सम्मू के लन्ड से चुदी शुभी की बुर हुई तहस नहस
Biwi Ki Antarvasna Chudai : सम्मू ने कैसे शुभी को चुदाई के लिए तड़पाया? फिर लन्ड से चुद कर शुभी की बुर/चुत कैसे तहस नहस हुई? जाने इस Hind Sex Story में..
हैल्लो दोस्तो कैसे है आप लोग? उम्मीद है आप लोगो की रात और दिन अच्छे से बीत रहे होंगे! साथ ही चूत को अपने अपने लन्ड से सैल्यूट कर रहे होंगे।
जैसा कि आप लोग जानते ही है कि मेरा नाम शुभी है और मैं उत्तर प्रदेश के बहराइच शहर में रहती हूं, हम लोगो के परिवार में सिर्फ मैं यानी शुभी और पतिदेव सम्मू ही हैं।
आप लोग ये भी जानते है की मैं ज़्यादातर टेलीग्राम को ही यूज़ करती हूँ यही मेरा सबसे फेवरेट प्लेटफार्म है सोशल मीडिया में क्योंकि यहां पर xxx Video, GIF, और अच्छे - अच्छे दोस्त मिल जाते हैं।
इसीलिए मैंने एक टेलीग्राम चैनल भी बनाया है, आप टेलीग्राम पर सर्च करें @SandhyaSharmaSs एण्ड दिल करे तो जॉइन कर लेना। मुझे ज़्यादातर सेक्स चैट पसन्द है और सेक्स तो मेरा फेवरेट सब्जेक्ट है।
खैर मैं फिर बता देती हूं की मेरी एज 28 साल है स्लिम हूँ सेक्सी हूँ, हर नए स्टाइल में सेक्स करना यानी नए नए तरीके से चुदना चुदाना बहुत पसंद है।
अगर टूल ( लन्ड ) बड़ा हो लंबा और मोटा हो फिर टाइमिंग भी जबरदस्त हो हो तब तो चूत की बल्ले बल्ले हो जाती है, और बदन की सारी थकान और सुस्ती खत्म होकर चुस्ती फुर्ती आ जाती है।
यानी खूब मज़े और लन्ड को भी सुकून मिलता है। अच्छे तरीके से बुर चोदने पर।
अब आगे की मेरी स्टोरी में एक नया मोड़ आता है और वो ये की सम्मू अपनी बैंक जॉब के चलते किसी दूसरे शहर में ट्रांसफर हो जाता है तब वो अपनी जॉब के लिए उस दूसरे शहर जाने की तैयारी करते हैं।
सम्मू - शुभी मैं कल चला जाऊंगा लेकिन तुम परेशान मत होना मैं बहुत जल्द कोई अच्छी सी जगह पर मकान देखकर जब ले लूंगा तब सारा सामान और तुमको भी ले चलूंगा।
इसलिए अभी मैं अकेला ही जाउँगा तुम अपना ख्याल रखना बाकी इंजॉय करते रहना टेंशन मत करना।
फिर रात का खाना खाकर सोने से पहले और दूसरे शहर जाने से पहले हम दोनों एक दूसरे की खूब अच्छे से चुदाई कर लेना चाहते थे।
जिससे सम्मू को भी अगर एक दो हफ्ते बुर चोदने को न मिले तो लन्ड परेशान न करे और मुझे भी की अगर लन्ड न मिले तो कम से कम एक दो हफ्ता बिना चुदाई के निकल तो जाए बिना चुदाई का कीड़ा कुडबुलाये!
