कामुक भाभी से प्यार और चुदाई कि आग

मेरे भैया की शादी हो चुकी थी। मेरे छोटे होने के कारण भाभी मुझसे बहुत स्नेह रखती थी। यूँ तो वो मुझसे सिर्फ़ पांच साल ही बड़ी थी। सच पूछो तो उसके पृष्ठ-उभार मुझे बहुत लुभाते थे, बस ! लुभाते ही थेपर भाभी के गोल गोल सुघड़ चूतड़ों को दबाने की इच्छा कभी नहीं हुई।


भाभी अधिकतर टुक्की वाला ब्लाऊज पहनती थी। उनके कठोर पर्वत मुझे बहुत सुन्दर लगते थे, पर उन्हें मसलने जैसी इच्छा कभी नहीं हुई। उनके चिकने बदन पर मेरी दृष्टि फ़िसल फ़िसल जाया करती थी, पर ऐसा नहीं था कि मैं उस चिकने बदन को अपनी बाहों में लेकर उन्हें चूम लूँ !


बस हम दोनों एक दूसरे के साथ साथ खेलते थे। मैं उनके साथ खाना बनवाने में मदद करता था, वॉशिन्ग मशीन में कपड़े धो देता था और भी बहुत से काम कर देता था। एक दिन अचानक ही ये सारी मर्यादायें टूट कर छिन्न भिन्न हो गई। दोनों के मन में काम भावनायें जागृत हो उठी





उस दिन सारा काम निपटाने के पश्चात हम दोनों यूँ ही खेल रहे थे, कि मन में ज्वाला सुलग उठी। भाभी का टुक्की वाला ब्लाऊज कील में फ़ंस कर फ़ट गया और सामने से चिर गया। भाभी का एक कठोर स्तन उभर कर बाहर निकल आया। मेरी नजरें स्तन पर ज्यों ही पड़ी, मैं देखता ही रह गया, सुन्न सा रह गया।


भाभी एक दम सिहर कर दीवार से चिपक गई। मैं अपनी आंखे फ़ाड़ फ़ाड़ कर उन्हें देखने लगा। भाभी सिहर उठी और अपने हाथों को अपने नंगे स्तन के ऊपर रख कर छुपाने लगी। मैं धीरे धीरे भाभी की ओर बढ़ने लगा। वो सिमटने लगी। मेरा एक हाथ उसके कठोर स्तनों को छूने के लिये बढ़ गया।


नहीं भैया, नहींमत छूना मुझे !


येयेकितने चमक दार, कितने सुन्दर है…”


मेरी अंगुलियों ने ज्यों ही उनके स्तन छुये, मेरे बदन में जैसे आग लग गई। भाभी तुरन्त झुक कर मेरी बगल से भाग निकली, और दूर जाकर जीभ निकाल कर चिढ़ाने लगी। मैं स्तब्ध सा उन्हे देखता रह गया। जाने क्यूँ इस घटना के बाद मैं चुप चुप सा रहने लगा। मेरे दिल में भाभी के लिये ऐसे वैसे वासना भरे विचार सताने लगे। शायद जवानी का तकाजा था, जो मेरे मन को उद्वेलित कर रहा था। शाम को मैं छत पर टहल रहा था कि भाभी वहां गई।


क्या बात है, आजकल तुम बहुत गुमसुम से रहने लगे हो?”


नहींहां वोओह क्या बताऊ मैं…!”


भैया मेरी कसम है तुझेजो भी हो, अच्छा या बुराकह दो। मन हल्का हो जायेगा।


बात यह है कि भाभीअब कैसे बताऊँ…”


मैंने कसम दी है नाचलो अपना मुँह खोलो…” शायद भाभी को मेरी उलझन मालूम थी।


ओह कैसे कहूँ भाभी,… आप मुझे बहुत अच्छी लगने लगी हैं !


तो क्या हुआतुम भी देखो ना मुझे कितने अच्छे लगते हो, है ना?” भाभी की नजरें झुक गई।


पर शायदमैं आपको प्यार करने लगा हूँ…”


चुपक्या कहते होमैं तुम्हारी भाभी हूँ…” सुनकर भाभी ने मुस्करा कर कहा


कसम दी थी सो बता दियापर मैं क्या करूमैं जानता हूँ कि तुम मेरी भाभी…”


भैया, अपने मन की कहूँप्यार तो मैं भी तुम्हे करती हूँभाभी ने भी झिझकते हुये कहा।


क्या कहती हो भाभी…”


भाभी ने धीरे से मेरे सीने पर अपना सर रख दियामेरी सांसें तेज हो उठी। तभी भाभी मुड़ कर तेजी से भाग कर सीढ़ियाँ उतर गई। मैं भौचक्का सा उन्हें देखता रह गया। यह क्या हो गया? भाभी भी मुझसे प्यार करती हैं !!! और फिर बड़े भैया? सभी कुछ गड-मड हो रहा था।


