मौसी की बेटी की चूत बेरहमी से फाड़ी!


Family Sex Story : मौसी की बेटी को भाई ने बेरहमी से चोदकर अपनी चुदक्कड़ रंडी बहना बना लिया! चुदाई में करी फूल Dirty बातें! | Bahan Ki Antarvasna Chudai Kahani!


मेरा नाम आरव है। उम्र 24 साल। मैं दिल्ली में रहता हूँ और एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ। दिखने में हट्टा-कट्टा हूँ, कद 5'11" है। मेरी मौसी के घर अक्सर जाना होता है क्योंकि वो भी दिल्ली में ही रहती हैं।


मौसी की बेटी का नाम स्नेहा है। वो मुझसे दो साल बड़ी है, यानी 26 साल की। स्नेहा देखने में बेहद खूबसूरत और सेक्सी है।


उसका फिगर 32-28-36 का है। उसकी कमर पतली है और गांड काफी भरी हुई और आकर्षक है। जब वो चलती है तो उसकी गांड दोनों तरफ हिलती हुई लगती है। उसके बाल लंबे और घने हैं, जो उसके चेहरे को और भी आकर्षक बनाते हैं।


पहले जब भी मैं मौसी के घर जाता था, स्नेहा से मेरी बस नॉर्मल बातें होती थीं। लेकिन पिछले कुछ महीनों से मेरी नजर उसकी तरफ ज्यादा जाने लगी थी। खासकर जब वो घर में सलवार-कमीज या टाइट टॉप पहनती थी, तो उसके स्तन और गांड का आकार साफ दिखता था।


एक हफ्ते पहले की बात है। मैं मौसी के घर गया था और दो-तीन दिन रुकने वाला था। मौसी और मौसा दोनों ही ऑफिस जाते थे, इसलिए दिन में ज्यादातर समय घर में सिर्फ मैं और स्नेहा ही रहते थे।


पहले दिन तो सब कुछ नॉर्मल रहा। लेकिन दूसरे दिन दोपहर को जब मौसी-मौसा दोनों बाहर चले गए, तो स्नेहा और मैं घर में अकेले रह गए।


मैं लिविंग रूम में सोफे पर बैठकर फोन देख रहा था। स्नेहा भी कुछ देर बाद आकर मेरे पास बैठ गई। पहले तो वो चुपचाप बैठी रही। फिर अचानक उसने अपना एक पैर मेरे पैर पर रख दिया।


मैंने कुछ नहीं कहा। लेकिन मन में एक अजीब सी हलचल हुई।


स्नेहा ने मुस्कुराते हुए कहा, “आरव भाई, तुम बहुत शांत हो गए हो आजकल। पहले तो इतना शांत नहीं रहते थे।”


मैंने मुस्कुराकर कहा, “कुछ नहीं, बस थकान लग रही है।”


उसने फिर अपना दूसरा पैर भी मेरे पैर पर रख दिया और थोड़ा सा घिसा। मैंने ऊपर देखा तो वो सीधे मेरी आँखों में देख रही थी। उसके होंठों पर हल्की सी मुस्कान थी।


मैंने भी हिम्मत करके अपना हाथ उसकी जाँघ पर रख दिया। स्नेहा ने कोई एतराज नहीं किया। उल्टे उसने अपना पैर और आगे बढ़ा दिया।


हम दोनों चुप थे, लेकिन हवा में कुछ और ही बात चल रही थी।


मैंने धीरे से उसकी जाँघ को सहलाना शुरू किया। स्नेहा की साँसें थोड़ी तेज हो गईं। उसने मेरी जाँघ पर हाथ रखा और धीरे-धीरे ऊपर की तरफ बढ़ाने लगी।


जैसे ही उसका हाथ मेरे लंड के पास पहुँचा, उसने उसे हथेली से दबा दिया। मेरा लंड पहले से ही आधा खड़ा हो चुका था। स्नेहा ने उसे जींस के ऊपर से मसलना शुरू कर दिया।


