पापा को उकसा कर मैंने अपनी सील तुड़वाई!

Family Sex Story : मुझे पता चला की मेरे पापा मेरी चूत से लेकर चूंची तक दबाना चाहते हैं, तब मैंने पापा को उकसा कर अपनी चुत और गांड की सील तोड़ चुदाई करवा डाली!


मेरा नाम अनन्या है। लोग मुझे प्यार से अनु कहते हैं। मैं अभी 18 साल की हुई हूँ। मेरी आँखें बड़ी-बड़ी है जो हमेशा काजल लगी हुई रहती है, होंठ गुलाबी है, रंग एकदम दूध सा गोरा और फिगर… 


अरे छोड़ो ना, खुद ही देख लो ना एक दिन। मैं अपने पापा की लाडली हूँ, उनकी राजकुमारी हूं। मेरी मम्मी तो दो साल पहले ही हमें छोड़कर चली गई थीं, तब से घर में सिर्फ मैं और मेरे पापा रहते है। 


पापा बैंक में बड़े अफसर हैं, वो दिन भर बाहर रहते हैं, लेकिन शाम को जब लौटते हैं ना… तो मेरी सारी दुनिया बस उनके इर्द-गिर्द घूमने लगती है।


मैं जानती हूँ के मैं सुंदर हूँ। पड़ोस की आंटियाँ भी कहती हैं, “अरे वाह अनु, तू तो बिल्कुल हीरोइन लग रही है।” लेकिन मुझे सबसे ज्यादा अच्छा तब लगता है जब पापा मुझे घूर-घूर कर देखते हैं।


कभी मेरी कमीज का बटन खुला रह जाए तो उनकी नजरें वहीं बूबू में अटक जाती हैं। मैं जानबूझकर उनके सामने झुकती हूँ, ताकि वो मेरी बढ़ती हुई जवानी की चूचियाँ अच्छे से देख लें।


मुझे पता रहता है, पापा के मन में क्या चल रहा होता है। वो मुझे छूना चाहते हैं, मुझे चूत से चूंची तक दबाना चाहते हैं, मुझे अपने बाहों में अपने आगोश में अंदर लेना चाहते हैं। ये Antarvasna Family Sex Story आप GaramKahani पर पढ़ रहे है।


और सच कहूँ तो… मैं भी तो यही चाहती हूँ। लेकिन ऐसा हमेशा से नहीं था ये सब शुरू हुआ था कुछ समय पहले ये पिछले महीने की बात है। 


पापा को ऑफिस से छुट्टी मिली थी दो दिन की। मैं कॉलेज से लौटी तो देखा पापा शर्ट उतारकर सोफे पर लेटे थे। उस दिन गर्मी बहुत थी। मैंने भी अपना कुर्ता उतार दिया और सिर्फ ब्रा-स्लिप में ही उनके पास बैठ गई। 


पापा ने आँखें खोलीं और मुझे ऐसे देखा जैसे पहली बार देख रहे हों।“


अनु… ये क्या कर रही है बेटा?” उनकी आवाज़ में एक अजीब सी कामना थी।  


“गर्मी लग रही है पापा… आप भी तो शर्ट उतारे हो ना?” मैंने शरमाते हुए कहा और उनके सीने पर अपना सिर रख दिया।  पापा का जिस्म एकदम गर्म था। मैंने अपना हाथ उनकी छाती पर फेरा। मेरे नाजुक स्पर्श से वो सिहर उठे।  


“अनु… ये ठीक नहीं…” वो हिचकते हुए बोले।


“क्या ठीक नहीं है पापा? आप मेरे पापा होना, मुझे गले लगाना तो बनता है ना?” मैंने अपना बदन उनके और करीब कर लिया। मेरी नई जवानी से फूटी चूचियाँ उनके सीने से दब रही थीं। 


मुझे लगा उनका लंड पैंट में सख्त हो रहा है। फिर मैंने जानबूझकर अपना पैर उनके पैरों पर रख दिया। मेरी जाँघ उनकी जाँघ से रगड़ खा रही थी। पापा ने मेरी कमर में हाथ डाला और मुझे और जोर से अपने सीने पर दबा लिया। 


मैंने अपना मुँह उनके गले में छुपा लिया और हल्के से उन्हें सीने पर चूम लिया।


“पापा… आप मुझे बहुत प्यार करते हो ना?” मैने कहा।


“हाँ बेटा…अपनी जान से भी ज्यादा।” उन्होंने जवाब दिया।


“तो फिर मुझे वो प्यार दो ना… जो एक मर्द अपनी औरत को देता है।” मैने शर्माते हुए कहा!


