गर्लफ्रेंड की शादीशुदा सहेली - अफ़सा! 03
XXX Sex Story : अफ़सा की गीली चुत चटकार-चोदी! फिर उसकी टाइट गांड में मोटा लंड घुसाकर हुई ताबड़तोड़ चुदाई! गांड में भर दिया पूरा वीर्य! फिर रात भर हुई चुदाई!
अभी तक "गर्लफ्रेंड की शादीशुदा सहेली - अफ़सा! 02" में आपने पढ़ा :-
मैंने दोनों हाथों से उसकी जाँघें चौड़ी कीं और अपनी जीभ उसकी चूत पर फेर दी।
अफ़सा ने जोर से आह भरी, “आह्ह्ह्ह… हाँ… चाटो… जोर से चाटो गौरव…” मैंने उसकी चूत के दोनों होंठों को चूसा। फिर जीभ अंदर घुसा दी। उसका स्वाद हल्का खट्टा और गरम था। वो मेरे सिर को अपनी चूत पर और जोर से दबाने लगी।
“आह्ह… वहाँ… ऊपर वाली जगह… हाँ उसी को चाटो… आह्ह्ह… मत रोको…”
अब आगे :-
मैं उसकी चूत चाटते हुए दो उंगलियाँ अंदर डाल दीं। गीली सुरंग में उंगलियाँ आसानी से फिसल गईं। मैंने अंदर-बाहर करना शुरू किया। साथ में क्लिटोरिस को जीभ से दबाने लगा। अफ़सा की टाँगें काँप रही थीं।
वो दीवार का सहारा लिए हुए जोर-जोर से कराह रही थी, “आह्ह… आह्ह… गौरव… उंगलियाँ और तेज़… हाँ… ऐसे ही… मैं गीली हो रही हूँ… और…”
थोड़ी देर बाद उसने मेरे बाल पकड़कर मुझे ऊपर खींचा। उसके चेहरे पर पसीना चमक रहा था। आँखें लाल थीं। वो बोली, “अब और नहीं सह सकती। लंड अंदर डालो। अभी।”
मैंने उसे पलटा और दीवार से सटा दिया। उसका बदन मेरे सामने था। मैंने अपना लंड उसकी चूत के मुँह पर लगाया। गर्म और गीला छूते ही मेरे लंड से एक बूंद पानी निकल गया।
मैंने धीरे से धक्का दिया। सिर्फ अगला हिस्सा अंदर गया। अफ़सा ने जोर से साँस ली, “आह्ह्ह… मोटा है… धीरे… और अंदर…”
मैंने दूसरा धक्का मारा। आधा लंड उसकी चूत में समा गया। उसकी दीवारें कस रही थीं। मैंने उसकी कमर पकड़ी और धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर धकेल दिया। एक ही बार में उसकी चूत मेरे लंड से पूरी भर गई।
अफ़सा ने जोर से चिल्लाया, “आह्ह्ह्ह… पूरा चला गया… कितना गहरा… आह्ह गौरव…”
मैं कुछ पल रुक गया। दोनों साँस ले रहे थे। उसकी चूत मेरे लंड को धड़कते हुए कस रही थी। फिर मैंने धीरे-धीरे बाहर खींचा और फिर अंदर धकेला। हर धक्के के साथ अफ़सा की कराहें तेज़ होती गईं।
“आह्ह… आह्ह… हाँ… ऐसे ही… और जोर से… मेरी चूत चोदो गौरव…”
मैंने रफ्तार बढ़ा दी। उसके स्तन दीवार से टकरा रहे थे। मैंने दोनों हाथों से उसके स्तन पकड़ रखे थे और पीछे से जोर-जोर से धक्के मार रहा था। थप-थप की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी।
अफ़सा अपनी गांड पीछे की तरफ धकेल रही थी ताकि लंड और गहरा जाए। वो बार-बार बोल रही थी, “आह्ह्ह… चोदो… जोर से चोदो… मेरी चूत फाड़ दो… आह्ह… कितना मोटा लंड है तुम्हारा…”
मैंने उसकी गर्दन पकड़कर और तेज़ कर दी। हर धक्के के साथ उसका पूरा बदन हिल रहा था। उसकी चूत से पानी निकल-निकलकर मेरी जाँघों पर गिर रहा था। कमरा कराहों और मांस की आवाज़ से भर गया था।
अफ़सा अब लगभग चिल्ला रही थी, “आह्ह्ह… गौरव… मैं आने वाली हूँ… मत रुकना… और तेज़… आह्ह्ह्ह…”
मैंने उसकी कमर और कसकर पकड़ी और ताबड़तोड़ धक्के मारने लगा। उसकी चूत मेरे लंड पर बार-बार सिकुड़ रही थी। अचानक उसकी पूरी बॉडी तन गई।
