मसाज गर्ल की चूत में पति का लंड!


Honeymoon Massage Girl Sex : मनाली के हनीमून में पति ने चोदी स्पा गर्ल! मसाज गर्ल रीना साथ करी Wild चुदाई! मसाश करके खड़ी लंड चुसी! थप्पड़ मार कर फाड़ी गांड! 


यह बात अप्रैल 2026 की है। हमारी शादी को अभी महज दो महीने ही हुए थे। हवाओं में नयापन और एक-दूसरे के जिस्म को पूरी तरह जानने-परखने की बेताबी घुली हुई थी।


मैं अंशुल, छब्बीस साल का, और मेरी पत्नी ललिता, चौबीस साल की। हम मनाली की बर्फीली, हसीन वादियों में अपना हनीमून मना रहे थे।


इंदौर की उमस भरी गर्मी और मालवा की शांत आबोहवा छोड़कर पहाड़ों की इस कड़क ठंड में आना अपने आप में एक जादुई और कामुक अहसास था। ललिता की खूबसूरती की जितनी तारीफ की जाए कम है।


उसकी सुडौल काया -वक्ष चौंतीस के भारी, गोल और सख्त, कमर बत्तीस की टाइट और गोल-मटोल चूतड़—ऐसी थी कि चलते-फिरते किसी भी मर्द की निगाहें ठहर जाएँ।


स्कूटर वाले, होटल स्टाफ, सड़क किनारे खड़े लोकल लड़के… सबकी नजरें उसके जिस्म पर चिपक जाती थीं। और हर बार जब कोई उसे घूरता, मेरे लंड में हल्की सी सनसनाहट होती।


रोहतांग पास में दिनभर घूमने-फिरने, बर्फ में खेलने और ठंडी हवाओं में साँस लेने के बाद जब हम शाम को अपने होटल के आलीशान सूट में लौटे, तो थकान अपने चरम पर थी।


शरीर का एक-एक जोड़ अकड़ा हुआ था। कमरे में कदम रखते ही ललिता ने अपनी भारी जैकेट उतारी और बेड पर ढेर की तरह गिर पड़ी। उसके स्तन टी-शर्ट के अंदर भारी और थके हुए लग रहे थे।


निप्पल्स ठंड के कारण सख्त हो चुके थे और कपड़े के ऊपर से साफ उभर रहे थे।


मैंने उसकी थकी आँखें और ढीली बदन देखकर कहा, “चल, पास के किसी अच्छे स्पा से मसाज करवाते हैं। पहाड़ों की थकान निकालनी जरूरी है।”


ललिता ने आँखें खोलीं। पहले तो साफ मना कर दिया। “अजनबी के हाथ मेरे शरीर पर? नहीं अंशुल। हम इंदौर के हैं… ऐसा नहीं होता हमारे यहाँ।” उसकी आवाज में संकोच साफ था।


लेकिन मैंने उसकी सुस्ती और पीठ के दर्द को देखते हुए जोर दिया। थोड़ी देर की मान-मनौवल के बाद वह इस शर्त पर राजी हुई कि सिर्फ लेडी मसाजर से ही करवाएगी।


मैं मुस्कुराया। उसे पास खींचा। उसके गाल पर हल्का किस किया और धीरे से कहा, “ललिता, तू समझ नहीं रही। असली आराम और गहरी थेरेपी मेल मसाजर के हाथों में होती है।


उनके हाथ मजबूत होते हैं, प्रेशर सही होता है। मांसपेशियों का खिंचाव पूरी तरह निकल जाता है।” मेरी बात सुनकर वह असहज हुई। पलकें झुक गईं। गाल हल्के लाल हो गए।


लेकिन इस बार उसने कड़ा विरोध नहीं किया। मौन रहकर मेरी बात स्वीकार कर ली।


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तभी मुझे याद आया - मॉल रोड से लौटते वक्त हमने इंदौर स्टाइल का खास ‘पलंगतोड़ पान’ पैक करवाया था। जिसकी जड़ी-बूटियाँ और मसाले शरीर में नई ऊर्जा और तेज उत्तेजना पैदा करते हैं। 


मैंने पान निकाला और ललिता की तरफ बढ़ाया। दिनभर की थकान के बाद मीठा और तीखा स्वाद लेने की चाह में उसने बड़े चाव से खाया।


