होस्टल में नेहा ने चाटी मेरी चुत!

Lesbian Kahani: मेरा पहला जिस्म से जुड़ा सुख मुझे मिला मगर किसी लन्ड वाले से नहीं बल्कि एक चूत वाली के पास से जिसके मीठे चूत के पानी से नहाकर मैं तृप्त हो गई।


मेरा नाम मोहिनी है। आज जब मैं अपनी जिंदगी के सबसे खूबसूरत रिश्ते को याद करती हूं, तो सबसे पहले नेहा का चेहरा आंखों के सामने आ जाता है। लोग अक्सर कहते हैं कि कॉलेज की दोस्तियां समय के साथ फीकी पड़ जाती हैं।


लेकिन हमारी दोस्ती उन रिश्तों में से थी जिसने वक्त के हर इम्तिहान को पार किया। चोदम यूनिवर्सिटी में बिताए गए वे साल मेरे लिए सिर्फ पढ़ाई के दिन नहीं थे, बल्कि जिंदगी को समझने और एक सच्चा साथी पाने का सफर थे।


मैं एक छोटे शहर से आई थी। मेरा स्वभाव हमेशा से थोड़ा चंचल था। मेरा जिस्म हमेशा देखने वाली की नज़र को मेरी गलत उमर बताता था वैसे तो इस घटना के समय मेरी उमर 19 साल थी लेकिन मेरा जिस्म एक 25 साल की लड़की जैसा था।


मेरे चूंचे 28 के कमर 26 की और गांड़ 30 की थी ऐसा इसलिए के मेरी दादी बचपन से मेरे जिस्म की मालिश करती आई थी मेरा जिस्म हमेशा मुझे फायदा देता रहा स्कूल से कॉलेज तक समझो 30 नंबर तो बस मेरे जिस्म ने मुझे दिलवाए थे।


लेकिन अंदर से मैं उतनी मजबूत नहीं थी जितनी लोग समझते थे। मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, इसलिए यूनिवर्सिटी तक पहुंचना ही मेरे लिए किसी सपने से कम नहीं था।


 जब पहली बार मैं चोदम यूनिवर्सिटी के विशाल कैंपस में दाखिल हुई थी, तो मेरे मन में डर भी था और उत्साह भी। चारों तरफ नए चेहरे, नई जगह और नई दुनिया थी।


उसी दुनिया में मेरी मुलाकात नेहा से हुई। वह दिन आज भी मुझे साफ याद है। मैं लाइब्रेरी में अपनी किताब ढूंढ रही थी कि तभी सामने से एक लड़की तेजी से आती हुई दिखी।


वो तेज़ी से चलकर आ रही थी उसके मोटे चूंचे हिचकोले खाते हुए दिख रहे थे मेरी नजरें बस उसकी चूंचियों पर रुक गई।


अचानक उसका संतुलन बिगड़ा और सारी किताबें फर्श पर बिखर गईं। आसपास खड़ी कुछ लड़कियां हंसने लगीं। उस लड़की के चेहरे पर शर्म और घबराहट साफ दिखाई दे रही थी। 


पता नहीं क्यों, लेकिन मुझे उसका चेहरा देखकर बहुत बुरा लगा। मैं तुरंत उसके पास गई और उसकी किताबें उठाने लगी उसने एक गहरे गले की कुर्ती पहनी थी जिसमें से उभरी हुई मस्त चूंची दिख रही थी।


मुझे पहली बार एक गर्म एहसास हुआ उसकी जिस्म ने जैसे मेरी आंखे उचकली हो । वह बार-बार “थैंक यू” कह रही थी। उसकी आवाज़ में झिझक थी।


मैंने मुस्कुराकर कहा, “इतनी किताबें उठाकर चलोगी तो यही होगा।” वह हल्का सा हंस दी।


उसी पल मुझे लगा कि यह लड़की बाकी लोगों से अलग है। उसका नाम नेहा था। धीरे-धीरे हमारी बातें शुरू हुईं। पहले लाइब्रेरी तक सीमित रहने वाली दोस्ती कैंटीन तक पहुंची, फिर क्लासरूम तक और फिर हॉस्टल के कमरे तक।


