ट्रेन में भाई ने फाड़ी बहन की वर्जिन चूत!

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Family Sex Kahani : ट्रेन के कंपार्टमेंट में भाई ने बहन की टाइट चूत चोद डाली! गर्लफ्रेंड की Antarvasna चैट देखकर गीली हुई प्रिया को राहुल ने पूरी रात बजाया! 


मेरा नाम प्रिया है। मैं 21 साल की हूँ और मेरा भाई राहुल 24 का। हम उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव में पले-बढ़े। पापा सरकारी स्कूल में टीचर थे और मम्मी घर संभालती थीं।


बचपन से ही हम दोनों एक-दूसरे के सबसे करीबी रहे। राहुल मुझे स्कूल से लेने जाता, मैं उसके क्रिकेट मैच देखने जाती।


रात को बिजली चली जाती तो हम एक ही कम्बल में लिपटकर सोते। हग करना, गाल पर किस करना, बालों में हाथ फेरना — ये सब हमारे लिए बिल्कुल नॉर्मल था।


लेकिन पिछले दो सालों में कुछ बदल रहा था। राहुल कॉलेज से लौटकर अब ज्यादा मस्कुलर हो गया था। उसकी छाती चौड़ी, बाहें मजबूत, और जब वो सिर्फ बनियान में घर में घूमता तो मेरा मन अजीब सा हो जाता।


मैं खुद को समझाती - "ये मेरा भाई है प्रिया, गलत मत सोच।" लेकिन रातों में अकेले में कभी-कभी उसके बारे में सोचकर अपनी उँगलियों का इस्तेमाल करने लगी थी।


राहुल मुझे अपनी GF की बातें बताता था। मैं भी उसे अपने क्रश के बारे में बताती। हम दोनों बेस्ट फ्रेंड थे। लेकिन हाल ही में मेरे पीरियड्स खत्म हुए थे और हॉर्मोन्स ने मेरा मूड पूरी तरह रोमांटिक और सेक्सुअल बना दिया था।


हम गाँव से दिल्ली एक शादी में जा रहे थे। ट्रेन की जर्नी दो रात और एक दिन की थी। किस्मत से AC 2-Tier का कपल कंपार्टमेंट मिल गया — सिर्फ हम दोनों।


ट्रेन शाम को 7 बजे स्टेशन से छूटी। हम सामान रखकर सेटल हो गए। राहुल ऊपर वाले बर्थ पर चढ़ गया, मैं नीचे। बाहर धीरे-धीरे अंधेरा फैल रहा था। ट्रेन की लय में हम दोनों मोबाइल पर लगे थे।


मैंने राहुल को देखा। वो बार-बार मुस्कुरा रहा था। उसकी आँखों में वो खास चमक थी जो मुझे पता थी।


"क्या बात हो रही है भैया?" मैंने पूछा।


"बस... कुछ नहीं," उसने हँसकर टाल दिया।


रात के 8:30 बजे मैं वॉशरूम गई। वापस आते समय मैंने देखा - राहुल का फोन चार्जिंग पर लगा था और स्क्रीन अनलॉक। Telegram खुला हुआ था।


मेरा दिल जोर से धड़का। उसकी GF की चैट।


नंगी फोटोज। लड़की की भरी हुई चुचियाँ, गीली चूत की क्लोजअप, गांड दिखाते हुए सेक्सी पोज। राहुल ने भी अपनी तस्वीरें भेज रखी थीं — उसका मोटा, नसों वाला लंड, पूरा खड़ा, सिर पर मोती जैसा पानी चमक रहा था।


चैट में गंदी बातें:


"कल जब मिलूँगा तो तेरी चूत को इतना चोदूँगा कि तू चल भी नहीं पाएगी..." "मेरी गांड में पूरा लंड लेना पड़ेगा भैया..."


