हनीमून पर बीवी की डबल लंड से चुदाई!


Family Sex Kahani : हनीमून पर Cuckold पति ने बीवी को मसाजर संग किया शेयर! दो मोटे लंडों ने एक साथ फाड़ी उसकी चूत और गांड! हुई 10 राउंड की बेरहम Group Chudai! 


अभी तक आपने "हनीमून पर पत्नी मसाजर से चुदी!" में पढ़ा :-


उसने कंडोम में अपना पानी छोड़ा। लंड निकालते समय मेरी चूत अभी भी धड़क रही थी… खुली और लाल।”


ललिता ने बात खत्म की तो उसका पूरा चेहरा जल रहा था। साँसें तेज थीं।


उसने मेरे कान में बिल्कुल चिपककर फुसफुसाया, “सच कहूँ अंशुल… उसका लंड तुमसे काफी बड़ा और मोटा था। अंदर तक हिलाकर रख दिया। अभी भी मेरी चूत में उसका अहसास है।”


मेरे अंदर जलन की कोई भावना नहीं उभरी।


बल्कि एक गहरी, काली और तीव्र उत्तेजना ने पूरा शरीर झकझोर दिया। नवविवाहित पत्नी के मुँह से दूसरे मर्द के मोटे लंड की तारीफ सुनना… मेरा लंड पैंट में तुरंत सख्त हो गया।


मैंने तुरंत उसका हाथ पकड़ा। “हम वापस जा रहे हैं।”


अब आगे :-


ललिता की बातें सुनकर मेरे अंदर ईर्ष्या की कोई जगह नहीं बची थी। पलंगतोड़ पान का असर, पहाड़ों की ठंडक और पत्नी के मुँह से दूसरे मर्द के मोटे लंड की तारीफ… इन सबने मिलकर मेरे अंदर एक अजीब, तीव्र और गंदी उत्तेजना पैदा कर दी थी।


मैंने तुरंत ललिता का हाथ पकड़ा और टैक्सी वाले से कहा, “वापस उसी स्पा पार्लर चलो।”


ललिता ने चौंककर देखा लेकिन विरोध नहीं किया। उसके गाल अभी भी लाल थे और साँसें तेज। हम पार्लर पहुँचे। मैंने विक्रम को एक तरफ बुलाया। अकेले में बात की।


मेरा सीधा प्रस्ताव सुनकर वो पहले तो हैरान हुआ, आँखें थोड़ी बड़ी हो गईं। फिर धीरे-धीरे उसके चेहरे पर एक समझदार और मंसूबा भरी मुस्कान फैल गई।


उसने अपना पर्सनल नंबर दिया और रात को हमारे होटल सूट में आने का न्योता सहर्ष स्वीकार कर लिया। “दस-साढ़े दस तक पहुँच जाऊँगा,” उसने कहा।


होटल लौटकर हमने कमरा पूरी तरह तैयार किया। हीटिंग फुल ऑन कर दी ताकि बाहर की कड़ाके की ठंड का कोई असर अंदर न हो। रूम सर्विस से अच्छी रेड वाइन की एक बोतल और तीन गिलास मंगवाए।


लाइट्स मद्धम कर दीं। बेड की चादरें ठीक कीं। ललिता ने फिर से वही लाल गाउन पहन लिया। उसके नीचे लाल जालीदार ब्रा-पैंटी ही थी। वाइन का इंतजार करते हुए वो बार-बार अपने बाल संवार रही थी।


घबराहट और उत्तेजना दोनों साफ झलक रहे थे।


साढ़े दस बजे दरवाजे पर दस्तक हुई। विक्रम आ चुका था। साधारण काली शर्ट और डार्क जींस में। लेकिन उसका चौड़ा सीना, मजबूत कंधे और गठीला बदन शर्ट के अंदर से साफ झलक रहा था।


कमरे में प्रवेश करते ही उसकी मौजूदगी ने माहौल बदल दिया।


शुरुआत में माहौल हल्का रखने के लिए हम तीनों सोफे पर बैठ गए। मैंने वाइन के गिलास भरे और सबको दिए। पहली चुस्की के साथ बातें शुरू हुईं। सामान्य… मौसम, मनाली, स्पा के बारे में।