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देखते ही देखते हम दोनों हर जगह साथ दिखने लगीं। हम घूमना फिरना अक्सर एक साथ ही करते थे मगर मेरे जज़्बात उसके लिए सिर्फ एक दोस्त वाले नहीं थे। नेहा की सबसे खास बात यह थी कि वह कभी किसी को छोटा महसूस नहीं होने देती थी।


मैं पढ़ाई में उससे कमजोर थी, लेकिन उसने कभी मुझे यह एहसास नहीं होने दिया। ये बात अलग थी के उसके होने से मेरा पढ़ाई में ध्यान नहीं लग पाता था।नेहा हमेशा गहरे गले वाले कपड़े पहनती थी उसकी चूंची का साइज 30 था।


वो एक गोलू मोलू लड़की थी उसका कहना था बंद गले वाले कपड़े में चूंची दर्द करती है इस वजह से मेरी नज़र हमेशा उसकी उभरती चूंची पर ही रहती कभी कभी वो मुझे टोकती “खाना है क्या!” , मैं भी मज़ाक में कहती “खाने देगी क्या।” 


वो मुझे रातों को जागकर पढ़ाती और पढ़ाते हुए सो जाती, मैं उसके सोने के बाद उसके जिस्म को छूकर मज़ा लेती थी।


मेरी गंदी नज़रे हमेशा उसकी मोती चूंची पर होती हम एक ही बिस्तर पर सोते थे मैं नींद के बहाने उसके कुर्ती में हाथ डालकर उसके चूंचे दबाते हुए सोती थी।


धीरे-धीरे हमारी दोस्ती इतनी गहरी हो गई कि अब हमें एक-दूसरे की बातें समझने के लिए शब्दों की जरूरत नहीं पड़ती थी।


नेहा और मैं इतना खुल चुके थे एक एक दूसरे के सामने ही कपड़े बदल लिया करते थे जब भी वो कपड़े बदलती तो मैं कुर्सी लेकर बैठ जाती वो मुझे प्यार से हवस की रानी कहती थी।


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यूनिवर्सिटी में लोग हमें अलग-अलग नामों से बुलाते थे। कोई हमें “दो जिस्म एक जान” कहता, तो कोई “चूत की साथी।” मुझे ये नाम सुनकर बहुत हसी आती रिक्शे में आते जाते भीड़ के बहाने मैं उसको अपनी गोद में बैठाती थी ।


कभी हम मूवी देखने जाते तो कॉर्नर की सीट लेकर मैं उसके जिस्म को सहलाती थी वो मुझसे थोड़ा कसमसा थी और कहती “देख तू ये सब मत करा कर नहीं तो कोई मेरा BF नहीं बनेगा” , और मैं बोलती तुम्हे मेरे होते हुए BF क्यों चाहिए।


एक बार यूनिवर्सिटी में वार्षिक प्रोजेक्ट प्रतियोगिता होने वाली थी। यह प्रतियोगिता बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती थी क्योंकि जीतने वालों को स्कॉलरशिप और बड़े रिसर्च प्रोग्राम्स में मौका मिलता था। नेहा इस प्रतियोगिता को लेकर बहुत उत्साहित थी।


उसकी आंखों में सपने थे। वह चाहती थी कि वह अपने परिवार का नाम रोशन करे।नेहा परीक्षा से पहले बेहद घबराई हुई थी इसकी हालत इतनी खराब थी के वो कांप रही थी उसको पैनिक अटैक आ रहा था।


मैने कभी ऐसी हालत को अपने सामने नहीं पाया था तो मुझे समझ नहीं आया के मैं क्या करूं। मैने की उसके हाथ कांप रहे है तो मैने हाथ पकड़ा लिए। वो बेड पर बैठी थी और मैं ज़मीन पर उसके हाथ पकड़ कर उसे संभालने की कोशिश कर रही थी।


