पड़ोसी साथ मिलकर मम्मी की डबल चुदाई!

Family Sex Kahani : पड़ोसी ने पैसे के लालच में मम्मी को चोदा! बेटे ने छिपकर पकड़ा! फिर दोनों ने मिलकर माँ की चूत और गांड एक साथ फाड़ी! दोनों होल में भर दिया माल!


दोस्तों, ये कहानी मैं आज इसलिए लिख रहा हूँ क्योंकि वो रात मेरे दिमाग से कभी निकली नहीं।

मेरा नाम रोहन है। उम्र बाईस साल। हम एक छोटे से शहर में किराए के मकान में रहते हैं। पापा ज्यादातर बाहर रहते हैं काम के सिलसिले में। घर में मैं, मम्मी और मेरी छोटी बहन सोनाली रहते हैं।

मम्मी का नाम रेखा है। उम्र अड़तीस साल। लेकिन शरीर ऐसा है जैसे अभी भी तीस की हों। गोरी चमकदार त्वचा, भारी-भरकम गोल बूब्स, पतली कमर और पीछे निकली हुई मोटी, हिलती हुई गांड।

जब वो सलवार-कमीज पहनकर चलती हैं तो उनकी गांड के लहराते हुए हिस्से देखकर किसी का भी लंड तन सकता है। मैं सालों से उनकी दीवाना था, लेकिन कभी हिम्मत नहीं जुटा पाया।

एक शाम की बात है। मैं छत पर खड़ा था। नीचे गली में हमारा पड़ोसी खड़ा था। उसका नाम गिरीशलाल है, सब उसे गिरीश ही बुलाते हैं।

उम्र करीब पैंतालीस साल। दुबला-पतला, सांवला रंग, लेकिन आँखों में एक गंदी चमक हमेशा रहती थी। वो मम्मी से बात कर रहा था।

मम्मी उससे एक हजार रुपये मांग रही थीं। घर का किराया पूरा नहीं हो पा रहा था। गिरीश ने हँसते हुए कहा, “रेखा, पैसे तो मिल जाएंगे… लेकिन तू अपनी चूत दे दे मुझे।”

मैंने ऊपर से सब सुन लिया। मेरा दिल जोर से धड़कने लगा। मम्मी पहले तो हँसी और बोलीं, “पागल हो गया है क्या? जा अपनी बीवी के पास।” लेकिन गिरीश नहीं माना। वो धीरे-धीरे पास आता गया।

मम्मी पीछे हटती गईं, लेकिन दीवार से सट गईं। आखिर में गिरीश ने कुछ और कहा जो मुझे साफ सुनाई नहीं दिया। मम्मी कुछ देर चुप रहीं… फिर धीरे से सिर हिला दिया।

“रात को आ जाना,” मम्मी की आवाज काँप रही थी। “पापा घर पर नहीं हैं।”

गिरीश मुस्कुराया और चला गया। मैं छत पर पत्थर की तरह खड़ा रह गया। मेरा लंड पहले ही तन चुका था।

रात के साढ़े दस बजे की बात है। बहन सोनाली अपने कमरे में सो चुकी थी। पापा शहर से बाहर थे। मम्मी किचन में थीं। तभी दरवाजे पर हल्की सी दस्तक हुई। मम्मी ने खोला। गिरीश अंदर आ गया।

जैसे ही दरवाजा बंद हुआ, उसने मम्मी को कमर से पकड़ लिया और उनके होंठों पर झपट पड़ा।

मैं अपने कमरे के अंधेरे से सब देख रहा था। दरवाजा अधखुला छोड़ रखा था।

मम्मी ने पहले तो विरोध किया, “कोई देख लेगा… अंदर चल…” लेकिन गिरीश नहीं माना।

वो मम्मी को दीवार से सटाकर जोर-जोर से चूम रहा था। उनके गले, गाल, होंठ… सब जगह काट-काट कर निशान बना रहा था। मम्मी सिसक रही थीं, “काटो मत… दर्द होता है…” लेकिन गिरीश की पकड़ और कस गई।

वो मम्मी को खींचते हुए मेरे कमरे के बगल वाले बेडरूम में ले गया। मैं चुपके से गलियारे में आ गया और दरवाजे की दरार से देखने लगा।

गिरीश ने मम्मी की सलवार का नाड़ा एक झटके में खोल दिया। सलवार उनके पैरों में गिर गई। उनके पैरों में सिर्फ एक हल्की गुलाबी पैंटी रह गई थी। गिरीश ने पैंटी भी नीचे खींच दी।

मम्मी की चूत मेरे और उसके सामने नंगी हो गई। हल्के बालों वाली, गुलाबी और पहले से थोड़ी गीली।

