बूढ़े बाबा ने खेत में फाड़ दी रिया की चूत! 02
Antarvasna Village Sex Stories : सात दिनों तक खेत में बाबा ने रिया की जवान चुत को हर पोजीशन में चोदा! चाटी चुत! हर बार अंदर भरा माल! और Pregnent कर लिया मजा!
अभी तक आपने "बूढ़े बाबा ने खेत में फाड़ दी रिया की चूत!" में पढ़ा :-
मैं लुंगी पर लेट गई। टाँगें चोड़ी करके खोलीं। बाबा मेरे ऊपर आए। लंड हाथ में लेकर चूत पर रगड़ने लगे। काफी थूक दिया।
फिर कहा, “बेटी, चिल्लाना नहीं। कोई आ जाएगा तो सब मिलकर मार देंगे।” मैंने मुस्कुराकर सिर हिलाया। बाबा ने सुपारा चूत के मुँह पर लगाया और एक धक्का मारा। लंड फिसल गया। फिर से लगाया और जोर से धक्का दिया।
सुपारा अंदर घुस गया। दर्द हुआ। मेरे मुँह से चीख निकल गई, “ओह्ह… मम्मी…!” बाबा ने जल्दी मेरे मुँह पर हाथ रखा और रुक गए।
बोले, “मत चिल्लाओ बेटी। सारा मजा खराब करेगी।” मैंने सिर हिलाया। बाबा ने फिर धीरे-धीरे धक्के देने शुरू किए। लंड अंदर-बाहर हो रहा था। दर्द कम होने लगा। बाबा की रफ्तार बढ़ने लगी। मेरे बूब्स दब रहे थे।
मैं “आआह… आआह… उआआह…” की आवाजें निकाल रही थी। बाबा मेरे होंठों को चूमने लगे। लंड गहराई तक जा रहा था।
बाबा का लंड धीरे-धीरे मेरी चूत के अंदर घुसता जा रहा था। हर धक्के के साथ दर्द थोड़ा कम हो रहा था और अंदर से एक अजीब सी गर्मी फैलने लगी थी। बाबा का शरीर मेरे ऊपर था, उनकी साँसें मेरी गर्दन पर पड़ रही थीं।
मैंने अपनी दोनों टाँगें थोड़ी और चौड़ी कर लीं ताकि लंड आसानी से अंदर-बाहर हो सके। बाबा एक हाथ से मेरे बाएँ बूब को दबा रहे थे, निप्पल को उँगलियों के बीच मसल रहे थे, और दूसरे हाथ से मेरे कूल्हे को पकड़े हुए धक्के लगा रहे थे।
“आआह… बाबा… धीरे… आआह…” मेरे मुँह से निकल रहा था।
बाबा बोले, “बेटी, तेरी चूत कितनी तंग है। मेरा लंड जकड़ रही है।” उनकी आवाज में काँप थी। लंड लगभग आठ इंच अंदर तक जा चुका था। बाबा ने एक और जोर का धक्का लगाया। सुपारा मेरी बच्चेदानी के मुँह पर टकराया।
मेरे पूरे शरीर में बिजली सी दौड़ गई। “ऊईई… मम्मी…!” मैं कराह उठी। बाबा ने मेरे मुँह पर फिर हाथ रखा और बोले, “धीरे आवाज निकाल बेटी। कोई सुन लेगा।”
अब आगे :-
मैंने सिर हिलाया। बाबा की रफ्तार बढ़ने लगी। धक्के अब लयबद्ध हो गए थे। लंड पूरी तरह गीला हो चुका था मेरी चूत के पानी से। हर बार बाहर निकलते वक्त चूत की दीवारें उसे चूसती हुई लग रही थीं।
बाबा मेरे होंठों को चूमने लगे। उनकी जीभ मेरे मुँह में घुस गई। मैं भी जवाब देने लगी। नीचे लंड गहराई तक पेल रहा था और ऊपर बाबा मेरे होंठ चूस रहे थे। मेरे बूब्स उनके सीने से दब रहे थे।
दस-पंद्रह मिनट बाद दर्द लगभग खत्म हो गया। अब सिर्फ मजा आ रहा था। मैंने अपनी कमर को थोड़ा ऊपर उठाना शुरू किया ताकि लंड और गहराई तक जाए। बाबा समझ गए।
उन्होंने मेरी दोनों टाँगों को अपने कंधों पर उठा लिया। अब लंड सीधा मेरी चूत के अंदर बच्चेदानी तक जा रहा था।
