चोदमपुर स्कूल: मैडम की चूत में शर्मीले टीचर का लंड!

Hindi Sex Story: शर्मीले टीचर को चोदमपुर स्कूल में मोहिनी व प्रिया मैडम ने स्टोर रूम में चूसा उसका लंड! फिर कारवाई गीली चूत में जोरदार चुदाई! और पिया वीर्य!


ये कहानी है उत्तर प्रदेश के एक देहाती इलाके में बसे गांव की है, गाँव का नाम था चोदमपुर। वो अपने फैलाओ के हिसाब से छोटा, शांत, हरे-भरे खेतों से घिरा हुआ गांव था।


चोदमपुर हाई स्कूल में कंप्यूटर टीचर की जगह खाली थी और जगह को भरने की जिम्मेदारी ली थी आरव ने। अरव, 25 साल का एक बेहद सुंदर, शर्मीला और सौम्य लड़का था ।


वो अपनी पढ़ाई पूरी कर के दिल्ली से आया था। गांव के रेहान सहन की तुलना में उसका चेहरा साफ, आँखें गहरी, शरीर एथलेटिक लेकिन स्वभाव नर्म था। वह हर किसी से इज्जत से बात करता था जो उसके घरेलू संस्कार थे। 


उसका परिवार गांव का रहने वाला था मगर आरव ज़्यादातर शहर में पला बढ़ा था तो गांव के लोगों से घुलना मिलना कम था फिर भी गाँव के लोग उसे देखकर मुस्कुराते और कहते, “अरे वाह, कितना संस्कारी लड़का है!” 


स्कूल में इंटरव्यू के बाद प्रिंसिपल ने तुरंत ही उसे जॉब दे दी। “बेटा, तुम जैसे लड़के आजकल कम ही मिलते हैं। स्कूल में रहो, बच्चों को अच्छे से पढ़ाओ।” कह कर उन्होंने आरव को अपने यहां रख लिया।


पहले दिन ही अरव को अहसास हुआ कि यह स्कूल कुछ अलग था। 


खासकर यहां की महिला टीचर्स की जिस्मानी बनावट शहर की लड़कियों की तुलना में बहुत मादक थी हर टीचर के चूंचे इतने मोटे की कपड़े फाड़ने को तैयार थे गांड़ भी किसी गुब्बारे से कम नहीं लगती थी।


सबसे पहले उससे मिलीं प्रिया मैडम – 28 साल की भरे पूरे बदन वाली औरत थी उसकी रंगत गोरी, मोटी-मोटी आँखें और मुस्कान में शरारत थी। फिर उनकी जूनियर थी राखी मैडम – थोड़ी मोटी लेकिन बेहद आकर्षक।


 सबसे खास थीं मोहिनी मैडम जो मैनेजमेंट देखती थी वो 27 साल की, लंबे काले बाल, गहरी भूरी आँखें, पतली कमर वाली महिला थी और एक ऐसी मुस्कान उनके पास थी जो किसी को भी पिघला दे।


मोहिनी गणित भी पढ़ाती थीं। उनकी आवाज़ में मिठास थी, लेकिन नज़र में एक अनकही चाहत हर किसी का ध्यान अपनी तरफ खींच लेती थी।


 उनका जिस्म किसी कारीगर के हाथों से तराशा हुआ लगता था 30 X 28 X 30। अरव हर किसी के साथ बहुत सम्मान से पेश आता। “जी मैडम”, “नमस्ते दीदी”, “थैंक यू” – उसकी हर बात में शालीनता झलकती।


 लेकिन महिला टीचर्स को अरव का यह शर्मीलापन और सुंदर चेहरा बेहद भाता मगर ये पसंद संस्कारों वाली पसंद नहीं थी। वे धीरे-धीरे उसके करीब आने लगीं।