मेरी साँसें तेज हो गईं। मेरी चूत अचानक गर्म और गीली हो गई। पैर काँप रहे थे। मैंने जल्दी से फोन वापस रख दिया और अपने बर्थ पर लेट गई। लेकिन अब मन में तूफान चल रहा था।


मैंने अपना फोन निकाला और कुछ brother-sister incest वाली stories खोल लीं। पढ़ते-पढ़ते मेरी उँगलियाँ अपने ब्लाउज के अंदर चली गईं। निप्पल पहले से ही सख्त थे। मैं उन्हें धीरे-धीरे मसलने लगी। नीचे सलवार के अंदर हाथ डालकर अपनी भीगी चूत को सहलाने लगी।


"राहुल..." मैंने मन ही मन फुसफुसाया।


तभी राहुल नीचे उतरा।


"प्रिया, पानी ले आऊँ? स्टेशन आने वाला है," उसने पूछा।


"हाँ... ले आओ भैया," मैंने आवाज को सामान्य रखने की कोशिश की।


जैसे ही वो चला गया, मैंने अपनी सलवार का नाडा ढीला किया और उँगलियाँ अंदर डाल दीं। कल्पना में राहुल की जीभ मेरी चूत पर थी। मैं तेजी से उँगलियाँ चला रही थी।


वो पानी लेकर लौटा। हम दोनों बर्थ पर बैठकर चिप्स खाने लगे। बाहर ठंड बढ़ रही थी। ट्रेन की खिड़की से ठंडी हवा आ रही थी।


"भैया... ठंड लग रही है," मैंने कहा और उसकी तरफ देखा। ये Desi Sex से भरपूर Train me Sister Ki Chudai वाली Hindi Sex Kahani आप Garamkahani.com पर पढ़ रहे हो।


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राहुल ने बिना कुछ कहे मुझे अपने पास खींच लिया। मैं उसके बर्थ पर चढ़ गई और उसके सीने से लगकर बैठ गई। उसकी गर्मी मुझे अच्छी लग रही थी।


"तुम्हें ठंड लगती है ना हमेशा," उसने मुस्कुराते हुए मेरे बालों में हाथ फेरा।


मैंने सिर उसके कंधे पर रख दिया। उसकी साँसें मेरे गाल पर पड़ रही थीं। बचपन की यादें ताजा हो गईं — जब हम ऐसे ही चिपककर सोते थे। लेकिन आज कुछ अलग था। मेरी चूत अभी भी गीली थी।


मैंने हिम्मत करके उसके गाल पर हल्का किस कर दिया। राहुल ने मुस्कुराकर मेरे गाल पर किस कर दिया। फिर हम एक-दूसरे को देखते रहे। उसकी आँखों में कुछ नया था।


धीरे-धीरे उसका हाथ मेरी कमर पर आ गया। उसने मुझे थोड़ा और कसकर गले लगा लिया। मेरे मम्मे उसकी छाती से हल्के से दब रहे थे। मैंने महसूस किया - उसके लंड में खून का बहाव तेज हो रहा था। वो मेरी जांघ से सटकर धीरे-धीरे सख्त हो रहा था।


मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।


"प्रिया... आज तू बहुत प्यारी लग रही है," उसने धीमी आवाज में कहा।


मैंने जवाब में सिर्फ उसके सीने से और चिपककर आँखें बंद कर लीं। ट्रेन की लय, बाहर की ठंडी हवा, और राहुल की गर्मी — सब मिलकर मुझे पागल कर रहा था।


ट्रेन की रफ्तार बढ़ती जा रही थी। कंपार्टमेंट में हल्की-हल्की सी ठंडी हवा और ट्रेन के झटके हमें और करीब ला रहे थे। राहुल का हाथ मेरी कमर पर था, उँगलियाँ हल्के-हल्के मेरी पीठ पर घूम रही थीं।


मैं उसके सीने से सटी हुई थी। मेरे मम्मे उसके शरीर से दब रहे थे और मैं महसूस कर रही थी कि उसका लंड अब पूरी तरह खड़ा हो चुका है।


"प्रिया..." उसने धीरे से मेरे नाम को पुकारा। उसकी आवाज में कुछ नया था - लालच, प्यार और हिचकिचाहट का मिश्रण।


मैंने सिर उठाकर उसकी आँखों में देखा। हमारी नजरें मिलीं। उस पल में सारी बचपन की यादें, सारी गुप्त इच्छाएँ, और वो गलत होने का डर — सब एक साथ उभर आए।