गुलकंद और विशेष मसालों का असर कुछ ही मिनटों में दिखने लगा। उसके गोरे गालों पर लाली छा गई।


आँखों की थकान एक अजीब चमक और भीतरी गर्माहट में बदल गई। कमरे का तापमान जैसे अचानक बढ़ गया। मेरे अंदर भी एक हल्की सी सनसनाहट दौड़ने लगी। लंड में जान आने लगी।


हम दोनों तैयार होने लगे। मैंने साधारण ग्रे लोअर और आरामदायक काली टी-शर्ट पहन ली। ललिता ने सूटकेस खोला। उसकी उँगलियाँ कुछ पल के लिए ठिठकीं।


फिर उसने अंदर पहनने के लिए लाल रंग का बेहद कामुक, जालीदार ब्रा और पैंटी का सेट निकाला। जाली इतनी महीन थी कि निप्पल्स और चूत के बालों की झलक साफ मिल रही थी।


उसके ऊपर उसने हल्का नीला गाउन डाला जो सिर्फ घुटनों तक आता था। गाउन का पतला कपड़ा उसके भारी स्तनों के उभार, सख्त निप्पल्स और गोल चूतड़ों की गोलाई को छुपा नहीं पा रहा था।


हर कदम पर उसके स्तन हल्के से काँप रहे थे। मेरी नजरें बार-बार वहीं अटक रही थीं।


होटल के ठीक सामने स्थित आलीशान स्पा पार्लर पहुँचे। अंदर कदम रखते ही मद्धम रोशनी, धीमा संगीत और लेवेंडर-चंदन की भीनी खुशबू ने हमारा स्वागत किया। माहौल खुद ही शरीर को ढीला कर देने वाला था।


काउंटर पर पहुँचकर मैंने कपल मसाज के बारे में पूछा। रिसेप्शनिस्ट ने ललिता की हिचकिचाहट भांपते हुए पेशेवर अंदाज में कहा, “सर, कपल्स के लिए आमतौर पर फीमेल मसाजर की सुविधा रहती है ताकि वाइफ सहज रहें।”


लेकिन मेरे दिमाग में पहले से कुछ और चल रहा था। मैंने आँखों में आँखें डालकर साफ कहा, “नहीं। हमें क्रॉस-जेंडर मसाज चाहिए। मेरी वाइफ के लिए कुशल मेल मसाजर और मेरे लिए फीमेल मसाजर।”


ललिता का चेहरा एकदम लाल हो गया। उसने नजरें झुका लीं और घबराहट में गाउन के किनारों को उँगलियों से भींचने लगी। उसकी साँसें तेज हो गई थीं। गाउन के अंदर लाल जालीदार ब्रा के उभार साफ ऊपर-नीचे हो रहे थे।


मैंने रोमांच और बढ़ाने के लिए अगली शर्त रख दी, “और हम दोनों की मसाज एक ही कमरे में होनी चाहिए।”


मैनेजर ने विनम्रता से कहा कि वीकेंड और सीजन की वजह से सारे डबल सूट बुक हैं। सिर्फ सिंगल कॉटेज खाली हैं। इसलिए अलग-अलग कमरों में ही जाना होगा।


ललिता ने राहत की साँस ली और मेरी तरफ उम्मीद भरी नजरों से देखा। लेकिन मेरे अंदर की उत्सुकता और बढ़ चुकी थी। मैंने सिर हिलाया, “ठीक है। अलग-अलग कमरे मंजूर हैं। बुक कर दीजिए।”


कुछ ही मिनटों में दो थेरेपिस्ट आ गए। गठीले बदन वाला, लंबा-चौड़ा पुरुष मसाजर ललिता की तरफ बढ़ा। और एक बेहद आकर्षक, गठीली महिला मसाजर मेरी तरफ आई।


मैनेजर ने इशारा किया। ललिता को दाईं ओर के गलियारे वाले कॉटेज की तरफ और मुझे बाईं ओर भेज दिया गया।


ललिता जाते-जाते एक बार मुड़ी। उसकी आँखों में संकोच, डर और हल्की सी उत्तेजना साफ दिख रही थी। गाउन के अंदर उसके स्तन काँप रहे थे। मैंने मुस्कुराकर सिर हिलाया।