शुरू में छोटी-छोटी बातें होती रहती जैसे “तुम्हारी कितनी GF है ?” या “ तुम बाथरूम में भी इसी तरह शर्माते हो ?”।


प्रिया मैडम क्लास के बाद अरव के कमरे में आकर कहतीं, “अरव भाई, ये कंप्यूटर का सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कर दो ना।”


कहते-कहते उनकी साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक जाता या वो खुद ही उसे हटा देती और वे जानबूझकर अरव के कंधे से सटकर खड़ी हो जातीं। 


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अरव शर्मा जाता, लेकिन मुस्कुराकर मदद कर देता।


आरव अपनी बगल में खड़ी मैडम की चूंचियों के गहरी खाई को चाहते हुए भी नज़र अंदाज़ नहीं कर पाता। जब आरव उनका काम कर देता तो वो अपने होठों को लगभग उसका गाल या होठ के करीब लाकर थैंक यू बोल देती। 


ये सब उस माहौल में इतना आसान इसलिए भी था की वहां कैमरा नहीं लगे थे। राखी मैडम तो और अधिक शरारती थीं। लंच टाइम में जब अरव चाय पीने स्टाफ रूम में आता, वे उसके पास बैठकर अपनी जाँघ अरव की जाँघ से हल्के से सटा देतीं। 


“अरे अरव, तुम तो बहुत दुबले हो, खाना अच्छे से खाया करो,” कहकर वे अपनी उँगलियाँ उसके हाथ पर फेरतीं कभी लन्ड के पास दबाकर उसकी सेहत पर प्यार भरा ताना मारती।


लेकिन सबसे ज्यादा आकर्षित थीं मोहिनी मैडम। वे अरव को देखते ही एक अनोखी सी चमक उनकी आँखों में आ जाती। ये Free Hindi Sex Kahani आप Garam kahani पर पढ़ रहे है।


उनकी क्लास आमने सामने लगा करती थी इसलिए आते जाते रास्ते में टकराना आम था। स्कूल के गलियारे में जब वो मिलते तो वे जानबूझकर इतने पास से गुजरतीं कि उनकी साड़ी का किनारा अरव के शरीर को छू जाता। 


कभी वे झुककर कुछ उठातीं तो उनकी ब्लाउज का गला खुल जाता और अरव की नज़र बचते-बचते भी उनके गुलाबी चोली पर पड़ जाती जिसमें मोटी मोटी चूंची छुपी होती थी।


अरव शर्मा पूरा दिन अपने साथ होते स्वभाव से शर्मा जाता, या नज़रें झुका लेता, लेकिन दिल में एक अनजानी गर्माहट महसूस करता हालांके था तो वो मर्द ही।


मोहिनी को अरव का यह शर्मीला व्यवहार बेहद पसंद आता। वे सोचतीं, “कितना प्यारा है ये। इतना सम्मान देता है, फिर भी उसकी आँखों में छुपी हुई चाहत साफ दिखती है।”


 एक दिन छुट्टी के बाद स्टाफ रूम से निकलते हुए आरव जब जा रहा था तो अचानक मोहिनी और राखी मैडम समान लाते हुए उससे टकरा गई दोनों की साड़ी आपस में उलझ गई और वो आरव के ऊपर गिर गई।


कुछ ही पल में दोनों औरतों के मादक जिस्म वाली चूंचियों ने आरव के चेहरे को दबा दिया था, आरव के हाथ उनके पेट पर दब गए थी और उंगलियां चूत पर रुक गई थी।


 आरव ने हिलने की कोशिश करी तो चूत पर हलचल हो गई, दोनों टीचर को ये मौका नहीं खोना था उन्होंने “आगाह! ओह लग गई री ।


बोलकर दर्द का नाटक करा और अपनी आधी खुली चूंची आरव के चेहरे पर मसली।इसके बाद मोहिनी मैडम के साथ आरव थोड़ा खुल गया था , धीरे-धीरे दोनों के बीच बातें बढ़ने लगीं। 


