मानसी भाभी की ट्रेनिंग से फाड़ी उनकी चूत!

Bhabhi Sex Story : ट्रेन में मिली 28 साल की मानसी! इंस्टा पर Dirty Nude Pic Chat! पति के बाहर जाने पर बुलाई! फिर शुरू हुई तीन दिनों तक कामक्रीड़ा! सिखाई चोदना!


हेलो दोस्तों, मैं गोलु यादव आप सभी के सामने अपनी कहानी लेकर आया हूँ।


मैं आप लोगों को पहले ही साफ बता दूँ कि ये मेरी रियल स्टोरी नहीं है।


ये स्टोरी मैंने अपनी एक पड़ोस वाली भाभी को दिमाग में बिठाकर लिखी है। मेरी असली भाभी का नाम भी मनसी ही है, लेकिन ये उनकी असली स्टोरी बिल्कुल नहीं है। 


बस उनका जिस्म, उनकी आवाज़, उनकी चाल… सब याद करके मैंने ये काल्पनिक कहानी गढ़ी है। इस कहानी के मुख्य किरदार हैं – विमल यादव (मैं) और मानसी।


तो चलो, कहानी शुरू करते हैं।


ये घटना उस समय की है जब मैं अपने B.Tech. के फर्स्ट ईयर में था। उम्र सिर्फ 19 साल। सरकारी कॉलेज में मैकेनिकल ब्रांच। 2023 की दिवाली की छुट्टियाँ खत्म हो चुकी थीं और मैं कॉलेज वापस जा रहा था।


ट्रेन में बैठे-बैठे अचानक नजर पड़ी एक औरत पर। गोरी, दूध जैसी चमकदार स्किन, बाल खुले हुए, एक साल का बच्चा गोद में। साड़ी नहीं, सिंपल कुर्ती-पैजामा पहने थी, लेकिन उस सिंपल कपड़ों में भी जिस्म का उभार साफ नजर आ रहा था। बातें शुरू हुईं।


 धीरे-धीरे पता चला - नाम मानसी, उम्र 28, पति का नाम पवन, बेटे का नाम पियूष।


पति प्रयागराज में कार शोरूम चलाता है। ससुर गाँव के प्रधान, जेठ सरकारी टीचर, जेठानी घर की। पति दिवाली पर घर नहीं आ पाया था, इसलिए मानसी अकेली ससुराल से लौट रही थी।


बातों-बातों में वो काफी खुल गई। हँसी-मजाक चल रहा था। जब प्रयागराज जंक्शन पहुँचे तो सामान बहुत था और पति लेने नहीं आया था। मैंने मदद की और खुद उनके फ्लैट तक छोड़ने चला गया। फ्लैट पहुँचकर चाय पी।


उस समय 11 बजे थे, मेरी ट्रेन 3:20 की थी। चाय के दौरान नंबर माँगा तो उन्होंने मना कर दिया, लेकिन इंस्टाग्राम ID दे दी। फॉलो किया, बाय बोला और निकल गया।


इंस्टाग्राम पर बातें शुरू हुईं। पहले नॉर्मल – कॉलेज, गाँव, खाना-पीना। फिर धीरे-धीरे टोन बदलने लगी। एक रात मानसी ने पूछा, “तेरी कोई GF है क्या?”


मैंने झूठ बोल दिया, “एक थी, ब्रेकअप हो गया।”


फिर सीधा सवाल आया, “उसके साथ सेक्स हुआ था?”


मैंने एक पूरी झूठी चुदाई की कहानी सुना दी – कैसे मैंने उसे चोदा, कैसे उसकी चूत से पानी निकलवाया, कैसे उसके बूब्स चूसे। कहानी सुनते-सुनते मानसी का जवाब आया:


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“बेहंचोद… मैंने ऊँगली अपनी गीली चूत में डाल रखी है। तेरी कहानी सुनते-सुनते पानी निकल गया।”


मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। मैंने लिखा, “अब अपनी उस हालत की फोटो भेज। मुझे भी मुठ मारनी है।”


