भिखारियों से आंटी की चूत फड़वाई! और हुई प्रेग्नेंट!


Vasna : सुपारी देकर Aunty की चूत भिखारियों से फँड़वाई! दिन-दहाड़े तीन लंडों से चुदवाई उनकी चुत-गांड! माल अंदर डलवाकर आंटी हुई प्रेग्नेंट! सीन का बना XXX Video!


दोस्तों, पहले की तरह ही आज अपनी गाँव की दूसरी बार सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ। मेरा नाम गौरव है और मैं लखनऊ का रहने वाला हूँ।


मैं एक गैर-जिम्मेदार लड़का हूँ जो अपने गाँव की कच्ची-सच्ची हवस भरी कहानियाँ लोगों तक पहुँचाना चाहता हूँ।


हमारा गाँव काफी रूढ़ीवादी था, लेकिन बावजूद इसके कई मर्दों ने दो-दो शादियाँ की हुई थीं। तीन सौ से ज्यादा परिवार। किसी औरत के तीन बच्चे होते तो उसे बाँझ समझा जाता, लेकिन मर्दों के पास नौकरी न हो तो भी बच्चे खूब पैदा होते।


पड़ोस के मिश्राजी के चार बेटे, चार बहुएँ, नौ पोतियाँ और छह पोते। दूसरी तरफ कई ब्राह्मण लड़कियाँ पड़ोसी मुस्लिम गाँव के युवकों से शादी करके इस्लाम अपना चुकी थीं और खूब बच्चे दे रही थीं।


मेरी मौसी की दूसरी लड़की ने भी जुनैद नाम के लड़के से निकाह कर लिया और उनके सात बच्चे हो गए।


मैं जब तक जवान नहीं हुआ, गाँव में खूब चुदाई देखी। घर के बगल वाले बाग में बूढ़े ताऊ-ताई की, सरसों के खेत में, जंगल में… हर जगह।


मेरे गाँव में रहने वाली देसी प्रीति आंटी एक छोटे से फूस के घर में रहती थीं। उम्र करीब बयालीस-तैंतालीस। फिगर 40-36-38।


पूरा सांवला, चमकदार बदन। भारी-भरकम 40 के बूब्स जो नाइटी में लटके रहते, मोटी कमर और पीछे 38 की गोल-मटोल, लहराती हुई गांड। दो लड़कियाँ थीं, दोनों माँ जैसी ही भरी हुई और भाव खाती हुई।


प्रीति आंटी फूटी आँखों से भी नहीं सुहाती थीं। गाँव में सबसे ज्यादा उलझने वाली। पीछे से देखने पर एकदम देसी रंडी लगतीं। उनका व्यवहार पूरी तरह चुदक्कड़ औरत वाला हो चुका था। नाजायज संबंध कितने हैं, अंदाजा लगाना मुश्किल।


उनका मरियल पति माइनिंग में काम करता था और महीने में एक-दो बार ही आता। इसलिए गाँव की कई औरतों की तरह प्रीति आंटी की चूत भी कई मर्दों से खुली हुई थी।


खेतों में इतनी चुदाई होती थी कि शायद ही कोई देसी औरत बची हो जिसके भोसड़े न बने हों। ये Desi Sex की Hindi Sex Story आप Garam kahani पर पढ़ रहे है।


एक दिन मैं किसी काम से अपने गाँव के एक साथी के घर आया। थोड़ी देर बाद प्रीति आंटी हरी नाइटी पहने दिखाई दीं। मुँह दुपट्टे से ढके हुए जल्दी-जल्दी जा रही थीं।


मेरे दोस्त के घर के पास एक झाड़ी थी जहाँ उनके घर की औरतें सलवार उठाकर मूतती थीं। जगह हमेशा गीली और बदबूदार रहती। शर्म तो जैसे मर चुकी थी उन औरतों की।


प्रीति आंटी के जाने के कुछ देर बाद मैं भी पीछे-पीछे निकल लिया। उन्हें खोजने के बहाने गाँव में घूम रहा था। तभी देखा – रास्ते के किनारे उन्होंने नाइटी उठाई और पेशाब करने लगीं।


