सौतेली बहन की चुत को भाई ने जवानी में बजाया! 02
Bhai Bahan Ki Chudai : जब सौतेली बहन नाइटी में आई, तभी भाई ने फाड़ दी उसकी चुत और गांड! रात भर भाई ने पेली शादीशुदा बहन! 3-3 बार बीज बहन की चुत में गिराया!
अभी तक आपने "सौतेली बहन की चुत को भाई ने जवानी में बजाया!" में पढ़ा :-
मैंने अपना हाथ बढ़ाया और उसके बालों से एक तिनका हटाया। उँगलियाँ उसके गाल से हल्के से छू गईं। वो सिहर गई। लेकिन हटी नहीं।
हम दोनों ऐसे ही बैठे रहे। सूरज पूरी तरह डूब गया। आसमान में लालिमा फैल गई।
और कहीं दोनों के अंदर… एक खामोश सी आग सुलगने लगी थी। अभी भी काबू में। अभी भी धीमी। लेकिन अब बुझने वाली नहीं थी।
अगली सुबह नाश्ते पर अजीब सी खामोशी थी। नैना ने मुझसे नज़रें मिलाईं तो दोनों ने जल्दी से प्लेट की तरफ देख लिया।
अब आगे :-
मम्मी ने पूछा, “कल पार्क में देर तक थे क्या? चेहरे उतराए हुए लग रहे हो दोनों।” नैना ने हल्के से मुस्कुराकर कहा, “नहीं… बस थकान है।” लेकिन थकान नहीं थी। कुछ और था।
उस दिन पापा घर पर ही रहे। हम दोनों को एक-दूसरे के करीब बैठने का मौका कम मिला। लेकिन जब मौका मिलता, तो नज़रें अपने आप मिल जातीं। किचन में चाय बनाते समय हमारे कंधे छू गए। दोनों एक पल के लिए रुक गए। फिर नैना ने धीरे से कदम बढ़ा लिया।
दोपहर को जब सब सो रहे थे, मैं उसके कमरे के पास से गुज़रा। दरवाज़ा आधा खुला था। वो बिस्तर पर लेटी थी, किताब हाथ में। मेरी आहट सुनकर उसने सिर उठाया। “अंदर आ जा,” उसने धीमे से कहा।
मैं अंदर गया। कुर्सी पर बैठने की बजाय फर्श पर उसके बिस्तर के पास बैठ गया। पुरानी आदत। वो भी मुस्कुराई। “याद है? तू हमेशा यहीं बैठता था जब मैं बीमार होती थी।” “हाँ।”
वो किताब बंद करके रख दी। फिर बोली, “आरव… शादी में सबसे ज्यादा जो चीज़ सताती थी ना… वो थी बात करने वाला कोई न होना। मैं तुझे कितनी बार फोन करना चाहती थी, लेकिन हिम्मत नहीं होती थी।”
मैंने कुछ नहीं कहा। बस उसकी तरफ देखा। उसने आगे कहा, “तुम्हारे साथ बैठकर… ऐसा लगता है जैसे सालों की थकान उतर रही हो।”
उसने अपना हाथ मेरी तरफ बढ़ाया। मैंने पकड़ लिया। इस बार उँगलियाँ जानबूझकर लॉक हो गईं। हम दोनों ने देखा। कोई नहीं छुड़ाया। कमरे में पंखे की आवाज़ के अलावा कुछ नहीं था।
थोड़ी देर बाद उसने अपना सर मेरे कंधे पर रख दिया। मैंने भी सर थोड़ा झुका लिया।
उसके बालों से हल्की खुशबू आ रही थी - वही पुरानी, जो बचपन में आती थी। मैंने बिना सोचे उसके बालों में उँगलियाँ फेर दीं। धीरे-धीरे। वो और करीब खिसक आई। अब उसका पूरा शरीर मेरे बाजू से सट गया था।