राहुल ने धीरे से मेरे गाल को छुआ और फिर मेरे होंठों पर हल्का-सा किस किया। सिर्फ होठों को होठों से छुआ। फिर थोड़ा पीछे हटकर मेरी प्रतिक्रिया देखी। मैंने विरोध नहीं किया। बल्कि मैंने खुद आगे बढ़कर उसके होंठों को चूमा।


ये पहला गहरा किस था। उसने मेरी निचली होंठ को चूस लिया। मैंने भी उसकी ऊपरी होंठ को अपने मुंह में लिया। हमारी जीभें मिलीं। गीली, गर्म, और भूखी।


ट्रेन के झटके के साथ हमारी चुम्बन की ताल बिगड़ रही थी, जो और उत्तेजक लग रही थी।


उसके हाथ मेरी कमर से नीचे सरक गए। मेरी सलवार के ऊपर से ही मेरी गांड को सहलाने लगा। मैं सिसक पड़ी — "आह्ह्ह... भैया..."


"तुझे अच्छा लग रहा है ना?" उसने मेरे कान में फुसफुसाया।


"हाँ... लेकिन... ये गलत है ना?" मेरी आवाज काँप रही थी।


"मुझे भी यही लगता था... लेकिन आज... मैं तुझे रोक नहीं पा रहा प्रिया।"


उसने मेरी सलवार का नाडा ढीला किया। उसकी उँगलियाँ अंदर घुसीं। मेरी पैंटी पहले से ही पूरी भीगी हुई थी। उसने पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत को सहलाया।


"प्रिया... तू इतनी गीली क्यों है?" उसकी आवाज में हैरानी और खुशी दोनों थी।


मैं शर्मा गई। चेहरा उसके सीने में छिपा लिया। "तुम्हारी... उस चैट को देखकर..."


राहुल चौंक गया। "तुमने... देख लिया?"


मैंने सिर हिलाया। "हाँ... और उसके बाद मेरा मन..."


उसने मुझे और कसकर पकड़ लिया। "तो तुझे भी मेरे बारे में... ऐसे ख्याल आते हैं?"


"बहुत बार..." मैंने कबूल किया। ये Antarvasna वाली Bhai Bahan Aur Public Sex Ki Hindi Sex Stories आप गरम कहानी डॉट कॉम   पर पढ़ रहे हैं!


ये कबूलनामा जैसे बाँध तोड़ने वाला था। राहुल ने मुझे लिटा दिया। मेरी सलवार और पैंटी दोनों उतार दीं। अब मैं कमर से नीचे पूरी नंगी उसके सामने थी। उसने मेरी जांघें फैलाईं और झुककर मेरी चूत को सूँघा।


"आह्ह्ह... राहुल..." मैंने अपने मुंह पर हाथ रख लिया।


उसकी गर्म जीभ मेरी चूत की ऊपरी फांक पर पड़ी। धीरे-धीरे उसने पूरी चूत चाटना शुरू किया। कभी क्लिटोरिस को चूसता, कभी जीभ अंदर डालकर घुमाता। ट्रेन के झटकों के साथ उसकी जीभ की रिदम बदल रही थी।


मैं उसके बाल पकड़े हुए थी और अपनी जांघें उसके सिर के चारों तरफ सिकोड़ रही थी।


"भैया... और चाटो... आह्ह्ह... बहुत अच्छा लग रहा है..."


5-6 मिनट तक वो मेरी चूत चाटता रहा। मैं दो बार छोटे-छोटे ऑर्गेज्म आ चुकी थी। मेरा पूरा शरीर पसीने से तर था।


राहुल ने उठकर अपनी ट्रैक पैंट उतारी। उसका मोटा लंड बाहर आ गया — बिल्कुल वैसा जैसा मैंने चैट में देखा था। गाढ़ा, नसों वाला, पूरा खड़ा और सिर पर पारदर्शी पानी चमक रहा था।


"प्रिया... लेना है?" उसने पूछा। उसकी आवाज में अंतिम बार हिचकिचाहट थी।


मैंने बिना कुछ सोचे सिर हिलाया। "हाँ भैया... मुझे चाहिए... धीरे से..."