जब बेड पर पहुंचे तो हम दोनों ने ही अपना अपना कपड़ा निकाल दिया और नँगे ही लेट गए वैसे भी हम लोग नँगे ही लेटते हैं जिससे सोने में बड़ा मजा आता है, और नींद भी अच्छी पड़ती है।
सम्मू ने अपने हाथ को मेरे बड़ी बड़ी छातियों पर रख लिया और चुचों को दबाते , निप्पल्स को मुंह मे रख कर चूसते इससे उनका लन्ड नाग की तरह लहराने लगा।
मोटा , कट दार लन्ड, गोरा सा लन्ड, जो भी देखे बिना चुदाये रह न पाए। आप यह Desi Hindi Sex Kahani गरम कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।
चुचों को दबाने से , निप्पल को चूसने और घुण्डियों को दांतों से काटने से मेरे बदन में चुदाई की चींटी रेंगने लगी, मेरी मोटी गद्देदार वड़ापाव जैसी फूली हुई बुर में आग लग गई चुदने की।
आज जब हम लोगो ने खाना खाया था, तो पानी बहुत पिया था सम्मू भी बहुत पानी पिये थे और मैं भी, मेरी सिसकारियां चुदाई वाली निकलने लगी!
ऊंह, ऊंह उम, उम्म, आह,,,, आह करने लगी!
तभी सम्मू ने उठकर मुझे चारो खाने चित्त लिटाया और मेरे ऊपर पैर के ऊपर पैर बुर के ऊपर लन्ड और चुचियों के ऊपर उनका सीना!
फिर मेरे दोनो हाथों को अपने दोनो हाथों से पकड़ कर अपने होंठों से मेरे होंठों को चूसते और दांतो से काटते थे।
फिर अपनी जुबान को निकालकर मेरे मुंह मे डाल दिया और हम दोनों एक दूसरे की ज़ुबान और अंदर मुंह को खूब मज़े लेकर चूस और चाट रहे थे।
बदन में चुदाई की चींटियां अब दौड़ने लगी थी, एक तरह से सम्मू ने मुझे जकड़ रखा था, जिससे मैं अपने हाथ पांव छुड़ा नही पा रही थी, और न ही तो छुड़ाने का कोई मकसद ही था।
क्योंकि मज़ा बहुत आ रहा था इस तरह से फिर सम्मू ने मेरे दोनो हाथ को मुलायम कपड़ों से बांध दिया और पैरों को भी एक बड़े मुलायम कपड़ें से बांध दिया!
की अगर मेरे दोनो पैरों को फैलाना हो तो आराम से दोनो पैर फैल जाए मुड़ जाए, और कोई दिक्कत न हो अब मेरे दोनो हाथ बेड पर सिरहाने बंधे थे और दोनो पैर भी नीचे बंधे थे।
आप लोगों को बता दूं कि हम लोगो का जो रूम है, उसमे दीवाल के चारो तरफ शीशे लगे हुए है और नीचे फर्श पर सिर्फ बेड का हिस्सा छोड़कर फर्श पर भी शीशे लगे हुए हैं और ऊपर छत में भी शीशे लगे हुए है।
बहुत मेहनत से ये सभी काम अच्छे कारीगर से करवाया गया था!
तो जब हम लोग चुदाई करते उस रूम में तो बदन का हर एक पार्ट यानी हर एक अंग हर एंगल से देखते थे और जब बदन का हर एक अंग शीशे में दिखता तो आग और बढ़कर कई गुना हो जाती थी।
खैर आगे पढ़ें –
अब सम्मू ने मेरी दोनो चुचियों को सहलाना शुरू किया , कभी चूची को सहलाता, कभी दोनो गोल चुचियो को दबाते , और अपनी नाक से मेरे चुचों पर गरम साँसे छोड़ते!
