सुहागरात पर माँ की चूत फाड़ किया प्रेग्नेंट!
Antarvasna Family Sex : माँ से शादी कर सुहागरात पर चूत फाड़ी! मोटा लंड बच्चेदानी तक घुसा! शुरू हुई जबदस्त जंगली चुदाई! फिर कोख में माल भर पैदा किए जुड़वा बच्चे!
हैलो दोस्तों आपकी रिया फिर से एक सच्ची कहानी लेकर हाज़िर है,,, ये कहानी मुझे मेरे चाहने वाले ने अपनी सच्ची कहानी भेज कर,,, कहानी को आप तक पहुचाने को कहा,,,
आगे कहानी उसी की जुबानी:-
हैलो फ्रेंड्स, यह मेरी पहली कहानी है। यह कहानी मेरी और मेरी माँ के बीच की है।
हम राजस्थान के है,, गाँव का नाम नहीं बताऊंगा,, और अब हम कहाँ रहतें है ये भी नहीं बताऊंगा,, मैं विशाल हूँ, उम्र 21 साल,,, कॉलेज के लास्ट ईयर में पढ़ता हूँ।
घर में सिर्फ मैं और मेरी माँ मालती रहती हैं,,, माँ की उम्र 38 साल है। उनकी शादी 15 साल की उम्र में हो गई थी और एक साल बाद मैं पैदा हुआ। जो भी हमें साथ देखता है, उसे लगता है कि माँ मेरी बड़ी दीदी हैं।
कयौकि् माँ बहुत ही सैक्सी खुबसूरत, गोरी रसभरे बदन की है,, उनकी सुडौल रसीली चूचियां, रसीले होठों पर काला तिल, थिरकती हुई गांड, बड़े बड़े थिरकते हिचकोलें खाते चूतड़,,,
माँ को देख कर बूढ़े भी अपनी धोती में हाथ डाल के अपने लंड को मसलने को मजबूर हो जाते थे, मेरे सकूल में मास्टरों की लाइन लग जाती थी उन्हें सकूल में किसी भी बहाने से बुला कर माँ के बदन पर आखें गड़ाये रखते हैं,,,
मैंने मास्टर और सकूल के लड़कों को कानाफूसी करते हुए भी बहुत बार सुना कि इसकी माँ की चुत चोदने को मिल जाए तो जन्नत मिल जाए,,, इसकी माँ की चुत में लंड फंसा कर बाहर ना निकाले,,,,,
यह सब सुन कर बहुत गुस्सा आता था और बहुत बार लड़कों से मेरी लड़ाई हो जाती थी, इसलिए जब से मैं 15 - 17 साल का हुआ, तब से माँ को लेकर मेरे मन में भी गंदे खयाल आने लगे थे,,, लेकिन हिम्मत नहीं हुई कुछ करने की।
माँ बहुत बार मेरे सामने ही कपड़े बदल लिया करतीं थीं जिससे उनके नंगे बदन को देख कर मेरे लंड में बुरी तरह से हलचल होने लगती हैं,,,
बहुत बार माँ मेरे से अपनी ब्रा के हुक लगाने को बोलतीं थी,,, मैं हुक लगा कर माँ से लिपट कर बोलता था कि माँ आप बहुत सुन्दर हो,,,,, माँ सुनकर मुझे अपनी बाहों में भर लिया करतीं थीं,
माँ भी आखिर एक औरत हैं और हर औरत अपनी तारीफ सुनना पसंद करतीं हैं,,,
मैं रात को बिस्तर पर लेटा अपने लम्बे मोटे लंड को मसलता रहता और सोचता कि अगर माँ एक बार मेरे ऊपर आ जाएँ तो कैसा लगेगा,,, उनकी गोरी जाँघें, भारी स्तन और पतली कमर मेरे दिमाग में घूमती रहतीं।
