खेत में निकली माँ की चुदाई की चीखें!


Family Sex :खेत में माँ की चुदाई की चीखें! प्यासी मम्मी अनिता को बैंगन चूत में घुसाते देख, बेटे ने मोटे लंड से माँ को चोदा! माँ बेटे की Antarvasna Chudai कहानी!


दोस्तो, मेरा नाम आकाश है और मैं बिहार के एक छोटे से गाँव का निवासी हूँ। हमारी ढाणी यानी बस्ती गाँव से करीब एक किलोमीटर दूर, पहाड़ की तलहटी में बसी हुई है। वहाँ हमने खेतों के बीच अपना मकान बना रखा है और आस-पास सिर्फ हमारा ही घर है।


बाकी बस्ती के सारे घर खेतों से काफी दूर हैं। चारों तरफ दूर-दूर तक घने जंगल और ऊँचे-ऊँचे पहाड़ फैले हुए हैं। रात में वहाँ सन्नाटा छा जाता है, सिर्फ हवा की सनसनाहट और कभी-कभी जंगली जानवरों की आवाजें सुनाई देती हैं।


मेरी फैमिली में मम्मी, पापा और मेरा एक छोटा भाई है। पापा बाहर नौकरी करते हैं और छह-छह महीने बाद ही घर आते हैं।


घर में मम्मी अकेली रहती हैं, दिन भर खेतों का काम संभालती हैं और रात को अकेलेपन से जूझती हैं।


मैं छह फीट लंबा, हट्टा-कट्टा, सुडौल जवान युवा हूँ। मेरे शरीर पर मेहनत की वजह से मसल्स उभरे हुए हैं। मेरे लौड़े का साइज तो मेरी मम्मी ही बेहतर बता सकती हैं, लेकिन इतना जरूर बता सकता हूँ कि बचपन से ही मैं एक नंबर का मुठबाज रहा हूँ।


हर रात सोने से पहले मेरे हाथ में लौड़ा आ जाता था और मैं कल्पनाओं में खोकर मुठ मारता रहता था। अब बात करते हैं इस मदर फक स्टोरी के असली किरदार, मेरी माल मम्मी की।


उनका नाम अनिता देवी है। मम्मी का रंग गोरा है, एकदम गदराया हुआ बदन है। उनका कातिलाना फिगर ३६-३०-३८ का है। मम्मी के बूब्स बड़े-बड़े खरबूज जैसे हैं – देखने में सख्त, लेकिन दबाने पर मक्खन की तरह मुलायम।


उनके मम्मों पर डार्क ब्राउन कलर के मोटे-मोटे निप्पल हैं जो उत्तेजना में तन जाते हैं।


उनकी थिरकती और मटकती गांड ऐसी लगती है मानो दो विशाल पहाड़ हिल रहे हों। कमर तक लंबे घने काले बालों का वे जूड़ा बनाकर रखती हैं।


रसीले लाल होंठ, गहरी आँखें और चेहरे की बनावट ऐसी है कि देखते ही मन करता है पटक कर चोद डालूँ। शक्ल से वे आम्रपाली दुबे जैसी सेक्सी लगती हैं, पर थोड़ी मोटी होने की वजह से उनकी चूत और गांड और भी ज्यादा आकर्षक और मांसल हो गई है।


कुल मिलाकर मम्मी एकदम पॉर्नस्टार जैसी दिखती हैं। उनकी इसी फिगर पर मैं पूरी तरह फिदा हूँ।


उन्हें देखकर मन करता है कि पटक कर चोद दूँ, चूत चोदकर रंग पोत दूँ और चूत पर अपना नाम लिख दूँ कि यह चूत अब से आकाश की है।


मम्मी अक्सर फोन चलाती रहती हैं। रात-रात भर वे फ्री सेक्स कहानियों वाली वीडियो देखती रहती हैं। एक रात मैं जाग गया तो उनके कमरे से मादक-मादक सी आवाजें आने लगीं। मैं चुपके से उनके कमरे के दरवाजे के छोटे छेद से अंदर झाँकने लगा।


