झाड़ियों में दोस्त की माँ चोद दी! 02

Hindi Sex Kahani : दोस्त की माँ शीला की गांड खेत में फाड़कर बनाया घरेलू रंडी! फिर पूरी रात फाड़ी चुत और गांड! Dirty गाली के साथ Wild चुदाई का Kamvasna मज़ा! 


अभी तक "झाड़ियों में दोस्त की माँ चोद दी!" में आपने पढ़ा :-


“आह्ह्ह... सलमा मोमी... आपकी गांड... इतनी मोटी... मैंने कभी नहीं देखी... आह्ह्ह...” मैंने उनके बाल पकड़कर और तेजी से धक्के लगाने शुरू कर दिए। आंटी अब पूरी तरह खुल चुकी थीं।


उन्होंने पीछे हाथ बढ़ाकर मेरी कमर पकड़ ली और अपनी गांड को मेरे लंड की ओर खींचने लगीं।


“आह्ह्ह... राहुल... और गहरा... आह्ह्ह... मेरी चूत फाड़ दो... आह्ह्ह... मादरचोद... चोद... आह्ह्ह...” आंटी अब खुद गालियाँ देने लगी थीं। मैं और जोश में आ गया।


अब आगे :-


मैंने उनकी साड़ी को कमर के ऊपर पूरी तरह लपेट लिया और उनकी नंगी गांड को दोनों हाथों से दबोचकर जोर-जोर से चोदने लगा।


“फच... फच... फच...” की आवाज अब जोर से आ रही थी। आंटी की बड़ी-बड़ी चुचियाँ नीचे झूल रही थीं और हर धक्के के साथ हिल रही थीं। मैंने एक हाथ आगे बढ़ाकर उनके मम्मों को पकड़ लिया और जोर से मसलने लगा।


आंटी का शरीर काँप रहा था – “आह्ह्ह... राहुल... मम्मे... मत मसल... आह्ह्ह... मैं झड़ने वाली हूँ... आह्ह्ह...”


लगभग 12-13 मिनट तक ऐसे ही ताबड़तोड़ चोदने के बाद आंटी का शरीर अचानक अकड़ गया। “आह्हhhhh... राहुल... आ गया... आह्ह्ह... भर गया... आह्ह्ह...” आंटी जोर से झड़ गईं।


उनकी चूत ने मेरे लंड को कस लिया।


मैं भी रुक न सका। “सलमा आंटी... मैं भी... आह्ह्ह...” मैंने आखिरी जोरदार झटके मारे और सारा माल उनकी चूत में छोड़ दिया। आंटी ने मेरे लंड को और कस लिया।


हम दोनों कुछ देर ऐसे ही खड़े रहे। मेरा लंड अभी भी उनकी चूत में था और वीर्य बाहर बह रहा था।


आंटी थककर पेड़ के सहारे झुक गईं। मैंने लंड बाहर निकाला। आंटी की चूत से मेरा मोटा वीर्य बह रहा था।


आंटी ने हाथ बढ़ाकर अपनी चूत को छुआ और मेरे माल को उँगलियों से फैलाया। फिर उन्होंने मेरे लंड को हाथ में लेकर साफ किया।


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“राहुल... आज सच में मजा आ गया... आह्ह्ह...” आंटी ने धीरे से कहा। मैंने उनकी गांड पर दो-तीन जोरदार थप्पड़ मारे।


“आंटी... अगली बार पूरी रात... प्लीज...” आंटी ने मुस्कुराते हुए सिर हिलाया।


“ठीक है बेटा... प्लान करके पूरी रात दूँगी... आह्ह्ह...”


