माँ बनी बेटे की रंडी - सहेली की चूत बचाने के लिए!
Family Sex Stories : प्यासी माँ ने सहेली की चूत बचाने के चक्कर में चूसा बेटे का 7 इंची लंड! फिर रंडी की तरह कुतिया बनकर चुदवाई अपनी चूत! और बन गई घरेलू रंडी!
अनुज एक शांत और संवेदनशील स्वभाव का लड़का था, जो अपनी माँ निशा से बहुत प्यार करता था। उसके जीवन में उसकी माँ ही सब कुछ थीं, क्योंकि बचपन से ही उसने अपने पिता को नहीं देखा था।
निशा ने अकेले ही उसे पाला-पोसा, उसे हर खुशी देने की कोशिश की।
अनुज अपनी माँ को आदर्श मानता था और उनके हर फैसले पर आँख बंद करके भरोसा करता था। उनके बीच एक गहरा रिश्ता था, जिसमें सम्मान और अपनापन दोनों शामिल थे। लेकिन एक दिन ऐसा आया।
जिसने उसकी सोच को झकझोर कर रख दिया और उसके स्वभाव में वासना , हवस, चुदास जैसे शब्द घोल दिए। एक शाम जब अनुज स्कूल से जल्दी घर लौट आया, तो उसने अपने घर का दरवाज़ा आधा खुला पाया।
वह चुपचाप अंदर गया और अपनी माँ को आवाज़ देने ही वाला था कि उसकी नज़र ड्रॉइंग रूम में बैठी दो परछाइयों पर पड़ी। वहाँ उसकी माँ निशा अपनी करीबी दोस्त विनिता के साथ बैठी थीं, और दोनों के बीच एक गहरी अनदेखी करीबी थी।
विनीता आंटी धीरे धीरे उसकी माँ की साड़ी को पैरों से उठाकर चूमते चूमते जांघों की तरफ बढ़ रही थी, निशा के जिस्म से पल्लू हटा हुआ था, उसका ब्लाउज बेड के नीचे गिरा पड़ा था, उसकी 38 की चूंची ऊपर नीचे हवस भरी सांसों से मटक रही थी।
अनुज ने देखा उसकी माँ, विनीता के बाल सहला रही है और विनीता जांग को चूमते हुए चूत से पैंटी को हटा रही है, कुछ ही पलो में उनकी काली खुली चूत आजाद हो गई उसमें से रसीला पानी अब विनीता की ज़बान पर बह रहा था।
विनीता के हाथ निशा के चूंचे को दबा दबा उनके अकेलेपन को दूर कर रहे थे।
अनुज की माँ अपनी टांगे विनीता के गले में लगाकर उसे अपनी चूत में लेने की कोशिश कर रही थी,।
पहली बार अनुज को अपनी लन्ड में कुछ हलचल महसूस हुई 18 साल की उमर में ये पहली बात था जब उसने दो औरतों के जिस्म में पेरो से ऊपर भी कुछ देखा था।
विनीता बिल्कुल नंगी निशा के ऊपर थी एक एक कर के निशा के कपड़े भी उसके जिस्म को छोड़ रहे थे, विनीता ने निशा के बाल खींचे और उसे अपनी गोद में बैठाया, उसके बाद उसकी ब्रा को उतार कर चूंची पर काट कर अपनी निशानी छोड़ी।
निशा बस “आगाह! “ कह कर अपने मजे को बयान कर पाई। दोनों ने पुराने प्रेमियों की तरह एक दूसरे के होठों को अपने होठों में दबाया और अपनी प्यासी चूत को चूत से रगड़ना शुरू करा।
अनुज अपने सामने अपनी माँ को अपनी सबसे प्यारी आंटी के साथ चूत रगड़ते देख रहा था, उसके लिए ये सब नया था वो बस अपने लन्ड उठते दर्द को दबाने की कोशिश कर रहा था।
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वे दोनों एक-दूसरे के नंगे जिस्म को थामे हुए थीं, आँखों में अपनापन और सहारा झलक रहा था। अनुज यह दृश्य देखकर ठिठक गया, उसकी समझ जैसे रुक गई।
उसके मन में कई सवाल उठने लगे—क्या उसकी माँ उससे कुछ छुपा रही थीं? क्या यह सही है?
