रांड भाभी ने 2 अलग लंड से चूत-गांड फड़वाई!

32 की हॉट Desi भाभी की चूत जल रही थी, पति का लंड फेल। रात में पुराना लवर आया, चूत ठुकवाई, फिर देवर ने पकड़ लिया और गंदी तरीके से चूत-गांड दोनों फाड़ दी। कुल 3 घंटे में दो मर्दों से बेशर्म चुदास!


रात के आठ बज चुके थे। मैं पूजा अपनी उस जलती हुई कामुकता से तड़प रही थी। मेरी उम्र 32 साल की है, और मेरा फिगर ऐसा है कि मर्दों की नजरें मुझ पर टिक जाती हैं। 


मेरी छातियां 36 इंच की भरी-भरी है, कमर 28 इंच की पतली कंटीली,और गांड 38 इंच की मोटी और गोल है, जो चलते समय ऐसे मटकती है जैसे मर्दानगी को ललकार रही हो। 


मेरी गोरी चमड़ी, लंबे काले बाल, और गुलाबी होंठ मुझे और भी सेक्सी बना देते हैं। लेकिन आजकल ये सब व्यर्थ लग रहा था। बहुत दिन हो गए थे जब मैंने रवि से चूत ठुकवाई थी।


रवि, वो कभी किसी समय मेरा गुंडा टाइप का लवर हुआ करता था, जिसका मोटा लंड मुझे हर बार आसमानों की सैर कराता था।


दुनिया के लिए वो मेरा पहला प्यार था मगर असलियत ये थी की मैं बस अपनी चुदाई की भूख के लिए उसके साथ रहती थी। फिर जब मेरी शादी हुई तो उससे मिलना बंद हो गया ।


अब घर में मेरा देवर विश्वास था, जो मेरे पति का छोटा भाई है। मेरे पति तो बाहर काम पर गए हुए रहते थे, लेकिन विश्वास घर पर ही होता था।


इसलिए मैं ज्यादा रिस्क नहीं ले पा रही थी। मैं गुस्से से भरी हुई थी, मेरी चूत में आग लगी हुई थी, बात ये थी कि मेरा पति एक गुप्त रोगी है वो मुझ जैसी चुदाई की शौकीन औरत तो छोड़ो एक घरेलू औरत की प्यास भी शांत नहीं करवा सकता था।


मैं अपनी गर्म जवानी और सुखी ज़िंदगी से तंग आ गई और मैंने फैसला किया कि अब रवि से बात करके कुछ इंतजाम करूंगी। मेरी शादी उसकी दुकान के पास ही हुई थी जहां वो काम करता था मैंने दुकानदार को फोन लगाया, जहां रवि हमेशा रहता था।


"हैलो... रवि को बुलाएंगे क्या एक बार?" मैंने मीठी आवाज में कहा।उधर से दुकानदार की आवाज आई, "आप कौन बोल रही हैं?""बोल देना कि पूजा का फोन है," मैंने कहा, और दिल में रवि की याद से गर्माहट फैल गई।


दुकानदार ने किसी लड़के को भेजा होगा, और थोड़ी देर में रवि की आवाज आई, "हैलो भाभी, बोलो?"मैं मुस्कुराई, मेरी चूत में हलचल होने लगी वो लीक करने लगी। "रवि, कहां पर हो तुम? मेरी याद आती है या नहीं?"


"ओह जानेमन, तुम्हें कैसे भूल सकता हूं मैं। बिस्तर पर जब भी जाता हूं, तुम्हारे बदन की वो याद और महक लेकर ही सोता हूं। 


तुम ही हो जो मेरे सपनों में आकर हमेशा वो नॉटी वाली तकलीफ दे कर मेरी नींद हराम कर देती हो।”रवि ने अपनी रौबीली आवाज में कहा, और मैं महसूस कर रही थी कि वो भी तड़प रहा है।


"सच्ची रवि, मेरे नॉटी रवि... गुंडाराज... मैं भी तुम्हें और तुम्हारी गर्माहट को मिस जो कर रही हूं," मैंने कहा अपनी उंगलियां अपनी जांघों पर फिराते हुए। मेरी चूत गीली होने लगी थी सिर्फ उसकी बातों से मैं गर्म हो गई।