हर धक्के पर “थप… थप…” की आवाज आ रही थी। मेरी चूत का पानी बहकर लुंगी पर गिर रहा था।
“आआह… बाबा… और जोर से… आआह…!” मैं बोल रही थी। बाबा की स्पीड और बढ़ गई। उनका लंड पूरा 9 इंच का लग रहा था, मोटा और कड़क। हर बार सुपारा मेरी बच्चेदानी को छू रहा था।
मेरे अंदर कुछ फटने वाला महसूस हो रहा था। मैं बाबा के कंधों को पकड़कर अपनी कमर हिला रही थी। बाबा बोले, “बेटी, तेरी चूत मेरा लंड खा रही है। कितनी गरम है।”
मैं भरभरा कर झड़ने लगी। पूरे शरीर में कंपकंपी दौड़ गई।
“आआआह… बाबा… मैं झड़ रही हूँ… आआह…!” मेरी चूत बार-बार सिकुड़ रही थी, बाबा के लंड को जकड़ रही थी। बाबा रुक नहीं रहे थे। वे और जोर-जोर से धक्के लगा रहे थे।
मेरा पानी उनके लंड पर बह रहा था। बाबा मेरे दोनों बूब्स को मुँह में लेकर चूस रहे थे। निप्पल्स को दाँतों से हल्का सा काट रहे थे।
झड़ने के बाद भी बाबा रुक नहीं रहे थे। ये Hindi Sex Kahani आप गरम कहानी डॉट कॉम में पढ़ रहे है।
वे मेरे ऊपर से उतरे और बोले, “बेटी, पलट जा। चारों पैरों पर आ जा।” मैंने पलटी और चारों पैरों पर आ गई। बाबा पीछे से मेरे कूल्हों को पकड़े और एक झटके में लंड मेरी चूत में पेल दिया।
अब लंड और गहराई तक जा रहा था। बाबा मेरी गाँड पर हाथ मार रहे थे। “थप… थप…” की आवाज और तेज हो गई। मैं “आआह… आआह… बाबा… और… आआह…” कर रही थी।
बाबा ने मेरे बालों को पीछे से पकड़ लिया और मेरा सिर थोड़ा ऊपर उठा दिया। फिर मेरे कान के पास आकर बोले, “बेटी, तेरी चूत कितनी रसीली है। मेरा लंड पूरा गीला कर दिया।”
मैं सिर्फ कराह रही थी। बाबा की रफ्तार इतनी तेज हो गई कि मेरे बूब्स आगे-पीछे हिल रहे थे। लगभग बीस मिनट बाद बाबा की साँसें बहुत तेज हो गईं। उन्होंने लंड को जड़ तक अंदर दबा दिया और बोले,
“बेटी… मैं छोड़ रहा हूँ…!”
मैंने महसूस किया कि बाबा का गर्म वीर्य मेरी बच्चेदानी के अंदर छूट रहा है। एक-एक करके कई झटके आए। बाबा का पूरा शरीर काँप रहा था। वे मेरे ऊपर झुक गए, साँसें मेरी पीठ पर पड़ रही थीं।
लंड अभी भी अंदर था, फूला हुआ। काफी देर बाद बाबा ने लंड बाहर निकाला। लंड मेरे वीर्य और चूत के पानी से लिपटा हुआ था। बाबा ने उसे मेरे मुँह के पास लाया।
मैंने पहले मना किया। बाबा बोले, “बेटी, इतना किया तो इसे भी साफ कर दे। मेरे दिल को खुशी मिलेगी।”
मैंने लंड को मुँह में ले लिया और चूसने लगी। अपना ही पानी और बाबा का वीर्य चाट रही थी। लंड धीरे-धीरे नरम होने लगा। बाबा मेरे सिर पर हाथ फेर रहे थे।
जब लंड साफ हो गया तो बाबा खड़े हुए। मैं भी उठी। मेरी चूत से वीर्य बहकर जाँघों पर टपक रहा था। बाबा ने कहा, “जल्दी कपड़े पहन बेटी। यहाँ से चलें।” मैंने जल्दी से कपड़े पहने।
बाबा ने भी धोती-कुर्ता पहन लिया। हम वापस झोपड़ी की तरफ चलने लगे। चलते-चलते भी मेरी चूत से वीर्य निकल रहा था। मैंने कहा, “बाबा, मैं कल भी आ जाऊँ?” बाबा मुस्कुराए,