माँ की बॉडी हल्की मोटी है। गोरी त्वचा, सेक्सी चेहरा और 36-30-38 का फिगर,,, वो खुद को अच्छी तरह मेंटेन रखती हैं। पापा ने गाँव में अरेंज्ड मैरिज की थी,,, शादी के तीन साल बाद ही पापा विदेश चले गए।
उन्होंने माँ को साफ कह दिया था कि उनकी शादी जबरदस्ती हुई थी और वो किसी और से प्यार करते हैं। माँ ने दादा-दादी को कुछ नहीं बताया और अकेली जिंदगी बिताने लगीं।
जबकि माँ इतनी खुबसूरत भरे बदन हर अंग अंग में रसभरे बदन की थी कि माँ को हर कोई चोदने को तैयार अपनी बनाने को बैचेन रहते थे,,,,,
एक शाम जब मैं कॉलेज से लौटा तो माँ किचन में खाना बना रही थीं। मैंने पीछे से उन्हें गले लगाया।
“माँ… आज बहुत थक गया हूँ।” माँ हँसीं। “बेटा, हाथ धो ले। खाना तैयार है,,, ” मेरा लंड उनकी गांड से उनके चूतड़ की दरार धुस छू गया।
माँ थोड़ी देर के लिए रुक गईं,,, शायद माँ को भी मेरे लंड का कड़कपन अपने चूतड़ में गांड पर महसूस हुआ,,,, इसलिए माँ एकदम से रुक गई थी,,,, लेकिन कुछ नहीं बोलीं,,, मैंने हाथ हटा लिया।
रात को खाना खाते समय मैंने कहा, “माँ, आप बहुत अकेली रह गईं,,, पापा चले गए तो आपने मेरे लिए सब सहा,,, ” माँ की आँखें नम हो गईं।
“बेटा, किस्मत में यही था। अब तू पढ़-लिखकर अच्छा इंसान बन जा, बस यही मेरी खुशी है।”
मैंने उनकी उँगलियाँ पकड़ लीं। “माँ… अगर आप बुरा नहीं मानेंगी तो मुझे एक बात कहनी है।” माँ ने कहा, “बोल बेटा। बुरा नहीं मानूँगी।”
मैंने कहा, “पहले कसम खाओ कि गुस्सा नहीं करोगी।” माँ ने कहा, “तेरी कसम। अब बोल।”
मैंने गहरी साँस ली,,,, “माँ… मैं किसी और से शादी नहीं करूँगा। अगर करूँगा तो सिर्फ आपसे,,, आप आज भी जवान हो,,, कोई नहीं कहेगा कि हम माँ-बेटे हैं,,, मुझे आपको सुख देना है।”
माँ का चेहरा सफेद पड़ गया,,, वह भौचक्की रह गई “ विशाल तू पागल है क्या … दिमाग ठीक है तेरा? मैं तेरी माँ हूँ,,, ऐसी बात मुँह से निकालना भी पाप है।”
माँ रोते हुए बोली तुझे मालूम नहीं है कि गांव में सब जवान, शादीशुदा मर्द, बूढ़े सब मुझे नंगी कर अपने नीचे लाने की कोशिश कर चुके हैं लेकिन मैं उनका विरोध करतीं रहीं,,,,
यहाँ तक कि घर में तेरे दादा भी बहुत कोशिश कर चुके है मुझे नंगी कर अपने नीचे लाने की, मैंने हमेशा सबका विरोध किया, मेरे मायके वालों ने भी मुझे दुसरी शादी करने के लिए बोला लेकिन मैंने तेरे भविष्य के लिए किसी की नहीं सुनीं।
माँ मैं आपको बहुत बहुत प्यार करता हूँ और हमेशा खुश रखूंगा,,, आपने जो भी दुख उठाए,,, मैं सारे सुख आपको दूंगा,,