“आरव…” उसकी आवाज़ बहुत धीमी थी, “ये गलत तो नहीं है ना?” मैंने जवाब दिया, “पता नहीं… लेकिन अच्छा लग रहा है।” उसने हल्के से सिर हिलाया। मेरी उँगलियाँ उसके बालों में चलती रहीं। कभी कनपटी सहला दी, कभी गर्दन के पास। वो आँखें बंद किए बैठी रही। साँसें धीमी हो गई थीं।
जब मैंने हाथ रोका तो उसने मेरा हाथ पकड़कर फिर से बालों पर रख दिया। “मत रोक…”
हम लगभग आधा घंटा ऐसे ही रहे। कोई और छूने की कोशिश नहीं की। बस इतनी नजदीकी। इतनी खामोशी। इतनी गर्माहट।
शाम को जब पापा-मम्मी बैठक में टीवी देख रहे थे, हम दोनों रसोई में चाय बना रहे थे। नैना ने अचानक मेरी तरफ मुड़कर कहा, “कल रात को… जब तूने मेरे बालों में हाथ फेरा था… बहुत अच्छा लगा।” मैंने चाय की पतीली देखते हुए कहा, “तुझे भी?” “हाँ।”
फिर उसने बहुत धीमे से जोड़ा, “मुझे डर लग रहा है, आरव।” “किस बात का?” “कि ये सब… कहीं हम दोनों को ले ही न जाए।”
मैंने उसकी तरफ देखा। उसकी आँखों में सच्चाई थी। और थोड़ी सी हवस भी, जो वो छुपाने की कोशिश कर रही थी। मैंने सिर्फ इतना कहा, “मैं भी डर रहा हूँ।”
रात को फिर छत। इस बार नैना ने एक चादर ओढ़ रखी थी। ठंड बढ़ रही थी। वो मेरे बगल में आई और चादर का एक कोना मेरे ऊपर भी डाल दिया। अब हम दोनों एक ही चादर के अंदर थे। कंधे सटे हुए। जाँघें लगभग छू रही थीं।
बातें होने लगीं। पुरानी यादें। फिर वर्तमान। नैना ने बताया कि उसके पति के साथ आखिरी महीनों में वो कितनी अकेली महसूस करती थी। रात को बगल में लेटे हुए भी कोई गर्माहट नहीं थी।
“तुम्हारे कंधे पर सर रखकर बैठना…” उसने कहा, “मुझे सालों बाद पहली बार नींद जैसी शांति दे रहा है।”
मैंने अपना हाथ चादर के अंदर बढ़ाया और उसकी कमर पर रख दिया। ऊपर से। कपड़ों के ऊपर। बस रखा। हिलाया नहीं। वो सिहर गई। लेकिन हटी नहीं। बल्कि थोड़ा और मेरे करीब आ गई।
अब उसका सर मेरे सीने से सट चुका था। मैं उसकी धड़कन सुन सकता था। तेज़।
हम दोनों की साँसें तेज़ हो रही थीं। मैंने अपना हाथ धीरे से उसकी पीठ पर फेरना शुरू किया। ऊपर से नीचे। बहुत धीरे। नैना की उँगलियाँ मेरे टी-शर्ट की किनारी पकड़कर भींच रही थीं।
अचानक उसने सिर उठाया। हमारे चेहरे बहुत करीब थे। इतने करीब कि नाकें लगभग छू रही थीं। उसकी आँखें मेरी आँखों में थीं। मैंने धीरे से अपना माथा उसके माथे से सटा दिया। फिर… बहुत हल्के से… अपने होठ उसके माथे पर रख दिए। एक लंबा, नरम सा किस।
वो आँखें बंद किए बैठी रही। जब मैंने होठ हटाए तो उसने मेरा टी-शर्ट और जोर से भींच लिया। “आरव…” उसकी आवाज़ काँप रही थी, “एक बार और…”
मैंने फिर से माथे पर किस किया। फिर गाल पर। बहुत धीमे। बहुत हल्के। उसने भी मेरा गाल सहलाया। उँगलियों से।
हम और करीब आ गए। होठ लगभग छूने वाले थे। साँसें एक-दूसरे के मुँह में जा रही थीं। लेकिन ठीक उसी पल नीचे से मम्मी की आवाज़ आई, “आरव! नैना! देर हो गई, अंदर आ जाओ!”