हमने कपड़े ठीक किए। आंटी की साड़ी अब थोड़ी गीली हो चुकी थी। जाते समय आंटी ने मेरे लंड पर हाथ फेरा और फुसफुसाई, “रात को याद रखना... हमारे घर के पीछे आ जाना।”


हम दोनों थोड़ी देर तक पेड़ के सहारे ही खड़े रहे। मेरे लंड से अभी भी आंटी की चूत में से मेरा गाढ़ा वीर्य बह रहा था। शीला आंटी ने हाथ बढ़ाकर अपनी चूत को छुआ और मेरे माल को उँगलियों से फैलाया।


फिर उन्होंने घुटनों के बल बैठकर मेरे लंड को मुँह में ले लिया और धीरे-धीरे चूसने लगीं।


“आह्ह्ह… सलमा आंटी… ऐसे ही… आह्ह्ह…” मैंने उनके बाल पकड़ लिए। आंटी ने मेरे लंड को अच्छे से चाट-चाटकर साफ कर दिया। उनकी जीभ मेरे लंड की निचली नस पर घूम रही थी।


“आह्ह्ह… राहुल… तुम्हारा माल… इतना गाढ़ा है… आह्ह्ह…” आंटी ने मेरे अंडकोष को भी चूस लिया।


मैंने आंटी को फिर से खड़ा किया और उनके मोटे मम्मों को दोनों हाथों से दबोच लिया। “आंटी… आज तो बस शुरूआत है… आह्ह्ह…” मैंने उनके निप्पल को उँगलियों से मरोड़ा।


आंटी सिसकार उठीं - “आह्ह्ह… राहुल… मम्मे… मत मरोड़… आह्ह्ह… दर्द… आह्ह्ह…” लेकिन उन्होंने मेरी कमर को और जोर से पकड़ लिया।


मैंने आंटी को पलटकर उनके सामने खड़ा कर दिया। फिर उन्हें घुटनों के बल बैठा दिया। “अब तुम मेरे लंड को चूसो… अच्छे से…” आंटी ने बिना किसी हिचकिचाहट के मेरे लंड को मुँह में ले लिया।


इस बार उन्होंने खुद जोर-जोर से चूसना शुरू कर दिया। “गप… गप… गप…” की आवाज झाड़ियों में गूंज रही थी।


“आह्ह्ह… सलमा आंटी… आपकी जीभ… बहुत गर्म है… आह्ह्ह…” मैंने उनके सिर को पकड़कर लंड उनके गले तक ठोकना शुरू कर दिया। आंटी खांसने लगीं लेकिन चूसती रहीं।


उनकी आँखों से आँसू निकल आए लेकिन वो रुकी नहीं।


थोड़ी देर बाद मैंने आंटी को उठाया और उन्हें पेड़ से टिका दिया। इस बार मैं उनके सामने से आया। आंटी ने खुद अपने एक पैर को ऊपर उठा लिया। मैंने लंड उनकी चूत पर सेट किया और एक जोरदार झटका मारा। पूरा लंड अंदर घुस गया।


आंटी चीख पड़ी – “आह्हhhhh… राहुल… फिर से… आह्ह्ह… मोटा… आह्ह्ह…”


मैंने उनकी एक टांग को अपने कंधे पर रखा और जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। “फच… फच… फच…” की आवाज अब और तेज हो गई। आंटी के मोटे मम्मे मेरे चेहरे के सामने झूल रहे थे।


मैंने एक मम्मा मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा।


“आह्ह्ह… राहुल… मम्मे… चूस… आह्ह्ह… और जोर से… आह्ह्ह…” आंटी ने मेरे सिर को अपनी छाती से दबा लिया। मैंने उनकी चूत में तेजी से लंड ठोकना जारी रखा। आंटी अब खुद अपनी गांड को आगे-पीछे कर रही थीं।


“सलमा आंटी… आपकी चूत… कितनी गीली हो गई है… आह्ह्ह… मैं आज आपको पूरी रात चोदना चाहता हूँ… आह्ह्ह…” मैंने उनके बाल पकड़कर और तेज धक्के लगाए। आंटी की चीखें अब मजे में बदल चुकी थीं।


“आह्ह्ह… राहुल… चोद… अपनी रंडी को… आह्ह्ह… आज मेरी चूत का भोसड़ा बना दो… आह्ह्ह… मादरचोद… और गहरा… आह्ह्ह…” आंटी अब खुद गंदी-गंदी गालियाँ देने लगी थीं।


लगभग 15 मिनट तक ऐसे ही चोदने के बाद आंटी फिर झड़ गईं। “आह्हhhhh… राहुल… फिर आ गया… आह्ह्ह… भर गया… आह्ह्ह…” उनकी चूत ने मेरे लंड को कस लिया। मैं भी रुक न सका।


