माँ की पहली लंड चूसाई बेटे के संग!
Family Sex Kahani : जवान बेटे ने रात में विधवा माँ के दबाए नंगे स्तन, गीली चूत में की उंगली, फिर प्यासी माँ ने शर्म छोड़कर मुंह में लिया बेटे का मोटा लंड!
मेरा नाम आर्यन है। उम्र 20 साल। पुणे के एक छोटे से किराए के फ्लैट में माँ के साथ रहता हूँ। पापा को ढाई साल हो गए गुजरे। तब से घर में सिर्फ हम दो ही हैं। मकान मालिक शायद ही कभी आता हो।
माँ का नाम सुनीता। चालीस साल की।
लेकिन शरीर ऐसा लगता है जैसे अभी भी पैंतीस की हों। गोरी चमकदार त्वचा, 36 के भारी गोल स्तन जो साड़ी के ब्लाउज में हमेशा तनाव में रहते, 30 की पतली कमर और 38 की मोटी, गोल गांड जो नाइटी में हिलती-डुलती रहती है।
मैं जब भी उन्हें देखता, मेरा लंड बिना किसी इजाजत के तन जाता।
पापा के जाने के बाद लंबे समय तक माँ उदास रहीं। रोती थीं, खाना नहीं खाती थीं। धीरे-धीरे समय ने सब कुछ सामान्य कर दिया। हम दोनों एक ही कमरे में सोने लगे - दो अलग बिस्तर, लेकिन बहुत पास।
रात को बातें करते, पुरानी यादें साझा करते। कभी-कभी माँ मेरा सिर अपने गोद में रखकर बाल सहलातीं। उस स्पर्श में मुझे कुछ और ही महसूस होता।
एक रात मेरी नींद अचानक खुल गई। माँ के बिस्तर पर उनका दुपट्टा पूरी तरह सरक चुका था। ब्लाउज का एक हुक खुला हुआ था और एक स्तन का ऊपरी हिस्सा साफ दिख रहा था।
गुलाबी निप्पल की हल्की छाया। मेरा लंड तुरंत सख्त हो गया।
मैं बाथरूम गया, मुट्ठ मारी, लेकिन मन शांत नहीं हुआ। सुबह तक माँ के स्तनों का ख्याल सिर में घूमता रहा। नाश्ते में भी उनकी तरफ देखते हुए मेरी नजर बार-बार उनके ब्लाउज पर जाती।
अगले कई दिनों तक यही हाल रहा। सुबह जब माँ नहाकर निकलतीं तो गीले बालों और नाइटी में उनका बदन और भी कामुक लगता। कभी वो किचन में झुककर बर्तन धो रही होतीं तो उनकी गांड नाइटी के अंदर से पूरी तरह उभर आती।
मैं जानबूझकर देर तक खड़ा रहकर देखता। माँ कभी-कभी मुड़कर देखतीं तो मैं नजरें फेर लेता, लेकिन दिल जोर-जोर से धड़कता।
एक दोपहर की बात है। गर्मी बहुत थी। माँ ने हल्की नाइटी पहन रखी थी। कोई ब्रा नहीं। स्तन नाइटी के अंदर स्वतंत्र रूप से हिल रहे थे। मैं टीवी देख रहा था लेकिन नजर बार-बार उन पर जा रही थी।
माँ मेरे पास आकर बैठ गईं। उनका शरीर मेरे शरीर से छू रहा था। नाइटी इतनी पतली थी कि उनके स्तन का नरम स्पर्श मुझे साफ महसूस हो रहा था। मेरा लंड तन गया। मैंने पैर बदल लिए ताकि माँ को पता न चले।
लेकिन माँ की नजर नीचे गई। उन्होंने कुछ नहीं कहा, बस हल्के से मुस्कुरा दीं और उठकर चली गईं। उस मुस्कान ने मुझे और बेचैन कर दिया।