अंदर का दृश्य देखकर मैं तो अचंभे में पड़ गया। मेरी मम्मी पूरी तरह नंगी लेटी हुई थीं।


उनकी सलवार और ब्लाउज बिस्तर पर बिखरी पड़ी थी। वे अपनी मोटी-मोटी जाँघें फैलाए हुए थीं और अपने हाथ में एक मोटा-सा बैंगन पकड़े हुए अपनी चूत में बार-बार अंदर-बाहर कर रही थीं।


उनकी चूत से चिकना पानी बह रहा था और वे आह-आह की मादक आवाजें निकाल रही थीं। “आह… हाय… और जोर से…” उनकी आवाज सुनकर मेरा लौड़ा तुरंत तन गया। मैं वहीं खड़ा-खड़ा उन्हें देखता रहा।


थोड़ी देर बाद मैंने मम्मी के नाम की मुठ मारकर अपना पानी छोड़ दिया और चुपके से सो गया।


सुबह जब मैं उठा तो मैंने बिना समय गँवाए मम्मी के फोन की हिस्ट्री खंगालनी शुरू कर दी। देखा कि मम्मी लगातार पोर्न वीडियो देखती हैं और उनकी फेवरेट वीडियो बड़े-बड़े काले लौड़ों से औरतों की जोरदार चुदाई वाली हैं।


मेरे अंदर का शैतान जाग उठा।


मैंने मम्मी के फोन में माँ-बेटे की चुदाई वाले वीडियो का पेज खोलकर रख दिया। जब रात को मम्मी ने पोर्न देखना शुरू किया तो वे अचानक अचंभे में पड़ गईं। स्क्रीन पर माँ उछल-उछलकर अपने बेटे से दुग्गी पिटवा रही थी।


मम्मी ने वीडियो थोड़ी देर देखा, फिर फोन रख दिया और सोच में पड़ गईं। मैंने उन्हें लगातार एक महीने तक इसी तरह माँ-बेटे की चुदाई के वीडियो दिखाने जारी रखा। धीरे-धीरे उन्हें यह सब अच्छा लगने लगा।


वे मुझे प्यार करने के बहाने रोज मेरे लौड़े पर हाथ फेरने लगीं, मुझे किस करने लगीं, गले लगाकर अपनी बड़ी-बड़ी छातियों को मेरे सीने से रगड़ने लगीं। मैं समझ चुका था कि इस रंडी को अब मेरा लौड़ा चाहिए।


एक रात मैं खिड़की से कूदकर सीधे मम्मी के कमरे में जा पहुँचा। उस वक्त वीडियो में दृश्य यह था कि बेटा अपनी माँ को जोर-जोर से पेल रहा था और मेरी मम्मी बिस्तर पर लेटी हुई अपनी चूत में उँगली डालकर खुद को सहला रही थीं। अचानक मैंने आवाज लगाई, “ये सब करना है क्या मम्मी?”


मेरी मम्मी मुझे देखकर बुरी तरह घबरा गईं। उनकी आँखें फट गईं। वे जल्दी से अपनी सलवार उठाकर पहनने लगीं।


मैंने तेजी से भागकर सलवार छीन ली और बोला, “अब कोई फायदा नहीं है साली रांड… तेरी दुग्गी पिट कर रहेगी। क्योंकि तेरा तमाशा मैं एक महीने से देख रहा हूँ। सारा मजा बैंगन और खीरा ले रहा था… हम मर गए थे क्या? या मेरे लौड़े में काँटे लगे हैं?”


मम्मी सकपका कर मेरी बात सुनती रहीं और मुझे घूरने लगीं। मैंने आगे कहा, “पर तुझे रोज-रोज इतनी खुजली क्यों है? साफ-साफ बता दे… मैं तेरी खुजली शांत भी कर दूँगा और किसी को कानों-कान खबर भी नहीं होगी!”


मम्मी ने मेरे मुँह से खुला ऑफर सुना तो वे धीरे-धीरे बोलने लगीं, “बेटा क्या करूँ… तेरे पापा महीनों तक घर नहीं आते। मुझसे रहा नहीं जाता।”


मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “तो मुझे बोल देती न… मैं करता तुम्हारा बंदोबस्त!”