मैंने कहा, “माँ, मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ। अगर आप हाँ नहीं बोलोगी तो मैं शादी नहीं करूँगा,,, और आज से खाना भी नहीं खाऊँगा।”
माँ रो पड़ीं,,, “बेटा, यह गलत है। तू अपनी जिंदगी बर्बाद मत कर,,, ” लेकिन मैं नहीं माना,, अगले दिन से मैंने खाना छोड़ दिया।
माँ रोज खाना लातीं और कहतीं, “जिंद छोड़ दे बेटा,,, रोटी खा ले,,, ” मैं सिर हिलाकर मना कर देता। नौवें दिन मेरी तबीयत बिगड़ने लगी,,, माँ बुरी तरह से डर गईं।
उन्होंने मेरे माथे पर हाथ रखा और कहा, “ठीक है बेटा… मैं हाँ कहती हूँ,,, लेकिन ये बात सिर्फ हमारे बीच रहेगी।”
मैं खुश हो गया,,, हमने दूर मंदिर में शादी की तारीख तय की। सुहागरात की रात माँ ने लाल साड़ी पहनी थी,,, पूरी दुल्हन की तरह से सजीं हुई थी,,
माँ बिलकुल नई नवेली दुल्हन लग रहीं थी,,, कोई भी कह नहीं सकता था कि माँ 21 साल के बेटे की माँ है,,, घूँघट में उनका चेहरा छुपा था,,, मैंने घूँघट उठाया।
“माँ… आज से आप मेरी पत्नी हो,,, ” माँ की आँखें नम थीं।
“हाँ बेटा… आज से तू मेरा पति है।” माँ के होठ कापं रहे थे,,,
मैंने उनके रसीले होंठों पर मुँह रखा,,, पहले तो माँ सिकुड़ गईं, लेकिन फिर धीरे-धीरे जवाब देने लगीं।
मैंने ब्लाउज के बटन खोले ब्रा हटाई। उनके सुडौल भारी स्तन बाहर आ गए, मैंने एक निप्पल मुँह में लिया और जोर से चूसा,,, माँ की कराह भरी सिसकीं निकल जाती।
“आह… विशाल… धीरे…” निपल मत काट दांत से,,, आहत,,
मैंने काफी देर तक माँ के दोनों चूचे मसलते हुए चूसे,,, माँ की सिसकीं निकल रही थी,,,, आआआआ,,, ऊऊऊईईईईघ,,,, मममममम सससससससस,,,,,,,, आआआआआआ,,,,,
मैंने उनकी पैंटी उतारी,,,, चूत पहले से गीली थी। मैंने दो उँगलियाँ डाल दीं,,,, माँ ने कमर हिलाई और उनकी लम्बी कराह सिसकीं निकल जाती,,, आआआइहहहहहहहहह,,,, विशाल,,,,, धीरे,,,,,, से,,,,,,,
“आह्ह… बेटा… बहुत दिनों बाद… आह्ह…” मैंने लंड निकाला तो माँ मेरे लंड को देख भौचक्की सी रह गई,,,, मैंने तुरंत लंड उनकी चूत पर रखा। “माँ… आज मैं अंदर डाल रहा हूँ।
” माँ ने आँखें बंद कर लीं “धीरे करना… बहुत टाइट है…”
मैंने धीरे से दबाव दिया। लंड का सिरा सुपाडा़ अंदर गया,,, माँ की जोर से दर्द भरी चीख निकल गई,,,, ऊऊऊईईईईघ,, मममी,,,,, ममररररररर,,, गगगग,, ईईईईईईईई,,,,,, मर,,,, गई,,,,, ममममी,,,,,,,
“आह्ह्ह… दर्द… आह्ह…” मैं रुक गया।
“माँ… निकाल दूँ?” माँ ने सिर हिलाया। “नहीं… डाल… लेकिन धीरे… बेटा तेरा तो,,,आआआ,, मर्द से भी बहुत लम्बा मोटा है,,,
मैंने तुरंत 4-5 तगड़े धक्के मार के ” मैंने पूरा लंड जड़ तक माँ की चुत में अंदर किया।