मेरी आवाज हलक से तेज़ निकलने लगी, अब कमरा गूँज रहा था
आह,,, आह,,,, आह,,,महः ,उम,,,,,,, शी,,,,,शी,,,,,,
आह,,,,,, आsssssaह ,,,, आssssss ह निकल रही थी बदन चुदाई के लिए फैलाये हुए सेक्स से ऐंठ रहा था मैं कसमसा रही थी चुदाई के जोश के मारे हाथ को कपड़ो से खोलना चाहती थी।
सम्मू अपना पूरे हाथ की हथेली मेरे मुंह पर रखता और धीरे धीरे सहलाता हुआ मेरे दोनो पैरों के अंगूठों तक सहलाता जाता और अपनी गरम सांसे मेरे बदन पर हर एक जगह छोड़ रहा था।
बस मेरा दिल कर रहा था कि दोनों हाथों को छुड़ाकर सम्मू को अपनी चूत में घुसेड़ लूँ लेकिन मेरे हाथ पैर तो बंधे हुए थे। आप यह Family xxx Hindi Sex Story गरम कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।
सम्मू कभी अपने होंठो से मम्मों को पकड़ता और होंठो से ही मम्मों को दबाता कभी ज़ुबान निकालकर अपनी मनचाही जगह को चाटने लगते और कभी निप्पलों को होंठो से दबाते।
मैं मस्ती से हवाओं में उड़ रही थी मेरा हाल बेहाल था जोश से शीशे में हम दोनों अपने आपको देखकर और एक दूसरे के अंग बुर , लन्ड , चूची नँगा बदन देखकर जोश कई गुना हो रहा था।
मैं चाहती थी सम्मू अपना नाग से फुँफकरते लन्ड को बुर में ठान्स दे और मेरी वड़ापाव जैसी फूली हुई बुर को चोदना शुरू कर दें!
लेकिन सम्मू भी बहुत ज़ालिम थे, ज़ालिम सिर्फ मुझे तड़पा रहे थे, बुर से गाढ़े पानी का बहाव हो रहा था।
फिर सम्मू ने मुझे पेट के बल उल्टा लिटाकर मेरी पीठ को चूमने और चाटने लगे।
मैं चाहकर भी अपनी भट्ठी जैसी धधकती बुर को चुदा नही पा रही थी मैं सिर्फ छटपटा रही थी , वो पीठ को चूमते और अपनी गरम सांसे छोड़ रहे थे।
सम्मू प्लीज़ , प्लीज् अब चोद भी दो! मैं बोली
लेकिन ज़ालिम कहाँ मानने वाले थे मैं अपने पैरों को पटक रही थी , छटपटा रही थी लेकिन सम्मू पर कोई असर नही हो रहा था , ज़ालिम मर्द ने फिर मेरे कांधों को अपने दांत से काटना शुरू कर दिया।
और मेरी गर्दन को चूमते , कंधों पर अपने, हाथों की उंगलियों को खूब ज़ोर ज़ोर से, गड़ा रहे थे चुभा रहे थे!
मेरी हालत ख़स्ता हुई जा रही थी, बुर में लन्ड न मिलने से अब लग रहा था कि बुर से चिकना पानी, नही बल्कि आग की धार निकल रही थी।
फिर सम्मू ने मेरी गाँड़ को चूमना शुरू किया , क्या बताऊँ दोस्तो मज़े का आलम ये था कि मैं कुछ बयान नही कर सकती
फिर मोटी मोटी बड़ी बड़ी चूतड़ में अपनी उंगलियां गड़ाने लगे!
आहा क्या मस्ती थी , क्या मज़ा था!
सम्मू ने मुझे फिर सीधा किया और मेरी टाँगों को फैलाकर फड़फड़ाती हुई बुर की फांकों को खोला और अपनी गरम गरम ज़ुबान को बुर में, पेल दिया!
आsssssssह ,,,,,,,,,,, आsssssह,,,, उफ्फ ऊंह ,,,,,, उन्ह से कमर गूंज रहा था! आप यह Biwi Chudai ki Kahani गरम कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।
मैं अपनी चूतड़ उठा उठाकर सम्मू की ज़ुबान से ही बुर चुदने का मज़ा लेने लगी सम्मू ज़ुबान से सपड़ सपड़ करके बुर को चोद रहे थे!
और मैं गाँड़ उठा उठाकर बुर चुदा रही थी, इतनी तेज तेज़ गाँड़ उठा रही थी कि जैसे बेड पर कोई भारी चीज़ उठा उठाकर पटकी जा रही थी।
फिर उस ज़ालिम मर्द ने मेरी दोनो जांघो पर बुर के पास अपनी उंगलियां गड़ानी शुरू कर दी, मैं जोश के मारे अपने हाथों को खींच रही थी कि मेरे हाथ खुल जायें तो बुर में लन्ड को पेलवा सकूँ। लेकिन हाथ कहाँ खुलने वाले थे?