रात को सोते समय मैंने ध्यान से देखा। माँ का दुपट्टा फिर सरकने लगा था। मैंने हिम्मत नहीं की। बस लेटा-लेटा कल्पना करता रहा कि एक दिन उनके स्तन मेरे मुँह में होंगे, उनकी चूत मेरे लंड को निगलेगी।
अगली रात मैंने प्लान बनाया। मैं सिर्फ बॉक्सर पहनकर सोया। आधी रात को जब माँ वॉशरूम गईं, मैंने बॉक्सर नीचे सरका दिया और लंड बाहर निकालकर लेटा रहा।
आँखें बंद, साँसें सामान्य रखने की कोशिश। माँ वापस आईं तो रुकीं। कमरे में हल्की रोशनी थी। मेरा मोटा, नसों वाला लंड सीधा खड़ा बिस्तर पर पड़ा था।
माँ कुछ पल वहीं खड़ी रहीं। मैंने महसूस किया कि उनकी साँसें बदल गई हैं। फिर वो अपने बिस्तर पर लेट गईं। लंबी खामोशी। अचानक मुझे लगा कोई चीज मेरे लंड के पास आ रही है।
माँ की उंगलियाँ। पहले बहुत हल्के से छुआ। जैसे जाँच रही हों कि मैं सच में सोया हूँ या नहीं। मैं बिलकुल स्थिर रहा।
फिर उन्होंने लंड को धीरे से पकड़ लिया। हथेली गरम और थोड़ी काँप रही थी। ऊपर से नीचे तक एक बार सहलाया। फिर दूसरी बार। मैंने अपनी साँस रोक ली।
माँ ने अंगूठे से टॉप पर हल्के से दबाया। पानी की एक बूँद निकल आई। माँ की उंगली वहाँ रुक गई। उन्होंने उसे फैलाया। फिर अचानक हाथ हटा लिया और करवट बदल ली।
मेरा पूरा शरीर जल रहा था। मैं पूरी रात उलटा-पलटा रहा। सुबह माँ सामान्य व्यवहार कर रही थीं। नाश्ता बनाया, मुस्कुराईं, पूछा नींद कैसी आई। लेकिन उनकी आँखों में एक नई चमक थी।
उस दिन से घर का माहौल बदल गया। छोटी-छोटी चीजें होने लगीं। कभी माँ जानबूझकर मेरे सामने नाइटी के बटन खुले रखतीं। कभी सोते समय उनका हाथ मेरे बिस्तर पर आ जाता।
एक रात उन्होंने मेरी तरफ पीठ करके करवट ली तो उनकी गांड मेरे लंड से छू गई। मैं हिला नहीं। माँ भी नहीं हिलीं। दोनों जानबूझकर वैसे ही पड़े रहे। मेरा लंड उनकी गांड की नरम गर्माहट महसूस कर रहा था।
अगली रात और आगे बढ़ी। आधी रात को मैं जगा तो माँ का दुपट्टा पूरी तरह हट चुका था। दोनों स्तन बाहर थे। मैंने धीरे से हाथ बढ़ाया और एक स्तन को छुआ।
माँ की साँस तेज हुई लेकिन उन्होंने आँखें नहीं खोलीं। मैंने निप्पल को अंगूठे से सहलाया। वो सख्त हो गया। मैंने और हिम्मत करके दोनों स्तनों को हल्के हाथों से दबाना शुरू कर दिया।
माँ की साँसें अब साफ तेज चल रही थीं। फिर भी वो “सोई” हुई थीं। ये Kamvasna वाली XXX Antarvasana Hindi Sex Stories आप GaramKahani.com पर पढ़ रहे है।
मैं और करीब गया। उनकी नाभि पर होंठ रख दिए। धीरे-धीरे जीभ फेरी। माँ का पेट सिहर उठा। मैंने साड़ी का पल्लू और ऊपर सरकाया। लाल पैंटी नजर आई।
गीली जगह पर हल्का धब्बा था। मैंने पैंटी के ऊपर से उंगली फेरी। माँ की टांगें हल्की सी खुल गईं।
तभी माँ की आँखें खुल गईं!!