पापा एकदम से रुक गए वो मुझे देखने लगे उनकी साँसें तेज हो गईं थी, “अनु… ये गलत है… मैं तेरा बाप हूँ।” वो मुझे रोकते हुए बोले।


“तो क्या हुआ पापा? आप मर्द हो, मैं और मैं आपकी औरत बनना चाहती हूँ। मुझे कोई शर्म नहीं आती।” मैं थोड़ा बेशर्मी से बोली।


तभी पापा का फोन बजा वो मेरे पास से हटे और फोन पर किसी से बात करने लगे वो खड़े हुए बाते कर रहे थे लेकिन मेरी चूत में तूफान मचा हुआ था, मैं उठकर उनके पीछे गई और पीछे से उनको बाहों में ले लिया।


उन्होंने मेरे हाथों पर हाथ रख लिया मैं धीरे धीरे अपने हाथ से उनका पेट सहलाने लगी, फिर मैं सामने की तरफ हुई मैने एक एक कर के उनकी शर्ट के बटन खोले और उनके सीने को चूम लिया।


मैं अपने पापा के मर्दाना जिस्म को महसूस करने लगी, अपने नाज़ुक से कोमल हाथ उनकी पीठ पर फेरने लगी। वो मुझे एक हाथ से गले लगाए हुए थे। मैने फिर उनके गले को चूमना शुरू करा।


वो अभी अभी मेरा विरोध कर रहे थे, मगर उनका विरोध झूठा था मैं लगातार उनको चूम रही थी, धीरे धीरे मैं उनके होठों के करीब पहुंची पापा ने मुझे रोकना चाहा लेकिन मैने झांसे उनके होठ अपने होठों में दबा लिए।


मैने अपने दोनों हाथों से उनका चेहरा पकड़ा फिर कुछ मिनट उनके ऊपर वाले होठ को चूसा उसके बाद उनके निचले होठ को चूसा मैने उनके हाथ से फोन लेकर कॉल कट की और फोन एक तरफ फेक दिया।


अब पापा भी मेरा साथ देने लगे, मेरे गुलाबी होठ उनके मुंह में थे उन्होंने अपनी ज़बान मेरे मुंह ने डाल दी, मैं अपने पापा के ज़बान से रस चूस रही थी।


फिर मैंने पापा का हाथ पकड़ा और अपनी चूची पर रख दिया। मेरी चूंची को छूने से पापा की उंगलियाँ काँप रही थीं। मैंने उनकी हथेली को अपने बूबू पर दबाया। मेरे मुंह से आसासाह, पापा! की आवाज़ निकली।


“देखो पापा… कितनी सख्त हो गई हैं आपके लिए।” मैं वासना को आवाज़ में भरते हुए बोली। पापा की आँखें भी हवस में लाल हो गईं। वो मुझे घूर रहे थे। फिर अचानक उन्होंने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और बेडरूम में ले गए। 


उन्होंने दरवाजा बंद किया फिर लाइट भी बंद कर दी। अंधेरे कमरे में सिर्फ बेडसाइड लैंप जल रहा था।पापा ने मुझे बिस्तर पर लिटाया और मेरे कमसिन जिस्म के ऊपर चढ़ गए। उनकी साँसें मेरे चेहरे पर लग रही थीं।  


“अनु… सच में तुम ये चाहती है?” उन्होंने मेरी इजाज़त मांगी।“हाँ पापा… आज से मैं सिर्फ आपकी हूँ।” मैने भी टांगे फैलाकर अपने पापा को इजाज़त दी।


पापा ने पहले मेरी ब्रा का हुक खोला जिससे मेरी मोटी चूचियाँ बाहर आ गईं। वो मुझे दोनों हाथों से दबाने लगे। मैंने भड़कती वासना से अपनी आँखें बंद कर लीं। ये Baap Beti Ki Sex Kahani आप GaramKahani पर पढ़ रहे है।


 पापा ने फिर मेरे निप्पल को मुँह में लिया और ज़ोर से चूसने लगे उसकी मज़बूती से मैं तो पागल हो गई।  “आह्ह… पापा… जोर से…हम्मम आह्ह्ह…” मेरे मुंह से कामुक आहे निकल रही थी। 


