चार पतियों का पत्नियों साथ 'स्वैपिंग' का खेल 06

Group Sex Story : कैसे अब चारों दुल्हनों को Swaping करके उसके नए husbands ने अपने लंड से उनकी Chut और गांड फाड़ी! जाने इस Hindi Sex Stories में!


अभी तक आपने पिछले भाग "चार पतियों का पत्नियों साथ 'स्वैपिंग' का खेल 05" में पढ़ा :


रूबी की पैंटी भी पारदर्शी सलवार में झलक रही थीसम्मू ने बिना देर किए रूबी की सलवार को भी उतार कर फेंक दिया और अपने कुर्ते के बटन को खोलने लगे!


रूबी सम्मू को ध्यान से देख रही थी, सम्मू ने अपना ऊपर का कपड़ा उतारा अब सम्मू ने अपने नीचे का कपड़ा भी उतार दिया, नीचे सम्मू अंडर वियर पहने थे फिर सम्मू और रूबी बेड पर लेट गए। 


अब आगे :


सम्मू एक शादी शुदा मर्द थे, बुर चोदने में माहिर, बुर चोदने का तजुर्बा था नई नई स्टाइल में बुर चोदना कोई सम्मू से सीखे  रूबी तो बेचारी फिर नई थी।


पता नही अपने शौहर से कितनी बार चुदी थी, चुदी भी थी या नही  रूबी का पूरा कपड़ा सम्मू ने उतार दिया था और रूबी अब सिर्फ लाल ब्रा और लाल पैंटी में थी , पूरा बदन मेहंदी से सजा हुआ था।


सम्मू रूबी के गर्दन को सहलाने लगे , रूबी सिकुड़ती ही जा रही थी , सिमटती ही जा रही थी , क्या ये सचमुच कहीं रूबी की पहली सुहागरात तो नही थी ?


क्योंकि ये बर्ताव उसका नाटक या एक्टिंग नही थी, रियल थी।


फिर वो इतने बड़े हॉल में 4 गैर मर्दों के सामने थी, और उसको छोड़ कर 3 गैर औरते भी थी जिनको आज वो पहली बार देख रही थी , फर्स्ट टाइम था ये उसका की सबके सामने अपनी बुर चुदाने जा रही थी


शर्म तो आती ही , रूबी भी शरमा रही थी , सम्मू जब रूबी की गर्दन सहलाने लगे तो रूबी मुड़ कर बैठ गई, सम्मू की तरफ पीठ कर लिया।


सम्मू रूबी की पूरी नँगी  गोरी पीठ जिस पर सिर्फ ब्रा की पट्टी ही दिख रही थी , उस पर अपने दोनो हाथ रख दिये  और रूबी की गोरी चिकनी पीठ को सहलाने लगे। ये XXX Antarvasna Chudai Ki Kahaniआप Garamkahani.com पर पढ़ रहे हैं!


और अपने होंठो को रूबी की गर्दन के नीचे पीठ पर रख दिया और चूमने लगे, रूबी गनगना उठी। सम्मू रूबी की पूरी नँगी और चिकनी पीठ को सिर्फ चुम रहे थे, और अपने हाथों से सहला रहे थे।


रूबी मस्ती से अपने बदन को ऐंठने लगी थी , सम्मू रूबी की पीठ को कुछ देर तक तो सिर्फ चूमते और सहलाते ही रहे थे।


फिर सम्मू ने अपने हाथों को रूबी की ब्रा से बंद पड़ी छातियों को ब्रा के ऊपर से ही पकड़ा और दबाने लगे , रूबी गनगना रही थी , रूबी का गोरा और चिकना बदन अब गरम हो रहा था।


अब सम्मू ने रूबी को अपनी तरफ बड़े प्यार से घुमाया और रूबी की चूची से बनी दरारों में अपना मुंह रख दिया और अब सम्मू रूबी की पीठ को रूबी के चूची में अपना मुंह रखे सहलाते जा रहे थे।


रूबी का हाथ भी अब सम्मू पर चलने लगा था , रूबी अपने मेहंदी से भरे हाथों से सम्मू का बदन सहलाने लगी।