माँ की आँखें खुली हुई थीं। कमरे में हल्की रोशनी में उनकी पुतलियाँ मेरे चेहरे पर टिकी थीं।
मैंने हाथ नहीं हटाया। उनका स्तन अभी भी मेरी हथेली में था। दोनों की साँसें एक-दूसरे से मिल रही थीं। लंबी खामोशी।
माँ ने धीरे से कहा, आवाज में गुस्सा कम और थकान ज्यादा थी, “आर्यन… यह गलत है। मैं तेरी माँ हूँ।”
मैंने जवाब नहीं दिया। बस उनके निप्पल को अंगूठे से फिर से सहलाया। माँ की पलकें झपक गईं। उनके होंठ थोड़े खुल गए।
मैंने और हिम्मत करके दूसरा हाथ भी उनके दूसरे स्तन पर रख दिया। दोनों भारी, गरम स्तन अब मेरे हाथों में थे। मैंने धीरे-धीरे दबाना शुरू किया।
माँ ने आँखें बंद कर लीं। “मत कर… बेटे…” उनकी आवाज काँप रही थी। लेकिन उन्होंने मेरा हाथ नहीं हटाया।
मैं और करीब खिसक गया। मेरा तना हुआ लंड उनकी जांघ से छू रहा था। माँ ने महसूस किया। उनकी साँस एक पल के लिए रुक गई। मैंने अपना माथा उनके माथे से सटाया। “माँ… कल रात तुमने छुआ था। आज भी छूना चाहती हो। मैं भी…”
माँ चुप रहीं। उनकी साँसें मेरे चेहरे पर पड़ रही थीं। मैंने धीरे से उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। बहुत हल्का सा। माँ ने प्रतिक्रिया नहीं दी। फिर दूसरा किस। इस बार थोड़ा गहरा। माँ के होंठ नरम थे।
मैंने निचला होंठ हल्के से चूसा। माँ की सिसकारी उनके गले में ही दब गई।
मेरे हाथ अब उनके स्तनों पर और सक्रिय हो गए। निप्पल सख्त हो चुके थे। मैंने एक निप्पल को उंगलियों में लेकर हल्के से मरोड़ा। माँ का शरीर सिहर उठा। “आह्ह…” बहुत हल्की आवाज निकली।
मैंने ब्लाउज के बाकी हुक भी खोल दिए। ब्रा के ऊपर से ही स्तन मसलता रहा। फिर ब्रा का हुक पीछे से खोला। माँ ने एक बार मेरा हाथ पकड़ा, लेकिन पकड़ ढीली थी। मैंने ब्रा आगे सरका दी।
उनके नंगे स्तन अब पूरी तरह मेरे सामने थे। भारी, गोल, और निप्पल पूरी तरह खड़े।
मैंने झुककर एक निप्पल मुँह में ले लिया। गरम और थोड़ा नमकीन। मैंने जीभ घुमाई और हल्के से चूसा। माँ का हाथ मेरे बालों में चला गया।
उन्होंने जोर से नहीं दबाया, बस रख दिया। मैं दूसरा निप्पल भी मुँह में ले लिया। दोनों स्तनों को बारी-बारी से चूसने लगा। कभी हल्का काटता, कभी जोर से चूसता।
माँ की कराहें अब दब नहीं पा रही थीं। “आह्ह्ह… आर्यन… बस… इतना…”
मैं रुका नहीं। एक हाथ से उनके स्तन मसलता रहा और दूसरा हाथ उनकी साड़ी के अंदर सरका दिया। ये Maa Bete Ki Chudai Ki Kahani आप Garamkahani.com पर पढ़ रहे है।
पेट की नरम त्वचा, फिर नाभि, फिर और नीचे। मेरी उंगलियाँ लाल पैंटी के इलास्टिक तक पहुँच गईं। माँ की टांगें हल्की सी तन गईं लेकिन खुली नहींं।
मैंने पैंटी के ऊपर से उनकी चूत पर हथेली रख दी। गरम और थोड़ी गीली। मैंने अंगूठे से बीच वाली जगह सहलाई। माँ की कमर हल्की सी उठी। “आह्ह्ह… वहाँ… मत छू…”
