ढाबे में खुला माँ-बेटे की चुदाई का राज!
Maa-Bete Ki Chudai : बस में माँ-बेटे की चुदाई अनन्या ने ली देख! फिर होटल में बेटे ने माँ की गांड़ थप्पड़ मार-मारकर दी फाड़! रातभर हुए गंदी बातों के साथ चुदाई!
अभी तक आपने "बस में माँ ने बेटे को चोदना सिखाया!" में पढ़ा :-
कुछ देर बाद मेरा लंड फिर खड़ा होने लगा। माँ ने महसूस किया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “फिर से…?”
मैंने उन्हें पीठ के बल लिटाया और फिर से चोदना शुरू किया। इस बार और धीरे-धीरे, गहरे-गहरे झटके। माँ की आँखों से आँसू आ रहे थे, लेकिन वे बार-बार “हाँ… और… आह्ह्ह…” बोल रही थीं।
सुबह पाँच बजे तक हम दो बार और चोद चुके थे। आखिरी बार माँ ने खुद मुझे नीचे लिटाया और ऊपर बैठकर चोदा। जब मैं झड़ने वाला था तो माँ ने कहा, “मुँह में दे… इस बार मुँह में…”
मैं उनके मुँह में झड़ गया। माँ ने फिर सारा पी लिया।
सुबह छह बजे बस इंदौर पहुँचने वाली थी। हम दोनों जल्दी से कपड़े पहन लिए। माँ ने मुझे देखा और धीरे से कहा, “ये बस की रात… कभी किसी को नहीं बताना… समझा?”
मैंने सिर हिलाया। लेकिन मन में पता था कि ये रात हम दोनों के लिए कुछ और भी बन चुकी थी।
अब आगे :-
सुबह के 5:30 बज चुके थे। बस अभी भी चल रही थी। मैं (रोहन) और माँ (प्रिया) दोनों थक चुके थे। रात भर की चुदाई के बाद हम दोनों नंगे ही एक-दूसरे से लिपटकर सो गए थे। मेरा लंड अभी भी माँ की चूत के अंदर था। सुबह की हल्की रोशनी पर्दे से आ रही थी।
माँ की आँखें खुलीं। उन्होंने मुझे देखा और धीरे से मुस्कुराई। “सुबह हो गई बेटा… अब कपड़े पहन ले।”
मैंने लंड धीरे से बाहर निकाला। माँ की चूत से थोड़ा वीर्य निकल आया। माँ ने पैंटी पहनी और कुर्ती ठीक की। मैं भी जल्दी से कपड़े पहन लिया। बाहर कंडक्टर के कदमों की आवाज़ आ रही थी। हम दोनों चुपचाप बैठ गए जैसे कुछ हुआ ही न हो।
बस में हल्की हल्की बातें हो रही थीं। लोग उठ रहे थे। माँ मेरे कंधे से सटकर बैठी थीं। कभी-कभी उनकी उँगलियाँ मेरे हाथ पर फिर जातीं। मैं उनकी जांघ पर हाथ रखे हुए था।
करीब ६:३० बजे बस वाले ने घोषणा की कि नाश्ते के लिए धाबा पर रुक रहे हैं। बस धीरे से एक छोटे से धाबे के पास रुकी। ज्यादातर यात्री उतर गए। हम भी उतरे।
धाबे में काफी भीड़ थी। हम एक कोने की टेबल पर बैठ गए। माँ ने चाय और पराठे ऑर्डर किए। मैं उनके सामने बैठा था। माँ की आँखों में अभी भी रात की भूख बाकी थी।
तभी अचानक एक औरत हमारी टेबल के पास आई। उम्र करीब ३२-३४ साल। गोरी, लंबी, टाइट जींस और टॉप पहने हुए। बाल खुले थे। चेहरा सुंदर लेकिन आँखों में एक अजीब सी चमक थी।
वो हमारी टेबल पर बैठ गई। “माइंड इफ आई सिट हियर?” उसने मुस्कुराते हुए पूछा।
माँ ने कहा, “जी नहीं… बैठ जाइए।”
औरत ने खुद को इंट्रोड्यूस किया — “मैं अनन्या। आपके सामने वाली सीट पर थी।” वो हमारी बस की ही यात्री थी। हमने रात में उसे देखा भी था लेकिन ध्यान नहीं दिया था।
अनन्या ने चाय मँगवाई और धीरे-धीरे बात शुरू की। पहले नॉर्मल बातें — मौसम, सफर, इंदौर कैसा है। लेकिन ५-१० मिनट बाद उसका टोन बदलने लगा।
उसने माँ की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए कहा, “आप दोनों बहुत अच्छे लगते हैं साथ में। खासकर रात में… जब बस में सब सो रहे थे।”