दो मिनट में फोटो आ गई। एक फोटो में उसकी मोटी, गोल बूब्स, निप्पल कसे हुए। दूसरी में चूत – थोड़ी बालों वाली, गुलाबी, चमकदार, ऊँगली अंदर घुसी हुई। पानी की चमक साफ दिख रही थी।


मैंने अपना 6 इंच लंबा, 3 इंच मोटा लंड निकालकर मुठ मारते हुए फोटो भेजी। मानसी का जवाब आया:


“ये लंड देखकर मेरी चूत और गीली हो गई। इतना मोटा… इसमें चुदने में मजा आएगा। तेरा लंड मेरी चूत में घुसते ही मेरा पानी निकल जाएगा।”


फिर रोज की बातें सेक्स पर आ गईं। फोन सेक्स शुरू हो गया। मैं बोलता, “अपनी चूत खोलकर दिखा, ऊँगली डाल, पानी निकाल।” वो बोलती, “अपना लंड हिला, मेरे नाम पर झड़।”


कभी-कभी वीडियो कॉल पर भी हो जाता। एक रात उसने अपने बूब्स निचोड़-निचोड़कर दूध की कुछ बूँदें निकालीं और कैमरे के सामने चाट लीं। मेरा तो पानी उसी वक्त निकल गया।


आखिरकार वो दिन आ गया। 24 मार्च 2024। पवन तीन दिन के लिए दिल्ली जा रहा था कार डील के लिए। मानसी ने मेसेज किया:


“24 तारीख को आ जा। पूरे तीन दिन तेरी रंडी बनकर रहूँगी। जितना चाहे चोद, जितनी बार चाहे। बस किसी को बताना मत।”


मैं 5 बजे फ्लैट पहुँचा। दरवाजा खुला और सामने खड़ी थी मानसी – 5 फीट 2 इंच, दूध जैसी गोरी, 36 के बूब्स, 30 की कमर, 34 का मोटा गोल गांड। लाल लोअर और काली टाइट टी-शर्ट में। टी-शर्ट के अंदर ब्रा का हुक साफ नजर आ रहा था। मेरा लंड पैंट के अंदर ही तन गया।


अंदर जाते ही मैंने उसे कसकर गले लगाया और लंबी, गंदी किस की। जीभ अंदर घुसा दी। उसके मुँह से हल्की सी आह निकली। उसने पूछा, “कंडोम लाया?”


मैंने कहा नहीं। पास के मेडिकल से कंडोम का पैकेट और एक पायल का जोड़ा लेकर वापस आया। वापस आते ही मैंने उसे दीवार से सटा दिया। दोनों हाथ उसके बूब्स पर रख दिए।


पहली बार किसी औरत के बूब्स छुए थे। नरम, भारी, गरम। निचोड़ते ही उसकी साँस तेज हो गई।


उसी समय पियूष रोने लगा। मानसी ने मेरे सामने ही एक बूब्स टी-शर्ट से बाहर निकाला और बच्चे को दूध पिलाने लगी। निप्पल बच्चे के मुँह में था, लेकिन उसकी नजर मुझ पर।


उसने दूसरे बूब्स की तरफ इशारा किया, “आ जा… तू भी पी ले।”


मैं घुटनों के बल बैठ गया और दूसरा निप्पल मुँह में ले लिया। मीठा, गर्म दूध। मैं जोर-जोर से चूसने लगा।


मानसी ने मेरे बाल पकड़कर कहा, “आराम से चूस बेहंचोद… दाँत मत लगा। ऐसे चूस जैसे बच्चा चूसता है।”


दूध पीते-पीते मैंने उसकी टी-शर्ट और ब्रा पूरी तरह उतार दी। अब दोनों बूब्स मेरे सामने थे। मैं एक को चूस रहा था, दूसरे को निचोड़ रहा था। मानसी की आँखें बंद हो गईं। बच्चा सो गया तो उसे सोफे पर लिटा दिया।


अब मैं पागलों की तरह उसके पूरे जिस्म पर टूट पड़ा। गर्दन चाटी, कॉलरबोन चाटी, पेट चाटा। उसकी ढोडी पर जीभ फेरते हुए बोला, “तेरी ये काली ढोडी देखकर लंड और सख्त हो गया।”


