बेटी की लंड से फटी मां-भाई की गांड! पारिवारिक ग्रुप सेक्स!
Family : बेटी ने ब्लैकमेल कर रंडी मां की चूत-गांड स्ट्रैप-ऑन से फाड़ी! नींद की गोली देकर भाई की कुंवारी गांड तेल लगाकर जबरदस्ती चोदी! दोनों बन गए सेक्स गुलाम!
कैसे हो मेरे प्यारे लंड हिलाने वालों और चूत रगड़ने वाली रंडियों, मैं हूं रुकमणी, वही वाली मां जो अपने बेटे रविश के लौड़े से चुदाई कराती है और अब मैं अपनी बेटी मीशा की गुलाम बन चुकी हूं।
हां भाई, वही 38 साल की रंडी मां, जिसकी चूचियां 36-30-36 के फिगर में उछलती रहती हैं, और चूत हमेशा गीली रहती है किसी न किसी लंड या जीभ की भूख से।
आज मैं अपनी फैमिली की वो सच्चाई सुनाऊंगी, जो 2 साल पहले की है, जब मीशा ने न सिर्फ मुझे ब्लैकमेल किया बल्कि अपने भाई अशु की गांड भी फाड़ दी।
इस दुनिया में हर घर वैसा नहीं होता जैसा वो दरवाज़े क बाहर से दिखता है हां ये, गांड चुदाई की फुल डिटेल वाली कहानी है, जिसमें नारियल तेल,
फिर स्ट्रैप-ऑन वाला लंड, जबरदस्ती का बांधना, नींद की गोली और चरम सुख का आनंद है। अगर तुम्हारा लंड खड़ा हो जाए या चूत से रस टपके, तो मेरी गलती नहीं – ये तो हमारी फैमिली मैटर की कहानी है।
पिछली कहानी की तरह ही इसमें गालियां भरी हैं, चुदाई का डबल डोज है, तो नर्म दिल वाले बाहर हो जाओ। बाकी, लंड व चूत हिलाओ और सुनो –
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लेकिन आज इसे आशु और मीशा की मां ही सुना रही है। चलो, फिर शुरू से बताती हूं। वो एक अजीब ही रात थी जब मीशा ने मुझे पहली बार स्ट्रैप-ऑन यानी रबर के लंड से चोदा था,
वो भी कुत्ता स्टाइल में मेरी चूत फाड़ते हुए। उसके बाद घर का माहौल ही बदल गया था। आप सोचते होगे आखिर मेरा बस मेरे बच्चों पर क्यों नहीं चलता तो है।
इसकी वजह है के मेरे पति मरने से पहले सारी प्रॉपर्टी बच्चों को दे गए थे उनको न जाने क्यों मुझपर कभी भरोसा नहीं हुआ।
उन्हें डर था की में जायदाद लेकर अपने हो बच्चों को मरने सड़क पर छोड़ सकती हूं मगर सच कहूं तो मैं अपने बच्चों से बहुत प्यार करती हूं ।
बात रही मेरे रविश की तो वो कहानी मैं फिर कभी सुनाऊंगी आज इसे पूरा करते है।मेरे पति की नफरत ने ही मीशा का व्यवहार मेरे लिए इतना क्रूर बना दिया मगर अब इस सब में मुझे मज़ा आता है।
उस दिन चुदाई के बाद कुछ दिन तो दिन में सब नॉर्मल हो गया – मैं स्कूल जाती थी मीशा कॉलेज।।अशु इंटरमीडिएट की पढ़ाई में लगा रहता था और रविश स्कूल जाता था। लेकिन रातें?