पापा ने एक एक कर के मेरी सारी स्लिप उतार दी। अब मैं सिर्फ पैंटी में थी। पापा ने पहले मेरी जाँघें चूमीं, फिर मेरी पैंटी के ऊपर से ही चूत पर किस कर लिया । उनकी अदा से तो मैं तड़प उठी।  


मैने पापा से विनती करते हुए कहा “पापा… प्लीज… अंदर डालो ना…अब मुझसे नहीं रहा जा रहा।”  


पापा ने मेरी पैंटी साइड की और अपनी एक उंगली अंदर डाल दी उनकी उंगली बहुत मोटी थी तो मैं चीख पड़ी।  “आआआह्ह्ह… पापा… कितना अच्छा लग रहा है…”


पापा ने फिर मेरी पैंटी पूरी उतार दी। उनकी नादान बेटी बिल्कुल नंगी उनके सामने थी। पापा ने अपना भी पैंट उतारा। उनका मोटा लंड… ओह्ह माँ… इतना मोटा, इतना लंबा 8 इंच का सांप उफ्फफ!


मैंने डरते हुए उस नाग को हाथ लगाया। “पापा… ये तो बहुत बड़ा है… मेरी छोटी सी चूत में कैसे जाएगा?”  “जाएगा बेटा… मैं आराम से करूँगा।” उन्होंने मेरी हिम्मत बांधी।


पापा ने फिर अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ा। मैं डर और वासना से काँप रही थी। फिर धीरे से उस नाग का सुपारा अंदर चूत के अंदर आया। मुझे बहुत दर्द हुआ आगाह! मुंह्झ्ह! पापा दर्द हो रहा है ओहद्ह! मैं रोने लगी।  


“पापा… नहीं…आअआआअह निकालो… ओहद्ह फट जाएगी मेरी…पापा अआह”  पापा थोड़ा रुक गए। उन्होंने मेरी आंखें चूमी , मेरे आँसू पोछे।फिर प्यार से मेरी चूचियाँ चूसीं।


 फिर दोबारा लन्ड मेरे अंदर डालने की कोशिश करी। इस बार आधा लन्ड अंदर चला गया। मैं फिर से चीखी, लेकिन पापा अब नहीं रुके। उन्होंने एक जोर का धक्का मारा और पूरा लन्ड मेरी चूत में घुस गया।


 मुझे सच में लगा मैं मर जाऊँगी। मेरी चूत से खून बह रहा था।ये Family Sex Story आप GaramKahani पर पढ़ रहे है।


मुझे बिलखता देख पापा मेरे ऊपर लेट गए। वो मेरे होंठ चूसने लगे। धीरे-धीरे मेरा दर्द कम हुआ। जब मुझे मज़ा आने लगा तो मैंने अपनी गांड हिलानी शुरू की। मेरे मज़े को पापा समझ गए। वो ऊपर लेटकर धीरे-धीरे धक्के मारने लगे।  


“आह्ह… पापा…हमममम अब अच्छा लग रहा है… जोर से…आगाह करिए पापा आआह!”  पापा ने फिर अपनी स्पीड बढ़ा दी। कमरे में सिर्फ चपाचप की आवाज और मेरी ओह अआआह की चीखें गूँज रही थीं।  


“ले बेटी… ले… आज तेरी चूत का सील तोड़ रहा हूँ… आज से तू मेरी रंडी है…” पापा ने बहकाती आवाज़ में कहा। “हाँ पापा…आआह , मैं आपकी रंडी हूँ… चोदो मुझे…ओहद्ह फाड़ दो मेरी चूत…” में भी बहकने लगी।


फिर पापा ने मुझे घोड़ी बनाया। पीछे से उन्होंने अपना मोटा लन्ड घुसाया। वो मेरी गांड पर जोर से थप्पड़ मार रहे थे और मैं बस चिल्ला रही थी।  


“पापा अआआह… और जोर से… आह्ह्ह… मैं झड़ने वाली हूँ…हमममम पापा उज्ज्फ मज़ा आ गया।”  20 मिनट बाद मैं झड़ी। मेरी चूत ने सारा पानी छोड़ दिया। लेकिन पापा अब भी नहीं रुके। 