लेकिन वाइन का तीखा स्वाद और विक्रम की मौजूदगी से ललिता के गालों पर नशीली लाली और बढ़ गई। उसकी साँसें थोड़ी तेज हो रही थीं। गाउन के अंदर स्तनों के उभार साफ ऊपर-नीचे हो रहे थे।


बोतल जब आधी हो चुकी तो हिचक की दीवारें लगभग गिर चुकी थीं। बातें अब सीधे और अंतरंग हो गई थीं। तभी मैंने पहल की। विक्रम की तरफ देखा, फिर ललिता की तरफ। धीरे से उसका गाउन की डोरी पकड़ी और खोल दी।


गाउन कंधों से सरककर कमर तक आ गया। अब ललिता सिर्फ लाल जालीदार ब्रा और पैंटी में थी। भारी, गोल स्तन जाली के पार साफ दिख रहे थे। निप्पल्स सख्त।


🔥 एक और कामुक स्टोरी : हनीमून पर पत्नी मसाजर से चुदी!


विक्रम की निगाहें ललिता के जिस्म पर टिक गईं। उसने गिलास एक तरफ रखा, आगे बढ़ा और ललिता को सोफे से उठा लिया। जैसे कोई पंख उठा रहा हो। किंग-साइज बेड तक ले गया और धीरे से लिटा दिया।


मैं बेड के किनारे कुर्सी खींचकर बैठ गया। पूरा नजारा देखने और मजे लेने के मूड में।


विक्रम बेड पर झुका और ललिता के होठों को अपने मुँह में ले लिया। लंबा, गहरा, भूखा किस। जीभ अंदर तक। ललिता की साँसें तुरंत उखड़ गईं। हल्की कराहें निकलने लगीं।


विक्रम की बड़ी, सख्त हथेलियाँ ब्रा के ऊपर से उसके स्तनों को भींचने लगीं। फिर पीछे से हुक खोला और ब्रा फेंक दी। दोनों भारी दूध उसके हाथों में आ गए। वो उन्हें मसल रहा था, निप्पलों को उँगलियों के बीच दबा रहा था।


ललिता की पीठ कमर से उठ रही थी। “आह्ह… जोर से… हाँ…”


कुछ ही मिनटों के फोरप्ले के बाद विक्रम ने उसकी पैंटी पकड़ी और एक झटके में नीचे खींचकर निकाल दी। ललिता अब पूरी तरह नंगी थी। चूत पहले से चमक रही थी।


विक्रम ने खुद भी शर्ट और जींस उतार दी। उसका लंड बाहर आया—लंबा, मोटा, तनाव से तना हुआ, नसें फूली हुईं। ललिता की आँखें उस पर टिक गईं।


उसने ललिता के दोनों पैर फैलाए। लंड के सिरे पर थूक लगाई और चूत के मुहाने पर टिका दिया। इस बार कोई नरमी नहीं। एक ही जोरदार झटके में पूरा लंड अंदर तक ठूस दिया।


ललिता की तेज चीख निकली। आँखों से पानी आ गया।


“आआआह्ह… बहुत मोटा… दर्द… ह्न्” रोने जैसी आवाज में बोली। लेकिन विक्रम रुका नहीं। मैंने इशारे से कहा कि जारी रखे। स्पा में उसने धीरे चोदा था… अब होटल के कमरे में वो पूरी ताकत लगा रहा था।


गहरी, तेज, बेरहम लय। हर धक्के पर ललिता के स्तन जोर से उछल रहे थे। चूत छप-छप कर रही थी। विक्रम उसके कंधे दबाए हुए ऊपर से चोद रहा था। ललिता की हालत खराब हो रही थी लेकिन कराहें दर्द से मजे में बदल रही थीं।


“आह्ह… धीरे… नहीं… जोर से… फाड़ दे… आआह्ह…”


मैं कुर्सी पर बैठा अपना लंड बाहर निकालकर सहला रहा था। पत्नी को इतने मोटे लंड से इतनी बेरहमी से चुदते देखना… मेरी उत्तेजना पागल कर रही थी।


विक्रम ने करीब पंद्रह-बीस मिनट तक लगातार तेज लय में चोदा। ललिता कई बार झड़ चुकी थी। आखिर में विक्रम ने गहरी कराह के साथ कंडोम में अपना पानी छोड़ा और साइड में गिर पड़ा।


