चाची बनी मेरी रंडी! फ्लर्ट करके पेलवाई चूत-गांड!

Chachi ki Chudai : शादी में गांड रगड़ाई के बाद छोटी चाची को घर लाकर चोदा! 22 साल की सील पैक चाची की चूत, गांड फाड़ी! अब मैं "रंडी छोटी मां" बोलकर रोज पेलता हूँ!


कैसे हाल है मेरे पाठकों और कैसी चाल है मेरी पाठिकाओं, मेरा नाम अभिनव है। मैं 20 साल का हूँ और दिल्ली के एक मध्यमवर्गीय परिवार से हूँ।


हमारे घर में पापा, मम्मी, और पापा के छोटी भाई की पत्नी यानी मेरी छोटी मां माही भी रहती हैं। मेरी छोटी मां यानी माही अभी सिर्फ 22 साल की हैं।


उनकी शादी को अभी दो साल ही हुए हैं, लेकिन उनको देखकर वो अभी भी सील पैक लगती है। इसकी वजह है की मेरे चाचा विदेश में नौकरी करते हैं और साल में सिर्फ एक-दो महीने ही चाची को बजा पाते है ।


अब एक सेक्सी बिना मर्द की विवाहित औरत तो खुली तिजोरी जैसी होती हैं उसकी देखभाल नहीं करो तो कोई भी लूट कर लजाता है अब मेरा मेरी चाची के पास होना बिल्कुल ऐसा ही है जैसे बिल्ली से दूध की रखवाली कराना। 


तो घर में इसलिए माही छोटी मां का रोल निभाती हैं, लेकिन उम्र के कारण हम दोनों का रिश्ता छोटे बड़े की इज्जत से ज्यादा दोस्ती जैसा हो गया था। 


हम साथ में फिल्में देखते, मजाक करते, घूमने जाते और रात को देर तक बातें करते। सबको लगता था कि हम भाई-बहन जैसे हैं, लेकिन अंदर ही अंदर मेरे दिल में तो कुछ और चल रहा था।


ये Maa Bete Ki Chudai Ki Kahani आप Garam kahani पर पढ़ रहे हैं। माही बहुत खूबसूरत थीं।


उनका अप्सरा जैसा गोरा रंग, लंबे काले बाल, नाजुक चेहरा और खासकर उनकी गोल-मटोल गांड और भारी-भारी बूब्स किसी को भी दीवाना बना सकते थे। 


मैं अक्सर चुपके से उनकी गांड को देखता रहता था जब वो घर में घूमती थीं कभी कभी वो मुझे गले लगाती तो मैं उनकी गांड़ पर हाथ फेर देता था मगर वो बस मुस्कुरा कर चल देती क्योंकि उन्हें मालूम था घर मैं उनका दिल बहलाने वाला बस मैं ही हूं।


एक दिन की बात है हमारे पड़ोस में एक बड़ी शादी थी। पूरा मोहल्ला वहाँ गया हुआ था। माही यानी मेरी छोटी मां ने बहुत सुंदर लाल साड़ी पहनी थी जिसमें उनकी कमर और गांड बेहद आकर्षक लग रही थी। 


मैं भी शेरवानी में तैयार होकर उनके साथ गया था मैने नक्शे बाज़ी दिखाते हुए अपना हाथ उनकी कमर में रखा था लेकिन मेरा हाथ बार बार फिसल रहा था मानो उन्होंने मक्खन से मालिश करली थी आज।


शादी के फंक्शन में जब दुल्हे के सेहरा बंध रहा था। माही मां फोटोग्राफर की मदद कर रही थीं। वो बार-बार झुककर फोटो ले रही थीं।


मैं उनके ठीक पीछे ही खड़ा था। जैसे ही वो आगे झुकीं, उनकी गोल गांड मेरे लंड पर आकर चिपक गई और भीड़ के कारण घिसने लगी। 