उफ्फ, रातों में तो चुदाई का मेला लग जाता था। मीशा अब घर की मालकिन बन गई थी मेरे पति ने उसे जायदाद से 60 फीसद का हिस्सा दिया था।
वो मुझे रात को प्यार से आवाज़ देकर बुलाती, "मम्मी रंडी, आ जा अपनी बेटी की चूत चाटने।" और मैं, ब्लैकमेल व बदनामी के डर से, चली भी जाती थी।
कभी 69 में हम दोनों एक-दूसरे की भोसड़ी चाटतीं, कभी वो स्ट्रैप-ऑन बांधकर मेरी गांड में घुसेड़ती और खूब हस्ती।
हां, सही सुना गांड भी! मीशा को तो जैसे गांड चुदाई का शौक चढ़ गया था। वो कहती, "मम्मी, तेरी गांड कितनी टाइट है, रविश तो सिर्फ चूत मारता है, लेकिन मैं तेरी गांड फाड़ूंगी।"
मेरे रहते तुमको मर्द की कमी नहीं महसूस होगी और मैं दर्द से तड़पती, "आह बेटी...अआआह! धीरे...यूऊउह तेरी अम्मा की गांड पहली बार फट रही है...आआह उंह्ह्ह!"
लेकिन मजा भी बहुत ज़्यादा आता था उस साली को। कभी कभी रविश मेरे करीब आने की कोशिश करता था लेकिन रविश को मीशा ने धमकाया था –
"चुप रह वरना तेरा वीडियो फैला दूंगी।" तो वो चुपचाप अपनी मां की चूत चाटता और मुरझाए लंड के साथ चेहरा वापस ले जाता था।
और अशु? अशु तो चुपके से सब देखता, वो बस लंड हिलाता। लेकिन मीशा की नजर उस पर भी पड़ गई थी।
एक शाम की बात है। मैं किचन में खाना बना रही थी – दाल, रोटी, सब्जी मर्ज़ी मीशा की ही चलती थी अब।
तभी मीशा अंदर घुसी, उसकी आंखों में वो शैतानी चमक थी जो चुदाई के पहले दिन से मैने आती देखी है। "मम्मी, आज रात अशु को बुला लेना कमरे में, मैं उसकी गांड मारूंगी अब।"
मैं चौंक गई और बोली, "क्या बक रही है बेटी, तू? अशु तेरा भाई है, वो बस 18 साल का लड़का है... वो मानेगा भी नहीं।" मगर मीशा हंसी, " अगर माने ना तो मैं, जबरदस्ती भी कर लूंगी।”
मीशा मेरी चूंची और गांड़ भींचते हुए बोली “तू मदद कर मेरी खाने में नींद की गोली डाल दे। मैंने स्कूल से चुराई है। फिर मैं बांध लूंगी उसके हाथ।"
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मैं अपनी बेटी की बातों से डर गई, लेकिन मुझे मीशा का ब्लैकमेल याद आया – रविश के साथ मेरी चुदाई का वीडियो आज तक उसने डिलीट नहीं करा है।
मैं हारते हुए बोली "ठीक है बेटी... लेकिन धीरे से करना, अशु को दर्द न हो, वो 18 साल का बच्चा है।" मीशा ने मेरी चूचियां मसल लीं, "चुप रंडी मां, तू तो एंजॉय करेगी। कल सुबह तक अशु भी मेरा गुलाम बनेगा।"
फिर उस दिन की रात हुई। डिनर टाइम पर सब नॉर्मल तरह से बैठे खाना खा रहे थे। मैंने शांति से अशु के गिलास में नींद की गोली पीसकर डाल दी, फिर सबने खाना खाया।
अशु ने कहा, "मम्मी, आज थकान ज्यादा लग रही है।" और वो कमरे में जाकर सो गया । मीशा ने मुझे इशारा किया, "चल मम्मी, अब शिकार पकड़ने का टाइम है।"