उसका गोल चेहरा पसीने से चमक रहा था। उसके होठ कांपते हुए रस भरे लग रहे थे। उसके लंबे बाल आंखों के सामने थे मैने फिर उसके चेहरे को पकड़ा उसको अपनी तरफ देखने को कहा।


नेहा उस समय बहुत परेशान थी उसकी आंखों डर व आंसू थे मुझे समझ नहीं आया के मैं क्या करूं और बस मैने उसके कांपते होठ और अपने जज़्बात को खुला मौका दे दिया। मैने अपने होठों से उसके कांपते होठ पकड़ लिए और हम दोनों बिस्तर पर गिरती चली गई।


मैं उसके गद्दे जैसे मखमली जिस्म पर लेटी हुई थी। मेरे होठ उसके होठ चूस रह थे मुझे उसकी गर्म सांसे अपने मुंह में महसूस हो रही थी। उसके होठों का स्वाद बेहद रसीला था। धीरे धीरे महसूस करा के उसका कांपना बंद हो गया था और अब वो भी मेरा साथ दे रही थी।


हम सुकून से लेटें हुए होठों को चूस रहे थे फिर मैं उठी और मैने उसकी आंखों में देखा उसकी बड़ी गहरी समंदर सी आंखों में मैं डूबती चली गई। वो कुछ बोलना चाहती थी मगर बोल नहीं पाई मैने अपन हाथ को उसके चेहरे पर घुमाया और उसकी आँखें बंद कर दी।


मैने उसके गले को चूम फिर उसके चूंची को चूमा फिर नीचे जाकर उसके पेट को चूमा नेहा के मुंह से मादक अआआह! हम्ममम ओह मोहिनी! तू क्या कर रही है की सिसकी मुझे सुनाई दे रही थी।


 मैने उसकी कुर्ती ऊपर करी और पेट के बीच मैं ज़बान से चाटने लगी उसके मुंह से आअआअह! अच्छा लग रहा है निकला। फिर मैने उसकी सलवार उतारी और पैंटी को चूमने लगी मोहिनी मेरे बाल सहला रही थी।


 धीरे से मैने उसकी पैंटी उतारी और चूत पर चूम लिया, उसकी चूत हल्कीसी गीली हो रही थी। मैने उसे देखा वो मुझे प्यार भरे अंदाज़ में देख रही थी उसकी नज़रों से नज़रे मिलकर मैने अपनी जीभ से उसकी चूत को छू लिया।


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उसने आत्म समर्पण करते हुए आंखे बंद करली अब मैं जीभ को उसकी चूत के छेद से मिलकर चूम रही थी उसकी चूत को चाट रही थी फिर मैने उसकी चूत में अपनी एक उंगली घुसा दी तो वो चिहुंक उठी ।


 धीरे धीरे मैं चूत में उंगली अंदर बाहर कर रही थी नेहा ने मेरे हाथ को रोकने के लिए हाथ आगे बढ़ाया मगर मैने उन्हें से तेज़ी से उसे चोदना शुरू कर दिया जिससे वो पिघल गई।


मैं उसे तेजी से चोद रही थी और निकलते हुए चूत का पानी पी रही थी नेहा की टांगे मचल रही थी जब वो बहुत अधिक बेचैन होने लगी। वो बोली “नेहा मेरा पानी छूटने वाला है।”


 फिर मैने तेज़ी से 2 उंगली अंदर बाहर करनी शुरू कर दी देखते ही देखते उसका पानी निकलने लगा और मैने अपना मुंह उसकी चूत पर दबा लिए साथ में नेहा ने भी अपनी टांगे मेरे बंधी और मुझे चूत में दबाने लगी।


चूत से बेचैनी का पानी निकलने के बाद वो शांत हो गई और गहरी नींद में सो गई। अगले दिन परीक्षा हुई परीक्षा के बाद जब हम मिले तो उसने रोते रोते मुझे गले लगा लिया। उसने बताया परीक्षा बहुत अच्छी हुई है और ये सब मेरी वजह से हुआ है।


