हनीमून में मसाजर से चुदवाई सील पैक बीवी!
Antarvasna Sex Story : अपनी Cuckold फैंटेसी के लिए पत्नी को हनीमून पर 10 इंच लंबे लंड वाले मसाज बॉय से चुदवाकर, उसकी चूत और सील पैक गांड दोनों को फड़वाया!
यह कहानी मेरी वाइफ की चुदाई की है जो मेरे सामने हुई। यह कहानी पूरी तरह सत्य पर आधारित है सिर्फ नाम बदले हुए है कहानी सत्य है।
मेरा नाम अंशुल है। मेरी उम्र 26 साल है। मेरी पत्नी ललिता, जिसकी उम्र महज 24 साल है, खुदा का तराशा हुआ एक ऐसा नायाब तोहफा है जिसे देखकर किसी भी मर्द की नीयत डोल जाए।
उसका शरीर एकदम मादक है—34 के उभरे हुए कामुक दूध बोबे, जो हर लिबास को फाड़कर बाहर आने को बेताब रहते हैं, और उनकी तुलना में 32 की इतनी पतली कमर कि कोई भी अपनी दोनों हथेलियों में उसे भींच ले।
हम मध्यप्रदेश के रहने वाले हैं।
तो दोस्तो ज्यादा देर न करते हुए अब कहानी पर आते हैं।
2023 में हमारी सगाई हुई और सगाई वाले दिन वह किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी। भारी साड़ी के भीतर उसकी जवानी हिलोरे ले रही थी।
जब रात को सारे रिश्तेदार चले गए और हम पहली बार अकेले हुए, तो कमरे का तापमान मेरी धड़कनों के साथ बढ़ने लगा।मैंने उसे पीछे से अपनी बाहों में भरा, तो उसकी रेशमी त्वचा का अहसास मेरी रगों में बिजली की तरह दौड़ गया।
पहली बार में वह बहुत शर्मा रही थी पहले तो सेक्स करने का मेरा भी कोई इरादा नहीं था पर धीरे-धीरे माहौल बनता गया। लेकिन वो पूरी तरीके से शर्मा रही थी।
उसकी सिसकियां और मेरा उतावलापन... उस रात मुझे अहसास हुआ कि ललिता का शरीर किसी प्यासे के लिए मीठे झरने जैसा है। मैंने उसकी उसी रात सील तोड़ी पर उस दिन सेक्स अधूरे तरीके से हुआ।
मेरा 6 इंच का लंड उसके लिए काफी था, लेकिन मेरे मन के अंधेरे कोनों में कुछ और ही पक रहा था। उसके बाद तो मैंने उसे सगाई में बहुत बार चोदा। अब वो भी खुलकर चुदवाती थी।
फिर एक दिन उसके जन्मदिन पर हमने रोलप्ले किया और मुझे cuckold वाली फैंटेसी जागी।
2024 की कड़ाके की सर्दी में हम उसका जन्मदिन मनाने शहर से बाहर एक रिजॉर्ट में गए थे। वहां मैंने पहली बार 'रोलप्ले' किया और पहली बार पूरी रात चोदा मैंने।
ललिता उस वक्त बहुत उत्साहित थी; उसने सोचा कि यह सिर्फ एक नया प्रयोग है। लेकिन हकीकत में, मैं अपनी 'ककल्ड' (Cuckold) फैंटेसी को उस खेल के पीछे छुपा रहा था।
जब वह रोलप्ले में किसी और का नाम लेकर मुझे उत्तेजित करती, तो मेरा पागलपन और बढ़ जाता।
मैं जानता था कि अगर मैंने सीधे तौर पर उससे किसी और के साथ संबंध बनाने चुदाई की बात की, तो वह अपनी लोक-लाज और संस्कारों के कारण भड़क जाएगी।
इसलिए, मैंने एक ऐसा जाल बुनना शुरू किया जिसमें वह खुद-ब-खुद उलझ जाए और उसे यह सब एक 'हादसा' या 'जरूरत' लगे। और उसे गिल्ट लगे और लगे कि उसी की गलती से वह चुद गई पराए मर्द से।
आखिरकार फरवरी 2026 में हमारी शादी हो गई। सात फेरों के बाद सुहागरात में मैंने उसकी चूत का बाजा बजा दिया। जब मार्च में हम हनीमून के लिए दार्जिलिंग पहुँचे, तो वहां की बर्फीली वादियों और धुंध ने मेरे इरादों को और हवा दे दी।