मम्मी शर्म से सिर झुकाए बोलीं, “क्या करूँ, मुझे पता नहीं था कि मेरा बेटा मेरी तकलीफ दूर कर सकता है!”


मैंने तुरंत जवाब दिया, “तो अब तो पता चल गया न… अब बन जा घोड़ी और ले ले मेरा लंड अपनी भोसड़ी में… फिर देखना मैं कैसे तेरी चीखें निकलवाता हूँ।”


मम्मी ने मेरी ऐसी गंदी भाषा सुनी तो वे भी रंडी बनकर उसी लहजे में बोलने लगीं, “साले भोसड़ी के… तू निकलवाएगा चीखें… तेरे जैसे दो तो मैंने इसी चूत से निकाल दिए!”


मैं हँसते हुए बोला, “फिर बन कुतिया… आज देखते हैं कि कौन जीतता है और कौन हारता है!”


मम्मी ने थोड़ा सोचकर कहा, “नहीं बेटा… तेरा भाई जाग जाएगा। उसके होते ये सब नहीं हो सकता क्योंकि उसे भी मुझ पर शक था कि मैं फोन में कुछ देखती हूँ।”


मैंने पूछा, “तो फिर क्या करें?”


मम्मी ने मुस्कुराते हुए सुझाव दिया, “कल रात थोड़ी दूर वाले खेत में चलते हैं। वहाँ कल से फसल में पानी लगना है। वह इलाका बिल्कुल पहाड़ी की जड़ में है… वहाँ कोई नहीं आएगा।


अगर आवाजें आई भी तो लोग समझेंगे कि रात को भूतनी आवाजें निकालती है। वही आवाजें आ रही होंगी!”


हमारे यहाँ गाँवों के लोग अक्सर पहाड़ी इलाकों में भूतनी की आवाजों की अफवाहों से डरते हैं। मुझे मम्मी की यह बात एकदम मस्त लगी।


अगली रात मैंने अपने छोटे भाई से कहा, “तुम आराम करो, तुम्हें बुखार है। मैं और मम्मी खेतों में पानी लगाने जाएंगे।”


फिर मैं और मम्मी दोनों खेत में पहुँच गए। वहाँ दो खेतों में फसल लहलहा रही थी। हम उन दोनों खेत के बीच वाली मेड़ पर बैठ गए। रात का अंधेरा छाया हुआ था, चारों तरफ सन्नाटा था। सिर्फ दूर कहीं जंगली पक्षियों की आवाजें आ रही थीं।


मैंने मम्मी को पीछे से पकड़ लिया और उनके बड़े-बड़े बोबे सहलाने लगा। फिर उन्हें जोर से किस करने लगा। उनकी गरम साँसें मेरे चेहरे पर पड़ रही थीं। जल्दी ही मैंने उन्हें पूरी तरह नंगा कर दिया।


उनकी गोरी चमकती चूत और मोटी गांड रात के अंधेरे में भी चमक रही थी। मैंने मम्मी को घुटनों के बल बैठा दिया और उनसे मेरा कच्छा उतारने को कहा।


जैसे ही मम्मी ने एक झटके में मेरा कच्छा नीचे किया, मेरा आधा सोया हुआ ८ इंच का लौड़ा टन्न से जाकर उनके मुँह पर जा लगा। मम्मी की आँखें फट गईं।


वे हैरान होकर बोलीं, “हाय मैं मर गई… इतना बड़ा… मैं तो मर ही जाऊंगी… ये तो अभी सोया हुआ है… खड़ा होगा तो कितना बड़ा होगा? ये मुझे चीर ही डालेगा! मुझे नहीं चुदवाना!”


इतना कहकर मम्मी भागने लगीं। मैंने तेजी से उन्हें पकड़ लिया और बोला, “अरी साली रांड… तू तो कह रही थी कि तेरे जैसे मैंने दो निकाले हैं इसी चूत से… अब क्या हुआ… डर गई क्या?”


मम्मी ने यह सुनकर तैश में आकर कहा, “आ जा मादरचोद! मेरा दम भी देख ले तू… आज तेरा लौड़ा कैसे खाती हूँ… बताती हूँ तुझे!”


