मामा के बाद बेटे ने फाड़ी माँ की चूत!

Hindi Sex Kahani : मामा साथ चुदाई देख नंगी माँ को बेटे ने धमकाया! मामा के वीर्य से भरी चूत चाटी! लंड डालकर गहराई तक फाड़ी चुत! बेटे ने बीज भी डाल दी चुत के अंदर!


अभी तक आपने "संस्कारी माँ की मामा संग चुदाई!" में पढ़ा :-


“आह्ह्ह… रमेश बहनचोद… बहुत जोर से… पकड़ के चोदो… आह्ह्ह… तेरी बहन अब झड़ने वाली हैँ…”


मामा ने स्पीड और बढ़ा दी। माँ का शरीर तन गया। उन्होंने जोर से काँपते हुए झड़ गईं। उनकी चूत से पानी की धार निकल पड़ी। बिस्तर गीला हो गया। मामा ने रुकने की बजाय और तेज कर दिया।


“ले रंडी दीदी… झड़… अपनी चूत से झड़… भोसढी के! ”


कुछ ही देर बाद मामा बोले, “दीदी… मेरा निकलने वाला है…”


माँ ने तुरंत कहा, “मुँह पर निकाल… मेरे मुँह में दे…”


मामा ने लंड बाहर निकाला। माँ घुटनों के बल बैठ गईं और मुँह खोल दिया। मामा ने अपना गाढ़ा वीर्य उनकी जीभ, होंठ और मुँह में उड़ेल दिया। इतना ज्यादा कि माँ के मुँह से टप-टप करके बिस्तर पर गिरने लगा। माँ ने जितना बन पड़ा निगल लिया। बाकी को होंठों से चाट लिया।


दोनों थककर बिस्तर पर गिर गए। माँ के मुँह के आसपास वीर्य चिपका हुआ था। शरीर पसीने से चमक रहा था। मामा उनके बगल में लेट गए।


“दीदी… बहुत दिन बाद तेरी चुदाई की… आज तो मजा आ गया,” मामा ने हाँफते हुए कहा।


माँ कुछ नहीं बोलीं। बस आँखें बंद किए हांफ रही थीं।


मैं ऊपर से सब देख चुका था। मेरा भी पानी निकल चुका था। हाथ में चिपचिपा माल लगा था। दिल अभी भी जोर-जोर से धड़क रहा था। मैंने चुपचाप वहाँ से हटने की सोची।


अब आगे :-


मामा कुछ देर माँ के बगल में लेटे रहे। दोनों की साँसें अभी भी तेज चल रही थीं। माँ के मुँह के आसपास और ठोड़ी पर मामा का गाढ़ा वीर्य चिपका हुआ था। उनके भारी बूब्स पर पसीने की चमक थी। जांघों के बीच से सफेद द्रव धीरे-धीरे बिस्तर पर फैल रहा था।


मामा ने धीरे से कहा, “दीदी… आज सच में बहुत मजा आया। तेरी चूत और गांड दोनों ने लंड को अच्छी तरह निचोड़ा।”


माँ ने आँखें खोलीं। चेहरे पर थकान के साथ एक अजीब सी शर्म थी। “रमेश… अब जाओ। कोई आ जाएगा।”


मामा उठे। उन्होंने अपना पजामा पहना। जाते-जाते माँ के एक बूब्स को दबाते हुए बोले, “अगली बार और देर तक चोदूँगा। आज तो जल्दी हो गया।”


माँ कुछ नहीं बोलीं। मामा कमरे से बाहर निकल गए। दरवाजा बंद होते ही माँ बिस्तर पर ही नंगी पड़ी रहीं। उनकी आँखें छत की तरफ थीं। एक हाथ से उन्होंने अपनी चूत सहलाई। उंगलियों पर मामा का वीर्य और अपना पानी लगा।


उन्होंने उंगलियाँ मुँह के पास ले जाकर सूंघीं… फिर धीरे से चाट लिया।


मैं ऊपरी खिड़की से यह सब देख रहा था। मेरा लंड फिर से तनने लगा था। माँ की वो हरकत देखकर शरीर में एक नई आग लग गई। मैंने फैसला किया कि अभी नीचे जाकर रूम में घुसूँगा।