शाम को स्कूल के कंप्यूटर लैब में अरव अकेला काम करता तो मोहिनी आ जातीं वो एक चुदासी आवाज़ में कहती - “अरव, मुझे भी कंप्यूटर सीखना है। थोड़ा सिखा दो ना,” कहकर वे उसके बगल में कुर्सी खींचकर बैठ जातीं। 


जब आरव कुछ समझता तो वो चेहरा उसकी गर्दन के पास ले लेती और उनकी साँसें अरव के गालों को छूतीं। अरव का दिल तेज़ धड़कने लगता, लेकिन वह कुछ नहीं कहता था क्योंकि उसे भी मज़ा मिलता था। 


एक दिन मोहिनी ने हिम्मत करके कहा, “अरव, तुम बहुत अच्छे हो। गाँव के लड़के तो बस छेड़छाड़ करते हैं, तुम तो बात भी इज्जत से करते हो। मुझे तुमसे बाते कर के बहुत अच्छा लगता है।”


अरव हैरान हो गया। उसने शर्मा कर कहा, “मोहिनी दी... मैं... मैं भी आपको बहुत respect करता हूँ। आप बहुत सुंदर और समझदार हैं।”


मोहिनी मुस्कुराईं और बोली “दी नहीं, बस मोहिनी। और respect के साथ-साथ... थोड़ी सी चाहत भी रख सकते हो ना?”


उस दिन के बाद दोनों के बीच एक अनकही रोमांटिक केमिस्ट्री बन गई। वे एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराते, छोटी-छोटी बातों में इशारे होते। ये Teacher Sex Story आप Garam kahani पर पढ़ रहे है।


 मोहिनी अरव के लिए खास लंच बनाकर लातीं। अरव उन्हें नई-नई कंप्यूटर ट्रिक्स सिखाता इसी बीच में दोनों ने एक दूसरे के जिस्म भी सहलाना शुरू कर दिए थे, कंप्यूटर लब में मैडम अपनी तंग आरव के ऊपर रखकर काम करती थी।


फिर एक दिन...


स्कूल में वार्षिक परीक्षा का समय था। सब टीचर्स व्यस्त थे।


मोहिनी ने अरव को व्हाट्सएप पर मैसेज किया – “अरव, वॉशरूम के पास वाले स्टोर रूम में आना। मुझे तुमसे जरूरी बात करनी है। अकेले में।”


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अरव का दिल धड़कता सा रह गया।


वह थोड़ा घबराया, लेकिन मोहिनी की बात मानकर स्टोर रूम की तरफ चला गया। जैसे ही वह अंदर घुसा, मोहिनी ने दरवाजा बंद कर दिया और चिटकनी लगा दी।


रूम में सिर्फ एक छोटी सी खिड़की से हल्की रोशनी आ रही थी।


मोहिनी अरव की तरफ मुड़ीं। उनकी आँखों में शर्म थी, लेकिन साथ ही गहरी चाहत भी।


“अरव... मैं बहुत दिन से तुम्हें देख रही हूँ। तुम्हारा शर्मीला स्वभाव, तुम्हारी इज्जत, तुम्हारा सुंदर चेहरा... सब मुझे पागल कर देता है।”


 उनकी आवाज़ काँप रही थी। उसकी सांसे इतनी तेज़ थी के चूंची फूलती और बैठती साफ पता चल रही थी। अरव भी अब खुद को रोक नहीं पा रहा था।


 “मोहिनी... मुझे भी तुम बहुत अच्छी लगती हो। लेकिन...”मोहिनी ने एक कदम आगे बढ़ाया। “कोई लेकिन नहीं। आज मैं तुम्हें अपना सब कुछ देना चाहती हूँ। अगर तुम भी चाहते हो तो , मेरे पास आओ।”