उसे यह सब अजीब और गलत लगा, क्योंकि उसने ऐसा पहले कभी नहीं देखा था उसे अपने लन्ड में उठता तूफान अच्छा लग रहा था, अनुज ने देखना जारी रखा।
विनीता आंटी ने अपने हाथ मे एक खीरा पकड़ा हुआ था और वो निशा के मुंह में गले तक खीरे को डाल रही थी।
निशा भी उसे गले तक लेने की कोशिश कर रही थी, एक विनीता ने खीरे का एक हिस्सा अपने मुंह में दबाया और दूसरा हिस्सा निशा के मुंह में दिया निशा ने लेटी हुई थी और विनीता उसके ऊपर नंगी चढ़ी हुई थी।
विनीता के मुंह से निकलता हुआ रस खीरे पर फिसलते फिसलते उसके होठों पर लग रहा था जिसे निशा पी रही थी।
उसके बाद निशा ने खीरा हटाकर विनीता को अपनी तरफ खींच लिया और चूमने लगी विनीता रुक रुका अपने मुंह से अपने थूक वाला रस निशा के मुंह में टपका रही थी।
निशा ने वो खीरा दोनों जिस्मों के बीच से लेजाते हुए, दोनों की चूत के बीच में रख दिया, फिर धीरे धीरे विनीता अपनी चूत से धक्का लगाया और खीरा अनुज की माँ की चूत में उतर गया।
उनकी अआआह! निकल गई साथ ही विनीता भी हम्ममम, ओहह्ह्ह्ह! करती रह गई।
अनुज के सामने एक खीरा दोनों चूत की प्यास बुझा रहा था। ऊपर से विनीता नीचे से निशा खीरे को एक दूसरे की चूत में धकेल रहे थे।
दोनों ही आअआअ! ओहह्ह्ह्ह! हम्ममम, आगाह, ओहह्ह्ह्ह! अआह मेरी जान! हम्ममम, ओहह्ह्ह्ह आह! मेरी बाबू ओहह्ह्ह्ह! अच्छा लग रहा है, और तेज़ अआआह! की आवाज़ निकाल रहे थे।
अनुज ये सब देखते हुए अब अपने लन्ड को सहला रहा था, बिना कुछ सोचे बिना कुछ जाने अब वो अपनी पेंट के अंदर हाथ डाल चुका था, उसके सामने उसकी उमर से दुगनी दो नंगी औरते अपने जिस्म को रगड़ रही थी एक खीरे से चुदाई कर रही थी।
अचानक अनुज के लन्ड से पानी छोड़ दिया जिससे उसे जलन महसूस हुई उसके मुंह से आअआअह! की अजीब सी आवाज़ निकली जिससे दोनों की नज़र अनुज पर पड़ी अनुज की माँ निशा उसे देखकर दंग रह गई।
अनुज अपनी माँ से आँखें नहीं मिला पाया। वह बिना कुछ बोले चुपचाप अपने कमरे में चला गया।
उस रात उसने अपनी माँ से बात तक नहीं की और खुद में ही सिमट गया। उसके मन में एक अजीब सी दूरी और उलझन पैदा हो गई थी। वह समझ नहीं पा रहा था कि इस स्थिति को कैसे देखे।
साथ ही उसका लन्ड भी आज अजीब सख्ती में था, जिस की वजह से उसे दर्द भी हो रहा था। जब से वो कमरे में आया था तब से बस कपड़े बदलकर बिना कुछ खाए पिए वो अपनी नंगी माँ और आंटी के बारे में सोच रहा था।
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अगले कुछ दिनों में अनुज ने खुद को पूरी तरह बदल लिया। उसने खाना-पीना लगभग छोड़ दिया और किसी से बात करना भी बंद कर दिया। उसकी पढ़ाई पर भी असर पड़ने लगा और वह दिन-ब-दिन कमजोर होता गया।
निशा ने अपने बेटे में यह बदलाव देखा, लेकिन वह बात नहीं कर पा रही थी।
वे बार-बार उससे पूछतीं और कोशिश करती के वो उससे बात करे, लेकिन अनुज हर बार चुप रह जाता। उसकी खामोशी में दर्द और उलझन साफ झलकती थी। एक दिन जब अनुज की तबियत ज्यादा बिगड़ गई, तो निशा बहुत घबरा गईं।
