जल्दी डाल दो, मर जाऊंगी! - राशि की कामवासना
Hindi Sex Kahani : पड़ोस की बचपन वाली सहेली राशि की चूत चोदी! ब्लैक ब्रा उतारकर चूसें चुचे, तिल वाली चूत चाटी फिर वीर्य से भर दी चुत! शावर में हुई Wild Chudai!
मेरा नाम रितेश अग्रवाल है। मैं छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले का रहने वाला हूं। ये कहानी मेरी और मेरी बचपन की सहेली राशि की है। (नाम बदला हुआ)। उस समय मेरी उम्र 19 साल थी।
राशि मेरे घर के ठीक बगल में रहती थी। हम दोनों की उम्र लगभग बराबर थी। बचपन से ही हम दोनों अटूट दोस्त थे। सुबह उठते ही सबसे पहले उसका घर देखता था। वो आंगन में खेल रही होती तो मैं तुरंत भाग जाता।
हम घंटों साथ खेलते - घर-घर, लुकाछिपी, गिल्ली-डंडा। सबसे मजेदार खेल होता था "मम्मी-पापा"। मैं पापा बनता, वो मम्मी।
वो अपनी गुड़िया को सुलाती, मैं "ऑफिस" से थक कर आता। कभी-कभी वो मुझे "पति" कहकर पुकारती और मैं शरमाता।
उसके माता-पिता मुझे अपना बेटा ही मानते थे। मेरी मम्मी भी राशि को बहुत प्यार करती थीं। हम दोनों का बचपन साथ-साथ बीता।
स्कूल जाते समय साथ, लौटते समय साथ, शाम को छत पर बैठकर आकाश देखते हुए घंटों बातें। वो पढ़ाई में बहुत तेज थी, मैं औसत। लेकिन वो मुझे हमेशा help करती।
"रितेश, ये math का सवाल ऐसे करते हैं," कहकर मेरे कान के पास झुककर समझाती तो उसकी सांस मेरी गर्दन पर पड़ती और अजीब सा सुकून मिलता।
समय बीतता गया। 12वीं के बाद राशि को CA की तैयारी के लिए रायपुर जाना पड़ा। वो चली गई। पहले 2-3 महीने फोन पर बात होती रही, फिर धीरे-धीरे कम होती गई।
मैं उसे miss करता, लेकिन जिंदगी आगे बढ़ रही थी।
लगभग डेढ़ साल बाद वो वापस आई।
जब मैंने उसे पहली बार देखा तो आंखें फट गईं। वो पहले वाली पतली-सी राशि नहीं थी। जिम की वजह से उसका शरीर बेहद आकर्षक हो गया था। 30-28-32 का फिगर अब और निखर गया था। कसी हुई कमर, भरे हुए स्तन, गोल नितंब।
उसके बाल अब लंबे और wavy हो गए थे। कपड़े भी पूरी तरह बदल गए थे - टाइट जींस जो उसकी जांघों को चिपककर दिखाती, crop tops और body-hugging tops जो उसके स्तनों की आकृति साफ उभारते।
पहले कुछ दिन तो हम सिर्फ नजरों से ही मिले। फिर एक शाम घर के बाहर सामना हो गया।
"रितेश! कितना बदल गया है तू भी," उसने मुस्कुराते हुए कहा। उसकी आवाज में अब एक नई मिठास थी।
हम घंटों बातें करते रहे। पुरानी यादें, रायपुर की जिंदगी, मेरी कॉलेज। फिर उसने मेरा नंबर लिया। "अब रोज बात करेंगे," उसने कहा और आंख मार दी।
उसके बाद हमारा रोज का मिलना शुरू हो गया। कभी शाम को पार्क में घूमने जाते, कभी वो मेरे लिए कुछ नया खाना बनाकर लाती। मेरे कमरे में बैठकर खाते। कभी-कभी वो खुद मेरे मुंह में कौर डाल देती।
उसके उंगलियों के स्पर्श से मेरा शरीर सिहर जाता।
धीरे-धीरे बातें गहरी होने लगीं। वो मुझे अपनी जिम की तस्वीरें दिखाती, "देख, मेरी बॉडी कैसी हो गई है?" कहकर। मैं शरमाकर मुंह फेर लेता, लेकिन नजरें उसकी टाइट टी-शर्ट पर टिक जातीं।
एक दिन वो मेरे कमरे में आई। बाहर बारिश हो रही थी। उसके कपड़े थोड़े गीले हो गए थे। टॉप उसकी छाती से चिपक गया था। ब्रा की आउटलाइन साफ दिख रही थी। मैं उसे घूर रहा था।
"क्या देख रहा है?" उसने शरारत से पूछा।
"कुछ नहीं..." मैं हकलाया।
उसने हंसकर मेरे बिस्तर पर बैठ गई और मेरे कंधे पर सिर टिका दिया। "तुझे मेरा नया look पसंद है?"