उसने जोर से चिल्लाया, “आह्ह्ह्ह्ह… आ गया… आ गया गौरव… मेरी चूत…” उसके शरीर में झटके आने लगे। उसकी चूत मेरे लंड को जोर-जोर से निचोड़ रही थी।
मैंने उसी रफ्तार में चुदाई जारी रखी। उसका पानी मेरे लंड पर और जाँघों पर बह रहा था।
जब उसके झटके थोड़े कम हुए तो उसने पीछे मुड़कर कहा, “अब रुको मत। आज मेरी गांड भी लेनी है। मैं तुम्हारे मोटे लंड से अपनी गांड खुलवाना चाहती हूँ।”
मैंने लंड उसकी चूत से निकाला। उसकी चूत अभी भी खुली और गीली चमक रही थी। उसने खुद झुककर दोनों हाथ दीवार पर रख दिए और अपनी गांड पीछे की तरफ कर दी। उसकी गांड गोल और कसी हुई थी। बीच में बंद मुँह साफ दिख रहा था।
मैंने लंड पर उसकी चूत का पानी लगा लिया और गांड के छेद पर लगा दिया।
धीरे से धक्का दिया। सिर्फ नोक अंदर गई। अफ़सा ने जोर से दाँत भींच लिए, “आह्ह्ह… टाइट है… धीरे… और अंदर डालो…”
मैंने थोड़ा और दबाव दिया। लंड चार इंच तक घुस गया। उसकी गांड बहुत कस रही थी। अफ़सा कराह उठी, “आह्ह्ह… जलन हो रही है… लेकिन मत निकालो… पूरा डालो गौरव… अपनी अफ़सा की गांड में पूरा लंड घुसा दो…”
मैंने उसकी कमर पकड़ी और धीरे-धीरे और अंदर धकेलने लगा। उसकी गांड मेरे लंड को जैसे निगल रही थी। जब आधा लंड अंदर गया तो अफ़सा ने जोर से चिल्लाया, “आह्ह्ह्ह… आ गया… आधा आ गया… और… पूरा करो…”
मैंने एक लंबा धक्का मारा। मेरा पूरा लंड उसकी गांड में समा गया। अफ़सा की आवाज़ निकल गई, “आह्ह्ह्ह्ह… पूरा चला गया… गांड फट गई… आह्ह गौरव…”
मैं अंदर तक धंसा हुआ था। उसकी गांड मेरे लंड को इतनी जोर से कस रही थी कि मैं थोड़ी देर हिल भी नहीं पाया। दोनों की साँसें उखड़ी हुई थीं। फिर मैंने धीरे से बाहर खींचा और वापस अंदर धकेला। अफ़सा की कराहें फिर से शुरू हो गईं।
मेरा पूरा लंड अफ़सा की गांड में समा चुका था। उसकी दीवारें इतनी कस रही थीं कि मैं थोड़ी देर तक हिल भी नहीं पा रहा था। दोनों की साँसें तेज़ चल रही थीं। अफ़सा के हाथ दीवार पर सख्त पकड़े हुए थे और उसका सिर नीचे झुका था।
उसके बाल उसके चेहरे पर बिखरे हुए थे। मैंने उसकी कमर दोनों हाथों से पकड़ी और धीरे से बाहर खींचना शुरू किया। लंड उसकी गांड से निकलते हुए चमक रहा था। फिर मैंने वापस अंदर धकेला।
अफ़सा ने जोर से कराह भरी, “आह्ह्ह… हाँ… ऐसे ही… धीरे-धीरे पूरा अंदर लो… मेरी गांड तुम्हारे लंड से भर गई है गौरव…”
मैंने रफ्तार थोड़ी बढ़ाई। हर धक्के के साथ उसकी गांड मेरे लंड को निगल रही थी और छोड़ रही थी। थप-थप की आवाज़ अब साफ सुनाई दे रही थी। अफ़सा की कराहें भी तेज़ हो गई थीं।
“आह्ह्ह… आह्ह… गांड में कितना गहरा जा रहा है… जोर से चोदो… मेरी गांड चोदो गौरव… आह्ह्ह…”
मैंने उसकी कमर और कसकर पकड़ ली। अब धक्के और लंबे और जोरदार हो गए थे। हर बार जब लंड पूरा अंदर जाता तो अफ़सा की गांड मेरे पेट से टकराती और वो जोर से चिल्ला पड़ती।
“आह्ह्ह्ह… पूरा… पूरा अंदर… फाड़ दो मेरी गांड… मत छोड़ो… आह्ह…” उसके स्तन दीवार से रगड़ खा रहे थे। मैंने एक हाथ आगे बढ़ाकर उसका एक स्तन पकड़ लिया और निप्पल को उंगलियों के बीच मसलने लगा।
