अपनी प्यारी बहना की चूत को झाड़ियों में बजाया!

Family Sex Story : कैसे एक भाई ने अपनी Antarvasna से बहन को खुली झाड़ियों में दबोच कर उसकी सील तोड़ चुदाई मज़ा लिया! और अपने वीर्य को उसके चुत में ही छोड़ दिया!


हेलो दोस्तों, कैसे हो सब? मैं हूं विशाल और मैं वाराणसी से हूं। आज मैं अपनी जिंदगी की वो सच्ची कहानी बता रहा हूं, जो सुनकर आपका लन्ड खड़ा हो जाएगा!


ये कहानी मेरी छोटी बहन रेनू के बारे में है। रेनू, उफ्फ, कैसे बताऊं उसके बारे में! वो मेरी जान है! मेरी रानी है! लेकिन अचानक एक दिन सब कुछ बदल गया। एक दिन जब गलती से मैंने उसे बाथरूम में नंगी देख लिया!


उसके सेक्सी जिस्म को छूने, चखने और चोदने की चाहत मेरे दिल-दिमाग में घर कर गई। आज मैं बताऊंगा कि कैसे मैंने अपनी बहन रेनू को सड़क किनारे एक झाड़ी में चोदा।


कैसे उसकी चूत को अपने लन्ड से रगड़ा, और कैसे हम दोनों भाई-बहन ने वो पल जीया जो कभी भूल नहीं पाएंगे। 


ये कहानी लंबी है, लेकिन हर लाइन में मजा भरा है। तो चलो, शुरू करते हैं।लोग मुझे विशु कहते हैं। मैं उम्र में 28 साल का हूं, शहर में एक प्राइवेट जॉब करता हूं। 


दिखने में हट्टा-कट्टा हूं, जिम जाता हूं, और मादक लड़कियों को देखते ही मेरा लन्ड सलामी मारने लगता है। 


लेकिन घर में मेरी सबसे प्यारी पसंदीदा चूत का नाम रेनू है।रेनू मेरी छोटी बहन है, जो 20 साल की है, वो बीए सेकंड ईयर की स्टूडेंट है। वो गाँव में रहती है हमारे मम्मी-पापा के साथ। रेनू का जिस्म, यार, वो तो किसी भी मर्द को पागल बना दे। 


मेरी बहन की गोरी चिट्टी स्किन, लंबे काले बाल, पतली कमर, और ऊपर से वो दो बड़े-बड़े चुचे – कम से कम 34 साइज के होंगे।नीचे उसकी गांड गोल-गोल, ऐसी कि पकड़कर दबाने का मन करे। उसकी चूत, ओह, वो तो बाद में पता चला कि कितनी टाइट और गर्म है। 


मगर पहले, सब कुछ नॉर्मल था। हम भाई-बहन ही थे जैसे हर घर में होते हैं – मजाक, लड़ाई, प्यार। लेकिन फिर एक दिन, सब उलट-पुलट हो गया।ये बात दो साल पहले की है। मैं छुट्टियों में गाँव आया था। गर्मी का मौसम था, सबके सब पसीने से तर थे। 


मैं थोड़ा टहलने बाहर गया, और लौटकर सीधा बाथरूम की तरफ बढ़ा।सोचा चलो, नहा लूं। लेकिन कुंडी लगी हुई थी। मैंने धक्का मारा, और अंदर घुसा सामने देखा तो, अरे वाह! रेनू नंगी खड़ी थी। पानी उसके जिस्म पर बह रहा था, उसके चुचे चमक रहे थे, निप्पल्स सख्त हो चुके थे।


नीचे उसकी चूत पर हल्के बाल थे, और गांड ऐसी चमक रही जैसे मक्खन लगाया हो।वो नहा रही थी, हमेशा की तरह नंगी अपने जिस्म को सहला रही थी।  मैं हक्का-बक्का रह गया। मेरा लन्ड पैंट में तनने लगा। ये Bhai Bahan Ki Antarvasna Sex Story आप Garam Kahani पर पढ़ रहे है।


रेनू ने चिल्लाया, "भैया! बाहर जाओ!"


