बेटे ने छुपकर देखी माँ की रंडी वाली चुदाई!

Family Sex : छुपकर देखी माँ की रंडी वाली चुदाई! मोटा लंड चूसते व गांड उठाकर चुदवाते देखा! फिर Antarvasna से माँ की पैंटी सूंघ निकाला अपना माल! दबाई मोम की गांड!


मेरा नाम रोहन है। उम्र उन्नीस साल। कॉलेज के पहले साल में पढ़ता हूँ। घर में पापा, माँ और मैं ही रहते हैं। पापा का बिजनेस है, अक्सर बाहर रहते हैं। माँ घर संभालती हैं।


उनकी उम्र चालीस के आसपास है, लेकिन शरीर अभी भी काफी आकर्षक है। गोरी त्वचा, बड़े-बड़े स्तन, पतली कमर और गोलाई लिए हुए गांड। मैं हमेशा से ही उन्हें अलग नजरों से देखता था, लेकिन कभी हिम्मत नहीं की।


उस दिन घर में कोई नहीं था। मैं अपना एक पुराना टी-शर्ट ढूँढ रहा था। अलमारी खोली तो अंदर कुछ अजीब सा सामान मिला। सेक्स की सीडी का ढेर। कई-कई डब्बे।


साथ में सेक्सी ब्रा-पैंटी, कुछ पारदर्शी, कुछ लेस वाली। कंडोम के पैकेट और वियाग्रा की टैबलेट भी थीं। मुझे पहले तो हैरानी हुई। फिर लगा कि पापा बहुत रोमांटिक किस्म के आदमी हैं। माँ के साथ बिस्तर पर काफी खुला खेल खेलते होंगे।


उस दिन से मेरी आदत बदल गई। रात को जब सब सो जाते, मैं चुपके से अलमारी से माँ की कोई ब्रा या पैंटी निकाल लेता। उसे पहनकर या सूंघकर हिलाता। उनकी हल्की सी खुशबू मेरे लंड को तुरंत खड़ा कर देती।


मैं सोचता कि ये वही कपड़े हैं जो माँ रोज पहनती हैं। उनकी चूत और मम्मे इनसे छूते हैं। ये ख्याल मुझे पागल बना देता।


एक रात मेरी नींद अचानक खुली। कमरे में हल्की सी रोशनी आ रही थी। दरवाजा थोड़ा सा खुला था। मैंने धीरे से बाहर झाँका। माँ-पापा का बेडरूम था। अंदर जो नजारा था, उसने मुझे जड़ से हिला दिया।


माँ पूरी नंगी खड़ी थीं। पापा बैड पर बैठे अपना मोटा, लंबा लंड हाथ में पकड़े हुए थे। उन्होंने माँ को इशारा किया। माँ बिना किसी हिचकिचाहट के घुटनों के बल बैठ गईं और पापा का लंड मुँह में ले लिया।


मैं दरवाजे की दरार से छुपकर देख रहा था। मेरा लंड पैंट में पूरी तरह खड़ा हो गया। मैंने अपना हाथ अंदर डालकर धीरे-धीरे हिलाना शुरू कर दिया।


माँ रंडी की तरह चूस रही थीं। जीभ से सुपारे को चाट रही थीं, फिर पूरा लंड गले तक ले रही थीं।


“उम्म… गप… गप…” की आवाजें आ रही थीं। पापा के मुँह से “आआह… सस्स… हाँ… और गहरा…” निकल रहा था। माँ की आँखें बंद थीं। बाल खुले थे। उनके बड़े स्तन हर हरकत पर हिल रहे थे।


पापा ने उसका सिर पकड़कर मुँह चोदना शुरू कर दिया। माँ की आँखों से आँसू निकल रहे थे लेकिन वह रुक नहीं रही थी। बल्कि खुद आगे बढ़कर लंड को और गहरा ले रही थी।


पापा बोले, “साली… कितनी अच्छी चूसती है तू… ले… और ले…” माँ के मुँह से सिर्फ “उम्म… अह्ह…” निकल रहा था।


थोड़ी देर बाद पापा ने माँ को उठाकर बैड पर घोड़ी बना दिया। माँ की गांड ऊपर थी। उनकी गोरी, मोटी गांड हवा में थी। पापा ने पीछे से अपना लंड उनकी चूत पर रगड़ा।