मैंने भी उसकी सलवार के ऊपर से उसकी चूत को छुआ। वो पहले से ही गीली हो चुकी थी। मैंने उँगली से उसे हल्का सा दबाया। स्नेहा ने आँखें बंद कर लीं और होठ काट लिया।


“आरव…” उसने धीरे से कहा। ये Antarvasana Family की Mausi Ki Beti Ki Chudaii वाली Hindi Sex Kahani आप Garam kahani पर पढ़ रहे है।


मैंने कुछ नहीं बोला। बस उसकी चूत को सहलाता रहा। 


हम दोनों को अच्छा लग रहा था। लेकिन अचानक बाहर से मौसी की आवाज आई। हम दोनों तुरंत अलग हो गए।


उस दिन के बाद चार दिन तक हमें अकेले रहने का मौका नहीं मिला। मौसी-मौसा दोनों घर पर ही थे। लेकिन हम दोनों की नजरें अब एक-दूसरे को अलग तरह से देखने लगी थीं।


स्नेहा कभी-कभी मुझे अकेले में देखकर मुस्कुरा देती। मैं भी उसे देखकर आँख मार लेता।


पाँचवें दिन सुबह मौसी और मौसा को शहर के बाहर एक रिश्तेदार के यहाँ जाना था। वो दोनों सुबह जल्दी निकल गए और शाम को लौटने वाले थे।


जैसे ही उनका गेट बंद हुआ, स्नेहा ने मेरी तरफ देखा।


हम दोनों एक-दूसरे को देखते रहे। फिर स्नेहा धीरे से मेरे पास आई।


मैंने उसे अपनी बाहों में खींच लिया।


उसने कोई विरोध नहीं किया।


मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। स्नेहा ने भी मुझे जोर से पकड़ लिया। हम दोनों जोर-जोर से एक-दूसरे को चूमने लगे।


मैंने उसके टॉप के अंदर हाथ डाला और उसके स्तनों को दबाना शुरू किया। स्नेहा की साँसें अब बहुत तेज हो चुकी थीं।


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मैंने उसे दीवार से लगा दिया और उसके गले को चूमने लगा। स्नेहा ने मेरे बालों में हाथ डाल दिया।


“आरव… धीरे…” उसने कराहते हुए कहा।


लेकिन मैं अब रुकने वाला नहीं था।


मैंने उसका टॉप ऊपर खिसकाया और ब्रा के ऊपर से उसके स्तनों को मसलने लगा। स्नेहा की चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। मैंने उसकी सलवार के ऊपर से उसकी चूत को रगड़ना शुरू किया।


स्नेहा ने मेरे कान में फुसफुसाया, “आरव… कमरा चलते हैं…”


हम दोनों तेजी से उसके कमरे में चले गए।


दरवाजा बंद करते ही मैंने उसे बिस्तर पर धकेल दिया।


जैसे ही हम दोनों स्नेहा के कमरे में गए, मैंने दरवाजा बंद किया और उसे दीवार से लगा दिया। स्नेहा की साँसें बहुत तेज चल रही थीं। मैंने उसके होंठों पर फिर से अपने होंठ रख दिए और जोर से चूमने लगा।


स्नेहा भी मुझे कसकर पकड़कर चूम रही थी। मैंने उसके टॉप को ऊपर खिसकाया और ब्रा के ऊपर से उसके स्तनों को दबाने लगा। उसके स्तन नरम और भरे हुए थे। स्नेहा ने आँखें बंद कर लीं और हल्की सी कराह निकाली।


“आरव… आह…”


मैंने उसका टॉप पूरी तरह उतार दिया। अब वो सिर्फ ब्रा में थी। मैंने ब्रा के हुक खोले और उसके दोनों स्तन बाहर निकाल लिए। उसके निप्पल गुलाबी और थोड़े सख्त हो चुके थे।