अब दोनो तरफ आग लग चुकी थी , लेकिन मुझे मालूम था कि ये ज़ालिम मर्द सम्मू अभी ये रूबी की बुर को चोदने वाला नही है।


ये अभी रूबी को बहुत हॉट करेगा ,इतना हॉट करे इतना हॉट करेगा कि अगर रूबी पहले अपने शौहर से चुदी होगी।


तो पक्का है कि रूबी सम्मू के लन्ड को अपने हाथों से पकड़कर ही अपनी बालों से साफ और चिकनी बुर में पेल लेगी।


खुद से ही वैसे रूबी की बुर को देखकर ये तो लग रहा था कि रूबी या तो अपनेशौहर से चुदी नही है या फिर बहुत कम ही चुदी होगी।


रूबी की बुर पर कोई ज़्यादा बाल ही नही थे , ऊपर से जो भी रहे भी होंगे तो वो साफ कर चुकी थी , अब रूबी की बुर एकदम सॉफ्ट, मुलायम , और चिकनी थी। 


सम्मू ने रूबी को फिर लिटाया और बिना उसकी छाती की ब्रा खोले ही उसकी मीडियम साइज चूची पर अपना सीना रखकर रगड़ने लगे , बल्कि यूं कि अपने सीने से ही रूबी की चुचियों को मसलने लगे। 


आहह,,,,,, ससस्सी,,,,,,,,,


रूबी की आवाज़ निकलने लगी, रूबी अब अपने हाथों को सम्मू की पीठ पर सहला रही थी , और उसका हाथ हिलने से हॉल में चूड़ियों की खनखनाहट गूंजने लगी।


सम्मू ने भी उसकी कलाई से चूड़ियों को नही उतारा था जिससे हर बार रूबी के हाथ उठाने या हिलाने से उसकी चूड़ियां बजने लगती थी।


गोर गोर बदन पर लाल लाल चूड़ियां , और साथ ही लाल ब्रा , लाल चड्डी रूबी गज़ब ढा रही थी , मुझे भी गुस्सा आ रहा था, और साथ मे जलन भी हो रही थी की सम्मू को रूबी ही क्यों मिली।


कोई और सम्मू कि दुल्हन बनती तो शायद मुझे गुस्सा या जलन नही होती, लेकिन पता नही क्यों मुझे गुस्सा और जलन दोनो ही हो रही थी।


अगर रूबी की जगह , विद्या , या सिमरन सम्मू की दुल्हन बनती तो शायद मुझे जलन नही होती  लेकिन अभी रूबी को सम्मू की दुल्हन बने देखकर और सम्मू को नई नवेली दुल्हन से सुहागरात मनाते देखकर मुझे जलन तो हो रही थी।


अब सम्मू ने रूबी की ब्रा खोले बिना ही रूबी की एक चूची को बाहर निकाला, जिससे रूबी की एक चूची ब्रा से आधी अधूरी बंद थी और दूसरी चूची ब्रा के बाहर आधी अधूरी नँगी थी जिसकी खूबसूरती को सम्मू निहार रहे थे।


सच मे रूबी की चूची भी बड़ी मस्त थी , न तो चूची में कहीं कोई लटकन , न तो चूची में कहीं कोई ढीलापन , चूची जैसे ब्रा में कैद थी तब थी वैसे ही एक चूची ब्रा से बाहर होने के बाद भी दिख रही थी।


चूची पर उभरा हुआ पिंक कलर का मटर से भी छोटे निप्पल चूची की खूबसूरती को बढ़ा रहे थे। ये Group Sex Wife Swaping Sex Story आप Garamkahani.com पर पढ़ रहे हैं 


सम्मू ने बेकाबू होकर रूबी की चूची को अपने हाथों में भर लिया और बेतहाशा उसको चूमने लगे , रूबी की चूची को दबाने लगे , रूबी की चूची सम्मू के हाथों में समाई हुई थी।


सम्मू थोड़ा ऊपर खिसके और रूबी के छोटे से मटर से भी छोटे निप्पल को अपने दांतों से दबा लिया, उफ्फ , क्या नज़ारा था मेरी इस वक़्त की सौतन का।