पहली बार तो वो अनजाने में हुआ था मुझे यकीन है, लेकिन फिर वो खुद ही थोड़ा और पीछे सरक गईं। अब मेरे अरमान सख्त होने लगे मेरे सख्त लंड पर उनकी मुलायम गांड रगड़ खा रही थी। 


इससे मुझे बहुत मज़ा आने लगा। माही मां भी शायद इस मजे को महसूस कर रही थीं क्योंकि उनकी सांसें थोड़ी तेज हो गई थीं वो धीरे धीरे गांड़ को ऊपर नीचे हिला रही थी।


मैंने धीरे से उनके कान में फुसफुसाया, "माही मां... आपतो आज बहुत सेक्सी लग रही हो।"


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माही ने पीछे मुड़कर मुझे देखा, उनकी आँखों में शरारत थी। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "अभिनव बेटे... शरम नहीं आती? अपनी छोटी मां को सेक्सी बोल रहा है तू?"


मैंने हल्के से उनकी कमर पर हाथ रखकर कहा, और लन्ड को गांड़ पर दबा दिया "सच बोल रहा हूँ। आज आपकी ये साड़ी और ये गांड उफ़्फ़ ! इतनी गर्म है की मुझे छोड़ो कोई भी कंट्रोल नहीं कर पाएगा।"


उन्होंने मेरी कमर पर रखी उंगलियों पर हल्का सा थप्पड़ मारा लेकिन हटाई नहीं।


फोटो सेशन के दौरान वो बार-बार मेरे आगे आकर अपनी गांड मेरे लंड से रगड़वाती रहीं मेरी हालत मेरे चेहरे से दिख रही थी शायद उनको भी मुझे सताने में मज़ा आ रहा था।


हम दोनों के बीच एक हल्का-हल्का फ्लर्टी माहौल सा बन गया था। अब तक हम दोनों के बीच का रिश्ता बदल चुका था शादी से जब हम वापस आए लौटकर तो उस समय घर खाली था। 


पापा-मम्मी रात को लौटने वाले थे। हम दोनों अकेले ही घर पर थे, अब फैसले की घड़ी आने वाली थी। माही मां ने साड़ी उतारकर एक हल्की सी नाइट सूट पहन लिया। उनकी जांघें और बूब्स साफ दिख रहे थे।


 मैं सोफे पर बैठा फोन देख रहा था।


उन्होंने मुझे पानी का ग्लास देते हुए पूछा, "अभिनव, आज शादी में क्या-क्या देखा, कोई लड़की पसंद आई के नहीं अब तुमको भी बीवी की जरूरत है।"


मैंने उनको घूरते हुए कहा, "सबसे ज्यादा तो आपकी गांड देखी थी मां जी , वही पसंद आई मुझे तो।"


माही हंस पड़ीं। वो बोली "बदमाश कहीं का... तुझे अपनी छोटी मां की गांड अच्छी लगती है? और कमींना तू मेरी गांड़ ताक रहा था पूरा समय!"


फिर मैंने साहस करके कहा, "बहुत अच्छी लगती है। इतनी गोल और मुलायम है की... छूने का मन करता है।" उनके चेहरे पर अब शर्म की लाली और उत्तेजना की गर्मी दोनों थे।


उन्होंने मुझे देखा और बोलीं, "तू जानता है न हमारा रिश्ता कैसा है? मैं तेरी चाची हूँ।" ये Mom Son Sex Story आप Garam kahani पर पढ़ रहे हैं।


मैंने उनके करीब आकर कहा, "रिश्ता तो बस नाम का है माही । तुम सिर्फ 22 साल की हो, मैं 20 का। हम दोनों जवान हैं। और मुझे तुम बहुत पसंद हो।"


माही चुप हो गईं। फिर धीरे से बोलीं, "अभिनव... तुझे शर्म नहीं आती? मैं तेरी छोटी मां हूँ।"


मैंने उनकी हथेली पकड़ ली और कहा, "छोटी मां... आज जब तुम मेरे लंड पर अपनी गांड रगड़ रही थीं ना, तब तुम्हें भी मज़ा आ रहा था। मैं जानता हूँ। तब तुमको नहीं लगा के मैं तुम्हारे बेटे जैसा हूं ?" 