गिरीश घुटनों के बल बैठ गया और मम्मी की चूत पर मुँह लगा दिया। जीभ अंदर तक घुसा दी। मम्मी की कमर काँप गई।

“आह्ह्ह… मत कर ऐसा… अह्ह्ह… गिरीश…”

वो दस मिनट तक लगातार चाटता रहा। मम्मी के दोनों हाथ उसके सिर पर थे। पहले तो वो उसे धकेल रही थीं, फिर धीरे-धीरे अपनी चूत उसके मुँह में और दबाने लगीं। उनकी कराहें अब दब नहीं पा रही थीं।

फिर गिरीश उठा। उसने मम्मी की कुर्ती भी उतार दी। ब्रा के अंदर उनके भारी गोल बूब्स तने हुए थे। उसने ब्रा के हुक खोले।

बूब्स बाहर आते ही वो पागल हो गया। दोनों को मुँह में भर-भर कर चूसने लगा, काटने लगा। मम्मी दर्द से सिसक रही थीं लेकिन उनके हाथ उसके बालों में फँसे हुए थे।

“आह्ह्ह… जोर से मत काटो… अह्ह्ह… दर्द हो रहा है…”

गिरीश ने मम्मी को बिस्तर पर धकेल दिया। खुद नंगा हो गया। उसका लंड बाहर आया तो मम्मी की आँखें फट गईं। काला, बहुत मोटा और लंबा — करीब साढ़े आठ-नौ इंच। नसें फूली हुईं। मम्मी डर गईं।

“इतना… बड़ा… नहीं… इसमें नहीं जाएगा…”

गिरीश हँसा। “यही तेरे लिए है मेरी जान।” उसने मम्मी के ऊपर चढ़कर फिर से उनके पूरे शरीर को निचोड़ना शुरू कर दिया। बूब्स, जांघें, गांड… सब जगह दाँत और नाखून चला रहा था।

मम्मी के शरीर पर लाल निशान पड़ने लगे।

फिर उसने अपना मोटा लंड मम्मी की चूत के मुँह पर रखा। एक पल रुका… और फिर एक ही जोरदार धक्के में आधा लंड अंदर ठेल दिया।

मम्मी की तेज चीख निकली। “आह्हhhhh… निकल… दर्द… बहुत दर्द… गिरीश… निकाल… आह्ह्ह…”

लेकिन गिरीश नहीं माना। उसने और धक्का मारा। पूरा लंड मम्मी की चूत में समा गया। मम्मी की आँखों से आँसू बहने लगे। वो चादर को इतनी जोर से पकड़े हुए थीं कि उनके नाखून सफेद पड़ गए थे।

गिरीश जोर-जोर से पेलने लगा। हर धक्के पर मम्मी की चीख निकल रही थी।

“प्लीज… छोड़ दो… दर्द हो रहा है… बहुत मोटा है… आह्ह्ह… धीरे… करो… आह्ह्ह…”

मैं दरवाजे के पीछे खड़ा अपने लंड को पजामे के ऊपर से दबाए हुए देख रहा था। मेरा भी लंड फटने वाला था।

मम्मी की चीखें, उनका नंगा शरीर, गिरीश का काला मोटा लंड उनकी चूत में अंदर-बाहर हो रहा था… सब कुछ देखकर मैं पागल हो रहा था।

दस-बारह मिनट तक गिरीश लगातार चोदता रहा। मम्मी की कराहें अब दर्द और मजे के मिश्रण में बदलने लगी थीं। तभी मुझसे रहा नहीं गया। मैंने दरवाजा धक्का देकर खोल दिया और अंदर चला गया।

मम्मी ने मुझे देखा तो उनकी आँखें फट गईं। मुँह खुला का खुला रह गया। गिरीश भी मुड़ा। लेकिन उसने घबराहट की बजाय मुस्कुराहट दी।

“डरो मत रेखा… ये तेरा बेटा है। कुछ नहीं बताएगा।” फिर उसने मेरी तरफ देखा। “आ जा बेटा… तू भी अपनी माँ को चोद ले। आज दोनों मिलकर इसकी चूत फाड़ेंगे।”

मम्मी डर गईं। “दो… एक साथ… कैसे लूँगी… रोहन… तू चला जा… प्लीज…”

लेकिन मैं पहले ही कपड़े उतारने लगा था। मेरा लंड बाहर निकला — मोटा, लंबा और तना हुआ। मम्मी ने उसे देखा तो और डर गईं। “आज तो… मेरे जिस्म के टुकड़े हो जाएंगे…”

गिरीश हँसा। “लेगी डार्लिंग… दोनों लेगी। आ जा बेटा।”