मम्मी ने मेरे लंड को पकड़ लिया। जैसे ही उन्होंने हाथ लगाया, मेरा लौड़ा फूलने लगा। मम्मी उसे फूलते देखकर हैरान रह गईं। मेरा काला हब्शी लंड पूरा खड़ा हो गया और १२ इंच लंबा हो गया।


मैंने मम्मी से कहा, “लंड चूस!”


वे मना करने लगीं, “मुझे नहीं आता!”


उस वक्त मुझे पता चला कि आज तक पापा ने न तो मम्मी के मुँह में दिया था और न ही उनकी गांड मारी थी। मैंने कहा, “नहीं आता तो क्या हुआ? मैं सिखा देता हूँ!”


मैंने अपना लंबा और मोटा लंड मम्मी के रसीले मुँह में ठूंस दिया और उनके सिर को पकड़कर मुँह में आगे-पीछे करने लगा। मम्मी की आँखों में आँसू आ गए लेकिन वे चूसती रहीं।


जब मेरा मन भर गया तो मैंने मम्मी को जमीन पर लिटाया। उनकी मोटी जाँघें खोलकर चूत में लंड सैट कर दिया। मम्मी लंड की गर्मी से मस्त होती हुई बोलीं, “आराम से… कहीं मैं मर न जाऊं!”


मैंने मम्मी की दोनों टांगें उठाकर अपने कंधों पर रख लीं और लौड़े की नोक से चूत की दरार को रगड़ने लगा। मम्मी की चूत चिकना पानी छोड़ रही थी। तभी मैंने पूरी ताकत से थोड़ा सा लंड उनकी चूत में घुसेड़ दिया। मम्मी की एक हल्की आह निकली।


दूसरे करारे झटके में मैंने लगभग ७ इंच से ज्यादा लंड चूत में ठोक दिया। इस बार मम्मी की आँखें उबल आईं और उनका गला चोक हो गया। वे मछली की तरह तड़पने लगीं। अब बाकी लंड बाहर बचा था।


मैंने मम्मी के दोनों कंधों को कसकर पकड़ लिया और जोर का झटका लगाकर पूरा १२ इंच का लंड उनकी चूत में फँसा दिया।


इस बार मम्मी इतनी जोर से चीख उठीं कि आसपास के जंगल में गूँज उठी। “आआआह… हाय मर गई…!” अगर पास में कोई होता तो जरूर सोचता कि भूतनी चीख रही है। लेकिन यहाँ तो मेरी मम्मी मेरे लंड से चुद रही थीं।


मम्मी मेरे लंड के नीचे अपनी चूत हिलाने की कोशिश कर रही थीं लेकिन सफल नहीं हो पा रही थीं। वे रोते हुए चिल्ला रही थीं, “उई… आह… मर गई… छोड़ दे… मैं मर जाऊंगी!”


चीखने-चिल्लाने की उन्हें पूरी आजादी थी क्योंकि वहाँ भूतनी के डर से कोई आने वाला नहीं था। मैं हँसते हुए बोला, “तेरी गांड तो अभी से फटने लगी कुतिया!”


मम्मी ने रोते हुए जवाब दिया, “कहाँ कुत्ते! वह तो बीस साल पहले ही फट चुकी है! तू तो बस चोद ले! मेरे दोनों छेद की सील खोलने वाले तो मर्द अलग थे।”


मैंने कहा, “कुतिया… उनके लंड से आगे की चूत मैं आज फाड़ने वाला हूँ तेरी!”


फिर मैं मम्मी को एक बेरहम कसाई की तरह चोदने लगा।


करीब पाँच मिनट बाद मम्मी मेरा साथ देने लगीं और “आह आह आह! और जोर से!” बोलने लगीं। मैं जितनी ताकत से चोदता, वे उतना ही जोर से चोदने को कहतीं। उनकी चीखें अब दर्द की जगह मजा लेने वाली हो गई थीं।


आगे की कहानी : जल्द ही... - "खेत में निकली माँ की चुदाई की चीखें 02"





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