शिप्रा को चुदाई का पाठ पढ़ाकर मारी चुत और गांड!

Hindi Sex Kahani : टीचर ने 18 साल की सील पैक स्टूडेंट शिप्रा को चुदाई का पाठ पढ़ाया! फिर घर में फाड़ी उसकी चूत और गांड! Student Teacher Antarvasna! | Love To Sex


मेरा नाम शिशुपाल है। उम्र 35 साल। मैं इंदौर में एक प्राइवेट कोचिंग सेंटर में 12वीं के स्टूडेंट्स को पढ़ाता हूँ। पढ़ाने के अलावा मेरे पास एक और आदत है - खूबसूरत और नाजुक उम्र की लड़कियों को अपनी तरफ आकर्षित करना।


लेकिन शिप्रा के साथ जो कुछ हुआ, वो बाकी लड़कियों से अलग था।


शिप्रा जब पहली बार मेरी कोचिंग में आई, तो मैं तुरंत उसकी तरफ खिंच गया। वो 18-19 साल की थी, कद में छोटी — करीब 5'2", घने काले बाल, गोरा रंग और शरीर में एक नरमी थी जो उम्र के साथ आती है।


उसके स्तन अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुए थे, लेकिन 30 साइज के छोटे-छोटे और गोल बूब्स उसकी टॉप में बहुत प्यारे लगते थे। चेहरा मासूम था, लेकिन आँखों में एक अलग सी चमक थी।


पहले कुछ दिनों तक मैंने उसे सिर्फ पढ़ाने की कोशिश की। लेकिन धीरे-धीरे उसकी तरफ मेरा रुझान बढ़ने लगा। वो क्लास के बाद अक्सर मेरे पास बैठकर डाउट पूछती। उसकी आवाज नरम थी, और जब वो मुझे “सर” कहकर देखती, तो मुझे कुछ अजीब सा महसूस होता।


एक दिन क्लास खत्म होने के बाद वो मेरे पास रुकी।


“सर, मुझे केमिस्ट्री में बहुत दिक्कत आ रही है। क्या आप मुझे थोड़ा एक्स्ट्रा टाइम दे सकते हैं?”


मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “बिल्कुल शिप्रा। तुम्हें जितना चाहिए, उतना टाइम दूंगा।”


उस दिन से वो अक्सर क्लास के बाद रुकने लगी। हम दोनों अकेले क्लासरूम में बैठकर पढ़ाते। वो मेरी तरफ देखती और मुस्कुरा देती।


मैं भी उसे ध्यान से पढ़ाता, लेकिन मन में उसकी छोटी-छोटी हरकतें घूमती रहतीं — उसके बाल कान के पीछे डालना, पेंसिल काटना, या जब वो कुछ समझ नहीं पाती तो होंठ काट लेना।


धीरे-धीरे हमारी बातें पढ़ाई से बाहर निकलने लगीं।


एक शाम क्लास के बाद वो मेरे साथ बाहर चाय पीने चली गई। हम दोनों एक छोटी सी चाय की दुकान पर बैठे थे।


“सर, आप इतने अच्छे से पढ़ाते हैं। मुझे लगता है कि आप सिर्फ पढ़ाने के लिए नहीं बने हैं। आपमें कुछ और भी है…” शिप्रा ने धीरे से कहा।


मैंने उसे देखा। “क्या मतलब?”


उसने शर्मा कर कहा, “मतलब… आप बहुत केयरिंग लगते हैं। जैसे आप स्टूडेंट्स की परवाह करते हैं।”


उसकी बात सुनकर मुझे अच्छा लगा। ज्यादातर लड़कियाँ सिर्फ मेरे लुक और बॉडी पर ध्यान देती थीं, लेकिन शिप्रा कुछ और देख रही थी।


उसके बाद हमारी बातें बढ़ने लगीं। वो कभी-कभी फोन पर भी बात करने लगी। रात को देर तक हम पढ़ाई के अलावा अपनी जिंदगी के बारे में बात करते। वो मुझे अपनी फैमिली के बारे में बताती, मैं भी उसे अपनी कुछ बातें बताता।


धीरे-धीरे हमारे बीच एक इमोशनल कनेक्शन बनने लगा।


एक रात फोन पर बात करते हुए शिप्रा ने अचानक कहा,


“सर… मैं आपको बहुत पसंद करती हूँ।”


मैं चुप रहा।


उसने आगे कहा, “पहले तो मुझे लगा कि सिर्फ टीचर की तरह पसंद करती हूँ… लेकिन अब लगता है कि कुछ और भी है।”


मैंने धीरे से पूछा, “क्या मतलब शिप्रा?”