"ओह भाभी, तुम भी ना... आज रात तुम्हारे घर पर आता हूं मैं। लेकिन भाभी, तेरा देवर भी तो घर पर है। रात को भी तू बाहर नहीं निकल पाती है," रवि ने कहा।


मैंने सोचा, हां, विश्वास घर पर है, लेकिन मैंने एक प्लान बना लिया था। "रवि, मेरे पास एक आइडिया है। आज ये शराब पीने के मूड में है। 


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तुम ऐसा करना कि रात के ग्यारह बजे तक आना। मैं रात को दरवाजा खुला ही रखूंगी। तुम चुपके से मेरे घर में अंदर आकर बिजली का मेन स्विच बंद कर देना। 


मैं लाइट जाने का बहाना करके तुम्हारे पास आ जाऊंगी और तुम्हारी बांहों में खुद को सौंप दूंगी।"रवि हंसा, "सच में भाभी, तुम्हारे दिमाग को तो मानना पड़ेगा। क्या दिमाग लगाती हो तुम मेरी चुदक्कड़ भाभी। 


मुझे भी भाभी की चूत का पानी पीने की प्यास बहुत दिनों से सता रही थी। आज रात को मैं बेसब्री से इंतजार करूंगा मेरी सेक्सी भाभी।"


फोन रखने के बाद मैंने खुद को आईने में देखा। मेरा फिगर आज और भी हॉट लग रहा था। मैंने एक सेक्सी गाउन पहना, जो मेरी छातियों को उभारे हुए था और गांड को टाइट पकड़े हुए था। 


नीचे मैने कुछ नहीं पहना, ताकि रवि के आने पर वक्त बर्बाद न हो। मैंने विश्वास को देखा, वो लिविंग रूम में बैठा शराब पी रहा था। 


"भैया, अब बंद भी करो," मैंने कहा, लेकिन मेरा इशारा रवि की तरफ था, जो बाहर से आ रहा होगा। विश्वास ने मुझे घूरा, लेकिन ज्यादा कुछ नहीं कहा। वो थोड़ा नशे में था।


रात के 11 बजे। मैंने दरवाजा खुला छोड़ दिया और इंतजार करने लगी।बाहर से रवि की साइकल की आवाज आई, और मैंने उसे घर के पास देख लिया। 


मैंने उसे आंख मारी, और वो समझ गया। उसने चुपके से अंदर आकर बिजली का मेन स्विच बंद कर दिया। घर में अंधेरा छा गया। विश्वास की शराब में भंग पड़ गया, वो उठा और अपने कमरे में जाकर सो गया।


पांच मिनट में उसके खर्राटे आने लगे। मैं मुस्कुराई, अब वक्त था रवि के साथ मजे लेने का। रवि पीछे से आया और मुझे अपनी बांहों में लपेट लिया।


उसकी गर्म सांसें मेरी गर्दन पर लगीं और वो मुझे चूमने लगा। मैं चुदासी हो गई, मेरी चूत में पानी आने लगा। रवि ने मेरी गांड को छुआ, जो मेरे गाउन के ऊपर से मोटी और नरम लग रही थी।


उसका मोटा लंड तन गया और मेरी गांड की दरार में घुसने लगा। कपड़ों के ऊपर से ही जब उसका लन्ड मुझे लगा, तो मैं मचल गई। मैंने पलट कर उसके होंठ चूसने शुरू कर दिए।


रवि ने मेरी कमर पर बांहें कसीं और मुझे जकड़ लिया।फिर उसने मुझे पलटाया और अपना खड़ा लन्ड मेरी गांड में घुसाने लगा, जबकि आगे से हाथ बढ़ाकर मेरे मोटे चूचों को दबाने लगा। 


मेरे 36 इंच के चूचे उसके हाथों में मसल खा रहे थे,और मैं सिसकारी लेना चाहती थी, लेकिन विश्वास पास ही सो रहा था, इसलिए खुद को रोके हुए थी। रवि जोर से मुझे दबा रहा था, उसका लंड पूरा तन चुका था।


जब मुझसे रहा नहीं गया, तो मैंने पीछे हाथ बढ़ाकर उसकी पैंट के ऊपर से लन्ड पकड़ लिया और सहलाने लगी। मेरे हाथ में लन्ड आते ही रवि की हवस भड़क गई, और वो मुझे काटने लगा।