पाऊं दबाए हम चुपके से ऊपर गए। अशु गहरी नींद में था, और कमरा अंधेरा था। मीशा ने लाइट जलाई, और मैंने अशु के हाथ उसके बेड के हेडबोर्ड से रस्सी से बांध दिए – जो मीशा ने पहले से तैयार रखी थी।
मेरा बेटा अशु हल्का सा हिला, लेकिन गोली की वजह से जागा नहीं। मीशा ने उसकी पैंट उतारी – उफ्फफ! वाह, क्या लंड था! 6 इंच का मोटा सांप,वो आधा खड़ा था।
"देख मम्मी, भाई का लंड कितना हसीन है। लेकिन आज मैं इसकी गांड फाड़ूंगी।" मीशा मुझे आशु का लंड दिखाते हुए बोली।
मैंने उसे नारियल तेल की बोतल दी, जो किचन से लाई थी। मीशा ने अपना स्ट्रैप-ऑन बांधा – वही 8 इंच का काला रबर का लंड, जो मेरी चूत-गांड फाड़ चुका था।
पहले मीशा ने अशु को पलट दिया, और उसे पेट के बल लिटाया। आशु की गांड सफेद, टाइट थी – साफ पता लग रहा था कभी चुदाई न हुई थी उसकी।
मीशा ने उसकी गांड़ पर नारियल तेल उंडेला, और अपनी उंगलियां पहले अंदर डालीं। "उफ्फ मम्मी, भाई की गांड कितनी नरम है... देख, उंगली घुस गई मेरी पूरी।"
अशु हल्का सा अआआह! में सिसका, लेकिन वो नींद में था। ये नज़ारा मैं देख रही थी, मेरी भी चूत गीली हो गई। मैने फिक्र से कहा "बेटी, धीरे... वो जाग जाएगा।"
मीशा ने हंसी उड़ाई, "जागे तो और मजा आएगा।" फिर उसने स्ट्रैप-ऑन पर भी तेल लगाया, फिर उसका सुपाड़ा अशु की गांड पर रगड़ा।
उसने गांड़ पर धीरे-धीरे दबाया – "उंह्ह... घुस रहा है मम्मी... भाई की गांड फट रही है देखो!" अशु की गांड में वो लंड बस 2 इंच घुसा, इतने में ही वो दर्द से सिकुड़ गया।
"अआआहआह... क्या हो रहा..." आशु की नींद टूटने लगी। मीशा ने फिर जोर लगाया, आधा लंड अंदर चला गया! अशु चीखा, "आआहआआह!
मम्मी... दर्द हो रहा... कौन है... अआआह! मां निकालो इसे!" लेकिन बेचारे के हाथ बंधे थे, वो बस तड़प रहा था। मैंने उसके मुंह पर हाथ रखा, "चुप बेटा...डर मत पीछे मीशा है तेरी दीदी।
आज तू भी हमारा हो जाएगा।" अशु की तो जैसे आंखें फटीं, "दीदी? क्या बक रही हो मम्मी... ये पागलपन है... आह्ह्ह! फाड़ दिया अआआह खोलो मुझे... मेरी गांड...अआआह! निकालो सालो!"
मीशा हंस पड़ी, "चुप हरामी भाई, तू तो मम्मी को चुपके से देखता था ना चुदते हुए। अब तेरी बारी। ले, अब पूरा लंड!" मीशा ने और जोर का धक्का मारा – पूरा 8 इंच अशु की गांड में घुस गया!
मेरे बच्चे का खून निकल आया, नारियल तेल की चिकनाहट घुप घुप्प घुप्प की आवाज़ आ रही थी । अशु चिल्लाया, "आआआह! मार डाला रे अआआह! छोड़ो मुझे.. दीदी हरामी...
तेरी अम्मा की तरह रंडी बना दिया मुझे... उंह्ह्ह! दर्द अआआह... दर्द हो रहा है!" मीशा धक्के मारने लगी, धीरे-धीरे वो लंड आशु की गांड़ में अंदर बाहर हो रहा था। "हां भाई...