अफ़सा की आवाज़ और भी ऊँची हो गई, “आह्ह्ह… स्तन भी मसलो… और जोर से… गांड और चूत दोनों जल रही हैं… कितना मोटा लंड है तुम्हारा…”
मैंने उसकी गर्दन पीछे से पकड़ी और और तेज़ धक्के मारने लगा। उसकी गांड अब पूरी तरह खुल चुकी थी। पहले जो टाइटपन था वो थोड़ा कम हो गया था लेकिन फिर भी वो मेरे लंड को जोर से कस रही थी।
हर धक्के के साथ उसकी गांड से हल्की सी आवाज़ आ रही थी और कभी-कभी उसकी चूत से पानी की बूँदें नीचे टपक रही थीं। अफ़सा अब लगभग रोते हुए कराह रही थी
“आह्ह्ह… गौरव… बहुत जोर से… लेकिन मत रुकना… आज मेरी गांड पूरी तरह खोल दो… आह्ह्ह… बहनचोद कितना गहरा चोद रहा है…”
मैंने उसे दीवार से हटाया और बिस्तर की तरफ धकेल दिया। वो चारों हाथ-पैरों पर झुक गई। मैंने पीछे से फिर से अपना लंड उसकी गांड में धंसा दिया। इस बार एक ही धक्के में पूरा अंदर चला गया।
अफ़सा ने तकिया मुँह में दबा लिया और जोर से चिल्लायी, “आह्ह्ह्ह्ह… आ गया… पूरा आ गया फिर से… चोदो… ताबड़तोड़ चोदो मेरी गांड…”
मैंने उसकी दोनों कुल्हें पकड़ लीं और तेजी से धक्के लगाने शुरू कर दिए। बिस्तर चरमरा रहा था। अफ़सा की गांड मेरे हर धक्के के साथ हिल रही थी। वो तकिया छोड़कर बोलने लगी,
“आह्ह… आह्ह… गौरव… और तेज़… मेरी गांड फाड़ रहे हो… कितना अच्छा लग रहा है… आह्ह्ह… हाथ से मेरी चूत भी सहलाओ…”
मैंने एक हाथ उसकी चूत पर ले जाकर दो उंगलियाँ अंदर डाल दीं। उसकी चूत अभी भी गीली और गरम थी। मैं उंगलियों से उसकी चूत चोद रहा था और लंड से उसकी गांड। अफ़सा पागल हो रही थी।
उसका पूरा शरीर काँप रहा था। “आह्ह्ह्ह… दोनों जगह… चूत और गांड एक साथ… मैं मर जाऊँगी… आह्ह… और जोर से… उंगलियाँ भी तेज़… लंड भी तेज़… आह्ह्ह गौरव…”
मैंने रफ्तार और बढ़ा दी। पसीना मेरे माथे से बह रहा था और उसकी पीठ पर गिर रहा था। कमरे में सिर्फ मांस की आवाज़, बिस्तर की आवाज़ और अफ़सा की ऊँची कराहें गूँज रही थीं।
अचानक अफ़सा की बॉडी तन गई। उसने जोर से चिल्लाया, “आह्ह्ह्ह्ह… आ गया… गांड से आ गया… चूत से भी… मत निकालना… अंदर ही छोड़ो… आह्ह्ह्ह…”
उसके शरीर में जोरदार झटके आने लगे। उसकी गांड मेरे लंड को बार-बार निचोड़ रही थी। मैंने उसी दौरान और तेज़ धक्के मारे। मेरा भी नियंत्रण खोने वाला था।
कुछ ही पल बाद मैंने जोर से धक्का मारा और अपना पूरा वीर्य उसकी गांड के अंदर छोड़ दिया। गरम वीर्य की धार उसके अंदर फूट रही थी। मैं कराह उठा, “आह्ह्ह अफ़सा… ले… पूरी गांड में ले जा… आह्ह…”
अफ़सा अभी भी काँप रही थी। मैंने लंड अंदर रखे हुए ही उसके ऊपर झुक गया। दोनों की साँसें उखड़ी हुई थीं। थोड़ी देर बाद मैंने धीरे से लंड बाहर निकाला।
उसकी गांड का छेद थोड़ा खुला हुआ था और उसमें से मेरा सफेद वीर्य धीरे-धीरे बाहर बह रहा था। अफ़सा ने पीछे मुड़कर देखा और मुस्कुराई। उसकी आवाज़ अभी भी काँप रही थी,
“देखो… कितना निकाल दिया अंदर। मेरी गांड पूरी भर गई है तुम्हारे पानी से।”
मैं बिस्तर पर लेट गया। अफ़सा मेरे ऊपर चढ़ आई। उसने मेरा लंड हाथ में लिया जो अभी भी आधा सख्त था।
वो बोली, “अभी थका नहीं ना? थोड़ी देर में फिर खड़ा हो जाएगा। तब मेरी चूत फिर से चोदना। आज रात भर चोदना है मुझे।”