मैंने एक स्तन मुँह में लिया और चूसने लगा। स्नेहा ने मेरे बाल पकड़ लिए।


“आआह… आरव… धीरे… उफ्फ…”


मैं दूसरे स्तन को हाथ से मसलते हुए पहले वाले को जोर से चूस रहा था। स्नेहा की साँसें अब कराह में बदल रही थीं। मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोला और उसे नीचे खिसका दिया। अब वो सिर्फ पैंटी में थी।


मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया। स्नेहा मेरी तरफ देख रही थी। उसकी आँखों में शर्म भी थी और चाहत भी। मैंने उसकी पैंटी को धीरे से उतार दिया। उसकी चूत पर हल्के-हल्के बाल थे। चूत के होंठ थोड़े बाहर निकले हुए थे और पहले से ही गीले हो चुके थे।


मैंने उसकी जाँघें फैलाईं और सीधे उसकी चूत पर मुँह लगा दिया।


स्नेहा चौंक गई, “आरव… ये मत करो… आह…”


लेकिन मैंने रुका नहीं। मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया। जीभ से उसके फटे को रगड़ता रहा और कभी-कभी क्लिट को चूसता। स्नेहा का शरीर काँप रहा था।


“आआह… आरव… ये… बहुत अच्छा लग रहा है… उफ्फ… जीभ और अंदर डालो…”


मैंने उसकी चूत में जीभ घुमाई और चूसने लगा। स्नेहा अब जोर-जोर से कराह रही थी। उसने मेरे बाल पकड़कर अपनी चूत पर दबा दिया।


“आह… आरव… हाँ… ऐसे ही… चूसो मेरी चूत… आआह…”


मैंने एक उँगली उसकी चूत में डाली और अंदर-बाहर करना शुरू किया। स्नेहा का शरीर और ज्यादा काँपने लगा।


“आरव… मैं… मैं कुछ होने वाली हूँ… आआआह…”


स्नेहा जोर से झड़ गई। उसकी चूत से गर्म पानी निकला। मैंने सब कुछ चाट लिया।


स्नेहा थककर लेट गई। लेकिन मैंने रुका नहीं। मैंने अपना पैंट और अंडरवियर उतार दिया। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था। स्नेहा ने उसे देखा और डर गई।


“आरव… ये इतना बड़ा है… मेरे अंदर कैसे जाएगा?”


मैंने लंड उसके मुँह के पास ले जाकर कहा, “पहले इसे चूसो स्नेहा।”


स्नेहा ने पहले तो हिचकिचाया, लेकिन फिर उसने लंड को हाथ में लिया और धीरे से चूसना शुरू किया। जैसे ही उसने लंड मुँह में लिया, मुझे बहुत अच्छा लगा।


“आह… स्नेहा… और गहरा ले… हाँ… ऐसे ही…”


स्नेहा अब लंड को अच्छे से चूस रही थी। मैंने उसके सिर को पकड़ लिया और धीरे-धीरे लंड उसके मुँह में आगे-पीछे करना शुरू किया। स्नेहा के गले से हल्की-हल्की आवाजें आ रही थीं।


“ग्लक… ग्लक…”


मैंने रफ्तार थोड़ी बढ़ा दी। स्नेहा की आँखों में आँसू आ गए, लेकिन वो चूसती रही।


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कुछ देर बाद मैंने लंड बाहर निकाला। स्नेहा साँस ले रही थी। मैंने उसे फिर से बिस्तर पर लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गया।


मैंने लंड उसकी चूत पर रखा और धीरे से दबाया। लंड का सिरा अंदर घुसा। स्नेहा ने दाँत कस लिए।


“आरव… धीरे… दर्द हो रहा है…”


मैंने एक जोरदार धक्का मारा। आधा लंड उसकी चूत में घुस गया। स्नेहा चीख उठी।


“आआआह… आरव… मर गई… निकालो… दर्द… आआह…”