ललिता बेड पर पसीने से तर, छाती जोर-जोर से उठ-गिर रही थी। चूत लाल और खुली हुई। आँखें बंद। होठ काँप रहे थे।


थोड़ी देर की खामोशी के बाद… अब मेरी बारी थी।


विक्रम साइड में हांफते हुए लेटा था। उसका मोटा लंड अभी भी आधा सख्त था और कंडोम में उसके पानी से भरा हुआ। ललिता बेड के बीचों-बीच पसीने से लथपथ पड़ी थी।


उसकी छाती जोर-जोर से उठ-गिर रही थी। दोनों भारी स्तन पसीने से चमक रहे थे। निप्पल्स सख्त और लाल। चूत पूरी तरह खुली, लाल और चमकदार थी। विक्रम के मोटे लंड ने उसे फैला रखा था।


हल्का-हल्का सफेद पानी उसके होंठों से बाहर रिस रहा था।


मैंने कुर्सी से उठकर बेड पर घुटनों के बल चढ़ा। ललिता ने आँखें खोलीं। उनमें थकान थी, नशा था और एक अजीब सी भूख भी। मैंने उसके माथे पर से गीले बाल हटाए और होठों पर अपना मुँह रख दिया। गहरा किस।


उसकी जीभ तुरंत मेरे मुँह में आ गई। दोनों हाथों से उसके पसीने से तर स्तनों को मसलने लगा। निप्पलों को उँगलियों के बीच दबाकर घुमाया।


ललिता ने कराहते हुए मेरी पीठ पर हाथ फेर दिए। “अंशुल… अब तू… अंदर डाल…”


मैंने अपने लोअर और अंडरवियर एक साथ उतारे। मेरा लंड पहले से ही फौलादी हो चुका था। पत्नी को इतने मोटे लंड से चुदते हुए देखकर मैं लगभग पागल हो रहा था। मैंने उसके दोनों पैर फैलाए।


चूत के मुहाने पर लंड का सिरा टिकाया। वो अभी भी ढीली और गीली थी। एक ही झटके में पूरा अंदर तक धकेल दिया।


“आह्ह… अंशुल…” ललिता की लंबी कराह निकली।


विक्रम का लंड मुझसे मोटा था, इसलिए मेरा आसानी से अंदर चला गया। लेकिन मैंने कोई नरमी नहीं दिखाई। पूरी ताकत से धक्के मारने लगा। हर धक्के पर उसके स्तन जोर से उछल रहे थे।


मैंने झुककर एक निप्पल मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा। दाँतों से हल्का काटते हुए।


ललिता ने अपनी दोनों टाँगें मेरी कमर के चारों तरफ लपेट लीं। एड़ी से मेरी कमर में गड़ा दिया। “और जोर से… ठोक… मेरी चूत फाड़ दे… आआह्ह…”


मैंने रफ्तार बढ़ा दी। छप-छप-छप की तेज आवाज। बेड की कराह। ललिता की सिसकारियाँ। मैं उसके दोनों स्तनों को मुट्ठी में भर-भरकर मसल रहा था। कभी एक निप्पल मुँह में ले लेता, कभी दूसरा।


उसकी चूत मेरे लंड को चूस रही थी। बार-बार सिकुड़ रही थी।


“देख विक्रम कैसे चोद रहा था तुझे… अब मैं चोद रहा हूँ… कैसा लग रहा है?” मैंने कान में गंदे शब्द कहे।


“अच्छा… बहुत अच्छा… दोनों के लंड अलग-अलग… आआह्ह… और तेज…”


मैंने उसके दोनों पैर पकड़कर कंधों तक मोड़ दिए। अब और गहराई तक जा रहा था। ललिता की आँखें बंद थीं। मुँह खुला हुआ। लगातार कराहें निकल रही थीं।


करीब बारह-पंद्रह मिनट की इस जोरदार चुदाई के बाद मैं और नहीं रोक पाया। गहरी साँस के साथ उसके अंदर ही अपना पानी छोड़ दिया। ललिता भी मेरे साथ ही जोर से ऐंठते हुए झड़ गई। उसके नाखून मेरी पीठ में गड़ गए।