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मैं बहुत चुपके से सीढ़ियों से उतरा। गलियारे में कोई नहीं था। मामा शायद बाथरूम या बाहर चले गए थे। मामी अभी तक बाजार से नहीं लौटी थीं। मैंने कमरे का दरवाजा धीरे से धक्का दिया।


अंदर अंधेरा नहीं था। हल्की रोशनी में सब कुछ साफ दिख रहा था।


बिस्तर पर माँ अभी भी नंगी लेटी हुई थीं। साड़ी, ब्लाउज, ब्रा और पैंटी फर्श पर बिखरी पड़ी थीं। बिस्तर की चादर बीच में से पूरी गीली थी।


चूत और गांड से निकले पानी और वीर्य की तेज गंध पूरे कमरे में फैली हुई थी। फर्श पर भी कुछ बूंदें गिर रही थीं।


मैंने दरवाजा पीछे से बंद किया। माँ ने आवाज सुनकर गर्दन घुमाई। मुझे देखते ही उनकी आँखें फट गईं। वो सहमकर उठ बैठने की कोशिश करने लगीं। हाथ से बूब्स और चूत छिपाने की कोशिश की।


“आदित्य… तू… यहाँ… कैसे…?” उनकी आवाज काँप रही थी।


मैंने कुछ नहीं कहा। बस पास जाकर खड़ा हो गया। मेरी नजर उनके नंगे शरीर पर थी। बूब्स पर काटने के निशान, जांघों पर नाखूनों की लकीरें, चूत के बाल गीले और चिपचिपे, गांड के छेद के आसपास हल्की लालिमा। सब कुछ साफ दिख रहा था।


माँ ने चादर खींचने की कोशिश की लेकिन चादर गीली होने की वजह से उनके शरीर से चिपक गई। “बेटा… निकाल… यहाँ से… माँ… गंदी हो गई है…”


मैंने उनके पास जाकर घुटनों के बल बैठ गया। बिस्तर के किनारे। मैंने धीरे से उनकी जांघ पर हाथ रखा। माँ सिहर उठीं।


“माँ… मैंने सब देख लिया,” मैंने धीमी आवाज में कहा। “ऊपर वाली खिड़की से… सब…”


माँ का चेहरा सफेद पड़ गया। आँखों में आँसू आ गए। “नहीं… मत बोल… आदित्य… भूल जा… प्लीज…”


मैंने उनका हाथ पकड़ लिया। “भूल नहीं सकता माँ। तुम्हारी कराहें… मामा का लंड तुम्हारी चूत और गांड में… सब याद रहेगा।”


माँ ने अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया। उनके बूब्स अभी भी नंगे थे। निप्पल सख्त हो चुके थे। मैंने हाथ बढ़ाकर एक बूब्स को हल्के से छू लिया। माँ ने मेरा हाथ धकेलने की कोशिश की लेकिन ताकत नहीं थी।


“मत छू… बेटा… मैं तेरी माँ हूँ…”


“माँ हो… लेकिन अभी नंगी हो। मामा का वीर्य तुम्हारे मुँह और चूत में है,” मैंने कहा। मेरी आवाज में गुस्सा कम, वासना ज्यादा थी। “मुझे भी सूंघने दो…”


मैंने झुककर उनके बूब्स के पास अपना चेहरा ले गया। पसीने और सेक्स की गंध आ रही थी। मैंने जीभ निकालकर उनके निप्पल को हल्के से चाटा। माँ की साँस रुक गई।


“आदित्य… बंद कर… कोई आ जाएगा…”


मैं नहीं रुका। मैंने उनका दूसरा बूब्स भी मुँह में ले लिया। हल्के से चूसा। माँ का हाथ मेरे सिर पर आ गया। उन्होंने जोर से नहीं दबाया। बस रखा दिया। मैं नीचे की तरफ जाने लगा। उनके पेट पर किस किए। फिर जांघों के बीच।