“सलमा आंटी… मैं भी… आह्ह्ह…” मैंने दूसरी बार उनकी चूत में सारा माल छोड़ दिया।


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हम दोनों थककर पेड़ के सहारे बैठ गए। आंटी ने मेरे सीने पर सिर रख लिया। “राहुल… आज सच में मजा आ गया… आह्ह्ह…” मैंने उनकी गांड पर हाथ फेरा और बोला, “आंटी… अगली बार पूरी रात… आपके घर के पीछे… आह्ह्ह…”


आंटी ने मुस्कुराते हुए सिर हिलाया। “ठीक है बेटा… कल रात प्लान करके आना… मैं तैयार रहूँगी… आह्ह्ह…”


हमने कपड़े ठीक किए। आंटी की साड़ी अब पूरी तरह गीली और अस्त-व्यस्त हो चुकी थी। जाते समय आंटी ने मेरे लंड पर एक बार फिर हाथ फेरा और फुसफुसाई, “रात को याद रखना… दरवाजा खुला रहेगा…”


उस दिन के बाद शीला आंटी और मेरे बीच का रिश्ता पूरी तरह बदल गया। अगले दिन शाम को मैं उनके घर के पिछवाड़े गया। आंटी अकेली थीं। जैसे ही मैं अंदर गया, आंटी ने दरवाजा बंद किया और मुझे दीवार से लगा लिया।


“राहुल… आज पूरी रात… आह्ह्ह…” आंटी ने मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए। मैंने भी उनकी साड़ी खींच ली। आंटी नंगी हो गईं। उनके भारी मम्मे और मोटी गांड मेरे सामने थीं।


मैंने आंटी को बिस्तर पर लिटा दिया और उनके ऊपर चढ़ गया। इस बार missionary position में मैंने धीरे-धीरे लंड उनकी चूत में डाला। आंटी सिसकार उठीं – “आहhhhh… राहुल… फिर से… आह्ह्ह…”


मैंने उनकी टांगें अपने कंधों पर रखीं और जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। आंटी के मम्मे मेरे चेहरे के सामने झूल रहे थे। मैंने एक मम्मा मुँह में ले लिया और चूसने लगा।


“आह्ह्ह… राहुल… मम्मे… चूस… आह्ह्ह… और जोर से… आह्ह्ह…” आंटी ने मेरे सिर को दबा लिया।


लगभग 20 मिनट तक ऐसे ही चोदने के बाद आंटी फिर झड़ गईं। मैंने भी उनकी चूत में माल छोड़ दिया।


उस रात हमने तीन बार चोदा। कभी आंटी ऊपर चढ़कर, कभी doggy style में, कभी sideways। हर बार आंटी की moaning और गालियाँ मुझे और जोश देती थीं।


“आह्ह्ह… राहुल… आज मुझे अच्छे से चोद… आह्ह्ह… मेरी गांड भी ले ले… आह्ह्ह…” आंटी ने खुद अपनी गांड मेरे सामने कर दी। मैंने थूक लगाकर उनकी गांड में लंड डाला।


आंटी चीख पड़ी - “आह्हhhhh… राहुल… गांड… फट गई… आह्ह्ह…” लेकिन 5 मिनट बाद वो खुद अपनी गांड पीछे की तरफ धकेलने लगीं।


उस रात के बाद शीला आंटी मेरी रखैल बन गईं। जब भी मौका मिलता, हम मिलते। कभी खेत में, कभी उनके घर के पिछवाड़े में, कभी रात को उनके कमरे में।


धीरे-धीरे गाँव की और भी औरतें हमारी “सेवा” में आने लगीं। लेकिन सबसे ज्यादा मजा हमेशा शीला आंटी के साथ ही आता था। उनकी मोटी गांड, भारी मम्मे और जोरदार moaning… ये सब अब मेरी रोज की लत बन चुकी थी।


उस रात के बाद शीला आंटी और मेरे बीच का रिश्ता पूरी तरह बदल चुका था। अगले दिन शाम को जब मैं उनके घर के पिछवाड़े पहुँचा, आंटी दरवाजा बंद करके सीधे मेरे गले लग गईं।