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माँ सिसकीं, “आआह… धीरे…” पापा ने एक झटके में पूरा अंदर घुसा दिया।


“आआआह… मम्म… ऊऊई… आआह…” माँ की कराहें पूरे कमरे में गूँज उठीं। पापा के धक्के इतने जोरदार थे कि बैड हिल रहा था। माँ की चूचियाँ नीचे लटक रही थीं और हर धक्के पर जोर-जोर से झूल रही थीं। पापा उनके मम्मे पकड़कर मसल रहे थे।


“ले… ले रंडी… तेरी चूत कितनी गीली है… आह्ह…”


मैं और जोर से हिलाने लगा। मेरा हाथ तेज हो गया। माँ की गांड हर धक्के पर हिल रही थी। उनकी जांघें काँप रही थीं। पापा बीच-बीच में थप्पड़ भी मार रहे थे।


“थप्प… थप्प…” की आवाज आ रही थी। माँ “आह… और जोर से… आह…” कह रही थीं।


कुछ देर बाद पापा ने स्पीड बढ़ा दी। माँ की कराहें और तेज हो गईं। “आआह… मैं झड़ने वाली हूँ… आह्ह…” पापा ने भी साथ दिया। दोनों लगभग एक साथ झड़ गए।


पापा ने माँ के अंदर वीर्य भर दिया। माँ हाँफते हुए बिस्तर पर गिर पड़ीं। पापा उनके ऊपर लेट गए। दोनों थककर सो गए।


मैं अपनी कोठरी में वापस आया। माँ की ब्रा-पैंटी पहनकर और जोर से हिला। मन में ख्याल आ रहा था कि माँ कितनी रंडी है। वो कैसे पापा का लंड चूस रही थीं, कैसे गांड उठा-उठाकर चुद रही थीं। उस रात से मेरे मन में माँ के लिए अलग ख्याल आने लगे।


मैं रोज सोचता कि अगर पापा की जगह मैं होता तो कैसा लगता।


उनकी गीली चूत, उनके झूलते मम्मे, उनकी कराहें… सब मेरे दिमाग में घूमने लगे। अलमारी से उनकी पैंटी चुराना और ज्यादा बढ़ गया। मैं उनकी खुशबू सूंघता और कल्पना करता कि वो मेरे लंड पर बैठी है।


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अगले कुछ दिनों तक मैं वही सीन बार-बार याद करता रहा। माँ की नंगी गांड, उनके झूलते मम्मे, पापा का लंड उनकी चूत में धँसते हुए… सब कुछ मेरी आँखों के सामने घूमता रहता।


रात को बिस्तर पर लेटकर मैं फिर से हिलाता। उनकी पैंटी मेरी नाक के पास होती। उनकी हल्की सी खुशबू मुझे और जोश देती।


एक शाम पापा बाहर गए थे। माँ नहा रही थीं। बाथरूम का दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं था। मैं चुपके से दरार से झाँका। माँ साबुन लगा रही थीं। उनके गोरे स्तन झाग से ढके थे। निप्पल सख्त हो रहे थे।


मैंने देखा उनकी गांड कितनी गोलाई लिए हुए है। जब वो मुड़ीं तो उनकी चूत की हल्की झलक भी मिली। मैं जल्दी से अपने कमरे में आया और पैंटी सूंघकर जोर-जोर से हिला।


“आह… माँ… तेरी चूत… आह्ह…” मन ही मन बड़बड़ाता रहा।


उस रात फिर से आवाजें आईं। मैं दरवाजे पर पहुँचा। इस बार माँ पापा के ऊपर बैठी थीं। उनकी गांड ऊपर-नीचे हो रही थी। पापा नीचे से धक्के मार रहे थे।


माँ के मुँह से “आआह… और गहरा… आह्ह… हाँ…” निकल रहा था। उनके मम्मे पापा के हाथों में थे। पापा उन्हें चूस रहे थे। माँ सिर पीछे किए मजे ले रही थीं।