उन्होंने डॉक्टर को बुलाया और उसकी देखभाल में लग गईं। डॉक्टर ने कहा कि यह सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक तनाव का असर है। यह सुनकर निशा का दिल बैठ गया।
उन्होंने ठान लिया कि अब वे अपने बेटे से खुलकर बात करेंगी। उन्हें एहसास हो गया था कि कहीं न कहीं उनसे कोई गलती हुई है।
उस रात निशा धीरे से अनुज के कमरे में गईं। कमरा अंधेरे में डूबा हुआ था और अनुज बिस्तर पर चुपचाप लेटा था। निशा उसके पास बैठ गईं और उसका हाथ थाम लिया।
उनकी आँखों में आँसू थे और आवाज़ में कंपकंपी। उन्होंने धीरे से कहा, “अनुज, मुझे पता है तुम मुझसे नाराज़ हो, लेकिन मुझे सच बताओ तुम मुझ से क्या जानना चाहते हो।” यह सुनकर अनुज की आँखें भर आईं।
कुछ पल की खामोशी के बाद अनुज ने हिम्मत जुटाई और कहा, “माँ, मैंने आपको उस दिन देखा था… विनिता आंटी के साथ वो सब आप क्या कर रही थी।” उसकी आवाज़ में दर्द और उलझन दोनों थे।
निशा समझ गईं कि यही वजह है उसके व्यवहार में बदलाव की।
उन्होंने गहरी साँस ली और उसे अपने पास बिठा लिया। अब समय था सच्चाई और समझ का। निशा ने बहुत शांत और प्यार भरे लहजे में कहा, “बेटा, हर इंसान को किसी न किसी सहारे की ज़रूरत होती है।
तुम्हारे पापा के जाने के बाद मैंने बहुत अकेलापन महसूस किया। विनिता मेरी बहुत पुरानी दोस्त है, जिसने हर मुश्किल में मेरा साथ दिया है।” उनकी बातों में सच्चाई और संवेदना थी।
अनुज ध्यान से सुन रहा था, उसकी आँखों में अब गुस्से की जगह जिज्ञासा थी। उन्होंने आगे कहा, “जो तुमने देखा, वो सिर्फ एक दोस्ती से बढ़कर एक भावनात्मक रिश्ता है। इसमें कोई गलत बात नहीं है, क्योंकि यह प्यार और सम्मान पर आधारित है।
मैं तुम्हें कभी दुखी नहीं देखना चाहती, लेकिन मैं भी एक इंसान हूँ, मुझे भी सहारे की ज़रूरत होती है।” यह कहते-कहते उनकी आँखों से आँसू बहने लगे। अनुज चुप था, लेकिन उसके मन में धीरे-धीरे बदलाव आने लगा था।
परन्तु उसके दिमाग में वही खीरे का चुदाई भर मंज़र घूम रहा था।
उसने पहली बार अपनी माँ को एक इंसान के रूप में समझने की कोशिश की इंसान से भी आगे एक औरत ओर औरत से भी आगे एक चुदाई की प्यासी औरत के रूप में न कि सिर्फ एक माँ के रूप में।
उसे एहसास हुआ कि उसकी माँ ने कितनी मुश्किलों में उसे पाला है। और शायद वह खुदगर्ज हो रहा था, उनकी भावनाओं को समझे बिना उन्हें जज कर रहा था। कुछ देर बाद अनुज ने धीरे से अपनी माँ का हाथ थाम लिया।
इस समय उसकी माँ बस एक सफेद नाइटी में थी, उन्होंने ब्रा या पैंटी नहीं पहनी थी। ये Maa Beta Family Sex Story आप Garam kahani पर पढ़ रहे है
निशा के नंगे चूंचे और काले निप्पल अनुज को साफ दिख रहे थे उसका गहरा गला अंदर के जज्बात छुपाने में असमर्थ था।
उसकी आँखों में अब नफरत नहीं, बल्कि समझ और अपनापन था साथ भी एक वासना का भी अब उसमें पैदा हो गया था। उसने कहा, “माँ, मुझे माफ कर दीजिए… मैं समझ नहीं पाया।”
निशा ने उसे गले से लगा लिया, जैसे उनकी दुनिया वापस मिल गई हो।