तेरी गांड कितनी टाइट है... साली, तू तो कुंवारी गांड है... ले, चोद रही हूं तुझे अपनी चूत के लंड से!"मैं अशु के लंड को पकड़ लिया, और हिलाने लगी –
"बेटा, सह ले... तुझे भी मजा आएगा। मम्मी को तो आया था देखा तो है ही तूने ।" मगर अशु रो रहा था, "नहीं मम्मी... याद है ना, जब तुम्हें रविश ने गांड मारी थी?
तुम्हारी चीखें... आह्ह्ह... वही दर्द... छोड़ दो प्लीज़!"लेकिन मीशा रुकी नहीं। वो अधिक स्पीड बढ़ा दी, वो एक हाथ से अशु की गांड पर थप्पड़ मारते हुए बोली,
"ले साले...याद कर उस पल को जब रास्ते में एक लड़की पर गंदी नज़र डालकर तूने और तेरे दोस्तो ने कहा था।
अगर इसकी गांड़ मारने को मिल जाए तो मज़ा आ जाए, याद कर वो बात जब तू बोल रहा था के मर्ज़ी से मिले तो अच्छा है नहीं तो जबरदस्ती चोद देगा किसी भी चूत को।
मीशा दीदी तो वकील बनने वाली है बचा लेंगी मुझे कानून से बहुत प्यार करती है मुझसे अब फील कर अपनी दीदी का प्यार।
तेरी गांड में मेरा लंड घुसा हुआ है, अब तू और दोस्त सब मेरी कुतिया बनेंगे, यही सज़ा मिलेगी हर उस इंसान को जो किसी के साथ बिना मर्ज़ी के जबरदस्ती करेगा!"
मैं उसकी बाते सुनकर हैरान थी हमारा पूरा कमरा गूंज रहा था , अशु की चीखें गहरी होती जा रही थी, मीशा की सिसकारियां बढ़ती जा रही थी, नारियल तेल की चपचाप आवाज मुझे गरमा रही थी।
ये चुदाई पूरे 10 मिनट चली , अशु की गांड बुरी तरह लाल हो गई, वो तेल और रस से गीली होकर चमक रही थी। उसके चेहरे को देखकर लग रहा था के उसका दर्द असहनीय है फिर आशु रोते हुए बोला
“माफ कर दे बहन , मुझे सबक मिल गया है, मैं कभी किसी लड़की से जबदस्ती करने की कोशिश नहीं करूंगा।” मीशा उसकी बात सुनकर खुश हुई लेकिन वो गुस्से भरी आवाज़ में बोली
“चल तुझे माफ करा, लेकिन आज से तू मेरा एजेंट है बाप की छोड़ी हुई जायदाद में सब में हम बाट लूंगी लेकिन मेरी शर्त है, मुझे तेरे उन दोस्तों की भी गांड़ मारनी है जो उस दिन तेरे साथ थे।”
मैं पता नहीं क्यों काफी खुश थी लेकिन आशु के पास उसकी बात मानने के अलावा कोई चारा न था, फिर मीशा ने दुबारा लंड से गांड़ चुदाई शुरू कर दी वो बोली “जो काम शुरू करा है उसे खत्म तो करना पड़ेगा ना।”
मगर अशु की चीखें अब बदल गईं। "आह... हमममम! उंह्ह... दीदी... अआआह ! धीरे... अब... मम्मम् ! अब दर्द कम हो रहा... ओह्ह्ह!"
मीशा ने महसूस करा के उसे भी मज़ा आ रहा है तो वो बोली, "हां भाई... अब मजा आ रहा ना? तेरी गांड खुल गई है अब.. हिला अपनी गांड!"
अशु ने हिचकिचाते हुए गांड हिलाई, "हां दीदी... आह... तेरी लंड अआआह... मेरी गांड में... उफ्फ...अआआह! गहराई में जा रहा है... हां... ओंह्ह्ह चोद!"