हम दोनों हांफते हुए एक-दूसरे पर गिर पड़े। मेरा लंड अभी भी उसकी चूत के अंदर धड़क रहा था।


👉 ये कहानी भी जरूर पढ़ें : मानसी भाभी की ट्रेनिंग से फाड़ी उनकी चूत - 02


थोड़ी देर आराम। वाइन के घूँट लिए। पानी पिया। फिर विक्रम ने फिर से कमर में जान आने पर ललिता को इशारे से डॉगी स्टाइल में कर दिया।


ललिता थके होने के बावजूद घुटनों और कोहनियों के बल हो गई। उसके गोल, मोटे चूतड़ हवा में उठे हुए थे। बीच में लाल, खुली चूत चमक रही थी। विक्रम पीछे आया।


एक हाथ से उसके चूतड़ फैलाए और दूसरे हाथ से लंड का सिरा चूत पर टिकाकर एक झटके में अंदर डाल दिया।


“आआआह्ह… फिर से… बहुत मोटा…” ललिता चीख पड़ी।


मैं उसके सिर के पास जाकर बैठ गया। उसका मुँह अपने लंड के करीब ले आया। ललिता समझ गई।


उसने आँखें बंद करके मेरा लंड मुँह में ले लिया। आगे से मेरा लंड चूस रही थी, पीछे से विक्रम उसकी चूत में मोटे लंड से बेरहमी से धक्के मार रहा था।


दोनों तरफ से भरी हुई। लार मेरे लंड से टपककर उसके ठोड़ी पर गिर रही थी। विक्रम थप्पड़ मार-मारकर चोद रहा था। छपाक… छपाक… ललिता के चूतड़ लाल हो गए थे।


“चूस… जोर से चूस… गले तक ले… आआह्ह…” मैंने उसके बाल पकड़कर और गहराई तक मुँह में ठोकना शुरू कर दिया।


ललिता गग-गग की आवाजें निकाल रही थी लेकिन मुँह नहीं हटा रही थी। विक्रम ने उसकी कमर पकड़कर और तेज लय पकड़ ली। बेड जोर-जोर से हिल रहा था।


कमरे में सिर्फ छप-छप, थप्पड़ों और ललिता की दबी हुई कराहों की आवाज गूँज रही थी।


काफी देर तक यही सिलसिला चला। ललिता कई बार झड़ चुकी थी। उसके पैर काँप रहे थे। तभी विक्रम ने लंड बाहर निकाला। ऑयल की बोतल उठाई। अच्छी मात्रा में अपने लंड पर और ललिता की गाँड के छेद पर लगाया।


ललिता ने पीछे मुड़कर देखा। आँखों में हल्का सा डर था। “वहाँ… मत डालना… पहली बार है… दर्द होगा…”


विक्रम ने मुस्कुराते हुए कहा, “धीरे से डालूँगा। तू बस सह ले।”


उसने लंड का सिरा गाँड के टाइट छेद पर टिकाया और धीरे-धीरे दबाव बढ़ाने लगा। ललिता ने चादर को दोनों हाथों से भींच लिया। माथा तकिए में गड़ा दिया।


“आआआह्ह… दर्द… निकाल… बहुत दर्द… ह्न्न्न्…”


लेकिन विक्रम रुकने वाला नहीं था। धीरे-धीरे आधा लंड अंदर चला गया। फिर और। जब पूरा अंदर तक धंस गया तो ललिता की लंबी, दर्द भरी चीख निकली। आँखों से आँसू बह निकले। गाँड से हल्का खून भी दिखाई दिया।


मैंने नीचे से उसकी चूत में अपना लंड फिर से डाल दिया। अब दोनों लंड एक साथ अंदर थे—एक उसकी चूत में, एक गाँड में।


ललिता बिल्कुल पागल हो गई। दर्द और मजे की मिली-जुली चीखें निकाल रही थी। “आआह्ह… दोनों… एक साथ… मर जाऊँगी… निकालो… नहीं… डाले रहो… आआआह्ह…”