उस पूरे दिन हम बिल्कुल इस तरह घूमे जैसे एक Couple घूमते है दोनों एक दूसरे की बाहों में बाहें डाले शहर तक घूमे खाया पिया रिक्शे में आते हुए वो खुशी खुशी मेरी गोद में बैठी जब हम वापस हॉस्टल में आए तो सीडीओ पर ही मैने उसे पकड़कर चूमना शुरू कर दिया वो भी अब मुझे नहीं रोक रही थी ।


ये Free Hindi Sex Kahani आप Garam kahani पर पढ़ रहे है। अपने कमरे तक आते आते मैने झूठ झूठ उससे नाराज़गी वाला चेहरा बना लिया। उसने मुझे मनाते हुए कहा “क्या हो गया मेरी जान!” मैं इठलाते हुए बोली “सारे मज़े तूने ले लिए मेरा क्या”।


इस पर उसने मेरा हाथ पकड़कर खींचा और गले लगाकर बोली “अंदर तो चल आज तुझे असमान की सेर करती हूं”। ये कहते हुए इसने मेरे गाल को चूम लिया इस समय अगर मेरा लन्ड होता तो खड़ा हो जाता।


मुझे दो मिनट रुककर आने का बोलकर वो अंदर चली गई, मेरे जिस्म पर हवस की गर्मी का पसीना आ रहा था मेरी वर्जिन चूत में हलचल मची हुई थी के आज क्या करेगी नेहा। फिर कुछ मिनट बाद आवाज़ आई “अंदर आजा मेरी जान” मैं लम्बी सांस लेते हुए अंदर गई।


अंदर बिल्कुल अंधेरा था मुझे हल्की घबराहट हुई मैने आवाज़ लगाई “नेहा! नेहा!” अचानक मेरी आअआअह! निकल गई। नेहा ने पीछे से आकर बहुत ज़ोर से मेरी चूंची पकड़ी हमारी सांसे भारी हो रही थी। 


पूरे कमरे में बस मेरी और नेहा की वासना की सांसे घूम रही थी। नेहा ने मेरे गले को चूम रही थी उसकी सांस मुझे सुनाई दे रही थी मेरी चूंचे वासना से ऊपर नीचे हो रहा थी नेहा हाथ धीरे धीरे मेरी चूंची दबा रहे थे। 


फिर उसने मुझे प्यार से घुमाया और अपने मीठे मोटे होठ मेरे होठों पर रख दिए। वो लगातार मेरे होठों को चुस्ती पर जीभ को मेरे मुंह में डालती उसके बाद हमने साथ में कपड़े निकाले।


एक एक कपड़े को उतारकर हम नंगे हुए और फिर नेहा ने लाइट्स जला दी हम एक दूसरे के सामने नंगे खड़े थे वो मेरी तरफ Cat Walk करते हुए आई और अपने चूंचे मेरी चूंचियों से मसलने लगी ।


फिर उसने मुझे बिस्तर पर धकेला और मेरे हाथ दुपट्टे से बांध दिए एक एक कर के उसने मेरे पर भी बंध दिए। वो बोली “आज तू बस मजे कर”। मुझे बांध कर वो मेरे ऊपर बैठ गई और चूंचे मेरे मुंह पर झुका दिए फिर बोली “ले खले मेरी जान आज से ये तेरे नाम हुए”।


उसके गोरे निप्पल चमक रह थे मैने एक निप्पल मुंह लेकर चूसा उफ्फफाफ! उसकी सिकी निकली और मेरे जिस्म में आनंद की लहर बह गई।


मैं अपने बंधे हाथों से मजबूर न होती तो ये चूंचे सच में खा जाती मैने मज़ा लेकर एक एक कर के दोनों चूंची पी उनसे दूध नहीं आया फिर भी मेरा मन नहीं था ।


उसकी चूंची छोड़ी जाए। वो आअआअह! ओह मेरी जान पी ले सब पी ले आगाह मोहिनी उद्मम्मम्म! अआह मोहिनी की सिसकियों में जल रही थी।