माँ की चूत पास थी। गीली, सूजी हुई, और मामा के वीर्य से भरी हुई। मैंने नाक के पास ले जाकर गहरी साँस ली। तेज, खट्टी-मीठी गंध। मैंने जीभ निकालकर उनके चूत के होंठों पर फेरा।


माँ की कमर उछल गई। “आह्ह्ह… मत कर… आदित्य… प्लीज… अह्ह्ह…”


मैंने उनकी चूत को चाटना शुरू कर दिया। मामा का वीर्य और माँ का पानी दोनों का स्वाद आ रहा था। मैंने क्लिट को मुँह में लेकर चूसा। माँ के दोनों हाथ अब मेरे बालों में थे। वो मुझे धकेलने की बजाय अपनी चूत मेरे मुँह में और दबाने लगीं।


“आह्ह्ह… बेटे… क्या कर रहा है तू… आह्ह्ह… जीभ… अंदर…”


मैंने उनकी गांड के छेद पर भी जीभ फेरी। जहाँ मामा ने अभी-अभी लंड डाला था। छेद थोड़ा खुला और संवेदनशील था। माँ सिसकने लगीं।


“ओह्ह्ह… वहाँ… मत चाटो… अह्ह्ह… गंदा है… आह्ह्ह…”


लेकिन उनकी गांड मेरे मुँह की तरफ उठ रही थी। मैंने दोनों जगह बारी-बारी से चाटा। चूत और गांड। माँ की कराहें अब दब नहीं पा रही थीं।


मैंने अपना लंड बाहर निकाला। तना हुआ। माँ ने आँखें खोलीं और उसे देखा। उनकी साँसें तेज हो गईं।


“माँ… मैं भी चोदना चाहता हूँ… अभी…”


माँ ने सिर हिलाया। “नहीं… बेटा… नहीं… बहुत हो गया आज… आदित्य… मत कर…”


लेकिन उनका विरोध कमजोर था। मैं उनके ऊपर चढ़ गया। लंड उनकी चूत के मुँह पर रखा। माँ ने आँखें बंद कर लीं। मैंने धीरे से दबाव दिया। नोक अंदर गई। माँ की चूत अभी भी बहुत गीली और खुली हुई थी। मामा के लंड ने उसे फैला रखा था। मेरा लंड आसानी से अंदर चला गया।


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“आह्ह्ह… आदित्य… अंदर… आ गया… आह्ह्ह…”


मैंने पूरा लंड उनकी चूत में डाल दिया। माँ की आँखों से आँसू बह निकले। लेकिन उनकी टांगें मेरे कमर के चारों तरफ लिपट गईं।


मैं धीरे-धीरे हिलाने लगा। हर धक्के पर माँ की कराह निकल रही थी।


“आह्ह्ह… बेटे… अपनी माँ को… चोद रहा है… आह्ह्ह… धीरे… अह्ह्ह…”


मैंने स्पीड बढ़ा दी। उनके बूब्स मुँह में लेकर चूसते हुए धक्के मार रहा था। माँ के नाखून मेरी पीठ पर चल रहे थे। कमरे में फिर से “फच-फच” की आवाज गूंजने लगी।


इस बार चुदाई में माँ का कोई संस्कार बाकी नहीं था। सिर्फ एक औरत थी जो अपने बेटे के लंड पर कराह रही थी।


मैं माँ की चूत में जोर-जोर से धक्के मार रहा था। उनकी टांगें मेरे कमर से लिपटी हुई थीं। हर धक्के पर उनके भारी बूब्स उछल रहे थे। मैंने दोनों को मुँह में लेकर काटते हुए चूसा। माँ की कराहें अब पूरी तरह खुल चुकी थीं।


“आह्हhhhh… आदित्य… जोर से… अपनी माँ की चूत फाड़ दे… आह्ह्ह… मामा के बाद… बेटे का लंड… आह्ह्ह…”