“राहुल… आज पूरी रात… आह्ह्ह…” आंटी ने मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए। मैंने भी उनकी साड़ी खींच ली। आंटी नंगी हो गईं। उनके भारी मम्मे और मोटी गांड मेरे सामने थीं।


मैंने आंटी को बिस्तर पर लिटा दिया और उनके ऊपर चढ़ गया। इस बार missionary position में धीरे-धीरे लंड उनकी चूत में डाला। आंटी सिसकार उठीं – “आहhhhh… राहुल… फिर से… आह्ह्ह…”


मैंने उनकी टांगें अपने कंधों पर रखीं और जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। आंटी के मम्मे मेरे चेहरे के सामने झूल रहे थे। मैंने एक मम्मा मुँह में ले लिया और चूसने लगा।


“आह्ह्ह… राहुल… मम्मे… चूस… आह्ह्ह… और जोर से… आह्ह्ह…” आंटी ने मेरे सिर को दबा लिया।


लगभग 20 मिनट तक ऐसे ही चोदने के बाद आंटी फिर झड़ गईं। “आह्हhhhh… राहुल… फिर आ गया… आह्ह्ह…”


मैंने भी उनकी चूत में माल छोड़ दिया।


उस रात हमने तीन बार चोदा। कभी आंटी ऊपर चढ़कर, कभी doggy style में, कभी sideways। हर बार आंटी की moaning और गालियाँ मुझे और जोश देती थीं।


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“आह्ह्ह… राहुल… आज मुझे अच्छे से चोद… आह्ह्ह… मेरी गांड भी ले ले… आह्ह्ह…” आंटी ने खुद अपनी गांड मेरे सामने कर दी। मैंने थूक लगाकर उनकी गांड में लंड डाला।


आंटी चीख पड़ी – “आह्हhhhh… राहुल… गांड… फट गई… आह्ह्ह…” लेकिन 5 मिनट बाद वो खुद अपनी गांड पीछे की तरफ धकेलने लगीं।


“आह्ह्ह… राहुल… और जोर से… आह्ह्ह… मेरी गांड का भोसड़ा बना दो… आह्ह्ह…”


उस रात के बाद शीला आंटी मेरी रखैल बन गईं। जब भी मौका मिलता, हम मिलते। कभी खेत में, कभी उनके घर के पिछवाड़े में, कभी रात को उनके कमरे में।


धीरे-धीरे गाँव की और भी मुस्लिम औरतें हमारी “सेवा” में आने लगीं। कोई भाभी, कोई अम्मी, कोई जवान बेटी। खेत हमारा अड्डा बन गया था।


लेकिन सबसे ज्यादा मजा हमेशा शीला आंटी के साथ ही आता था। उनकी मोटी गांड, भारी मम्मे और जोरदार moaning… ये सब अब मेरी रोज की लत बन चुकी थी।


एक शाम जब हम दोनों सलमा और रुखसाना को चोदकर थक गए थे, तो सलमा ने मेरे सीने पर सिर रखकर कहा, “बेटा… अब तुम दोनों हमारे मालिक हो। जब चाहो, जितना चाहो… चोद सकते हो।”


रुखसाना ने भी विक्रम का लंड हाथ में लेकर मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ… अब शर्म नहीं रही… आह्ह्ह…”


विक्रम ने दोनों की गांड पर एक-एक थप्पड़ मारा और बोला, “अच्छी बात है। अब से ये खेत और तुम दोनों… हमारी प्रॉपर्टी हो।”


हम हँसे। सलमा और रुखसाना भी हँसीं।


दोस्तों, ये थी मेरी और मेरे दोस्त विक्रम की गाँव वाली कहानी।


सलमा और रुखसाना के साथ शुरू हुई ये हवस बाद में पूरे गाँव की कई औरतों तक फैल गई। खेत में आज भी कई औरतें आती हैं… और हम दोनों आज भी उनका इंतजार करते हैं।


अगर आपको ये Antarvasna से भरपूर Maa Beta वाली XXX Kahani पसंद आई हो तो कॉमेंट में जरूर बताना। आगे और गाँव की औरतों की कहानियाँ भी सुनाऊँगा।

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📝 Comments :

Chut jb tak bhosda nhi bne tb tak shant nhi bethti.