उसने थोड़ी देर चुप रहकर कहा, “मुझे आपसे प्यार हो गया है सर।”


उसकी बात सुनकर मेरे अंदर कुछ हलचल हुई। मैं 35 साल का था और वो सिर्फ 18 की। लेकिन उसकी आवाज में जो सच्चाई थी, वो मुझे छू गई।


“शिप्रा… तुम अभी बहुत छोटी हो।”


“मैं जानती हूँ सर। लेकिन जो महसूस हो रहा है, वो झूठा नहीं है।”


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उस रात के बाद हमारी बातें और गहरी होने लगीं। अब वो सिर्फ पढ़ाई के लिए नहीं, बल्कि मेरे पास रहने के लिए रुकने लगी। क्लास के बाद हम दोनों अक्सर अकेले बैठते। कभी-कभी मैं उसके बालों को छू लेता, कभी वो मेरी उँगलियों को पकड़ लेती।


एक शाम क्लासरूम में सिर्फ हम दोनों थे। लाइट्स बंद होने वाली थीं। शिप्रा मेरे सामने बैठी थी। उसने अचानक मेरी तरफ देखा और बोली,


“सर… क्या आप मुझे चूम सकते हैं?”


मैं स्तब्ध रह गया।


उसने आगे कहा, “मैं बहुत दिनों से सोच रही हूँ। मुझे आपसे डर नहीं लगता। मुझे लगता है कि आप मुझे नुकसान नहीं पहुँचाएँगे।”


मैंने धीरे से उसका हाथ पकड़ा।


“शिप्रा… अगर हम ये कदम उठा रहे हैं, तो फिर पीछे लौटना मुश्किल होगा।”


उसने मेरी आँखों में देखते हुए कहा, “मुझे पता है सर। लेकिन मैं तैयार हूँ।”


उस रात मैंने उसे अपने घर बुलाया।


जब वो मेरे घर आई, तो मैंने उसे सीधे बेडरूम में ले गया। दरवाजा बंद किया। शिप्रा थोड़ी घबराई हुई थी, लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सी चाहत थी।


मैंने उसे अपने पास खींचा और धीरे से उसके गाल पर हाथ फेरा।


“तुम बहुत खूबसूरत हो शिप्रा…”


उसने शर्मा कर मेरा हाथ पकड़ लिया।


मैंने उसे गले लगा लिया। उसकी नरम और गर्म साँस मेरी गर्दन पर पड़ रही थी। मैंने धीरे से उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।


शिप्रा ने पहले तो हिचकिचाया, लेकिन फिर उसने भी मुझे चूमना शुरू कर दिया।


हम दोनों धीरे-धीरे एक-दूसरे में खोने लगे।


 


जब मैंने शिप्रा को गले लगाया और उसके होंठों पर अपने होंठ रखे, तो वो पहले तो थोड़ी सिकुड़ गई। लेकिन जैसे ही मैंने धीरे से उसके होंठ चूसने शुरू किए, वो भी मेरे होंठों को चूसने लगी।


उसकी साँसें गर्म हो रही थीं। मैंने एक हाथ उसकी कमर पर रखा और दूसरे हाथ से उसके बालों में उँगलियाँ फेरते हुए उसे और पास खींच लिया।


शिप्रा की उम्र कम थी, लेकिन उसके होंठ बहुत नरम और मीठे थे। मैं धीरे-धीरे उसके होंठों को चूसता रहा और कभी-कभी अपनी जीभ से उसके होंठों को छूता। शिप्रा की साँसें अब तेज हो चुकी थीं।


मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया। वो मेरी तरफ देख रही थी। उसकी आँखों में डर भी था और कुछ और भी।


“शिप्रा… अगर तुम्हें लगे कि रुकना है, तो बता देना,” मैंने धीरे से कहा।


उसने सिर हिलाया, “नहीं सर… मैं ठीक हूँ।”


मैं उसके ऊपर झुका और फिर से उसे चूमने लगा। इस बार मैंने उसकी जीभ को चूसना शुरू किया। शिप्रा भी धीरे-धीरे खुलने लगी। मैंने एक हाथ उसके टॉप के अंदर डाला। उसकी त्वचा बहुत नरम थी।


मैंने उसके छोटे लेकिन गोल बूब्स को हथेली से दबाया। शिप्रा के मुँह से हल्की सी सिसकारी निकली — “आह…”