फिर लोअर और पैंटी एक झटके में खींच ली। सामने आ गई उसकी चिकनी, थोड़ी बालों वाली चूत। पहले से ही गीली।


मैंने कहा, “अब मेरे कपड़े तू निकाल।”


मानसी झुक गई और मेरी पैंट-अंडरवियर एक साथ नीचे कर दी। लंड उसके चेहरे के सामने तनकर खड़ा था। उसने एक बार चाटा और बोली, “मोटा है साले… आज मेरी चूत फाड़ देगा।”


मैंने उसे बेडरूम में घसीटा। वो बिस्तर पर लेट गई, टाँगें फैला दीं और बोली, “लंड निकाल और डाल। देर मत कर।”


मैंने कंडोम पहना, लंड को उसकी चूत पर सेट किया। एक धक्का मारा – आधा ही घुसा।


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मानसी चिल्लाई, “आह्ह… धीरे!” दूसरे धक्के में पूरा अंदर चला गया। उसकी चूत ने लंड को कस लिया। मैं धक्के लगाने लगा। पाँच मिनट भी नहीं हुए दोनों का पानी निकल गया।


मानसी हँसते हुए बोली, “बड़ा कच्चा खिलाड़ी निकला तू। इतनी जल्दी?”


मैंने सच बता दिया, “आज मेरा पहला सेक्स है। कोई GF कभी नहीं थी। सब झूठ बोला था।”


मानसी की आँखें चमक उठीं। उसने मुझे अपनी छाती से चिपका लिया और बोली, “तो आज से मैं तेरी ट्रेनर हूँ। तुझे सिखाऊँगी कैसे एक औरत को पागल करके चोदते हैं। आज रात भर चोदूँगी तुझे।”


हम नंगे ही लिपटे पड़े बातें करते रहे। सात बज गए तो मानसी उठी, मेरा अंडरवियर और टी-शर्ट पहन ली, बच्चे को लेकर पड़ोसन के पास चली गई।


मानसी 9 बजे वापस लौटी। हाथों में बाजार से लाया खाना था - चावल, दाल, सब्जी और दो रोटी। बच्चे को मेरे पास सौंपते हुए बोली, “रख इसे, मैं किचन में जा रही हूँ।”


मैंने बच्चे को गोद में लिया। वो हँस रहा था। मानसी किचन में चली गई। थोड़ी देर बाद वो प्लेट लेकर आई। हम दोनों एक-दूसरे को हाथों से खाना खिलाने लगे। बच्चा साइड में खेल रहा था।


मैंने हँसते हुए पूछा, “मेरा अंडरवियर पहनकर गई थी… किसी को शक तो नहीं हुआ?”


मानसी मुस्कुराई और बोली, “शक क्या… मुझे तो ऐसा लग रहा था जैसे मेरी चूत में तेरा लंड घुसा हुआ है और तू मुझे चोद रहा है। हर कदम पर वो अंडरवियर मेरी चूत से रगड़ रहा था। गीली हो गई थी मैं।”


खाना खत्म होने के बाद वो बर्तन धोने किचन में गई। मैं पीछे-पीछे चला गया। उसके गांड के ठीक पीछे खड़ा होकर गर्दन पर किस करने लगा। मेरा लंड उसके गांड से टकरा रहा था।


मानसी गरम हो गई। बर्तन धोते हुए पीछे मुड़कर बोली, “जब तक मैं बर्तन धो रही हूँ… मेरी गांड चाट। जोर से चाट बेहंचोद।”


मैंने तुरंत उसका लोअर और मेरा अंडरवियर नीचे खींच दिया। सामने आ गया उसका दूध जैसा गोरा, मोटा, गोल गांड। दो गोल पहाड़। मैं घुटनों के बल बैठ गया और दोनों गालों को फैलाकर बीच की दरार में जीभ घुसा दी।


मानसी की आवाज़ निकली, “आह्ह… ऐसे ही… और अंदर। गांड की छेद को चाट साले।”


मैं जीभ अंदर-बाहर करने लगा। उसके मोटे जांघों को भी चाट रहा था। मानसी ने फिर आदेश दिया, “अब चूत में ऊँगली डाल।”