माही ने मेरी बात सुनकर मुझे देखा फिर आँखें नीची कर लीं। उनकी सांसें तेज हो गई थीं। मैंने धीरे से उनका हाथ अपनी जांघ पर रख दिया। उन्होंने महसूस किया कि मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था , उन्होंने मेरी जांघ पर हल्का दबाओ बनाया।


"अभिनव..." उन्होंने काँपती आवाज में कहा। मैंने उनको सोचने का मौका न देते हुए उन्हें अपनी गोद में खींच लिया। अब वो मेरी गोद में बैठी थीं। उनकी मुलायम गांड मेरे सख्त लंड पर दब रही थी।


मैंने उनकी कमर में हाथ डालकर उन्हें कसकर पकड़ लिया और उनके कंधे पर किस कर दिया।


वो सीससस! कहती हुई मेरी गोद में निढाल हो गई फिर मैने उनके चेहरों को घुमाया उनकी आंखे बंद थी और वो मेरा इंतजार कर रही थी फिर मैने होंठों को उनके मुलायम होठों पर रख दिया।


पहले तो वो थोड़ा झिझकीं, लेकिन फिर उन्होंने भी मेरे होंठ चूसने शुरू कर दिए। 


हम दोनों गहरी किसिंग करने लगे हमारी सांसे एक दूसरे की सांसों में मिल रही थी घुल रही थी। मेरी जीभ उनकी जीभ से खेल रही थी, उनकी जीभ में एक मिठास थी।


माही की सांसें फूल रही थीं जिस्म की गर्मी बढ़ रही थी। हमारी गर्मी ए सी की ठंड को पिघला रही थी।


मैंने उनकी नाइट सूट की ऊपरी स्ट्रैप खींचकर उनके कंधे नंगे कर दिए, फिर उनके कंधे और उनके गले के हर हिस्से को मैंने चूमा और चूमकर अपनी हवस की मोहर लगाई। उनके भारी बूब्स उनकी ब्रा में कैद थे जो मुझसे आजादी की भीख मांग रहे थे।


मैंने ब्रा के ऊपर से ही उन्हें दबाना शुरू कर दिया। माही आहें भरने लगीं।


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"आह... अआआह! उन्ह्ह्ह्ह मेरे बच्चे, हम्ममम अभिनव... उफ्फेफ! आगाह धीरे अआआह! अच्छा लग रहा है आअआअह, सिससासा आगाह अभिनव ओहह्ह्ह्ह धीरे... आह..." मैंने उनकी ब्रा भी उतार दी। 


अब उनके गोरी-गोरी चूंची मेरे सामने थीं। उनके गुलाबी निप्पल्स खड़े हो चुके थे। मैंने एक निप्पल मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। माही मेरे बालों में हाथ फेरती हुई तड़पने लगीं वो मेरे सर को अपने बूब्स में दबा रही थी।


"अभिनव...आअआअह ओहह्ह्ह्ह! क्या कर रहे हो...आअआअह शायद ये गलत हिम्मम्मम! आह... मैं तेरी छोटी मां हूँ हम्ममम अभिनव अआआह ओहह्ह्ह्ह अभिनव... आह हम्ममम और करो अआआह! आह! ऊपोफॉफ!..." 