"बहुत..." मैंने धीरे से कहा।
उस दिन हम पहली बार इतने करीब बैठे थे। उसकी खुशबू - हल्की पसीने और परफ्यूम की - मुझे पागल कर रही थी।
फिर वो दिन आया।
शाम को उसका फोन आया। उसकी आवाज कांप रही थी।
"रितेश... घर वाले सब बाहर गए हैं। मुझे अकेले बहुत डर लग रहा है। आ जा ना प्लीज..."
मैं बिना सोचे उसके घर पहुंच गया। दरवाजा खुला था। मैं अंदर गया। वो अपने कमरे में थी। हॉलीवुड मूवी चल रही थी - रोमांटिक वाली, जिसमें किसिंग सीन चल रहा था।
"आ गया?" उसने मुस्कुराते हुए कहा। वो शॉर्ट्स और स्लीवलेस टॉप में थी। उसके गोरे पैर चमक रहे थे।
हम बेड पर बैठ गए। बातें शुरू हुईं। फिल्म देखते-देखते वो मेरे करीब सरक आई। अचानक उसने अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया। मेरी सांसें तेज हो गईं।
"रितेश... मुझे बहुत अच्छा लगता है तेरे साथ," उसने फुसफुसाया।
मैंने हिम्मत करके उसके माथे पर हल्का सा किस कर दिया। वो उठी, मेरी आंखों में देखा और धीरे से अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए।
पहला किस।
नरम, गर्म, थोड़ा कांपता हुआ। हम धीरे-धीरे किस करने लगे। उसके होंठ चूसने लगा तो वो हल्की सी "म्म्म..." की आवाज निकाली।
किस गहरा होता गया। 5 मिनट, 7 मिनट... हम दोनों सांस लेना भूल गए थे। मेरे हाथ उसकी पीठ पर घूम रहे थे। उसकी सांसें गरम हो रही थीं।
मैंने हिम्मत करके उसके टॉप के ऊपर से उसके दाहिने स्तन को दबाया। वो सख्त और भरा हुआ था।
"आह्ह्ह..." वो पहली बार सिसकारी।
मैं और जोश में आ गया। दूसरे हाथ से उसकी कमर को अपनी तरफ खींचा। वो मेरी गोद में आ गई। अब हम बैठे-बैठे गहरे किस कर रहे थे। मेरी जीभ उसके मुंह में घुस गई। वो मेरी जीभ चूसने लगी।
"उम्म्म... रितेश..." वो बीच-बीच में नाम ले रही थी।
मैंने उसके टॉप को ऊपर किया। उसने हाथ उठा दिए। ब्लैक लेस वाली ब्रा में उसके गोरे स्तन देखकर मेरा लंड पत्थर हो गया। मैंने ब्रा के ऊपर से ही चूमा। वो मेरे बालों में उंगलियां फेर रही थी।
धीरे-धीरे मैंने ब्रा का हुक खोला। उसके भरे हुए स्तन बाहर आ गए। गुलाबी निप्पल, और पास में वो काला तिल। मैंने तिल को चाटा।
"आआआह्ह्ह... रितेश... वहां मत..." लेकिन उसने मेरा सिर और जोर से दबाया।
मैं एक-एक करके दोनों स्तनों को चूसने लगा। कभी जोर से, कभी निप्पल को दांतों से हल्का काटता। वो तड़प रही थी। "उफ्फ्फ... हां... और चूसो... मजा आ रहा है..."