लेकिन तब तक मैंने सब देख लिया। उसके जिस्म की हर लकीर, हर उभार मेरी आंखों में समा गया।मैं बाहर आया, लेकिन दिमाग में रेनू का नंगा बदन घूम रहा था।


रात को सोया तो सपने में रेनू को चोद दिया – ख्यालों में ही उसके चुचों को दबा रहा था, चूत में लन्ड घुसा रहा था। 


सुबह उठा तो लन्ड खड़ा था। बाहर आकर रेनू से मिला, वो मेरा लन्ड देखकर शर्मा रही थी, मुझे मेरी बहन आंखें नहीं मिला रही थी। लेकिन मैं? मैं अब उसे बहन की तरह नहीं, एक देसी चूत के रूप में देखने लगा।


उसके कपड़ों के नीचे छिपा जिस्म सोचकर मेरा लन्ड सख्त हो जाता। 


गाँव में ही रहते हुए मैं चुपके-चुपके उसे घूरता।एक बार तो वो मम्मी की साड़ी पहनकर आई और ब्लाउज बिना ब्रा के झाड़ू लगाते हुए झुकी।तो उसके चुचे बाहर झांकने लगे। उसके भूरे निप्पल साफ दिख रहे थे।


मैं कुर्सी पर बैठा चाय पी रहा था, लेकिन आंखें रेनू के सीने पर टिकी रह गईं। मेरा लन्ड जींस में दुखने लगा। रेनू ने जब नोटिस किया, तो तिरछी नजर से देखा, लेकिन कुछ बोली नहीं। बस मुस्कुराई।


उफ्फ, वो मुस्कान, जैसे कह रही हो, "भैया, जानती हूं मैं , तुम जो चाहते हो।" उस दिन से मेरा नजरिया बदल गया। मैं हर वक्त रेनू के जिस्म की कल्पना करता रहता। 


मेरा उसके चुचों को दबाने का, चूत चाटने का, लन्ड अंदर डालकर चोदने का मन करता।लेकिन कभी हिम्मत नहीं हुई। रेनू भी शायद समझ रही थी – वो कभी-कभी मेरी तरफ ऐसे देखती जैसे वो भी चुदाई चाहती हो। 


लेकिन हम दोनों चुप रहते फिर मैं अपने शहर लौट गया अपनी जॉब पर।


ऐसे छह महीने बीत गए। बस हमारी फोन पर बातें होतीं, लेकिन मन में वो हवस भरी चुदाई की चाहत सुलगती रहती। आखिरकार, मैंने हिम्मत जुटाई। एक दिन फोन करा रेनू को। ये Bhai Bahan Ki XXX Chudai Ki Kahani आप Garam Kahani पर पढ़ रहे हो।


"रेनू, कल मैं गाँव के बाजार आ रहा हूं कुछ काम से। तुझसे मिलना है। बाजार में ही होटल का कमरा ले लेना, वहां बैठकर खाना खाएंगे, बातें करेंगे।"


 रेनू ने हिचकिचाते हुए हां कहा। मैं जानता था, वो भी लन्ड लेने के लिए उत्सुक है।मेरा लन्ड फोन पर ही तन गया सोचकर के बहन की चूत मिलेगी।


अगले दिन सुबह-सुबह मैं निकला। बाजार 15 किमी दूर है गाँव से, रेनू का कॉलेज भी वही पड़ता है। मैं वहा पहुंचा करीब दोपहर तक। रेनू पहले से वहां थी। कॉलेज से आकर होटल ढूंढ रही थी। लेकिन बाजार में भीड़ थी, कहीं रूम नहीं मिला।


