मानसी भाभी की ट्रेनिंग से फाड़ी उनकी चूत - 02
Bhabhi Training Sex : भाभी ने देवर को सिखाया चोदना! बच्चे को दूध पिलाते हुए चुदी! घर के हर कोने में चुदाई - बालकनी, बाथ, सोफा! बिना कंडोम के अंदर भरा माल!
अभी तक आपने "मानसी भाभी की ट्रेनिंग से फाड़ी उनकी चूत!" में पढ़ा :-
मानसी उठी और दो मिनट में एक गिलास लेकर वापस आई। “दूध पिएगा?”
मैं उठा और उसके बूब्स पकड़ने बढ़ा। वो हट गई, “गिलास में निकालकर दे रही हूँ… पियो।”
मैंने कहा, “नहीं… मैं खुद निकालूँगा।”
मानसी मुस्कुराई और गाय बन गई। मैंने उसकी टी-शर्ट उतारी, दोनों बूब्स पकड़े और दूध दुहने लगा। गिलास में थोड़ा दूध निकाला, पिया, फिर बाकी सीधे निप्पल से चूस लिया। बच्चा तब तक सो चुका था।
अब मैंने मानसी को बिस्तर पर लिटा दिया और सर से पाँव तक चूमने लगा। होठों को ऐसे चूसा जैसे पका आम हो। गर्दन पर दाँत लगाए। बूब्स को दोनों हाथों से दबा-दबाकर चूसा।
पेट पर उसकी छोटी काली ढोडी को जीभ से चाटा - शहद जैसी मिठास। मोटी जांघें रुई जैसी नरम थीं।
जब मैं चूत के पास पहुँचा तो मानसी ने मेरे बाल पकड़कर कहा, “अब चाट… जोर से चाट मेरी रंडी चूत को।”
अब आगे :-
मैंने जीभ चूत पर फेर दी। पहले थोड़ा नमकीन लगा, फिर मीठा हो गया। मानसी ने दोनों टाँगें मेरे सिर पर दबा दीं और पानी निकालने लगी। पूरा पानी मेरे मुँह में भर दिया।
अब बारी मेरी थी। मानसी उठी, मुझे लिटाया और सर से पाँव तक चूमने लगी। फिर लंड मुँह में ले लिया। पाँच मिनट चूसा और बोली, “मुँह दुखने लगा… अब चोद।”
वो लेट गई। मैं ऊपर चढ़ा। लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा। मानसी पागल हो गई, “माधरचोद… डाल अंदर! चूत फाड़ दे! गुफा बना दे!”
मैंने कंडोम पहना और पूरा लंड एक झटके में अंदर डाल दिया। मानसी चिल्लाई। उसी आवाज़ से बच्चा जाग गया और रोने लगा। मानसी ने एक बूब्स उसके मुँह में दे दिया। बच्चा दूध पीने लगा और मैं धक्के लगाने लगा।
पहले धीरे, फिर तेज। मानसी गांड उठा-उठाकर जवाब दे रही थी। उसने तकिया गांड के नीचे रखा तो लंड और गहरा जाने लगा।
“तेजी से चोद मेरे राजा… आज अपनी इस रंडी को गुलाम बना ले,” वो चिल्ला रही थी।
बच्चा हँसने लगा तो मानसी बोली, “तेरी माँ चुद रही है और तू हँस रहा है माधरचोद!”
कुछ देर बाद मानसी की टाँगें अकड़ गईं और वो जोर से झड़ गई। मेरा अभी नहीं हुआ था।
मानसी बोली, “अब मैं सवारी करूँगी।”
मैं लेट गया। वो ऊपर बैठ गई, लंड को चूत में सेट किया और कूदने लगी। बूब्स मेरे मुँह में ठूंस दिए। फिर एक बार और झड़ गई।
अब मैं थकने लगा था लेकिन पानी नहीं निकला था। मैंने कहा, “कुतिया बन जा।”
मानसी तुरंत हाथ-पैर के बल हो गई। गांड फैला हुआ, गद्दे जैसा। मैंने पीछे से लंड डाल दिया और जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। गांड पर चाटा मारा। मानसी चिल्लाई, “आराम से मार जानू… भोसड़ी के!”
मैंने गांड लाल कर दी। आखिर में दोनों साथ झड़ गए। मैंने कंडोम निकाला, सारा माल उसके चेहरे पर गिराया। उसने वीर्य को पूरे फेस पर रगड़ लिया।
फिर वो मेरे पास चिपक गई, लंड को हाथ में लेकर सोने लगी।
“आज तक मेरे पति ने ऐसे कभी नहीं चोदा… दवा खाकर भी नहीं,” वो फुसफुसाई। “आज से मैं पूरी तेरी हूँ। जहाँ चाहे, जब चाहे, जैसे चाहे… चोद।”
सुबह जब आँख खुली तो मानसी मेरे लंड को हाथ में लिए हुए सो रही थी। बच्चा अभी भी गहरी नींद में था। मैंने उसके बाल सहलाए तो वो जाग गई।
मुस्कुराते हुए बोली, “गुड मॉर्निंग… तेरा लंड सुबह-सुबह इतना सख्त कैसे हो जाता है?”
