरा था... मैं लन्ड चूमने लगी।


 वो जोश में आ गया उसने मेरा गला पकड़ कर मुँह में धकेल दिया। मुझे गंदा लगा, लेकिन वो मेरे चूंचे चूसने लगा तो फिर मैं भी मस्त हो गई।


फिर उसने लहंगा ऊपर करा और पैंटी नीचे खींची उसने मेरी चूत पर चुम्मा दिया। मैं पूरी हिल गई। वो बोला – 'अभी से हिलती है... पिक्चर अभी बाकी है।'


मैंने उसकी गर्दन पकड़ी, और होठ काटते हुए किस किया। उसने लन्ड छेद पर सेट किया फिर धक्का मारा। टॉप अंदर गया – 'आहह... मर गई।'


 मेरी ज़ोर से आवाज़ निकल गई फिर वो ज़ालिम लन्ड को पूरा अंदर कर दिया। मैने आंखें बंद की, मैं मदहोश होने लगी। वो धक्के देने लगा, हल्के-हल्के वो रफ्तार बढ़ाता।


मैं ऊपर-नीचे हो रही थी। उसने मेरी टांग उठाई , साइड से वो मुझे चाटने लगा मुझे जांघों पर कंपकपी महसूस हो रही था। ये Desi Sex Kahani आप Garam Kahani पर पढ़ रहे है।


पंद्रह मिनट बाद उसने लन्ड बाहर निकाला, और चूसने को कहा। मैंने झटके से मुँह में लिया, थूक लगाकर रगड़ने लगी।


फिर उससे बोली – 'अब आप लेट जाओ... मैं इससे खेलूंगी।' वो लेटा, मैं उसकी जांघों पर बैठी, फिर मज़ा लेकर लन्ड को चूसा।


 फिर लहंगा समेटा, अपनी चूत मैं उसके 7 इंच के फौलाद को सेट करके नीचे बैठ गई। वो मेरे अंदर गया, वो गरम ज्वालामुखी सा भड़क रहा था ।


मैं उसपर उछलने लगी, वो नीचे से धक्के लगा रहा था। मैं थक गई, हाथ उसकी कमर पर रखे, और उसके ऊपर रुकी।


वो जोर-जोर से मुझे चोद रहा था । अचानक मैं झड़ने लगी, थककर मैं साइड लुढ़की। वो मेरे ऊपर चढ़ा, वो मेरे बोबे मसलते हुए धक्के देने लगा।


मैं आअआआअह! ओहद्ह! अफगाह, आअह्हम! Yee Fuck me! की सिसकियां लगीं। 


वो बोला – 'माल कहां छोड़ना?' मैंने चूत की तरफ इशारा करा। वो मेरे अंदर झड़ गया।


मैं उसे जोर से किस की, और उससे चिपक गई। उसका रस अपनी चूत में लेकर मुझे बहुत सुकून मिला।


 फिर उसने लंड बाहर लिया, उसने बहुत देर मेरे बोबे चूसे। मैं उसके बालों में हाथ फेरती थी। मुझे प्रेम सा लग रहा था। काश वो पल रुक जाता।


 तभी प्रिया आई– 'चलो... बहुत देर हो गई।' वो कहने लगी। वो मुझे प्यार से किस किया,फिर हम खड़े हुए। मैंने लहंगा ठीक करा, वो पास में रखे कपड़े से लन्ड साफ करने लगा तो मैं बोली – 'प्रिया है, थोड़ा सा शर्म कर लो।'


 वो बोला – 'प्रिया खुद मेरे दोस्त से मेरे सामने चुद चुकी है... है न प्रिया?' प्रिया हंसकर भागी। मैं रेडी हुई, वो मुझे बांहों में भरा – 'अब कब मिलोगी?'


मैं जाते हुए बोली – 'जब जब तुम हमें याद करोगे।’ न उसने मेरा नाम पूछा नाही मैने उसका नाम पूछा मैं उससे फिर कभी नहीं मिली।


वो एक बिगड़ा हुआ लड़का था लेकिन जो लड़के दिल के अच्छे होते अगर वो थोड़ा हिम्मत दिखाए तो लड़कियों की लाइफ बिगड़े लड़कों से बच जाए।


लड़कियां जज़्बाती होती है उनके जज़्बातों का ख्याल रखना लड़कों ज़िम्मेदारी है यही दुनिया का नियम है यही कुदरत का नियम है। कैसी लगी ये कहानी कमेंट में ज़रूर बताए!


Share This Story :  


यह कहानी आपको कैसी लगी?

❤️ Love 0
😍 Wow 0
😂 Funny 0
😢 Sad 0
😡 Angry 0
👏 Clap 0

💬 Leave a Comment :-

📝 Comments :

No comments yet. Be the first to comment!