 मैं छत से नीचे उतर आया। भाभी मुझे देख कर खुशी से बार बार मुस्करा रही थी जैसे उनकी कोई मन की मुराद पूरी हो गई हो। मैं चुपचाप अपने कमरे में चला आया। कुछ ही देर में भाभी भी वहीं पर गई। मैं बिस्तर पर लेटा हुआ था, भाभी मेरे पास बैठ कर मेरे बालों को सहलाने लगी।


सत्या, तुम तो बहुत प्यारे हो, तुम्हें देख कर मुझे तो बहुत प्यार आता है !


भाभी…”


ना भाभी नहीं, हर्षिता कहो, मेरा नाम लो…” भाभी ने अपनापन दिखाते हुये कहा।


इन सभी प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद मुझे ध्यान ही नहीं रहा कि मेरा लण्ड बेहद कड़ा हो चुका था और पजामे में तम्बू जैसा तना हुआ था। भाभी ने मेरा कड़क लण्ड देखा तो उसके मुख से आह निकल गई। वो उठ कर चल दी। आज तो भाभी का मन बाग बाग हो रहा था।


रात को भी भाभी ने मुझे खाने के बाद मिठाई भी खिलाई, फिर मेरा चुम्मा भी लिया। अब मेरे दिल में भाभी के शरीर की सम्पूर्ण रचना बस गई थी। रह रह कर मुझे भाभी को चोदने को चोदने का मन करने लगा था।


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कल्पना में भाभी की रस भरी चूत को देखता, उनके भरी हुई उत्तेजक चूंचियों के बारे में सोचने लगता था। भैया नाईट शिफ़्ट के लिये जाने वाले थे। मैं भी अपने कमरे में कम्प्यूटर पर काम करने लगा। भैया के जाने के बाद भाभी मेरे कमरे में चली आई।


भाभी, मम्मी-पापा सो गये क्या?”


हां सो गये, भैया के जाते ही वे भी सो गये थे, समय तो देखो ग्यारह बज रहे हैं।


ओह हाँ, मैं भी अब काम बन्द करता हूँ, भाभी एक चुम्मा दे दो!


मैं उठ कर बिस्तर पर बैठ गया। भाभी ने लाईट बन्द कर दी और कमरा भी अन्दर से बन्द कर दिया।


अब चाहे कितनी भी बाते करो, कोई डर नहीं !


भाभी आप कितनी सुंदर हैं, आपके प्यारे नरम होंठ बार बार चूमने को मन करता है !


सचतुम भी बहुत अच्छे होमेरे दिल में बस गये हो।


मुझसे बहुत प्यार करती हो ना…?”


हमारी प्यार भरी बातें बहुत देर तक चलती रहीं। मेरा दिल बहुत खुश थाभाभी और मैं बिस्तर पर लेट चुके थेभाभी ने अपने गीले होंठ एक बार फिर मेरे गीले होठों से चिपका दिये। मेरा डण्डा तन गया था। भाभी मेरी पीठ को सहलाते हुये सामने पेट पर हाथ ले आई।


भाभी के कड़े स्तन मेरी छाती से रगड़ खा रहे थे। वो बार बार अपनी चूंचियाँ मेरी छाती पर दबा दबा कर रगड़ रही थी। मुझे लगा कि जैसे मैं भाभी को सचमुच में प्यार करने लगा हूँ। मैंने अपने प्यार का इजहार भी कर दिया,”भाभी सच कहूँ तो मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ, तुम्हारे बिना अब नहीं रहा जायेगा !


आह, मेरे सत्या, तुमने तो मेरे दिल की बात की बात कह दी, मैं भी कैसे रह पाऊंगी तुम्हारे बिना… ?!!”


पर भाभी, बड़े भैया का क्या होगा…?”


बड़े भैया अपनी जगह है, अपन दोनों को तो बस प्यार करना है सो करते रहेंगे !


भाभी के हाथ मेरे शरीर पर इधर उधर फ़िसल कर मुझे रोमान्चित करने लगे थे। मेरी छाती पर सर रख कर वो लेट गई थी और प्यार भरी बातें करने लगी थी। क्या वो प्यार की प्यासी थी, या उन्हें शारीरिक तृप्ति चाहिये थी ? पर कुछ भी हो, मैं तो बहुत खुश था।


भाभी अपने एक एक अंग को मेरे शरीर के ऊपर दबा रही थी, सिसक रही थीचुम्बनों से मेरा मुख गीला कर दिया था। लण्ड मेरा फ़ूलता ही जा रहा था। लग रहा कि बस भाभी की चिकनी चूत को मार ही दूँ। भाभी के हाथ जैसे कुछ ढूंढ रहे थेऔरऔर यह क्याढूंढते हुए उनका हाथ मेरे तने हुए लण्ड पर गया।