उसने धीरे से अपनी साड़ी का पल्लू सरकाया अपनी मोटी जिस्मानी सुंदरता को आरव के सामने परोस दिया। फिर ब्लाउज के हुक खोलने लगी। एक-एक करके उसके कपड़े उतरते गए।


मोहिनी अब पूरी तरह नंगी खड़ी थी। उसका गोरा शरीर, गुलाबी चुचियाँ, पतली कमर और मुलायम जाँघें – सब अरव के सामने थे।


अरव की साँसें तेज हो गईं। वह एक पल को स्तब्ध रह गया। फिर धीरे से बोला, “मोहिनी... तुम बहुत खूबसूरत हो।” मोहिनी पास आई। ये Antarvasna Sex Kahani आप Garam kahani पर पढ़ रहे है।


उसने अरव का हाथ पकड़कर अपनी और छाती पर रख दिया वो उसकी उंगली को चूमकर निप्पल पर दबाने लगी। “छूओ ना... मुझे तुम्हारे हाथों की गर्माहट चाहिए।” बोलते हुए उसने एक बेबसी वाली “अआआह!” मुंह से निकाली।


अरव ने पहली बार मोहिनी को छुआ। उसके हाथ काँप रहे थे, लेकिन धीरे-धीरे वह मोहिनी के नरम स्तनों को सहलाने लगा।


मोहिनी की आँखें बंद हो गईं! “हम्म... अरव... कितना अच्छा लग रहा है, उफ्फ दबाओ मुझे।” बोलकर मोहिनी उसका हाथ सहलाने लगी।


फिर मोहिनी ने अरव की शर्ट के बटन खोलने शुरू किए। उसका मजबूत सीना, उसके पेट की लकीरें – सब देखकर मोहिनी का दिल और तेज धड़का। वो अपनी ज़ुबान से सूखे होठों को तर करने लगी।


वह अरव के शरीर से चिपक गई। उसके नंगे स्तन अरव की छाती से रगड़ खा रहे थे।


आरव ने मोहिनी के चेहरे को पकड़ा और उसके नाजुक हाथों पर अपने होठ रख दिए, मोहिनी ने आरव के कंधे पकड़कर अपने होठों से ज़ोर लगाकर होठ चूमे, मोहिनी बेहद प्यासी थी ।


उसने आरव के बाल अपने खींचकर उसके मुंह में जीभ डाल दी आरव अपने होठों से जीभ को दबाकर रस चूस रहा था। फिर मोहिनी ने उसके लन्ड को दबाकर कहा, “अरव... मुझे तुम्हारा लन्ड चाहिए।”


मोहिनी ने शर्माते हुए लेकिन सीधे कहा और फीस होठों को पीने लगी। अरव ने मोहिनी को दीवार से सटाकर चूम लिया। पहली चुम्बन गहरी और लंबी होती जा रही थी। 


दोनों की जीभें एक-दूसरे से खेल रही थीं। मोहिनी ने नीचे हाथ डालकर अरव की पैंट का बटन खोला और उसका सख्त हो चुका लन्ड को बाहर निकाल लिया।


“वाह... कितना मोटा और सुंदर है।” मोहिनी ने मुस्कुराते हुए कहा और उसे धीरे-धीरे सहलाने लगी।


अरव अब पूरी तरह रोमांचित हो चुका था। उसने मोहिनी को उठाकर स्टोर रूम की पुरानी टेबल पर लिटा दिया। मोहिनी की जाँघें फैली और टांगे खुलती हुई थीं आरव देख रहा था। उसकी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। 


अरव घुटनों के बल बैठ गया और मोहिनी की चूत को चूमने लगा। “आह्ह्ह... अरव... ओहह्ह्ह्ह! हाँ... वहाँ... बहुत अच्छा लग रहा है...अआआह!” मोहिनी कराह रही थी। उसकी उँगलियाँ अरव के बालों में फँसी हुई थीं। 