राहुल मेरे ऊपर आ गया। उसने लंड की नोक मेरी चूत पर रखी और हल्का दबाव दिया। सिर अंदर घुसा। मैंने आह भर दी - "आह्ह्ह... भैया... बड़ा है..."


वो धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर डालने लगा। मेरी टाइट चूत में वो मोटा लंड घुसते ही मैं कराह उठी। दर्द था, लेकिन उसमें मीठा सा मजा भी था। पूरा लंड अंदर जाने तक मैंने उसकी पीठ नाखूनों से खरोंच दी।


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"प्रिया... तेरी चूत... कितनी टाइट और गर्म है..." उसने कराहते हुए कहा।


फिर धीरे-धीरे उसने गति बढ़ाई। ट्रेन के झटकों के साथ वो मुझे चोद रहा था। हर धक्के पर मेरे मम्मे हिल रहे थे। उसने मेरा ब्लाउज ऊपर किया और ब्रा हटाकर एक चुची मुंह में ले ली। चूसने लगा।


"आह्ह्ह... राहुल... और जोर से... आह्ह्ह..."


मैंने अपनी टांगें उसकी कमर पर लपेट ली और खुद भी नीचे से धक्के देने लगी। हम दोनों की साँसें एक हो चुकी थीं। कंपार्टमेंट में सिर्फ हमारी कराहटें, चुदाई की फच-फच की आवाज और ट्रेन की धड़कन गूंज रही थी।


राहुल ने रफ्तार बढ़ा दी। "प्रिया... मैं झड़ने वाला हूँ..."


"मुझे भी... आह्ह्ह... अंदर ही छोड़ दो भैया..."


हम दोनों एक साथ झड़ गए। उसका गर्म वीर्य मेरी चूत के अंदर फूटा। मैं काँप गई। राहुल मेरे ऊपर ढेर हो गया। उसका लंड अभी भी मेरी चूत के अंदर था।


हम कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे। उसका वीर्य मेरी जांघों पर बह रहा था। मैं उसके सीने पर सिर रखे हुए थी।


"ये... गलत है ना भैया?" मैंने धीरे से पूछा।


राहुल ने मेरे बाल सहलाए। "गलत लग रहा है... लेकिन रुकना भी नहीं चाहता।"


ट्रेन अभी भी चल रही थी। रात के 1 बज चुके थे। लेकिन हम दोनों जानते थे - ये सिर्फ शुरुआत थी।


हम कुछ देर तक चुपचाप लेटे रहे। राहुल का लंड अभी भी मेरी चूत के अंदर था, धीरे-धीरे नरम हो रहा था। उसका गर्म वीर्य मेरी जांघों पर रिस-रिस कर बह रहा था।


ट्रेन की हल्की-हल्की धड़कन और बाहर की ठंडी हवा हमारे पसीने से तर शरीर को और उत्तेजित कर रही थी। 


मैं उसके सीने पर सिर रखे हुए थी। मेरी उँगलियाँ उसके पेट पर घूम रही थीं। "भैया... मुझे डर लग रहा है," मैंने फुसफुसाया। "अगर किसी ने देख लिया तो..."


राहुल ने मेरे बालों में हाथ फेरा। "कोई नहीं आएगा प्रिया। ये कपल कंपार्टमेंट है। और... अब हम रुक भी नहीं सकते।"


उसकी बात सुनकर मेरी चूत फिर से सिकुड़ गई। राहुल ने महसूस किया। उसका लंड मेरे अंदर ही हल्का-हल्का सख्त होने लगा।


"फिर से?" मैंने शरमाते हुए पूछा।


"हाँ... लेकिन इस बार थोड़ा अलग तरीके से," उसने मुस्कुराते हुए कहा।


उसने मुझे पलट दिया। अब मैं उसके सीने से चिपकी हुई पीठ करके लेटी थी। राहुल ने पीछे से मुझे कसकर गले लगा लिया। उसका लंड मेरी गांड की दरार में रगड़ खा रहा था।


उसने मेरे कान में काटा और फुसफुसाया, "तुम्हारी गांड भी बहुत सॉफ्ट है प्रिया..."