जैसे ही सम्मू का दांत रूबी के निप्पल पर पड़ा उफफोह रूबी अंगड़ाने लगी और अपने हाथ पांव फैला दिए , अब रूबी अपनी दोनो टांग सीधी कर ली थी , जो कि हल्की सी एक दूसरे से दूर थी।


और रूबी ने अपने दोनो हाथों को सर से ऊपर कर लिया था।


वाह ,,,, बड़ा खूबसूरत नजारा था मेरी इस वक़्त की खूबसूरत सौतन का पारदर्शी चड्डी से रूबी की बुर की दरार झांक रही थी , जैसा कि मैंने पहले ही बताया है , की पैंटी में सिर्फ आगे से एक डोर लगी थी।


वो डोर बुर की फांकों में ही घुसी रहती थी, और वहीं फांकों के पास एक फूल बनाकर लगाया गया था , जो कि बुर को ढंकने की नाकाम कोशिश थी।


उसी डोर से आगे जाकर दो पारदर्शी कपड़े लगे थे जो कि अलग अलग थे और दोनो चूतड़ों को संभालने के लिए थे।


और रूबी की सीने पर निकली हुई खूबसूरत चूची भी एक ब्रा से बंद थी और दूसरी चूची खुली थी जिसको सम्मू अपने हाथों से दबा रहे थे।


और रूबी अपने हाथ पांव फैलाकर अब सम्मू के द्वारा फैलाये हुए सेक्स का मज़ा ले रही थी। रूबी की आंखे मस्ती से बंद थी , उसके बाल कुछ उसके चेहरे को बंद किये थे, कुछ बेड पर बिखरे हुए थे।


सच मे इतना जबरदस्त गद्दा , और उसके अंदर धंसी हुई रूबी और रूबी के अधखुले बदन,जैसे बेड पर कोई बहुत ही खूबसूरत डिज़ाइन बनी थी।


ये तो पक्का था कि रूबी की चूची की आज रात इतनी दबाई होनी थी , इतनी मिंजाई होनी थी , इतनी उसकी चूची मसली जानी थी कि अगले दो चार दिनों के बाद उसकी ब्रा का साइज बढ़ना ही बढ़ना था।


ये भी क्लिअर था कि आज रात को सबसे ज़्यादा उसकी बुर पर ही लन्ड का अटैक होने वाला था, क्योंकि हर मर्द कुंवारी या नई लड़की या गर्लफ्रेंड, की बुर को चोदना चाहता है।


और रूबी आज इन चार मगरमच्छों के बीच का कुंवारी शिकार थी, जिसको आज ये खूब नोच नोचकर चोदने वाले थे रूबी की बुर भी अगले कुछ दिनों के लिए डॉक्टर के पास ही जानी थी इलाज के लिए।


आप लोग खुद सोचो जब चार मर्द होंगे और वो चारो मर्द क्या पता रूबी को कैसे चोदे गैंगबैंग करे या अलग अलग चोद कर बाद में गैंगबैंग करे।


लेकिन पक्का था कि रूबी की बुर नही , चूत भी नही सिर्फ और सिर्फ रूबी की बुर का भोसड़ा बनना था इसके अलावा कुछ नही। अगले कई दिनों तक रूबी को अपनी बुर का इलाज ही कराना था। आप ये Desi Antarvasna Group Suhagrat Sex Story Garamkahani.com पर पढ़ रहे हैं!


सम्मू के बाद अभी रूबी की बुर को चोदने के लिए तीन महापुरुष और थे विवेक , सुक्खू, नकी और उसके बाद में कोई दोबारा चोदेगा कोई तीसरी बार और फिर गैंगबैंग भी मतलब अब रूबी को कई हफ़्तों का बेड रेस्ट तय था।


जब चार चार लन्ड रूबी की बुर चोदेंगे तो क्या होगा इसका अंदाज़ा पाठक खुद लगाएं सम्मू रूबी के चेहरे के पास अपना चेहरा ले गए , लेकिन चूची दबाना नही छोड़े और रूबी के होंठो को अपने होंठो से काटने लगे।