हम दोनों ने मिलकर धक्के मारने शुरू किए। एक अंदर जाता तो दूसरा बाहर आता। फिर दोनों एक साथ। लय बन गई। ललिता की गाँड और चूत दोनों फैल चुकी थीं। वो बीच में दबी हुई कराह रही थी।


कभी “दर्द” चिल्लाती, कभी “और जोर से” कहती।


यह हमारा सबसे गंदा और तीव्र राउंड था…


दोनों लंड एक साथ अंदर थे - एक चूत में, एक गाँड में। ललिता बीच में दबी हुई पागलों की तरह कराह रही थी। आँसू बह रहे थे, लेकिन कमर अपने आप हिल रही थी।


“आआआह्ह… दोनों… फाड़ दो… मारो… आआह्ह… दर्द… मजा… दोनों…”


हमने लय पकड़ ली। विक्रम पीछे से गाँड में गहरे धक्के मार रहा था, मैं नीचे से चूत में। कभी एक साथ अंदर, कभी बारी-बारी। ललिता की गाँड से हल्का खून मिला तेल बह रहा था।


चूत छप-छप कर रही थी। कमरा पसीने, सेक्स और वाइन की गंध से भर चुका था।


काफी देर तक यही चला। ललिता बार-बार झड़ रही थी। उसका शरीर काँप रहा था। आखिर में विक्रम ने गाँड के अंदर जोर से पानी छोड़ा। मैंने भी चूत में अपना दूसरा राउंड पूरा किया।


तीनों एक साथ हांफते हुए बेड पर ढेर हो गए।


रात के दो बज चुके थे। हमने थोड़ा पानी पिया, वाइन के बचे हुए घूँट लिए। शरीर थक चुके थे लेकिन दिमाग अभी भी उत्तेजना से भरा था।


पाँचवाँ राउंड विक्रम ने ललिता को बेड के किनारे खिसकाया। उसके पैर नीचे फर्श पर लटका दिए। खुद खड़ा होकर उसके दोनों पैर पकड़े और तेज गति से स्ट्रोक्स लगाने लगा।


इस पोजीशन में लंड पूरा अंदर तक जा रहा था। 


ललिता के स्तन बेड पर पटक रहे थे। वो चादर भींचे हुए कराह रही थी— “आह्ह… खड़े-खड़े… बहुत जोर से… आआह्ह…” विक्रम ने इस राउंड में भी देर तक चोदा और आखिर में कंडोम में झड़ गया।


छठा राउंड अब मेरी बारी। मैंने ललिता को मिशनरी में लिटाया। इस बार दोनों पैर पकड़कर उसके सिर के बिलकुल पास मोड़ दिए। कमर पूरी तरह मुड़ गई। इतनी गहराई कि लग रहा था लंड पेट में जा रहा है।


“ओह गॉड अंशुल… बहुत गहरा… निकल जाएगा… आआह्ह…” मैंने बिना रुके तेज धक्के मारते हुए इस राउंड को पूरा किया। दोनों एक साथ झड़े।


सातवाँ राउंड ललिता को ऊपर आने को कहा। वो काँपते हुए विक्रम के लंड पर बैठ गई। काउगर्ल। थकान के बावजूद खुद उछल-उछलकर चोदने लगी। उसके भारी स्तन विक्रम के चेहरे पर थपथपा रहे थे।


💋 आपको ये कहानी पसंद आएगी : बॉस ने बीवी की गांड फाड़ी! पति ने छोड़ा चूत में माल!


विक्रम दोनों हाथों से स्तन मसल रहा था और निप्पल चूस रहा था। मैं पीछे से उसके चूतड़ सहला रहा था, कभी थप्पड़ मार रहा था। “हाँ… ऐसे उछलो… अपनी चूत खुद फाड़ो… आआह्ह…” ललिता ने इस राउंड में खुद को पूरी तरह छोड़ दिया।


जब वो झड़ी तो विक्रम ने भी उसके अंदर पानी छोड़ दिया।


आठवाँ राउंड अब वही पोजीशन मेरे साथ। ललिता मेरे लंड पर सवार हुई। इस बार और भी बेकाबू। वो जोर-जोर से उछल रही थी। मैं नीचे से धक्के मार रहा था। उसके स्तन मेरे मुँह में आ-जा रहे थे।