मूत की धार जमीन पर पड़ रही थी। जाते-जाते किसी आवारा कुत्ते को लात भी मार दीं। मैं झाड़ियों में छिपकर देखता रहा। उनकी मोटी सांवली जांघें, नाइटी के नीचे से झलकती गांड… लंड तन गया।


आगे बढ़ने के बाद मैं भी बढ़ा। खेत के मेंड़ के पास एक मजदूर सोया हुआ दिखा। काफी गंदा, फटे-पुराने कपड़े, दाढ़ी बढ़ी हुई। मेरे हाथ में पानी की बोतल थी। उसने पानी माँगा तो मैंने पिलाया।


कपड़ों के अंदर से लोहे की सलाख जैसी मोटी, लंबी लंड की शक्ल साफ दिख रही थी। तुरंत दिमाग में गंदे विचार आए।


मैंने उसे पास बुलाया और धीरे से कहा,


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“एक काम कर देगा? उस औरत को - जो अभी तेरे कपड़ों पर थूक कर और लात मारकर गई है - इतना चोद कि उसकी सारी हवस निकल जाए। प्रेग्नेंट तक कर दे। सौ रुपये दूँगा।”


उसने आँखें गड़ाईं, “कौन सी औरत?”


“वही हरी नाइटी वाली रांड। अभी गई है।”


भिखारी मुस्कुराया। दाँत गंदे थे। “अभी जाता हूँ उस रांड को चोदने।” उसने लरखड़ाते हुए अपनी देसी दारू की बोतल उठाई और चल दिया। मैं पीछे-पीछे गया।


थोड़ी दूर पर प्रीति आंटी नाइटी उठाए हुए गांड से टट्टी निकाल रही थीं। भिखारी ने पीछे से एक जोरदार लात मारी। आंटी चीखते हुए औंधे मुँह गिर पड़ीं। नाइटी ऊपर तक खिसक गई।


उनकी मोटी, काली गांड और गीली चूत दिन की रोशनी में नंगी हो गई।


भिखारी ने तुरंत अपना फटा पैजामा नीचे किया। मोटा, काला, नसों वाला लंड बाहर निकल आया - कम से कम सात-सात इंच लंबा और काफी मोटा। उसने बिना किसी देरी के लंड आंटी की गांड की दरार पर रगड़ा और एक झटके में चूत में ठेल दिया।


“आह्हhhhh… कौन है… छोड़… दर्द… आह्ह्ह…”


प्रीति आंटी रोती-चिल्लाती रहीं लेकिन भिखारी बेपरवाह होकर धक्के मारने लगा। फच-फच-फच की आवाज खेत में गूंजने लगी। आंटी की मोटी गांड उसके हर धक्के से थरथरा रही थी।


40 के भारी बूब्स जमीन पर दबकर फैल रहे थे।  ये Antarvasna Chudai Ki Kahani आप Garam kahani पर पढ़ रहे है।


“रांड… साली… लात मारती है… अब ले मेरे लंड… आह्ह्ह…” भिखारी गाली देते हुए पेल रहा था।


आंटी पहले तो छटपटा रही थीं, लेकिन धीरे-धीरे उनकी कराहें बदलने लगीं। दर्द के साथ मजा भी मिल रहा था। वे गांड उछाल-उछालकर पीछे की तरफ धकेलने लगीं।


“आह्ह्ह… जोर से… चोदो… हरामी… मेरी चूत फाड़ दे… आह्ह्ह…”


भिखारी ने उनके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और कुतिया की तरह और तेज चोदने लगा। एक हाथ से उनकी गांड के छेद में उंगली घुसा दी और जोर-जोर से अंदर-बाहर करने लगा।


“आह्हhhhh… गांड में उंगली… चूत में लंड… दोनों… फट रही है… आह्ह्ह…”


मैं झाड़ियों के पीछे खड़ा अपना लंड भींच रहा था। दिन के उजाले में एक भिखारी मेरी गाँव की प्रीति आंटी को रंडी की तरह चोद रहा था। उनकी चूत से झाग निकल रहा था।