होटल के उस लग्जरी कमरे की बड़ी खिड़की से दिखते पहाड़ों के बीच, मैंने तय कर लिया था कि आज मैं अपनी फैंटेसी को पूरी करूंगा और उसकी चुदाई किसी गैर मर्द से करवाऊंगा।
तभी मेरी नजर होटल के स्पा मेन्यू पर पड़ी। मैंने सोचा क्यों न एक 'मेल बॉडी मसाजर' का सहारा लिया जाए। एक ऐसा अजनबी जो ललिता के उस बेदाग जिस्म को अपनी उंगलियों से छुए और उसे उस सुख की दहलीज तक ले जाए जहाँ से वापसी मुमकिन न हो।
मैंने शाम को ललिता से कहा, "बेबी, पहाड़ की इस चढ़ाई और ठंड ने तुम्हारे जिस्म को थका दिया होगा। क्यों न हम रूम में ही एक प्रोफेशनल मसाज करवाएं? मैंने सुना है यहाँ के मेल मसाजर बहुत स्किल्ड होते हैं।"
ललिता ने सुनते ही अपनी आँखें सिकोड़ लीं। वह थोड़ी पुरानी सोच की और संकोची थी। उसने झिझकते हुए कहा, "नहीं अंशुल, किसी पराए मर्द से मालिश? मुझे अजीब लग रहा है। तुम ही कर दो न।"
मैंने उसे अपनी बाहों में घेरा और उसके कान के पास फुसफुसाते हुए कहा, "अरे पगली, वो प्रोफेशनल होते हैं। जैसे डॉक्टर होते हैं, वैसे ही मसाज करने वाले। कमर... इन्हें एक अच्छी मालिश की जरूरत है। बस रिलैक्स करो, मैं भी तो यहीं हूँ।"
काफी देर तक उसे चूमने और बहलाने के बाद, वह आखिरकार मान गई। उसकी आँखों में अभी भी थोड़ा डर था, पर मेरे लिए वही डर सबसे बड़ी उत्तेजना बन रहा था।
मैंने मसाज बॉय को तुरंत बुलाया।
दार्जिलिंग की उस कड़ाके की ठंड में होटल का कमरा हीटर की वजह से अंदर से काफी गर्म और मदहोश कर देने वाला था। ललिता बेड पर बैठी खिड़की से बाहर गिरती बर्फ देख रही थी।
तभी मैंने स्पा सर्विस को फोन किया और खास तौर पर एक 'स्ट्रॉन्ग और मस्कुलर' मेल मसाजर की मांग की। करीब 30 मिनट बाद दरवाजे पर दस्तक हुई।
दरवाजा खुला और अंदर करण ने कदम रखा। उसकी कद-काठी देखकर मेरा दिल जोर से धड़कने लगा। करीब 28 साल का वह गबरू जवान, जिसकी छाती चौड़ी और भुजाएं लोहे जैसी सख्त थीं।
उसने टाइट टी-शर्ट पहनी थी जिसमें से उसके डोले साफ झलक रहे थे। ललिता उसे देखकर थोड़ी असहज हुई, उसने अपने शॉर्ट्स को नीचे खींचने की कोशिश की।
वह उस वक्त सफेद रंग की टाइट टी-शर्ट और काले रंग के शॉर्ट्स में थी, जिसमें से उसकी सेक्सी जांघें और 34 साइज के बोबे का उभार करण की आंखों को सीधा दावत दे रहा था।
करण ने अपना बैग फर्श पर रखा और एक गहरी आवाज में बोला, "नमस्ते सर, नमस्ते मैम। क्या हम शुरू करें?"
ललिता ने मेरी तरफ झिझकते हुए देखा, जैसे वह कह रही हो कि क्या यह सही है? मैंने उसे चूमकर सोफे पर बैठा दिया और कहा, "रिलैक्स बेबी, यह प्रोफेशनल है।"
ललिता पेट के बल बेड पर लेट गई। करण ने अपनी जैकेट उतारी और काम शुरू किया। उसने अपनी जेब से जैस्मिन और सैंडलवुड ऑयल की बोतल निकाली। तेल की खुशबू ने पूरे कमरे को और भी ज्यादा कामुक बना दिया।
जैसे ही करण ने ललिता की पीठ पर तेल डाला और अपनी मजबूत हथेलियों से रगड़ना शुरू किया, ललिता के मुंह से एक दबी हुई आह निकली। करण के हाथ किसी माहिर खिलाड़ी की तरह उसकी रीढ़ की हड्डी से होते हुए नीचे कूल्हों की तरफ जा रहे थे।
कुछ मिनट बाद करण धीरे से फुसफुसाया, "मैम, आपकी टी-शर्ट में तेल लग रहा है और यह मसाज में बाधा डाल रही है। क्या मैं इसे निकाल दूँ?"