मैंने कहा, “तेरे जिस्म की वजह से।”
वो हँसी और बिस्तर पर ही घुटनों के बल हो गई। “तो फिर सुबह का नाश्ता ले ले।”
कंडोम पहना, पीछे से लंड उसकी गीली चूत में डाल दिया। धीरे-धीरे धक्के शुरू किए। मानसी तकिया दबाए आहें भर रही थी ताकि बच्चा न जागे। दस-बारह मिनट बाद दोनों झड़ गए।
उसके बाद नहाए। बाथरूम में ही दूसरी राउंड हो गई। पानी के नीचे मैंने उसे दीवार से सटाया, एक टाँग उठाई और जोर-जोर से चोदा। पानी और उसके चूत के पानी का मेल… फर्श पूरा गीला हो गया।
मानसी चिल्ला रही थी, “मार… और जोर से मार… आज मेरी चूत को याद दिला दे कि असली लंड कैसा होता है!”
नाश्ते के बाद बच्चा खेलने लगा। हम हॉल में सोफे पर बैठे थे। अचानक मानसी ने मेरी पैंट का जिपर खोला, लंड निकाला और सोफे पर ही मुँह में ले लिया। बच्चा दूसरे कमरे में था। वो गहरी चूस रही थी।
मैंने उसके बाल पकड़कर गले तक ठूंस दिया। जब पानी निकलने वाला था तो उसने मुँह हटाया और बोली, “अंदर मत झाड़… चेहरे पर दे।”
मैंने सारा माल उसके चेहरे, गर्दन और बूब्स पर गिराया। उसने अंगुली से वीर्य उठाकर चाटा और बोली, “तेरा स्वाद अब लत लग गई है।”
दोपहर में जब बच्चा सोया तो हम बालकनी में चले गए। पर्दे बंद थे। मानसी ने लोअर उतार दिया, रेलिंग पकड़ी और गांड बाहर की तरफ कर दी। मैंने खड़े-खड़े पीछे से चोदा।
नीचे सड़क पर लोग जा रहे थे, हमें कुछ नहीं दिख रहा था लेकिन खतरे का मजा अलग था। मानसी फुसफुसा रही थी, “अगर कोई देख ले तो? … फिर भी मत रुक… चोद मुझे यहाँ!”
शाम को फर्श पर चटाई बिछाई। मानसी कुतिया बन गई। मैंने गांड पर बार-बार चाटे मारे, लाल कर दी। फिर चूत में लंड डालकर इतनी जोर से धक्के मारे कि उसकी चीखें निकलने लगीं।
“भोसड़ी के… मेरी चूत फाड़ रहा है तू! … और तेज… आज रात भर चोद!”
रात को फिर बेडरूम। इस बार बिना कंडोम के ।
मैंने उसे मिशनरी में लंबे समय तक चोदा, फिर उसे ऊपर बैठाया, फिर डॉगी, फिर उसे किनारों पर लिटाकर टाँगें कंधों पर रखकर गहराई तक गया। हर पोजीशन में वो गंदी-गंदी बातें बोल रही थी -
“तेरा लंड मेरी चूत का मालिक है… आज से ये चूत सिर्फ तेरी है… पति का लंड अब छोटा लगेगा… मुझे अपनी रंडी बना ले… वीर्य अंदर भर दे… मुझे गर्भवती कर दे साले!”
रात भर में हमने चार बार चुदाई की। बीच-बीच में दूध पीना, गांड चाटना, एक-दूसरे को चाटना… सब चलता रहा।
अगला दिन भी वैसा ही था। सुबह बाथरूम, दोपहर किचन में काउंटर पर, शाम को फिर बालकनी, रात को हॉल के फर्श पर। फ्लैट का कोई कोना ऐसा नहीं बचा जहाँ हमने चुदाई न की हो।
हर जगह हमारे पसीने और वीर्य की महक फैल गई थी।
तीसरे दिन सुबह जब पवन के आने का समय नजदीक था, आखिरी राउंड बेडरूम में हुआ। मानसी रो रही थी और चुद रही थी। “अब तू चला जाएगा… मैं अकेली रह जाऊँगी इस भूख के साथ।”
मैंने उसके आँसू पोछे और आखिरी बार बहुत प्यार और बहुत जबरदस्ती दोनों से चोदा। जब दोनों झड़ गए तो वो मेरे सीने से चिपक गई।
“अगली बार जब भी मौका मिले… तू आ जाना। मैं इंतजार करूँगी,” उसने कहा। “और हाँ… जेठानी एकता को भी तेरे बारे में बताऊँगी। शायद वो भी तेरा लंड चाहे।”
मैंने कपड़े पहने। बच्चा गोद में लेकर मानसी दरवाजे तक आई। लंबी किस की, फिर मेरे कान में फुसफुसाई, “अपनी रंडी को याद रखना… उसकी चूत हमेशा तेरे लिए गीली रहेगी।”
मैं निकला। पीछे मुड़कर देखा – मानसी दरवाजे पर खड़ी थी, आँखों में पानी और होंठों पर मुस्कान।
दोस्तों, ये थी अंजान भाभी मानसी से मेरी पहली मुलाकात और तीन दिन की पागलपन भरी चुदाई की कहानी।
अगले दो दिन-रात की हर छोटी-बड़ी डिटेल, हर गंदी बात, हर जगह की चुदाई मैंने जितना हो सका विस्तार से लिख दी है।
अगर आपको ये कहानी अच्छी लगी हो, या आप चाहें कि अगला पार्ट आये (जहाँ मानसी की जेठानी एकता भी कहानी में आती है, या फिर मानसी के साथ और मुलाकातें), तो जरूर बताइए।
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आपका गोलु यादव
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