हम दोनों जैसे करंट लगने से अलग हो गए। चादर गिर गई। नैना ने जल्दी से बाल ठीक किए। मैंने खांसकर अपना गला साफ किया। “हाँ मम्मी… आ रहे हैं।”
जब हम सीढ़ियों से उतर रहे थे तो नैना का हाथ एक पल के लिए मेरे हाथ से छू गया। उँगलियाँ थोड़ी देर तक अटकी रहीं। फिर छूट गईं।
रात को अपने कमरे में लेटे हुए मैं छत की तरफ देखता रहा। नैना के कमरे से हल्की रोशनी आ रही थी। वो भी शायद जाग रही थी। दोनों जानते थे… अब सीमा बहुत करीब आ चुकी है। बस एक धक्का बाकी है।
मम्मी की आवाज़ के बाद हम दोनों अंदर आ गए। लेकिन नींद किसी को नहीं आई।
दो घंटे बाद घर पूरी तरह शांत हो चुका था। मैं लेटा हुआ सोच ही रहा था कि मेरे कमरे का दरवाज़ा धीरे से खुला। नैना खड़ी थी। सफेद नाइटी में। बाल खुले। आँखों में वही भूख जो छत पर थी।
वो अंदर आई और दरवाज़ा बंद कर दिया। बिना एक शब्द कहे मेरे बिस्तर के पास आ गई। मैं उठकर बैठ गया।
“नैना…”
उसने जवाब नहीं दिया। बस मेरे करीब आकर खड़ी हो गई। फिर धीरे से मेरी टी-शर्ट के हेम को पकड़कर ऊपर उठाने लगी। मैंने भी उसके हाथ पकड़ लिए… लेकिन रोकने के लिए नहीं। मदद करने के लिए। टी-शर्ट निकल गई।
उसने अपनी नाइटी के बटन खोलने शुरू किए। एक… दो… तीन।
नाइटी कंधों से सरककर फर्श पर गिर गई। उसके नीचे सिर्फ एक पतली पैंटी थी। कोई ब्रा नहीं। गोरे, भारी स्तन सामने थे। निप्पल सख्त। मैंने देखा… और मेरा लंड तुरंत पूरी तरह खड़ा हो गया।
मैंने उसे खींचकर बिस्तर पर लिटा दिया। उसके ऊपर चढ़ गया। पहले माथे पर किस किया, फिर आँखों पर, फिर गाल पर। जब होठ उसके होठों से मिले तो दोनों में से किसी ने धीरे नहीं किया।
जीभ अंदर चली गई। काटने लगे, चूसने लगे। नैना की साँसें तेज़ हो रही थीं। वो मेरे बाल पकड़कर मुझे और गहराई तक खींच रही थी।
“आह्ह… आरव… बहुत दिन से… इंतज़ार था…”
मैंने उसके स्तनों को दोनों हाथों में भर लिया। दबाया। निप्पल्स को उँगलियों से घुमाया। फिर मुँह में लिया और जोर से चूसने लगा।
“ओह्ह्ह… चूस… जोर से चूस… आगाह… दाँत से काट… उम्मम्म…”
वो कमर उठा-उठाकर मेरे लंड को अपनी पैंटी के ऊपर से रगड़ रही थी। मैंने पैंटी नीचे सरका दी। उसकी चूत पहले से भीगी हुई थी। उँगलियाँ गीली हो गईं। मैंने एक उँगली अंदर डाली। टाइट। गर्म।
“आआह्ह… और अंदर… दो उँगली कर… ओहह्ह्ह…”
दो उँगलियाँ अंदर कर दीं। अंदर-बाहर। क्लिटोरिस पर अंगूठा घुमाया। नैना के पैर काँपने लगे। वो मेरे कंधे पर दाँत गाड़कर कराह रही थी।
“आरव… अब और मत तड़पा… लंड निकाल… मुझे चोद… जल्दी…”
मैंने पैंट और अंडरवियर एक साथ उतारे। मेरा लंड झटके से बाहर निकला – मोटा, नसों से भरा, सिर चमक रहा था। नैना ने हाथ बढ़ाकर पकड़ लिया।
“इतना सख्त… इतना मोटा… उफ्फ…”
उसने इसे अपनी चूत पर रगड़ा। गीले होंठों के बीच सरकाया। फिर आँखें मिलाकर बोली, “डाल… धीरे से मत… अंदर तक…”