मैंने उसका टॉप ऊपर खिसकाया। अंदर एक साधारण ब्रा थी। मैंने ब्रा के ऊपर से ही उसके स्तनों को मसलना शुरू किया। शिप्रा की आँखें बंद हो गई थीं। मैंने ब्रा को ऊपर खिसकाकर उसके निप्पल्स को उँगलियों से छुआ।


वो छोटे और गुलाबी थे। जैसे ही मेरी उँगलियाँ उसके निप्पल को छुईं, शिप्रा का शरीर हल्का सा काँप गया।


मैंने एक निप्पल मुँह में लिया और धीरे से चूसने लगा। शिप्रा ने मेरे बालों में हाथ डाल दिया।


“सर… आह… अच्छा लग रहा है…”


मैं दूसरे स्तन को भी चूसने लगा। अब शिप्रा की साँसें और तेज हो चुकी थीं। मैंने एक हाथ नीचे ले जाकर उसकी स्कर्ट के अंदर डाला। उसकी जाँघें नरम थीं। मैंने धीरे से उसकी पैंटी के ऊपर हाथ फेरा। पैंटी पहले से ही थोड़ी गीली हो चुकी थी।


मैंने उसकी पैंटी को एक तरफ खिसकाया और उसकी चूत को छुआ। शिप्रा की चूत पर हल्के-हल्के बाल थे। मैंने उसकी चूत के फटे पर उँगली घुमाई। शिप्रा ने कमर हिला दी।


“आह सर… वहाँ मत छुओ…”


लेकिन उसकी आवाज में कोई रोक नहीं थी।


मैंने धीरे से एक उँगली उसकी चूत में डाली। बहुत टाइट थी। शिप्रा दर्द से सिकुड़ गई। मैंने उँगली अंदर-बाहर करना शुरू किया। कुछ देर बाद शिप्रा को थोड़ा आराम हुआ।


मैंने उसकी स्कर्ट और पैंटी दोनों उतार दी। अब शिप्रा सिर्फ टॉप और ब्रा में मेरे सामने लेटी थी। मैंने भी अपना शर्ट उतारा। शिप्रा ने मेरी छाती देखी और शर्मा गई।


मैंने उसके टॉप और ब्रा भी उतार दिए। अब वो पूरी तरह नंगी बिस्तर पर लेटी थी। उसका शरीर छोटा लेकिन भरा हुआ था। मैंने उसकी जाँघें फैलाईं और सीधे उसकी चूत पर मुँह लगा दिया।


शिप्रा चौंक गई, “सर… ये क्या कर रहे हैं…”


मैंने जवाब नहीं दिया। मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया। जीभ से उसके फटे को चाटता रहा और कभी-कभी क्लिट को चूसता। शिप्रा का शरीर काँप रहा था।


“आआह… सर… ये… बहुत अजीब लग रहा है… आह…”


मैंने उसकी चूत को अच्छे से चूसा। शिप्रा अब कराहने लगी थी।


कुछ देर बाद मैं ऊपर आया और अपना लंड निकाल लिया। मेरा लंड 7-8 इंच का मोटा और सख्त खड़ा था। शिप्रा ने उसे देखा और डर गई।


“सर… ये… इतना बड़ा… मेरे अंदर कैसे जाएगा?”


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मैंने लंड उसके मुँह के पास ले जाकर कहा, “पहले इसे चूसो शिप्रा।”


शिप्रा ने मना कर दिया, “नहीं सर… मुझे गंदा लगेगा।”


मैंने उसका सिर पकड़ लिया और लंड उसके होंठों पर रगड़ने लगा। “शिप्रा… चूसो।”


जब उसने फिर मना किया तो मैंने जबरदस्ती उसका मुँह खोला और लंड अंदर घुसा दिया। शिप्रा ने गला दबा लिया, लेकिन मैंने उसके सिर को पकड़कर लंड आगे-पीछे करना शुरू कर दिया।


थोड़ी देर बाद शिप्रा समझ गई कि उसे चूसना ही पड़ेगा। उसने लंड को हाथ में लिया और धीरे-धीरे चूसने लगी। जैसे ही उसने लंड चूसना शुरू किया, मुझे बहुत अच्छा लगा।


हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए। मैं उसकी चूत चूस रहा था और वो मेरे लंड को चूस रही थी।


कुछ देर बाद मैंने शिप्रा को सीधा लिटाया। मैंने उसके कमर के नीचे एक तकिया रखा ताकि उसकी चूत ऊपर उठ जाए। फिर मैंने लंड उसकी चूत पर रखा और धीरे से दबाया।