मैंने रुका नहीं। मैंने दूसरा धक्का मारा और पूरा लंड उसकी चूत में घुसा दिया। स्नेहा रोने लगी।


“आरव… बहुत दर्द हो रहा है… प्लीज… आह…”


मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। स्नेहा दर्द से छटपटा रही थी, लेकिन धीरे-धीरे उसकी चूत मेरे लंड को अंदर लेने लगी।


थोड़ी देर बाद स्नेहा ने कमर हिलानी शुरू कर दी।


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“आह… आरव… अब… थोड़ा अच्छा लग रहा है… और जोर से…”


मैंने रफ्तार बढ़ा दी। स्नेहा अब जोर-जोर से कराह रही थी।


“आआह… आरव… हाँ… चोदो मुझे… और तेज… आआआह…”


स्नेहा अब दर्द भूल चुकी थी। उसकी चूत मेरे लंड को अंदर लेने लगी थी और वो कमर हिला-हिलाकर मेरा साथ देने लगी।


“आआह… आरव… हाँ… और जोर से… चोद मुझे… उफ्फ…”


मैंने उसकी दोनों टाँगें अपने कंधों पर रख लीं और जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। स्नेहा का शरीर बिस्तर पर उछल रहा था। उसके स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे। मैंने एक हाथ से उसके स्तन को दबाया और दूसरे हाथ से उसकी कमर पकड़कर चोद रहा था।


“स्नेहा… तेरी चूत कितनी टाइट है… आह… मज़ा आ रहा है…” मैंने गंदे अंदाज में कहा।


स्नेहा ने आँखें बंद करके कराहते हुए कहा, “आआह… आरव… और तेज… फाड़ दे मेरी चूत… हाँ… ऐसे ही…”


मैंने रफ्तार और बढ़ा दी। अब कमरा स्नेहा की कराहों और चुदाई की आवाजों से गूँज रहा था।


“पच… पच… पच…”


स्नेहा अब पूरी तरह खुल चुकी थी। वो मेरे बाल पकड़कर जोर से खींच रही थी और बार-बार बोल रही थी, “और जोर से… आरव… मुझे चोद… आआआह…”


कुछ देर बाद मैंने उसे घोड़ी बना दिया। स्नेहा घुटनों के बल खड़ी हो गई और मैंने पीछे से लंड उसकी चूत में घुसा दिया। इस बार लंड और गहरा गया। स्नेहा ने तकिए में मुँह दबाकर चीख मारी।


“आआआह… आरव… गहरा… बहुत गहरा… उफ्फ…”


मैंने उसकी कमर पकड़कर जोर-जोर से पीटना शुरू कर दिया। स्नेहा की भरी हुई गांड मेरी जाँघों से टकरा रही थी। मैंने एक हाथ आगे बढ़ाकर उसकी चूत को उँगलियों से रगड़ना शुरू किया।


“आरव… आआह… दोनों जगह… अच्छा लग रहा है… हाँ… और जोर से…”


स्नेहा अब बिल्कुल बेसुध हो चुकी थी। वो बार-बार बोल रही थी, “चोद… चोद मुझे… अपनी बहन को… आआआह…”


मैंने उसकी गांड पर थप्पड़ मारा। स्नेहा का शरीर काँप उठा।


“आह… फिर मार… आरव… और मार…”


मैंने उसकी गांड पर दो-तीन और जोरदार थप्पड़ मारे। स्नेहा की गांड लाल हो गई थी।


कुछ देर बाद मैंने उसे फिर से पीठ के बल लिटाया। अब मैं उसके ऊपर चढ़कर तेजी से चोद रहा था। स्नेहा ने अपनी दोनों टाँगें मेरी कमर पर लपेट ली थीं और मुझे कसकर पकड़ रखा था।


“आरव… मैं… मैं फिर झड़ने वाली हूँ… आआआआह…”


स्नेहा जोर से झड़ गई। उसकी चूत ने मेरे लंड को कस लिया। मैं भी अब रुक नहीं पा रहा था।