मैंने दोनों निप्पल बारी-बारी चूसे और काटे। “अंशुल… तेरा भी… दोनों के लंड… आआह्ह… मैं पागल हो गई…” हम दोनों जोरदार तरीके से झड़े।


नौवाँ राउंड विक्रम ने ललिता को करवट में लिटाया। साइड-लाइंग। एक पैर ऊपर उठाकर गहरे, थका देने वाले स्ट्रोक्स देने लगा। इस पोजीशन में लंड का कोण ऐसा था कि हर धक्का सीधा गर्भ पर लग रहा था।


ललिता की आवाज अब बैठने लगी थी। सिर्फ दबी हुई सिसकारियाँ निकल रही थीं। विक्रम ने इस राउंड को भी लंबे समय तक चलाया और आखिर में गाँड के करीब चूत में ही झड़ गया।


दसवाँ और अंतिम राउंड अब सिर्फ मैं और ललिता बचे थे। विक्रम एक तरफ लेटकर साँसें ले रहा था। मैंने ललिता को अपनी बाहों में भर लिया। उसके थके, पसीने से तर शरीर को सहलाया।


होठों पर किस किए। फिर उसके दोनों पैर फैलाए और आखिरी बार अपना लंड अंदर डाला।


इस बार गति धीमी लेकिन बहुत गहरी थी। मैं उसके कान में बोल रहा था, “आज तूने कितने लंड लिए… कितनी बार झड़ी… मेरी रंडी बीवी…” ललिता सिर्फ कराह रही थी।


आँखों में आँसू थे लेकिन होठों पर तृप्ति की मुस्कान।


मैंने पूरी बाकी ताकत झोंक दी। जब तक दोनों के शरीर में एक भी बूंद ऊर्जा नहीं बची, चोदता रहा। आखिर में गहरी कराह के साथ उसके अंदर ही अपना आखिरी पानी छोड़ दिया।


ललिता भी कमजोर सिसकारी के साथ झड़ गई और मेरे ऊपर ही बेसुध हो गई।


सुबह की पहली हल्की रोशनी खिड़की से अंदर आने लगी थी। कमरे में पसीने, सेक्स और वाइन की भारी गंध फैली हुई थी। बेड पूरी तरह गंदगी से लथ-पथ था।


ललिता मेरे बाजू में बेसुध पड़ी थी। जब मैंने उसका माथा छुआ तो वो जल रहा था। हल्का बुखार। पूरी रात की दस राउंड की बेरहम चुदाई, दो मोटे लंड, वाइन और थकान ने उसके शरीर को जवाब दे दिया था।


चूत और गाँड दोनों सूजी हुई और लाल थीं। जाँघों के अंदरूनी हिस्से पर थप्पड़ों और रगड़ के निशान थे।


मैंने तुरंत उसे कंबल से ढक दिया। पानी के घूँट पिलाए। गीले कपड़े से माथा पोंछा। विक्रम ने चुपचाप अपने कपड़े पहने। मेरे पास आकर हाथ मिलाया। कोई ज्यादा बात नहीं हुई।


बस एक थकी हुई मुस्कान। फिर वो दरवाजा खोलकर बाहर चला गया।


मैं ललिता के पास बैठ गया। उसके बिखरे बाल सहलाते हुए देखता रहा। बुखार की तपन के बावजूद उसके होठों पर एक अजीब सी शांत और तृप्त मुस्कान थी।


मनाली की वो रात… हमारी हनीमून की सबसे गंदी, सबसे लंबी, सबसे यादगार रात बनकर रह गई।


जिस रात मेरी पत्नी ने दो मर्दों के लंड लिए… जिस रात मैंने उसे Share किया… और जिस रात हम तीनों ने सीमाएँ पार कर दीं!!


तो दोस्तों कॉमेंट करके अपनी राय हमारी इस Husband Wife Stranger Boy Antarvasna Sex Kahani पर जरूर दे!!


← Previous Story Next Story →

Share This Story :  

🎲 Feeling Lucky? Read a Random Story

यह कहानी आपको कैसी लगी?

❤️ Love 0
😍 Wow 0
😂 Funny 0
😢 Sad 0
😡 Angry 0
👏 Clap 0

💬 Leave a Comment :-


📝 Comments :

No comments yet. Be the first to comment!