मैं बिस्तर पर चढ़ गया। मम्मी के पास जाकर उनके होंठों पर झपट पड़ा। पहले हल्का, फिर जोर से। उनके होंठों को काटने लगा, गालों को, फिर उनके मोटे बूब्स को।

मम्मी के शरीर पर पहले से गिरीश के काटने के निशान थे। मैंने और निशान बना दिए। मम्मी चादर को कसकर पकड़े हुए थीं।

“भगवान… आज बचा ले… आह्ह्ह… रोहन… मत कर… अह्ह्ह…”

गिरीश ने कहा, “खड़े होकर करते हैं। तू पीछे से, मैं आगे से। आज इसकी दोनों होल एक साथ भरेंगे।”

मम्मी की आँखों में आतंक और उत्तेजना दोनों थे। लेकिन उन्होंने विरोध नहीं किया।

मम्मी बिस्तर पर अधनंगी लेटी हुई थीं। उनका शरीर गिरीश और मेरे काटने-नोचने से लाल हो चुका था। बूब्स पर दाँतों के निशान, गले पर सक्शन मार्क्स, जांघों पर नाखूनों की लकीरें।

उनकी चूत से गिरीश का लंड अभी भी बाहर नहीं निकला था। वो अंदर ही धीरे-धीरे हिल रहा था।

गिरीश ने लंड बाहर खींचा। मम्मी की चूत खुली रह गई, थोड़ी सूजी हुई और चमकती हुई। उसने मम्मी का हाथ पकड़कर उन्हें खड़ा किया। मम्मी के पैर काँप रहे थे।

“खड़ी हो जा रेखा… आज तेरी दोनों होल एक साथ भरेगी,” गिरीश ने कहा।

मैं मम्मी के पीछे चला गया। मेरा मोटा लंड उनके गांड के गोल हिस्सों से छू रहा था। गिरीश उनके सामने खड़ा हो गया। उसने मम्मी की एक टांग अपने कमर पर चढ़ा ली। मम्मी ने मेरे कंधे का सहारा लिया।

गिरीश ने अपना काला मोटा लंड फिर से मम्मी की चूत पर रखा और एक झटके में अंदर ठेल दिया। मम्मी की चीख निकल गई।

“आह्हhhhh… फिर से… पूरा… अंदर… दर्द… आह्ह्ह…”

मैंने पीछे से उनकी गांड दोनों हाथों से फैलाई। थूक का बड़ा हिस्सा उनके छेद पर लगाया। फिर अपना लंड उनके गांड के मुँह पर टिकाया। मम्मी ने पीछे मुड़कर देखा। आँखों में डर साफ था।

“रोहन… वहाँ… मत डाल… बहुत दर्द होगा… प्लीज…”

लेकिन मैं रुकने वाला नहीं था। मैंने धीरे लेकिन लगातार दबाव दिया। नोक अंदर गई। मम्मी की कमर अकड़ गई।

“आईईईई… निकाल… दर्द… दोनों तरफ… आह्ह्ह… मर गई…”

मैंने और धक्का मारा। आधा लंड उनकी गांड में समा गया। मम्मी ने मेरे बाजू को इतनी जोर से पकड़ा कि नाखून गड़ गए। गिरीश सामने से जोर-जोर से पेल रहा था। हर धक्के पर मम्मी का शरीर पीछे मेरी तरफ धकेल रहा था, जिससे मेरा लंड और गहराई तक जा रहा था।

“आह्हhhhh… दोनों… एक साथ… चूत… गांड… फट रही है… आह्ह्ह… धीरे… करो… प्लीज…”

गिरीश हँसा। “देख बेटा… तेरी माँ की चूत कितनी टाइट है। तू गांड में और जोर से पेल।”

मैंने उनकी कमर पकड़कर एक लंबा धक्का मारा। पूरा लंड उनकी गांड में चला गया। मम्मी की आँखें बंद हो गईं। मुँह से सिर्फ अजीब सी आवाजें निकल रही थीं।

दोनों लंड उनके अंदर थे - आगे काला मोटा, पीछे मेरा गोरा मोटा। दोनों एक साथ अंदर-बाहर हो रहे थे।

मैंने स्पीड बढ़ा दी। गिरीश भी तेज हो गया। मम्मी का शरीर दो लंडों के बीच पिसी जा रही थी। उनके भारी बूब्स गिरीश के सीने से दब-दब कर फैल रहे थे। मैंने पीछे से उनके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा।

“माँ… कैसा लग रहा है… दोनों लंड एक साथ… बोल…”