लेकिन उनकी आवाज में मनाही कम और अनुरोध ज्यादा था। मैंने पैंटी के किनारे से उंगली अंदर सरकाई। बालों वाली, गरम चूत। मैंने एक उंगली धीरे से उन दोनों होंठों के बीच फेरी। माँ की साँसें अब पूरी तरह बिखर चुकी थीं।
मैंने उंगली और अंदर की तरफ धकेली। सिर्फ आधा पोर। माँ की चूत ने मेरी उंगली को कस लिया। बहुत टाइट।
मैंने धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। माँ का एक हाथ मेरी कलाई पर आ गया। उन्होंने रोकने की बजाय मेरी उंगली को और अंदर धकेल दिया।
“आह्ह्ह… आर्यन…”
मैं उनकी चूत में उंगली करता रहा और स्तन चूसता रहा। थोड़ी देर बाद माँ का शरीर काँपने लगा। उनकी जांघें मेरे हाथ को दबाने लगीं। वो जोर से साँस लेते हुए चरम पर पहुँचीं। उनका पानी मेरी उंगली पर लग गया।
माँ हाँफ रही थीं। आँखें बंद। चेहरे पर शर्म और सुकून दोनों थे। मैंने उंगली निकाली और उनकी जांघ पर पोंछी। फिर उनके करीब लेट गया। मेरा लंड अभी भी तना हुआ उनके पेट से छू रहा था।
लंबी खामोशी के बाद माँ ने आँखें खोलीं। मेरी आँखों में देखा। फिर धीरे से नीचे देखा — मेरे बॉक्सर की तरफ। लंड का उभार साफ दिख रहा था। माँ ने होंठ भींचे। फिर उनका हाथ धीरे-धीरे नीचे गया।
उन्होंने बॉक्सर के ऊपर से ही मेरे लंड को पकड़ लिया। हल्के से दबाया। फिर बॉक्सर के इलास्टिक में उंगलियाँ डालीं और नीचे खींचने लगीं। मेरा मोटा लंड बाहर निकल आया। माँ की आँखें थोड़ी चौड़ी हो गईं।
उन्होंने लंड को देखा। फिर मेरी आँखों में देखा। कोई शब्द नहीं। बस हाथ से उसे पकड़ लिया। ऊपर से नीचे तक धीरे-धीरे सहलाया। टॉप पर जो पानी लग चुका था उसे अंगूठे से फैलाया।
फिर और नीचे जाकर अंडकोष को हल्के हाथों से सहलाया।
मैं कराह उठा। “आह्ह्ह… माँ…”
माँ ने मेरी तरफ देखा। उनकी आँखों में अब गुस्सा नहीं था। कुछ और था - भूख। उन्होंने अपना शरीर मेरे करीब खिसकाया। उनके स्तन मेरे सीने से दब गए। फिर वो धीरे-धीरे नीचे सरकने लगीं।
उनके बाल मेरे पेट पर गिर रहे थे। उन्होंने लंड के पास मुँह लाया। गरम साँसें टॉप पर पड़ रही थीं। पहले सिर्फ जीभ निकाली और नोक को एक बार चाटा। फिर दोबारा। धीरे-धीरे। गोलाकार।
मेरा हाथ उनके बालों में चला गया। माँ ने और हिम्मत करके नोक को मुँह में ले लिया। गरम, गीला अहसास। उन्होंने हल्के से चूसा। फिर और अंदर लिया। आधा लंड उनके मुँह में चला गया।
“उम्म…” की आवाज निकली उनके गले से। ये xxx Antarvasna Desi Sex Story आप garamkahani.com पर पढ़ रहे है।
माँ ने सिर ऊपर-नीचे करना शुरू कर दिया। पहली बार था उनके लिए, लेकिन वो कोशिश कर रही थीं। कभी दाँत लग जाते, तो वो रुककर फिर से नरम हो जातीं। लार उनके मुँह से बहकर मेरे लंड पर लग रही थी।