मैंने उनकी टांगें अपने कंधों पर रख दीं। इस पोजीशन में लंड और गहराई तक जा रहा था। माँ की आँखें बंद थीं। मुँह से सिर्फ गंदी आवाजें निकल रही थीं। बिस्तर जोर-जोर से चरमरा रहा था।


मामा के वीर्य और माँ के पानी की मिलावट मेरे लंड पर चिपक रही थी। हर धक्के पर “छप-छप” की आवाज आ रही थी।


“माँ… तेरी चूत कितनी गरम है… मामा ने अभी-अभी चोदा है… फिर भी टाइट लग रही है… आह्ह्ह…”


माँ ने मेरे बाल पकड़ लिए। “चोदो… बेटे… और तेज… आज दोनों ने चोद लिया… भाई ने… बेटे ने… आह्ह्ह… रंडी बना दी मुझे…”


मैंने उन्हें अचानक पलट दिया। कुतिया की पोजीशन में कर दिया। उनकी मोटी गांड मेरे सामने थी।


चूत से मेरा और मामा का मिलाजुला माल रिस रहा था। मैंने लंड फिर से उनकी चूत में डाल दिया और जोर-जोर से पेलने लगा। गांड पर थप्पड़ मारे। लाल निशान उभर आए।


“ले माँ… ले अपनी मोटी गांड हिला… थप्पड़ खा… आह्ह्ह…”


“हाँ… मार… थप्पड़ मार… अपनी माँ की गांड लाल कर दे… आह्ह्ह… गाली दे… बेटे… गंदी गाली दे…”


“रंडी माँ… आज भाई के बाद बेटे से चुद रही है… दोनों की रंडी… आह्ह्ह…”


माँ पीछे की तरफ जोर-जोर से धकेल रही थीं। “हाँ… रंडी… सिर्फ तुम्हारी… दोनों की… आह्ह्ह… और जोर से चोदो…”


मैंने लंड बाहर निकाला। उनके गांड के छेद पर थूक लगाया। माँ ने गर्दन घुमाकर देखा। आँखों में डर और वासना दोनों थे।


“आदित्य… वहाँ… मामा ने भी डाला था… दर्द होगा… धीरे…”


मैंने नोक अंदर की। माँ सिसक उठीं। धीरे-धीरे पूरा लंड उनकी गांड में चला गया। माँ ने तकिया मुँह में दबा लिया। मैंने कमर पकड़कर गांड में धक्के लगाने शुरू कर दिए।


“आह्हhhhh… आदित्य… गांड… फट रही है… लेकिन मत निकाल… अंदर ही रख… आह्ह्ह… चोदो… अपनी माँ की गांड चोदो…”


मैंने स्पीड बढ़ा दी। एक हाथ से उनके बाल पकड़े, दूसरे से बूब्स मसले। माँ की गांड मेरे लंड को कस रही थी। हर धक्के पर उनके आंड उनकी चूत से लगकर आवाज कर रहे थे।


“माँ… तेरी गांड भी चूत जैसी मस्त है… आज दोनों होल मेरे हो गए… आह्ह्ह…”


माँ पागल हो रही थीं। “दोनों… तेरे… चूत… गांड… सब तेरे… आह्ह्ह… आज पूरी तरह चोद दे… बेटे…”


मैंने कुछ देर गांड में चोदा, फिर वापस चूत में डाल दिया। बारी-बारी से दोनों छेदों में। माँ अब बिल्कुल बेकाबू हो चुकी थीं। उनकी कराहें शब्दों में नहीं रह गई थीं। सिर्फ आवाजें थीं।


थोड़ी देर बाद मैंने उन्हें फिर से चित कर दिया। टांगें फैलाकर मिशनरी में जोर-जोर से पेलने लगा। उनके मुँह से किस करता, गाल काटता, बूब्स चूसता। माँ के नाखून मेरी पीठ पर लकीरें बना रहे थे।


“आदित्य… मैं… झड़ने वाली हूँ… जोर से… और जोर से… आह्हhhhh…”


उनकी चूत ने मेरे लंड को जोर से जकड़ लिया। माँ लंबी चीख के साथ काँपते हुए झड़ गईं। उनका पानी मेरे लंड और जांघों पर बह निकला। मैं रुका नहीं। उनके झड़ने के दौरान भी धक्के मारता रहा।