"चलो अंदर चलते हैं," मैंने फुसफुसाते हुए कहा। "ये शराबी तो अभी नहीं उठने वाला। बहुत दिनों से तुम्हारे लन्ड के लिए तड़प रही हूं।"


रवि ने मुझे गोद में उठा लिया। मेरा फिगर उसके लिए परफेक्ट था – मेरी पतली कमर उसके हाथों में फिट हो रही थी और मोटी गांड उसके सीने से सट रही। वो मुझे कमरे में ले गया, लेकिन जल्दबाजी में हमने दरवाजा लॉक नहीं किया।


रात का समय था अंधेरा भी बहुत था, सोचा क्या पता चलेगा। बेडरूम का दरवाजा बंद किए बिना हम चूमाचाटी में लग गए।अंदर जाते ही मैंने रवि की शर्ट और पैंट उतार दी, और उसे सोफे पर बिठा दिया। उसका लन्ड अंडरवियर में तना हुआ था। 


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रवि ने अंडरवियर भी उतार दिया, और वो नंगा होकर मेरे पास बैठ गया। उसका लन्ड जांघों के बीच सांप की तरह फन उठाए खड़ा था, वो मोटा, लंबा, और काला सांप मेरी नज़रे तो जैसे उसे खाने को दौड़ रही थी। 


मैंने अपने कपड़े उतारे और उसके सामने नंगी हो गई। मेरा गोरा बदन, भरी छातियां, पतली कमर, और मोटी गांड सब उसके सामने थे। मैं उसकी गोद में बैठ गई, उसका लन्ड मेरी नंगी गांड के नीचे दब गया। 


रवि ने मेरे चूचों को मुंह में लिया और ज़ोर से पीने लगा, जैसे सदियों का प्यासा हो।उसके दांत मेरे निप्पलों पर लगे, और मैं सीत्कार आह्ह! यूऊफ़ कर रही थी।


उसका लंड मेरी चूत में घुसने को तड़प रहा था, और मेरी गांड उछलने को बेताब थी। "बस भाभी बस... अब और क्यों तड़पा रही हो। इस पर उछलो ना," रवि बोला।


"आह्ह रवि... तुम मेरे मन की बात कैसे जान लेते हो। मैं तो खुद तुमसे कहने वाली थी कि अब अंदर डाल दो।मेरी चूत ने पानी निकाल कर पूरी तैयारी कर ली है," मैंने कहा।


हम दोनों ने एक दूसरे के होठों को अपने होठों में दबाया, रवि चुम्मा चाटी में माहिर था उसने मेरे मुंह में अपनी ज़बान दी और मुझे तो जैसे पुराने दिन याद आ गए मैं मज़े लेकर उसकी ज़बान चूसने लगी वहीं पुराना स्वाद भी तगड़े मर्द की गर्मी मेरी वासना भड़का रही थी।


मैंने उनके होठ चूमते हुए अपनी कमर घुमाई अपने चूंची उसके सीने पर दबाकर टांगें फैलाईं और उसके तने लंड पर अपनी चूत सेट कर बैठी। मैं धीरे-धीरे लन्ड पर बैठी, उसका मोटा लन्ड धीरे धीरे मेरी गीली चूत में उतरने लगा। 


पूरा लन्ड अंदर जाते ही हम दोनों के मुंह से "आह्ह..वाआअआआअह." निकला। लन्ड पूरा चूत में समा गया, और मैंने उसके गले में बांहें डाल दीं। अब मैं उसके लंड पर उछलने लगी। रवि ने मेरे चूचे मुंह में भर लिए।


"उम्म्ह... अहह... हय... ओह... मेरी जान... मेरी रानी... तुम्हारी गर्म चूत में लन्ड देकर तो मैं दुनिया ही भूल जाता हूं," रवि बोला। उसने फिर मेरी चूंची को दबाना शुरू करा साथ ही साथ वो मेरे निप्पल को काटने लगा मैं दुबारा आसमानों की सेर में खोने लगी।


"स्सस्... मेरे राजा... तुम्हारा लंड मेरी चूत की प्यास और बढ़ा देता है। मैं इसको खा जाऊंगी... आह्ह्... चोदो मुझे मेरे राजा... आह्हह..." मैं बोली।