मैंने टोपे को उसके छेद पर रखा और एक झटके में आधा अंदर धकेल दिया।
“आआआह्ह… ह्न्न्न्… इतना मोटा… आरव… पूरा डाल… फाड़ दे…”
दूसरे धक्के में पूरा लंड उसकी चूत में समा गया। नैना की आँखें बंद हो गईं। मुँह खुला का खुला रह गया। मैं रुका नहीं। बाहर निकाला और फिर जोर से अंदर दे मारा।
छप-छप-छप… कमरे में सिर्फ गीली आवाज़ और उसकी सिसकारियाँ गूँज रही थीं।
“आह्ह… और जोर से… चोद… मेरी चूत फाड़ दे… ओहह्ह्ह… आरव… तू मेरी है… सिर्फ मेरी…”
मैंने उसके दोनों पैर अपने कंधों पर रख दिए। और गहराई तक जाने लगा। हर धक्के पर उसके स्तन उछल रहे थे। मैंने झुककर फिर से निप्पल मुँह में ले लिया और चूसते हुए चोदता रहा।
“आगाह… चूस और चोद… दोनों साथ… मैं पागल हो जाऊँगी… उम्मम्म…”
बीस मिनट तक मैंने उसे इसी पोजीशन में जबरदस्त चोदा। फिर पलटा। डॉगी स्टाइल। उसके मोटे, गोल चूतड़ मेरे सामने थे। मैंने दोनों हाथों से चूतड़ फैलाए और लंड फिर से अंदर धकेल दिया।
“आआह्ह… इतनी गहराई… गर्भ तक जा रहा है… आरव… थप्पड़ मार… मेरे चूतड़ों पर मार…”
मैंने जोर के थप्पड़ मारे। लाल निशान पड़ गए। नैना और जोर-जोर से कराहने लगी। मैंने बाल पकड़कर उसका सिर पीछे खींचा और कान में गंदे शब्द कहने लगा।
“ले… ले मेरी सौतेली बहन… अपनी चूत फड़वा… रंडी बन जा मेरी…”
“हाँ… रंडी… तेरी रंडी… सिर्फ तेरी… आआआह्ह… और तेज़… मैं झड़ने वाली हूँ…”
उसकी चूत अचानक सिकुड़ने लगी। जोर से ऐंठ गई। मैंने भी अपने आप को नहीं रोका। गर्म वीर्य की धार उसकी चूत के अंदर छोड़ दी। एक… दो… तीन झटके। पूरा भर दिया।
दोनों हांफते हुए बिस्तर पर गिर गए। लंड अभी भी उसके अंदर था। नैना मेरे सीने पर लेट गई। पसीने से तर।
थोड़ी देर बाद उसने धीरे से कहा, “आरव… एक बार और… इस बार मैं ऊपर से…”
मैं मुस्कुराया। लंड फिर से सख्त होने लगा था।
रात अभी लंबी थी। और हम दोनों अब कोई सीमा नहीं मानने वाले थे।
नैना मेरे ऊपर चढ़ गई। उसके भारी स्तन मेरे चेहरे के ठीक ऊपर झूल रहे थे। उसने मेरा अभी भी आधा सख्त लंड पकड़ा और अपनी गीली चूत पर रगड़ने लगी।
“देख… तेरा वीर्य अभी भी रिस रहा है मेरी चूत से…” वो मुस्कुराते हुए बोली, फिर धीरे-धीरे बैठने लगी।
लंड का टोपा फिर से अंदर घुसा। नैना ने आँखें बंद कर लीं और एक ही बार में पूरा अंदर ले लिया।
“आआह्ह… इतना गहरा… उफ्फ आरव…”
वो ऊपर-नीचे होने लगी। पहले धीरे, फिर तेज़। उसके स्तन मेरे चेहरे पर बार-बार लग रहे थे। मैंने दोनों हाथों से उन्हें पकड़ लिया और निप्पल्स को मुँह में ले लिया। जोर से चूसने लगा।
“ओह्ह्ह… चूस… मेरे बूब्स चूस… आगाह… और जोर से काट…”
नैना की कमर झूम रही थी। छप-छप-छप की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। वो अपने बालों को पीछे करते हुए मुझसे नज़रें मिला रही थी।