वो दो घंटे घूमी, लेकिन नाकाम रही। मैं आया तो रेनू थकी हुई लग रही थी।उसका हल्का नारंगी कुर्ता, सफेद सलवार और कुर्ता टाइट, चुचे ऊपर से उभरे हुए थे। मैंने देखा तो मेरा दिल धड़क गया। 


"भैया, कहीं रूम नहीं मिला," रेनू ने कहा। मैंने कहा, "कोई बात नहीं। पहले चाय-पकौड़े खाते हैं।"हम एक ढाबे पर बैठे। चाय पीते हुए बातें कीं – कॉलेज की, जॉब की।


 लेकिन मेरी आंखें रेनू के चुचों पर थी । वो मुझे नोटिस कर रही थी, लेकिन चुप थी। चाय खत्म हुई तो मैंने कहा, "चल, ऐसी जगह ढूंढते हैं जहां शांति हो।" बाजार में घूमे, लेकिन कहीं भीड़ में जगह न मिली।


 फिर मेरी नजर सामने की पहाड़ी पर पड़ी। वहां एक रास्ता ऊपर किसी गांव की ओर जा रहा था।वहां झाड़ियां घनी थी, लेकिन रास्ता खुला था। "चल रेनू, वहां चले वहां कोई नहीं आएगा," मैंने कहा।


रेनू समझ गई। उसके चेहरे पर हल्की शरम आ गई, लेकिन आंखों में चमक फैल आई। वो जानती थी, आज कुछ होने वाला है। मेरा लन्ड पैंट में हिलने लगा।


हम पहाड़ी की ओर बढ़े। रास्ता सुनसान था, लेकिन बीच-बीच में लोग आ-जाते। ऊपर पहुंचे तो एक झाड़ी के पास रुके। झाड़ी रास्ते किनारे थी यानी आने-जाने वालों को हम देख सकते थे।लेकिन और कोई चारा नहीं था। हम वहीं बैठ गए। रेनू पत्थर पर और मैं उसके पास।


उसका कुर्ता टाइट होने से उसके चुचे साफ उभरे हुए थे। हम बातें करने लगे –अपने बचपन की, गाँव की, लेकिन मेरी नजरें उसके सीने पर थी।


रेनू ने नोटिस किया, "भैया, क्या देख रहे हो?" 


मैं हिचकिचाया, "कुछ नहीं।"


वो मुस्कुराई, "कुछ तो देख रहे हो ना?"


अब मेरी हिम्मत हुई तो मैंने बोला : "तेरे बूब को देख रहा हूं रेनू।" 


वो शरमाई, फिर बोली, "ऐसा क्या है मेरे बूबू में?" मैंने सीधा कहा, "तेरे चूंचे, तेरी ये बड़ी-बड़ी चुचियां,इन्होंने मुझे पागल बना दिया है।" रेनू की आंखें नीचे हो गई, लेकिन होठों पर मुस्कान थी। 


"पर ऐसा क्या है भैया?" वो बोली तो मैं झिझक गया, लेकिन फिर बोला, "तेरी चुचियां इतनी कोमल, इतनी सेक्सी है। इनमें डूब जाने का मन करता है। इन्हें छूने का, चूसने का मन करता है।"रेनू चुप रही, उसकी आंखें बंद थी।


मैंने हिम्मत जुटाई, हाथ को आगे बढ़ाया! ये Brother Sister Family Sex Story आप Garam Kahani पर पढ़ रहे है!


मैने कुर्ते के ऊपर से उसके एक चूचे पर हाथ रखा। उफ्फ, कैसी नरमी थी। गर्म, मुलायम।मेरी बहन रेनू सिहर गई, लेकिन हाथ हटाई नहीं। मैंने धीरे-धीरे चूंची मसलना शुरू करा। मैने उसके कुर्ते के नीचे हाथ डाला, सीधे स्तन पर।


उसका निप्पल सख्त हो चुका था। मैंने उसे दबाया, तो रेनू की सांस तेज हो गई। "भैया," वो बिलबिलाई। मैं दूसरा हाथ भी अंदर डाल दिया और दोनों चुचों को मसलने लगा।