एक हाथ से वो लंड के निचले हिस्से को हिला रही थीं, दूसरे से मेरे अंडकोष।
मैं बिस्तर पर लेटा उनकी हर हरकत महसूस कर रहा था। माँ कभी मेरी आँखों में देखतीं, कभी आँखें बंद करके और गहराई तक लेने की कोशिश करतीं।
कमरे में सिर्फ उनकी चूसने की आवाजें और मेरी भारी साँसें गूंज रही थीं।
माँ का मुँह मेरे लंड पर काम कर रहा था। उनकी साड़ी अभी भी कमर के आसपास उलझी हुई थी, पेटीकोट ऊपर उठा हुआ।
ब्रा के हुक खुले थे और कप उनके स्तनों से सरककर बाँहों तक आ गए थे, लेकिन पूरी तरह उतारे नहीं थे। लाल पैंटी अभी भी उनके हिप्स पर सही सलामत थी। बस एक तरफ थोड़ी खिसकी हुई थी जहाँ मेरी उंगली पहले गई थी।
माँ ने लंड को मुँह से निकाला। लार की एक लंबी लकीर उनके निचले होंठ से मेरे टॉप तक टंगी रही। उन्होंने जीभ से उसे तोड़ा और फिर से नोक पर ले गईं। इस बार और धीरे। जैसे चख रही हों।
उनकी आँखें ऊपर मेरी तरफ थीं। शर्म अब उनकी पुतलियों में कम रह गई थी। उसकी जगह एक भूखी सी चमक थी।
“उम्म…” उन्होंने हल्के से आवाज निकाली और नोक को फिर मुँह में ले लिया। इस बार थोड़ा और अंदर। गरम जीभ लंड के नीचे वाली नस पर फिरने लगी। माँ ने अपना एक हाथ मेरे निचले हिस्से पर रखा और हल्के-हल्के हिलाने लगीं।
दूसरा हाथ उनके अपने स्तन पर था — खुले हुए ब्रा के ऊपर से ही मसल रही थीं।
मैंने उनके बालों में उंगलियाँ फेर दीं। “माँ… ऐसे ही… धीरे… आह्ह्ह…”
माँ ने मेरी बात सुनी और रफ्तार थोड़ी बढ़ा दी। अब उनकी गति नियमित हो गई थी। ऊपर-नीचे। कभी सिर्फ आधा, कभी जितना गला अनुमति देता।
जब लंड उनके गले के पास पहुँचता तो उनकी आँखों में पानी आ जाता, लेकिन वो रुकती नहीं थीं। लार अब उनके ठोड़ी से टपककर मेरे अंडकोष तक पहुँच रही थी।
मैंने देखा कि उनकी पैंटी के बीच का हिस्सा और गहरा गीला हो चुका था। लाल कपड़ा चूत पर चिपक गया था। माँ कभी-कभी अपनी जांघें रगड़ रही थीं। जैसे खुद को शांत करने की कोशिश कर रही हों।
मैंने धीरे से हाथ बढ़ाया और उनकी पैंटी के ऊपर से ही चूत सहलाई। माँ के मुँह से “उम्मफ्फ” की आवाज निकली। लंड अभी उनके मुँह में था। मैंने अंगूठे से क्लिट वाली जगह पर हल्के गोला बनाए।
माँ की कमर हिलने लगी। वो लंड चूसते हुए ही मेरे हाथ के खिलाफ अपनी चूत दबाने लगीं।
“आह्ह्ह… माँ… तुम्हारी पैंटी पूरी गीली हो गई है…” मैंने फुसफुसाया।
माँ ने लंड बाहर निकाला। साँसें फूल रही थीं। उनके होंठ लाल और चमकदार थे। “चुप… कर… बेटे…” आवाज में मनाही नहीं थी। बस शर्म और मजा दोनों मिले हुए थे।
फिर उन्होंने फिर से लंड मुँह में ले लिया। इस बार और जोश से। अब वो दोनों हाथ इस्तेमाल कर रही थीं — एक लंड हिला रही थीं, दूसरा मेरे अंडकोष सहला रही थीं। उनकी जीभ लगातार घूम रही थी।