उस पल में दोनों के बीच की दूरी खत्म हो गई। अनुज ने भोलेपन से कहा माँ जब से मैंने तुमको और आंटी को देखा है तब से मेरे नीचे सुसु में बहुत दर्द हो रहा है, मुझसे चला भी नहीं जा रहा है।
निशा मुस्कुराई और बोली “कोई बात नहीं मेरी जान, तूने मेरी परेशानी समझी अब मैं तेरी परेशानी भी दूर कर दूंगी लेकिन वादा कर अब से मेरे विनीता और अपने रिश्ते के बारे में किसी से तू कोई बात नहीं करेगा वरना मेरा मारा मुंह देखेगा”।
अनुज ने हां में सर हिला दिया तो उसकी माँ ने खुशी से उसका माथा चूम लिया। अनुज को चूमने के बाद निशा ने उसे प्यार से पीछे कर के लिटा दिया।
उसे पीछे लिटाकर निशा अनुज के ऊपर चढ़कर बैठ गई और बोली “बस थोड़ा इंतज़ार कर मेरी जान! आज तुझे ज़िंदगी के एक अनूठे सुख का एहसास दूंगी मैं, शुरू में थोड़ा सहना होगा फिर पूरी ज़िंदगी आराम ही आराम है।”
अनुज हैरानी से अपनी माँ के चेहरे पर बदलते एहसास देख रहा था, फिर निशा ने धीरे धीरे अपने चेहरे को अनुज के करीब करा, पहले उसने गाल को चूमा, उसके बाद जीभ क गाल सहलाते हुए गर्दन पर ले गई फिर उसकी गर्दन को चूमना शुरू करा।
निशा ने पूछा “कैसा लग रहा है बेटा!” अनुज बोला “अच्छा लग रहा है माँ”। ये सुनकर निशा ने अपनी नाइटी उतारी और अपने नंगे जिस्म को अपने बेटे को दिखाने लगी।
उसने अनुज का हाथ लिया और अपनी मोटी चूंची पर रखा फिर बोली “तू पहले हमेशा जिद करता था इसे चूसने की, आज भी चुसले मेरे बच्चे।” फिर वो अनुज पर झुकी और उसके होठों को चूमने लगी अब अनुज भी अच्छे से जवाब दे रहा था।
निशा ने अनुज का चेहरा एक पल के लिए देखा फिर उसके होठों को अपने निप्पल की तरफ ले गई।
अनुज ने भी बिना संकोच अपनी माँ निप्पल चूसना शुरू कर दिए, निशा उसके बाल सहला रही थी उसके मुंह से ओहह्ह्ह्ह! अच्छा लग रहा है, और तेज़ अआआह! की आवाज़ निकल रही थी।
अनुज एक एक कर के दोनों चूंची को दबा दबा कर चूस रहा था, निशा ने अपने पूरे गठीले जिस्म को अनुज के ऊपर डाल कर उसे नीचे दबा लिया था, वो उसके होठ चूमते हुए नीचे जाने लगी।
नीचे जाते हुए वो गले को चूमती अनुज के छोटे छोटे निप्पल को चूमती, पेट को चूमती पर आखिरकार वो लन्ड पर पहुंची।
अनुज उसे भारी सांसों के साथ देख रहा था दोनों की आंखें मिली हुई थी, निशा ने अनुज की आंखों में देखते हुए लन्ड पर चूमा अनुज के मुंह से एक सिसकारी निकल गई।
फिर निशा उसकी टोपी को चूमती हुए लन्ड को मुंह में लेने लगी, अनुज ने अपनी माँ के बाल पकड़ लिए थे। अनुज भी लन्ड को उसके मुंह पर दबा रहा था।
निशा अनुज के लन्ड को होठों से दबा कर चूस रही थी अपने थूक से उसके लन्ड को चिकना बनाकर ऊपर नीचे कर रही थी।
फिर उसने प्यार से अपने बेटे को एक हवस भी मुस्कान दी और सारे कपड़े निकाल कर अनुज को नंगा कर दिया, फिर उसके लन्ड पर बैठकर चूत को घिसने लगी।
अनुज के मुंह से हम्ममम! ओहद माँ आह! क्या कर रही हो आप! अआह ओहो अआआह! आवाज़ निकल रही थी।
फिर निशा ने लन्ड को पकड़कर अपनी चूत के छेद पर लगाया फिर उसपर बैठकर अंदर ले गई। अनुज का लन्ड छोटा था फिर भी 6 इंच का था।