फिर दोनों अलग-अलग कमरों के रोमांच की ओर बढ़ गए।


फीमेल मसाजर के पीछे-पीछे मैं बाईं ओर के कॉटेज में दाखिल हुआ। दरवाज़ा धीरे से बंद होते ही बाहर की सारी आवाजें कट गईं। कमरे का माहौल बेहद शांत, मद्धम और कामुक था।


दीवारों पर पीली मद्धम लाइटें जल रही थीं। एक कोने में अरोमा तेल सुलग रहा था - चंदन और जैतून की नशीली खुशबू हवा में घुली हुई थी। बीच में बड़ा, आरामदायक मसाज बेड लगा था, जिस पर सफेद साफ चादर बिछी थी।


मेरी थेरेपिस्ट का नाम रीना था। गठीला, सुडौल बदन। तीखी कमर, गोल चूतड़ और टी-शर्ट के अंदर साफ उभरते स्तन।


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उसने पेशेवर मुस्कान के साथ कहा, “सर, टी-शर्ट और लोअर उतारकर पेट के बल लेट जाइए। मैं तेल लेकर आती हूँ।”


मैंने कपड़े उतारे। सिर्फ काले अंडरवियर में बेड पर लेट गया। पलंगतोड़ पान का असर अभी भी रगों में दौड़ रहा था। लंड हल्का सख्त हो चुका था। थोड़ी देर में रीना वापस आई। गुनगुना जैतून और सैंडलवुड का तेल लेकर।


जब उसने पहली बार अपनी नर्म लेकिन मजबूत हथेलियाँ मेरी पीठ पर रखीं, तो पूरे शरीर में सिहरन दौड़ गई। शुरुआत के पंद्रह मिनट उसने पूरी तरह प्रोफेशनल अंदाज में काम किया।


उँगलियाँ रीढ़ की हड्डी के दोनों तरफ दबाव डाल रही थीं। कंधों के अकड़े हुए मांसपेशियों को गूंथ रही थीं। पहाड़ों की थकान जैसे धीरे-धीरे पिघल रही थी। लेकिन उसके हाथों का स्पर्श सामान्य नहीं लग रहा था। जानबूझकर धीमा और गहरा।


पीठ, कंधों और पैरों की मालिश करते हुए रीना मखमली आवाज में बात कर रही थी।


“सर, आप इंदौर से हैं ना? आपकी वाइफ बहुत खूबसूरत हैं… बिल्कुल मॉडल जैसी।” मैंने हाँ में जवाब दिया। बातें धीरे-धीरे अनौपचारिक होती गईं।


जब उसने मुझसे सीधा लेटने को कहा, तो माहौल बदल गया। अब रीना ने मेरी छाती और पेट पर तेल लगाया।


उँगलियाँ सिर्फ थकान मिटाने के लिए नहीं थीं। वो जानबूझकर सहला रही थी। निप्पल्स के आसपास घुमाव बना रही थी। मेरा लंड अब पूरी तरह खड़ा हो चुका था। अंडरवियर में साफ टेंट बन गया था।


रीना ने मेरी आँखों में देखा। एक छोटी सी शरारती मुस्कान दी और धीरे से अंडरवियर के इलास्टिक पर उँगलियाँ फेरते हुए फुसफुसाई, “सर… थोड़ा एक्स्ट्रा रिलैक्सेशन चाहिए क्या?”


मैंने कुछ नहीं बोला। सिर्फ सिर हिलाया।


रीना ने बिना देर किए सधे हाथों से अंडरवियर नीचे सरका दी। मेरा मोटा, नसों से भरा लंड झटके से बाहर निकल आया। सिर चमक रहा था। रीना की आँखें थोड़ी बड़ी हो गईं।


उसने और तेल लिया और जाँघों से शुरू करते हुए धीरे-धीरे ऊपर आई। जब उसकी रेशमी हथेलियों ने पहली बार मेरे लंड को अपनी गिरफ्त में लिया तो मेरे मुँह से लंबी आह निकल गई।


“आह्ह… हाँ… ऐसे…”


वो दोनों हाथों से लयबद्ध तरीके से ऊपर-नीचे करने लगी। कभी हथेली से पूरा लपेट लेती, कभी सिर्फ अंगूठे और उँगलियों से सिर को सहलाती। तेल की चिकनाहट और उसके हाथों की गर्माहट ने मुझे बेकाबू कर दिया।