माँ की लंबी कराह निकली। “आह्ह्ह्ह… बेटा… पूरा आ गया…”बच्चेदानी में धुस गया,,,,, ऊऊऊईईईईघ,,, ईईईईईईईई,,, आआआआआआ,,,, मममममममम,,,, सससससससससस,,,
माँ सिसकीं निकल रही थी ददँ सिसकीं निकल रही थी,,,,, माँ सिसकीं भरी हुई उनकी आखों में आसूं निकल रहे थे,,,,,, माँ ने अपने निचले होंठ को दांत में दबा लिया,,,,,,
मैंने धीमे धक्के शुरू किए। माँ हर धक्के पर बिलख,, सिसकी भर रही थीं। काफी देरी से मां को चोदने के बाद उनको अच्छा लगने लगा,,,,
“आह… हाँ… ऐसे ही… आह्ह… और गहरा…” मैंने उनके सुडौल स्तनों को मुँह में लिया और चूसता हुआ जोर से चोदने चोदने लगा,,, माँ की टाँगें उठ कर मेरी कमर पर चढ़ गईं। “और जोर से… आह्ह… विशाल… मुझे चोद…”
मैंने चोदने की स्पीड बढ़ाई,,, बिस्तर हिलने लगा,,, माँ की चूत से ढेर सारा पानी निकल रहा था,,, माँ ने मुझे कसकर अपनी चूड़ियों से भरे हुए हाथों में भीचं लिया,,,, आआआआआआ,,, हहहहहह, ऊऊऊऊऊऊऊममममममममम,,,,,, आआआआआआहहहहहहहहह,,,,
मैं अभी भी मां की ताबड़तोड़ चुदाई कर रहा था,,, कमरे में जोर से फफफचचच,, फफफटटटट,, फफफचचचच,,, फफफटटटट,,, और मेरी जांघों की माँ की गोरी जांघों से जोर जोर से टकराने की आवाजें गूंज रहीं थी,,,,,
कुछ देर बाद माँ फिर से झड़ गई उनकी चुत ने ढेर सारा पानी छोड़ दिया, मैं माँ को चोदने में लगा था माँ की दोनों टांगें उपर उठीं थी उनके पैरों में पायल पाजेब की आवाज उनके दोनों हाथों में चूड़ियों की आवजें गूंज रहीं थी,,,,,
फिर मैंने माँ को चोदते हुए उनकी दोनों टांगें उपर उठा कर अपने कंधे पर रखकर जोर जोर से चोदने लगा,,,, माँ की सिसकीं निकल रही थी
आआआआआआ मममममममम सससससससससस,,, ऊऊऊऊईईईईईईई,,, मममममममम,,,,, ईईईईईईईईईईमममममममममम
“आह्ह्ह… मैं झड़ने वाली हूँ… मत निकालना… अंदर… आह्ह्ह…” माँ का शरीर फिर से ऐंठने तन गया,,,
उन्होंने जोर से आह भरी और झड़ गईं,,, मैंने लंड धक्के मार के अंदर ही रखा,,, थोड़ी देर बाद मैं भी माँ की चुत में ही झड़ गया,,, मैंने सारा वीर्य गर्म गर्म माल उनकी चूत में बच्चेदानी में जड़ तक भर छोड़ दिया।
माँ हाँफ रही थीं,, मैं उनके ऊपर लेटा रहा,,, माँ ने मेरे बाल सहलाए।
माँ बोलीं बेटा तेरे लंड ने तो मुझे हिला के रख दिया,,, तेरा लंड इतना बड़ा लम्बा और मोटा हैं इतना तो तेरे पापा का नहीं है,,,
फिर माँ ने मेरे लंड को अपने हाथ की हथेली फलांग से नापा तो बोलीं 8.5 इंच है और खड़ा हो कर ये लंड 10.5 इंच का था,, फिर माँ ने अपने हाथ की गोलाई से देखा तो मोटाई 4.5 इंच बोलीं,,, फिर माँ ने मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर अच्छे से चूसा,,,