लंड फिसल गया।


मैंने शिप्रा के ऊपर लेटकर उसके होंठों को चूमा और फिर जोर से धक्का मारा।


मेरा लंड आधा उसकी चूत में घुस गया।


शिप्रा चीख उठी, “आआईईई… सर… मर गई… दर्द हो रहा है… निकालो… आआआह…”


मैंने दूसरा जोरदार धक्का मारा। पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया। शिप्रा रोने लगी।


“सर… दर्द… बहुत दर्द… आह… मम्मी…”


मैंने उसका मुँह अपने मुँह से बंद किया और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। शिप्रा दर्द से छटपटा रही थी, लेकिन मैं रुका नहीं।


थोड़ी देर बाद शिप्रा को दर्द के साथ-साथ कुछ और महसूस होने लगा। उसने धीरे से कमर हिलानी शुरू कर दी।


मैंने रफ्तार बढ़ा दी। शिप्रा अब कराह रही थी।


“आह… सर… अब… थोड़ा अच्छा लग रहा है…”


मैंने उसे और जोर से चोदना शुरू किया। करीब 40 मिनट तक चुदाई के बाद मैंने अपना सारा माल उसकी चूत के अंदर छोड़ दिया।


शिप्रा थककर बिस्तर पर लेट गई। मैंने उसे गले लगाया।


“शिप्रा… कैसा लगा?”


उसने आँखें बंद करके धीरे से कहा, “दर्द तो बहुत हुआ सर… लेकिन… आखिर में अच्छा भी लगा।”


मैंने उसके बाल सहलाते हुए कहा, “ये सिर्फ शुरुआत है शिप्रा। अभी बहुत कुछ बाकी है।”


शिप्रा थककर मेरी बाँह पर सिर रखे लेटी हुई थी। उसकी साँसें अभी भी तेज चल रही थीं। मैंने उसके बालों में उँगलियाँ फेरते हुए कहा,


“शिप्रा… आज की ये पहली चुदाई तुम कभी नहीं भूल पाओगी।”


उसने आँखें बंद करके धीरे से कहा, “सर… दर्द तो बहुत हुआ था।”


मैंने मुस्कुराते हुए उसके गाल पर हाथ फेरा, “अब दर्द कम हो जाएगा। लेकिन अभी एक और चीज बाकी है।”


शिप्रा ने आँखें खोलीं और मेरी तरफ देखा, “क्या सर?”


मैंने उसके कान के पास मुँह ले जाकर धीरे से कहा, “अब तेरी गांड की बारी है।”


शिप्रा चौंक गई। उसने तुरंत अपना सिर उठाया, “नहीं सर… गांड में नहीं। मुझे बहुत डर लग रहा है।”


मैंने उसे फिर से अपनी तरफ खींचा और उसके होंठों पर हल्का सा किस किया, “शिप्रा… मैं जानता हूँ डर लग रहा होगा। लेकिन एक बार गांड में लंड ले लोगी ना, फिर बार-बार मंगवाओगी।”


शिप्रा ने मासूमियत से कहा, “सर… मैंने सुना है बहुत दर्द होता है। आपका लंड तो पहले ही बहुत बड़ा है… गांड में कैसे जाएगा?”


मैंने उसके स्तन को हथेली से दबाते हुए कहा, “मेरे ऊपर भरोसा है ना? मैं धीरे-धीरे करूँगा। और गांड में चुदाई करने के बाद तुझे और भी ज्यादा मजा आएगा।”


शिप्रा कुछ देर सोचती रही। फिर उसने धीरे से कहा, “ठीक है सर… लेकिन बहुत दर्द ना हो।”


मैंने उसे चूमते हुए कहा, “वादा है।”


मैं अलमारी से वैसलीन की डब्बी निकाल लाया। शिप्रा को पीठ के बल लिटाकर मैंने उसकी जाँघें फैला दीं। मैंने काफी सारी वैसलीन अपने लंड पर लगाई और फिर शिप्रा की गांड के छेद पर भी लगाने लगा।


जैसे ही मेरी उँगली उसके गांड के छेद को छुई, शिप्रा सिकुड़ गई।


“आह सर… गुदगुदी हो रही है…”


मैंने धीरे से अंगूठा उसके छेद में डाला। शिप्रा ने कमर उछाल दी, “सर… मत करो ना… अजीब लग रहा है।”


मैंने अंगूठे को अंदर घुमाते हुए कहा, “ये गुदगुदी नहीं शिप्रा, खुजली है। अब मेरा लंड तेरी गांड में जाकर ये खुजली मिटाएगा।”