माँ का चेहरा थोड़ा लाल हो गया। मैंने भी कुछ नहीं बोला।
अनन्या ने आगे बढ़ते हुए कहा, “मैं हल्की नींद में थी। अचानक मुझे कुछ आवाज़ें सुनाई दीं… आहें, साँसें, और फिर वो ‘आह्ह्ह… बेटा…’ वाली आवाज़।”
मेरा दिल तेज़ धड़कने लगा। माँ ने मेरी तरफ देखा।
अनन्या ने अपनी मोबाइल निकाली। स्क्रीन अनलॉक की और एक वीडियो खोली। उसने हमें दिखाया।
वीडियो में बस का कम्पार्टमेंट था। अंधेरा था। लेकिन साफ दिख रहा था कि एक औरत नंगी लेटी है और एक लड़का उसके ऊपर चढ़ा हुआ है। चुदाई की आवाज़ें आ रही थीं — “फच… फच…” और औरत की मॉनिंग — “आह्ह्ह… चोद… ज़ोर से…”
लेकिन सबसे बड़ी राहत — चेहरा बिल्कुल साफ नहीं था। अंधेरा और एंगल की वजह से न तो माँ का चेहरा साफ दिख रहा था, न मेरा। आवाज़ भी थोड़ी धीमी और अस्पष्ट थी। पहचानना नामुमकिन था।
अनन्या ने मुस्कुराते हुए कहा, “चिंता मत करो। फेस और वॉइस क्लियर नहीं है। कोई पहचान नहीं पाएगा। लेकिन… मुझे सब कुछ सुनाई और दिखाई दे रहा था।”
माँ शर्म से लाल हो गईं। मैं कुछ बोल नहीं पा रहा था।
अनन्या ने वीडियो बंद किया और आगे बढ़कर कहा, “मैंने पूरी रात देखा। जब तुम दोनों स्मूच कर रहे थे… जब वो लड़का (रोहन) माँ के बूब्स चूस रहा था… और जब वो अंदर घुसा… और माँ चीख रही थी ‘फाड़ दे…’।”
वो सीधे माँ की तरफ देखकर बोली, “आपकी चूत कितनी टाइट लग रही थी… और आप दोनों कितना एंजॉय कर रहे थे। खासकर जब आपने कहा ‘अंदर ही छोड़ दे बेटा…’”
माँ ने सिर झुका लिया। लेकिन उनकी साँसें तेज़ हो गई थीं।
अनन्या ने आगे कहा, “मुझे अच्छा लगा। बहुत। इसलिए मैंने रिकॉर्ड कर लिया। और अब… मैं चाहती हूँ कि हम तीनों की दोस्ती हो।”
उसने अपना नंबर हमारे सामने रखा। “अपना नंबर दो। और मेरा सेव कर लो। जब भी मन करे… कॉल करना।”
माँ ने झिझकते हुए अपना नंबर दिया। मैंने भी दिया। अनन्या ने दोनों नंबर सेव कर लिए।
फिर वो उठी और मुस्कुराते हुए बोली, “बस में मिलते हैं। और… अगली बार और अच्छे से एंजॉय करना। मैं देखूंगी।”
वो वापस अपनी सीट पर चली गई।
हम दोनों चुपचाप बैठे रहे। माँ की आँखें मेरी तरफ थीं। न तो शर्म थी, न डर। सिर्फ एक नई उत्तेजना थी।
बस फिर से चल पड़ी। हम इंदौर पहुँचने वाले थे।
माँ ने होटल में बेटे से फड़वाई अपनी गांड़! Full Wild Night :-
हम होटल पहुँचे। कमरा बुक किया। अंदर जाते ही माँ ने दरवाज़ा बंद किया और मुझे दीवार से लगा लिया।
“रोहन… वो औरत ने सब देख लिया था…” माँ ने मेरे कान में फुसफुसाया। “और मुझे अच्छा लगा कि किसी ने देखा…”
मैंने माँ को उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया। हम दोनों के कपड़े एक-एक करके उतरने लगे।
माँ अब पूरी नंगी लेटी थीं। मैं उनके ऊपर आ गया। पहले तो धीरे-धीरे किस किया। फिर माँ ने मुझे धक्का देकर ऊपर बैठा लिया।
“आज तू मेरी गांड़ मार बेटा…” माँ ने सीधे कहा।
मैंने माँ को घुटनों के बल करवाया। उनकी बड़ी गांड़ मेरे सामने थी। मैंने एक जोरदार थप्पड़ मारा। “आह्ह्ह!” माँ चीखीं।
“और मार…” माँ बोलीं।
मैंने उनकी गांड़ पर लगातार थप्पड़ मारे। लाल निशान पड़ गए। माँ की चूत गीली हो चुकी थी। मैंने लंड अंदर डाला और जोर-जोर से चोदना शुरू किया।
“आह्ह्ह… बेटा… गांड़ फाड़ दे… थप्पड़ मार… हाँ… ऐसे ही… आह्ह्ह!”