“स्नेहा… मैं भी… आह… झड़ने वाला हूँ…”


“अंदर ही छोड़ दो… आरव… भर दे मेरी चूत…” स्नेहा ने कराहते हुए कहा।


मैंने आखिरी जोरदार धक्के मारे और जोर से झड़ गया। मेरा गर्म वीर्य सीधे उसकी चूत के अंदर भर गया। स्नेहा ने मुझे कसकर जकड़ लिया।


हम दोनों पसीने से तर होकर एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे। मेरा लंड अभी भी उसकी चूत के अंदर था।


कुछ देर बाद स्नेहा ने मेरे बाल सहलाते हुए धीरे से कहा, “आरव… आज जो हुआ वो गलत था… लेकिन… मुझे बहुत अच्छा लगा।”


मैंने उसे चूमते हुए कहा, “स्नेहा… ये अभी शुरुआत है।”


स्नेहा ने शर्मा कर कहा, “तुम बहुत बुरे हो… इतनी जोर से चोदा मुझे।”


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मैंने मुस्कुराते हुए उसके स्तन को दबाया, “अभी तो और भी बहुत कुछ बाकी है।”


स्नेहा ने मेरी छाती पर सिर रखा और धीरे से बोली, “मौसी-मौसा शाम को आ जाएँगे… तब तक हम क्या करेंगे?”


मैंने उसे फिर से अपने ऊपर खींच लिया और कहा, “अभी तो दिन बाकी है… और मैंने अभी तुझे पूरा नहीं चोदा।”


स्नेहा ने मेरे होंठों पर उँगली रखते हुए कहा, “धीरे-धीरे… पहली बार इतना दर्द हुआ था।”


मैंने उसे गले लगाया और धीरे से उसके कान में कहा, “अब दर्द नहीं होगा… सिर्फ मजा आएगा।”


स्नेहा ने मेरी गर्दन में मुँह छुपा लिया।


हम दोनों फिर से गर्म होने लगे थे।


हम दोनों थोड़ी देर आराम करने के बाद फिर से गर्म होने लगे। स्नेहा मेरी छाती पर सिर रखे लेटी हुई थी। मैंने उसके बाल सहलाते हुए उसके कान में धीरे से कहा,


“स्नेहा… अब मैं तुझे और जोर से चोदूँगा।”


स्नेहा ने मेरी छाती पर उँगली घुमाते हुए कहा, “आरव… पहली बार तो बहुत दर्द हुआ था।”


मैंने उसे अपने ऊपर खींच लिया और उसके होंठों पर किस करते हुए बोला, “अब दर्द नहीं होगा… सिर्फ मजा आएगा। लेकिन आज मैं तुझे अपनी बहन की तरह नहीं, अपनी रंडी की तरह चोदूँगा।”


स्नेहा की साँसें तेज हो गईं। उसने मेरी आँखों में देखते हुए कहा, “तो चोद… अपनी बहन को… अपनी रंडी समझकर चोद।”


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मैंने उसे बिस्तर पर उल्टा कर दिया और उसके ऊपर चढ़ गया। मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “आज मैं तेरी चूत फाड़ दूँगा स्नेहा… अपनी बहन की चूत का भोसड़ा बना दूँगा।”


स्नेहा ने कमर उठाकर मेरे लंड को अपनी चूत से रगड़ते हुए कहा, “हाँ भाई… फाड़ दे अपनी बहन की चूत… आज मुझे अपनी रंडी बना ले।”


मैंने लंड उसकी चूत पर रखा और एक जोरदार धक्का मारा। पूरा लंड एक ही बार में अंदर घुस गया। स्नेहा चीख उठी।


“आआआह… आरव… साले… बहुत जोर से मारा… आआह…”


मैंने उसकी कमर पकड़कर तेजी से धक्के मारना शुरू कर दिया। स्नेहा अब बिना रोक-टोक के चीख-चीखकर बोल रही थी।