लंड अंदर-बाहर होते समय खून की हल्की रेखा भी दिख रही थी – इतना जोर से पेल रहा था।


लगभग पच्चीस-तीस मिनट लगातार चोदने के बाद भिखारी ने आंटी को पलटा। अब वे चित लेटी थीं। भिखारी ने उनकी दोनों टांगें फैलाकर कंधों पर चढ़ा लीं और मिशनरी में और गहराई तक ठेलने लगा।


आंटी के 40 के बूब्स हवा में उछल-उछल रहे थे। भिखारी उन्हें मसल-मसलकर काट रहा था।


“ले रांड… ले अपने बड़े बूब्स… आज तेरी चूत का भोसड़ा बना दूँगा… आह्ह्ह…”


“हाँ… बना… भोसड़ा बना दे… चोदो… हरामी भिखारी… मेरी चूत फाड़ दे… आह्ह्ह… और जोर से…”


आंटी अब पूरी तरह खुल चुकी थीं। वे खुद अपनी गांड उठा-उठाकर लंड ले रही थीं। उनकी चूत इतनी गीली हो चुकी थी कि हर धक्के पर छप-छप की जोरदार आवाज आ रही थी।


भिखारी ने उनके गले पर हाथ रखा और हल्का दबाते हुए पेलता रहा।


मैंने देखा कि आंटी की आँखें पलट रही हैं। वे बार-बार झड़ रही थीं। पानी की धार उनके लंड और जांघों पर बह रही थी। भिखारी नहीं रुका। एक घंटे से ज्यादा समय तक वह पागलों की तरह उन्हें चोदता रहा।


आखिर में उसने आंटी की टांगें और चौड़ी कीं, पूरा लंड जड़ तक ठेल दिया और जोर से गुर्राते हुए अपना गाढ़ा, गन्दा वीर्य उनकी चूत की गहराई में उड़ेल दिया।


इतना ज्यादा कि बाहर तक बहकर जमीन पर गिरने लगा।


भिखारी ने लंड निकाला। आंटी की चूत पूरी तरह खुल चुकी थी – लाल, सूजी हुई, खून और वीर्य से लथपथ। भोसड़ा सा बन गया था। भिखारी ने अपना गन्दा, खून लगा लंड आंटी के मुँह के पास ले जाकर कहा, “चूस रांड… साफ कर।”


प्रीति आंटी ने आँखें खोलीं। बिना किसी हिचक के उन्होंने लंड मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगीं। लार, खून और वीर्य मिलाकर उनके मुँह से बह रहा था। भिखारी उनके बाल पकड़कर मुँह चोदने लगा।


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“ग्लक… ग्लक… उम्म…” ये XXX Aunty Ki Chudai Ki Kahani आप Garam kahani पर पढ़ रहे है।


कुछ देर बाद भिखारी ने लंड निकाला और आंटी के खुले मुँह और चेहरे पर खड़ा होकर मूतने लगा। गरम पेशाब की धार उनके चेहरे, बालों, बूब्स और खुली चूत पर पड़ रही थी।


आंटी छटपटाईं लेकिन भिखारी ने उनकी गांड पर पैर रखकर दबाए रखा। पूरा पेशाब निकालने के बाद उसने एक बार फिर लंड उनकी चूत में डालकर कुछ जोरदार धक्के मारे और बाकी बचा हुआ माल भी अंदर छोड़ दिया।


भिखारी उठा। अपना फटा पैजामा पहना और जाते-जाते आंटी की गांड पर एक जोरदार थप्पड़ मारा। “रांड… अब पेट में मेरा बच्चा पाल… सौ रुपये बाद में ले लूँगा।”


प्रीति आंटी वहीं मिट्टी, पेशाब, वीर्य और खून में सनी नंगी पड़ी रहीं। बेहोशी की हालत में। उनकी चूत से खून और सफेद द्रव की धार लगातार बह रही थी।


40 के बूब्स पर पेशाब की बूंदें चमक रही थीं। गांड के छेद से भी हल्का खून रिस रहा था।


मैं झाड़ियों से बाहर निकला। नजारा देखकर मेरा लंड और सख्त हो गया।


मैंने फोन निकाला और उस बेहोश पड़ी हुई रांड आंटी के कई नंगे फोटो और वीडियो बना लिए - खुली हुई चूत, खून लगा भोसड़ा, चेहरे पर पेशाब के निशान… सब कुछ।