मैंने दो-तीन बार उँगली और अंगूठे से उसकी गांड को अच्छे से चिकना किया। शिप्रा अब थोड़ी शांत हो चुकी थी।


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मैं उसके ऊपर आया। शिप्रा ने अपनी दोनों टाँगें उठा ली थीं। मैंने लंड उसकी गांड के छेद पर रखा और धीरे से दबाया।


सुपाड़ा अंदर घुसा।


शिप्रा ने तुरंत चीख मारी, “आआह… सर… दर्द हो रहा है… निकालो… प्लीज…”


मैंने रुका नहीं। मैंने एक जोरदार धक्का मारा और आधा लंड उसकी टाइट गांड में घुसा दिया।


शिप्रा बिलबिला उठी। उसके मुँह से आँसू निकल आए, “सर… मर गई… बहुत दर्द… निकालो बाहर… आआह…”


मैंने उसके दोनों स्तनों को हाथों में लेकर दबाते हुए कहा, “शिप्रा… चुप रह। दर्द होगा तो होगा। लेकिन अब लंड अंदर चला गया है, तो पूरा ही जाएगा।”


मैंने दूसरा धक्का मारा। पूरा लंड उसकी गांड में घुस गया।


शिप्रा जोर से चीखी, “आआईईई… मम्मी… बचाओ… सर… मर गई रे… उफ्फ… निकालो…”


मैंने उसका मुँह चूम लिया और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। शिप्रा दर्द से छटपटा रही थी। मैंने एक हाथ नीचे ले जाकर उसकी चूत को उँगलियों से मसलना शुरू किया।


थोड़ी देर बाद शिप्रा का दर्द थोड़ा कम हुआ। वो अब कराह रही थी, “आह… सर… धीरे… उफ्फ… बहुत तेज मत करो…”


मैंने रफ्तार बढ़ा दी। अब मैं उसकी टाइट गांड में जोर-जोर से लंड पेल रहा था। शिप्रा की गांड मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी।


“शिप्रा… तेरी गांड कितनी टाइट है… मजा आ रहा है,” मैंने गंदे अंदाज में कहा।


शिप्रा ने आँखें बंद करके कहा, “सर… मुझे… अच्छा लगने लगा है… आह… लेकिन… धीरे…”


मैंने उसकी चूत में दो उँगलियाँ डाल दीं और तेजी से अंदर-बाहर करने लगा, जबकि गांड में लंड पेल रहा था। शिप्रा अब दोनों तरफ से मजे ले रही थी।


“सर… आआह… दोनों जगह… उफ्फ… सर… मैं… मैं कुछ होने वाली हूँ…”


मैंने और तेजी से चोदना शुरू किया। शिप्रा का शरीर काँपने लगा और वो जोर से झड़ गई। उसी वक्त मैं भी झड़ गया। मेरा गर्म वीर्य सीधे उसकी गांड में भर गया।


शिप्रा थककर बिस्तर पर लेट गई। मैंने लंड बाहर निकाला। उसकी गांड से मेरा माल बाहर निकल रहा था।


मैंने शिप्रा को गले लगाया और उसके गाल पर किस किया, “कैसा लगा शिप्रा? अपनी चूत और गांड दोनों की सील तोड़वाकर?”


शिप्रा ने थकी हुई आवाज में कहा, “सर… दर्द तो बहुत हुआ… लेकिन… आखिर में मजा भी आ गया।”


मैंने उसके बाल सहलाते हुए कहा, “अब ये रोज होगा शिप्रा। तू मेरी हो गई है।”


शिप्रा ने मेरी छाती पर सिर रखा और धीरे से बोली, “सर… मैं आपकी ही हूँ। लेकिन… अगली बार थोड़ा धीरे करना।”


मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “ठीक है। लेकिन याद रखना… अब तू मेरी personal randi बन चुकी है।”


शिप्रा शर्मा गई, लेकिन उसने मुझे और जोर से गले लगा लिया।


उस दिन के बाद शिप्रा अक्सर मेरे घर आने लगी। हम दोनों कई बार चुदाई करते! कभी चूत में, कभी गांड में! लेकिन बाद में जब शिप्रा प्रेग्नेंट हो गई, तो मुझे उसका अबॉर्शन करवाना पड़ा। उसके बाद से मैं कंडोम लगाकर ही उसे चोदता हूँ।


लेकिन नंगे लंड से चुदाई की बात ही अलग है।


तो दोस्तों कैसे लगी यह Student Teacher की सेक्स स्टोरी? नीचे कॉमेंट में जरूर बताना! Bye Bye 


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