मैंने उनकी कमर पकड़कर और तेज़ चोदा। माँ का सिर तकिया में दबा हुआ था। उनकी आवाज़ें कमरे में गूँज रही थीं।
फिर मैंने उन्हें पीठ के बल लिटाया। उनकी टाँगें अपने कंधों पर रखीं और गहरा-गहरा चोदने लगा।
“रोहन… आह्ह्ह… तेरे लंड से मेरी चूत फट रही है… उफ्फ… और गहरा… अपनी माँ को चोद… हाँ बेटा… चोद…!”
मैंने उनकी छाती पर थप्पड़ मारा। माँ ने आँखें बंद कर लीं। “और मार… मेरे बूब्स पर मार… आह्ह्ह!”
मैंने उनके भारी बूब्स पर थप्पड़ मारे। निप्पल लाल हो गए। माँ और जोर से चीख रही थीं।
मैंने उन्हें उल्टा कर दिया। डॉगी स्टाइल में फिर से चोदा। एक हाथ से उनकी गांड़ पर थप्पड़, दूसरा हाथ उनके बाल पकड़कर।
“ले… ले अपनी माँ की चूत… ले… आह्ह्ह… फाड़ दे… मैं तेरी रंडी हूँ… आह्ह्ह!”
माँ अब पूरी तरह खुल चुकी थीं। गंदी-गंदी बातें बोल रही थीं।
“बेटा… मेरी चूत तेरी है… जब चाहे चोद लेना… आह्ह्ह… और जोर से…!”
मैंने स्पीड बढ़ा दी। माँ का शरीर काँप रहा था। “आह्ह्ह… आ रहा है… आह्ह्ह… रोहन…!”
माँ जोर से झड़ गईं। उनकी चूत ने मेरे लंड को कस लिया। मैं भी रुक न सका। “माँ… मैं भी…” “अंदर छोड़… आज अंदर ही छोड़ दे…”
मैंने जोर से झटका मारा और उनके अंदर झड़ गया।
हम दोनों गिर पड़े। लेकिन १० मिनट बाद मेरा लंड फिर खड़ा हो गया।
इस बार माँ ने मुझे नीचे लिटाया। वो मेरे ऊपर चढ़ गईं। मेरे लंड पर बैठकर चोदने लगीं।
“आज मैं तुझे चोदूंगी बेटा…” माँ ने कहा।
वे ऊपर-नीचे हो रही थीं। मैं उनकी छाती दबा रहा था। माँ ने मेरे गाल पर हल्का सा थप्पड़ मारा। “आँखें खोल के देख… अपनी माँ को चोदते हुए… आह्ह्ह!”
मैंने उनकी गांड़ पर जोर से थप्पड़ मारा। माँ ने सिर पीछे झुकाया। “आह्ह्ह… और मार…!”
हमने अगले दो घंटे तक अलग-अलग पोज़ीशन में चोदा। मिशनरी, काउगर्ल, स्टैंडिंग, साइड में। हर बार थप्पड़, गंदी बातें और मॉनिंग।
आखिरी बार जब मैं झड़ने वाला था, माँ ने मुझे बाहर निकाला और अपने बूब्स पर ले लिया। “यहाँ छोड़… अपने माँ के बूब्स पर…”
मैंने उनके भारी बूब्स पर झड़ दिया। माँ ने वीर्य को उँगलियों से फैलाया और फिर चाट लिया।
हम दोनों पसीने से तर होकर बिस्तर पर लेट गए। माँ मेरे सीने पर सिर रखकर बोलीं, “आज रात… वो औरत ने जो वीडियो दिखाई… मुझे अच्छा लगा कि किसी ने देखा।”
मैंने माँ को और कसकर पकड़ लिया। “अगली बार… शायद उसे भी बुला लें?”