मैंने फिर से हाथ अंदर डाला। इस बार और जोर से हिलाया।


माँ की कराहें सुनकर मेरा पानी जल्दी निकल गया। मैं हाँफते हुए अपने कमरे में लौटा। मन में सिर्फ एक ही ख्याल था – माँ कितनी आसानी से चुद रही हैं। कितनी भूखी लग रही हैं।


अगले हफ्ते पापा दो दिन के लिए बाहर गए। घर में सिर्फ मैं और माँ थे। माँ सामान्य व्यवहार कर रही थीं, लेकिन मुझे हर हरकत में कुछ और नजर आने लगा।


जब वो किचन में झुककर कुछ उठातीं तो उनकी साड़ी से गांड की आकृति साफ दिखती। जब टीवी देखतीं तो उनकी नाइटी के अंदर से मम्मे की हलचल। मैं चुपचाप देखता और मन में सोचता।


एक रात मैंने हिम्मत की। माँ सो रही थीं। मैं उनके कमरे में घुसा। उनकी अलमारी से एक पैंटी निकाली। वो अभी-अभी नहाकर आई थीं। पैंटी में हल्की सी गीलीपन थी। मैंने उसे सूंघा।


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उनकी चूत की खुशबू मेरे लंड को तुरंत खड़ा कर दी। मैं वहीं खड़े-खड़े हिलाने लगा। माँ की साँसें नियमित चल रही थीं। मैंने सोचा कि अगर वो जाग जाएँ तो क्या होगा।


लेकिन रुक नहीं पाया। कुछ ही मिनट में मैं झड़ गया। पैंटी पर अपना माल गिरा दिया। फिर उसे वापस रख दिया और चुपके से बाहर आ गया।


सुबह माँ ने कुछ नहीं कहा। शायद उन्हें पता नहीं चला। लेकिन मेरे अंदर की भूख और बढ़ गई। अब मैं रोज रात को उनकी पैंटी या ब्रा पहनकर हिलाता। उनके नंगे शरीर की कल्पना करता।


उनकी कराहें सुनने का इंतजार करता। जब पापा घर पर होते तो मैं दरवाजे पर छुपकर देखता। माँ कैसे पापा का लंड चूसतीं, कैसे गांड उठाकर चुदवातीं। हर बार मेरा लंड खड़ा हो जाता।


एक दिन माँ ने मुझसे पूछा, “रोहन, तू इतना चुप क्यों रहता है आजकल?”


मैंने टाल दिया। “कुछ नहीं माँ। पढ़ाई का तनाव है।”


उन्होंने मेरे सिर पर हाथ रखा। उनकी उँगलियाँ मेरे बालों में घूमीं। मैंने महसूस किया कि मेरा लंड फिर से तन गया है। मैंने जल्दी से अपना कमरा कर लिया।


रात को फिर से वही सीन। पापा माँ को दीवार से सटाकर चोद रहे थे। माँ की टाँगें पापा की कमर पर लिपटी थीं। “आआह… और जोर से… आह्ह… हाँ…” उनकी आवाजें आ रही थीं।


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पापा के धक्के हर बार गहरे जा रहे थे। माँ की गांड दीवार से टकरा रही थी। उनके मम्मे पापा के हाथों में दबे हुए थे। मैंने फिर से हाथ अंदर डाला और जोर-जोर से हिलाने लगा। माँ की कराहें सुनकर मेरा पानी जल्दी निकल गया।


अगली रात पापा ने माँ को कुतिया बनाकर चोदा। माँ की गांड हवा में थी। पापा पीछे से जोर-जोर से धक्के मार रहे थे।


“आआह… और तेज… आह्ह… हाँ… मेरी गांड लाल कर दो…” माँ चिल्ला रही थीं। 


पापा उनके मम्मे पकड़कर खींच रहे थे। बैड जोर-जोर से हिल रहा था। मैं दरवाजे पर खड़ा सब देख रहा था। मेरा लंड इतना सख्त था कि दर्द हो रहा था। मैंने उसे बाहर निकालकर हिलाया।


माँ की गांड हर धक्के पर हिल रही थी। उनकी जांघें काँप रही थीं। पापा बीच-बीच में थप्पड़ भी मार रहे थे। “थप्प… ले रंडी… तेरी गांड कितनी मस्त है… आह्ह…”