भिखारी चला गया। प्रीति आंटी वहीं खेत की मेंड़ पर नंगी पड़ी रहीं। सूरज ढलने लगा था। उनके शरीर पर पेशाब सूखकर सफेद परत बन गई थी। चूत से खून और गाढ़ा वीर्य मिलकर मिट्टी में धंस रहा था।


कभी-कभी उनकी जांघें हल्की सी काँप जातीं। होश तो आ चुका था लेकिन शरीर में हिलने की ताकत नहीं बची थी।


मैं और करीब गया। उनकी खुली हुई, फटी हुई चूत को पास से देखा। होंठ पूरी तरह सूज गए थे, अंदर का गुलाबी मांस बाहर निकला हुआ था। भोसड़ा सच में बन चुका था।


मैंने एक लात से उनकी जांघ और फैलाई और फोन से क्लोज-अप वीडियो बनाया। फिर उनके मुँह में उंगली डालकर खोला - अंदर अभी भी भिखारी के लंड का स्वाद और पेशाब की गंध बाकी थी।


रात होते-होते आंटी ने खुद को खींचकर एक पेड़ के नीचे कर लिया। नाइटी को समेटने की कोशिश की लेकिन शरीर इतना दर्द कर रहा था कि वे सिर्फ कराह पाईं।


“आह्ह्ह… हरामी… चूत फाड़ दी… गांड भी फाड़ दी…”


मैं चुपचाप वापस गाँव लौट आया।


अगली सुबह भिखारी फिर से उसी जगह आया। इस बार अकेले नहीं। ये XXX Desi Sex Ki Free Hindi Sex Kahani आप Garam kahani पर पढ़ रहे है।


साथ में दो और मजदूर थे - एक दुबला-पतला लेकिन लंड लंबा, दूसरा मोटा, काला और जानवरों जैसा। तीनों के हाथ में देसी दारू की बोतलें थीं। मैंने दूर से देखा तो समझ गया कि आज असली खेल होने वाला है।


प्रीति आंटी अभी भी वहीं थीं। उन्होंने किसी तरह नाइटी पहन ली थी लेकिन चल नहीं पा रही थीं। चूत में दर्द की वजह से टांगें फैलाकर बैठे हुए थीं।


भिखारी ने उन्हें देखते ही हँसते हुए कहा, “रांड, कल तो मजा आ गया। आज तेरी दोनों होल को तीन लंड से भरेंगे।”


आंटी ने डरते हुए हाथ जोड़ दिए। “छोड़ो… कल काफी हो गया… चूत जल रही है… प्लीज…”


भिखारी ने उनकी नाइटी पकड़कर एक झटके में फाड़ दी। फिर से नंगी। तीनों मर्द उनके चारों तरफ खड़े हो गए। दुबले वाले ने अपना लंड निकाला और आंटी के मुँह में ठूंस दिया।


मोटे वाले ने पीछे से उनकी गांड के छेद पर थूक लगाकर अपना मोटा लंड धकेलना शुरू कर दिया।


“आह्हhhhh… गांड… फिर से… दर्द… बहुत दर्द… आह्ह्ह…”


भिखारी खुद उनके नीचे लेट गया। आंटी को अपनी गोद में खींचकर चूत में लंड डाल लिया। अब तीनों लंड एक साथ अंदर थे – मुँह, चूत और गांड।


“ग्लक… ग्लक… उम्म…” आंटी का मुँह भरा हुआ था।


आँखों से आँसू और लार दोनों बह रहे थे। मोटा मजदूर उनकी गांड में जोर-जोर से पेल रहा था। हर धक्के पर आंटी का शरीर आगे की तरफ धकेलता और भिखारी का लंड और गहराई तक चला जाता।


“ले रांड… तीन लंड एक साथ… आज तेरी इज्जत के लड्डू बना देंगे… आह्ह्ह…” मोटे ने गांड पर जोरदार थप्पड़ मारते हुए कहा।


भिखारी नीचे से धक्के दे रहा था। “कल जिस चूत में बच्चा डाला है, आज फिर से भर रहा हूँ… साली जल्दी प्रेग्नेंट हो जा…”