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“ले माँ… झड़… अपनी चूत से झड़… अब मेरी बारी…”


कुछ ही पल में मेरा नियंत्रण खत्म हो गया। मैंने आखिरी कई गहरे धक्के मारे और उनकी चूत की गहराई में ही अपना पूरा गाढ़ा माल उड़ेल दिया। मामा के वीर्य के ऊपर मेरा वीर्य मिल गया। इतना ज्यादा कि बाहर तक बहने लगा।


मैं उनके ऊपर गिर पड़ा। दोनों हाँफ रहे थे। माँ के शरीर पर पसीना, काटने के निशान, थप्पड़ों के निशान और दो लोगों का वीर्य चिपका हुआ था। कमरे में सेक्स की भारी गंध थी।


लंबी खामोशी के बाद माँ ने धीरे से मेरे बाल सहलाए। आवाज काँप रही थी। “आदित्य… यह… क्या हो गया हम दोनों के साथ…”


मैंने उनका चेहरा ऊपर उठाया। “माँ… मैंने सब देख लिया था। अब छुपा नहीं सकता। तुम भी नहीं।”


माँ की आँखों में आँसू थे। लेकिन उन्होंने मुझे और पास खींच लिया। “किसी को… कभी पता नहीं चलना चाहिए। न पापा को… न किसी को…”


“नहीं चलेगा,” मैंने कहा। “लेकिन जब भी मौका मिलेगा… मैं फिर चोदूँगा। तुम्हारी चूत… तुम्हारी गांड… दोनों।”


माँ चुप रहीं। कुछ देर बाद उन्होंने धीरे से सिर हिलाया। “जब… घर पर कोई न हो… तब…”


मैंने उनके होंठों पर किस किया। इस बार उन्होंने भी जवाब दिया। लंबा, गहरा किस।


हम दोनों नंगे ही बिस्तर पर लेटे रहे। बाहर घर में अभी भी सन्नाटा था। मामा कहीं गए हुए थे। मामी नहीं लौटी थीं। कमरे में सिर्फ हमारी साँसें और बिस्तर पर फैला हमारा मिलाजुला माल बचा था।


थोड़ी देर बाद माँ उठीं। उन्होंने अपने कपड़े समेटे। ब्रा और पैंटी पहनी। साड़ी लपेटते हुए उनके हाथ काँप रहे थे। मैंने भी अपने कपड़े पहन लिए।


जाने से पहले माँ ने मेरी तरफ देखा। आँखों में शर्म और एक नई स्वीकृति दोनों थीं। “आदित्य… आज वाली बात… कभी दोबारा मत दोहराना… घर में…”


मैंने उनके करीब जाकर कमर में हाथ डाला। “घर में नहीं। लेकिन मामा के घर जब भी आएंगे… फिर से होगा।”


माँ ने कुछ नहीं कहा। बस दरवाजा खोलकर बाहर चली गईं। मैं अकेला कमरे में रह गया। बिस्तर पर अभी भी गीले धब्बे थे। फर्श पर वीर्य और पानी की बूंदें। गंध अभी भी बाकी थी।


मैंने गहरी साँस ली। आज मैंने अपनी माँ को न सिर्फ देखा… बल्कि खुद चोदा भी। मामा के बाद। उनकी चूत और गांड दोनों में।


उस दिन के बाद हमारी जिंदगी बदल गई। घर में सामान्य चेहरे बनाए रखते। लेकिन जब भी नजरे मिलतीं तो दोनों जानते थे कि उनके बीच अब सिर्फ माँ-बेटा वाला रिश्ता नहीं बचा। कुछ और भी था। गंदा… और बहुत गहरा।


दोस्तों, ये थी वो रात जो मैंने अपनी आँखों से देखी और फिर खुद जी। उम्मीद है कहानी अच्छी लगी होगी।


इस Hindi Sex Kahani के बारे में अपनी राय कॉमेंट बॉक्स में जरूर बताए!

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