मैंने अपनी गांड पीछे की तरफ धकेल दी। राहुल ने लंड फिर से मेरी चूत में डाला — इस बार पीछे से। एक झटके में पूरा अंदर चला गया। "आआह्ह्ह्ह... भैया... गहरा हो गया..."


इस पोजीशन में ट्रेन के हर झटके का असर सीधा मेरी चूत पर पड़ रहा था। राहुल ने मेरी कमर पकड़कर धीरे-धीरे चोदना शुरू किया। उसका एक हाथ आगे बढ़कर मेरी चुची मसलने लगा। दूसरे हाथ से मेरी क्लिटोरिस सहला रहा था।


"आह्ह्ह... राहुल... दोनों तरफ... आह्ह्ह... पागल हो रही हूँ..."


वो तेज होता गया। फच-फच-फच की आवाज कंपार्टमेंट में गूंज रही थी। मैंने तकिए में मुँह दबा लिया ताकि ज्यादा आवाज न निकले। राहुल ने मेरी गर्दन पर किस करते हुए कहा, "तुम्हें चोदते हुए मुझे इतना अच्छा लग रहा है प्रिया... जैसे तुम मेरी ही हो।"


"हूँ ना भैया... आज से तुम्हारी हूँ... आह्ह्ह... और तेज..."


राहुल ने मुझे कुतिया बनाया। मैं चारों हाथ-पैरों पर थी। उसने मेरी कमर पकड़ी और जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। हर धक्के पर मेरी गांड लहरा रही थी। उसने एक हाथ से मेरी गांड पर थप्पड़ मारा। "चट्!" की आवाज हुई।


"आह्ह्ह... भैया... फिर मारो..." मैंने खुद कहा। ये Family me Bhai-Bahan Ki Antarvasna Free Hindi Sex Story आप Garamkahani.com  पर पढ़ रहे हो।


राहुल ने मेरी गांड को लाल करते हुए कई थप्पड़ मारे। दर्द और मजा का मिश्रण था। मैं पीछे से अपनी गांड हिला-हिलाकर उसका लंड ले रही थी।


लगभग 10 मिनट बाद उसने मुझे फिर पलटा और missionary पोजीशन में आ गया। मेरी टांगें उसके कंधों पर रख दीं। अब वो बहुत गहराई तक घुस रहा था।


"प्रिया... तेरी चूत... मुझे दीवाना बना देती है... आह्ह्ह..."


मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और बस कराहती रही। "भैया... फाड़ दो... आह्ह्ह... पूरी रात चोदो मुझे..."


राहुल के धक्के और तेज हो गए। उसके पसीने की बूँदें मेरे मम्मों पर गिर रही थीं। मैंने उसके गले में बाहें डाल लीं और उसे चूमने लगी। हम दोनों की जीभें लड़ रही थीं।


मेरा तीसरा ऑर्गेज्म आने वाला था। "भैया... मैं झड़ने वाली हूँ... आह्ह्ह..."


"साथ में प्रिया... साथ में..."


हम दोनों एक साथ झड़ गए। राहुल ने मेरी चूत के अंदर अपना सारा माल उड़ेल दिया। मैं काँपती रही। मेरा शरीर पूरी तरह शिथिल हो चुका था।


राहुल मेरे ऊपर ढेर हो गया। हम दोनों हाँफ रहे थे। उसका लंड मेरी चूत से बाहर निकला तो सफेद वीर्य की धार मेरी जांघों पर बहने लगी।


हम थोड़ी देर तक ऐसे ही लेटे रहे। राहुल ने मुझे अपने सीने से लगाकर बाल सहलाए। "प्रिया... मैंने कभी सोचा नहीं था कि हम... ऐसा करेंगे।"


"मैं भी नहीं... लेकिन अब लग रहा है कि ये होना ही था," मैंने उसके सीने पर उँगली से गोले बनाते हुए कहा।


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रात के 2:30 बज चुके थे। ट्रेन अब भी अपनी रफ्तार से भाग रही थी। बाहर अंधेरा घना था। हम दोनों जानते थे कि सुबह होने तक अभी काफी समय है।


राहुल ने मुझे फिर से चूम लिया। "एक बार और...?"