मैंने दो ऊँगली उसकी गीली चूत में घुसा दी और आगे-पीछे करने लगा। मानसी बर्तन छोड़कर सिंक पकड़ गई। उसका शरीर काँपने लगा। कुछ देर बाद वो झड़ गई।


झड़ते समय उसने मेरे मुँह को अपनी दोनों जांघों के बीच दबा लिया और अपना सारा पानी मेरे चेहरे पर बहा दिया।


गर्म, नमकीन पानी। मेरा लंड पत्थर जैसा तन गया।


मानसी मुड़ी, मेरे लंड को देखा और तुरंत घुटनों के बल बैठ गई। लंड को हाथ में लेकर हिलाने लगी। मैंने कहा, “मुँह में ले।”


वो तुरंत मुँह में ले गई। आज पहली बार किसी औरत ने मेरे लंड को चूसा था। मानसी पोर्न स्टार की तरह चूस रही थी – गहरी, गीली, आवाज़ निकालते हुए। गला तक ले जा रही थी।


पाँच मिनट भी नहीं हुए मेरा पानी निकल गया। पूरा माल उसके मुँह में गया। उसने कुछ निगला, बाकी अपने चेहरे पर निकालकर पूरे फेस पर रगड़ने लगी।


“देख… तेरा वीर्य मेरे चेहरे पर कितना अच्छा लग रहा है,” वो हँसते हुए बोली।


हम दोनों उठे और खुद को साफ किया। मानसी ने फिर मेरा अंडरवियर पहन लिया, लेकिन लोअर नहीं पहना। ऊपर सिर्फ टी-शर्ट, नीचे मेरी चड्डी। दस बजे तक सारे काम निपटाकर बच्चे को और मुझे लेकर बेडरूम में ले गई।


बिस्तर पर लेट गए। बच्चे को बीच में सुला दिया। बातें शुरू हुईं।


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मानसी बोली, “आज से मुझे सिर्फ मानसी बोल। भाभी मत बोल।”


फिर उसने बताया कि उसकी जेठानी एकता गाँव में कई गैर मर्दों से चुदती है।


एकता ने ही कहा था, “तू भी किसी अनजान मर्द से चुद ले, मजा आएगा।” उसी बात ने मानसी के अंदर ये ख्वाहिश जगाई थी कि किसी कम उम्र के लड़के का पहला सेक्स बने।


“तू बिलकुल वैसा ही मिला,” वो बोली। “अनजान, सुरक्षित, और कुंवारा। मेरी सारी इच्छा पूरी हो गई।”


ग्यारह बज गए थे। बच्चा अभी भी नहीं सोया था। मानसी हँसकर बोली, “आज रात इसकी माँ चुदने वाली है… ये कैसे सोए?”


दोनों हँस पड़े।


मानसी उठी और दो मिनट में एक गिलास लेकर वापस आई। “दूध पिएगा?”


मैं उठा और उसके बूब्स पकड़ने बढ़ा। वो हट गई, “गिलास में निकालकर दे रही हूँ… पियो।”


मैंने कहा, “नहीं… मैं खुद निकालूँगा।”


मानसी मुस्कुराई और गाय बन गई। मैंने उसकी टी-शर्ट उतारी, दोनों बूब्स पकड़े और दूध दुहने लगा। गिलास में थोड़ा दूध निकाला, पिया, फिर बाकी सीधे निप्पल से चूस लिया। बच्चा तब तक सो चुका था।


अब मैंने मानसी को बिस्तर पर लिटा दिया और सर से पाँव तक चूमने लगा। होठों को ऐसे चूसा जैसे पका आम हो। गर्दन पर दाँत लगाए। बूब्स को दोनों हाथों से दबा-दबाकर चूसा।


पेट पर उसकी छोटी काली ढोडी को जीभ से चाटा - शहद जैसी मिठास। मोटी जांघें रुई जैसी नरम थीं।


जब मैं चूत के पास पहुँचा तो मानसी ने मेरे बाल पकड़कर कहा, “अब चाट… जोर से चाट मेरी रंडी चूत को।”


आगे की कहानी :- "मानसी भाभी की ट्रेनिंग से फाड़ी उनकी चूत! 02"

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