हम दोनों मस्ती में थे। मेरी चूड़ियां खन-खन कर रही थीं, चूत पच-पच कर रही थी, और हमारी सिसकारियां आह्... आह्...निकल रही थी।


हम भूल गए कि घर में मेरा देवर विश्वास सो रहा है। मैं उछल रही थी, मेरी मोटी गांड उसके लन्ड पर पटक रही थी, और मेरी छातियां हिल रही थीं। 


रवि मेरी कमर पकड़े हुए था, और मैं उसकी छाती पर झुकी हुई थी। उसका लन्ड मेरी चूत की गहराई छू रहा था, हर धक्के में मुझे मजा आ रहा था।


मैं सब भूल कर बस आगाह, Yes ओहोहो! रवि अआआह! चोद साले अआआह! बुझा दे मेरी प्यास आआअह! रवि आॅफफ ! ओह रवि। की कामुक आवाज़ से कमरे को गरमा रही थी


मैंने अपनी उंगलियां उसके बालों में फंसाईं, और वो मेरे निप्पलों को चूस रहा था। समय जैसे रुक गया था, हमारी सांसें तेज, बदन पसीने से भीगे थे। 


मैंने महसूस किया कि मुझे चरमसुख मिलने वाला है – वो झनझनाहट, वो आग को बहुत समय बाद मैने महसूस करा। "रवि... तेज..अआआह. आह्ह...हमममम साले हरामी आआह! बहुत अच्छे अआआह!


रवि मैं झड़ने वाली हूं,आअआआअह माँ।" मैंने फुसफुसाया। रवि ने स्पीड बढ़ाई, और हम दोनों एक साथ झड़ गए। 


उसका गरम माल मेरी चूत में गिरा, और मैं थक कर उसके ऊपर गिर गई, मैं बुरी तरह हॉफ रही थी। लेकिन तभी, मेरी चूड़ियों की खन-खन और सिसकारियां सुनकर विश्वास नींद से जाग गया। उसे शक हुआ तो, वो उठा और रसोई से लैम्प लेकर आया। 


जैसे ही उसने दरवाजा खोला, रोशनी कमरे में फैली, और मैंने देखा – विश्वास हमें रंगे हाथों पकड़ चुका था। मैं रवि के लन्ड पर बैठी हुई थी, नंगी, और उसका माल अभी-अभी मेरी चूत में गिरा था। 


हमारी गांड फट गई, हम हक्के-बक्के होकर उसे देखते रह गए।विश्वास की आंखें लाल हो गईं। "साली, तू यहां किसी गैर मर्द के लन्ड से ठुकवा रही है? 


साली रांड! भैया ने सही कहा था तेरे बारे में। वो मुझे बोल कर गए थे कि अपनी भाभी का ध्यान रखना। लेकिन तू साली चुदक्कड़ यहां दूसरे के लन्ड के साथ रंगरेलियां मना रही है," वो चिल्लाया।


मैं अभी भी रवि के लन्ड पर थी, धक्के बंद हो गए थे, लेकिन उसका माल मेरी चूत में था। मुझे एक नशा सा चढ़ा था, विश्वास की बातों का असर नहीं हो रहा था। 


"तो क्या करती मैं? तुम्हारे भैया के लन्ड से मेरी चूत की प्यास नहीं बुझती।वो तो दो धक्के लगा कर एक तरफ हो जाते हैं," मैंने कहा वो भी, बेशर्मी से।


"तो साली, सांड का लंड क्यों नहीं ले लेती?" विश्वास बोला।"मैं तो रवि का ही लूंगी। तुमको जो करना है कर लो," मैंने कहा। फिर रवि की तरफ देखा, "तुम रुक क्यों गए? 