लेकिन उनका शरीर बोल रहा था कि वो भी ये सब चाह रही थीं। मैंने उन्हें उठाकर बेडरूम में ले गया और उन्हें बिस्तर पर लिटाकर उनकी नाइट सूट पूरी उतार दी।


अब मेरी माही मेरी छोटी मां सिर्फ एक पतली पैंटी में मेरे सामने लेटी थीं।


 उनकी चूत पर पैंटी गीली हो चुकी थी मेरे सामने 22 साल की भरे पूरे जिस्म वाली एक नंगी औरत लेती थी जिसकी जवानी को अब लन्ड चाहिए था उनका जिस्म 28 X 24 X 26 का था जो अब मेरा था।


मैंने भी अपनी शेरवानी उतारकर फेकी और नंगा हो गया। मेरा 7 इंच का मोटा लंड खड़ा होकर तन गया था।


 माही ने उसे देखकर आँखें फैला लीं वो हल्के से चीखी "इतना बड़ा... अभिनव... मैं नहीं लूंगी मुझे नहीं करना” माही मां मेरे अरमानों को KLPD करती उससे पहले मैने उनको फिर से चूमना शुरू कर दिया।


उनके होठ चूमते चूमते जब वो गर्म होने लगी तब मैंने उनकी पैंटी भी उतार दी। उनकी चूत साफ एकदम चिकनी और गुलाबी थी। मैंने उनके दोनों पैर फैलाकर चूत चाटना शुरू कर दिया।


मेरी जीभ उनकी क्लिटोरिस पर घूम रही थी। माही मां जोर-जोर से चीखने लगीं।


"आह... अआआह! उन्ह्ह्ह्ह मेरे बच्चे, हम्ममम अभिनव... उफ्फेफ! आगाह धीरे अआआह! अच्छा लग रहा है आअआअह, सिससासा आगाह अभिनव ओहह्ह्ह्ह! आह... अभिनव... क्या कर रहे हो... आह... बहुत अच्छा लग रहा है!!!


ओहह्ह्ह्ह, ओहद चूसो... और चूसो...आअआअह!"


उसके बाद मैंने दो उंगलियाँ उनकी चूत में डालकर अंदर-बाहर करने लगा। 


वो बेइंतहा मछली जैसे तड़पने लगीं। उनकी चूत से एक नमकीन सा पानी निकल रहा था जिसे चख कर मेरा जोश और बढ़ गया। फिर माही ने खुद मेरे लंड को पकड़ लिया और मुंह में लेकर चूसने लगी। वो बहुत अच्छे से लंड चूस रही थीं।


उनकी जीभ मेरे लंड के सिरे पर घूम रही थी जो मुझे बुरी तरह उत्तेजित कर रही थी। मैं उनके बाल पकड़कर उनका मुंह चोदने लगा। ये Antarvasna Ki XXX Chudai Ki Kahani आप Garam kahani पर पढ़ रहे है। 


"छोटी मां... तुम बहुत अच्छी तरह लन्ड चूसती हो... आह..."


करीब 10 मिनट लंड चुसवाने के बाद मैंने उन्हें घोड़ी बनाया। उनकी गोल गांड मेरे सामने थी। मैंने उनके गांड के छेद पर थूक लगाया और उंगली डालनी शुरू की। फिर धीरे-धीरे दो उंगलियाँ अंदर-बाहर करने लगा।


माही दर्द और मज़े से कराह रही थीं। "अभिनव... धीरे... पहली बार है मेरा गांड़ मैं... आह दर्द हो रहा है ओहह्ह्ह्ह!..." मैंने फिर बहुत सारा तेल उनकी गांड़ लगाया।


फिर अपना लंड उनकी गोल मटोल गांड़ पर सेट किया और एक जोरदार झटका मारा।


मेरा टोपा उनकी गांड़ में फंस गया और उनकी आअआअसाह! भरी चीख निकल गई निकल साले! मर गई मैं फाड़ दी तूने कुत्ते ! बोलकर वो मुझे अपने पीछे से हटाने लगी मगर मुझे मज़ा आने लगा था।


मैं उनको आगे धकेल कर उनपर गिर गया जिससे थोड़ा लन्ड अंदर बढ़ गया।


 माही और जोर से चीखती हुई रोई आअआअह कुत्ते हट जा! छोड़ दे मुझे! मां मर गई बेटी तेरी !