उसने अपना सिर नीचे किया और मेरे लंड को मुँह में ले लिया। इस बार चूसते हुए वो मेरे वीर्य का स्वाद ले रही थी जो गांड से लगा हुआ था।
“हम्म… अपना ही स्वाद… गंदा लग रहा है लेकिन पसंद आ रहा है…” वो लंड को साफ करते हुए चूस रही थी। धीरे-धीरे मेरा लंड फिर से तनने लगा।
अफ़सा ने महसूस किया तो आँखें उठाकर मुस्कुराई, “देखो… फिर से तैयार हो गया। अब मैं ऊपर बैठूँगी।”
उसने मेरे लंड को सीधा पकड़ा और अपनी चूत के मुँह पर लाकर धीरे से बैठ गई। इस बार चूत आसानी से खुल गई क्योंकि वो पहले से ही भीगी हुई थी। पूरा लंड उसकी चूत में समा गया।
अफ़सा ने जोर से आह भरी, “आह्ह्ह… फिर से भर गई… अब मैं खुद उछलूँगी…”
वो मेरे ऊपर बैठकर ऊपर-नीचे होने लगी। उसकी गांड मेरे जाँघों से टकरा रही थी। स्तन मेरे चेहरे के सामने झूल रहे थे। मैंने दोनों स्तन पकड़ लिए और निप्पल्स चूसने लगा। अफ़सा और तेज़ी से उछलने लगी।
“आह्ह… आह्ह… चोदो… खुद चोद रही हूँ तुम्हारे लंड को… कितना गहरा जा रहा है… आह्ह्ह गौरव… मेरी चूत फिर से आने वाली है…”
मैंने उसकी कमर पकड़कर नीचे से भी धक्के मारने शुरू कर दिए। दोनों की रफ्तार मिल गई। बिस्तर जोर-जोर से चरमरा रहा था। अफ़सा की कराहें फिर से कमरे में गूँजने लगीं।
“आह्ह्ह… हाँ… ऐसे ही… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो फिर से… आह्ह्ह…”
थोड़ी देर की जोरदार चुदाई के बाद अफ़सा फिर से काँप उठी। उसने मेरे सीने पर नाखून गड़ा दिए और चिल्लायी, “आह्ह्ह्ह… आ गया फिर… चूत से पानी निकल रहा है…”
उसके साथ मैंने भी दूसरी बार अपना वीर्य उसकी चूत के अंदर छोड़ दिया। दोनों एक-दूसरे से चिपके हुए पड़े रहे। पसीने से लथपथ शरीर। कमरे में सेक्स की गंध फैल चुकी थी।
अफ़सा ने मेरे सीने पर सिर रखकर धीरे से कहा, “आज के बाद तुम कभी भूल नहीं पाओगे मुझे। और मैं भी नहीं भूलूँगी। रिया को पता नहीं चलना चाहिए। लेकिन जब भी गाँव आओगे, मेरा दरवाज़ा तुम्हारे लिए खुला रहेगा।”
मैंने उसके बाल सहलाते हुए जवाब दिया, “आऊँगा। बार-बार आऊँगा।”
उस रात हमने दो बार और चुदाई की। एक बार फिर से गांड में और आखिरी बार चूत में ही। सुबह होने से पहले मैंने कपड़े पहने। अफ़सा नंगी बिस्तर पर लेटी हुई थी।
उसकी चूत और गांड दोनों से वीर्य बह रहा था। फर्श पर भी कुछ धब्बे पड़ चुके थे। उसने मुझे जाते हुए देखा और मुस्कुराई, “जाओ। लेकिन जल्दी वापस आना।”
मैंने दरवाज़ा बंद किया और घर की तरफ चल दिया। शरीर में थकान थी लेकिन मन में एक अजीब सी संतुष्टि।
अगले छह महीनों तक जब भी मौका मिला मैं अफ़सा के घर जाता रहा। कभी दोपहर में, कभी रात को। रिया को कुछ पता नहीं चला। अफ़सा और रिया दोनों को मैं अलग-अलग समय पर चोदता रहा।
अफ़सा हर बार और भी गंदी और भूखी हो जाती थी। कभी वो खुद मुझे बुलाने लगती। कभी मेरे लंड को मुँह में लेकर घंटों चूसती। कभी अपनी गांड में लंड डालकर खुद उछलती।
उसकी और मेरी कहानी कुछ ऐसी रही। कॉलेज की अधूरी आग गाँव आकर पूरी तरह भड़क उठी और महीनों तक जलती रही। तो दोस्तों कैसे लगी यह Hindi Sex Kahani कॉमेंट करके जरूर बताए!
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