उन्होंने उसे छू लियामेरा दिल अन्दर तक हिल गया। दो अंगुलियों से मेरे लण्ड को पकड़ लिया और हिलाने लगी। मुझे कुछ बचैनी सी हुईपर मैं हिल ना सकाभाभी ने मेरे होंठों में अपनी जीभ डाल दी और मुझे कस कर चिपका लिया। मुझे एक अजीब सी सिरहन दौड़ गई।


मेरे हाथ अपने आप भाभी की कमर पर कस गये। मेरा बड़ा सा लण्ड अचानक भाभी ने जोर से दबा दिया। मेरे मन में एक मीठी सी वासनायुक्त चिंगारी भड़क सी उठी। लण्ड मेरा फ़ूलता ही जा रहा था। लग रहा कि बस भाभी की चिकनी चूत को मार ही दूँ।


भाभी के हाथ जैसे कुछ ढूंढ रहे थेऔरऔर यह क्याढूंढते हुए उनका हाथ मेरे तने हुए लण्ड पर गया। उन्होंने उसे छू लियामेरा दिल अन्दर तक हिल गया। दो अंगुलियों से मेरे लण्ड को पकड़ लिया और हिलाने लगी। मुझे कुछ बचैनी सी हुईपर मैं हिल ना सका


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भाभी ने मेरे होंठों में अपनी जीभ डाल दी और मुझे कस कर चिपका लिया। मुझे एक अजीब सी सिरहन दौड़ गई। मेरे हाथ अपने आप भाभी की कमर पर कस गये। मेरा बड़ा सा लण्ड अचानक भाभी ने जोर से दबा दिया। मेरे मन में एक मीठी सी वासनायुक्त चिंगारी भड़क सी उठी।


भाभी, आह यह कैसा आनन्द रहा हैप्लीज और जोर से दबाओऽऽ !मैं सिसक उठा।


आह मेरे भैयाक्या मस्त है… ” भाभी भी अपनी सीमा लांघती जा रही थी।


भैया, अपना पजामा उतार दो !


मेरे दिल यह सुनते ही बाग बाग हो उठाआखिर भाभी का मन डोल ही गया। अब भाभी को चोदने का मजा आयेगा।


नंगा होना पड़ेगामुझे तो शरम आयेगी !


चल उतार ना… “


भाभीमुझसे भी नहीं रहा जाता हैमुझे भी कुछ करने दो !


भाभी की हंसी छूट गई


किसने मना किया हैकोई ओर होता तो जाने अब तक क्या कर रहा होता !


मैं बताऊँ कि क्या कर रहा होता?”


हूँअच्छा बताओ तो…”


तुम्हें चोद रहा होतातुम्हारी चूंचियों को मसल रहा होता !


हाय ये क्या कह दिया सत्या… ” उन्होंने मुझे चूम लिया और अपना पेटीकोट ऊपर उठा लिया।


ले मैं अपना पेटीकोट ऊपर उठा लेती हूँ, तू अपना पजामा नीचे सरका ले !


नहीं भाभी, अब तो अपने पूरे कपड़े ही उतार दोमैं भी उतार देता हूँ


मैंने बिस्तर से उतर कर अपने सारे कपड़े उतार दिये और बत्ती जला दी। भाभी भी पूरी नंगी हो चुकी थी। पर लाईट जलते ही वो अपने बदन को छिपाने लगी। मैं भाभी के बिलकुल सामने लण्ड तान कर खड़ा हो गया। एक बारगी तो भाभी ने तिरछी नजरों से मुझे देखा, फिर लण्ड को देखा और मुस्करा उठी। वो जैसे ही मुड़ी मैंने उन्हें पीछे से दबोच लिया। मेरा लण्ड उनके चूतड़ों की दरार में समाने लगा।


क्या पिछाड़ी मारेगा…”


भाभी, आपकी गाण्ड कितनी आकर्षक हैएक बार गाण्ड चोद दूंगा तो मुझे चैन जायेगाहाय कितनी मस्त और चिकनी है !


तो तेल लगा दे पहले…”


मैंने तेल ले कर उसकी गाण्ड में लगा दिया और अपनी अंगुली भी गाण्ड में घुसा दी।


अंगुली नहीं, लण्ड घुसा…” फिर हंस दी।


भाभी पलंग पर हाथ रख कर घोड़ी सी बन गई। मैंने भाभी के चूतड़ को चीर कर तेल से भरे छेद पर अपना लण्ड रख दिया।


आगे कि सेक्स स्टोरी अगले पार्ट में :- कामुक भाभी से प्यार और चुदाई कि आग-2


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