अब रूबी की चूची भी दब रही थी और रूबी के होंठ भी चूसे जा रहे थे।


रूबी मस्ती से सम्मू के बदन को सहलाने लगी फिर सम्मू ने ब्रा में कैद दूसरी चूची को अधूरा आज़ाद किया बिना ब्रा खोले रूबी की दूसरी चूची को भी बाहर खींच लिया।


अब रूबी के सीने पर निकली दो हसीन चुचियाँ और चुचियों क ऊपर खाली पड़ी बंद लाल ब्रा रूबी को और खूबसूरत कर रही थी सम्मू ने रूबी की दोनो चूची को हाथों से जकड़कर खूब ज़ोर ज़ोर से दबाने लगे।


जैसे रूबी की चूची का सारा रस आज हीं निकाल लेना चाहते हों रूबी की चुचियाँ लाल गुलाबी हो रही थी निप्पल कठोर होकर तन गए थे।


लेकिन सम्मू कभी चूची को दबाते और कभी दो उंगलियों के बीच मे रूबी की चूची के गुलाबी निप्पल को दबा लेते थे।


रूबी अब करवट पर करवट बदल रही थी मस्ती से फिर सम्मू ने रूबी का ब्रा खोल कर निकाल ही दिया , और चुचियों को पूरी तरह से आज़ाद कर दिया।


रूबी की चूची देखने लायक थी , रूबी लेती हुई थी तब भी उसकी कड़क चुचियाँ कहीं इधर उधर ढुलकी नही थी।


क्या होता है जब चूची की दबाई ज़्यादा होती है! या चूची बहुत ही मुलायम हो जाती है!


या चुचियाँ जब बहुत बड़ी होती है तो अक्सर बल्कि ज़्यादातर औरतो की चूची ब्रा से आज़ाद होते ही नीचे लटक जाती है , और अगर औरत लेटी हुई है तो उसकी दोनो चुचियाँ दांये बांये लुढ़क जाती है!


लेकिन रूबी की चूची ब्रा से आज़ाद होने के बाद भी सीधी तनी हुई थी।


मतलब साफ था , रूबी पर अभी ज़्यादा काम नही हुआ था न तो बुर को ही ज़्यादा चोदा गया था , और न ही तो , चुचियों की मिंजाई हुई थी।


इसीलिए रूबी की चुचियाँ अपनी अपनी जगह से हिली तक नही सम्मू ने रूबी को उठाकर बैठाया , सच मे क्या बताऊँ।


अभी भी रूबी की चुचियाँ जैसे लेटने पर तनी थी वैसे ही उठने पर भी तनी ही थी, कोई भी चूची इधर से उधर , या नीचे नही लटकी थी।


जब मैं रूबी के बदन और उसकी चूची से इतनी प्रभावित थी तो मर्दो का क्या होगा पता नही, सम्मू ने रूबी की बुर में फंसी हुई चड्डी को निकाला तो रूबी के चुतड़ भी आज़ाद हो गए।


और रूबी अब एकदम नँगी हो चुकी थी उसकी तनी हुई चुचियाँ , चुचियों पर छोटे छोटे मटर के दाने से भी छोटे लाल गुलाबी निप्पल, और उसकी गोर गोर बदन पर सजी हुई चूची।


गोरी गोरी जांघ , और उन जांघो के बीच मे थी चूत रानी, रूबी के बुर की दोनो फांक एकदम सटी हुईथी , सिर्फ रूबी के बुर की दरार ही दिख रही थी।


सम्मू ने जो रूबी को खड़ा करके नीचे से चूमना शुरू किया तो रूबी को ऊपर तक चूमते चले गए , रूबी अब सम्मू को बाँहों में कसकर पकड़ ली थी 


सम्मू ने भी अब अपनी अंडर वियर को उतार कर फेंक दिया और फंफनाते हुए लन्ड को आज़ाद कर दिया , रूबी का उद्धार करने के लिए रूबी और सम्मू एक दूसरे से नँगे लिपटे हुए थे।


सम्मू ने रूबी का हाथ पकड़ कर अपने लन्ड को उसे थमा दिया  रूबी लन्ड को पकड़ते ही चौंक गई!


आगे की कहानी जल्द ही गरम कहानी डॉट कॉम पर!


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