ललिता ने गर्दन घुमाकर मेरी ओर देखा। उसकी आंखों में डर और उत्तेजना का एक अजीब संगम था। मैंने मुस्कुराकर सिर हिला दिया। करण ने बड़ी फुर्ती से उसकी टी-शर्ट ऊपर खींच दी।
अब ललिता सिर्फ अपनी काले रंग की ब्रा और शॉर्ट्स में थी। उसकी गोरी और मखमली पीठ पर करण के सांवले हाथ जब चल रहे थे, तो वह नजारा मुझे पागल कर रहा था।
मसाज का सिलसिला नीचे बढ़ा। करण ने कहा, "मैम, लोअर बॉडी की नसों को खोलना जरूरी है, शॉर्ट्स थोड़े टाइट हैं।" ललिता ने कुछ नहीं कहा, बस अपनी आंखें बंद कर लीं।
करण ने उसके शॉर्ट्स के इलास्टिक को पकड़ा और धीरे-धीरे उसकी पिंडलियों से होते हुए पैर से बाहर निकाल दिया। अब वह सिर्फ अपनी ब्रा और पैंटी में किसी सजी हुई अप्सरा जैसी लग रही थी।
करण अब ललिता की जांघों के बीच अपनी हथेलियां रगड़ रहा था। वह जानबूझकर अपने हाथ उसकी पैंटी के किनारों तक ले जाता और फिर पीछे खींच लेता। ललिता का शरीर अब धीरे-धीरे तनने लगा था।
अंत में करण ने वही कहा जिसका मुझे इंतजार था, "मैम, ब्रा और पैंटी की वजह से मसाज पूरा नहीं हो पा रहा है। अगर आप सहज हों, तो पूरी बॉडी मसाज के लिए इन्हें हटाना पड़ेगा।"
ललिता का चेहरा शर्म से सुर्ख लाल हो गया। और मना कर दिया इस पर मैंने कहा निकालो दो बेबी में यही हूं बस इस सुख को महसूस करो।" फिर ललिता ने ह्म्म कहा। करण ने अपने हाथों से अपनी ब्रा का हुक खोला और पैंटी नीचे खिसका दी।
जब वह पूरी तरह निर्वस्त्र हुई, तो कमरे की फिजा ही बदल गई। करण ने अपनी पैंट की जिप खोली और अपना अंडरवियर उतारा। जब उसका 10 इंच का फौलादी लंड बाहर निकला, तो मेरी सांसें गले में अटक गईं।
वह इतना लंबा और मोटा था कि उसे देखकर किसी भी औरत की चूत पानी छोड़ दे। ललिता ने अपनी आंखें थोड़ी सी खोलीं और जब उसकी नजर उस विशाल लंड पर पड़ी, तो उसके हलक से एक चीख निकलने वाली थी, जिसे उसने अपनी उंगलियों को दांतों तले दबाकर रोक लिया।
करण ने ललिता की नंगी जिस्म पर अपना भारी जिस्म झुका दिया और अब असली खेल शुरू होने वाला था।
वह पूरी तरह निर्वस्त्र बिस्तर पर लेटी थी—दूध जैसी सफेद त्वचा, 34 के उभरे हुए टाइट दूध बोबे और उनकी गहरी दरार। करण, जो अब खुद नंगा खड़ा था, अपने 10 इंच के काले फौलादी लंड को लहराते हुए उसके करीब आया।
उसका लंड किसी मूसल की तरह सख्त और नसदार था। मैंने बहाना बनाया और बाहर जाने का नाटक किया और कहा बेबी में कुछ स्नैक्स लेकर आता हूं, लेकिन मैं वहीं के वहीं पर्दे के पीछे छिपकर अपनी पत्नी की तबाही देखने लगा।
करण ने जैस्मिन ऑयल की बोतल उठाई और ललिता की पीठ पर तेल की धार छोड़ दी। उसके हाथ ललिता की चौड़ी और मांसल गांड पर रेंगने लगे।
ललिता ने अपनी आँखें बंद कर रखी थीं, लेकिन जब करण की मजबूत उंगलियां उसकी गांड के छेद को सहलाने लगीं, करण की उंगलियों की उसकी चूत में भी जा रही थी वह आहें भर रही थी तो वह कांप उठी।
फिर करण ने अचानक उसे झटके से पलटा और उसके दोनों पैरों को हवा में उठाकर चौड़ा कर दिया। अब ललिता की गुलाबी और रसीली चूत पूरी तरह करण के सामने खुली थी।