उसके बाद वो मेरे होठों को फिर से चूमने लगी। धीरे धीरे अपनी जीभ से उसने मुझे गले से चूंचे तक चख लिया। चूंची पर जाकर उसने निप्पल पीना शुरू करे जिससे मैं मछली की तरह तड़पने लगी। 


वो मेरी बेबसी का मज़ाक बना रही थी ये आनंद मुझे अच्छा मगर बेचैनी भरा भी था। उसके बाद वो चूमते चूमते नीचे चूत पर पहुंची उसने मुझे देखा और एक कातिलाना मुस्कान देते हुए मेरी चूत को चूमने लगी।


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उसने अपनी जीभ मेरी चूत में घुमाई और मेरे मुंह से आअआअह! हम्ममम ओह अआआह नेहा मज़ा आ गया आअआअह और तेज़ ओहह्ह्ह्ह! हम्ममम! मुझे खुश कर दिया तू ने हम्ममम! मेरे मुंह से आवाज़ सुनकर अपनी रफ्तार बढ़ाई।


 वो बिल्कुल अंदर तक अपनी जीभ डाल रही थी। ये Antarvasana Lesbian Sex Kahani आप Garam kahani पर पढ़ रहे है। इसके बाद वो घूमी और मेरे मुंह के सामने अपनी चूत परोस दी उसने मेरे हाथ खोल दिए।


 मगर पेरो को अधिक का दिए जिससे टांगे पूरी खुल गई। वो मुझे देखकर बोली “चल जी ले अपनी ज़िंदगी” मैने हाथ खोलते ही उसकी गेगांड़ पर एक ज़ोर का चमाट लगा दिया जो पूरे कमरे में गूंजा।


उसकी भी आअआअह! निकल गई वो बोली “ मारती क्यों है।”


मैने बोल दिया “तेरी गांड़ पर मेरी गंदी नज़र थी आज मिली तो कंट्रोल नहीं हुआ।” उसके बाद हम हंसते हुए एक दूसरे के छेद पर टूट पड़े। वो तेज़ी से मेरी चूत खा रही थी ।


मेरी पूरे जोश से उसकी चूत खा रही थी। उसकी चूत का स्वाद एक दिन पहले थोड़ा नमकीन था मगर सुबह से उसने काफी मीठे चीज़ें खाई थी इसलिए अभी थोड़ा मीठा लग रहा था। उसकी चूत से निकलता पानी मीठा मीठा अच्छा लग रहा था।


 मैं इस तरफ उसे चूस रही थी जैसे चपटे बर्तन में मलाई लगी हो। हम दोनों एक दूसरे की चूत में खो चुके थे आधे घंटे से ज़्यादा हमें इस हाल में हो गया था फिर कुछ पल बाद मुझे अपनी टांगे कांपती हुई महसूस हुई और मैं बोली “ नेहा मेरा आने वाला है”। 


नेहा बोली “ थोड़ी देर और मेरा भी हो गया बस”। हमने तेजों से उंगली से एक दूसरे को चोदना शुरू कर दिया और देखते देखते अपने चूत के पानी को मुंह पर ही छोड़ दिया।


कुछ देर कमरे में आअआअह! अआआह ओहह्ह्ह्ह हम्ममम आह! मोहिनी ओहो! नेहा आह आअआअह! अआआह आगाह ओहद नेहा आगाह मोहिनी अआह ओहो! की आवाज़ गूंजी। 


दो कामुकता भरे जिस्म आपस में रगड़े और चरमसुख की दो गरम पानी की धारा बह गई।


मुझे नेहा की हफ्ते हुई सांसे चूत के धड़कने से पता चल रही थी शायद वो भी महसूस कर रही थी इसलिए मेरी चूत को चूम रही थी उसके बाद उसने मेरे पैर खोले और मेरे साथ लेटी हम रात भर एक दूसरे को चूमते रहे और हमारा रिश्ता दोस्ती से प्रेम कहानी में बदल गया।


ये कहानी आपको कैसी लगी कमेंट में ज़रूर बताना मैं कॉमेंट्स पढ़ती हूं सब के।

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