मम्मी आँसू भरी आँखों से बोलीं, “दर्द… बहुत दर्द… लेकिन… मत निकालो… अंदर ही रखो… आह्ह्ह… जोर से… दोनों… मारो… आह्ह्ह…”

गिरीश ने मम्मी के बूब्स दोनों हाथों से मसल लिए और जोर से काटने लगा। मैंने उनकी गांड पर थप्पड़ मारे। लाल निशान पड़ गए। दोनों की धक्कों की रफ्तार अब एक जैसी हो गई थी। जब गिरीश अंदर जाता, मैं बाहर खींचता।

जब मैं गहराई तक ठेलता, गिरीश बाहर निकालता। मम्मी पागल हो रही थीं।

“आह्हhhhh… रोहन… गिरीश… दोनों… फाड़ रहे हो… मेरी चूत… मेरी गांड… दोनों फट गईं… आह्ह्ह… गाली दो… मुझे गाली दो…”

गिरीश बोला, “रंडी… आज तेरी दोनों होल बेटे और पड़ोसी से भर गईं… कैसी लग रही है रे रंडी?”

मम्मी चीखते हुए जवाब दे रही थीं, “रंडी… हाँ… रंडी बन गई… दोनों की रंडी… आह्ह्ह… और जोर से चोदो… हरामी… दोनों हरामी… मारो… आह्ह्ह…”

मैं उनके कान में फुसफुसाया, “माँ… तेरी गांड कितनी टाइट है… मेरा लंड निचोड़ रही है… आज के बाद तू सिर्फ मेरी और इसकी रंडी है…”

मम्मी का शरीर काँप रहा था। “हाँ… रंडी… सिर्फ तुम्हारी… दोनों की… आह्ह्ह… मैं झड़ने वाली हूँ… जोर से… और जोर से… आह्हhhhh…”

उनकी चूत और गांड दोनों ने एक साथ हमारे लंडों को जोर से जकड़ लिया। मम्मी लंबी चीख के साथ काँपते हुए झड़ गईं। उनका पानी गिरीश के लंड पर और मेरी जांघों पर बह निकला। दोनों ने रुकने की बजाय और तेज कर दिया।

“ले रंडी… झड़… दोनों लंड पर झड़… आज तेरी इज्जत के लड्डू बन गए… आह्ह्ह…” गिरीश चिल्ला रहा था।

मैं भी नियंत्रण खोने के करीब था। “माँ… मैं भी… अंदर ही छोड़ूँगा… तेरी गांड में…”

मम्मी ने पीछे हाथ बढ़ाकर मेरी जांघ पकड़ ली। “हाँ… छोड़… दोनों… अंदर छोड़ो… भर दो… आह्ह्ह…”

गिरीश पहले झड़ा। उसने मम्मी की चूत में ही अपना पूरा माल उड़ेल दिया। गर्म वीर्य बाहर तक बहने लगा। मैंने भी कुछ ही पल बाद उनकी गांड की गहराई में अपना गाढ़ा माल छोड़ दिया।

इतना ज्यादा कि बाहर आकर उनकी जांघों पर बहने लगा।

दोनों लंड अभी भी अंदर थे। मम्मी हमारे बीच काँप रही थीं। पसीने से तरबतर। शरीर पर काटने और थप्पड़ों के निशान। चूत और गांड दोनों से सफेद द्रव रिस रहा था।

गिरीश ने धीरे से लंड बाहर निकाला। मम्मी की चूत खुली रह गई। मैंने भी अपना लंड उनकी गांड से निकाला। छेद थोड़ा खुला और लाल था। मम्मी के पैर काँप रहे थे। वो हमारे सहारे ही खड़ी रह पाईं।

गिरीश ने मम्मी के बाल सहलाते हुए कहा, “आज के बाद जब भी पैसे चाहिए होंगे… बस बुलाना। बेटा भी साथ रहेगा।”

मम्मी ने कुछ नहीं कहा। सिर्फ मेरी तरफ देखा। आँखों में शर्म, थकान और एक अजीब सी स्वीकृति थी। मैंने उन्हें उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया।


उनके बूब्स पर हाथ फेरते हुए कहा, “माँ… अब तू हमारी हो गई…”

मम्मी ने आँखें बंद कर लीं। बाहर रात गहरी हो चुकी थी। बहन अभी भी सो रही थी। कमरे में सिर्फ तीनों की भारी साँसें गूंज रही थीं… और मम्मी के शरीर से बहता हुआ हमारा मिलाजुला माल! 


तो दोस्तों यह Maa Ki Chudai की Hindi Sex Kahani कैसी लगी कॉमेंट में जरूर बताए!


इसके आगे की Antarvasana Sex Stories जल्द ही..!!

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