“बेटा… आज बहुत दर्द हुआ… लेकिन बहुत अच्छा भी लगा…” मैंने उनके होंठ चूमे,,, “माँ… अब रोज चोदूँगा,, आज से आप मेरी बीवी बन गई हो।”
माँ के बदन पर चूचियां पर होठों पर गालों पर मेरे चूसने, काटने, के निशान पड़ गए थे उनकी चूचियां के निपल फूल कर मोटे कड़क हो गये,,,, माँ की चुत भी मेरे फौलादी लंड से चुदाई से डबलरोटी, पाव की तरह से फूल सूज कर मोटी हो गई थी,,,,,
रात भर हमने दो और जबरदस्त राउंड किए,,, एक बार माँ ऊपर बैठीं और खुद कूद-कूदकर चुदवाईं,,, अब माँ मेरी बीवी की तरह से मुझसे चुदाई कराने लगीं,
दूसरी बार मैंने उन्हें घोड़ी बनाकर पीछे से चोदा,,, दोनों बार मैंने अंदर ही माल छोड़ा,,, सुबह जब आँख खुली तो माँ मेरे सीने पर सिर रखकर सो रही थीं,,, बिल्कुल नंगी,,,, उनकी चूत से अभी भी मेरा वीर्य माल रिस रहा था।
मैंने धीरे से लंड फिर से उनकी चूत में लगा कर धक्का लगा कर डाला,,, माँ की आँखें खुलीं।
विशाल… सुबह-सुबह…” लेकिन उन्होंने मुझे रोका नहीं,, मैंने माँ को धीरे-धीरे चोदना शुरू किया,, माँ सिसकियाँ भरती रहीं। “आह… बेटा… धीरे… आह्ह…” थोड़ी देर बाद मैं फिर से उनकी चूत में झड़ गया।
अब मैं और माँ रात दिन खुब चुदाई करने लगे,,, माँ अब पहले से भी और ज्यादा सैक्सी खुबसूरत हो गई थी,,, माँ हमेशा मेरे लंड की तारीफ करतीं थीं,,,,,
सुहागरात के बाद हमारी जिंदगी बदल गई,, माँ अब पहले जैसी नहीं रहीं,,, सुबह उठते ही वो मेरे पास आ जातीं,,, एक बीवी की तरह से कभी चाय लेकर, कभी बिना कुछ बोले मेरे लंड को हाथ में ले लेतीं,,,, अपने मुंह में भरकर चूसने लगतीं,,,
“बेटा… सुबह से खड़ा है… थोड़ा निकाल दे…”
मैं उन्हें बिस्तर पर नंगी कर लिटा देता,,, उनकी चूत अभी भी बहुत ज्यादा सूजी हुई होती,,, मैं धीरे-धीरे चोदता,,, माँ सिसकियाँ भरतीं। “आह… विशाल… और गहरा… आह्ह…” ऊऊऊऊईईईईईईई,, चोद,, दे,, मुझे,,,, आआआआआआ,,,
एक हफ्ते बाद माँ ने खुद कहा,
“अब मुझे डर नहीं लगता,,, तू रोज मुझे चोद मैं अब तेरी बीवी हूँ,,,, रात को वो साड़ी उतारकर नंगी हो जातीं। मैं उनके भारी स्तन चूसता, चूत चाटता,,, उनकी ताबड़तोड़ तरीके से चुदाई करने लगा,,,,
माँ मेरे लंड की दीवानी हो गई,,,, माँ जब चुदाई से थक कर मेरे सीने से लग कर बोलती,,,,, विशाल मै अब हमेशा हर जन्म में तेरी बीवी बनना चाहती हूँ,,,, तेरे लंड से ढेर सारे बच्चे पैदा करना चाहती हूँ,,,,,,
माँ कमर हिलाकर बोलतीं, “जीभ और अंदर डाल… आह्ह… बेटा…” मैं दो उँगलियाँ डालकर फिंगर करता। माँ झड़ जातीं,,, फिर मैं लंड डालता और जोर-जोर से ठोकता।