उसके शॉर्ट्स पर हाथ रखा। वो गीली हो चुकी थी। मैंने शॉर्ट्स उतार दिए। ब्लैक पैंटी में उसकी चूत की आकृति साफ दिख रही थी। पैंटी के बीच में गीला धब्बा।
मैंने पैंटी पर किस किया। वो सिहर गई।
"रितेश... धीरे... मुझे बहुत जलन हो रही है..."
लेकिन मैंने अभी जल्दी नहीं की। उसकी जांघों को चूमता हुआ ऊपर आया। उसके पेट पर किस किया, नाभि में जीभ घुमाई। वो कराह रही थी।
"आह्ह्ह... रितेश... तू मुझे पागल कर देगा..."
मैंने उसकी ब्लैक पैंटी के किनारे पर उंगली फेरी। वो हल्का सा कांपी। "रितेश... मत tease कर... बहुत हो गया..." उसकी आवाज में अब बर्दाश्त नहीं था।
फिर भी मैं रुका नहीं। धीरे-धीरे उसकी पैंटी को नीचे सरकाया। उसकी चिकनी, गोरी चूत सामने थी। पूरी तरह साफ़, सिर्फ़ ऊपर एक छोटा-सा ट्रिम किया हुआ बालों का patch।
और हाँ - ठीक क्लिटोरिस के पास वो छोटा काला तिल, जो उसे और भी sexy बना रहा था।
मैंने झुककर उस तिल को अपनी जीभ से छुआ। "आआआह्ह्ह्ह!!! रितेश... उफ्फ्फ..." राशि जोर से सिसक उठी। उसकी जांघें मेरे सिर के दोनों तरफ कस गईं।
मैंने अपनी जीभ पूरी चूत पर फिराई। वो पहले से ही गीली थी। मीठा-नमकीन स्वाद था। मैं ऊपर से नीचे तक चाटता गया, बीच-बीच में क्लिटोरिस को चूसता। "हां... वहीं... आह्ह्ह... और जोर से चूसो ना... उummmhh..."
उसकी moaning अब कमरे में गूंज रही थी। मैंने एक उंगली धीरे से उसके अंदर डाली। वो बहुत tight थी।
"आह्ह्ह... धीरे... पहली बार है ना मेरे लिए..." उसने शरमाते हुए कहा।
मैंने उंगली को अंदर-बाहर करना शुरू किया, साथ में जीभ भी चला रहा था। राशि अब बेकाबू हो चुकी थी। उसके हाथ मेरे बालों में थे, कभी खींच रही थी, कभी दबा रही थी। "रितेश... मुझे कुछ हो रहा है... आह्ह्ह... नहीं... रुकना मत... faster... yes... उउउह्ह्ह..."
अचानक उसका शरीर अकड़ गया। वो जोर से कांपी और पहली बार झड़ गई। उसके चूत से गर्म पानी मेरी उंगलियों पर बह निकला। वो कराहती रही - "आआआह्ह्ह... मैं मर गई... रितेश तूने मुझे स्वर्ग दिखा दिया..."
मैं ऊपर आया। उसके होंठों पर किस किया। वो अपनी ही चूत का स्वाद मेरे मुंह में चख रही थी। अब उसकी आंखों में शर्म और प्यास दोनों थे।
"अब तेरा लंड देखने का मन कर रहा है..." उसने शरमाते हुए कहा।
मैंने पैंट उतारी। मेरा लंड पहले से ही पूरा खड़ा और नसों वाला था। राशि ने देखा तो उसकी आंखें फैल गईं। "इतना बड़ा... डर लग रहा है..." लेकिन फिर भी उसने हाथ बढ़ाया।
उसके नरम, गरम हाथ ने मेरे लंड को पकड़ा। धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगी। "कैसा लग रहा है?" उसने पूछा। "बहुत अच्छा... और तेज कर..."