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आंटी अब बोल भी नहीं पा रही थीं। सिर्फ गले से अजीब सी आवाजें निकल रही थीं। तीनों मर्द बारी-बारी से स्पीड बढ़ाते।


कभी मुँह वाला लंड निकालकर चूत में डाल देता, कभी गांड वाला चूत में। आंटी के शरीर पर कोई कोना ऐसा नहीं बचा था जहाँ लंड न घुसा हो।


मैंने इस बार पूरा वीडियो रिकॉर्ड किया। फोन को झाड़ी में छिपाकर रखा और खुद भी पास जाकर खड़ा हो गया। मेरा लंड बाहर निकाल लिया था। आंटी की हालत देखकर मैं भी हिलाने लगा।


करीब चालीस मिनट तक तीनों उन्हें चोदते रहे। आंटी कई बार झड़ चुकी थीं। पानी, खून और वीर्य मिलकर उनके नीचे की मिट्टी को कीचड़ बना चुका था।


आखिर में भिखारी पहले झड़ा - फिर से चूत में। मोटे ने गांड में माल छोड़ा। दुबले वाले ने आंटी के चेहरे पर खड़े होकर पूरा वीर्य उनके खुले मुँह, आँखों और बालों पर उड़ेल दिया।


तीनों थककर एक तरफ बैठ गए। आंटी वहीं पसरी हुई थीं। शरीर पर तीन मर्दों का वीर्य, पसीना, खून और मिट्टी चिपकी हुई थी। चूत और गांड दोनों पूरी तरह खुले और लाल थे। मुँह से सफेद वीर्य टपक रहा था।


भिखारी ने उठकर फिर से आंटी पर पेशाब कर दिया। इस बार दोनों मजदूर भी शामिल हो गए। तीनों धारें उनके शरीर पर पड़ रही थीं। आंटी ने आँखें बंद कर लीं। अब विरोध की ताकत भी नहीं बची थी।


“अब तू गाँव की नंबर वन रांड है,” भिखारी ने थूकते हुए कहा। “कल से खेत में आना। रोज चोदेंगे।”


तीनों हँसते हुए चले गए। मैंने आखिरी क्लोज-अप वीडियो लिया - आंटी की खुली हुई, वीर्य से भरी चूत में उंगली डालकर फैलाते हुए। फिर चुपचाप वहाँ से हट गया।


अगले दो-तीन दिनों में मैंने वो दोनों वीडियो कुछ चुनिंदा दोस्तों को भेजे। “गाँव की प्रीति आंटी की असली चुदाई” लिखकर।


दो दिनों के अंदर वीडियो गाँव से शहर तक वायरल हो गए। व्हाट्सएप ग्रुप्स, लोकल फेसबुक पेज… हर जगह। लोग पहचान गए। प्रीति आंटी का नाम पूरे इलाके में नंबर वन रांड के रूप में फैल गया।


एक हफ्ते बाद मैंने सुना कि आंटी घर से निकलना बंद कर दिया है।


लेकिन पेट में बच्चा पाल रही हैं। भिखारी का ही। कभी-कभी रात को खेत की तरफ जाते समय लोग उन्हें देख लेते - नाइटी पहने, पेट निकला हुआ, और पीछे-पीछे कोई न कोई मजदूर।


भिखारी ने मुझसे सौ रुपये माँगे। मैंने दिए। उसने हँसते हुए कहा, “अगर और रांड दिखे तो बताना। सस्ता रेट दूँगा।”


दोस्तों, ये थी मेरे गाँव की प्रीति आंटी की सच्ची कहानी। जो औरत दिन में शरीफ बनकर घूमती थी, रात को और दिन-दहाड़े भिखारियों से चुदवाकर अपनी हवस मिटाती थी।


आज भी जब मैं गाँव जाता हूँ तो लोग उसी वीडियो की बात करते हैं। आंटी अब बच्चों के साथ रहती हैं - एक तो पहले से थे, एक ये नया।


आशा करता हूँ कि आपको मेरी ये Gaon me Chudai की Hindi Sex Kahani बहुत पसंद आई होगी!


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