उसकी चुचियां बड़ी थी, जो हाथों में समा ही नहीं रहे। मैंने निप्पल्स को उंगलियों से नचोड़ा। रेनू की सिसकी निकली, "आह, भैया," तभी रास्ते से दो औरतें और एक आदमी गुजरे।


मैंने झट से हाथ हटाया। मेरा दिल धड़का। लेकिन वो लोग चले गए, शायद कुछ नोटिस न किया हो।


जैसे ही वो दूर हुए, मैंने रेनू के गालों पर हाथ रखे। उसके गुलाब जैसे होंठों को चूसा, वो हम भाई बहन का पहला किस था। रेनू ने भी जवाब दिया और हमारी जीभें लड़ाईं। 


उसके होंठ मीठे, नरम थे मैंने आगे बढ़कर जोर से चूसा, काटा भी थोड़ा।रेनू सिहर रही थी। फिर मैं खड़ा हुआ। जींस की जिप खोली, लन्ड बाहर निकाला। मेरा लन्ड 8 इंच का, मोटा व सख्त था।


रेनू ने देखा, तो आंखें फैल गईं। "भैया, कितना बड़ा," मैंने कहा, "चूस रेनू, अपने भाई का लन्ड चूस।" रेनू ने लन्ड हाथ में लिया। वो गर्म था, भड़क रहा था।


वो आगे झुकी, लन्ड मूंह में डालने की कोशिश की। लेकिन लन्ड मोटा था, पूरा न गया। 


फिर वो बस सिरा मुंह में लेकर चाटने लगी। उसने जीभ से लन्ड की नसें चाटी, चूसी। उफ्फ, कुछ मजा आया। रेनू का मुंह गर्म था। 


मैंने उसके बाल पकड़े, फिर हल्का दबाव डाला। वो लन्ड चूसती रही, उसकी लार टपक रही थी। ये लन्ड अब तेरी चूत फाड़ेगा, मैने उसे सहलाते हुए कहा तभी रास्ते से एक अंकल-आंटी गुजरे।


रेनू ने झट से लन्ड बाहर निकाला, मैंने जिप ऊपर की। हमारी दिल की धड़कन तेज हो गई। लेकिन वो चले गए।


"रेनू, ज्यादा टाइम नहीं है। लोग आ-जा रहे हैं। सलवार नीचे कर, मैं तुझे चोदना चाहता हूं," मैंने कहा। रेनू हिचकिचाई, "भैया, ऐसे कैसे? लोग देख लेंगे।" मैंने कहा, "सच कह, तू चुदना नहीं चाहती?"  ये XXX Desi Sex Story आप Garam Kahani पर पढ़ रहे है।


वो बोली, "भैया, कौन पागल लड़की होगी जो इतने मस्त लन्ड से चुदना न चाहे? लेकिन डर लगता है!"


 मैंने हंसकर कहा, "चुद ले, टेंशन मत ले। कोई आएगा तो देख लेंगे।" रेनू ने हामी भरी। मैंने उसे खड़ा किया फिर सीने से लगाया। उसके चुचे मेरी छाती से दबे।


"रेनू, उसी दिन से तुझे चोदने का मन है जब से बाथरूम में देखा है। 


तेरा ये हसीन जिस्म, तेरी चुचियां, चूत, गांड, सब देखकर मैं बहक गया।जब भाई ही बहक जाए तो बाकी क्या करेंगे?" रेनू ने मुझे किस किया, वो भी बहुत जोर से।


फिर मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोला और घुटनों तक सरका दिया। मैने उसका कुर्ता ऊपर किया, चुचियां बाहर निकाली। 


उसके भूरे निप्पल्स सख्त हो गए। मैंने चुचियां दबाईं, फिर मस्ती से चूसीं। रेनू सिसक रही थी।"भैया, आह," मैंने कहा, "एक टांग नीचे रख, दूसरी पत्थर पर।" रेनू ने वैसा किया। उसकी चूत सामने से गीली, चमक रही थी। 


मैं घुटनों पर बैठा, उसकी चूत में जीभ डाली। फिर चाटने लगा। रेनू चिल्लाई, "उई मां, भैया! उफ्फ! अच्छा लग रहा है आआह!" 