कुछ देर तक बुर को ज़ुबान से चोदने के बाद अपना फंफनाता हुआ लन्ड जो की आज ही सारे बाल साफ किये थे सम्मू ने और अपने लन्ड के चारों तरफ गोलाई से एक बालों का घेरा बनाया था।
जो कि बहुत खूबसूरत लग रहा था, इस स्टोरी को पढ़ने के बाद न जाने कितने लोग इस डिज़ाइन को और इसके अलावा न जाने किस किस तरह की डिज़ाइन अपने लन्ड पर अपने उगे हुए बालों से बनाएंगे। ये तो मेरी गारंटी है!
सम्मू का लन्ड जंगल के शेर जैसा दहाड़ मार रहा था, लन्ड के चारो तरफ गोलाई से बालों से बनाया हुआ डिज़ाइन बहुत अच्छा था।
मैं लालच से देख रही थी कि शायद अब अपने लन्ड को बुर में पेल दें!
लेकिन फिर सम्मू ने अपना फुंफकारता हुआ लन्ड मेरे मुंह पर लाये और होंठों पर रगड़ने लगे।
मैं बहुत जोश में थी पूरा बदन भट्ठी की तरह तप रहा था मैं सम्मू का मोटा लन्ड मुंह मे लेने के लिए मुंह खोला तो ज़ालिम ने अपने लन्ड को मुंह से हटा लिया।
मैं बोली : सम्मू क्यों तड़पा रहे हो? देखो कितना गरम हो गया है मेरा बदन चूत से पानी बह रहा है! प्लीज् अब तरस खाओ और बुर चोद दो।
नही मेरी रानी शुभी - सम्मू बोले, अभी तो और मज़ा लेना और देना है।
फिर सम्मू अपना लन्ड मेरे मुंह पर रगड़ने लगे , मैं अपना होशो हवास खो रही थी , सम्मू के मेरे मुंह पर लन्ड रगड़ने से सम्मू का पेल्हड़ यानी फोते कि गोलियां मेरा होंठ खोल और बंद कर रही थीं।
और वो अपना केले के साइज का लन्ड दिखा दिखाकर मुझे तड़पा रहे थे, सम्मू के लन्ड का गाढ़ा नमकीन पानी जो कि चिकना था ही, मेरे मुंह को भी और होंठो को भी चिकना कर रही थी।
जिसमे से कुछ बून्द मैं गटक गई, अब मुझे सम्मू का लन्ड चूसने के लिए तड़प हो रही थी।
खैर कुछ देर ऐसा करने के बाद सम्मू ने मेरे मुंह मे अपना बड़ा सा हथियार जैसा लन्ड का टोपा रखा , तो मैं जल्दी से मुंह खोलकर टोपा मुंह के अंदर ले ली।
आहह क्या मज़ा था! क्या नशा था!
मेरी चुचियाँ भी अब दबवाने के लिए फड़फड़ा रही थी निप्पल तने हुए थे एकदम कठोर क्या नमकीन स्वाद था!
हम लोगों जो जब भी बेड पर जाने का वक़्त होता है तो दोनो ही लोग मैं यानी शुभी अपनी बुर से गाँड़ तक को साबुन से रगड़ रगड़ कर धोती थी कि बदबू न आये।
ऐसे ही सम्मू भी अपना लन्ड तंबू जैसा साबुन लगाकर रगड़ रगड़कर धोते थे, फिर बाद में हल्का सा परफ्यूम छिड़क लेते जिससे बदबू न आये।
तो परफ्यूम की खुश्बू और चुदाई का नशा और इतनी देर से सेक्स फैला रहा ये इंसान कुछ एकदम अनोखा और अलग ही मज़ा दे रहा था।
मैं चुदाई ना होने से लगभग बेहोश सी हो गई थी, अब सिर्फ सिसकारियां ही कमरे में गूंज रही थी और मैं सम्मू के लन्ड का टोपा अपनी ज़ुबान से चाट रही थी चूस रही थी।
अब मुझे भी एक मौका मिल गया था!
आगे की कहानी : जल्द ही.. (सम्मू के लन्ड से चुदी शुभी की बुर हुई तहस नहस 02)
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