इस नामर्द से डरने की जरूरत नहीं है। तुम चुदाई चालू रखो।"रवि बोला, "लेकिन मेरे लंड का माल चूत में निकल चुका है।"मैंने गुस्से में रवि के मुंह पर तमाचा मारा, फिर उठी, और नंगी ही कमरे से बाहर निकल गई।


रवि उठा, कपड़े लेकर भागा, लेकिन विश्वास ने लैम्प उसकी गांड पर फेंका और उसकी गांड़ में सच की आग लग गई।


रवि गांड मलते हुए भाग गया। मैं अपने कमरे में गई, लेकिन विश्वास मेरे पीछे आया। मैंने दरवाजा बंद करने की कोशिश की, लेकिन वो अंदर घुस गया।


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"भाभी, तुम्हें शर्म नहीं आती? मैं तुम्हारा देवर हूं," वो बोला, लेकिन उसकी नजरें मेरे नंगे बदन पर थीं – मेरी भरी छातियां, पतली कमर, मोटी गांड सब उसके सामने नंगी थी। मैंने देखा, उसकी पैंट में उभार चढ़ने लगा था।


मैं मुस्कुराई, मेरी चूत अभी भी गीली थी रवि के माल से। "देवर जी, अगर तुम नामर्द नहीं हो, तो साबित करो। मैं तड़प रही हूं, आओ ना," मैंने कहा, 


और उसके पास जाकर उसकी छाती पर हाथ रखा। विश्वास हिचकिचाया, लेकिन मेरी सेक्सी बॉडी ने उसे पागल कर दिया। 


वो मुझे बिस्तर पर धकेल दिया और मेरे ऊपर चढ़ गया। "भाभी, तुम्हारी ये मोटी गांड और चूचे मुझे हमेशा तड़पाते हैं," वो बोला, और मेरे ऊपर लेट कर होंठ चूसने लगा, वो भी किस करने में उस्ताद था उसने मेरे होठों को बहुत प्यार से चूमा फिर मेरे गले को चूमा।


वो धीरे धीरे चूमता हुआ मेरी गर्दन पर पहुंचा, देवर जी ने मेरे निप्पल चूसने शुरू करे उसने कुछ ही पलो में मुझे फिर से गरम कर दिया, मेरी चूत ने भी रस निकालना शुरू कर दिया था।


फिर विश्वास मेरे चूची को छोड़कर पेट को चूमने लगा उसने मेरी नाभि को खूब चाटा और धीरे धीरे चूत की तरफ बढ़ गया मैं एक बार की चुदाई से थक चुकी थी इसलिए बस हमममम! उफ्फ! ओह विश्वास अच्छा लग रहा है करते रहो अआआह!


मैने उसके कान को काटकर कहा "अगर तुम पहले ही मुझे अपने करीब लाने पहल कर लेते तो मुझे रवि को नहीं बुलाना पड़ता। मैने अपनी टांगे उसकी कमर बंधी। विश्वास ने मुझे उठाकर चूत को खाना चालू कर दिया।


मैंने उसकी शर्ट उतारी, पैंट खोली। उसका लन्ड भी मोटा था, रवि जितना नहीं, लेकिन तना हुआ तगड़ा लग रहा था। 


मैंने उसे पकड़ा और सहलाया। विश्वास ने मेरे चूचों को दबाया, निप्पलों को चूसा। "आह्ह... देवर जी... चोदो मुझे," मैं बोली। 


वो मेरी टांगें फैलाकर अंदर घुसा। उसका लन्ड मेरी चूत में गया, रवि का माल अभी भी वहां था, इसलिए रास्ता और चिकना हो गया। वो धक्के मारने लगा, मैं उछल रही थी। "स्सस्... भाभी... तुम्हारी चूत कितनी गर्म है," वो बोला।


हमने करीब एक घंटा सेक्स किया। वो मुझे डॉगी स्टाइल में चोदा, मेरी मोटी गांड पकड़कर लन्ड पेलता रहा। मैंने ऊपर बैठकर उछला, मेरी चूड़ियां फिर खनक रही थीं। 


आखिर में वो मेरी चूत में झड़ गया। रात के 11 से शुरू होकर, रवि के साथ पहला सेक्स 12 बजे तक, और विश्वास के साथ 1 बजे तक – कुल 3 घंटों में दो अलग मर्दों से ठुकवाई।


 मैं थक कर सो गई, उस रात मैं संतुष्ट हो गई। अगली सुबह विश्वास मुझे देखकर मुस्कुराया, और मैं जानती थी कि अब घर में ही मजा मिलेगा तब से आज


 तक मेरा सुबह का नाश्ता उसी के लन्ड पर बैठकर होता है। मेरी कहानी के बारे में आपकी राय कमेंट में बताए।


धन्यवाद।


आगे की कहानी : "देवर-लवर ने मिलकर भाभी की चूत-गांड फाड़ी"

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