चूत का रस मीठा और नमकीन था। मैंने उसका क्लिट चाटा, जीभ अंदर-बाहर की। रेनू की कमर हिल रही थी तो मैने फिर उंगली डाली। 


उसकी टाइट चूत, गर्म थी। रेनू बोली, "भैया, पेशाब आ रहा।" मैंने कहा, "कर दे मेरे मुंह में।" वो शरमाई, लेकिन कर दिया।गर्म पेशाब मेरे मुंह में करा उसने। मीठा सा था उसका स्वाद जो मैंने पी लिया।


 "रेनू, तेरा पेशाब भी मस्त है। कभी मेरा भी पी लेना।" वो हंस दी, "ठीक है भैया।"


अब असली खेल चालू हुआ मैंने उसकी कच्छी एक तरफ सरकाई,लन्ड को चूत पर टिका दिया। वो पहली बार फिसला। रेनू ने हाथ से पकड़ा, छेद पर सेट किया। 


फिर बोली "धक्का मारो भैया।" मैंने एक झटके में पूरा लन्ड अंदर पेल दिया। रेनू चिल्लाई, "आहहहाहा, दर्द हो रहा!" उसकी चूत बहुत टाइट थी। मैं रुका, कुछ देर बाद हल्के धक्के फिर उसे पेलने लगा। रेनू बोली, "अब ठीक है।"


मैंने स्पीड बढ़ाई। धक्के मारने लगा, रेनू सिसक रही, "आआह! माँ उह! आह, उम्ह, हाय, चोदो भैया, जोर से!" मैं चोद रहा था अपनी बहन को, बीच बीच में चुचियां दबा रहा था और गांड पकड़ रहा था। ये Bhai Bahan Ki Chudai Wali Hot Hindi Sex Story आप Garam Kahani पर पढ़ रहे है।


 रेनू की चूत लन्ड को चूस रही थी। "भैया, कितना मजा आ रहा है,चोदो अपनी रेनू को, चूत फाड़ दो!" मैं तेज हुआ। धप-धप आवाज माहौल में गूंजने लगी।


तभी एक दुल्हन और बूढ़ा गुजरा। लेकिन हम रुके नहीं। मैं चोदता रहा, रेनू सिसकती रही। वो लोग चले गए, शायद नोटिस कर लिया हो मैंने रेनू को वही पेला वो भी पूरे 15 मिनट तक। 


उसकी चूत खूब रगड़ी, गांड पर थप्पड़ मारे। रेनू झड़ी और अपने चरमसुख को पहुंची,"आह,अआआह आ गई!" लेकिन मैं न रुका। "रेनू, आज तुझे रंडी बना दूंगा।"


वो बोली, "हां भैया, बना दो, चोदो, मां बना दो!"


मैंने स्पीड तेज करी। आखिरकार, झड़ने को हुआ तो उसे पूछा "कहां गिराऊं?"


रेनू बोली, "चूत में ही, भर दो भैया!" मैंने तीन-चार जोर के धक्के मारे, लन्ड का सारा रस चूत में उंडेल दिया।


रस गर्म था, चिपचिपा था मैने कुछ देर लन्ड अंदर रखा, फिर बाहर निकाला। रेनू ने चाटकर मुझे साफ करा। फिर हम गले लगे, और बहुत देर किस किए!


इसके बाद तो मेरी बहना रेनू अब मेरी रखैल बन गई है!


तो कैसी लगी आपको ये Bhai Bahan Ki Family Hindi Sex Story? नीचे कॉमेंट करके और रिएक्शन देकर ज़रूर बताए!


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