कुछ देर तक चूत चाटने के बाद अरव उठा। उसने अपना लन्ड मोहिनी की चूत पर रगड़ा। मोहिनी ने खुद अपनी जाँघें और फैलाईं और बोली, “अंदर डालो ना... मुझे तुम्हारी जरूरत है। चोदो मुझे आरव।”


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अरव का लन्ड धीरे से अंदर घुसा। मोहिनी की चूत तंग और गर्म थी। दोनों एक साथ कराह उठे।


“आह्ह... मोहिनी... कितनी टाइट हो तुम...ओहह्ह्ह्ह!“हाँ अरव... पूरा डालो... हम्ममम! उन्ह्ह्ह्ह, मुझे चोदो.. आगाझाह ! प्यार से... इज़्ज़्ह्ह मुझे अपना बना लो आज।”


अरव ने धीमी गति से चुदाई शुरू की। आरव धीरे मगर ताकतवर झटके लगा रहा था और हर झटके के साथ मोहिनी की चुचियाँ हिल रही थीं। वह अरव की पीठ पर नाखून गड़ा रही थी।


दोनों एक-दूसरे को चूमते, काटते, सहलाते रहे और चुदाई मचाते रहे। धीरे-धीरे दोनों की चुदाई की रफ्तार बढ़ी। अरव अब जोर-जोर से मोहिनी को चोद रहा था। स्टोर रूम में सिर्फ उनकी कराहें और शरीरों के टकराने की आवाज़ गूँज रही थी।


पूरे कमरा अआआह! ओहह्ह्ह्ह, हम्ममम।। ओहह्ह्ह्ह आगाह, करो और तेज़ आगाह ओह मां चुद गई आगाह! की आवाज़ आ रही थी


“अरव... मैं आने वाली हूँ... हाँ... और तेज...” मोहिनी बोली। ये Desi Sex Kahani आप Garam kahani पर पढ़ रहे है 


मोहिनी का शरीर धीरे धीरे तन गया। वह जोर से झड़ गई। उसकी चूत अरव के लन्ड को कसकर पकड़ रही थी। अरव भी अब किनारे पर था। “मोहिनी... मैं भी...आअआअह!”


“अंदर ही डाल दो... मुझे तुम्हारा गर्म पानी चाहिए...” आरव ने लन्ड को निकलना चाहा मगर मोहिनी ने अपने पर उसकी कमर पर बंध लिए और चूत पर दबा लिया।


अरव ने आखिरी जोरदार धक्का मारा और मोहिनी की चूत के अंदर अपना सारा वीर्य उड़ेल दिया। दोनों एक साथ चरम सुख को प्राप्त हुए।


कुछ देर तक वे ऐसे ही लिपटे रहे। अरव मोहिनी के माथे पर प्यार भरा चुंबन लेता रहा। मोहिनी उसकी छाती पर सिर रखे मुस्कुरा रही थी।


“अरव... यह सिर्फ शारीरिक नहीं था। मुझे तुमसे प्यार हो गया है।” अरव ने उसकी आँखों में देखा, “मुझे भी मोहिनी। आज से तुम मेरी हो।” उस दिन के बाद दोनों का रिश्ता और गहरा होता गया। 


स्कूल में वे बाहर से सामान्य रहते, लेकिन अकेले में एक-दूसरे को पूरी तरह से प्यार करते। कभी लैब में चुदाई का खेल खेलते, कभी मोहिनी के घर पर, कभी खेतों में छुपकर – उनका रोमांस जारी रहा करता।


अरव अब गाँव में सिर्फ टीचर नहीं था, बल्कि मोहिनी का प्रेमी भी था। और मोहिनी ने पाया था अपना वो शर्मीला, सम्मान देने वाला, लेकिन बेड पर पूरी तरह से मर्दाना प्रेमी। दोनों की कहानी गाँव के छोटे से स्कूल से शुरू होकर एक खूबसूरत रोमांटिक सफर बन गई।


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