मैंने शरमाकर मुस्कुराते हुए सिर हिलाया। "हाँ... लेकिन इस बार मैं ऊपर..."


मैंने राहुल को लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गई। उसका लंड फिर से पूरा खड़ा था। मैंने उसे अपनी उँगलियों से पकड़ा और अपनी गीली चूत पर रगड़ा। फिर धीरे से बैठ गई। पूरा लंड एक बार में अंदर चला गया।


"आआह्ह्ह्ह... भैया... बहुत गहरा..." मैंने सिसकारी भरी।


मैं ऊपर-नीचे होने लगी। पहले धीरे-धीरे, फिर रफ्तार बढ़ाते हुए। राहुल ने मेरी कमर पकड़ ली और नीचे से धक्के देने लगा। मेरे मम्मे जोर-जोर से उछल रहे थे। उसने दोनों हाथों से उन्हें पकड़कर मसलना शुरू कर दिया।


"प्रिया... तुम ऊपर से चोदती हुई कितनी हॉट लग रही हो..." उसने कराहते हुए कहा।


मैंने झुककर उसके होंठ चूस लिए। मेरी गांड उसके लंड पर ऊपर-नीचे हो रही थी। ट्रेन के झटके हमें और तेज करने में मदद कर रहे थे। कभी-कभी ट्रेन के किसी मोड़ पर हम दोनों का बैलेंस बिगड़ जाता और लंड और भी गहरा घुस जाता।


"आह्ह्ह... राहुल... मैं फिर से झड़ने वाली हूँ... आह्ह्ह..."


"मैं भी प्रिया... तेज... तेज करो..."


मैंने पूरी ताकत लगाकर अपनी गांड हिलानी शुरू कर दी। फच-फच-फच... की तेज आवाज पूरे कंपार्टमेंट में भर गई। राहुल ने मेरी गांड पर थप्पड़ मारे और आखिरी बार जोर से ऊपर धक्का दिया।


हम दोनों एक साथ झड़ गए। मेरी चूत उसके वीर्य से भर गई। मैं थककर उसके सीने पर गिर पड़ी।


रात के 4 बजे थे। हम दोनों पसीने से तर, साँसें हाँफते हुए लेटे थे। राहुल का लंड अभी भी मेरी चूत के अंदर था। मैंने उसे बाहर निकलने नहीं दिया।


"भैया... ये सब हुआ कैसे?" मैंने धीरे से पूछा।


राहुल ने मेरे माथे पर किस किया। "शायद हम दोनों बहुत देर से एक-दूसरे को चाह रहे थे। बस ट्रेन और मौका मिल गया। अब... हम बदल चुके हैं प्रिया।"


मैंने उसकी छाती पर सिर रखा और आँखें बंद कर लीं। "गलत है... लेकिन मुझे अच्छा लग रहा है। तुम्हारे साथ... सब कुछ।"


हम दोनों थोड़ी देर और ऐसे ही लिपटे रहे। राहुल ने मुझे कंबल ओढ़ा दिया। ट्रेन की लय अब लोरी जैसी लग रही थी।


सुबह के 7 बजे ट्रेन दिल्ली स्टेशन पहुँची। हम दोनों जल्दी से तैयार हुए। कपड़े ठीक किए, सामान उठाया। बाहर उतरते समय राहुल ने मेरे कान में फुसफुसाया,


"शादी में रिश्तेदारों से बचकर हम होटल में अलग रूम लेंगे। अब ये सिर्फ शुरुआत है।"


मैंने शरमाकर सिर हिलाया। मेरी चूत अभी भी दर्द कर रही थी, लेकिन मन में एक नई खुशी थी।


ट्रेन की जर्नी खत्म हो गई थी। लेकिन हमारी नई कहानी शुरू हो चुकी थी।


तो दोस्तों कैसे लगी हमारी Bhai Bahan Ki Train me Chudai की Hindi Sex Kahani? कॉमेंट करके जरूर बताए!


Hotel में जो Wild चुदाई हुई उसका अगला भाग जल्द ही लिखूँगी अगर आप लोग कॉमेंट में बताओगे तो ही! साथ ही अगले भाग में क्या ट्विस्ट आना चाहिए उसकी fantasy भी मुझे बताए!

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