मैं हंस पड़ी, "देखा बेटा, मम्मी की तरह तू भी रंड बन गया।" मगर मेरे मन में सवाल था अगर मीशा आशु को सबक सिखाना चाहती थी तो उसने मेरी क्यों मारली?
इसका जवाब भी मुझे मिला लेकिन उसके लिए आप लोगो को इंतज़ार करना होगा।खेर अशु अब खुलकर तड़प रहा था, "आआह दीदी... फक मी हार्डर... तेरी भाई की गांड फाड़ दे... ओह यस अआअब... हमममम!" मीशा बहुत खुश हो गई,
वो बोली "अब बोल, कौन है तेरी मालकिन है?" अशु चिल्लाया, "तू दीदी... मीशा रानी... तेरा गुलाम हूं मैं... गांड चोद अआआह... आह!"
फिर चुदाई 20 मिनट और चली। मीशा ने अपनी स्पीड तेज की, अशु का लंड मेरे हाथ में ही फूट पड़ा – उसका गर्म रस मेरी हथेली पर गिरा।
"आह मैं... झड़ रहा हूं दीदी...अआआह तेरी चुदाई से!" मीशा भी अपनी चूत रगड़ते हुए झड़ी, "हां भाई... तेरी गांड ने मुझे झड़ा दिया...ओंह्ह्ह उंह्ह्ह!"
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फिर वो लंड बाहर निकाला गया, अशु की गांड से तेल और रस टपक रहा था। मीशा ने आशु को बंधन से खोला, अशु को गले लगा लिया। "अब तू सच में हमारा है भाई।
कल से रोज चुदाई होगी।" अशु शरमाया, लेकिन मुस्कुराया, "हां दीदी... मजा आया... लेकिन अगली बार जबरदस्ती मत करना।" अगली रात कुछ चेंज आ गया।
अशु खुद मीशा के कमरे में गया। लेकिन मीशा ने कहा, "नहीं भाई, आज चूत और गांड दोनों में करते है। लेकिन पहले मम्मी को बुला।" मैं आई, एकदम नंगी। हम तीनों बेड पर कूदे।
मीशा ने मुझे और अशु को निर्देश दिया, "मम्मी, अशु का लंड चूस। भाई, मम्मी की चूत चाट।" अशु ने मेरी चूत पर जीभ लगाई, "मम्मी... तेरी भोसड़ी कितनी स्वादिष्ट है...
हममम... रस भरा हुआ है इसमें।" मैं सिसकी ले रही थी, "आह बेटा... चाट अपनी अम्मा को... ओह...उन्ह्ह्ह हमममम! तेरी जीभ...
उंह्ह!" मीशा देख रही थी, फिर स्ट्रैप-ऑन बांधते हुए। फिर वो अशु के पीछे आ गई, "अब गांड मारूंगी तेरी, लेकिन तू मम्मी को चोदते रहना ।"
अशु का 6 इंच का मोटा लंड मेरी चूत में घुसा – "आह मम्मी... तेरी चूत कितनी टाइट है...उफ्फफ! चोद रहा हूं तुझे!" मैं चिल्लाई, "हां बेटा...
अआआह फाड़ अपनी मां की चूत... आआह ओहद्ह!" मीशा ने फिर से नारियल तेल लगाया, और अशु की गांड में अपना रब्बर का लंड घुसेड़ा।
अशु दर्द से फिर सिकुड़ा, लेकिन चुदाई जारी रखी। "उंह्ह दीदी...आअआआ गांड में... लेकिन मम्मी की चूत ओंह्ह्ह... ओह फक!"
हम तीनों की चुदाई की ट्रेन सी बन गई थी– अशु मुझे चोद रहा था, मीशा अशु को। कमरा गालियों से भरा था: "ले रंडी मां... तेरी चूत में मेरा लंड!"