आखिर में जब पापा ने अपना लन्ड निकाला और मेरे मुँह में डाल दिया, उन्होंने घपाघोप मेरा मुंह चोदना शुरू करा।कुछ देर में उन्होंने अपना रस मेरे मुंह में छोड़ा मैंने उनका पूरा माल पी लिया।


उस रात पापा ने मुझे चार बार चोदा। एक बार गांड में भी ट्राई किया, लेकिन मैं नहीं मान रही थी।


बोली, “पापा अगली बार कर लेना प्लीज़… पहले चूत को तो इस मोटे नाग की आदत डालने दो।”


अगले दिन सुबह पापा ने मुझे किचन में ही दबोच लिया। मैं तब चाय बना रही थी। पापा ने शांति से आकर मेरे पीछे से लन्ड गांड़ पर लगाया।  


वो मेरे गले को चूमकर कान में बोले “अनु… सुबह-सुबह तेरी गांड देखकर लन्ड खड़ा हो गया।” उन्होंने मेरी गांड़ दबाई।


मैंने हँसकर गांड थोड़ा पीछे की। पापा ने मेरी नाइटि ऊपर की और बिना तेल-वेल के ही लन्ड अंदर घुसा दिया। सुखी गांड़ की वजह से मुझे बहुत दर्द हुआ, लेकिन मजा भी बहुत आया। किचन के प्लेटफॉर्म पर झुककर ही मैंने अपने प्यारे पापा का लन्ड लिया।


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अब तो रोज का यही सिलसिला है। पापा सुबह उठते हैं तो सबसे पहले मेरी चूत चाटते हैं। फिर ऑफिस जाने से पहले एक चुदाई का राउंड लगता है। शाम को लौटते हैं तो बाथरूम में ही नहाते हुए मुझे चोदते हैं।


रात को फिर बेड पर मेरी धक्का पेल चुदाई कर के मेरी चूत व गांड़ रौंद देते है। कभी मैं पापा के ऊपर चढ़ती हूँ, कभी पापा मुझे अपने नीची लेते है। कभी हम 69 करते हैं, कभी वो मेरी चूत में लन्ड के साथ डिल्डो लगाकर गांड मारते हैं।


पापा कहते हैं, “अनु, तू मेरी बीवी है अब।" मैं ये सुनकर हँसती हूँ, “नहीं पापा… मैं आपकी बेटी भी हूँ और रंडी भी। दोनों का मजा अलग होता है।


बस यही है मेरी और पापा की लव स्टोरी। जिसे सुनकर जिसका लंड खड़ा हो जाए या चूत गीली हो जाए, और अगर कोई लड़की है जिसके पास कोई किस्सा हो जो मुझसे बांटना चाहती हो तो मैं आपके मेल के इंतज़ार में रहूंगी।


मैं पापा के साथ हमेशा खुश हूँ, और हाँ… अगर कभी मौका मिले तो मैं आपको भी अपने पापा से मिलवाऊँगी। शायद वो आपको भी मेरे साथ… हहहहा… मजाक कर रही हूँ।


लेकिन सच कहूँ… मुझे अब एक से प्यार हो गया है वो मेरे कॉलेज का है। अब लगता है लड़कियों की शादी कम उमर में होना ही अच्छा है वरना जिंदगी में ऐसी कहानियों को निभाना पड़ता है,


जो बस अफसोस करवाती है। पापा मुझे दुनिया की सबसे खुश बेटी बनाते हैं… और सबसे चुदक्कड़ औरत भी। लेकिन पहले प्यार का सुख मुझसे दूर हो चुका है।


आप सभी को ये Baap Beti Ki Chudai Ki Family Sex Stroy कैसी लगी कमेंट में ज़रूर बताना।


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📝 Comments :

गजब h तुम्हारी स्टोरी, हवस के रस से भरी हुई। बाप को तड़पा कर, बापको बेटिचोद बना दिया ओर इसे पढ़कर हमारा रस हाथ में आ गया मलिका ए हुस्न।

फुर्सत ho to याद करना। आगे आप समझदार हो

गजब का लिखती हो। अपनी हवस मिटाने के लिए बाप को बेटिचोद बना दिया ओर मेरा रस मेरे हाथ में आ गया मलिका ए हुस्न। अनजान chudai कैसे हो कुछ बताए।

आगे बढ़े फुर्सत हो तो मिलना यही खो

Fireraju212@Gmail.com

Kya mast kahani h 3 bar pani nikal liya or loda abhi khada h rasoi me gaand wala mast seen h