माँ ने मुस्कुराते हुए मेरे लंड को हाथ में लिया। “पहले तू मुझे और चोद… फिर सोचना।”
माँ (प्रिया) ने मुझे दीवार से लगा लिया। उनकी साँसें अभी भी थोड़ी तेज़ थीं। धाबे वाली घटना के बाद से उनके चेहरे पर एक अजीब सी लालिमा थी।
“रोहन…” माँ ने धीरे से कहा, “आज रात… कोई और नहीं। सिर्फ तू और मैं।”
मैंने माँ को गोद में उठा लिया और बिस्तर पर लिटा दिया। कमरे की लाइटें थोड़ी धीमी थीं। माँ की नंगी देह बिस्तर पर फैली हुई थी। भारी छातियाँ, पतली कमर और वो बड़ी मोटी गांड़ जो अब मेरे सामने पूरी तरह खुली हुई थी।
मैं उनके ऊपर आ गया। पहले तो हमने धीरे-धीरे किस किया। लेकिन माँ ने अचानक मुझे जोर से खींचा और मेरे होंठों को काट लिया।
“आज मुझे मार… थप्पड़ मार… और जोर से चोद…” माँ ने मेरे कान में फुसफुसाया।
मैंने उनकी एक छाती पर हल्का सा थप्पड़ मारा। माँ की आँखें बंद हो गईं। “आह्ह्ह… और मार बेटा…”
मैंने उनके दोनों बूब्स पर थप्पड़ मारे। निप्पल लाल हो गए। माँ की साँसें अब अनियंत्रित हो रही थीं।
मैंने उनकी टाँगें खोलीं और लंड उनकी चूत पर रगड़ने लगा। चूत पहले से ही गीली थी। मैंने सुपाड़ा अंदर डाला और धीरे-धीरे पूरा लंड घुसा दिया।
“आह्ह्ह्ह… रोहन…” माँ ने लंबी साँस ली। “आज… धीरे से शुरू कर… लेकिन बाद में… फाड़ देना…”
मैंने धीरे-धीरे कमर चलानी शुरू की। माँ की चूत गर्म और टाइट थी। हर झटके के साथ उनकी गांड़ हिल रही थी। मैंने उनकी जांघों पर हाथ रखा और थोड़ा और गहरा घुसने लगा।
माँ ने मेरे बाल पकड़ लिए। “याद है ना… जब तू छोटा था… और मैं नहाने के बाद तौलिए में बाहर आती थी… तू चुपके से देखता था…” माँ ने आँखें बंद करके कहा।
मैंने उनकी एक छाती मुँह में लिया और चूसते हुए बोला, “हाँ माँ… मुझे याद है। तू झुकती थी तो तेरी छातियाँ दिख जाती थीं… और मैं रात को सोचता था…”
“और अब… तेरी वो कल्पना सच हो गई है…” माँ ने मेरे सिर को अपनी छाती से दबा लिया। “अपनी माँ को चोद रहा है तू… आह्ह्ह…”
मैंने स्पीड बढ़ाई। माँ की चूत अब पूरी तरह गीली हो चुकी थी। “फच… फच…” की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी।
मैंने माँ को उल्टा कर दिया। उनकी बड़ी गांड़ मेरे सामने थी। मैंने एक जोरदार थप्पड़ मारा। “आह्ह्ह!” माँ चीख पड़ीं।
“और मार…” माँ ने पीछे मुड़कर कहा।
मैंने उनकी गांड़ पर लगातार थप्पड़ मारे। लाल निशान पड़ गए। फिर मैंने लंड अंदर डाला और जोर-जोर से चोदना शुरू किया। माँ का सिर तकिए में दबा हुआ था।
“आह्ह्ह… बेटा… गांड़ फाड़ दे… थप्पड़ मार… हाँ… ऐसे ही… आह्ह्ह… अपनी माँ की गांड़ लाल कर दे…”
मैंने उनकी कमर पकड़कर और तेज़ चोदा। माँ अब बिल्कुल खुल चुकी थीं।
“रोहन… याद है जब तू पहली बार मेरा लंड छुआ था बस में… मैंने सोचा था ये गलत है… लेकिन फिर भी रुक नहीं पाई…” माँ की आवाज़ काँप रही थी।
“मुझे भी शर्म आ रही थी माँ… लेकिन तेरी चूत इतनी गर्म थी…” मैंने उनकी गांड़ पर एक और थप्पड़ मारा।
मैंने माँ को पीठ के बल लिटाया और उनकी टाँगें अपने कंधों पर रख लीं। अब लंड और गहरा जा रहा था। माँ की आँखों से आँसू आ रहे थे, लेकिन वे बार-बार “हाँ… और… आह्ह्ह…” बोल रही थीं।
“बेटा… मेरी चूत तेरी है… जब चाहे चोद लेना… आह्ह्ह… आज पूरी रात चोदना मुझे… उफ्फ…”
मैंने उनकी छाती पर थप्पड़ मारा। माँ ने होठ काट लिए। “और मार… मेरे बूब्स लाल कर दे… आह्ह्ह!”