निशा बहुत समय से लन्ड नहीं ले पाई थी इसलिए चूत टाइट होने की वजह से अनुज के लन्ड का दर्द नहीं झेल पा रही थी।
टाइट चूत में मुश्किल से लन्ड अंदर आया दोनों माँ बेटे दर्द से कराहने लगे, दर्द की वजह से निशा अनुज को दबाकर लेट गई।
कुछ पल रुकने के बाद निशा ने अपन बेटे की आंखों में देखा और चूत को धकेलना शुरू करा, धीरे धीरे चुदाई आगे बढ़ने लगी। उसके मुंह से ओहह्ह्ह्ह! अआआह! आह! अनुज ओहह्ह्ह्ह अआह और तेज़ अआआह! की मादक आवाज़ आने लगी।
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निशा ने अपने होठों को अनुज के होठों के करीब रखा था जिससे हर धक्के पर दोनों के हाथ मिल जाते थे, दोनों की सांसे और आवाज़ एक सुर में निकल रही ही।
निशा तेजी से चूत के धक्के मार कर अपने बेटे को मर्द बना रही थी, और अनुज भी अपनी रफ्तार से अब जवाब दे रहा था, फिर निशा पलटी और उसने अनुज को ऊपर लेकर धक्के लगाने को कहा।
अनुज अपनी पूरी ताकत से Maa Ki Chudai कर रहा था निशा अपने बेटे के धक्कों पर ओहह्ह्ह्ह! अच्छा लग रहा है, और तेज़ अआआह! की आवाज़ आगाह ! हम्ममम ओहह्ह्ह्ह ऐसे ही अआआह! बहुत अच्छे बेटा कह कर जोश बढ़ा रही थी।
अनुज ने पहली बार में भी करीब 15 मिनट अपनी माँ को चोदकर तारीफ कमाई थी।अगले दिन अनुज ने खुद को संभालना शुरू किया। उसने खाना खाना शुरू किया, पढ़ाई पर ध्यान दिया और धीरे-धीरे पहले जैसा होने लगा।
अब वह विनिता को भी एक अलग नजर से देखने लगा—एक ऐसी इंसान के रूप में, जिसने उसकी माँ को सहारा दिया। उसके मन में अब कोई कड़वाहट नहीं थी।
कुछ दिनों बाद जब विनिता घर आईं, तो अनुज ने उन्हें नमस्ते किया और मुस्कुरा कर बात की। यह देखकर निशा की आँखों में खुशी के आँसू आ गए।
यह एक नई शुरुआत थी, जहाँ रिश्तों को समझ और स्वीकृति के साथ अपनाया गया था। अनुज अब पहले से ज्यादा परिपक्व हो चुका था।
समय के साथ उनके घर का माहौल फिर से खुशियों से भर गया। अब वहाँ कोई छुपाव नहीं था, सिर्फ सच्चाई और अपनापन था। अनुज ने सीखा कि प्यार कई रूपों में आता है, और हर रूप का सम्मान होना चाहिए।
उसने अपनी माँ के फैसले को पूरी तरह स्वीकार कर लिया। निशा और विनीता का रिश्ता अनुज के सामने तो खुला हुआ था वो दोनों खाने के टेबल के ऊपर एक दूसरे को प्यार से खिलते।
उसी टेबल के नीचे अनुज अपनी निशा की चूत को सहलाकर मज़ा लेता था, ये रिश्ता अभी भी एक राज़ था रात की शुरू में निशा और विनीता आप खीरे से अपनी चूत की आग को शांत करते उनकी चुदाई को अनुज मजे लेकर देखता।
फिर विनीता के सोने के बाद निशा अनुज के कमरे में जाकर उसके लन्ड को शांत करती अगले दिन उसी खीरे को अनुज खाते हुए आनंद लेता और अपनी माँ को छेड़ता था।
अंत में, यह कहानी हमें सिखाती है कि रिश्तों को समझने के लिए सिर्फ आँखें नहीं, बल्कि दिल चूत और लन्ड भी खुला होना चाहिए। जब हम दूसरों की भावनाओं को समझते हैं, तभी हम सच्चे रिश्ते बना पाते हैं।
अनुज की यात्रा एक बच्चे से समझदार इंसान बनने की थी—जहाँ उसने प्यार को एक नई परिभाषा दी।
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