वो झुकी और अपने गुलाब जैसे होंठों से मेरे लंड के टॉप को चूम लिया। "उम्म्म..." फिर धीरे-धीरे मुंह में लेने लगी। गर्म, नम मुंह। वो आधी तक ले पाई। फिर ऊपर-नीचे करने लगी, कभी हाथ से सहलाती, कभी सिर्फ जीभ घुमाती।
"फck... राशि... तू बहुत अच्छा चूस रही है..." मैं कराह उठा।
वो मेरी तारीफ सुनकर और जोश में आ गई। अब पूरी कोशिश कर रही थी मुंह में ज्यादा लेने की। उसके थूक से मेरा पूरा लंड चमक रहा था।
कुछ देर बाद मैंने उसे रोका। अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था।
मैंने उसे बेड पर लिटाया। उसके दोनों पैर फैलाए। उसकी चूत अब पूरी तरह भीगी और खुली हुई थी। मैंने लंड को उसके ऊपर रखा और धीरे-धीरे रगड़ने लगा।
"रितेश... अब मत तड़पा... डाल दे ना... प्लीज..." वो तड़प रही थी।
मैंने धीरे से दबाव डाला। सिर्फ टॉप अंदर गया। वो बहुत tight थी। "आह्ह्ह्ह... दर्द हो रहा है... धीरे..." उसकी आंखों में आंसू आ गए।
मैं रुका। उसके माथे को चूमा, होंठों को चूसा, स्तनों को सहलाया। जब वो थोड़ी relax हुई तो एक और जोर का धक्का दिया।
"उउउआआआह्ह्ह्ह!!! माँ... बहुत दर्द हो रहा है..."
मेरा लंड आधा अंदर चला गया था। उसकी चूत से हल्का खून भी निकला। मैं रुका रहा, उसे चूमता रहा। धीरे-धीरे उसका दर्द कम हुआ।
"अब... अब धीरे-धीरे कर..." उसने कहा।
मैंने शुरू किया — धीमी गति से अंदर-बाहर। हर थ्रस्ट के साथ वो सिसकार रही थी — "आह्ह... हां... गहरा... उफ्फ... रितेश... तेरे लंड ने मेरी चूत फाड़ दी... आह्ह्ह... और जोर से..."
धीरे-धीरे स्पीड बढ़ी। अब कमरे में चूत की चप-चप की आवाज और उसकी जोरदार moaning गूंज रही थी। "हां... फाड़ दे मेरी चूत... और तेज... उउउह्ह्ह... मैं तेरी हो गई... आआआह्ह..."
मैंने उसके पैर अपने कंधों पर रखे और गहराई से ठोकरें मारने लगा। उसके स्तन उछल रहे थे। मैं एक हाथ से उन्हें दबाता, दूसरे से क्लिटोरिस रगड़ता।
मेरी स्पीड अब और बढ़ चुकी थी। हर जोरदार धक्के के साथ राशि का पूरा शरीर हिल रहा था। उसके भरे हुए स्तन ऊपर-नीचे उछल रहे थे। मैं झुककर एक-एक करके दोनों निप्पल चूस रहा था, बीच-बीच में हल्का-हल्का काट भी रहा था।
"आआआह्ह्ह... रितेश... मार डालेगा... उफ्फ्फ... तेरे लंड ने मेरी चूत को पूरी तरह भर दिया... हां... और तेज... फाड़ दे आज..."
उसकी चूत अब बहुत गीली हो चुकी थी। हर थ्रस्ट पर "चप-चप-चप" की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। मैंने उसकी कमर पकड़कर और गहराई से चोदना शुरू किया।
कभी-कभी पूरा लंड बाहर निकालकर फिर एक झटके से अंदर ठोक देता।
राशि पागल हो गई थी। उसकी आंखें बंद, मुंह खुला, लार टपक रही थी। "उउउह्ह्ह... मैं फिर से आने वाली हूं... रितेश... साथ में... आह्ह्ह... हां... हां... हांआआआह्ह्ह!!!"
उसका दूसरा ऑर्गेज्म आया। उसकी चूत मेरे लंड को जोर-जोर से दबाने लगी। मैंने रुकने की बजाय और तेज गति से ठोके मारे। कुछ ही सेकंड बाद मेरा भी झड़ने वाला था।
"राशि... अंदर ही कर दूं?" "हां... भर दो अपनी राशि की चूत को... सब कुछ अंदर डाल दो... आआआह्ह..."