करण ने अपना 10 इंच का मोटा लंड हाथ में पकड़ा और उसका सुपाड़ा (टोपा) ललिता की चूत के मुहाने पर रगड़ना शुरू किया। ललिता थर-थर कांप रही थी। अचानक करण ने कमर को एक जोरदार झटका दिया और आधा लंड एक ही बार में उसके भीतर उतार दिया।
ललिता की चीख पूरे कमरे में गूँज उठी, "आह्ह्ह! नहीं... अंशुल... ये क्या हो रहा है... इसे रोको! मेरी फट गई... बचा लो मुझे... मर जाऊंगी!" वह दर्द -से बिलबिला रही थी क्योंकि उसका भोसड़ा इतने बड़े लंड के लिए तैयार नहीं था।
लेकिन करण पर जैसे कोई जुनून सवार था। उसने ललिता के दोनों हाथों को उसके सिर के ऊपर दबा दिया और पागलों की तरह धक्के मारने लगा। हर धक्के के साथ पूरा 10 इंच का लंड उसकी गहराइयों को नाप रहा था।
ललिता बिस्तर पर मछली की तरह तड़प रही थी, "अंशुल... बचा लो... आह्ह्ह... ये फाड़ देगा मुझे... बचा लो!"
करण ने करीब 20 मिनट तक उसे सीधा लिटाकर ठोका। हर बार जब वह अपना पूरा लंड बाहर निकालता और फिर झटके से अंदर डालता, तो ललिता की चूत से 'चप-चप' की आवाज आती।
वह दर्द में चिल्ला रही थी, लेकिन धीरे-धीरे उस बड़े लंड की रगड़ ने उसकी सिसकियों को कामुक आहों में बदल दिया।
फिर करण ने उसे घुटनों के बल किया और पीछे से उसकी गांड को पकड़कर डॉगस्टाइल में ठोकना शुरू किया। पीछे से जब उसका मोटा लंड ललिता के कूल्हों से टकराता, तो गपा-गप की आवाज गूँजती।
ललिता की पतली कमर करण के हाथों में पूरी तरह भींची हुई थी। वह अब चिल्ला रही थी, "हाँ... और जोर से... फाड़ दो मेरा भोसड़ा... आह्ह्ह!"
अब मुझमें और सब्र नहीं था। मैं पर्दे के पीछे से निकला और ललिता के पास गया। वह मुझे देखकर रोने लगी, "देखो अंशुल... ये क्या कर रहा है..." लेकिन मैंने उसे चूमना शुरू किया और उसके स्तनों को सहलाने लगा। मैंने उसके कानों में कहा, "बेबी, एन्जॉय करो, ये तुम्हारे लिए ही है।"
फिर करण झड़ गया उसकी चूत से करण वीर्य टपक रहा था। उसके बाद पांच मिनट मैंने ललिता को सहलाया फिर करण ने लंड साफ किया और मैंने गीले कपड़े से ललिता की चूत साफ की।
उसके बाद करण ने ललिता को 69 में लिया उसको लंड चूसने को बोला और करण उसकी चूत चाट रहा था। उसके बाद दोनो फिर से चुदाई के लिए तैयार थे इस बार मैंने भी उसके मुंह में लंड डाला हुआ था।
करण ने उस दोपहर ललिता को 5 बार चरम सुख तक पहुँचाया। उसकी चूत से पानी बहकर चादर भिगो चुका था।
अंत में, करण ने एक आखिरी जोरदार झटका मारा और अपना 10 इंच का लंड ललिता की चूत की गहराई में फंसाकर अपना सारा गरम वीर्य उसके भीतर और उसके पेट पर छोड़ दिया।
ललिता बिस्तर पर बेसुध पड़ी थी, करण का वीर्य उसकी जांघों पर धीरे-धीरे सूख रहा था। लेकिन यह तो बस शुरुआत थी। मेरी आंखों के सामने मेरी पत्नी को एक अजनबी ने जिस बेरहमी से रौंदा था, उसने मेरे भीतर के सोए हुए जानवर को जगा दिया था।
मैंने अपनी शर्ट उतारी और ललिता के चेहरे को सहलाते हुए कहा, "बेबी, अब मेरी बारी है।"
आगे की कहानी : "पार्टी में बीवी बनी रंडी, दोस्त ने चोदा सबके सामने!"
💬 Leave a Comment :-
📝 Comments :
No comments yet. Be the first to comment!