मैंने देखा माँ कितनी आसानी से सब कुछ ले रही थीं। कितनी भूखी लग रही थीं। कुछ देर बाद पापा ने स्पीड बढ़ा दी। माँ झड़ गईं।


“आआह… मैं आई… आह्ह…” पापा ने भी साथ में झाड़ दिया। उनके अंदर पानी भर दिया। माँ हाँफते हुए बिस्तर पर गिर पड़ीं।


मैं अपने कमरे में आया। उनकी पैंटी पहनकर और जोर से हिला। मन में ख्याल आ रहा था कि माँ कितनी रंडी है। वो कैसे पापा का लंड ले रही थीं। कैसे गांड उठा-उठाकर चुद रही थीं।


उस रात से मेरे मन में माँ के लिए अलग ख्याल आने लगे।


अगले कुछ दिनों तक मैं वही सीन बार-बार याद करता रहा। जब पापा घर पर होते तो मैं मौका मिलते ही दरवाजे पर पहुँच जाता। एक बार देखा माँ पापा के मुँह में लंड लेकर चूस रही थीं।


 पापा उनके सिर पकड़कर मुँह चोद रहे थे। माँ की आँखों से आँसू निकल रहे थे लेकिन वो रुक नहीं रही थीं।


“उम्म… गप… और गहरा…” उनके मुँह से आवाजें आ रही थीं। पापा बोले, “साली… कितनी अच्छी चूसती है तू… ले पूरा… आह्ह…”


मैंने अपना लंड बाहर निकालकर हिलाया। माँ के बड़े स्तन हर हरकत पर हिल रहे थे। थोड़ी देर बाद पापा ने उन्हें उठाकर बैड पर लिटाया और ऊपर से चोदना शुरू किया। माँ की टाँगें पापा की कमर पर लिपटी थीं।


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“आआह… और जोर से… आह्ह…” उनकी कराहें पूरे कमरे में गूँज रही थीं।


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एक शाम पापा बाहर गए थे। माँ किचन में खाना बना रही थीं। मैं पीछे से उनके पास गया। उनकी गांड से मेरा लंड छू गया। माँ थोड़ी देर रुक गईं। “रोहन… क्या कर रहा है?” उनकी आवाज में हल्की सी घबराहट थी। मैंने हाथ हटा लिया।


“कुछ नहीं माँ। पानी पीने आया था।” लेकिन मेरा लंड पूरी तरह तन चुका था। माँ ने मुड़कर देखा। उनकी नजर नीचे गई। उन्होंने कुछ नहीं कहा। बस साड़ी ठीक करके काम में लग गईं।


रात को जब पापा आए तो फिर से आवाजें आईं। माँ पापा के ऊपर बैठी थीं। उनकी गांड जोर-जोर से ऊपर-नीचे हो रही थी।


“आआह… और गहरा… आह्ह… हाँ… मेरी चूत को चीर दो…” पापा नीचे से धक्के मार रहे थे। माँ के मम्मे हवा में झूल रहे थे। मैं दरवाजे पर खड़ा सब देख रहा था। मेरा हाथ तेज हो गया। माँ की कराहें सुनकर मैं झड़ गया।


अगले दिन माँ ने मुझसे पूछा, “रोहन, कल रात तू क्यों इतना देर तक जाग रहा था?” मैंने टाल दिया। “पढ़ाई कर रहा था।” उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखा। उनकी उँगलियाँ मेरे गले तक चली गईं।


मैंने महसूस किया कि मेरा लंड फिर से तन गया है। माँ ने मेरी तरफ देखा। उनकी आँखों में कुछ था। शायद वो समझ गई थीं। लेकिन कुछ बोलीं नहीं।


रात को फिर से पापा माँ को घोड़ी बनाकर चोद रहे थे।


“आआह… और तेज… आह्ह… मेरी गांड लाल कर दो…” माँ की आवाजें आ रही थीं।


मैंने देखा उनकी गांड कितनी गोलाई लिए हुए है। पापा के लंड हर बार अंदर तक जा रहे थे। मेरे अंदर कुछ टूट रहा था। मैं सोच रहा था कि एक दिन ये सब सिर्फ देखने तक सीमित नहीं रहेगा।


[जल्द ही बेटा फाड़ेगा माँ की रंडी चुत!]


आगे की कहानी : जल्द ही!

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