मैंने आखिरी कुछ जोरदार धक्के मारे और गहराई तक जाकर छोड़ दिया। मोटी-मोटी गर्म धाराएं उसकी चूत के अंदर फूट पड़ीं। हम दोनों एक साथ चीखे। उसकी चूत मेरे वीर्य से भर गई।
कुछ वीर्य बाहर निकलकर उसकी जांघों पर बहने लगा।
हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे। उसकी सांसें मेरी छाती पर पड़ रही थीं। मैं उसके बालों में उंगलियां फिरा रहा था। उसकी चूत अभी भी हल्के-हल्के सिकुड़ रही थी।
कुछ देर बाद राशि ने मुस्कुराते हुए कहा, "चल नहाते हैं... बहुत गंदा हो गया है सब।"
हम दोनों नंगे ही बाथरूम गए। शावर जलाया। गर्म पानी हमारे शरीर पर गिर रहा था। मैंने उसे दीवार से सटा दिया और फिर से किस करने लगा। मेरा लंड फिर से खड़ा हो चुका था।
राशि ने उसे हाथ में पकड़ा और धीरे-धीरे सहलाने लगी। "फिर से तैयार हो गया... लोभी कहीं का..."
वो घुटनों पर बैठ गई। शावर के पानी के नीचे मेरे लंड को मुंह में ले लिया। अब वो और जोर से चूस रही थी। पूरा लंड मुंह में लेने की कोशिश कर रही थी, गला तक। मैंने उसके बाल पकड़कर हल्का-हल्का मुंह चोदा। वो "ग्लक-ग्लक" की आवाजें निकाल रही थी।
"उम्म्म... तेरे वीर्य का स्वाद बहुत अच्छा है..." उसने लंड को चूमते हुए कहा।
मैंने उसे उठाया, दीवार के सहारे खड़ा किया और पीछे से घुसा दिया। "आह्ह्ह... इस पोजीशन में बहुत गहरा जा रहा है... उफ्फ... चोद मुझे... जोर से..."
पानी की धार के बीच मैं उसे पीछे से ठोक रहा था। उसके नितंब मेरे पेट से टकरा रहे थे। मैंने एक हाथ से उसके स्तन दबाए, दूसरे से क्लिटोरिस रगड़ा। वो फिर से चीखने लगी।
"हां... यही... आह्ह्ह... मैं फिर से झड़ने वाली हूं... रितेश... तेरे साथ जिंदगी भर चुदना चाहती हूं..."
इस बार हम दोनों फिर साथ ही झड़े। मैंने उसके अंदर ही छोड़ा।
नहाने के बाद हम टॉवेल से पोंछे और वापस बेड पर आए। अब थोड़ी देर आराम किया। फिर राशि मेरे ऊपर चढ़ गई। Cowgirl पोजीशन।
उसने मेरा लंड पकड़ा और अपनी चूत पर रखकर धीरे-धीरे बैठ गई। पूरा लंड अंदर चला गया। "आआआह्ह्ह... भर गया... अब मैं कंट्रोल करती हूं..."
वो ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन उछल रहे थे। मैं उन्हें दबा रहा था। वो तेज-तेज झुककर मुझे किस कर रही थी।
"रितेश... तेरे लंड के बिना अब नहीं रह पाऊंगी... मेरी चूत तेरी हो गई है... आह्ह... हां... और तेज..."
मैंने नीचे से जोर-जोर से धक्के देने शुरू कर दिए। वो चीख रही थी — "फाड़ दो... चोद दो अपनी राशि को... आआआह्ह्ह..."
तीसरी बार हम दोनों ने साथ में ऑर्गेज्म लिया।
रात काफी हो चुकी थी। हम थककर एक-दूसरे की बाहों में सो गए।
उसके बाद कुछ महीनों तक जब भी मौका मिलता, हम मिलते। कभी मेरे घर, कभी उसके। हर बार नया-नया तरीका ट्राई करते — कभी doggy, कभी 69, कभी शावर में, कभी उसके कमरे की खिड़की के पास खड़े होकर।
फिर वो अपनी पढ़ाई के लिए बाहर चली गई। बाद में उसकी पूरी फैमिली रायपुर शिफ्ट हो गई। मुलाकातें कम होती गईं, फिर धीरे-धीरे बातें भी बंद हो गईं।
अब कई साल बीत चुके हैं। लेकिन आज भी वो रात, उसकी सिसकारियां, उसके शरीर की खुशबू और उसकी चूत की गर्मी मुझे याद आती है।
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