"आह भाई... दीदी का लंड तेरी गांड फाड़ रहा!" "ओह बेटे... झड़ जा अपनी अम्मा में!"हम सब को एक साथ चरम सुख आया – अशु ने मेरी चूत में अपना रस भरा मैं झड़ी,
मीशा अपनी चूत से रस निकाल दी। उसके बाद, मीशा ने अशु को अपनी चूत चुदाई की इजाज़त दी। "भाई, अब तू मुझे चोद सकता है।"
अशु मीशा के ऊपर चढ़ा, उसने अंदर लंड घुसाया –"दीदी... तेरी चूत कितनी गर्म है... आह!" मीशा सिसकी, "चोद भाई...अआआह ये इनाम है तेरे लिए ओहद्ह!
फाड़ अपनी बहन को... हममम!" मैं सब देख रही थी, अपनी चूचियां मलते हुए। फिर गांड का टर्न आया। मीशा अब घोड़ी बनी और बोली, "अशु, मेरी गांड मार।" अशु ने खूब सारा तेल लगाया, और धक्का मारा।"
आह दीदी... तेरी गांड टाइट है... ले!" मीशा चिल्लाई, "हां भाई... अआआह जोर से कर.. फाड़ दे ओहद्ह... ओह यस फक!" चुदाई तेज हो गई, थप्पड़, गालियां सब अपनी रफ्तार से चले।
"साली रंडी बहन... तेरी गांड फाड़नी है आज!" "ले हरामी भाई... तेरी दीदी की गांड तेरे लंड की भूखी है!" मैं भी बीच में कूद पड़ी,
मैने अशु के लंड को चाटा जब वो गांड़ से बाहर निकाल आया। ऐसे करते हुए काफी बार हम चरमसुख पर झड़े – तीनों का रस इधर-उधर बिखरा था।
उसके बाद, रविश को भी हमने शामिल किया, और मीशा ने एक एक कर के आशु के दोस्तो को बहुत बुरी तरह गांड़ मारी। लेकिन वो अलग अलग चैप्टर है।
दोस्तों, ये चुदाई से भरी पारिवारिक कहानी कैसी लगी? मीशा अब सबकी मालकिन, मैं गुलाम, अशु रंडी भाई। कहने को तो मेरी बेटी ने एक लड़की के संस्कार अपने रबर के लंड पर रखकर बर्बाद कर दिए है।
लेकिन उसकी जो वजह है और उसका जो तरीका है मुझे उससे अब कोई शिकायत नहीं है कमेंट में बताओ, अगला भाग चाहिए के नहीं – रविश की गांड चुदाई या ग्रुप चुदाई वाला ।धन्यवाद।
हेलो दोस्तो मैं आपका प्यारा हाशमी लायन, ये कहानी का दूसरा भाग था इससे पहले की कहानी आप लोगो ने पढ़ी होगी और अगर नहीं पढ़ी है तो अभी जाकर ज़रूर पढ़ना। ये कहानियां एक लड़की मुझे भेज रही है।
उसकी क्या स्टोरी है मैं नहीं जानता लेकिन मुझे ये कहानी पसंद आई इसलिए उसी लड़की की रिक्वेस्ट पर मैने आपको ये कहानी बताई है,
ये कहानियां असली है या काल्पनिक मुझे नहीं मालूम लेकिन मेरा भी मानना है के सेक्स एक खूबसूरत चीज़ है।
इसमें कुछ हद होनी चाहिए जिस वजह से इंसान और जानवर से बेहतर हो और अगर जानवर बने भी तो इज्ज़त वाला बने।
कोई बब्बर शेर कभी किसी चूत से जबरदस्ती नहीं करता वो उसे मनाता है पटाता है कोशिश करता है और हमें भी खुद को शेर समझकर ऐसा ही करना चाहिए।
कहानी कैसी लगी कॉमेंट कर के ज़रूर बताए और इंतज़ार करे अगले भाग का तब के लिए। अलविदा!
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