“माँ… तेरी चूत कितनी गर्म है… कस रही है…” माँ कराहतीं, “हाँ… चोद… अपनी माँ की चूत फाड़ दे… आह्ह्ह…”
दो महीने बाद माँ की तबीयत खराब होने लगी,,, उल्टी आती। डॉक्टर ने कहा कि वो प्रेग्नेंट हैं,,, माँ रो पड़ीं,,, “विशाल… तेरा बच्चा है…” मैंने उन्हें गले लगाया।
“माँ… हम दोनों का बच्चा है,,, मैं खुश हूँ।” माँ मुस्कुराईं,,, बोलीं मै भी बहुत खुश हूँ तूने मेरे सूखे सावन में हरियाली ला दी,,,
माँ बीवी के रसम-रिवाज् निभाने लगीं,,, मेरे लिए करवा चौथ का व्रत रखने लगीं,,, अब दोनों पति पत्नी की तरह से रहते है,,,
“अब चुदाई कम करनी पड़ेगी।” लेकिन मैं नहीं रुका। पेट निकलने से पहले तक मैं रोज सावधान होकर चोदता रहा,,,, माँ ऊपर बैठकर खुद कूदतीं।
“धीरे… लेकिन मत रुक बेटा… आह्ह…”
जब पेट ज्यादा निकल गया तो चूत में डालना बंद कर दिया। एक रात माँ ने खुद कहा, “बेटा…मेरी गांड में डाल… चूत में दर्द होता है।” मैंने तेल लगाया,, पहले उँगली से खोला। माँ सिसकीं।
“आह… धीरे…” फिर लंड का सिरा मुश्किल से माँ की गांड में अंदर किया,,,
माँ चीख उठीं “आह्ह्ह… दर्द…ऊऊऊऊईईईईईईई आआआआहहहहहहह,,,,ममममममम,,
मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड गांड में डाला,,,, माँ की आँखों से आँसू निकल आए,,,, माँ की गांड के छलले् चटकने लगे,,,, माँ की गांड मेरे फौलादी लंड को झेल नही पा रही थी,,,,,,,
“आह्ह… बेटा… बहुत मोटा है…” मैंने धीमे धक्के शुरू किए। थोड़ी देर बाद माँ खुद गांड पीछे की तरफ धकेलने लगीं। “अब अच्छा लग रहा है… और जोर से… आह्ह…”
नौ महीने बाद माँ ने जुड़वाँ बच्चे पैदा दिए,, एक बेटा और एक बेटी,,, दोनों स्वस्थ थे,,, माँ बहुत खुश थीं। बच्चे पैदा होने के दो महीने बाद फिर से चुदाई शुरू हो गई।
माँ की चूत पहले से थोड़ी ढीली हो गई थी, लेकिन गांड अभी भी टाइट थी। मैं दोनों छेदों में बारी-बारी से माँ को खूब चोदता।
माँ कराहतीं, “आह… विशाल… आज गांड में ही छोड़… आह्ह…”
सालों बीतते गए। मैं 40 का हो गया। माँ 56 की। लेकिन उनका जिस्म अभी भी जवान था,,, पहले माँ का फिगर 36-30-38 था अब मैंने अपने फौलादी लंड से चोद चोद कर 42-36-48 कर दिया,,,,
हमारे चार और बच्चे हो गए। 4 बेटे और 2 बेटियाँ। इसतरह माँ मेरे फौलादी लंड से चुदाई कराने से 6 बच्चों की माँ बन गई,,,
हमारी परिवार खुशी से चलने लगा,,,, माँ मेरे फौलादी लंड से चुदने का मौका नहीं छोड़ती और मैं भी माँ को चोदने में कसर नहीं रखता हूँ,,,,,
आपकी रिया!!
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