“हाँ बेटी। जब-जब तेरा मन करे आ जाना। तेरी चूत को मेरा लंड पसंद आ गया है ना?” मैंने हाँ में सिर हिलाया।
अगले दिन मैं फिर गई। बाबा झोपड़ी में थे। इस बार बिना ज्यादा बात किए हम सीधे खेत की तरफ चले गए। बाबा ने मुझे लिटाया और देशी अंदाज में चोदना शुरू किया।
मेरी दोनों टाँगों को अपने कंधों पर उठा लिया और जड़ तक लंड पेलते रहे। मैं बार-बार झड़ रही थी। बाबा भी दो बार मेरे अंदर वीर्य छोड़ चुके थे। शाम तक हम वहाँ रहे। मेरी चूत सूज गई थी लेकिन मजा इतना आया था कि दर्द भी अच्छा लग रहा था।
तीसरे दिन बाबा ने मुझे अपनी बाहों में फँसाकर गठरी जैसा बना दिया। मेरी टाँगें उनकी टाँगों में उलझ गई थीं और लंड सीधा बच्चेदानी तक जा रहा था। बाबा बोले, ये Antarvasna Hot Nonveg Free Hindi Sex Stories आप गरम कहानी डॉट कॉम में पढ़ रहे है।
“बेटी, ऐसे चोदने से औरत जल्दी गर्भवती हो जाती है।” मैं सिर्फ “आआह… बाबा… और… आआह…” कर रही थी। बाबा का लंड इतना गहराई तक जा रहा था कि मुझे लगा जैसे पेट तक पहुँच रहा हो।
तीसरे दिन बाबा ने मुझे अपनी बाहों में इस तरह जकड़ा कि मैं हिल भी नहीं पा रही थी।
मेरी दोनों टाँगें उनकी टाँगों के बीच फँसी हुई थीं और लंड सीधा मेरी चूत के सबसे अंदरूनी हिस्से तक जा रहा था। हर धक्के पर सुपारा बच्चेदानी के मुँह पर जोर से टकराता। मेरी आँखें बंद हो जातीं।
“आआह… बाबा… और गहरा… आआह…!” मेरे मुँह से निकल रहा था। बाबा की साँसें मेरी गर्दन पर गर्म पड़ रही थीं। वे मेरे कान के पास आकर धीमी आवाज में बोले,
“बेटी, तेरी चूत इतनी गहरी है कि मेरा पूरा लंड निगल रही है। जवानी में भी ऐसी चूत कम मिली।”
मैंने अपनी कमर को थोड़ा हिलाने की कोशिश की लेकिन बाबा ने और कसकर पकड़ लिया। लंड अब बिना रुके अंदर-बाहर हो रहा था। मेरी चूत का पानी बहकर बाबा की जाँघों पर लग रहा था।
बाबा एक हाथ से मेरे बाएँ बूब को दबा रहे थे और निप्पल को उँगलियों से मसल रहे थे। दूसरे हाथ से मेरी गाँड को थामे हुए धक्के लगा रहे थे। लगभग पंद्रह मिनट बाद मैं फिर से झड़ने लगी। पूरा शरीर काँप उठा।
“ऊईई… बाबा… मैं गई… आआह…!” बाबा रुक नहीं रहे थे। वे और जोर से पेल रहे थे। मेरा पानी उनके लंड पर बह रहा था। बाबा ने लंड को जड़ तक दबाया और अपना गर्म वीर्य मेरे अंदर छोड़ दिया।
मैंने महसूस किया कि वीर्य की धार मेरी बच्चेदानी के अंदर जा रही है। बाबा का शरीर मेरे ऊपर काँप रहा था।
चौथे दिन मैं दोपहर को गई। बाबा खेत के किनारे बैठे थे। मुझे देखते ही उठे और बिना ज्यादा बात किए उसी जगह ले गए। इस बार बाबा ने मुझे खड़ा करके चोदा।
मेरी कमर को आगे झुका दिया और पीछे से लंड पेलना शुरू किया। लंड इतनी आसानी से अंदर जा रहा था जैसे चूत पहले से तैयार हो। बाबा मेरी गाँड पर हाथ मार रहे थे।
हर थप्पड़ के साथ मैं “आआह…” कर उठती। बाबा बोले, “बेटी, तेरी गाँड कितनी मांसल है। चलते वक्त हिचकोले खाती है।” मैंने मुड़कर देखा। बाबा का लंड पूरा गीला था मेरी चूत के पानी से।