हमने अगले घंटे तक अलग-अलग पोज़ीशन में चोदा। कभी मिशनरी, कभी काउगर्ल, कभी साइड में लेटकर। हर बार थप्पड़, गंदी बातें और मॉनिंग।
आखिरी बार जब माँ मेरे ऊपर चढ़ीं, उन्होंने मेरे गाल पर हल्का सा थप्पड़ मारा। “आँखें खोल के देख… अपनी माँ को अपने लंड पर चोदते हुए… आह्ह्ह…”
माँ ऊपर-नीचे हो रही थीं। मैं उनकी गांड़ पकड़कर ऊपर की तरफ धक्का दे रहा था। माँ का शरीर पसीने से तर हो चुका था।
“रोहन… मैं फिर झड़ने वाली हूँ…” माँ ने कहा।
“माँ… मैं भी…”
माँ ने और तेज़ी से ऊपर-नीचे होना शुरू कर दिया। “अंदर छोड़… आज अंदर ही छोड़ दे… अपनी माँ की चूत में भर दे…”
मैंने जोर से झटका मारा और उनके अंदर झड़ गया। गरम वीर्य की फुहारें माँ की चूत में भर गईं। माँ ने भी जोर से झड़ते हुए मेरे कंधे कस लिए। “आह्ह्ह्ह… भर गया… आह्ह्ह…”
हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटकर लेट गए। मेरा लंड अभी भी उनकी चूत के अंदर था। कमरा हमारी साँसों और पसीने की खुशबू से भरा हुआ था।
कुछ देर बाद माँ ने मेरे सीने पर सिर रखा और धीरे से बोली, “रोहन… आज से पहले… जब तू छोटा था… और मैं अकेली रहती थी… रात को कभी-कभी तेरे बारे में सोचती थी… लेकिन कभी सोचा भी नहीं था कि ये दिन आएगा…”
मैंने माँ को और कसकर पकड़ लिया। “माँ… मुझे भी शर्म आती थी… लेकिन अब… मुझे पछतावा नहीं है।”
माँ ने मेरे लंड को हाथ में लिया। वो फिर से धीरे-धीरे खड़ा हो रहा था।
“फिर से…?” माँ ने मुस्कुराते हुए पूछा।
मैंने माँ को फिर से उल्टा किया। इस बार और धीरे-धीरे, गहरे-गहरे झटकों के साथ चोदा। माँ अब चुपचाप आहें भर रही थीं।
जब मैं झड़ने वाला था, माँ ने मुझे बाहर निकाला और अपने बूब्स पर ले लिया। “यहाँ छोड़… अपने माँ के बूब्स पर…”
मैंने उनके भारी बूब्स पर झड़ दिया। माँ ने वीर्य को उँगलियों से फैलाया और फिर चाट लिया।
हम दोनों फिर से थककर लेट गए।
कमरे की घड़ी में रात के २ बज चुके थे।
माँ ने अचानक मेरे कान में फुसफुसाया, “रोहन… वो धाबे वाली औरत… अनन्या… उसने जो वीडियो दिखाई थी… मुझे अच्छा लगा कि किसी ने देखा। लेकिन… एक बात और है…”
मैंने माँ की तरफ देखा।
माँ ने थोड़ी देर चुप रहकर कहा, “पापा… जब बाहर जाते थे… तो कभी-कभी मुझे शक होता था कि वो किसी और के पास जाते हैं। इसलिए जब तू मेरे पास आया… तो मैंने रोका नहीं। शायद… मैं भी अकेली थी…”
मैं कुछ बोल नहीं पाया।
माँ ने मेरे गाल पर हाथ रखा और धीरे से कहा, “लेकिन आज रात के बाद… मुझे कुछ और चाहिए।”
“क्या माँ?” मैंने पूछा।
माँ ने मुस्कुराते हुए कहा, “अगली बार… जब हम वापस मुंबई जाएँगे… तो शायद… अनन्या को भी बुला लें। तीनों मिलकर…”
मैं स्तब्ध रह गया।
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