“आआह… भाई… और जोर से… अपनी बहन को चोद… हाँ… तेरी बहन की चूत तेरे लंड के लिए ही बनी है… आआआह…”


मैंने उसके बाल पकड़कर खींचे और जोर से बोला, “बोल… बोल कि तू मेरी रंडी है… अपनी बहन को बोल कि वो मेरी चुदक्कड़ रंडी है।”


स्नेहा ने तकिए में मुँह दबाते हुए कहा, “हाँ… मैं तेरी रंडी हूँ… अपनी बहन को चोद… अपनी रंडी को चोद… आआआह… और तेज… साले…”


मैंने उसकी गांड पर जोरदार थप्पड़ मारा। स्नेहा का शरीर काँप उठा।


“आह… फिर मार… भाई… अपनी बहन की गांड मार… हाँ… ऐसी ही मार… आआआह…”


मैंने उसे घोड़ी बना दिया। स्नेहा घुटनों के बल खड़ी हो गई और मैंने पीछे से लंड घुसा दिया। अब मैं उसकी कमर पकड़कर बहुत तेजी से चोद रहा था। स्नेहा की भरी हुई गांड मेरी जाँघों से टकरा रही थी।


“पच… पच… पच…”


स्नेहा चिल्ला रही थी, “आआआह… आरव… गहरा… अपनी बहन की चूत फाड़ दे… हाँ… चोद… चोद अपनी बहन को… तेरी बहन आज तेरी रंडी है… आआआह…”


मैंने उसके बाल खींचकर कहा, “बोल… बोल कि तू आज मेरे लंड की गुलाम है… अपनी बहन को बोल।”


स्नेहा सिसकते हुए बोली, “हाँ भाई… मैं तेरे लंड की गुलाम हूँ… अपनी बहन को अपनी रंडी समझकर चोद… आआआह… और जोर से…”


मैंने उसकी गांड पर लगातार थप्पड़ मारते हुए चोदना जारी रखा। स्नेहा अब पूरी तरह बेसुध हो चुकी थी।


“आरव… मैं… मैं फिर झड़ने वाली हूँ… आआआआह…”


स्नेहा जोर से झड़ गई। लेकिन मैंने रुकना नहीं था। मैंने उसे फिर से पीठ के बल लिटाया और उसके ऊपर चढ़कर बहुत तेजी से चोदने लगा।


“स्नेहा… आज मैं तेरी चूत में ही झड़ूँगा… अपनी बहन की चूत भर दूँगा… बोल… बोल कि तू चाहती है।”


स्नेहा ने मेरी गर्दन कसकर पकड़ लिया और चीखते हुए कहा, “हाँ भाई… भर दे… अपनी बहन की चूत में अपना माल भर दे… आआआआह… चोद… चोद अपनी बहन को…”


मैंने आखिरी जोरदार धक्के मारे और जोर से झड़ गया। मेरा गर्म वीर्य सीधे उसकी चूत के अंदर भर गया। स्नेहा भी उसी वक्त फिर से झड़ गई।


हम दोनों थककर एक-दूसरे पर गिर पड़े। स्नेहा की चूत से मेरा माल बाहर निकल रहा था।


स्नेहा ने थकी हुई आवाज में कहा, “आरव… आज तूने मुझे सच में अपनी रंडी बना दिया… आह…”


मैंने उसे चूमते हुए कहा, “अभी खत्म नहीं हुआ स्नेहा… शाम को मौसी-मौसा आने से पहले मैं तुझे और चोदूँगा।”


स्नेहा ने मेरी छाती पर सिर रखते हुए धीरे से कहा, “तो चोद लेना… अपनी बहन को… आज पूरा दिन तेरी रंडी हूँ मैं।”


तो दोस्तों इतनी ही थी यह Mausi Ke Beti Ki Chut Chudai Ki Hindi Sex Kahani! बाकी की कहानी किसी और दिन किसी और भाग में!


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