फिर मैं थोड़ा रुका मगर लन्ड नहीं निकाला मैं बस ऐसे ही लेटा रहा और उनको पीठ पर चूमने लगा जब वो थोड़ा शांत हुई तो धीरे से मैं लन्ड को अंदर लेकर चला गया।


माही बोली "आआह... अभिनव... फट गई गांड़ ओहह्ह्ह्ह!... आह... साले... धीरे कर अआआह हम्ममम अभिनव... उफ्फेफ! आगाह धीरे अआआह! आअआअह, सिससासा आगाह!" थोड़ी देर में वो भी मज़ा लेने लगी।


मैंने रुककर उन्हें चूम लिया और फिर धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर डाल दिया। अब मैं पूरी स्पीड से माही मां को चोद रहा था। कमरे में चप-चप और थप-थप की आवाजें गूंज रही थीं।


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मेरी छोटी मां भी अब पूरी तरह से मेरी हो चुकी थीं। 


वो चिल्ला रही थीं, "हां... चोद मुझे... अपनी छोटी मां की फाड़ दे... आह... और जोर से... मैं तेरी रंडी हूँ आज से।" मैंने उन्हें 20 मिनट तक चोदा। फिर उनकी गांड़ में ही झड़ गया। गर्म वीर्य उनकी गांड़ में भर गया जो बाहर तक बहने लगा। 


हम दोनों थककर लेट गए हमारी पहली चुदाई पूरी हुई। मेरी छोटी मां अब संतुष्ट थी उनकी लन्ड की कमी मैने पूरी कर दी थी उन्होंने मुझे चूमते हुए कहा, "अभिनव... आज से तू मेरा है। जब भी मन करे, मुझे चोद लेना।"


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रात को फिर हमने सेक्स किया इस बार मैने उनकी चूत भी बजाई । पहले तो बहुत दर्द हुआ, लेकिन बाद में वो भी मजा लेने लगीं। फिर मैंने उनकी गांड में दुबारा अपना वीर्य छोड़ा।


उस रात के बाद हमारा रिश्ता पूरी तरह बदल गया।


दिन में तो हम छोटी मां और भतीजे जैसे व्यवहार करते, लेकिन रात को या जब घर खाली होता, माही मां मेरी पूरी तरह से रंडी बन जातीं।


कभी वो मेरा मुझे मुंह में लेतीं, कभी चूत में, कभी गांड में। हमने 69 पोजीशन में भी बहुत बार एक-दूसरे को चाटा था।


 मैं उनके बूब्स को चूसता, निप्पल काटता और वो मेरे लंड को रगड़कर मुझे उत्तेजित करतीं माही बहुत शरारती थी!


कभी कोई मेहमान घर में आते तो वो किचेन मैं बुलाकर मेरा लन्ड दबा देती जब वो खड़ा हो जाता तो बाहर भाग जाती फिर मुझे बाहर आने को बोलती।


एक बार तो हमने शादी वाले दिन की साड़ी में ही सेक्स किया। माही ने साड़ी पहनी हुई थी और मैंने उनकी साड़ी ऊपर उठाकर पीछे से चोदा था। वो बार-बार कहती रहती थीं,  


"अभिनव... तेरी छोटी मां को अपनी रंडी बना लिया है ना तू ने... हां... चोद मुझे... फाड़ दे मेरी चूत..."। वो बहुत गर्व से खुद को मेरी रण्डी बोलती थी।


हमारा ये गुप्त संबंध अब रोज का हो गया था। जब भी चाचा विदेश जाते, हम दोनों खुलकर चुदाई करते। कभी किचन में, कभी बाथरूम में, कभी छत पर। माही मां अब मुझे "दीदी" नहीं, बल्कि "अपनी रंडी छोटी मां" कहलवाती थीं ।


मैं उन्हें "मेरी चुदाई वाली चाची" कहकर पुकारता। उस दिन की फ्लर्टी शुरुआत से लेकर अब तक हम दोनों पूरी तरह एक-दूसरे के दीवाने हो चुके थे।


तो दोस्तों कॉमेंट में इस Family Sex Story की राय जरूर बताएं!

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