“देख मुझे… देख कैसे तेरी लंड पर सवार हो रही हूँ… तेरी सौतेली बहन… आआह्ह…”
मैंने उसके चूतड़ पकड़कर नीचे से जोर-जोर के धक्के मारने शुरू कर दिए। नैना की सिसकारियाँ और तेज़ हो गईं।
“हाँ… ऐसे… और गहरा… मेरी चूत फाड़ दे… आरव… मैं तेरी रंडी हूँ… सिर्फ तेरी…”
अचानक उसने गति बढ़ा दी। उछल-उछलकर बैठने लगी। स्तन जोर-जोर से उछल रहे थे। मैंने एक निप्पल दाँतों से दबाया तो वो चीख उठी।
“आआआह्ह… काट… और काट… मैं झड़ने वाली हूँ… आरव… साथ में झड़…”
उसकी चूत फिर से सिकुड़ने लगी। मैंने भी कमर उठाकर अंदर तक वीर्य छोड़ दिया। दूसरी बार। गर्म धार उसकी गर्भाशय तक जा रही थी। नैना मेरे सीने पर गिर पड़ी। दोनों हांफ रहे थे।
थोड़ी देर आराम करने के बाद मैंने उसे पलटा। अब वो पेट के बल लेटी थी। मैंने उसके घुटने थोड़े मोड़ दिए और पीछे से लंड फिर से अंदर डाल दिया।
“आह्ह… इस एंगल में… और भी मोटा लग रहा है… ओहह्ह्ह…”
मैंने उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और जोर-जोर से चोदने लगा। दूसरे हाथ से उसके चूतड़ पर थप्पड़ मार रहा था।
“ले… ले मेरी बहन… अपनी गाँड और चूत दोनों हिला… रंडी की तरह…”
“हाँ… हिला रही हूँ… तेरी रंडी… आआह्ह… और तेज़… मुझे पागल कर दे…”
मैंने लंड निकालकर उसकी गाँड के छेद पर रगड़ा। नैना सिहर गई।
“वहाँ… भी डालोगे?”
“हाँ,” मैंने धीमे से कहा। “अगर तू चाहे तो।”
उसने कुछ सेकंड सोचा, फिर बोली, “धीरे से… पहली बार है…”
मैंने थूक लगाकर लंड गीला किया और धीरे-धीरे उसके टाइट गाँड के छेद में धकेलना शुरू किया। नैना ने तकिया पकड़ लिया।
“आआह्ह… दर्द… लेकिन मत रुक… धीरे-धीरे पूरा डाल…”
जब पूरा अंदर चला गया तो मैं रुक गया। उसे आदत होने दी। फिर धीरे-धीरे हरकत शुरू की।
“उम्मम्म… अब अच्छा लग रहा है… आरव… चोद मेरी गाँड… आआह्ह…”
मैंने स्पीड बढ़ा दी। एक हाथ उसकी चूत में उँगलियाँ डालकर क्लिटोरिस सहला रहा था। नैना पागल हो रही थी।
“आआआह्ह… दोनों जगह… साथ में… मैं फिर से झड़ूँगी… आरव… भर दे मुझे…”
मैंने उसके गाँड के अंदर तीसरी बार वीर्य छोड़ दिया। नैना भी जोर से ऐंठते हुए झड़ गई।
हम दोनों बिस्तर पर ढेर हो गए। पसीने से लथ-पथ। कमरे में सेक्स की तेज़ गंध फैली हुई थी।
नैना मेरे बाजू में सर रखकर लेट गई। उँगलियों से मेरे सीने पर घुमाव बना रही थी।
“आरव… हमने आज जो किया… वापस नहीं लिया जा सकता।”
मैंने उसके बाल सहलाते हुए कहा, “मुझे वापस नहीं लेना।”
वो मुस्कुराई। फिर धीरे से बोली, “सुबह तक… और भी करना है मुझे।”
मैंने उसके माथे पर किस किया। “पूरी रात है। जितना चाहे।”
बाहर हल्की रोशनी फटने वाली थी। लेकिन कमरे के अंदर अभी भी अंधेरा था… और भूख बाकी थी।
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