 मेरी कमर अपने आप ऊपर उठने लगी।


रीना यहीं नहीं रुकी। उसकी खुद की साँसें भारी हो चुकी थीं। उसने कुर्ती के बटन एक-एक करके खोले और उतार दी। फिर ब्रा। उसके गोल, सख्त स्तन बाहर आ गए। निप्पल काले और तने हुए।


उसने पैंटी भी फुर्ती से उतार दी। अब वो पूरी तरह नंगी थी। बेड पर मेरे ऊपर घुटनों के बल चढ़ गई।


उसने खुद को आगे बढ़ाया और अपने होठ मेरे होठों पर रख दिए। गहरा, गीला, भूखा किस। जीभ अंदर तक घुस आई। मैंने उसके स्तनों को दोनों हाथों में भर लिया और निप्पलों को उँगलियों से मसलने लगा। रीना कराह उठी।


फिर उसने मेरे लंड को पकड़ा, अपनी पहले से गीली चूत के मुहाने पर टिकाया और धीरे-धीरे बैठने लगी। टाइट दीवारें लंड को सेंकती हुई अंदर खींचती चली गईं।


जब पूरा अंदर तक चला गया तो दोनों ने एक साथ साँस छोड़ी।


“उम्मम्म… इतना मोटा… पूरा भर गया…” रीना ने आँखें बंद करके कहा।


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वो ऊपर-नीचे होने लगी। पहले छोटे-छोटे स्ट्रोक्स, फिर लंबी और गहरी हरकतें। हर बार जब वो नीचे बैठती तो उसके चूतड़ मेरे जाँघों से पटते। मैंने कमर उठा-उठाकर नीचे से धक्के मारने शुरू कर दिए। छप-छप-छप की आवाज कमरे में गूँजने लगी।


मैंने उसके एक स्तन को मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा। दाँतों से निप्पल हल्का काटा। रीना की रफ्तार तेज हो गई। वो मेरे सीने पर हाथ टिकाए हुए जोर-जोर से उछल रही थी। पसीने की बूँदें उसके स्तनों से मेरे शरीर पर टपक रही थीं।


“आह्ह… और जोर से… ठोक… मेरी चूत में… आगाह…”


बाहर ललिता के कमरे में क्या हो रहा होगा… यह ख्याल आकर मेरी उत्तेजना और बढ़ा रहा था। मैं और बेकाबू होकर नीचे से धक्के मारने लगा। रीना की चूत लंड को चूस रही थी।


दस-पंद्रह मिनट की इस गंदी, तेज चुदाई के बाद सहनशक्ति जवाब देने लगी। रीना ने आखिरी कुछ स्ट्रोक्स बेहद गहरे और तेज लिए। मैं कंडोम में जोर से झड़ गया। रीना भी लंबी सिसकारी भरते हुए मेरे ऊपर ढह गई।


हम दोनों कुछ मिनट तक हांफते रहे। फिर रीना ने उठकर तौलिया दिया। मैंने खुद को साफ किया, कपड़े पहने। शरीर तरोताजा था, लेकिन मन में एक अजीब सा रोमांच और अधूरापन था।


जब मैं कमरे का दरवाजा खोलकर लॉबी की तरफ निकला, तो ललिता पहले से एक सोफे पर बैठी मेरा इंतजार कर रही थी।


उसके गालों पर गहरी लाली थी। बाल बिखरे हुए। आँखों में घबराहट, संकोच और एक साफ नशा। वो रह-रहकर अपने गाउन के कोनों को उँगलियों से मरोड़ रही थी। जैसे कोई बड़ा राज छुपाए बैठी हो।


पार्लर का बिल चुकाने के बाद हम टैक्सी में बैठे। सन्नाटा गहरा था।


ललिता खिड़की से बाहर पहाड़ों की तरफ देख रही थी, लेकिन उसकी साँसें साफ तेज चल रही थीं। उसके हाथ ठंडे मौसम में भी गर्म और हल्के पसीने से गीले थे।


मुझसे रहा नहीं गया। मैंने उसका हाथ पकड़ा और सीधे पूछा, “ललिता… सच-सच बता। तेरे कमरे में क्या-क्या हुआ? उस मेल मसाजर ने कैसे मालिश की? सब विस्तार से बता।”


ललिता ने चौंककर मेरी तरफ देखा। गाल और लाल हो गए। नजरें चुराईं। फिर बहुत धीमी, काँपती आवाज में बोलना शुरू किया। जैसे वो खुद को दोबारा उस कमरे में महसूस कर रही हो।



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