कभी टॉप के छेद में घुसने की कोशिश, कभी नीचे वाली नस को चाटना। ये Family Free Hindi Sex Kahani आप GaramKahani.com पर पढ़ रहे है।
मैं नियंत्रण खोने के करीब था। कमर अपने आप आगे बढ़ने लगी। माँ ने मेरी जांघ पकड़ ली और मुझे और अंदर खींचने लगीं। उनकी आँखें अब पूरी तरह बंद थीं। वो पूरी तरह डूबी हुई थीं।
मैंने उनकी पैंटी के इलास्टिक में उंगलियाँ डालीं। इस बार और अंदर तक। दो उंगलियाँ सीधे उनकी गीली चूत में चली गईं। माँ के मुँह से लंड छूटते हुए लंबी कराह निकली।
“आह्हhhhh… आर्यन… उंगलियाँ… अंदर…”
मैंने उंगलियाँ तेजी से चलानी शुरू कर दीं। माँ का मुँह फिर से मेरे लंड पर आ गया। अब वो चूस भी रही थीं और मेरी उंगलियों पर झड़ने के करीब भी थीं। उनका शरीर काँप रहा था।
पैंटी का गीला कपड़ा मेरी हथेली से चिपक गया था।
थोड़ी देर बाद माँ का शरीर अकड़ गया। उन्होंने लंड को गहराई तक ले लिया और गले से आवाज निकाली। उनकी चूत ने मेरी उंगलियों को जोर से जकड़ लिया। गरम पानी पैंटी के अंदर ही बह निकला।
माँ मेरे लंड को मुँह में लिए हुए ही काँपती रहीं।
जब वो शांत हुईं तो लंड बाहर निकाला। चेहरा लाल था, आँखों में आँसू थे, होंठ काँप रहे थे। उन्होंने मेरे लंड को फिर से चाटा - धीरे-धीरे, प्यार से। फिर ऊपर मेरी तरफ देखा।
“अब… काफी है… बेटे…” उनकी आवाज काँप रही थी। “अगर और किया… तो मैं… खुद को नहीं रोक पाऊँगी।”
मैंने उनके बाल सहलाए। मेरा लंड अभी भी तना हुआ उनके गाल से छू रहा था। माँ ने उसे एक बार फिर चूमा, फिर मेरे पेट पर सिर रख दिया। ब्रा अभी भी उनके बाँहों में उलझी थी, पैंटी गीली और तिरछी। साड़ी कमर तक ही थी।
कमरे में सिर्फ हमारी भारी साँसें चल रही थीं। माँ मेरे पेट पर उंगलियाँ फेर रही थीं। कभी-कभी उनका हाथ नीचे जाकर मेरे लंड को हल्के से छू लेता, जैसे पुष्टि कर रही हों कि वो अभी भी सख्त है।
लंबी खामोशी के बाद माँ ने धीरे से कहा, “आर्यन… यह सिर्फ आज रात की बात थी। सुबह… सब भूल जाना।”
मैंने कुछ नहीं कहा। बस उनका हाथ पकड़ लिया। माँ ने विरोध नहीं किया। वो मेरे पास ही लेटी रहीं। उनके गीले स्तन मेरे बाजू से चिपक रहे थे। पैंटी का गीलापन उनकी जांघ पर लग रहा था।
मैं छत की तरफ देखता रहा। मन में एक ही बात घूम रही थी - यह अंत नहीं है। यह तो सिर्फ शुरुआत है।
माँ की साँसें धीरे-धीरे नियमित होने लगीं। लगता था वो सोने वाली हैं। लेकिन उनका एक हाथ अभी भी मेरे लंड के पास था। कभी-कभी उंगलियाँ हिल जातीं। जैसे नींद में भी वो उसे छोड़ना नहीं चाहती थीं।
आगे की कहानी : "पोर्न दिखाकर माँ को लंड चूसना सिखाया!"
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Hunter hina
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