वे मेरी कमर को दोनों हाथों से पकड़े हुए जोर-जोर से धक्के लगा रहे थे। लगभग बीस मिनट बाद बाबा ने मुझे घुमाया और मेरी एक टाँग को अपनी कमर पर उठा लिया।
अब लंड साइड से अंदर जा रहा था। बाबा मेरे होंठों को चूम रहे थे और नीचे धक्के लगा रहे थे। मैं फिर झड़ गई। बाबा भी मेरे अंदर वीर्य छोड़कर रुक गए।
पाँचवें दिन बाबा ने कहा, “बेटी, आज मुझे तेरी चूत चाटनी है।”
मैं लुंगी पर लेट गई। बाबा मेरे पैरों के बीच आ गए और मेरी चूत पर मुँह लगा दिया। उनकी जीभ मेरी चूत के होंठों को चाट रही थी। फिर जीभ अंदर घुस गई।
मैं “आआह… बाबा… और… आआह…” कर रही थी। बाबा मेरी चूत के पानी को चाट रहे थे। उनकी दाढ़ी मेरी जाँघों पर रगड़ खा रही थी। मैं बाबा के सिर को पकड़कर अपनी चूत पर दबा रही थी।
बाबा एक उंगली भी अंदर डालकर चाट रहे थे। मैं दो बार झड़ गई। फिर बाबा ऊपर आए और लंड मेरी चूत में पेल दिया। इस बार वे बहुत धीरे-धीरे चोद रहे थे। हर धक्के के बाद रुकते और मेरे होंठ चूमते।
मैंने कहा, “बाबा, जल्दी करो। मुझे और चाहिए।” बाबा मुस्कुराए और रफ्तार बढ़ा दी।
छठे दिन बाबा ने मुझे अपनी गोद में बैठाया। मैं बाबा के लंड पर बैठ गई और ऊपर-नीचे होने लगी। लंड पूरा अंदर जा रहा था। मैं अपनी कमर घुमा रही थी। बाबा मेरे बूब्स को मुँह में लेकर चूस रहे थे।
“आआह… बाबा… तुम्हारा लंड कितना मोटा है… आआह…” मैं बोल रही थी। बाबा मेरी कमर को पकड़कर ऊपर-नीचे करवा रहे थे। लगभग पच्चीस मिनट बाद मैं झड़ गई।
बाबा ने मुझे लिटाया और ऊपर से चोदते हुए अपना वीर्य मेरे अंदर छोड़ दिया।
सातवें दिन आखिरी दिन था। मैं सुबह गई। बाबा ने कहा, “बेटी, आज पूरा दिन रहना। तेरी चूत को याद रखना है।” हम खेत में गए।
बाबा ने पहले मुझे खड़ा करके चोदा, फिर लिटाकर, फिर चारों पैरों पर। हर बार लंड जड़ तक जाता। मैं चार बार झड़ गई। बाबा तीन बार मेरे अंदर वीर्य छोड़ चुके थे।
शाम को बाबा ने मुझे अपनी बाहों में गठरी जैसा बनाकर आखिरी बार चोदा। लंड इतना गहराई तक जा रहा था कि मुझे लगा जैसे पेट तक पहुँच रहा हो। बाबा बोले,
“बेटी, अगर मैं जवान होता तो तुझे अपने साथ ले जाता। तेरे से बच्चे पैदा करता।”
मैंने कहा, “बाबा, तुम्हारा लंड मुझे हमेशा याद रहेगा।” बाबा ने आखिरी बार वीर्य मेरे अंदर छोड़ा और लंड बाहर निकाला। मेरी चूत से वीर्य बह रहा था।
हम कपड़े पहनकर झोपड़ी की तरफ चले। मैंने कहा, “बाबा, जब भी मौका मिलेगा आऊँगी।” बाबा बोले, “आ जाना बेटी। मेरा लंड तेरा इंतजार करेगा।” मैं घर चली गई।
चूत सूजी हुई थी लेकिन मन में मजा भरा हुआ था। बाबा के साथ ये सात दिन मुझे हमेशा याद रहेंगे। उनकी चुदाई का तरीका ऐसा था कि मैं बार-बार उनके पास जाना चाहती थी।
दोस्तों, ये मेरी सच्ची दास्तान है। बाबा के साथ चुदवाकर बहुत मजा आया। अब जब भी गाँव जाऊँगी और मौका मिलेगा तो बाबा के पास फिर जाऊँगी। उनकी याद हमेशा रहेगी।
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